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कोविड-19 के दौरान प्रवासियों की निकासी और प्रत्यावर्तन पर क्षेत्रीय परामर्श(बांग्लादेश, भारत, नेपाल, श्रीलंका,आईएलओ) के दौरान सचिव (सीपीवी व ओआईए) की टिप्पणी

जुलाई 09, 2020

महामहिम श्री रवीनाथ आर्यसिंहा, विदेश सचिव, श्रीलंका
महामहिम डॉ. खलीलुर्रहमान, अतिरिक्त विदेश सचिव, बांग्लादेश
महामहिम, श्री भरत राज पौड्याल, संयुक्त सचिव, नेपाल

महामहिम, नई दिल्ली से नमस्कार और सुप्रभात।

1. 'कोविड-19 के दौरान प्रवासियों की निकासी और प्रत्यावर्तन’पर इस आभासी बैठक में आप सभी का हार्दिक स्वागत! आईएलओ की निदेशक डॉ. डगमार वाल्टर और उनकी टीम का स्वागत करते हुए मुझे प्रसन्नता हो रही है, क्योंकि यह उनके ही दिमाग की उपज है और उन्होंने तकनीकी साझेदार के रूप में इस क्षेत्रीय बैठक का समर्थन करने एवं इस सत्र का संचालन के लिए अपनी सहमति प्रदान की है। मैं मंत्रालय में कोविड सेल के समन्वयक, अतिरिक्त सचिव दम्मू रावी का विशेष रूप से आभारी हूँ, जो इस महामारी के विरुद्ध हमारी कार्रवाई से संबंधित सभी मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। हमारे साथ केरल के संयुक्त सचिव रामू अब्बागनी, प्रमुख सचिव एलंगोवन और एनएसडीसी के डॉ. मनीष कुमार भी शामिल हैं।

2. महामहिम, 21 वीं सदी में कोविड-19 मानवता के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। इस अदृश्य दुश्मन ने लाखों लोगों को संक्रमित किया है और सैकड़ों-हजारों लोगों को मारा है। इसने हमारे समाज और हमारे जीवन के तरीके को काफी प्रभावित किया है। दुनिया का कोई भी हिस्सा इससे अछूता नहीं है। कुछ लोगों ने इसे अकल्पनीय घटना की संज्ञा दी है, लेकिन यह स्पष्ट है कि हमें इस आपदा के लिए तैयार रहने की जरूरत है क्योंकि ऐसी स्थिति फिर वापस आ सकती है। यह वार्ता अनुभवों को साझा करने और सभी देशों की व्यापक भागीदारी के साथ समन्वित कार्रवाई करने के लिए किए जाने वाले प्रयोग का हिस्सा है।

3. यह महामारी हमारी स्थापित प्रथाओं, मानदंडों और नियमों को भंग कर रही है। इस महामारी से अधिक समय तक इसका सामाजिक-आर्थिक प्रभाव कायम रहेगा। इसने आर्थिक गतिविधियों को मंद कर दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि इस महामारी से संचयी नुकसान वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का 10% हो सकता है। आईएमएफ का अनुमान है कि 2020 में वैश्विक अर्थव्यवस्था का 3% संकुचन होगा, जो 1930 के महामंदी के बाद से सबसे बड़ा है। वैश्विक गरीबी और बेरोजगारी का स्तर बढ़ेगा; हमें अपनी आर्थिक योजनाओं की समीक्षा करनी होगी। प्रवासी कामगार प्रभावित होंगे; हमें उनके लिए नए विकल्प तलाशने होंगे। प्रेषण गिर रहे हैं; हमें नए निवेश तलाशने होंगे ।

