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भारत-फ्रांस साइबर सुरक्षा और डिजिटल प्रौद्योगिकी की विस्तृत योजना (22 अगस्त, 2019)

अगस्त 22, 2019

साझा दृष्टिकोण

फ्रांस और भारत आर्थिक उन्नति, सतत विकास और सुरक्षित इंटरनेट उपयोग को बढ़ावा देने के लिए अपने समाज में डिजिटल प्रौद्योगिकी को परिवर्तनकारी कारक बनाना चाहते हैं, जो डिजिटल विभाजन को पाटने के लिए आवश्यक है।अतएव, फ्रांस और भारत डिजिटल प्रौद्योगिकियों के ऐसे दृष्टिकोण की वकालत करते हैं जो नागरिकों को सशक्त बनाती है, असमानताओं को कम करती है और सतत विकास को बढ़ावा देती है।

अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक प्रयास


फ्रांस और भारत एक खुले, विश्वसनीय, सुरक्षित, स्थिर और शांतिपूर्ण साइबर स्पेस के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं। शांति और स्थिरता बनाए रखने और खुले, सुरक्षित, शांतिपूर्ण और सुलभ डिजिटलकरण को बढ़ावा देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय कानून और विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र का चार्टर लागू करने योग्य और आवश्यक है। वे संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के भीतर विकसित विश्वास और क्षमता-निर्माण के उपायों के साथ-साथ साइबर स्पेस में जिम्मेदार राष्ट्र व्यवहार के स्वैच्छिक मानदंडों को बढ़ावा देने और उन्हें लागू करने के महत्व की पुष्टि करते हैं। यह व्यवस्था साइबर स्पेस में शांति और सुरक्षा की नींव है।

फ्रांस और भारत साइबर स्पेस में विश्वास, सुरक्षा और स्थिरता में सुधार करने के लिए, अपनी-अपनी भूमिकाओं में विभिन्न पक्षों की साझा जिम्मेदारी को मान्यता देते हैं। वे खुले, सुरक्षित, स्थिर, सुलभ और शांतिपूर्ण डिजिटल वातावरण को सुनिश्चित करने के लिए बहु-हितधारक दृष्टिकोण को मजबूत करने के लिए कहते हैं और इस बात पर जोर देते हैं कि इसके लिए सरकारों, उद्योग, शिक्षा और नागरिक समाज के संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता है।

प्रशासन, संप्रभुता, और तकनीकी विनियमन

फ्रांस और भारत एक समावेशी और पारदर्शी, खुले डिजिटल वातावरण को बढ़ावा देने के लिए काम करने की इच्छा रखते हैं, जिसमें बहु-हितधारक और इंटरनेट के बहुपक्षीय दृष्टिकोण का संरक्षण करने के द्वारा राष्ट्रों सहित सभी हितधारकों के हितों का सम्मान किया जाता है।

फ्रांस और भारत का मानना है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा सहकारी, सुसंगत, निर्धारित और दृढ़ कार्रवाई के साथ डिजिटल प्रौद्योगिकी का तेजी से विकास और उपयोग होना चाहिए, जिसका उद्देश्य राष्ट्रों के क्षेत्र में स्थित डिजिटल बुनियादी ढांचे पर राष्ट्रों की संप्रभुता की गारंटी देना और साथ ही ऑनलाइन मानवाधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सुरक्षा करना है।

साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग

फ्रांस और भारत साइबर संवाद के अनुसरण और गहनता के महत्व को स्वीकार करते हैं, जिसका तीसरा संस्करण 20 जून, 2019 को पेरिस में आयोजित किया गया था और इस संस्करण के अंत में अपनाए गए संयुक्त वक्तव्य का स्वागत किया गया।

इस संबंध में, वे अंतर्राष्ट्रीय कानून के कार्यान्वयन पर चर्चा के लिए समर्पित विभिन्न बहुपक्षीय मंचों में चल रही चर्चाओं के समर्थन में अपने समन्वय को मजबूत करना चाहते हैं और संयुक्त राष्ट्र के पिछले जीजीई की रिपोर्टों में अपनाए गए साइबर स्पेस में जिम्मेदार राष्ट्र व्यवहार के मानदंडों को लागू करना चाहते हैं।भारत और फ्रांस विशेष रूप से अपनी साइबर सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान के माध्यम से, दुर्भावनापूर्ण गतिविधियों को रोकने और तत्काल सुधारात्मक प्रतिक्रिया करने, उनके संभावित प्रभाव को कम करने और उनके कारणों की पहचान करने के लिए अपने सहयोग को सुदृढ़ करने की इच्छा की भी पुष्टि करते हैं।

