मीडिया सेंटर मीडिया सेंटर

पूरब का साथी

जून 09, 2015

नवभारत टाइम्स

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ढाका यात्रा से भारत और बांग्लादेश के बीच गर्मजोशी बढ़ी है। इस मौके पर 41 सालों से लंबित पड़े भूमि सीमा समझौते पर हस्ताक्षर हुए। साथ ही कई और अहम करार भी हुए। भूमि समझौते के तहत भारत के 111 गांव बांग्लादेश को मिलेंगे जबकि बांग्लादेश के 51 गांव भारत में शामिल होंगे। इसके अलावा ढाका-गुवाहाटी-अगरतला के बीच बस सेवा चलाने, अंतरराष्ट्रीय तटीय जल मार्ग और मालवहन तथा रेलवे लिंक के विस्तार संबंधी करार भी हुए।

भारत ने बांग्लादेश को आधारभूत ढांचे जैसे रेल, बस, बंदरगाह के नवीकरण के लिए दो अरब डॉलर (करीब 12,600 करोड़ रुपये) देने का फैसला किया है। दोनों समुद्री सुरक्षा में आपसी सहयोग करेंगे और साथ मिलकर ह्यूमन ट्रैफिकिंग और जाली भारतीय नोटों की तस्करी रोकेंगे। वे आतंकवाद में लिप्त समूहों और व्यक्तियों के बारे में सूचनाओं का आदान-प्रदान भी करेंगे। आवाजाही के लिए बांग्लादेशी जमीन का इस्तेमाल कर भारत अपने उत्तर-पूर्वी इलाकों में विकास का काम तेजी से कर सकता है। बांग्लादेश के चटगांव पोर्ट के जरिए नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों को आयात-निर्यात की सुविधा मिल सकती है।इस क्षेत्र के विकास से इंफाल-तामू-यंगून-सिंगापुर पैसेज का तेजी से विकास संभव है। दरअसल भारत ने दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजार के महत्व को समझ लिया है। यह अमेरिका और उत्तरी यूरोप से छोटा जरूर है पर काफी संभावनापूर्ण है। बांग्लादेश से दोस्ती दक्षिण-पूर्व एशियाई बाजार में हमारी पहुंच आसान बनाएगी। दरअसल भारत ने पाकिस्तान की उपस्थिति में सार्क की बेचारगी को भांपकर बांग्लादेश, भूटान और नेपाल के साथ आपसी सहयोग बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। इसे बीबीआईएन कहा जा रहा है। संयोग से इन देशों की सरकारों के साथ भारत की बेहतर केमिस्ट्री बनी हुई है। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना तो हमेशा से भारत की मित्र रही हैं। उन्होंने बांग्लादेश में उल्फा उग्रवादियों पर नकेल कसने के अलावा भारत का हर तरह से सहयोग किया है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि शेख हसीना की कट्टर विरोधी बेगम खालिदा जिया ने भी मोदी की यात्रा और दोनों देशों के बीच हुए समझौतों का स्वागत किया है......................[Read More]
टिप्पणियाँ

टिप्पणी पोस्ट करें

  • नाम *
    ई - मेल *
  • आपकी टिप्पणी लिखें *
  • सत्यापन कोड * Verification Code