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इंडिया-सिंगापुर बिजनेस शिखर सम्मेलन सिंगापुर में महाभोज में विदेश मंत्री द्वारा नए भारत पर टिप्पणी (09 सितंबर, 2019)

सितम्बर 09, 2019

श्री टेयो ची हीन, वरिष्ठ मंत्री एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए समन्वय मंत्री,
मेरे सहयोगी मंत्री, हरदीप सिंह पुरी,
श्री राजेन्द्रनाथ, आंध्र प्रदेश सरकार में मंत्री,
कैप्टन दिव्यशंकर मिश्रा, उड़ीसा सरकार में मंत्री
उच्चायुक्त, जावेद अशरफ,

देवियों एवं सज्जनों,


दक्षिण-पूर्व एशिया की नब्ज को महसूस करने और इसके ढांचागत परिवर्तन को दिशा देने वाली ताकतों को समझने के साथ-साथ दोस्ती की गर्मजोशी के लिए सिंगापुर लौटना मेरे लिए हमेशा ही एक सुखद अहसास रहा है।

नए भारत के बारे में बोलने से पहले मैं नए उच्चायुक्त के बारे में बोलना चाहता हूं जो एकदम नए भी नहीं हैं। आप सभी जावेद को अच्छी तरह से जानते हैं। आप सभी जानते हैं कि वह एक असाधारण राजनयिक हैं। उन्होंने वास्तव में भारत के प्रोफाइल को ऊंचा उठाया है, लेकिन आज मैंने जावेद का एक ऐसा पक्ष देखा, जो मेरे लिए भी नया था, कोरियोग्राफर जावेद, फोटोग्राफर जावेद, कलात्मक भावना वाले जावेद, जिनमें वास्तव में एक असाधारण प्रदर्शन छिपा था और मैं आप सभी से कहूंगा कि इस असाधारण घटना के लिए जावेद और उनकी टीम को धन्यवाद देने के लिए मेरे साथ आएं।

पिछले दस वर्षों में, जबसे मैंने अपना कार्यकाल यहाँ समाप्त किया है, प्रत्येक यात्रा मुझे यह भी दिखाती है कि भारत और सिंगापुर ने इस सफ़र को कितनी अच्छी तरह से पूरा किया है।

हमारी रणनीतिक साझेदारी संदेह, संकोच, प्रतिद्वंद्विता या दावों की बाधाओं से मुक्त है। हम न तो सिद्धांतों के बारे में बहस करते हैं और न ही हमें एक-दूसरे को बार-बार अपने इरादों को आश्वस्त करने की आवश्यकता है। दरअसल, हमारी एकमात्र चुनौती शालीनता से बचना है; हमारा एकमात्र दायित्व उच्च महत्वाकांक्षाओं को निर्धारित करना और उन्हें प्राप्त करने के लिए खुद को समर्पित करना है।

जैसे-जैसे दुनिया वैश्विक व्यवधानों और बदलावों के दौर में प्रवेश कर रही है, वैश्विक संस्थानों का महत्त्व कम होता जा रहा है, बहुपक्षवाद कमजोर हो रहा है और नियम-आधारित क्रम पर दबाव बढ़ता जा रहा है, भारत-सिंगापुर रणनीतिक साझेदारी की अनिवार्यता पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई है।

यह वो संदेश है जो आज सुबह विदेश मंत्री विवियन बालकृष्णन और टॉमी कोह के साथ हुई मेरी बातचीत में स्पष्ट रूप से सामने आया।

यह बिजनेस और इनोवेशन समिट हमारी साझेदारी की भावना का प्रतीक है। यहां हम इस साझेदारी के लिए ऊर्जा और उत्साह देखते हैं, मानव संसाधन की गुणवत्ता और विशेषज्ञता की गहराई जो हमारे लिए ताकत का स्रोत और नवाचार की शक्ति हैं जो हमारी साझेदारी को डिजिटल युग में आगे लेकर जाएगी।

वास्तव में, इस शिखर सम्मेलन का स्तर, विस्तार और गुणवत्ता नए भारत का प्रतिबिंब भी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का न्यू इंडिया, जैसा कि जावेद ने कहा है कि इसकी अर्थव्यवस्था की दर से कहीं आगे है –प्रगति, निवेश, व्यापार, प्रति व्यक्ति आय - ये महत्वपूर्ण हैं, दोनों तरीके से- प्रगति के संकेतक के रूप में और लोगों का जीवन बदलने के साधन के रूप में।