4. भारत ने कोरोनो वायरस से निपटने के लिए वक्त से पहले कार्रवाई की। इसके नतीजों से निपटने के लिए मंत्रालय में कोविद प्रकोष्ठ की स्थापना की गई तथा विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिकों को विश्वसनीय जानकारी प्रदान करने के लिए 24X7 हॉटलाइन का प्रबंध किया गया। जनवरी के अंत में यात्रा पर प्रतिबंध लगाया गया, फरवरी के प्रारंभ में हवाई अड्डे पर स्क्रीनिंग की व्यवस्था की गई और मार्च के मध्य में यात्रा पर रोक लगा दी गई तथा मार्च के अंत में राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लागू कर दिया गया। मानव जीवन बचाने की बात को प्राथमिकता दी गई। महामारी के प्रसार को रोकने के लिए लाल, नारंगी और हरे ज़ोन एवं कन्टेनमेंट जोन बनाए गए। इस बीच, हमने स्वास्थ्य सेवा की तैयारियां पूरी कर लीं, प्रतिदिन 1 लाख से अधिक लोगों का परीक्षण किया गया और संक्रमित लोगों के संपर्क में आने वाले लोगों का पता लगाया गया। आरोग्य सेतु ऐप से मदद मिली। वायरस के प्रसार की दर धीमी हो गई, और जहाँ प्रारंभ में 3 दिनों में संक्रमितो की संख्या दोगुनी हो जाती थी, वहीं अब 18 दिनों में दोगुनी होने लगी तथा बीमारी से ठीक होनेवालों की दर भी बढकर 60% से अधिक हो गईl यदपि संक्रमण अभी भी बढ़ रहा है, तथापि इसके तेज गति से प्रसार पर रोक लग चुका है। चिकित्सीय समाधान के रूप में वैक्सीन और दवाएं तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है l भारत इसका समाधान ढूँढ़ने में सहयोग करने और उन्हें साझा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

5. एक ऐसे राष्ट्र के लिए यह महामारी एक बड़ी चुनौती थी जिसके 31 मिलियन प्रवासी हों और उनमें से 18 मिलियन नागरिक विदेश में रहते हों। हमारे लिए, विदेशों में रहने वाले हमारे नागरिकों का कल्याण और संरक्षण पहली प्राथमिकता है। शुरुआत में हमने चीन, इटली और ईरान से (जहां संक्रमण ने पहले अपनी जड़ें जमाई थी) अपने नागरिकों के लिए निकासी मिशन आयोजित किए। इसके बाद, हमने अपने एयर-स्पेस को घरेलू लॉकडाउन मानदंडों के अनुरूप बंद कर दिया, लेकिन फिर देश के भीतर आवाजाही को आसान बनाने के लिए खोल दिया।

6. सरकार ने 7 मई, 2020 को वंदे भारत मिशन (वीबीएम) के तहत प्रत्यावर्तन कार्य की शुरुआत की, ताकि विदेश में फंसे भारतीय नागरिकों की वापसी अकाट्य कारणों से चरणबद्ध तरीके से हो सके l इन परिचालनों में एयर इंडिया और बाद में अन्य एयरलाइनों की अनियत वाणिज्यिक उड़ानें, आपरेशन समद्र सेतु में भारतीय नौसेना के पोत और जमीनी सीमा पार करना शामिल हैं। वंदे भारत मिशन, लीबिया, कुवैत, यमन और अन्य देशों में हमारे पहले के अनुभव के बावजूद, विदेशों में फंसे हमारे नागरिकों के प्रत्यावर्तन के लिए सरकार द्वारा किया गया अब तक का सबसे बड़ा, सबसे जटिल और चुनौतीपूर्ण प्रयोग है। इसमें विदेशी सरकारों, भारत में उनके दूतावासों, विदेशों में हमारे दूतावासों और आंतरिक रूप से गृह, नागरिक उड्डयन, एवं स्वास्थ्य जैसे मंत्रालयों तथा राज्य सरकारों के साथ समन्वय स्थापित करना शामिल था। हमारी कोविड टीम ने राज्य समन्वयकों की अपनी टीम के साथ हमारे फंसे हुए नागरिकों को घर लाने के लिए उड़ानों को सक्रिय रखने हेतु कड़ी मेहनत की।

7. पूरे विश्व में 6 लाख से अधिक प्रवासी भारतीयों ने हमारे दूतावासों के पास वापस आने के लिए अपनी रुचि दर्ज कराई थी जिनमें से वीबीएम के पहले 3 चरणों में (3 जुलाई 2020 की स्थिति के अनुसार),137 देशों के 5 लाख भारतीय घर लौटे (फिलहाल यह संख्या बढ़कर लगभग 5.8 लाख हो गई है )l इसमें एयर इंडिया की 860 उड़ाने,1256 चार्टर्ड उड़ानें और पोत द्वारा की गई 8 यात्राएं शामिल हैं। 4 लाख से अधिक प्रवासी भारतीय विमान से लौटे, 90,000 से अधिक जमीनी सीमा पार करके वापस आए और बाकी पोत से आए। संयुक्त अरब अमीरात से 160,000 से अधिक भारतीय स्वदेश लौटेl केरल में सबसे अधिक संख्या में लोग लौटे। इस दिशा में हमारे प्रयास जारी हैंl वीबीएम का चौथा चरण 3 जुलाई 2020 से प्रभावी हो गया है।

