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12 फरवरी 2020 को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में "अफ्रीका को समझना: निरंतरता एवं परिवर्तन" सम्मेलन के समापन सत्र में विदेश सचिव का भाषण

फरवरी 12, 2020

अध्यक्ष आई.आई.सी.श्री एन. एन. वोहरा,
डॉ. कपिला वात्स्यायन,
राजदूत के. रघुनाथ,
राजदूत एच.एच.एस. विश्वनाथन,
निदेशक आई.आई.सी.श्री के. एन. श्रीवास्तव,
महानुभाव, विशिष्ट अतिथि, देवियों और सज्जनों,


1. मैं यहां आकर खुद को सम्मानित महसूस कर रहा हूं और खुश हूं, विशेष रूप से "अफ्रीका को समझना: निरंतरता एंव परिवर्तन"सम्मेलन के विषय के रुप मेंकाफीउपयुक्त है। दो शब्द - निरंतरता एवं परिवर्तन - अफ्रीका के साथ भारत के ऐतिहासिक तथा वर्तमान जुड़ाव का योग है। मुझे इस समापन सत्र में बोलने के लिए आमंत्रित करने हेतुआई.आई.सी.को धन्यवाद देना चाहता हूं।

2. व्यक्तिगत स्तर पर, मैंने हमेशा महसूस किया है कि भारतीय राजनयिक को अफ्रीका का अनुभव होना चाहिए। मेरे मामले में, मैंने अफ्रीका में मेरी पोस्टिंग मेरे सबसे अच्छे अनुभवों में से एक दक्षिण अफ्रीका में मेरा प्रवास रहा। इसके बाद, मलावी, मोजाम्बिक के साथ मेरे सीधे जुड़ाव ने मुझे इन देशों के साथ असाधारण रूप से विविध तथा पारस्परिक रूप से लाभकारी संबंधों के बारे में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान की।

3. अफ्रीका महाद्वीप, अफ्रीका के कई राष्ट्र, अफ्रीका की बहुविध तथा विविध संस्कृतियां और जातीयताएं, इतिहास की शुरुआत से ही भारत से परिचित हैं। हमारे कुछ सबसे प्राचीन व्यापार मार्ग भारतीय उपमहाद्वीप से हार्ट ऑफ अफ्रीका तक माल और विचारों को पहुंचाना चिह्नित करते हैं। हालांकि राजनीतिक और हाल ही में आर्थिक तथा विकासात्मक आदान-प्रदान पर कई टिप्पणियां की गई है, हमारे संबंध के सांस्कृतिक पहलू असाधारण और सर्वश्रेष्ठ हैं। वास्तव में, मैं कह सकता हूं कि, हर भारतीय में थोड़ा बहुत अफ्रीका बसता है और अफ्रीका के हर हिस्से में थोड़ा बहुत भारत निवास करता है।

4. षोसा में एक कहावत है जिसे कई अफ्रीकी संस्कृतियों और भाषाओं द्वारा साझा किया जाता है: "उमांतु नेकुमुनुता एनबाबंटु" - या "कोई व्यक्ति व्यक्तियों के माध्यम से ही व्यक्ति बनता है"। यह हर भारतीय के लिए प्रतिध्वनि की तरह है। यह बताता है कि चाहे अफ्रीका के कई देशों और क्षेत्रों में, या भारत के कई राज्यों और क्षेत्रों में, समुदायों की शक्ति तथा एकजुटता की ताकत में विश्वास मौजूद है। यह साथी मनुष्यों और प्रकृति के साथ-साथ सहयोग और सद्भाव के सामान्य जुड़ावको दर्शाता है। यह अफ्रीकी तरीका है, और यह भारतीय तरीका भी है।