यह शासन और हमारे लोगों में वास्तविक अंतर निर्माण को लेकर है।

निपुणता और उपलब्धियों की नई कहानियां तथा परिवर्तन एवं उद्यम की भावना के लिए अधीरता, छोटे शहरों और गांवों से निकल रही हैं।

आज का युवा अधिक व्यस्त है, अपने पर्यावरण के प्रति अधिक सचेत है, समाज में योगदान देने के लिए अधिक इच्छुक है, राष्ट्र निर्माण के लिए अधिक प्रतिबद्ध तथा दुनिया में सर्वश्रेष्ठ के साथ नए प्रयोग और प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम है।

महिलाएं अब मूक दर्शक नहीं, बल्कि बराबरी पर हैं- विकास की प्रक्रिया में भागीदारी और राष्ट्रीय गतिविधियों में- चाहे खेल हो या अंतरिक्ष, पुरुषों से अक्सर बेहतर हैं।

डिजिटल नेटवर्क देश भर में फैल रहा है और शहर और गांव के बीच की दूरी, अमीर और गरीब के बीच की दूरी को कम करते हुए हमें एकजुट कर रहा है।

पैन-इंडिया चेतना और महत्वकांक्षा के रूप में राष्ट्रीय सामंजस्य की भावना बलवती हुई है जो विविध पहचानों को स्वयं में समेट लेती है।

किसी कार्य का स्तर और आकार अब उसे पूरा करने में बाधक नहीं रहे। समस्याओं को घाव बन जाने की इजाजत अब नहीं है। कोई भी क्षेत्र, कोई समुदाय, कोई भी समूह आधुनिकता और प्रगति के हमारे लक्ष्य में पीछे नहीं रहेंगे।

जम्मू और कश्मीर राज्य के मामले में बेहतर प्रशासन और तेजी से विकास की मांगों ने परिवर्तन को प्रेरित किया है। अस्थायी कानूनों में संशोधन करने से वे पुल की बजाय बाधा बन गए थे।

पिछले कुछ वर्षों के दौरान, लोगों की मांग एक साफ, पारदर्शी, निर्णायक, उत्तरदायी और सक्रिय सरकार की रही है जो उन्हें मिली भी है।

डिजिटल प्रौद्योगिकी की शक्ति शासन और सार्वजनिक वितरण सेवाओं को बदल रही है और इसे अधिक नागरिक केंद्रित और भागीदारीपूर्ण बना रही है। इसने हमें उन समस्याओं और सपनों को भी पूरा करने की ताकत दी है जो कभी हमें असाध्य और असंभव दिखाई देते थे। आर्थिक प्रदर्शन राज्य स्तर पर भी राजनीतिक सफलता का निर्धारक बनता जा रहा है। और इस प्रतिस्पर्धी एवं सहकारी संघवाद की भावना से राज्य भी, संसाधनों, निवेश और रोजगार के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। केंद्र और राज्यों के बीच साझेदारी की एक नई भावना है जो भारत की प्रगति के लिए बहुत आवश्यक है।

विकास की कई पहल आज सफल हैं, क्योंकि वे अब केवल सरकारी पहल ही नहीं रह गई हैं बल्कि आम लोगों का आंदोलन बन चुकी हैं। लाखों लोगों ने स्वेच्छा से सब्सिडी वाले रसोई गैस के अपने स्वामित्व को छोड़ दिया, ताकि यह सुविधा गरीब वर्गों को मिल सके।

पिछले पाँच वर्षों की उपलब्धियाँ अपनी गाथा खुद सुनाती हैं।

2014 में, प्रधानमंत्री मोदी ने स्वच्छता को हर किसी तक पहुंचाने के लिए स्वच्छ भारत अभियान का आह्वान किया। आजादी के बाद से, गन्दगी में रहना ही जीवन की सच्चाई बन गयी थी, लेकिन पांच वर्षों में, हमने 9.6 करोड़ शौचालय बनाए हैं, जिससे पहले जहाँ 40% से भी कम आबादी शौचालय का प्रयोग कर पाती थी, वहीं आज 90% से अधिक लोगों की उस तक पहुँच है।