फ्रांस और भारत ने डिजिटल प्रक्रियाओं, उत्पादों और सेवाओं की सुरक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए, कानूनी और नियामक ढांचे और सर्वोत्तम प्रथाओं के बारे में जानकारी साझा करने की इच्छा व्यक्त की है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाले आर्थिक सूचना अवसंरचना की सुरक्षा और डिजिटल उत्पादों का परीक्षण और प्रमाणन पर शामिल है। इस संदर्भ में, फ्रांस और भारत 5जी प्रौद्योगिकियों को तैनात करने से जुड़े जोखिमों और उनसे निपटने के लिए अपनाए जाने वाले तकनीकी समाधानों पर साथ मिलकर काम करने की इच्छा रखते हैं।

फ्रांस और भारत ने विशेष रूप से वासेनार व्यवस्था के तहत प्रासंगिक चर्चाओं में सक्रिय रूप से भाग लेकर साइबर स्पेस में दुर्भावनापूर्ण साधनों और प्रथाओं के प्रसार से उत्पन्न होने वाले मुद्दों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता को स्वीकार किया है। वासेनार व्यवस्था में फ्रांस और भारत दोनों देश पक्ष हैं। इसके लिए, फ्रांस और भारत, विशेष रूप से आर्थिक सूचना अवसंरचना की सुरक्षा के संबंध में अपने संबंधित कानूनी और नियामक ढांचे को साझा करने का इच्छा रखते हैं।

फ्रांस और भारत साइबर सुरक्षा, विशेष रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाले और आर्थिक सूचना अवसंरचना में अत्याधुनिक खतरों को संबोधित करने के लिए सभी देशों के बीच एक करीबी सहयोग के महत्व पर प्रकाश डालते हैं।

साइबर अपराध के खिलाफ लड़ाई के क्षेत्र में सहयोग

फ्रांस और भारत मानते हैं कि साइबर अपराध एक अंतर्राष्ट्रीय अपराध है जिसमें साइबर अपराधियों को प्रभावी ढंग से न्याय दिलाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता है। इसलिए, वे इस क्षेत्र में अपने सहयोग को मजबूत करने की योजना बनाते हैं, जिसमें विशेष जानकारी, साक्ष्य संग्रह, अपराधियों की पहचान, विशेष रूप से मैलवेयर डेवलपरों, होस्टरों/होस्टिंग प्लेटफ़ॉर्म प्रदाता या ब्रॉडकास्टरों को साझा करने की सुविधा शामिल है। वे भुगतान के इलेक्ट्रॉनिक साधनों की सुरक्षा के बारे में भी अपनी चिंता व्यक्त करते हैं और एटीएम के बाहरी हिस्से सहित ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं। अंत में, वे सेवा प्रदाताओं, सोशल मीडिया कंपनियों के साथ साइबर साझेदारी की रोकथाम पर चर्चा करने के लिए सूचना साझा करने की व्यवस्था की योजना बनाते हैं।

डिजिटल गवर्नेंस पर सहयोग

विनियमन की चुनौतियांफ्रांस और भारत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए एक वैध, निष्पक्ष और संतुलित दृष्टिकोण के विकास का समर्थन करने में अपने समन्वय को मजबूत करना चाहते हैं। फ्रांस और भारत ने प्रौद्योगिकियों के सार्वजनिक वस्तुओं, डेटा संप्रभुतात्मक मौलिक स्वतंत्रता को संरक्षित करने को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक ढांचा विकसित करने की आवश्यकता को भी स्वीकार किया है।

कृत्रिम बुद्धि का विनियमन

फ्रांस और भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के विकास, विशेष रूप से सतत विकास, ई-गवर्नेंस, स्वतः परिवहन, स्मार्ट शहरों, साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि के क्षेत्र में प्रस्तावित संभावनाओं का स्वागत करते हैं।

फ्रांस और भारत ने नागरिक केंद्रित सेवाओं, कानूनी, नियामक और साइबर सुरक्षा दृष्टिकोण से डेटा संप्रभुता के संदर्भ में एआई नीतियों/ कार्यक्रमों को विकसित और लागू करने की आवश्यकता को स्वीकार किया। फ्रांस और भारत विशेषज्ञता और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करके एआई में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

फ्रांस और भारत अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार, मानव जाति की सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तेजी से विकास को सुनिश्चित करने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय, कानूनी और नैतिक बल के निर्माण के महत्व की पुष्टि करते हैं। वे विभिन्न बहुपक्षीय मंचों (जी7, जी20, संयुक्त राष्ट्र) में इस दिशा में काम करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर अंतर्राष्ट्रीय पैनल (आईपीएआई) में भाग लेने की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं।