5. 20वीं शताब्दी में, भारतीय और अफ्रीकी अनुभव मुक्ति के लिए संघर्ष, उपनिवेशवाद और नस्लीय पूर्वाग्रह से मुक्ति, और हर पुरुष तथा महिला के अधिकारों के लिए संघर्ष समान थे। उसी आग और उसी परीक्षाओं ने हमें गढ़ाहै। भारत अफ्रीका में लोकतांत्रिक विकास और उपनिवेशवाद तथा रंगभेद के खिलाफ एकजुटताका दृढ़ और दीर्घकालिक समर्थक था। अफ्रीका की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष हमारे अपने संघर्ष जैसा था।

6. भारत ने महासभा के पहले सत्र में ही संयुक्त राष्ट्र के एजेंडे पर रंगभेद रखा था। एक गरीब तथाहाल ही स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में भी, हम रंगभेद के दौर वाले दक्षिण अफ्रीका में व्यापार शुरु करने से पहले सोचते नहीं थे। यह तब हुआ था, जब दक्षिण अफ्रीका के साथ व्यापार भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का 10 प्रतिशत के करीब था।

7. नामीबिया मुक्ति आंदोलन के दौरान, हमने 1986 में भारत के पहले एस.डब्ल्यू.ए.पी.ओ.दूतावास की मेजबानी की, जिसने नामीबिया की स्वतंत्रता हेतु अंतर्राष्ट्रीय समर्थन को बढ़ाने का कार्य किया। भारत ने अपनी स्वतंत्रता से पहले ही नाइजीरिया, घाना और मेडागास्कर के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए। 1955 में बांडुंग में क्षणिक एफ्रो-एशियन सम्मेलन केआयोजन में भारत सबसे आगे था।

8. अफ्रीका के साथ हमारी सबसे भावनात्मक कड़ी निश्चित रूप से महात्मा गांधी हैं, जिन्होंने इतने वर्षों तक दक्षिण अफ्रीका में काम किया और प्रयास किया। जैसा कि उन्होंने एक बार कहा था कि, "मेरा जन्म भारत में हुआ होगा लेकिन मेरा सृजन दक्षिण अफ्रीका में हुआ था।" महात्मा के इस "सृजन" के लिए भारत अफ्रीका का ऋणी हैं। हाल ही में, नेल्सन मंडेला, या मदीबा की शानदार जीवन और विरासत, जिसके लिए उन्हेंजाना जाता था, ने हमें प्रेरणा और उद्देश्य की भावना में एकजुट किया है।

9. जैसा कि अफ्रीका में स्वतंत्रता और लोकतंत्र की लहरें बहती हैं, भारत हमेशा कठिन जीत हासिल करने तथा शांति बनाए रखने में मदद करने हेतु मौजूदरहा। भारत कांगो, सोमालिया, लाइबेरिया, बुरुंडी और सूडान में संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में भाग लेने हेतु आगे आया। भारत ने अन्य के अलावा सोमालिया और माली में शांति हेतु अफ्रीकी संघ की पहल का समर्थन किया। हमारे बीच भारतीय संस्थानों के साथ-साथ अन्य देशों में प्रशिक्षण टीमों को नियुक्त करके अफ्रीकी सैन्य अधिकारियों को प्रशिक्षित करने की लंबी परंपरा है।भारत ने नाइजीरिया, इथियोपिया और तंजानिया जैसे देशों में रक्षा अकादमियों की स्थापना में मदद की है।

10. अफ्रीका को सम्मिलित करने हेतु भारत-प्रशांत क्षेत्र में संकट की स्थितियों में भारत की नीति पहली प्रतिक्रिया की रही है। 2019 में चक्रवात प्रभावित मोज़ाम्बिक की सहायता के लिए ऑपरेशन सहायता और मेडागास्कर में बाढ़ पीड़ितों को राहत देने हेतु ऑपरेशन वेनिला अफ्रीका में हाल के महीनों में मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (या एचएडीआर) मिशनों के हालिया उदाहरण हैं।