हमने 1.5 करोड़ किफायती ग्रामीण घरों का निर्माण किया है और 2 करोड़ और मकान बना रहे हैं; 1,95,000 किमी ग्रामीण सड़कों का निर्माण हुआ जो अब देश में 97% घरों को आपस में जोड़ती हैं; 8 करोड़ महिलाओं को मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन दिया गया; 20 करोड़ माइक्रो-क्रेडिट प्रदान किए, जिनमें से लगभग 75% महिलाओं को मिले।

और, हां, हमने 36 करोड़ नए बैंक खाते जोड़े हैं। ये केवल बैंक खाते नहीं हैं, बल्कि अवसर, पहचान और प्रतिष्ठा का भी स्रोत हैं। सरकार से सीधे लाभ हस्तांतरण के तहत 60 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक इन खातों में जा चुके हैं। लाखों किसान, छोटे व्यापारी और श्रमिक अब वृद्धावस्था पेंशन और बीमा से जुड़े हैं।

वित्तीय समावेशन में भारत की सफलता, 1.2 बिलियन लोगों की डिजिटल पहचान बनाना और सबसे परिष्कृत डिजिटल भुगतान अवसंरचना स्थापित करना वैश्विक तौर पर मान्यता पाने का विषय है। यह ऐसी व्यवस्था है जो उस व्यक्ति के लिए भी काम करता है, जिसके पास फोन नहीं है, लेकिन सिर्फ आधार है।

हमने दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य सेवा योजना, आयुष्मान भारत लॉन्च की, जो 50 करोड़ भारतीयों को चिकित्सा सेवा प्रदान करेगी। इसके बारे में सोचना भी दुस्साहस भरा लग रहा था; वित्त और क्रियान्वयन के स्तर पर हमारी क्षमता के बारे में उच्च स्तर की अनिश्चितता थी। लेकिन यह शासन, डिजिटल सिस्टम और लोगों की भागीदारी के बल पर तेजी से वास्तविकता बनती जा रही है।

कोई भी चीज भावनाओं में बदलाव या संभावनाओं के स्तर पर नए विश्वास को उस हद तक प्रदर्शित नहीं करती है जितनी कि हमारा नया राष्ट्रीय मिशन- प्रत्येक नल में पानी उपलब्ध कराना और 50% आबादी या 600 मिलियन से अधिक लोगों के घर तक पीने योग्य पानी को पहुंचाना।

अब इन्हें किसी ऐसे बनावटी विचार के रूप में खारिज नहीं किया जाता है जो केवल कागजों पर ही रह जाते हैं, बल्कि एक निर्धारित समय सीमा के भीतर इन्हें प्राप्त भी किया जाता है। आज सामूहिक राष्ट्रीय प्रयासों का विस्तार कई चीजों तक हो गया है- एकल उपयोग वाले प्लास्टिक को छोड़ना, रासायनिक उर्वरक से बचना, नकद भुगतान से डिजिटल भुगतान की ओर बढ़ना, एलईडी बल्बों का उपयोग करना, पानी का संरक्षण – वो सभी चीजें जिनसे आदतों में बदलाव लाया जा सके और सबसे जरूरी लोगों और सरकार के बीच साझेदारी हो सके। इसलिए, न्यू इंडिया कोई सरकारी परियोजना नहीं है, बल्कि समाज के सभी वर्गों के सपनों, ऊर्जा, अभियान, प्रतिभा, कड़ी मेहनत, कौशल, उद्यम और नवाचार पर आधारित एक राष्ट्रीय प्रयास है।

हमारे उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए आर्थिक विकास मायने रखता है। यह सरकार का प्रमुख सिद्धांत है और हमने 2024 तक 5 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य रखा है। इसे देखने के दो तरीके थे। एक, हम पाँच वर्षों में 2.0 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर एक दूसरी 3.0 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर वाली अर्थव्यवस्था में चले जाएं। इसलिए, हमारा लक्ष्य हमारी पहुंच से बाहर नहीं है। दूसरा, यह पहली बार है जब हम एक स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं। यह एक राष्ट्रीय मिशन की तरह है। और, यह अर्थव्यवस्था और समाज के प्रत्येक क्षेत्र में एक समान लक्ष्य के लिए एक साथ बढ़ने का आह्वान है।

