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लॉस काबोस विकास एवं नौकरी कार्य योजना

जून 21, 2012

विश्‍व अर्थव्‍यवस्‍था में जोखिम और अनिश्‍चितता में पर्याप्‍त वृद्धि हुई है। अब हम मांग, वृद्धि, विश्‍वास एवं वित्‍तीय स्‍थायित्‍व में वृद्धि करने पर सामूहिक रूप से बल दे रहे हैं, ताकि हमारे सभी नागरिकों की रोजगार संबंधी संभावनाओं में सुधार आ सके। आज हमने वैश्‍विक आधार पर समन्‍वित आर्थिक योजना पर अपनी सहमति व्‍यक्‍त की है, जिसका उद्देश्‍य ठोस, सतत एवं संतुलित विकास की हमारी रूपरेखा के जरिए इन लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करना है। यह योजना, जिसमें केंस कार्य योजना का समावेश और विस्‍तार किया गया है, महत्‍वपूर्ण रूप से एक ठोस तथा स्‍थायी आर्थिक सुधार प्राप्‍त करने के हमारे प्रयासों को गहन बनाती है।

लॉस काबोस विकास एवं नौकरी कार्य योजना इस तथ्‍य पर आधारित है कि सहयोग एवं समन्‍वय से बेहतर आर्थिक परिणाम सामने आएंगे। हम निम्‍नलिखित प्रतिबद्धताओं के संबंध में ठोस और निर्णायक कार्रवाई करने की अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त करते हैं।

हमने इस बात पर अपनी सहमति व्‍यक्‍त की है कि सबसे महत्‍वपूर्ण माने जाने वाले जोखिमों के आलोक में हमारे नीतिगत कार्य निम्‍नलिखित पर केन्‍द्रित होने चाहिए :

  • यूरो क्षेत्र में संप्रभु ऋण एवं बैंकिंग संकट का निर्णायक समाधान करना। यूरो क्षेत्र के प्राधिकारियों ने ऐसे अनेक प्रासंगिक और महत्‍वपूर्ण उपाय किए हैं, जिनसे स्‍थिति में स्‍थिरता लाने में मदद मिली है, तथापि जोखिम बने हुए हैं तथा अतिरिक्‍त कार्रवाई की जरूरत है।
  • डिलेवरेजिंग के महत्‍वपूर्ण प्रभावों का मुकाबला सहित वित्‍तीय स्‍थायित्‍व सुनिश्‍चित करना।
  • मांग और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना तथा अनेक उन्‍नत अर्थव्‍यवस्‍थाओं में विशेष रूप से युवाओं के बीच बढ़ती बेरोजगारी में कमी लाना।
  • उन्‍नत अर्थव्‍यवस्‍थाओं में राजकोषीय मजबूती की प्रक्रिया की गति सुनिश्‍चित करना देश विशेष परिस्‍थितियों को ध्‍यान में रखकर टोरंटो प्रतिबद्धताओं के अनुसरण में सुधार का समर्थन करने और मध्‍यम आवधिक राजकोषीय निरंतरता से संबंधित चिंताओं का समाधान करने की दिशा में उपयुक्‍त है।
  • इस संभावना पर विचार करना कि सीमित संसाधनों की पृष्‍ठभूमि में भू-राजनैतिक जोखिमों से आपूर्ति आधारित तेल के मूल्‍यों में वृद्धि हो सकती है।
  • यह सुनिश्‍चित करना कि उभरते बाजार ऐसे ठोस एवं सतत विकास मार्ग पर चलते रहें, जिनसे वैश्‍विक आर्थिक सुधार और अच्‍छी नौकरियों के सृजन में योगदान मिले।
  • संरक्षणवाद का मुकाबला करना तथा बाजारों को मुक्‍त बनाए रखना।

इन जोखिमों का सफलतापूर्वक समाधान करने की हमारी क्षमता स्‍थायित्‍व एवं विकास को बढ़ावा देने हेतु ठोस कार्रवाई करने, राजकोषीय घाटे वाले देशों में सार्वजानिक क्षेत्र से निजी क्षेत्र में संसाधनों के स्‍थानांतरण को प्रोत्‍साहित करने और चालू खाता आधिक्‍य वाले देशों

में वाह्य से घरेलू क्षेत्र में संसाधनों के स्‍थानांतरण सहित अन्‍य तरीकों से जारी असंतुलनों में कमी लाने की हमारी योग्‍यता से प्रभावित होती है। हम इस बात से सहमत हैं कि आंतरिक एवं वाह्य असंतुलनों में कमी लाने के हमारे प्रयासों को गहन बनाने की जरूरत है।

जैसा कि हमने केंस में सहमति व्‍यक्‍त की थी, हमने ठोस, सतत और संतुलित विकास के अपने साझे लक्ष्‍य से संबंधित प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में हुई प्रगति का आकलन करने के लिए लॉस काबोस दायित्‍व आकलन रूपरेखा (अनुबंध क) स्‍थापित की है। यह रूपरेखा तीन तथ्‍यों पर आधारित है।

