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बांग्लादेश के साथ व्यापार पर डिजिटल सम्मेलन में विदेश राज्यमंत्री का मुख्य भाषण

जून 30, 2020

महामहिम श्री मुहम्मद इमरान, भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त,
सुश्री रीवा गांगुली दास, बांग्लादेश में हमारी उच्चायुक्त,
श्री मो. सिराजुल इस्लाम, कार्यकारी अध्यक्ष, बांग्लादेश निवेश विकास प्राधिकरण
श्री डेविड रसकिन्हा, प्रबंध निदेशक, एक्जिम बैंक
श्री अब्दुल मतलूब अहमद, अध्यक्ष, भारत बांग्लादेश चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री
श्री शेख फज़लेफ़हिम, अध्यक्ष, फेडरेशन ऑफ़ बांग्लादेशचेंबर्स ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FBCCI)
श्रीचंद्रजीत बनर्जी, महानिदेशक, भारतीय उद्योग परिसंघ,
उपस्थित विशिष्ट अतिथिगण

देवियों एवं सज्जनों,

नमस्कार, सुप्रभात


मुजीब बरशो पर हमारे बांग्लादेशी दोस्तों को मेरी शुभकामनाएं।

आप जैसे महानुभावो को संबोधित करना मेरे लिए खुशी की बात है और मुझे विश्वास है कि आज की हमारी चर्चा ग्रहणीय और फलदायी होगी।

भारत और बांग्लादेश ने हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री शेख हसीना के दूरदर्शी नेतृत्व में, हमारी साझेदारी का एक सुनहरा अध्याय लिखा है। हमने साहसिक निर्णय लिए हैं और दशकों पुराने जटिल मुद्दों को सौहार्दपूर्वक र्और परिपक्वता के साथ हल किया है।

दोनों पक्षों में, इस रिश्ते को और मजबूत बनाने की एक पारस्परिक इच्छा है जो दोनों देशों और हमारी युवा पीढ़ी को इस तरह से लाभ पहुंचाने में मदद करेगी, जो दीर्घकालीन हो और एक-दूसरे के लिए सम्मान एवं विश्वास पर आधारित हो।

इस उद्देश्य के लिए, बहुत कुछ किया गया है और बहुत अधिक करने की संभावना बाकी है। जब संबंध रणनीतिक साझेदारी के मापदंडों से ऊपर उठ जाते हैं तो केवल आकाश ही है जो हमारी आकांक्षाओं और महत्वाकांक्षाओं को सीमित कर सकता है।

2014 के बाद से, हमने भूमि सीमा समझौते को मंजूरी दी, समुद्री सीमा को तय किया, बांग्लादेश को दी जाने वाली हमारी सहायता को लगभग 8 गुना तक बढ़ा दियाजिससे यह विशिष्ट रियायती शर्तों पर हमारी सहायता का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता बन गया, कनेक्टिविटी के समझौतों पर हस्ताक्षर किए, सबसे सस्ती कीमत पर बांग्लादेश को 1160 मेगावाट बिजली की आपूर्ति के लिए समझौतों को लागू किया, बांग्लादेशी नागरिकों के लिए 7.3 मिलियन वीजा जारी किए जिनमें से 1.6 मिलियन अकेले पिछले साल थे (जिसने बांग्लादेश में हमारे वीजा संचालन को सबसे बड़ा बना दिया), 7000 से अधिक सिविल सेवकों और वकीलों को प्रशिक्षित किया तथा सहायता अनुदान के तहत स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन, बहाली, स्वास्थ्य आदिसे संबंधित क्षेत्रों में 40 से अधिक परियोजनाओं को लागू किया।

हम बांग्लादेश के ज़रिये भारत की कनेक्टिविटी आवश्यकताओं को समझने और हमारे उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए, जो बांग्लादेश से निर्यात पर निर्भर हैं, एक विश्वसनीय व्यापार भागीदार होने के लिए हमारे बांग्लादेशी मित्रों के सहयोग की सराहना करते हैं। हम बांग्लादेश से आग्रह करेंगे कि वे अपनी विकासात्मक जरूरतों को देखते हुए हमारे उत्तर-पूर्वी क्षेत्र से अधिक आयात करने पर भी विचार करें।

