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"आत्मानिर्भर भारत के विजन को लागू करना" विषय पर भारत के विदेश सचिव का आईसीएआई (ICAI) को वर्चुअल सम्बोधन (06 जुलाई, 2020)

जुलाई 06, 2020

आईसीएआई के अध्यक्ष, सीए अतुल कुमार गुप्ता
आईसीएआई के उपाध्यक्ष, सीए निहार निरंजन जंबुसरिया
आईसीएआई के कार्यवाहक सचिव, श्री राकेश सहगल
आईसीएआई के गणमान्य सदस्य


मैं भारत के चार्टर्ड एकाउंटेंट्स संस्थान को धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने मुझे अपने सदस्यों के साथ बातचीत करने का अवसर प्रदान किया, जो न केवल भारत से, बल्कि 35 देशों में फैले विदेशी केन्द्रों से भी हमारे साथ जुड़ रहे हैं।मैं विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री महावीर सिंघवी, आईसीएआई के अंतर्राष्ट्रीय मामलों के मानद सदस्य, का भी धन्यवाद करता हूं, जिन्होंनेइस कार्यक्रम के आयोजन में सक्रीय योगदान दिया।

2. मैं आईसीएआई को उसके 72 वें स्थापना दिवस के अवसर पर बधाई देना चाहता हूं। जैसा कि आईसीएआई के अध्यक्ष ने उल्लेख किया है, 3.5 लाख से अधिक सदस्यों वाले संस्थान, जिनमें से 40,000 विदेश में स्थित हैं, अधिक से अधिक विदेशी निवेश, संयुक्त उद्यम, विलय और अधिग्रहण आदि हासिल करने के हमारे उद्देश्यों में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

3. कोविड -19 महामारी द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से मानवता को आघात पहुँचाने वाला सबसे बड़ा संकट रहा है। पिछली ऐसी महामारी 1918 में स्पैनिश इन्फ्लुएंजा थी। कोविड-19 से हमें पहले ही 500,000 से अधिक मौतों और अनगिनत आजीविकाओं का नुकसान हुआ है। इसके कारण हमारे लोगों को गंभीर आर्थिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि अर्थव्यवस्था पर महामारी का बहुत कठोर प्रभाव पड़ा है। अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों ने 2020 में वैश्विक उत्पादन में लगभग 5% का संकुचन दर्शाया है, और लगभग 12 मिलियन अमरीकी डॉलर के वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में संचयी नुकसान हुआ है। दुनिया ने कई दशकों में इस परिमाण की आर्थिक मंदी नहीं देखी है।

4. इस व्यवधान का प्राथमिक कारण महामारी है। वैश्विक अर्थव्यवस्था कितनी जल्दी पुनः बहाल हो जाती है, जिसे आईएमएफ ने "ग्रेट लॉकडाउन" के रूप में संदर्भित किया है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि महामारी कितनी जल्दी नियंत्रित होती है। सभी देश फिर भी आर्थिक गतिविधि को संभव हद तक फिर से शुरू करने के प्रयास कर रहे हैं। जैसे भारत अनलॉक 2.0 में प्रवेश कर रहा है, हमारी सरकार द्वारा प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए, बिना कोई जोखिम उठाए, आर्थिक गतिविधि के विस्तार की दिशा में काम किया जा रहा है।

5. हम कोविड-19 के कारण आने वाली चुनौतियों का आकलन करने और उनसे निपटने में सक्रिय रहे हैं। जान बचाना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता रही है। इस गिनती पर, जबकि हमारा केस लोड उच्च बना हुआ है, हमने कई अन्य देशों की तुलना में कम मृत्यु दर और उच्च रिकवरी दर के साथ तुलनात्मक रूप से बेहतर प्रदर्शन किया है। इसके लिए हमारे लोगों की सुरक्षा और उन्हें बचाने के लिए उठाए गए शुरुआती कदमों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। हमने पिछले कुछ महीनों में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में अपनी क्षमताओं में काफी वृद्धि की है। सरकार ने अस्पतालों, आपातकालीन कक्षों, उपकरणों और आपूर्ति के प्रावधान और स्वास्थ्य पेशेवरों के प्रशिक्षण के विकास के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में सार्वजनिक संसाधनों को प्रसारित किया है।