पहला, यह सुनिश्‍चित करने के लिए मार्ग निर्देशी सिद्धांत कि ये आकलन देशों के स्‍वामित्‍व में; अनुपालन अथवा स्‍पष्‍टीकरण दृष्‍टिकोण पर आधारित; ठोस; सभी सदस्‍यों के लिए एक समान; उचित; मुक्‍त एवं पारदर्शी हों। दूसरा, इसमें समकक्ष प्रक्रिया का सहारा लिया जाए जिसमें विभिन्‍न सदस्‍यों की नीतियों पर चर्चा और अंतर्राष्‍ट्रीय संगठनों से गहन आकलन शामिल हो। अंतत: आकलनों के निष्‍कर्षों का सारांश बनाते हुए नेताओं की वार्षिक रिपोर्ट।

हमने इस रूपरेखा के तहत अपना प्रथम आकलन संचालित किया है (अनुबंध ख)।

हमने इस बात पर अपनी सहमति व्‍यक्‍त की है कि आर्थिक सुधार को बढ़ावा देने और ठोस विकास तथा नौकरियों के सृजन की आधारशिला रखने वाली केंस कार्य योजना में उल्‍लिखित प्रतिबद्धताएं व्‍यापक तौर पर उपयुक्‍त हैं। तथापि, हाल में जोखिमों में हुई वृद्धि से केंस प्रतिबद्धताओं के कार्यान्‍वयन और इससे आगे बढ़ने के महत्‍व में वृद्धि हुई है। केंस कार्य योजना के कुछ तत्‍वों को पूरा करने में अच्‍छी प्रगति हुई है परंतु अनेक क्षेत्रों में और प्रगति की जरूरत है। हम जारी दायित्‍व आकलन में भाग लेंगे और लॉस काबोस में दायित्‍व रूपरेखा में निर्धारित प्रगति का आकलन करने के लिए किए जाने वाले उपायों में सुधार लाएंगे।

नीचे दी गई लॉस काबोस योजना में लघु एवं मध्‍यम आवधिक प्रभावों के साथ अनेक नीतिगत उपाय शामिल किए गए हैं, जिसका उद्देश्‍य यह सुनिश्‍चित करना है कि नीतिगत विश्‍वसनीयता का संवर्धन हो और विशेष क्षेत्रों में अनुक्रिया व्‍यक्‍त करने के लिए विभिन्‍न देशों की विभिन्‍न क्षमताओं को प्रतिबिंबित किया जाए।

लघु आवधिक जोखिमों का समाधान, विश्‍वास की बहाली और विकास का संवर्धन

  • एक साझी सहमति इस योजना के केन्‍द्र में है कि जोखिमों को न्‍यूनतम बनाने और विकास को बढ़ावा देने की दिशा में सबसे सुदृढ़ कार्रवाइयां वे होंगी, जिनसे स्‍थायित्‍व को बढ़ावा मिले और राजकोषीय एवं मौद्रिक नीतिगत कार्रवाइयों के जरिए हमारी वित्‍तीय प्रणालियों के समुचित कार्यकरण में मदद मिले।

    लघु आवधिक जोखिमों को दूर करने, विश्‍वास बहाल करने, आर्थिक एवं वित्‍तीय स्‍थायित्‍व सुनिश्‍चित करने तथा आर्थिक सुधार को बढ़ावा देने के लिए हमने निम्‍नलिखित कार्रवाइयों पर अपनी सहमति व्‍यक्‍त की है:

    यूरो क्षेत्र के जी-20 सदस्‍य अपने क्षेत्र की अखण्‍डता को संरक्षित रखने, वित्‍तीय बाजारों के कार्यक्रम में सुधार लाने और संप्रभुओं एवं बैंकों के बीच सूचना सामग्रियों के अभाव को समाप्‍त करने के लिए सभी आवश्‍यक उपाय करेंगे। वित्‍तीय स्‍थिरता सुनिश्‍चित करने तथा राजकोषीय जिम्‍मेदारी को बढ़ावा देने के लिए यूरो क्षेत्र द्वारा पिछले शिखर सम्‍मेलन के बाद से किए गए कार्यों का स्‍वागत करते हैं।
    1. इस संदर्भ में हम बैंकिंग प्रणाली में पूंजी का प्रवाह बढ़ाने संबंधी स्‍पेन की योजना और स्‍पेन के वित्‍तीय पुनर्गठन प्राधिकरण का समर्थन करने की यूरो ग्रुप की घोषणा का स्‍वागत करते हैं। राजकोषीय कॉम्‍पेक्‍ट और इसका सतत कार्यान्‍वयन तथा विकास को बढ़ावा देने वाली नीतियां एवं ढांचागत सुधार एवं वित्‍तीय स्‍थायित्‍व के उपाय राजकोषीय एवं आर्थिक एकीकरण के संबंध में महत्‍वपूर्ण कदम हैं, जिनसे सतत ऋण लागतों को बढ़ावा मिलेगा। यूरोपीय स्‍थायित्‍व तंत्र की भावी स्‍थापना यूरोपीय सुरक्षोपाय के संवर्धन का महत्‍वपूर्ण तंत्र है।
    2. हम आर्थिक एवं मौद्रिक संघ का कार्य पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ने में यूरो क्षेत्र के कार्यों का समर्थन करते हैं। इस प्रयोजनार्थ हम समेकित वित्‍तीय रूपरेखा, समावेशी बैंकिंग सर्वेक्षण, संकल्‍प तथा पूंजी प्रवाह एवं बीमा की दिशा में ठोस उपायों पर विचार करने की मंशा का समर्थन करते हैं।
    3. यूरो क्षेत्र के सदस्‍य घाटे वाले देशों में प्रतिस्‍पर्धा तथा आधिक्‍य वाले देशों में मांग एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए ढांचागत सुधारों के जरिए अंतर-यूरोपीय क्षेत्र समायोजन को बढ़ावा देंगे।
    4. यूरोपीय संघ के जी-20 सदस्‍य देश यूरोपीय एकल बाजार का कार्य पूरा करने और यूरोपीय निवेश बैंक, पायलट परियोजना बॉण्‍ड, ढांचा एवं सामंजस्‍य कोष जैसे यूरोपीय वित्‍तीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए निवेश, विकास एवं प्रतिस्‍पर्धा बढ़ाने के लिए वचनबद्ध हैं जबकि ढांचागत आधार पर आकलन किए जाने के लिए राजकोषीय मजबूती को कार्यान्‍वित करने की ठोस प्रतिबद्धता भी वे व्‍यक्‍त करते हैं।
  • हमारी सभी अर्थव्‍यवस्‍थाओं में राजकोषीय नीतियों के तहत इस तरीके से आर्थिक सुधार को सुदृढ़ बनाने और कायम रखने पर बल दिया जाएगा कि इससे नीतिगत विश्‍वासनीयता को बढ़ावा मिले।
    1. आमतौर पर उन्‍नत अर्थव्‍यवस्‍थाएं वर्ष 2010 और 2013 के बीच अपने घाटे को आधा करने की लघु आवधिक प्रतिबद्धता को पूरा करने की दिशा में सही मार्ग पर है। उन्‍नत अर्थव्‍यवस्‍थाएं विश्‍वसनीय लघु आवधिक राजकोषीय मजबूती योजनाओं का कार्यान्‍वयन करने के जरिए मध्‍यम आवधिक टोरंटो प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए वचनबद्ध हैं।
    2. मांग और आर्थिक सुधार का समर्थन करने वाली विकासोन्‍मुख नीतियों का अनुपालन करने की आवश्‍यकता को स्‍वीकार करते हुए संयुक्‍त राज्‍य अमरीका भी यह सुनिश्‍चित करते हुए राजकोषीय मजबूती की गति बढ़ाएगा कि इसका सार्वजनिक धन एक सतत मार्ग पर लगा हुआ है, जिससे कि वर्ष 2013 में अत्‍यधिक राजकोषीय संकुचन से बढ़ा जा सके।
    3. जापान यथासंभव शीघ्र पुनर्निर्माण पर होने वाले व्‍यय की योजनाओं को कार्यान्‍वित करेगा।
    4. आस्‍ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, जर्मनी, इण्‍डोनेशिया, कोरिया और यूनाइटेड किंगडम तथा अमेरिका अपनी-अपनी राष्‍ट्रीय परिस्‍थितियों और मांग की वर्तमान स्‍थितियों को ध्‍यान में रखते हुए राजकोषीय स्‍थिरकों को कार्य करने की अनुमति दे रहे हैं। इटली भी विकास को बढ़ावा देने वाले उपायों के साथ-साथ राजकोषीय मजबूती से संबद्ध कार्यसूची पर कार्य करेगा।
    5. स्‍पेन के राजकोषीय नीति में भी वित्‍तीय मजबूती पर बल दिया जाएगा।
  • मौद्रिक नीतियां मूल्‍य स्‍थायित्‍व तथा वैश्‍विक आर्थिक सुधार को कायम रखने पर केन्‍द्रित होंगी। इस संदर्भ में उन्‍नत देशों के केन्‍द्रीय बैंकों द्वारा की जाने वाली कार्रवाइयों की वैश्‍विक आर्थिक विकास एवं स्‍थायित्‍व के संवर्धन में महत्‍वपूर्ण भूमिका होगी। इस उद्देश्‍य को प्राप्‍त करने के लिए केन्‍द्रीय बैंक सजग रहेंगे और यथा उपयुक्‍त कार्रवाई करेंगे।
  • हमारे केन्‍द्रीय बैंक, वित्‍तीय बाजार के पर्यवेक्षक तथा कोषागार एक दूसरे से संवाद करते रहेंगे और उच्‍च अनिश्‍चितता की अवधि के दौरान वित्‍तीय स्‍थायित्‍व कायम रखने के लिए एफएसबी के जरिए एक दूसरे से सहयोग करेंगे।

