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मानवाधिकार परिषद के 42 वें सत्र में उत्तर के अधिकार के रूप में भारत का वक्तव्य

सितम्बर 10, 2019

अध्यक्ष महोदय,

आज अपने सभी वक्तव्यों में पाकिस्तान द्वारा तथ्यों को अत्यधिक गलत तरीके से पेश करने और झूठे वक्तव्य देने के कारण मुझे विवश हो कर इस मंच पर आना पड़ा है। यह उसके द्वारा अपनी क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने का एक बीमार-प्रच्छन्न प्रयास है। हम इस प्रचार को अस्वीकार करते हैं।

2. मैं परिषद को सूचित करना चाहता हूं कि अनुच्छेद 370 भारतीय संविधान का एक अस्थायी प्रावधान था। धारा 370 में हाल में किया गया संशोधन हमारे संप्रभु अधिकार के भीतर है और यह पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है।

3. यह निर्णय जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख में हमारे नागरिकों के नागरिक, राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अधिकारों के उपयोग की बाधाओं को हटाता है, विशेषकर उस क्षेत्र में महिलाओं, बच्चों और हमारे समाज के वंचित वर्गों के सम्बन्ध में।

अध्यक्ष महोदय,


4. हम इस मंच का राजनीतिकरण और ध्रुवीकरण करने के उद्देश्य से झूठे, मनगढ़ंत बयानों के साथ पाकिस्तान के उन्मादपूर्ण वक्तव्यों से हैरान नहीं हैं। पाकिस्तान को एहसास है कि हमारे हालिया फैसले ने भारत के खिलाफ सीमा पार आतंकवाद के निरंतर प्रायोजन में बाधाएं पैदा करके उसके पैरों के नीचे से जमीन हटा दी है। इस हताश मन: स्थिति में, पाकिस्तान के कुछ नेता 'जिहाद' का आह्वान करते हुए यहां तक बढ़ गए हैं कि जम्मू-कश्मीर और तीसरे देशों में हिंसा को प्रोत्साहित करने के लिए, 'नरसंहार' जैसी तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं, जबकि वे भी जानते हैं कि यह वास्तविकता से बहुत दूर है।

5. पाकिस्तान ने आज मानवाधिकारों पर वैश्विक समुदाय की आवाज के रूप में बोलने का ढोंग किया है। लेकिन दुनिया को मूर्ख नहीं बनाया जा सकता । पाकिस्तान का हिंसात्मक रिकॉर्ड स्वयं ही बोलता है। यह बयानबाजी, पाकिस्तान के उत्पीड़न और धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों - चाहे वह ईसाई, सिख, शिया, अहमदिया और हिंदू हों - के उन्मूलन से अंतर्राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित नहीं करेगी । यही कारण है कि पाकिस्तान अब अपने अल्पसंख्यकों के बारे में आधिकारिक आंकड़े प्रकाशित नहीं करता जैसा कि भारत करता है। अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने के लिए पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून के घोर दुरुपयोग के अच्छी तरह से लिखित प्रमाण है । आसिया बीबी, एक क्रिश्चियन महिला वर्षों से कैद थी। इसी तरह, अब्दुल शकूर, 82 वर्षीय अहमदिया, जो किताबों की बिक्री के लिए आतंकवाद-विरोधी अधिनियम के तहत कैद था। नाबालिग सिख लड़की जगजीत कौर के अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और शादी का हालिया मामला पाकिस्तान में महिलाओं की, विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों की, स्थिति का उदाहरण है। और आज, इस परिषद में पाकिस्तान दूसरों को मानवाधिकारों के बारे में बताने की धृष्टता कर रहा है जबकि वह स्वयं बार बार इनका घोर उल्लंघन करता है ।

अध्यक्ष महोदय,

6. जहाँ तक ओआईसी का संबंध है, इसे भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।

7. जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग रहा है, है और रहेगा। पाकिस्तान के नापाक मंसूबे कभी सफल नहीं होंगे क्योंकि भारत के लोग लोकतंत्र, सहिष्णुता और विविधता में एकता के हमारे मूल मूल्यों के साथ-साथ हमारी क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने के अपने दृढ़ संकल्प में एकजुट हैं। जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख की प्रगति और समृद्धि शेष भारत के साथ-साथ जारी रहेगी ।

8. यह विश्वसनीयता को एक चुनौती है कि पाकिस्तान, जो वैश्विक आतंकवाद का केंद्र है, मानवाधिकारों के मुद्दे पर अनाम देशों की ओर से बोलने का दावा कर रहा है। यह भूल जाता है कि आतंकवाद मानव अधिकारों के दुरुपयोग का सबसे खराब स्वरूप है।

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