यह एक ऐसी सरकार है जो साहसिक फैसलों से पीछे नहीं हटेगी। इसने केंद्र सरकार और 29 राज्य सरकारों की जटिल व्यवस्था तथा संसाधन-बाध्य वातावरण में प्रतिस्पर्धी आर्थिक मांगों को ध्यान में रखते हुए, जीएसटी को लागू किया जो दशकों में सबसे बड़ा कर सुधार है। यह सरकार 2014 के बाद से 1450 से अधिक और तीन महीने पहले सत्ता में आने के बाद से 60 कानूनों को निरस्त कर चुकी है। इसने विवादित परिसंपत्तियों की समस्या को हल करने तथा धन एवं अर्थव्यवस्था की उत्पादक क्षमता को बनाए रखने के लिए इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड प्रस्तुत किया है जो एक त्वरित, पारदर्शी और बाजार संचालित दृष्टिकोण है। लेकिन यह सरकार और भी बहुत कुछ कर रही है। यह कॉर्पोरेट क्षेत्र में सुधार कर रही है जो इसे और अधिक जवाबदेह और जिम्मेदार बनाता है। लंबे समय में, इसे अधिक साफ़-सुथरा, ज्यादा प्रभावी और अभिनव बनाया जाएगा। साथ ही, सरकार बैंकों की ऋण की वसूली की क्षमता में सुधार करेगी जिससे अर्थव्यवस्था का इंजन चालू बना रहेगा।

यह विश्वास नई पीढ़ी के उद्यमियों से भी उपजा है- मिथकों को तोड़ने वाली, अलग मनोवृत्ति की, हमेशा कुछ नया करने के लिए प्रतिबद्ध, खुद को विश्व मानकों के अनुसार बनाने और स्टार्टअप शुरू करने तथा उसका समर्थन करने के लिए उत्सुक। इस हॉल के बाहर आज भारत के लगभग 60 स्टार्टअप प्रदर्शनी में हैं। कुछ तो स्कूल और कॉलेजों से हैं। स्कूलों में सरकार द्वारा स्थापित सबसे उन्नत तकनीक और उपकरणों के साथ 5000 से अधिक अटल टिंकर लैब्स भारत के भविष्य के अन्वेषकों को जन्म दे रहे हैं। भारत के आकार, पैमाने और गति वाले देश में यह महत्वपूर्ण है। और, यह भारत में बुनियादी ढांचे के परिदृश्य को बदल रहा है, राष्ट्रीय राजमार्गों से लेकर विमानन और रेलवे तक, बंदरगाहों से अंतर्देशीय जलमार्गों तक, पावर ग्रिड से डिजिटल नेटवर्क तक।

जैसा कि हम नई अर्थव्यवस्था में छलांग लगा रहे हैं, भारत आज अक्षय ऊर्जा के लिए सबसे तेजी से बढ़ता बाजार है और इसके पास दुनिया में सबसे सस्ती डेटा लागत है। इसने परियोजनाओं के स्तर पर हमारे अपने विश्वास को भी बदल दिया है कि अब हम उन्हें अपना सकते हैं और निष्पादित भी कर सकते हैं। और, जैसे-जैसे हम भारत के लिए एक शहरी सदी की ओर बढ़ रहे हैं, शहरीकरण पर ध्यान बढ़ रहा है, आर्थिक अवसर और चुनौती तथा पर्यावरण की चिंता के रूप में, क्योंकि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। फिर भी, नए भारत का सबसे उत्साहजनक संकेत है कि स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता पर नए तरीके से जोर दिया जा रहा है और अब तो बुनियादी अनुसंधान पर भी। यह कुछ समय से पाइपलाइन में था, क्योंकि हमने विस्तार पर अधिक ध्यान दिया था और इसे तेजी से राज्य के निर्देशों के अधीन लाया था।