    हम वित्‍तीय क्षेत्र के संस्‍थागत सुधारों से संबंधित गतिशीलता कायम रखने में जो हमारी वित्‍तीय प्रणालियों को संरक्षित रखने के लिए आवश्‍यक है। इसके साथ ही हम ऋण चैनलों को संरक्षित रखने तथा वैश्‍विक भुगतान एवं निपटान प्रणालियों की क्षमता को बनाए रखने के लिए भी उपयुक्‍त कार्रवाई करेंगे।
  • यदि आर्थिक स्‍थिति और बदतर होती है तो अर्जेंटीना, आस्‍ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, जर्मनी, कोरिया, रूस और अमरीका राष्‍ट्रीय परिस्‍थितियों एवं प्रतिबद्धताओं को ध्‍यान में रखकर मांग को बढ़ावा देने हेतु अतिरिक्‍त उपायों को कार्यान्‍वित और समन्‍वित करने के लिए तैयार हैं।
  • उभरते बाजार घरेलू मांग का समर्थन करने के लिए अपनी वृहत आर्थिक नीतियों के साथ सामंजस्‍य स्‍थापित करेंगे जबकि मूल्‍य में भी स्‍थायित्‍व सुनिश्‍चित करेंगे।
  • इस बात को स्‍वीकार करते हुए भू-राजनैतिक जोखिमों से आपूर्ति में कमी के कारण तेल के मूल्‍यों में वृद्धि हो सकती है, सदस्‍य देश आवश्‍यकता पड़ने पर अतिरिक्‍त कार्रवाइयां करने के लिए भी तैयार हैं। हम तेल उत्‍पादक देशों द्वारा पर्याप्‍त आपूर्ति सुनिश्‍चित करने संबंधी उनकी प्रतिबद्धता का स्‍वागत करते हैं। विशेषकर हम आवश्‍यकता पड़ने पर वर्तमान क्षमता के अतिरिक्‍त प्रतिदिन 2.5 मिलियन बैरल तेल उपलब्‍ध कराने संबंधी सऊदी अरब की इच्‍छा का स्‍वागत करते हैं।
  • सभी नीतिगत क्षेत्रों में हम घरेलू प्रयोजनों के लिए कार्यान्‍वित नीतियों पर अन्‍य नकारात्‍मक प्रभावों को न्‍यूनतम बनाने की प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त करते हैं। हम एक सुदृढ़ एवं स्‍थिर अंतर्राष्‍ट्रीय वित्‍तीय प्रणाली तथा बाजार द्वारा नियंत्रित विनिमय दर कायम रखने में अपनी साझी रुचि की पुष्‍टि करते हैं। हम इस बात की भी पुष्‍टि करते हैं कि विनिमय दरों में अत्‍यधिक उतार-चढ़ाव और अव्‍यवस्‍थित गतिशीलता से आर्थिक एवं वित्‍तीय स्‍थायित्‍व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

विकास की मध्‍यम आवधिक आधारशिलाओं का संवर्धन


सभी सदस्‍य विश्‍वास बहाल करने, वैश्‍विक उत्‍पादन बढ़ाने और नौकरियों का सृजन करने के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर बल देते हुए केंस में विकसित छ: सूत्रीय योजना से आगे बढ़ने पर अपनी सहमति व्‍यक्‍त करते हैं।

  • उन्‍नत अर्थव्‍यवस्‍थाएं यह सुनिश्‍चित करेंगी कि उनका राजकोषीय वित्‍त सतत मार्ग पर हो।
    1. अपनी मध्‍यम आवधिक राजकोषीय मजबूती योजनाओं को सुदृढ़ बनाने और कार्यान्‍वित करने के महत्‍व को स्‍वीकारते हुए अमरीका और जापान ऐसी कार्रवाइयों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त करते हैं, जिनसे सार्वजनिक ऋण-सकल घरेलू उत्‍पाद के अनुपात में निरंतर कमी आई।
    2. अमरीका एक संतुलित नजरिए के आधार पर अपने संघीय ऋण-सकल घरेलू उत्‍पाद अनुपात को ठोस अधोगामी मार्ग पर बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
    3. जापान वित्‍तीय वर्ष 2015 से वित्‍तीय वर्ष 2020 के लिए अपने आरंभिक संतुलन लक्ष्‍यों को बनाए रखने और वित्‍तीय वर्ष 2021 के बाद से अपने ऋण-सकल घरेलू उत्‍पाद अनुपात में कमी लाने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्‍टि करता है।
    4. अगले शिखर सम्‍मेलन तक विभिन्‍न सदस्‍य देश वर्ष 2016 के आगे से ऋण-सकल घरेलू अनुपात के लिए उन देशों में विश्‍वसनीय और महत्‍वाकांक्षी देश विशेष लक्ष्‍यों की पहचान करने पर अपनी सहमति व्‍यक्‍त करते हैं,

      जिनमें फिलहाल ये विद्यमान नहीं हैं। इसके साथ ही इन्‍हें प्राप्‍त करने के लिए स्‍पष्‍ट रणनीतियों एवं समय सीमाओं का सहारा लिया जाएगा। इन रणनीतियों के आधार पर पात्रताओं में संशोधन सहित कर एवं व्‍यय सुधारों पर भी विचार किया जाएगा।
  • हम चालू खाता आधिक्‍य वाले देशों में घरेलू मांग में वृद्धि करने, राजकोषीय घाटा वाले देशों में सार्वजनिक से निजी क्षेत्र की दिशा में बढ़ने तथा चालू खाता घाटा वाले देशों में राष्‍ट्रीय बचत में वृद्धि करने के जरिए वैश्‍विक मांग में पुन: संतुलन स्‍थापित करने के प्रयासों को गहन बनाएंगे।
    1. चालू खाता घाटे वाली उन्‍नत अर्थव्‍यवस्‍थाओं में निजी बचत को बढ़ावा देने के लिए ढांचागत राजकोषीय घाटों में कमी लाने से वैश्‍विक असंतुलनों को स्‍थायी रूप से समाप्‍त करने में योगदान मिलेगा।
    2. हम बाजार द्वारा निर्धारित मुद्रा विनिमय प्रणालियों और विनिमय दर लोचनीयता को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्‍टि करते हैं, जिससे कि अंतर्निहित मूलभूत तत्‍वों को प्रतिबिंबित किया जा सके, मूल्‍य में लगातार होने वाले उतार-चढ़ाव से बचा जा सके और विभिन्‍न मुद्राओं के प्रतिस्‍पर्धी मूल्‍यांकन से परहेज किया जा सके। हम चीन के और रूस में विनिमय दरों के लिए फ्लक्‍चुएशन बॉण्‍ड में वृद्धि करने संबंधी महत्‍वपूर्ण निर्णय को स्‍वीकार करते हैं।