8. विदेश मंत्रालय ने लॉकडाउन के दौरान भारत में फंसे 118 देशों के 1.2 लाख से अधिक विदेशी नागरिकों की सुरक्षित निकासी में मदद की। इसके अलावा, हमारे पड़ोस के कई नागरिक भी वीबीएम के तहत आयोजित उड़ानों से लौटे।

9. विदेश मंत्रालय ने निर्बाध एकीकरण, डेटा अनुप्रयोग और मिशन की सफलता के लिए एक गतिशील ऑनलाइन मंच विकसित किया है जो सभी हितधारकों के लिए उपलब्ध है। स्वदेश लौटने की इच्छा रखने वाले भारतीय नागरिकों द्वारा दूतावासों के पास ऑनलाइन पंजीकरण से लेकर एयरलाइनों द्वारा उड़ान घोषणापत्र तैयार किए जाने, आव्रजन और स्वास्थ्य प्राधिकारियों के लिए डेटा अद्यतित किए जाने और राज्य सरकारों द्वारा उनकी अगवानी किए जाने तक सभी मुद्दे इस प्रत्यावर्तन पोर्टल पर आधारित हैं। हाल ही में, इसका उपयोग वापस आने वाले श्रमिकों और पेशेवरों के कौशल का पता लगाने के लिए भी किया जा रहा है।

10. प्रत्यावर्तन की भारी माँग और सीमित संसाधनों की उपलब्धता के कारण, प्राथमिकता मानदंड निर्धारित करना पडा। इनमें निम्नलिखित श्रेणी के लोग शामिल हैं: निर्वासन का सामना कर रहे लोग; ऐसे प्रवासी श्रमिक जिनकी नौकरी समाप्त हो गई है या वीजा अवधि समाप्त हो गई है; ऐसे व्यक्ति जो चिकित्सीय आपात स्थिति में हैं; गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग; पारिवारिक आपात स्थिति वाले; विदेश में फंसे पर्यटक; ऐसे छात्र जिनके शैक्षणिक संस्थान/ छात्रावास बंद हो गए हैं, आदि। इन सुविधाओं को बाद में गैर-नागरिक प्रवासी सदस्यों के लिए भी बढ़ाया गया। अन्य मुख्य मुद्दा राज्य सरकारों के साथ घनिष्ठ समन्वय स्थापित करके यह सुनिश्चित करना था कि वापस आने वाले लोगों के लिए संगरोध और अन्य सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं; यह कार्य भी विदेश मंत्रालय की कोविड टीम द्वारा कुशलतापूर्वक पूरा किया गया।

11. महामहिम, वंदे भारत मिशन की प्रमुख विशेषताओं में से एक थी - विश्व स्तरीय नई जानकारी, उद्विकासी स्थिति और सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुकूल होने की निरंतर इच्छा। विदेश मंत्री व्यक्तिगत रूप से वीबीएम संचालन की समीक्षा कर रहे थे। हमारे दूतावास सबसे आगे थे और उन्होंने फंसे भारतीयों को भोजन, आश्रय और यहाँ तक कि भावनात्मक समर्थन प्रदान करने के लिए सामुदायिक संघों के साथ समन्वय स्थापित किया।

12. नवाचार कई थे। नई चुनौतियों का सामना करने के लिए हमारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को नवीन तरीकों से अद्यतित किया गया था। लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और यूरोप के कुछ हिस्सों में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए विदेशी जहाज कंपनियों का उपयोग किया गया। वीबीएम के दौरान, वायरस का प्रसार रोकने के लिए प्रस्थान से पहले यात्रियों की स्क्रीनिंग और, कुछ मामलों में, उनका परीक्षण कराया गया। स्वदेश वापस लौटने वाले 5 लाख व्यक्तियों में से केवल 941 कोविद पॉजिटिव मामलों का पता चला, जो कि 0.188% है। उसके बाद हमने 14 दिनों की अनिवार्य संस्थागत संगरोध को संशोधित किया, और उसे घटाकर 7 दिन का संस्थागत संगरोध और 7 दिन का वास-स्थान संगरोध कर दिया। स्वास्थ्य मंत्रालय और राज्य सरकारों द्वारा कठोर स्क्रीनिंग और परीक्षण से इन मामलों का पता लगाने और प्रणाली में विश्वास पैदा करने में मदद मिली।