जिस तरह न्यू इंडिया अपने सभी लोगों के जीवन में वृद्धि, समृद्धि और परिवर्तन चाहता है, उसी तरह वह एक मजबूत, सुरक्षित और एकजुट भारत भी चाहता है जो आत्मविश्वास के साथ अपनी चुनौतियों का सामना कर सके, दुनिया के साथ समान शर्तों पर मिल सके और अपनी जिम्मेदारी और भूमिका को पूरा कर सके। और, एक अधिक व्यस्त और सक्रिय भारत वास्तव में इन उम्मीदों पर खरा उतर रहा है। यह एक ऐसा देश है जो अपनी ताकत के साथ खुद का बचाव करने के लिए तैयार है, लेकिन अपने बहुलवादी और समावेशी लोकाचार और लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर दुनिया के साथ भी संबंध भी रखेगा। हमने अपने बचाव के लिए आतंकवाद और जमीनी परिस्थितियों को बदलने के एकतरफा प्रयासों के खिलाफ दृढ इच्छाशक्ति का प्रदर्शन किया, जो हमारी सुरक्षा पर एक अपरिवर्तनीय प्रभाव डाल सकता है।

हमारे मानवीय प्रयासों में भी हमारी नई निर्णायक क्षमता दिखाई देती है। जब अप्रैल 2015 में नेपाल में विनाशकारी भूकंप आया था, तो बचाव और राहत सामग्रियों के साथ हमारे विमान कुछ ही घंटों में उड़ान भरने लगे थे। जब यमन में युद्ध छिड़ा, तो हमारे नौसैनिक जहाजों ने 48 देशों के नागरिकों को बाहर निकाला। यह जलवायु परिवर्तन को लेकर हमारे नए दृष्टिकोण में भी परिलक्षित होता है। हम रक्षात्मक बने रहने से आगे बढ़कर एजेंडा सेट करने लगे हैं, और हमने फ्रांस के साथ मिलकर नए वैश्विक अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का निर्माण किया है। यह जलवायु परिवर्तन और इसके प्रभाव से निपटने की वैश्विक संभावना से संबंधित है, जो न केवल वैश्विक समझौते का हिमायती होने के लिए है बल्कि एक सस्ता समाधान भी रखता है।

महाद्वीपीय सुरक्षा चुनौतियों पर लंबे समय तक ध्यान केंद्रित करने के लिए, हमने अब अपना फोकस हमारे समुद्री क्षेत्र की ओर किया है जिसने हमारे इतिहास को आकार दिया है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। हमने एक समृद्ध, सुरक्षित और समावेशी हिंद महासागर क्षेत्र के लिए एक नई दृष्टि व्यक्त की है। हमने अपने महत्वपूर्ण आर्थिक और सुरक्षा हितों की सीमाओं के साथ-साथ बढ़ती भू-राजनीतिक और भौगोलिक आर्थिक वास्तविकताओं के जवाब में इंडो पैसिफिक क्षेत्र के लिए अपने रणनीतिक भूगोल को फिर से परिभाषित किया है। आसियान क्षेत्र हमेशा इंडो पैसिफिक को लेकर हमारे दृष्टिकोण के केंद्र में रहेगा। यदि आसियान की एकता और केंद्रीयता बनी रहती है, तो यह सभी के हितों के अनुकूल होगा। जैसा कि आपने अभी-अभी सांस्कृतिक कार्यक्रम में देखा, भारत ने इस क्षेत्र में एक प्राचीन मार्ग की यात्रा की है।

संबंध स्वाभाविक हैं। जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था प्रगति कर रही है और हम अधिक बाह्य उन्मुख होते जा रहे हैं, इस क्षेत्र में हमारी उपस्थिति और प्रतिबद्धता और बढ़ती रहेगी। और, हम पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। पश्चिम एशिया में, हमने अतीत की कुछ कल्पित बाधाओं को हटा दिया है और एक ही समय में खाड़ी देशों, इजरायल और ईरान के साथ अपने संबंधों को परिवर्तित कर दिया है। अफ्रीका में, 18 नए दूतावासों के उद्घाटन और विकास परियोजनाओं पर गहन कार्यों के द्वारा लगातार उच्चस्तरीय यात्राएं हो रही हैं। महान शक्तियों की आपसी प्रतिद्वंद्विता के विघटनकारी परिणाम आज की बड़ी चुनौतियां हैं। हममें से कोई भी, बड़ा या छोटा, यह नहीं चाहता। इससे किसी को लाभ नहीं होगा। हम सभी प्रमुख शक्तियों के साथ स्वतंत्र संबंध बना रहे हैं, अपने हितों के बारे में स्पष्ट हैं और अपने सिद्धांतों के लिए प्रतिबद्ध हैं।