      चीन ने अपने मुद्रा संचयन की गति को कम करने, आरएमबी की गतिशीलता को निर्धारित करने में बड़ी भूमिका निभाने के लिए बाजार के बलों को अनुमति प्रदान करने और अपनी विनिमय नीति में पारदर्शिता लाने की प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की है। हम विनिमय दर व्‍यवस्‍था में सुधार जारी रखने की चीन की प्रतिबद्धता का स्‍वागत करते हैं।
    3. उभरते बाजार व्‍याज दरों के उदारीकरण को बढ़ावा देकर (चीन) और निवेश में वृद्धि करके (ब्राजील) और बचत दरों में वृद्धि करके मांग संतुलन स्‍थापित करने हेतु अतिरिक्‍त कार्रवाई करेंगे।
    4. आधिक्‍य वाली उन्‍नत अर्थव्‍यवस्‍थाएं अथवा अपेक्षाकृत कमजोर निजी मांग वाली अर्थव्‍यवस्‍थाएं, सेवा क्षेत्रों को और उदार बनाने के जरिए (कोरिया, जर्मनी, जापान); अकुशलताओं का उन्‍मूलन करने के जरिए निवेश को प्रोत्‍साहित करने (जर्मनी); और पर्यावरण एवं स्‍वास्‍थ्‍य (जापान) जैसे क्षेत्रों में नव-प्रवर्तन के जरिए नए उद्योगों और नए बाजारों का सृजन करके घरेलू मांग को बढ़ावा देने में सहायता प्रदान करेंगे। जर्मनी में हाल में परिवारों की वास्‍तविक आय से संबंधित घटनाओं से घरेलू मांग को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी और यूरो क्षेत्र के भीतर आंतरिक पुनर्संतुलन की प्रक्रिया में तेजी आएगी।
    5. तेल निर्यातक देश उत्‍पादक सार्वजनिक निवेश को बढ़ावा देना जारी रखेंगे और निजी निवेशों को प्रोत्‍साहित करेंगे, जिसका क्षेत्रीय और वैश्‍विक स्‍तर पर सकारात्‍मक प्रभाव पड़ सकता है। ये देश राजस्‍व के संवेदनशीलत स्‍वरूप को ध्‍यान में रखकर राजकोषीय निरंतरता भी सुनिश्‍चित करेंगे।
  • केंस में विभिन्‍न देशों ने वैश्‍विक मांग को बढ़ावा देने और कायम रखने, नौकरियों के सृजन को प्रोत्‍साहित करने, वैश्‍विक पुनर्संतुलन में योगदान करने और जी-20 के सभी देशों में विकास क्षमताओं में वृद्धि करने के उद्देश्‍य से ढांचागत सुधारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की थी।

    अभी भी ये महत्‍वपूर्ण प्रतिबद्धताएं बनी हुई हैं जो केंस के बाद से किए गए अतिरिक्‍त सुधारों और प्रतिबद्धताओं में प्रतिबिंबित होती हैं:
    1. रोजगार बढ़ाने और श्रमिक बल की भागीदारी में वृद्धि करने के लिए श्रम बाजार सुधार जैसे कि: दीर्घावधिक बेरोजगारी से बचना (अमरीका); कौशल विकास (स्‍पेन); मजदूरी का विकेंद्रीकरण करते हुए मजदूरी लोचनीयता में वृद्धि (इटली); श्रम कर अंतरों में कमी (ब्राजील, इटली); नौकरियों के सृजन को बढ़ावा देने में प्रभावी बनाने हेतु रोजगार बीमा क्षेत्र में सुधार (कनाडा); शिक्षा संवर्धन, प्रशिक्षण और कौशल विकास (आस्‍ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, तुर्की, दक्षिण अफ्रीका);