13. महामहिम, वापस लौटने वाले प्रवासियों का प्रबंधन और कल्याण एक और अत्यावश्यक अपेक्षा है। हमारी संघीय प्रणाली में, राज्य सरकारें कल्याण और पुनर्वास उपाय करने में अग्रणी भूमिका निभाती हैं तथा भारत सरकार संसाधन साझा करती है। एनएसडीसी ने वीबीएम के तहत लौटने वाले नागरिकों के कौशल का पता लगाने के लिए 'एसडब्ल्यूएडीईएस' (रोजगार सहायता के लिए कुशल कामगार आगमन डेटाबेस) की शुरुआत की। 'एसडब्ल्यूएडीईएस' भारतीय और विदेशी कंपनियों की मांग के साथ मेल बैठाने के लिए एक कौशल डेटाबेस उपलब्ध कराता है l इससे श्रम बाजार में प्रवासी श्रमिकों को पुन:एकीकरण की सुविधा मिलती है।

14. विदेश मंत्रालय ने मानव संसाधन एजेंसियों, उद्योग, कौशल परिषद और गैर-सरकारी संगठनों के साथ प्रवासियों की बातचीत में सहायता करने के लिए हितधारकों के बीच वार्ता के लिए एक मंच प्रदान किया है। इससे प्रवासी रोजगार के लिए सार्वजनिक या निजी क्षेत्रों या विदेशों में नए प्रवास मार्गों या फिर पुन: कौशल प्राप्त करने या कौशल बढ़ाने की संभावनाओं से जुड़े है।

15. भारत की पहुँच और दुनिया को एक परिवार मानने की हमारी धारणा के तहत, प्रधान मंत्री मोदी ने 15 मार्च को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सार्क नेताओं के असाधारण शिखर सम्मेलन का आयोजन किया। इसमें स्वास्थ्य और चिकित्सा सहायता के लिए 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर की प्रतिबद्धता सहित कई पहल की गईं और साथ ही प्रत्यावर्तन में समन्वय स्थापित किया गया। बाद में, जी-20, ब्रिक्स और यहां तक कि द्विपक्षीय रूप से समान बैठकें आयोजित की गईं। भारत ने 150 से अधिक देशों को कोविड महामारी से निपटने के लिए आवश्यक दवाओं, विशेष रूप से हाइड्रोक्सीक्लोरिक्विन और पेरासिटामोल एवं चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति की। हमारी चिकित्सा टीम हिंद महासागर के देशों और खाड़ी क्षेत्र में उनकी घरेलू क्षमताओं की न्यूनता को पूर्ण करने के लिए गईं।

16. हम, एक ही समय में, वैक्सीन खोजने और उपचार प्रोटोकॉल में सुधार करने के बड़े अंतरराष्ट्रीय प्रयास के लिए प्रतिबद्ध रहे। हम इस बीमारी के उपचार के लिए वैक्सीन की खोज करने, बड़े पैमाने और किफायती मूल्य पर ऐसे किसी कैंडिडेट वैक्सीन को तैयार करने तथा सस्ती दवाओं के उत्पादन में योगदान करने के लिए तैयार हैं l

17. महामहिम, हम आश्वस्त हैं कि आगे का रास्ता कई स्तरों पर सहयोग के माध्यम से जाता है। हमें तैयार रहना होगा क्योंकि ऐसी स्थितियों की पुनरावृत्ति हो सकती है, हमें अपनी क्षमता बढ़ानी होगा और समन्वय को मजबूत करना होगा। यह एक नया सामान्य उदय है और हमें वक्रता से आगे रहना होगा।

18. मुझे उम्मीद है कि आज की बैठक में हमारे आम प्रयास में रचनात्मक चर्चा होगी तथा सूचना और अनुभवों के आदान-प्रदान एवं सर्वोत्तम प्रथाओं के मानदंड के जरिए अंतर-सरकारी सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। मैं आपके अनुभवों और अच्छी प्रथाओं को सुनने के लिए उत्सुक हूँ। धन्यवाद।

नई दिल्ली
09 जुलाई,2020

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