दोस्तों,

11. मैंने भारत-अफ्रीका संबंधों की "निरंतरता" - हमारे साझा इतिहास, हमारे आम राजनीतिक और विकासात्मक संघर्ष, उत्सव में और दुःख में और मानवीय संकटों में हमारी एकजुटता पर ध्यान केंद्रित किया है। यह स्थिर और सार्वकालिक हैं। अन्य देशों के आने से पहले भारत अफ्रीका के लिए, अफ्रीका के साथ और अफ्रीका में मौजूद और हम वहांबने रहेंगे, भले ही दूसरे छोड़ने का विकल्प चुन सकते हैं। फिर भी, इस निरंतरता के बीच, इसमें कुछ परिवर्तन भी है। हाल के वर्षों में भारत-अफ्रीका समीकरण में एक नई ऊर्जा है।

12. भारतीय और अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाएं दुनिया की सबसे गतिशील आर्थिक विकास की कहानियों में से दो कोदर्शाती हैं। दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं अफ्रीका में हैं और महाद्वीप की संयुक्त जीडीपी 2.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है। 2030 तक अफ्रीका दुनिया के लगभग एक चौथाई वर्कफोर्स और उपभोक्ताओं का प्रतिनिधित्व करेगा। 54 देशों के साथ, एक बिलियन लोग, एक युवा जनसांख्यिकीय और संसाधनों की अधिकता, अफ्रीका में बहुत कुछ मौजूद है, और हमारे ग्रह की आशाओं और जिम्मेदारियों का वहन कर सकता है।

13. लोकतंत्र और राजनीतिक स्थिरता का लाभ उठाते हुए, अफ्रीका के देशों ने अफ्रीकी महाद्वीपीय मुक्त व्यापार क्षेत्र (एएफसीएफटीए) जैसी पहल के माध्यम से आर्थिक एकीकरण की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं। लागू होने के बाद एएफसीएफटीए अफ्रीका के व्यापार स्तर को 52 प्रतिशत तक बढ़ा देगा और इसे दुनिया में सबसे बड़े तथा सबसे महत्वाकांक्षी आर्थिक स्थलों में से एक बना देगा। भारत इस रोमांचक स्थल का हिस्सा बनना चाहता है और भारत अफ्रीकी प्राथमिकताओं के अनुसार अफ्रीका को अपनी क्षमता का एहसास कराने में मदद करना चाहता है।

14. अफ्रीका के साथ भारत के संबंध भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन के तहत परामर्शी तथा उत्तरदायी तंत्र के उपयोग से उन्नत हुए हैं। 2015 का शिखर सम्मेलन एक उल्लेखनीय कार्यक्रम था जिसमें अफ्रीकी महाद्वीप के सभी 54 देशों ने भागीदारी की थी। इसने हमारे संबंधों में एक नई गतिशीलता का संचार किया है और मुझे यकीन है कि अगला शिखर सम्मेलन इसे और भी आगे बढ़ायेगा।

15. प्रधानमंत्री मोदी के विशिष्ट मार्गदर्शन में, पिछले पांच वर्षों में, हमारा राजनीतिक जुड़ाव पहले की तरह तेज हो गया है। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधान मंत्री के स्तर पर अफ्रीकी देशों में 34 निवर्तमान दौरे हुए हैं। इस महाद्वीप का एक भी देश ऐसा नहीं है जहाँ कोई न कोई केंद्रीय मंत्री न गया हो। भारत को विभिन्न द्विपक्षीय तथा बहुपक्षीय आयोजनों के लिए पिछले 5 वर्षों में लगभग 100 अफ्रीकी नेताओं की मेजबानी करने का सौभाग्य मिला है, जिसमें भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन के लिए 41 नेता शामिल हैं। कूटनीतिक जुड़ाव बढ़ाने हेतु अफ्रीका में कुल 54 देशों में से 47 में भारतीय मिशनों के लिए भारत अफ्रीका में 18 नए दूतावास खोल रहा है। 18 नए मिशनों में से नौ पहले ही खुल चुके हैं।