      लाभ प्रणाली में सुधार तथा रियायती बाल स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं उपलब्‍ध कराकर श्रम बल में महिलाओं और बच्‍चों की भागीदारी को प्रोत्‍साहित करना (आस्‍ट्रेलिया, जर्मनी, जापान, कोरिया); युवाओं एवं अक्षम व्‍यक्‍तियों जैसे लक्षित समूहों के लिए रोजगार के अवसरों में सुधार (कनाडा, कोरिया, यूके); अप्रेंटिंसशिप के जरिए युवा कामगारों की भागीदारी को प्रोत्‍साहित करना (यूके); और बेहतर सुरक्षा अथवा कौशल विकास के जरिए औपचारिक क्षेत्र में रोजगार को बढ़ावा देना (ब्राजील, इण्‍डोनेशिया, मैक्‍सिको, दक्षिण अफ्रीका)।
    2. प्रमुख क्षेत्रों में प्रतिस्‍पर्धा को बढ़ावा देने और उत्‍पादकता में वृद्धि करने के लिए उत्‍पाद बाजार सुधार (आस्‍ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, मैक्‍सिको);
    3. आवासन क्षेत्र में स्‍थायित्‍व को बढ़ावा देने के लिए कार्रवाई (अमरीका);
    4. गरीबों के लिए लक्षित सहायता प्रदान करना अथवा सामाजिक सुरक्षा जाल को मजबूत बनाना (भारत, इण्‍डोनेशिया, चीन, मैक्‍सिको, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका)।
    5. उन्‍नत एवं उभरती अर्थव्‍यवस्‍थाओं में विकृति पैदा करने वाली सब्‍सिडी को मध्‍यम अवधि के भीतर चरणबद्ध तरीके से समाप्‍त करना।
    6. उत्‍पादकता को बढ़ावा देने के लिए कर और लाभ सुधार लाना और कार्य के प्रोत्‍साहनों को बढ़ावा देना (आस्‍ट्रेलिया, जर्मनी, इटली, यूके);
    7. व्‍यवसाय के विस्‍तार की प्रक्रिया के समक्ष बाधाओं को दूर करके आर्थिक विकास का समर्थन करने हेतु विनियमन सुधारों की योजना (यूके);
    8. प्रमुख क्षेत्रों में लगाए गए एकपक्षीय टैरिफ उन्‍मूलन के जरिए व्‍यापार उदारीकरण को प्रोत्‍साहन देना (कनाडा);
    9. अवसंरचना क्षेत्र में निवेशों को बढ़ावा देना ताकि बाधाओं को दूर करते हुए मध्‍यम अवधि में उत्‍पादकता और जीवन स्‍तर में सुधार लाया जा सके (अर्जेंटीना, आस्‍ट्रेलिया, ब्राजील, भारत, इण्‍डोनेशिया, मैक्‍सिको, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, यूके); और
    10. हरित और स्‍थायी विकास को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धताएं (आस्‍ट्रेलिया, कोरिया, जर्मनी, मैक्‍सिको)।
  • हमने वित्‍तीय क्षेत्र के विनियमन और पर्यवेक्षण को सुदृढ़ बनाने की दिशा में ठोस प्रगति की है। वर्तमान वैश्‍विक आर्थिक चुनौतियों से सहमत वित्‍तीय सुधारों को प्रभावी तरीके से लागू करने की हमारी प्रतिबद्धता की आवश्‍यकता रेखांकित होती है। इसके आधार पर वित्‍तीय क्षेत्र को और भी लोचनीय, स्‍थिर एवं आर्थिक विकास को समर्थन प्रदान करने के योग्‍य बनाया जाएगा।

    हम अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्राकोष और विश्‍व बैंक के साथ मिलकर एफएसबी के कार्यों का स्‍वागत करते हैं, जिनमें ईएमडीई के परिणामों के संबंध में नियामक सुधारों की सीमा पर सहमति व्‍यक्‍त की गई थी। जी-20 के सदस्‍य देश अन्‍य मानक निर्धारकों के सहयोग से एफएसबी के साथ लगातार कार्य कर रहे हैं, जिसका उद्देश्‍य प्रगति पर नजर रखना है। वे नियमित आधार पर इसकी रिपोर्ट भी दे रहे हैं। इसे वित्‍तीय समावेश में वृद्धि करने के प्रयासों द्वारा संपूरित भी किया जाएगा।
  • हम संरक्षणवाद के सभी स्‍वरूपों का प्रतिरोध करने और मुक्‍त व्‍यापार को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्‍टि करते हैं और इसलिए हम व्‍यापार पर प्रतिबंध लगाने वाले उन उपायों का विरोध करेंगे जो विश्‍व व्‍यापार संगठन की शर्तों के अनुरूप नहीं हैं। इसके साथ ही वित्‍तीय संरक्षणवाद का भी विरोध करेंगे।
  • सदस्‍य देश विकासशील देशों में विकास क्षमताओं एवं आर्थिक लोचशीलता को ईष्‍टतम बनाने के लिए कार्रवाइयों की प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त करते हैं ये देश उन्‍नत देशों द्वारा व्‍यक्‍त आर्थिक प्रतिबद्धताओं को पूरा करने और घरेलू एवं विदेश धन एकत्र करने तथा विकास जरूरतों को पूरा करने के लिए धन प्राप्‍ति के नए साधनों का पता लगाने के महत्‍व पर भी बल देते हैं।

    इन कार्रवाइयों से बहुपक्षीय एवं द्विपक्षीय दाताओं के प्रयासों को संपूरित किया जा सकेगा और सहस्‍त्राब्‍दि विकास लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करने में विकासशील देशों को सहायता प्रदान की जा सकेगी। उभरते बाजार के सदस्‍य देश विकास को बढ़ावा देने के लिए सुधारों को प्रभावी बनाने के लिए अनेक कार्रवाइयां करेंगे, जिनमें निवेश के परिवेश में सुधार लाना और अवसंरचना क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना शामिल है।

    देश विशेष सुधार प्रतिबद्धताओं के ब्‍यौरे मैक्‍सिको के अध्‍यक्षताकाल की वेबसाइट पर उपलब्‍ध हैं।

    हम आर्थिक परिस्‍थितियों के उभरने के साथ-साथ भविष्‍य में नीतियों का समन्‍वय करना जारी रखेंगे। हम अपने वित्‍त मंत्रियों से आगामी महीनों में कमजोरियों को दूर करने और आर्थिक सुधार की प्रक्रिया कायम रखने के संदर्भ में मिलकर कार्य करने का अनुरोध करते हैं। हम 2013 में सेंटपीटर्सबर्ग में आयोजित होने वाले शिखर सम्‍मलन में अपनी सभी प्रतिबद्धताओं की प्रगति की समीक्षा करेंगे।