ऑनलाइन आतंकवादी, उग्रवादी हिंसक और घृणित सामग्री के विरुद्ध संघर्ष

फ्रांस और भारत आतंकवादी और हिंसक अतिवादी सामग्री के साथ-साथ अवैध रूप से ऑनलाइन घृणास्पद भाषण के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्मों की जिम्मेदारी और जवाबदेही की पुष्टि करते हैं और क्राइस्टचर्च कॉल में निर्धारित सिद्धांतों के लिए अपने समर्थन को दोहराते हैं।

सूचना में फेरबदल को रोकना

फ्रांस और भारत ने सूचनाओं में फेरबदल को रोकने, झूठी खबरें फैलाने और अभिव्यक्ति की ऑनलाइन स्वतंत्रता के महत्व के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। वे जानकारी में फेरबदल, नकली समाचार और व्यक्तिगत डेटा की रूपरेखा के माध्यम से उत्पन्न किए जा सकने वाले खतरों को उजागर करते हैं। फ्रांस और भारत इस खतरे और विशेष रूप से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को विनियमित करने के लिए एक रूपरेखा के विकास पर एक अंतर्राष्ट्रीय विचार विनिमय का आह्वान करते हैं।

व्यक्तिगत जानकारी का संरक्षण

फ्रांस और भारत एक अभिनव डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना चाहते हैं जो उपयोगकर्ताओं की डेटा सुरक्षा के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक हो। यूरोपीय संघ के जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन (जीडीपीआर) के कार्यान्वयन और इस क्षेत्र में पर्याप्त विनियमन को लागू करने के भारत के उद्देश्य के संदर्भ में, दोनों पक्ष यह स्वीकार करते हैं कि यूरोप और भारत के डेटा संरक्षण ढांचे के अभिसरण से सूचना और डेटा के प्रवाह में सुविधा होगी।

डिजिटल विभाजन को कम करना

नागरिकों के जीवन में प्रौद्योगिकी के महत्व और भूमिका को देखते हुए, फ्रांस और भारत डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देने, डिजिटल विभाजन को कम करने और डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए इस संबंध में अपनी राष्ट्रीय नीतियों और अच्छी प्रथाओं पर जानकारी का आदान-प्रदान करके की इच्छा रखते हैं।

इंडो-फ्रेंच डिजिटल साझेदारी

फ्रांस का अर्थव्यवस्था और वित्त मंत्रालय और भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (मेइटी) उपयुक्त तंत्र के माध्यम से इस भारत-फ्रांस डिजिटल साझेदारी के कार्यान्वयन के समन्वय के लिए केंद्रीय बिंदु होंगे।

विनिमय को तेज करने के लिए, दोनों पक्ष भौतिक बैठकों और वीडियो कान्फ्रेंसों द्वारा "भारत-फ्रांस डिजिटल साझेदारी" पर नियमित परामर्श करने की इच्छा रखते हैं।

इस योजना के अंतर्गत आने वाले संगठन फ्रांस और भारत की संस्थाओं की अन्य प्रतिबद्धताओं के साथ, उपयुक्त रूप से बातचीत और समन्वय करेंगे।

1.1. आर्थिक आदान-प्रदान

व्यापार और नवाचारफ्रांस और भारत अपने बाजारों में काम करने के लिए व्यापक क्षेत्र की पेशकश कर डिजिटल क्षेत्र में व्यापार सहयोग को बढ़ावा देना चाहते हैं। इसके अलावा, फ्रांसीसी और भारतीय डिजिटल कंपनियां संयुक्त रूप से बाजार के अवसर के क्षेत्र को एक नए स्तर पर आगे बढ़ाने की दिशा में काम करेंगी और अपने संपन्न तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्रों के बीच अधिक से अधिक संपर्क बनाएंगी।

फ्रांस और भारत पहले से ही डिजिटल क्षेत्र में मजबूत आर्थिक आदान-प्रदान साझा करते हैं– उदाहरण के लिए कई फ्रांसीसी कंपनियों द्वारा किए गए द्विपक्षीय निवेश, जिन्होंने भारत के डिजिटल आउटरीच के साथ ही उन भारतीय फर्मों में भाग लिया है जो फ्रांस में कार्यालय स्थापित कर रही हैं।