आज दोनों पक्ष, कनेक्टिविटी की संभावनाओं को समझते हुए रेल और सड़क क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को लागू कर रहे हैं। लोग चिकित्सा पर्यटन, व्यापार और निवेश के अवसरों, अपने परिवारों का दौरा करने आदि के लिए भूमि, रेल और हवाई मार्ग से एक-दूसरे के देश की यात्रा कर रहे हैं। चूंकि दोनों देशों के बीच पर्यटन के और बढ़ने की उम्मीद है, एक खुले आकाश की नीति इस सकारात्मक विकास को ध्यान में रखकर होगी।

अपनी युवा प्रतिभावान आबादी के कारण बड़े पैमाने पर अपने विकास प्रक्षेपवक्र और भविष्य के प्रति आश्वस्त भारत और बांग्लादेश, ने इस बात का उदाहरण दिया है कि पड़ोसियों को कैसे सहयोग करना चाहिए। हमारे दोनों देशों में निवेश के अवसर हैं और जैसा कि हम मीरसराय और मोंगला में भारतीय आर्थिक क्षेत्र विकसित करने पर विचार कर रहे हैं, हम बांग्लादेश से भी हमारे उत्तर-पूर्वी राज्यों में निवेश करने का आग्रह करते हैं।

चूँकि भारत और बांग्लादेश सबसे बड़ी सीमा को साझा करते हैं, अत: हमें दोनों तरफ के सीमावर्ती जिलों के सामाजिक-आर्थिक विकास पर ध्यान देने की आवश्यकता है। कभी-कभी उपलब्ध अवसरों की चाह में, हमारे यहाँ ऐसे अपराधिक तत्व हो जाते हैं जो अपराध करते हैं, सुरक्षा बलों पर हमला करते हैं और दोनों देशों के बीच मौजूद शांति और सद्भाव को बिगाड़ते हैं। इन क्षेत्रों के विकास पर ध्यान देने की तत्काल आवश्यकता है और इसलिए सीमा पर फैले हाट एक स्वागतयोग्य प्रगति हैं। इसी भावना के साथ, हमें उन विकासात्मक कार्यों में सहयोग करना चाहिए जो सीमा के दोनों ओर किए जाते हैं।

आज, बांग्लादेश दुनिया में रेडीमेड कपड़ों के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक है। "मेड इन बांग्लादेश" ब्रांड को अब विश्वस्तर पर जाना जाता है। यहाँ भी, हम सहयोग कर सकते हैं। हम बांग्लादेश को मूल्य श्रृंखला में एक भागीदार के रूप में देखते हैं। भारत बांग्लादेश को कच्चे माल का एक विश्वसनीय और कुशल आपूर्तिकर्ता बना रहेगा। मेरा सुझाव है कि हम इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में और अधिक सहयोग की तलाश करें, जैसे कि हमारे प्रमुख वस्त्र डिजाइन संस्थानों, क्षमता निर्माण, कपड़ा मशीनरी आदि के बीच आदान-प्रदान को और सुविधाजनक बनाना।

जैसा कि हम जमीन से जुड़े हुए हैं, हम 54 नदियों से भी जुड़े हुए हैं जो हमें पोषित और जीवंत बनाए रखती हैं। हमारे दृष्टिकोण को भविष्य की पीढ़ियों की जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए और हमें नदी के पानी की बहाली, उनके सतत उपयोग, नदियों में प्रदूषण के मुद्दे, क्षरण आदि क्षेत्रों में अपने सहयोग का विस्तार करने की आवश्यकता है।

आर्थिक मोर्चे पर, जैसा कि हम अवसरों और चुनौतियों की बात करते हैं, हमें यह देखकर खुशी होती है कि बांग्लादेश ने पिछले दस वर्षों में सामाजिक और आर्थिक दोनों मोर्चों पर अच्छा प्रदर्शन किया है, जीडीपी विकास दर 7% से अधिक है और यह जल्द ही एलडीसी के स्तर से स्नातक होने वाला है। भारत में बांग्लादेश का निर्यात 1 बिलियन को पार कर गया है, जिससे जापान के बाद भारत एशिया का दूसरा देश बन गया है, जहाँ इसके निर्यात ने एक बिलियन का आंकड़ा पार कर लिया है। वर्तमान में, हम किसी भी अन्य दक्षिण एशियाई पड़ोसी की तुलना में बांग्लादेश के साथ अधिक व्यापार करते हैं।