अनुबंध क :

लॉस काबोस दायित्‍व आकलन रूप रेखा


जी-20 सदस्‍य देशों ने तीन आधारशिलाओं पर आधारित एक दायित्‍व आकलन रूपरेखा का विकास किया है। इस रूपरेखा का उपयोग पिछली प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में हुई प्रगति पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए किया जाएगा, जिससे भावी कार्य योजनाओं एवं घरेलू नीतियों का विकास हो सकेगा।

मार्ग निर्देशी सिद्धांत

यह सुनिश्‍चित करने के लिए कि यह रूपेरखा सदस्‍यों की जरूरतों को पूरा करे, सदस्‍यों ने निम्‍नलिखित पर सहमति व्‍यक्‍त की है:

  • देश के स्‍वामित्‍व और देश के नेतृत्‍व में सदस्‍यों के आकलन पर आधारित तथा स्‍वतंत्र तृतीय पक्ष मूल्‍यांकन सूचनाओं के साथ (अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्राकोष एवं अन्‍य अंतर्राष्‍ट्रीय संगठनों द्वारा)।
  • कठोर अनुपालन एवं स्‍पष्‍टीकरण नजरिए पर आधारित, जिसमें इस बात को स्‍वीकार किया गया है कि नीतिगत कार्यों में समय लगेगा और नीतिगत प्राथमिकताओं में बदलाव लाए जाने की जरूरत है।
  • चर्चाओं पर बल देने और प्रगति का आकलन करने में सहायता करने हेतु यथासंभव ठोस एवं मात्रात्‍मक उपायों का उपयोग करना।
  • व्‍यवहार की समानता सुनिश्‍चित करने के लिए सदस्‍यों द्वारा देश विशेष परिस्‍थितियों के अनुरूप कार्य करना।
  • स्‍व-आकलन तथा निष्‍पक्ष, तृतीय पक्ष विश्‍लेषण के जरिए सदस्‍य देशों के बीच निष्‍पक्ष एवं मुक्‍त संवाद को बढ़ावा देना।
  • जी-20 की सहमति के बाद जनता को संप्रेषित समग्र परिणामों के साथ खुलापन एवं पारदर्शिता।

तृतीय पक्ष मूल्‍यांकनों द्वारा सूचित समकक्ष समीक्षा प्रक्रिया

समकक्ष समीक्षा प्रक्रिया के केन्‍द्र में जिम्‍मेदारी आकलन प्रक्रिया है, जिसमें विभिन्‍न सदस्‍य देश जी-20 के पिछली राजकोषीय, वित्‍तीय, ढांचागत मौद्रिक एवं विनिमय दर,

व्‍यापार एवं विकास नीति प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में हुई प्रगति का आकलन करेंगे। चर्चाओं की प्रभाविता में वृद्धि करने के लिए इस प्रक्रिया में सभी नीतिगत क्षेत्रों में उन प्रतिबद्धताओं पर बल दिया गया है, जिनमें नीतियों का समन्‍वय लघु आवधिक जोखिमों को कम करने तथा ठोस सतत एवं संतुलित विकास को बढ़ावा देने में सबसे अधिक प्रभावी हो।

समकक्ष समीक्षा चर्चाओं में निम्‍नलिखित तत्‍वों को शामिल किया जाएगा :

  • विभिन्‍न प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए सदस्‍यों द्वारा की गई नीतिगत कार्रवाइयों की समीक्षा और चर्चा।
  • ठोस, सतत एवं संतुलित विकास लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करने की दिशा में की गई प्रगति का आकलन करने हेतु वैश्‍विक आर्थिक नजरिए पर चर्चा।
  • 'संकेतात्‍मक दिशानिर्देशों' के विरुद्ध सदस्‍य देशों का आकलन (लगभग प्रत्‍येक 2 वर्ष में), जिसे हमने विशाल एवं सतत असंतुलनों की पहचान करने के उद्देश्‍य से केंस में समर्थन दिया था। अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्राकोष द्वारा उन देशों के लिए तैयार नई (अथवा अद्यतन) वाह्य निरंतरता रिपोर्टों पर चर्चा, जिन देशों में देशानिर्देशों से इस बात का संकेत मिलता हो कि वहां और विश्‍लेषण की आवश्‍यकता है।
  • आकलन प्रक्रिया की निष्‍पक्षता में वृद्धि करने के उद्देश्‍य से अंतर्राष्‍ट्रीय संगठनों (अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्रा कोष, ओईसीडी, विश्‍व बैंक, एफएसबी, आईएलओ, अंकटाड तथा विश्‍व व्‍यापार संगठन) की रिपोर्टों की समीक्षा।

इस रूपरेखा की विश्‍वसनीयता और अखण्‍डता सुनिश्‍चित करने के लिए हम अपने अधिकारियों को मुद्दों की आपसी समझ पर आधारित समकक्ष समीक्षा चर्चाओं को बढ़ावा देने के तौर तरीकों का पता लगाते हुए दायित्‍व आकलन रूपरेखा का और संवर्धन करने का कार्य सौंपते हैं। हम राजकोषीय, मौद्रिक, विनिमय दर तथा अन्‍य नीतियों के संदर्भ में पूर्व की प्रतिबद्धताओं से संबंधित प्रगति को मापने के लिए एक साझे नजरिए पर सहमत होने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