6. महामारी से उत्पन्न आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए और हमारी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए, प्रधान मंत्री ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत एक दूरंदेशी आर्थिक दृष्टिकोण प्रस्तावित किया है। अभियन के तहत प्रधान मंत्री द्वारा शुरू किए गए लगभग 270 बिलियन अमरीकी डॉलर (20 लाख करोड़ रुपये) के प्रोत्साहन पैकेज का उद्देश्य अर्थव्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाना और हमारे कमजोर वर्गों को एक सामाजिक सुरक्षा कवच प्रदान करना है। जैसा कि प्रधानमंत्री ने कहा, आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना, पांच स्तंभों पर खड़ी होगी; अर्थव्यवस्था; आधारिक संरचना; प्रौद्योगिकी द्वारा संचालित प्रणाली ; जनसांख्यिकी; और मांग। तेजी से संवृद्धि और विकास हासिल करना इन सभी कारकों के सफल एकीकरण और समावेश पर निर्भर करेगा।

7. कल्याणकारी उपायों के तहत, भारत ने दुनिया के सबसे बड़े खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों में से एक, प्रधान मंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेवाई) की शुरुआत की, जो लॉकडाउन में शुरू हुआ। पीएमजीकेवाई में 800 मिलियन भारतीय शामिल हैं, और हमारे समाज के सबसे कमजोर वर्गों के लिए पोषण को प्राथमिकता देता है। इसे अब नवंबर 2020 तक बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा, 4 बिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक 200 मिलियन गरीब परिवारों के बैंक खातों में और लगभग 2.5 बिलियन अमरीकी डॉलर 90 मिलियन किसानों के खातों में हस्तांतरित किए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार जनन के लिए सरकार 6.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक खर्च कर रही है। वित्तीय समावेशन और डिजिटल अवसंरचना के निर्माण की दिशा में पिछले कुछ वर्षों में सफल प्रयासों के कारण इन कल्याणकारी लाभों का त्वरित और प्रभावी वितरण संभव हो पाया है।

8. अभियान का उद्देश्य न केवल अल्पावधि में महामारी के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव को कम करना है, बल्कि हमारे व्यवसायों और उद्योगों में विश्वास पैदा करना है; हमारे विनिर्माण विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने; वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ हमारे कृषि और छोटे किसानों को एकीकृत करना; और निवेश और प्रौद्योगिकी दोनों को गले लगाना। अभियान के तहत आर्थिक राहत और प्रोत्साहन उपायों का आकार भारत के सकल घरेलू उत्पाद के 10% के बराबर है। अभियान के तहत संरचनात्मक सुधार और राहत उपाय भारतीय अर्थव्यवस्था के हर वर्ग को कवर करते हैं, जिनमें छोटे किसान, प्रवासी श्रमिक और मजदूर, कृषि, एमएसएमई क्षेत्र, छोटे व्यवसाय, स्टार्ट-अप, औद्योगिक अवसंरचना, स्वास्थ्य और शिक्षा, शामिल हैं।

9. कोयला, खनिज, रक्षा उत्पादन, नागरिक उड्डयन, बिजली वितरण, सामाजिक अवसंरचना, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा सहित आठ क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा दिया गया है। नई सार्वजनिक क्षेत्र की उद्यम नीति अधिक से अधिक क्षेत्रों में निजी भागीदारी को सक्षम करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगी। आपने कुछ मार्गों पर ट्रेनों को चलाने और हमारे रेलवे स्टेशनों को आधुनिक बनाने के लिए निजी क्षेत्र को आमंत्रित करने के लिए सरकार की योजनाओं के बारे में सुना होगा। ये पहले से प्रतिबंधित क्षेत्रों को निजी भागीदारी के लिए खोलने के कुछ उदाहरण हैं। सरकार ने छोटे व्यवसायों के लिए सस्ती पूंजी तक पहुंच आसान बना दी है, जो महत्वपूर्ण आर्थिक इंजन और नौकरी सर्जक हैं। इन सुधारों का उद्देश्य भारतीय उद्योग के लिए क्षेत्र को बराबर करना है, जिसके विकास को जटिल कानूनों और नियमों द्वारा बाधित किया गया है।