यह सब हमारे द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक विस्तारित एवं गहरा करने के लिए दोनों तरफ के ईमानदार प्रयासों की ओर इशारा करता है। चूँकि लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकारें हमारे लोगों के प्रति जवाबदेह होती हैं, अत: हमारी पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारी को लागू करते समय प्राप्त किए गए लाभ और प्रगति को उजागर करना महत्वपूर्ण होगा।

वर्तमान कोविड की स्थिति ने डिजिटल क्षेत्र में सहयोग, स्टार्ट-अप, आईटी, ऑनलाइन कार्यशालाओं, परामर्श आदि के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। हम सार्क कोविड निधि के लिए बांग्लादेश की 1.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की प्रतिबद्धता की सराहना करते हैं और केवल सहयोगी दृष्टिकोणों से ही हम इस महामारी से निपट सकते हैं जिसके कारण व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला, निवेश और रोजगार में व्यवधान उत्पन्न हुए हैं। इसने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए कई असुविधाजनक प्रश्न पैदा कर दिए हैं और जवाबदेही के मुद्दे को उठाया है। भारत और बांग्लादेश दोनों घनी आबादी वाले देश होते हुए भी कम मृत्यु दर कायम रखने में कामयाब हुए हैं, जो सराहनीय है और हमारे सिस्टम के लचीलेपन को उजागर करता है। भारत ने बांग्लादेशी प्रतिभागियों के अनुरोध पर विशेष रूप से बांग्ला भाषा में चिकित्सा पेशेवरों के लिए ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित किया है और हम महामारी के स्वास्थ्य और आर्थिक प्रभाव को कम करने में बांग्लादेश की सहायता के लिए तैयार हैं।

इस स्थिति ने व्यापार के संचालन में चुनौतियां और अवसरदोनों को प्रस्तुत किया है। ज़मीनी सीमाओं पर बढ़ती भीड़ अंतर्देशीय जल मार्गों का पता लगाने और रेल के माध्यम से व्यापार करने की संभावनाएं प्रदान करती है। ये पर्यावरण के अनुकूल, कुशल और तार्किक रूप से सस्ते विकल्प हैं। हमें खुशी है कि आवश्यक वस्तुओं का व्यापार,विशेष रूप से रमजान के पवित्र महीने में, रेल मार्ग के ज़रिये जारी रहा।

जैसा कि हम भविष्य के लिए नई आर्थिक साझेदारी बनाने पर भी विचार कर रहे हैं, हमारे पास वस्तुओं के व्यापार से परे जाने और सेवाओं में व्यापार को तलाशने के अवसर हैं। हमारे द्विपक्षीय संबंधों की गहराई को देखते हुए, हमें विश्वास के साथ इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

मैं यह आश्वस्त करना चाहता हूं कि भारत बांग्लादेश का एक प्रतिबद्ध विकास भागीदार है, और बना रहेगा, तथा यह बांग्लादेश की प्राथमिकताओं से नियंत्रित होता रहेगा। बांग्लादेश में हमारी चल रही परियोजनाओं का उद्देश्य बांग्लादेश में निवेश के माहौल को और अधिक अनुकूल बनाते हुए बंदरगाहों, बिजली, रेलवे और सड़क जैसे क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे में सुधार करना है।

इस लगातार बढ़ते संबंधों के अन्य समान रूप से महत्वपूर्ण पहलू हैं जो ऐतिहासिक हैं और एक महान उद्देश्य के लिए रक्त और बलिदान से पूर्ण हैं। जैसा कि हम इस वर्ष मुजीब बरशो और बांग्लादेश की मुक्ति के 50वें वर्ष के साथ-साथ अगले साल राजनयिक संबंधों की स्थापना का जश्न मना रहे हैं, हमें वह सब करना चाहिए जो उन मूल्यों को संरक्षित रख सके जिनके लिए हम लड़े और खड़े रहे। हम इन ऐतिहासिक वर्षों को संयुक्त रूप से सरकार और बांग्लादेश के लोगों के साथ मनाने के लिए उत्सुक हैं।

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