16. व्यापार और निवेश के आंकड़े उत्साहजनक हैं। पिछले वर्ष में भारत-अफ्रीका व्यापार का मूल्य 69 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जो 12 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि है। भारत द्वारा घोषित शुल्क मुक्त शुल्क वरीयता (डीएफटीपी) योजना ने भारत के कुल टैरिफ लाइनों का 98.2 प्रतिशत शुल्क मुक्त उपयोग करके अफ्रीकी देशों को लाभान्वित किया है। अड़तीस अफ्रीकी देश डीएफटीपी योजना से लाभान्वित हुए हैं। 54 बिलियन अमेरिकी डॉलर के संचयी निवेश के साथ भारत अफ्रीका का पांचवा सबसे बड़ा निवेशक बन गया है। भारतीय निवेश ने स्थानीय नागरिकों के लिए हजारों रोजगार सृजन किए हैं।

17. हमारे विकास सहयोग के संदर्भ में, पिछले एक दशक में भारत के एलओसीके दो-तिहाई से अधिक अफ्रीकी देशों को पेशकश की गई है। वर्तमान में 42 अफ्रीकी देशों में 189 परियोजनाएं, भारतीय एलओसी के तहत कार्यान्वित की जा रही हैं, जिनका मूल्य 11.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर है।इन परियोजनाओं में पेयजल योजनाओं से लेकर सिंचाई, सौर विद्युतीकरण, बिजली संयंत्र, ट्रांसमिशन लाइन, सीमेंट संयंत्र, प्रौद्योगिकी पार्क, और रेलवे कीअवसंरचना शामिल हैं।

18. हमारे सहयोग में सूडान और रवांडा में बिजली परियोजनाएं और बांध; तंजानिया में जल प्रशोधन; इथियोपिया में चीनी कारखाने; और मोज़ाम्बिक और स्वाज़ीलैंड में प्रौद्योगिकी पार्कशामिल हैं। हमने घाना में राष्ट्रपति भवन, गाम्बिया में नेशनल असेंबली की इमारत और हाल ही में नाइजर में महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर का निर्माण किया है, जिसका निर्माण केवल 14 महीनों में पूरा हुआ।

19. जैसा कि आप जानते ही होंगे कि अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन भारत में मुख्यालय द्वारा संचालित एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है। इसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा की तीव्र तथा बड़े पैमाने पर तैनाती के माध्यम से पेरिस जलवायु समझौते के कार्यान्वयन में योगदान करना है। आईएसए का उद्देश्य सौर ऊर्जा की बड़े पैमाने पर तैनाती में आने वाली बाधाओं के लिए सामूहिक प्रतिक्रिया प्रदान करने हेतु देशों को एक साथ लाना है - प्रौद्योगिकी, वित्त और क्षमता के मामले में। इसका लक्ष्य 2030 तक सौर ऊर्जा क्षमता के 1 टीडब्ल्यू (एक टेरावाट) को विकसित करने हेतु आवश्यक ट्रिलियन डॉलर जुटाना है।

20. आईएसए की सफलता में अफ्रीकी देशों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। आईएसए सचिवालय कई अफ्रीकी देशों में प्रत्येक में 500 मेगावाट के बड़े पैमाने पर सौर परियोजनाओं की स्थापना कर रहा है। यह कम से कम नौ अफ्रीकी देशों में सौर जल पंपिंग सिस्टम बनाने और छह में सौर प्रशिक्षण अनुप्रयोग एवं अनुसंधान केंद्र (स्टार-सी) स्थापित करने के लिए भी काम कर रहा है।

देवियो और सज्जनों,

21. डिजिटल मार्गों और ब्रिक तथा मोर्टार परियोजनाओं से परेभारत का अफ्रीका के साथ जुड़ाव अफ्रीका के लोगों, विशेषकर युवाओं की क्षमता को सुविधाजनक बनाने जैसे मानवीय संपर्क से है। आधी सदी में भारत की प्रमुख पहल - भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग या आईटीईसीने अफ्रीका के देशों को प्रशिक्षण और कौशल विकास की पेशकश की है।