10. एमएसएमई, जो हमारी औद्योगिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, को एक विशाल आर्थिक राहत पैकेज प्रदान किया गया है। इसमें एमएसएमई ऋण पर सीआरआर राहत का विस्तार; अर्थव्यवस्था में 18.3 बिलियन अमरीकी डॉलर (137,000 करोड़ रुपये) की सीमा की अतिरिक्त तरलता का अन्तःक्षेपण; और बैंकों और एनबीएफसी से एमएसएमई को पूरे बकाया क्रेडिट के 20% तक आपातकालीन क्रेडिट लाइनों का विस्तार शामिल है। अकेले इस उपाय से 4.5 मिलियन एमएसएमई को लाभ होगा। मैंने घोषित उपायों का केवल एक स्नैपशॉट प्रदान किया है। इसके अलावा, ये एक बड़ा अवसर प्रदान करता है और मुझे विश्वास है कि भारतीय उद्यम इसका लाभ अवश्य उठाएंगे।

11. जैसा कि श्रीमान सुरेश प्रभु, एमपी – जी-20 में भारत के शेरपा - और सीयूटीएस इंटरनेशनल के श्री प्रदीप एस मेहता ने हाल ही में कहा था आत्मनिर्भर भारत की दृष्टि के सफल कार्यान्वयन के लिए कुछ प्रमुख सिद्धांतों के संस्थापन की आवश्यकता होगी। इनमें हमारे लोगों की बुनियादी जरूरतों को संबोधित करना, आर्थिक उत्पादन का समान वितरण सुनिश्चित करना, श्रम के महत्व को पहचानना और श्रम प्रधान उद्योगों को बढ़ावा देना, स्वदेशी तकनीक का विकास और उत्पादन प्रक्रियाओं का विकेंद्रीकरण करना शामिल है। दिलचस्प बात यह है कि वे इस बात को भी सामने लाते हैं कि प्रकृति का उपयोग करना है, ख़त्म नहीं करना है; पारिस्थितिक कारक, प्रकृति का संतुलन और आने वाली पीढ़ियों की आवश्यकताओं के बारे में कभी नहीं भूलना चाहिए।

12. मैंने पिछले संबोधन में अपना विचार व्यक्त किया था कि आत्मनिर्भरता के विचार का अर्थ स्व-केंद्रित व्यवस्था चाहना नहीं है या देश को अंदर की ओर मोड़ना नहीं है। आत्मनिर्भरता की अपील आर्थिक अलगाववाद का सहारा लेने के बारे में नहीं है। इसका आवश्यक उद्देश्य वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में प्रमुख भागीदार के रूप में भारत की स्थिति को सुनिश्चित करना है। स्वदेश में क्षमता निर्माण के माध्यम से, हम वैश्विक बाजारों के व्यवधान को कम करने में योगदान देना चाहते हैं। उन उत्पादों और वस्तुओं की पहचान करना महत्वपूर्ण है जिनमें भारत घरेलू उत्पादन का विस्तार करने और वैश्विक उपलब्धता बढ़ाने की क्षमता या काबिलियत रखता है। सच है, हम सब कुछ नहीं बना सकते - लेकिन हम निश्चित रूप से अभी की तुलना में कई और ज्यादा चीजें बना सकते हैं। इसलिए, वह भारत जो अपनी आर्थिक क्षमता का निर्माण कर रहा है, और वह भारत जो वैश्विक व्यवसाय, व्यापार और नवाचार में एक अधिक बड़ी भूमिका निभाने की इच्छा रखता है, के बीच कोई विरोधाभास नहीं है।

13. घरेलू प्रोत्साहन और कल्याणकारी उपायों के अलावा, महामारी से निपटने और आर्थिक बहाली सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक जुड़ाव और सहयोग महत्वपूर्ण है। वायरस को रोकने के लिए टीकें और चिकित्सीय उपचार विकसित करने के लिए देशों को अपने प्रयासों और संसाधनों को साझा करने की आवश्यकता है, और साथ ही एक साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है यह सुनिश्चित करने के लिए कि महामारी के आर्थिक नुकसानों को कम किया जा सके। भारत इसके लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है और कोविड-19 संकट पर वैश्विक जुड़ाव की आवश्यकता को पहचानने वाले पहले देशों में से एक था। हमने समन्वित प्रतिक्रिया बनाने के लिए विश्व के नेताओं के साथ जुड़ने का बीड़ा उठाया। प्रधानमंत्री की पहल से भारत ने सार्क के नेताओं की एक वर्चुअल बैठक आयोजित की। प्रधानमंत्री ने वर्चुअल जी -20 शिखर सम्मेलन के शीघ्र आयोजन के लिए भी प्रोत्साहित किया। बाद में उन्होंने वर्चुअल ग्लोबल वैक्सीन समिट में संबोधन दिया, जहाँ भारत ने अंतर्राष्ट्रीय वैक्सीन गठबंधन जीएवीआई को 15 मिलियन अमरीकी डॉलर देने का वचन दिया। प्रधान मंत्री ने यह भी कहा कि महामारी के दौरान भारत ने 120 से अधिक देशों के साथ दवाइयाँ साझा करके, अपने पड़ोसी देशों के साथ एक साझा प्रतिक्रिया रणनीति बनाकर और सहायता मांगने वाले विशिष्ट देशों की मदद करके और साथ ही अपनी विशाल आबादी की सुरक्षा करते हुए दुनिया को एक परिवार, वसुधैव कुटुम्बकम के रूप में देखने की शिक्षा को पूरा करने की कोशिश की। उन्होंने दुनिया के साथ एकजुट होने, कम कीमत पर गुणवत्ता दवाओं और टीकों के उत्पादन की हमारी क्षमता के साथ-साथ तेजी से बढ़ती टीकाकरण में हमारे घरेलु अनुभव और हमारी वैज्ञानिक प्रतिभा साझा करने का संकल्प लिया।