अंतरराष्ट्रीय कानून और मानदंडों का पालन, और बहुपक्षवाद के लिए समर्थन, हमारे दृष्टिकोण के मार्गदर्शक सिद्धांत बने रहेंगे। यह हमारे लिए भी आवश्यक है, क्योंकि हम भारत के राष्ट्रीय आर्थिक परिवर्तन का समर्थन करने के लिए- हमारी विदेश नीति के इन प्रमुख उद्देश्यों के लिए एक पूर्वकथनीय और स्थिर वैश्विक वातावरण चाहते हैं। यह बहुपक्षीय व्यापार शासन पर भी लागू होता है। भारत खुला रहेगा, लेकिन वो अपनी व्यापार व्यवस्था की शर्तों को परिभाषित करने की भी कोशिश करेगा जो उसकी ताकत और रुचि के अनुरूप हो, उसी तरह जैसे अन्य करते हैं। कुछ और भी है जो नया है। भारतीय प्रवासियों के साथ हमारा संबंध काफी गहरा हुआ है, जैसा कि विदेशों में, भारतीयों और अन्य लोगों को सेवाएं प्रदान करने की हमारी क्षमता से पता चलता है।

हर कोई जानता है कि सहायता अब बस एक ट्वीट की दूरी पर है। आज, हम एक फंसे हुए कार्यकर्ता की उतनी ही परवाह करते हैं जितनी कि विदेश में प्रताड़ित एक महिला की। साथ ही, हम अपने प्रवासी भारतियों, नागरिकों और अन्य से भी ये अपेक्षा करते हैं कि वे खुद को शरण देने वाले देशों में आदर्श निवासी बनें। हमारा संबंध सभ्यतागत पहचान की उच्च चेतना को दर्शाता है, लेकिन यह कभी भी हावी नहीं रहा, दुनिया के साथ हमारे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों में, पूर्व एशिया से पश्चिम एशिया तक। उदाहरण के लिए, हमने एशिया भर में पुराने बौद्ध लिंक की खोज की है जो शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए एक नए मार्ग को पुनर्जीवित कर सकते हैं। अंत में, मैं यह कहना चाहूंगा कि न्यू इंडिया जितना प्रगति के अधिक ठोस प्रतीकों के बारे में है उतना ही अमूर्त परिवर्तनों के बारे में भी है। यह अभिवृत्ति और व्यवहार में परिवर्तन के बारे में है, तो बुनियादी ढांचे, विनिर्माण और डिजिटल प्रौद्योगिकी में तेजी से विकास के बारे में भी है।

शासन को उस परिवर्तन का एक प्रमुख घटक होना चाहिए। और, यह हो रहा है - भ्रष्टाचार से निपटने, निर्णय लेने में सुधार करने, लोगों पर सरकार के बोझ को कम करने और हमारे नागरिकों के प्रति अधिक जवाबदेह बनने में। मेरा विश्वास कीजिये, नौकरशाही पहले से ही फर्क को महसूस कर रही है। चुनौतियां सरल नहीं हैं। लोगों की मानसिकता बदलने की तुलना में कानूनों और नियमों को बदलना आसान है। लेकिन, यह हो रहा है। इस नए भारत के दिल में आत्मविश्वास है - विश्वास जो समाज के सभी वर्गों में प्रवाहित हो रहा है। सिंगापुर की अपनी कहानी में भी प्रेरणा के तत्व हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मार्च 2015 में स्थापक पिता ली कुआन यू के अंतिम संस्कार के लिए यहां आए और भारत में सार्वजनिक शोक घोषित किया।

लेकिन, भविष्य हम दोनों से और अधिक मांगेगा। क्योंकि हममें बहुत कुछ साझा है, इतिहास में और दुनिया के लिए हमारी साझा दृष्टि में। और, जब हम एक-दूसरे के साथ अधिक काम करते हैं तो हम अपने क्षेत्र में और अधिक योगदान कर सकते हैं। यह भारत और सिंगापुर के लिए परिभाषित करने वाला एजेंडा होने जा रहा है क्योंकि हम भविष्य में एक साथ कदम आगे बढ़ा रहे हैं।

ध्यान देने के लिये धन्यवाद

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