22. 2015 में भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन में, भारत ने विशेष रूप से अफ्रीकी छात्रों तथास्कॉलर के लिए नई योजनाओं को शामिल करते हुए, पांच वर्षों की अवधि में छात्रवृत्ति की संख्या को दोगुना करने की घोषणा की। भारत में हजारों अफ्रीकी छात्र हैं और हमें इस बात पर बहुत गर्व है कि अफ्रीका के13 वर्तमान या पूर्व राष्ट्रपतियों, उपराष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों ने भारत के संस्थानों में अध्ययन किया है। प्रत्येक अफ्रीकी छात्र स्कॉलर के रूप में आते हैं, एक मित्र के रूप में रहता है और भारत के ऐम्बैसडर के रूप में लौटता है।

23. हमारे देश को इस तरह के संबंधों से जो सद्भावना मिलती है, वह अकल्पनीय है। इसके अलावा, ऐसे हजारों अफ्रीकी हैं जिन्हें भारतीय शिक्षकों ने उनके देशों में पढ़ाया है। वाशिंगटन, डीसी में, जहां मैंने कुछ सप्ताह पहले तक सेवा की है, इथियोपिया के प्रवासियों से मिलना असामान्य नहीं है जो अपने भारतीय स्कूल के शिक्षकों को याद करते हुए भावूक हो जाते हैं। अन्य देशों से भी ऐसे कई उदाहरण हैं। अफ्रीका के साथ हमारी साझेदारी रणनीतिक चिंताओं और आर्थिक लाभों से परे है। यह हमारे द्वारा साझा किए गए भावनात्मक बंधन और हमारे द्वारा महसूस की गई एकजुटता पर आधारित है।

24. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में युगांडा की संसद में अपने भाषण में स्पष्ट रूप से कहा है कि भारत की प्राथमिकता सिर्फ अफ्रीका नहीं है; भारत की प्राथमिकता अफ्रीकी हैं - अफ्रीका का हर आदमी, महिला और बच्चा है। मुझे यह बताना नहीं भूलना चाहिए कि अफ्रीका तीन मिलियन से अधिक भारतीय मूल के लोगों का घर है, जो पूरे महाद्वीप में बसे हुए हैं और अपने अंगीकृत स्वदेश में सार्थक योगदान करते हैं।

दोस्तों,

25. मैं अपना भाषण खत्म करते हुए, मैं इस आयोजन की मेजबानी और इन विचार-विमर्शों को प्रोत्साहित करने हेतुआई.आई.सी.को बधाई देता हूं। इससे भारत-अफ्रीका के संबंधों में एक नया बौद्धिक अध्याय जुड़ा है। उपनिवेशवाद के दौर से लेकर भूमंडलीकरण के युग तक,भारत और अफ्रीका ने एक साथ बहुत कुछ किया है। लेकिन अभी भी ऐसी कई चुनौतियाँ हैं जिनपर ध्यान देने की आवश्यकता है, अभी भी कई सीमाएँ हैं जिन्हें पार करने की आवश्यकता है। मदीबा के रूप में, महान नेल्सन मंडेला ने कहा था कि, "किसीऊंची पहाड़ी पर चढ़ने के बाद, हीकेवल यह पता चलता है कि चढ़ाई करने के लिए कई और पहाड़ियाँ भी हैं।" आने वाले वर्षों में भारत और अफ्रीका केसंबंधों की ऊंचाइयां बढ़ेंगी है, और आने वाले वर्षों में इनऊंचाइयों को और भी बढ़ाया जाएगा। हमारे साझा मूल्य और हमारी मित्रता निरंतरता का प्रतिनिधित्व करती है और साथ ही निरंतरता को प्रज्वलित करती है। और ऐसा हमेशा जारी रह सकता है।

धन्यवाद!
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