14. कोविड-19 महामारी ने वैश्वीकरण के भविष्य और अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था की संरचनात्मक सीमाओं के बारे में बहस उत्पन्न की है। दुनिया भर के नेताओं का वर्चुअल शिखर सम्मेलन वैश्विक सहयोग के लिए मौजूदा व्यवस्थाओं की कमियों को उजागर करने और बहुपक्षीय सहयोग के लिए एक नई, लोक-केंद्रित टेम्पलेट की भारत की दृष्टि को साझा करने के लिए एक उपयोगी मंच रहा है। इसने जी-20 और एनएएम के वर्चुअल शिखर सम्मेलन में प्रधान मंत्री के हस्तक्षेप पर बल दिया, जिसमें उन्होंने दो उदाहरणों का हवाला दिया था। उन्होंने मौजूदा अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली और वैश्वीकरण की सीमाओं पर प्रकाश डाला जिसमें व्यक्तिगत देशों ने हमारे सामूहिक हितों को आगे बढ़ाने के बजाय अपने प्रतिस्पर्धी हितों को संतुलित करने में सहयोग किया। प्रधानमंत्री ने कोविड के बाद की दुनिया में मानव कल्याण पर अधिक ध्यान केंद्रित करने के लिए वैश्वीकरण की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि पिछले कुछ वर्षों में भारत द्वारा शुरू की गई अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन या आपदा रोधी अवसंरचनाओं के लिए गठबंधन जैसी वैश्विक पहल का उद्देश्य एक अधिक मानव केंद्रित अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली को बढ़ावा देना है।

15. महामारी ने हमारे व्यावसायिक जीवन को बहुत प्रभावित किया है, और यह राजनयिक गतिविधियों पर भी लागू होता है। कोविड-19 ने राजनयिक कैलेंडर को बाधित किया है, जिसके कारण लगभग सभी अंतर्राष्ट्रीय बैठकें और शिखर सम्मेलनें रद्द हो गई हैं। हालांकि, समकक्षों के साथ आमने-सामने की बैठकें पारंपरिक रूप से जटिल मुद्दों को हल करने या कठिन वार्ता आयोजित करने के लिए आवश्यक मानी गई हैं, लेकिन इसकी अनुपस्थिति में राजनयिक जुड़ाव को रोकना उचित नहीं है। इस पैमाने के संकट के लिए एक समन्वित वैश्विक प्रतिक्रिया की आवश्यकता है, जिससे सभी देशों के बीच निरंतर संचार आवश्यक हो जाता है। भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा सहित दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बढ़ते तनाव ने निरंतर संचार के महत्व पर जोर दिया है।

16. राजनय नई परिस्थिति के साथ अनुकूलित और पूरी तरह से डिजिटल बन गया है। भले ही दुनिया के कुछ नेताओं ने हाल ही में व्यक्तिगत रूप से मुलाकातें पुनः आरम्भ की हैं, लेकिन आभासी बैठकें जुड़ने का प्रमुख तरीका रहा है - और शायद जब तक कोई प्रभावी टीका नहीं मिल जाता है तब तक मुलाकातों का एक प्रमुख माध्यम बना रहेगा। इस तरह की डिजिटल कूटनीति में भारत सबसे आगे रहा है। मैंने पहले भी उल्लेख किया था कि कैसे प्रधानमंत्री ने चुनौतियों को वर्चुअल प्लेटफार्मों का उपयोग करके वैश्विक वार्ता शुरू करने के अवसर में बदल दिया है। उन्होंने पहली बार, ऑस्ट्रेलियाई प्रधान मंत्री के साथ एक द्विपक्षीय वर्चुअल शिखर सम्मेलन भी आयोजित किया। इसके अलावा, उन्होंने 60 देशों के समकक्षों से बात की है।

