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यूएनएचआरसी सत्र में सामान्य बहस के दौरान सचिव (पूर्व) द्वारा दिया गया राष्ट्रीय वक्तव्य

सितम्बर 10, 2019

अध्यक्ष महोदय,

हमने उच्चायुक्त के मौखिक अद्यतन को सुना है।
भारत एक प्राचीन सभ्यता है, जिसमें अपार और समृद्ध विविधता है। इसे दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने का श्रेय भी प्राप्त है। इस साल की शुरुआत में, पूरा विश्व, मानव इतिहास में सबसे बड़े लोकतांत्रिक मतदान-प्रक्रिया का गवाह था, जिसमें 900 मिलियन भारतीय मतदाता और एक मिलियन से अधिक मतदान केंद्र शामिल थे। लोकतंत्र के लिए हमारी प्रतिबद्धता अटल है, और इसकी सराहना विश्व स्तर पर की जाती है।

हमारा संविधान सर्वोच्च है और बिना किसी भेद के हमारे सभी नागरिकों को मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है । यह न्याय, स्वतंत्रता और समानता को सुरक्षित रखता है और सभी के बीच भाईचारे को बढ़ावा देता है। हमारी धर्मनिरपेक्ष राजनीति में हमारा विश्वास अडिग है।

हमारी स्वतंत्र न्यायपालिका इन मौलिक अधिकारों और स्वतंत्रता की संरक्षक हैं।

हमारा स्वतंत्र मीडिया, जीवंत नागरिक समाज और निष्पक्ष मानवाधिकार संस्थान समाज के सभी वर्गों के मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए एक प्रभावी संरचना प्रदान करते हैं।

अध्यक्ष महोदय,

हमारी संसद प्रगतिशील विधानों की एक श्रृंखला को अपना रही है। मानवाधिकार संस्थानों को पेरिस सिद्धांतों के अनुरूप और अधिक मजबूत बनाया गया है।

"सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास" के अपने आदर्श वाक्य की भावना के अनुरूप - जिसका अर्थ है कि हम सभी को अपने साथ लेकर चलेंगे और किसी को पीछे नहीं छोड़ेंगे, सरकार समाज के वंचित वर्गों के लिए सामाजिक-आर्थिक समानता और न्याय को बढ़ावा देने के लिए सकारात्मक कदम उठा रही है।

कल्याणकारी कार्यक्रम और योजनाएँ विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों, विकलांगों और समाज के और अन्य वंचित वर्गों के सशक्तिकरण के लिए बनाई गई हैं, जैसे कि - बेटी बचाओ बेटी पढाओ, जन धन, उज्जवला, स्वच्छ भारत, जल शक्ति, मेरी सरकार के असमानता को खत्म करने और मूल अधिकारों को सार्वभौमिक बनाने के दृढ़ संकल्प का प्रतिनिधित्व करती हैं।

भारत द्वारा अपने संविधान के ढांचे के भीतर हाल ही में किए गए वैधानिक उपाय यह सुनिश्चित करेंगे कि ये प्रगतिशील उपाय जम्मू और कश्मीर और लद्दाख में हमारे नागरिकों के लिए भी पूरी तरह से लागू होंगे। फलस्वरूप, संपत्ति के अधिकारों और स्थानीय निकायों के प्रतिनिधित्व सहित लिंग भेदभाव का अंत होगा। घरेलू हिंसा के खिलाफ किशोर अधिकारों और कानूनों का बेहतर संरक्षण होगा। शिक्षा, सूचना और कार्य के अधिकार अब लागू होंगे।

शरणार्थियों और वंचित वर्गों के खिलाफ लंबे समय का भेदभाव समाप्त हो जाएगा। ये निर्णय हमारी संसद द्वारा एक पूर्ण बहस के बाद लिया गया था जिसे टीवी पर प्रसारित किया गया और इसे व्यापक समर्थन मिला। हम इस बात को दोहराना चाहते हैं कि यह स्वायत्त निर्णय, संसद द्वारा पारित अन्य कानूनों की तरह, भारत के लिए पूरी तरह से आंतरिक है। कोई भी देश अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप स्वीकार नहीं कर सकता, निश्चित रूप से भारत भी नहीं।

चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद, जम्मू और कश्मीर का नागरिक प्रशासन बुनियादी सेवाओं, आवश्यक आपूर्तियों, संस्थानों के सामान्य कामकाज, गतिशीलता और लगभग पूर्ण कनेक्टिविटी सुनिश्चित कर रहा है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रतिबंधों को लगातार कम किया जा रहा है। सीमा पार आतंकवाद के विश्वसनीय खतरों के सामने हमारे नागरिकों की संरक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अस्थायी निवारक और एहतियाती उपायों की आवश्यकता थी।