फ्रांस और भारत, दोनों देशों में स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र के तेजी से अभिसरण के महत्व को रेखांकित करते हैं और ऐसी पहलों का स्वागत करते हैं जो उद्यमियों को विचारों का आदान-प्रदान करने और परियोजनाओं को साझा करने का अवसर देती हैं। इनमें भारत में फ्रांसीसी डिजिटल कंपनियां और फ्रांस में भारतीय डिजिटल कंपनियां शामिल हैं, जिन्होंने उल्लेखनीय रोजगार उत्पन्न किए हैं। इसके कई उदाहरण हैं, जैसे -पूर्व फ्रांसीसी टेक टिकट पहल, जिसने 13 भारतीय स्टार्ट-अप को फ्रांस में एक ऊष्मायन-त्वरण कार्यक्रम का पालन करने में सक्षम किया।-हमारे दो तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्रों के बीच अधिक आदान-प्रदान करने के लिए हाल ही में शुरू की गई फ्रेंच टेक बैंगलोर इंडिया कम्युनिटी।-एक बिल्कुल नया फ्रेंच टेक वीज़ा, जो भारतीय कर्मचारियों, संस्थापकों और निवेशकों के लिए फ्रेंच टेक इकोसिस्टम में शामिल होने और फ्रांस और भारत के बीच नए पुल बनाने की प्रक्रिया को तेज करता है।-फ्रांस और भारत में टेक इकोसिस्टम के बीच सहयोग के पुल के रूप में फ्रेंच टेक कम्युनिटी बैंगलोर इंडिया और मेइटी स्टार्ट अप हब, आदि।

1.2. अनुसंधान, प्रशिक्षण और शिक्षा

सुपरकंप्यूटिंग, क्वांटम कंप्यूटिंगफ्रांस और भारत इस तथ्य को रेखांकित करते हैं कि उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग डिजिटल क्षेत्र में उनके द्विपक्षीय सहयोग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। वे राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के ढांचे के भीतर अपने सहयोग में हुई प्रगति की सराहना करते हैं, जिससे उच्च प्रदर्शनकारी गणना उपकरणों का संयुक्त विकास सक्षम हुआ है।दोनों पक्ष महानदी की घाटी में जल प्रवाह के अनुरूपण के लिए उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग का उपयोग करने के लिए समर्पित एक इंडो-फ्रेंच प्रैयोगिक परियोजना के शुभारंभ की सराहना करते हैं।

फ्रांस और भारत ने इस सहयोग को तीन प्रमुख क्षेत्रों में और विस्तारित और गहरा करने की अपनी इच्छा की पुष्टि की:

-कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए उपयोग की जाने वाली उच्च निष्पादन कम्प्यूटिंग।

-मात्रात्मक गणना, इस संबंध में वे पुणे में मात्रात्मक गणना में इंडो-फ्रेंच उत्कृष्टता केंद्र के निर्माण की सराहना करते हैं।

-एक्सस्केल गणना।

दोनों पक्ष कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मात्रात्मक गणना, स्मार्ट विनिर्माण और ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक घटकों सहित उभरती प्रौद्योगिकियों में भागीदारी के लिए कार्यक्रमों और विधियों को विकसित करने के लिए सहमत हैं।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) पहल

अपने कंप्यूटर विज्ञान और गणित के संबंधित पाठ्यक्रमों की उत्कृष्टता का लाभ उठाने की आशा करते हुए, फ्रांस और भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता को समर्पित एक इंडो-फ्रेंच अनुसंधान और नवाचार कार्यक्रम विकसित करना चाहते हैं।

एक संघ, शैक्षणिक संस्थानों, मंत्रालयों और संदर्भ कंपनियों को एकजुट कर, स्वास्थ्य, जलवायु, परिवहन, कृषि, आपदा प्रतिक्रिया और स्मार्ट शहरों आदि के क्षेत्रों में परियोजनाओं के आसपास फ्रांस और भारत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता में निहित सभी क्षमताओं का उपयोग करेगा।दोनों पक्ष इस संघ के भाग के रूप में, बुनियादी और अनुप्रयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, प्रशिक्षण और अनुसंधान के लिए छात्रवृत्ति, विशेषज्ञों और अनुसंधान परियोजनाओं के आदान-प्रदान और जागरूकता बढ़ाने के उपायों के लिए प्रतिवर्ष 2 मिलियन यूरो जुटाने की दिशा में काम करेंगे।

यह संघ ज्ञान सम्मेलन के भाग के रूप में वार्षिक बैठक करेगा। इसकी पहली बैठक अक्टूबर 2019 में लियोन में होगी।

पेरिस
22 अगस्त, 2019
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