17. भारत के विदेश मंत्री अपने प्रयास से 76 देशों के विदेश मंत्रियों के साथ जुड़े थे। उन्होंने ब्रिक्स, एससीओ और आरआईसी समूहों की बैठकों और अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, ब्राजील और दक्षिण कोरिया के अपने समकक्षों के साथ एक संयुक्त बैठक में भी भाग लिया है। मैं अमेरिका, यूरोपीय संघ, रूस, ऑस्ट्रेलिया, मालदीव, जर्मनी और फ्रांस और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों के सहयोगियों से संपर्क में बना हुआ हूं। हाल ही में, आने वाले राजदूतों और उच्चायुक्तों ने वीडियो कॉन्फ्रेंस सुविधाओं के उपयोग से भारत के राष्ट्रपति को अपनी साख प्रस्तुत की। विदेश मंत्रालय में, हम समय-सम्मानित राजनयिक प्रोटोकॉल और नए युग के इंटरनेट प्रोटोकॉल के बीच सामान्य आधार खोजने का प्रयास कर रहे हैं!

18. वर्चुअल राजनय के साथ-साथ चिकित्सा सहायता और मदद प्रदान करने के लिए जमीन पर प्रयास भी किए गए हैं। इसमें 89 देशों को लगभग 11 मिलियन अमरीकी डॉलर (82 करोड़ रुपये) की आवश्यक दवाएं, परीक्षण किट और सुरक्षा उपकरणों की आपूर्ति शामिल है। हमने दुनिया भर में, दक्षिण एशिया से दक्षिण अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से अफ्रीका तक, कई चिकित्सा आपूर्ति मिशन शुरू किए। इस सफ़र में, हमने डरावने लॉजिस्टिक चुनौतियों का सामना किया और इस तरह दुनिया की फार्मेसी के रूप में अपनी प्रतिष्ठा बरक़रार रखी और संभवतः बढ़ाया है। महामारी से निपटने के लिए हमने मालदीव, कुवैत, मॉरीशस और कोमोरोस में तेजी से प्रतिक्रिया चिकित्सा टीमों को तैनात किया। इन कठिन समय में भी, भारत अपनी अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को निभाने में भरोसेमंद और उत्तरदायी बना रहा है।

19. जैसे-जैसे स्वास्थ्य सुरक्षा और स्वास्थ्य आपूर्ति श्रृंखला दुनिया की सरकारों की प्राथमिकता सूची में ऊपर उठती जा रही हैं, भारत को उभरते अवसरों के लिए खुद को तैयार करना चाहिए। भारतीय कूटनीति इस प्रक्रिया का हर तरह से समर्थन करेगी। यह आत्मनिर्भर भारत की समग्र दृष्टि के अनुरूप है, और विदेश मंत्रालय भारत को एक वैकल्पिक विनिर्माण और नवाचार गंतव्य के रूप में बढ़ावा देने में सक्रिय रूप से जुटा हुआ है। हमारे मिशन विभिन्न देशों में हमारे व्यवसायों के लिए निर्यात और निवेश के अवसरों की पहचान कर रहे हैं, और उद्योग संघों के साथ मिलकर करीब से काम कर रहे हैं। इसके अलावा, हम लगातार विनिर्माण स्थानों में विविधता लाने के लिए वैश्विक निगमों के साथ जुड़े हुए हैं। इसके पीछे का विचार इन उद्योगों को एक अनुकूल व्यवसाय वातावरण प्रदान करना है ताकि भारत की घरेलु मांगों का लाभ उठाया जा सके और देश में निवेश और बेशक रोजगार लाया जा सके ।

