मीडिया सेंटर मीडिया सेंटर

आमार सोनार बांग्ला

जून 11, 2015

हिंदुस्तान/ जयंत घोषाल

बांग्लादेश अपनी भौगोलिक सीमा की वजह से एक छोटा देश हो सकता है, किंतु उसकी भू-सामरिक स्थिति भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और इसलिए आपसी रिश्ते को प्रगाढ़ बनाने में सांस्कृतिक योगदान आवश्यक हो जाता है।

साल 1971 में जब शेख मुजीबुर्रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश बना तो उसकी पहचान से जुड़े दो मसले थे: धर्म और भाषा। यह मुस्लिम बहुल देश तो है, मगर इस्लामिक देश नहीं। इसकी भाषा बांग्ला है, उर्दू नहीं। यहां ‘एथनिक आइडेंटिटी’ को महत्व दिया गया। बांग्ला में इसे ‘जातीय सत्ता’ कहते हैं। यानी धर्म से आगे भाषा रही। बांग्ला संस्कृति की जीत हुई। वैसे इस देश के बनने के साथ पहले मुस्लिम, बाद में बंगाली या पहले बंगाली, बाद में मुस्लिम, इस मुद्दे को लेकर टकराहट पैदा हुई और जो ‘तालिबान’ तत्व हैं (यहां तालिबान तमाम नॉन-स्टेट एक्टर, जमात और कट्टर संगठन के लिए इस्तेमाल किया गया है), वे बांग्लादेश का ‘तालिबानीकरण’ चाहते हैं। यह हमारे लिए घातक है। इसलिए जो हमारी धर्मनिरपेक्षता की संस्कृति है, उसका हस्तांतरण सांस्कृतिक आदान-प्रदान के जरिये किया जाना चाहिए। भारत इस दिशा में बखूबी काम कर रहा है। .............(आगे पढ़े )

टिप्पणियाँ

टिप्पणी पोस्ट करें

  • नाम *
    ई - मेल *
  • आपकी टिप्पणी लिखें *
  • सत्यापन कोड * Verification Code