अध्यक्ष महोदय,

आज, वैश्विक स्तर पर लोगों के जीवन और सुरक्षा के अधिकार की रक्षा के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की प्रतिबद्धता के लिए आतंकवाद एक गंभीर चुनौती है। यह निर्दोष जीवन को समाप्त कर रहा है और भय और अनिश्चितता फैला रहा है। जो लोग अपने नियंत्रण वाले क्षेत्र में किसी भी रूप में आतंकवाद को प्रश्रय, वित्त और समर्थन करते हैं, वे वास्तव में मानव अधिकारों का सबसे खराब उल्लंघन करते हैं। दुनिया में, विशेष रूप से भारत में, राज्य प्रायोजित आतंकवाद के अभ्यासियों की गतिविधियों के कारण बहुत नुकसान हुआ है और यह सामूहिक रूप से आतंकी समूहों और उनके प्रश्रयदाताओं के खिलाफ निर्णायक और ठोस कार्रवाई करने का समय है, जो जीवन के मौलिक मानव अधिकार के लिए खतरा पैदा करते हैं। हमें इस पर अवश्य आवाज उठानी चाहिए। मौन, आतंकवादियों को केवल प्रोत्साहित करता है। यह उनकी आक्रामक रणनीति को भी प्रोत्साहित करता है । भारत अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद और उनके प्रायोजकों के खिलाफ लड़ाई में मिलकर काम करने की अपील करता है।

अध्यक्ष महोदय,

भारत परिषद में मानवाधिकारों के संवाद को मूर्त रूप देने के लिए रचनात्मक दृष्टिकोण में दृढ़ विश्वास करता है। हमें वैश्विक स्तर पर लोगों के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा करने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए व्यावहारिक उपाय खोजने की आवश्यकता है।

हमें उन लोगों को उजागर करना चाहिए जो मानव अधिकारों की आड़ में दुर्भावनापूर्ण राजनीतिक एजेंडा के लिए इस मंच का दुरुपयोग कर रहे हैं। जो लोग अन्य देशों में अल्पसंख्यकों के मानवाधिकारों पर बात कर रहे हैं, वे अपने देश में इच्छानुसार उन्हें रौंद रहे हैं। वे पीड़ितों का रोना रोते हैं जब वे वास्तव में अपराधी होते हैं।

अध्यक्ष महोदय,

एक प्रतिनिधिमंडल ने मेरे देश के खिलाफ झूठे अभियोगों और मनगढ़ंत आरोपों की आक्रामक बयानबाजी के साथ एक चल वृतांत किया है। दुनिया को पता है कि यह मनगढ़ंत कथा वैश्विक आतंकवाद के केंद्र से आती है, जहाँ वर्षों से रिंग लीडरों को शरण दी गई थी। यह देश ‘ वैकल्पिक कूटनीति’ के रूप में सीमा पार आतंकवाद का संचालन करता है। मेरा प्रतिनिधिमंडल जवाब देने के अधिकार का अलग से प्रयोग करेगा।

अध्यक्ष महोदय,

अब नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर पर। यह एक वैधानिक, पारदर्शी, गैर-भेदभावपूर्ण कानूनी प्रक्रिया है जो भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आदेशित और उनकी निगरानी में की गई है। इसके कार्यान्वयन की प्रक्रिया के दौरान लिया गया कोई भी निर्णय भारतीय कानून का पालन करेगा और भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप होगा।

अध्यक्ष महोदय,

अंत में, मैं दोहराती हूं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के एक जिम्मेदार सदस्य के रूप में, भारत मानव अधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने के लिए रचनात्मक दृष्टिकोण में दृढ़ विश्वास रखता है। हमारा मानना है कि राष्ट्रीय संस्थानों के शक्तिशाली होने पर ही मानव अधिकारों की रक्षा सबसे अच्छी होती है। हम 1.3 बिलियन लोगों के राष्ट्र के रूप में ऐसा करते हैं, जो लोकतंत्र के सर्वोच्च सिद्धांतों, सहिष्णुता और विविधता में एकता का प्रतीक है। हर जगह मानवाधिकारों के संवर्धन और संरक्षण के लिए काउंसिल के साथ सार्थक जुड़ाव के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की भारत इस अवसर पर पुनः पुष्टि करता है।

आपके द्वारा ध्यान देने के लिए धन्यवाद।

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