20. हमारे मिशनों द्वारा किया गया प्रारंभिक आंकलन बताता है कि अल्पावधि में हम उन क्षेत्रों की वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में अपनी उपस्थिति का विस्तार कर सकते हैं जिनमें हम पारंपरिक रूप से मजबूत रहे हैं। हम स्थानीय और वैश्विक दोनों स्तर पर व्यापक मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन को बढ़ाने के लिए वस्त्र और परिधान, रत्न और आभूषण, रसायन आदि जैसे क्षेत्रों में मौजूदा क्षमताओं का लाभ उठा सकते हैं। मध्यम और लंबी अवधि में, हमें इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, इंजीनियरिंग और डिजाइन आउटसोर्सिंग आदि क्षेत्रों की मूल्य श्रृंखला को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है जहां हम मौजूद हैं लेकिन हममें अधिक करने की क्षमता है। आखिरकार, हमें बुनियादी विनिर्माण में अपनी अग्रणी स्थिति बनाने के लिए उच्च मूल्य वर्धित गतिविधियों को लक्षित करने की आवश्यकता है। हमें उद्योगों में प्रौद्योगिकी और बौद्धिक संपदा के विकास पर भी काम करने की जरूरत है।

21. एक ऐसा क्षेत्र, जो आईसीएआई के सदस्यों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक होगा, और जिसे हम आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं, वह है फिनटेक। यह वित्तीय समावेशन के लिए परिवर्तनकारी हो सकता है जो निम्न लागत के माध्यम से गरीब और ग्रामीण समुदायों के लिए विकास को बढ़ावा देगा और उनकी पहुंच भी बढ़ाएगा। मुझे यह जानकर खुशी हुई कि 2020 की पहली तिमाही में भारतीय फिनटेक कंपनियों को मिलने वाले फंडिंग में लगभग 40% की वृद्धि हुई थी। हम फिनटेक में अपनी घरेलू सफलताओं पर निर्माण करने का इरादा रखते हैं और हमारे विकास भागीदारी रूपरेखा के तहत और वाणिज्यिक आधार पर अपने भागीदार देशों में अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म और ई-गवर्नेंस पहल की प्रतिकृति बनाने की अपनी क्षमता का उपयोग करना चाहते हैं। हम अपने डिजिटल भुगतान प्रणालियों को अंतःप्रचालनीय बनाने के लिए कई देशों के साथ मिलकर काम भी कर रहे हैं। हमारी भुगतान प्रणाली जैसे कि रुपे कार्ड सिंगापुर, भूटान, यूएई और बहरीन में लॉन्च हो चुके हैं। प्रधानमंत्री ने इससे पहले फिनटेक कंपनियों और वित्तीय संस्थानों को जोड़ने के लिए एक वैश्विक डिजिटल प्लेटफॉर्म एपिक्स लॉन्च किया था।

22. आईसीएआई जैसे उद्योग संघ हमारी आर्थिक कूटनीति और आउटरीच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे संघ नीति निर्माण में एक महत्वपूर्ण हितधारक हैं। वे विदेशों में हमारी आर्थिक क्षमता को प्रदर्शित करने और बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। वर्तमान प्रकरण में, भारतीय उद्योग को ऐसे व्यवसाय मॉडल बनाने की आवश्यकता है जिसे आसानी से लागू किया जा सके और यह सुनिश्चित करने कि आवश्यकता है कि संकट में भी आर्थिक गतिविधि सुचारू रूप से चलती रहें। हमें अतिरेक में निर्माण करना होगा। हमें अपने प्रमुख उद्योगों के लिए सामग्री, घटकों या फीडस्टॉक के स्रोत के रूप में किसी विशेष देश या क्षेत्र पर अपनी निर्भरता का पुन: मूल्यांकन करने की आवश्यकता होगी। हमारे व्यवसायों को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि अंतर्राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला न सिर्फ अभी बल्कि कोविड के बाद के समय में भी कुशल और लचीला बना रहे। इस संकट से उबरने के उपायों में अगले संकट की पूर्वेक्षा भी शामिल होनी चाहिए।

23. ऐसे कई सबक हैं जो हम सभी प्रकरणों और क्षेत्रों में सीख रहे हैं - चाहे वह कूटनीति में हो या अर्थव्यवस्था में, चाहे नीति निर्माण में हो या समाज में। मुझे विश्वास है कि अपनी तात्कालिक चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए, ये हमारी प्रणाली, हमारे संकल्प और हमारे देश को मजबूत बनाने का काम करेंगी।

24. इसी के साथ, मुझे आमंत्रित करने के लिए मैं एक बार फिर धन्यवाद देना चाहूँगा। आईसीएआई के सभी सदस्यों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। सुरक्षित रहें और जिम्मेदार बने रहें।

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