इसके साथ ही हम इस बात पर भी सहमत होते हैं कि ये प्रतिबद्धताएं विशिष्‍ट, माप योग्‍य एवं प्रासंगिक होनी चाहिए, जिनके आधार पर ठोस सतत एवं संतुलित विकास प्राप्‍त किया जा सके। हम नवंबर, 2012 में मैक्‍सिको सिटी में आयोजित होने वाली अपने वित्‍त मंत्रियों एवं केन्‍द्रीय बैंक के गवर्नरों की बैठक में उन्‍हें प्रगति की समीक्षा करने का कार्य सौंपते हैं।

मंत्रियों/गवर्नरों/नेताओं को नियमित रिपोर्टें :

समकक्ष समीक्षा चर्चाओं की परिणति लघु प्रगति रिपोर्टें के रूप में होगी, जिन्‍हें मंत्रिस्‍तरीय बैठकों एवं मंत्रियों, गवर्नरों एवं नेताओं के लिए नियमित वार्षिक दायित्‍व आकलनों के लिए तैयार किया जाएगा। ये आकलन ठोस नीतिगत प्रतिबद्धताओं की सीमा सूचित करने के संदर्भ में महत्‍वपूर्ण सूचनाएं उपलब्‍ध कराएंगे, जिन्‍हें जी-20 कार्य योजनाओं में शामिल किया जा सकेगा।

अनुबंध ख:

लॉस काबोस दायित्‍व आकलन


जी-20 ने वर्ष 2009 में पिट्सबर्ग में ठोस, सतत एवं संतुलित विकास की रूपरेखा का शुभारंभ किया था, जिसका उद्देश्‍य वर्ष 2007-8 के वित्‍तीय संकट की विरासत से पार पाने के लिए अपेक्षित नीतिगत कार्रवाइयों को बढ़ावा देना और विश्‍व अर्थव्‍यवस्‍था को ठोस, सतत एवं संतुलित आर्थिक विकास एवं नौकरियों के मार्ग पर वापस लाना था। इस संकट के अनुक्रिया स्‍वरूप जी-20 देशों द्वारा की गई साहसिक नीतिगत कार्रवाइयों से उत्‍पाद एवं नौकरियों में कमी की रफ्तार थमी और वैश्‍विक पुनरुत्‍थान का मार्ग प्रशस्‍त हुआ।

हालांकि तब से महत्‍वपूर्ण नीतिगत कार्रवाइयों को कार्यान्‍वित किया गया है, परंतु पिट्सबर्ग में हुई सहमति के अनुसार ठोस, सतत एवं संतुलित विकास प्राप्‍त करने का हमारा लक्ष्‍य अभी काफी दूर है। यह स्‍पष्‍ट है कि सभी उन्‍नत अर्थव्‍यवस्‍थाओं में सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के तुलन पत्रों के निर्माण के कार्य से कुछ समय तक वैश्‍विक प्रगति में बाधा आएगी। इसके अतिरिक्‍त जैसा कि ऊपर कहा गया है, वैश्‍विक विकास के मार्ग में अभी भी अनेक बाधाएं हैं।

अधिकांश उन्‍नत अर्थव्‍यवस्‍थाओं में निजी मांग में वृद्धि नहीं हो पा रही है। हालांकि उभरती बाजार अर्थव्‍यवस्‍थाओं में विकास की दर अपेक्षाकृत ठोस रही है, परंतु इसके सुस्‍त होने के भी संकेत मिल रहे हैं। भिन्‍न विकास स्‍वरूपों को प्रतिबिंबित करते हुए उभरती बाजार अर्थव्‍यवस्‍थाओं में बेरोजगारी की दर आमतौर पर संकट पूर्व के स्‍तर से नीचे आई है जबकि उन्‍नत अर्थव्‍यवस्‍थाओं में बेरोजगारी दर में काफी वृद्धि हुई है।

संकट पूर्व अवधि के दौरान विशाल असंतुलनों की तुलना में बाह्य असंतुलनों में आमतौर पर कमी आई है। ढांचागत नीति समायोजनों ने कुछ देशों ने महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है, परंतु यह सुधार चक्रीय प्रभावों को भी प्रतिबिंबित करता है, विशेषकर अनेक उन्‍नत अर्थव्‍यवस्‍थाओं की अपेक्षाकृत कमजोर चक्रीय स्‍थिति और व्‍यापार के संबंध में गतिशीलता। तेल निर्यातक देशों के पास विशाल चालू खाता आधिक्‍य है।

संतुलन के संदर्भ में पिट्सबर्ग के बाद हुए घटनाक्रमों से संकेत मिलता है कि रूपरेखा की स्‍थापना के समय निर्धारित लक्ष्‍यों को पूरा करने के लिए सभी नीतिगत क्षेत्रों में ठोस प्रयास करने की आवश्‍यकता है।

राजकोषीय नीति

टोरंटो राजकोषीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में अच्‍छी प्रगति हुई है, हालांकि आशा के विपरीत कमजोर आर्थिक परिणामों से कुछ देशों में राजकोषीय समायोजन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। कुछ देशों में सार्वजनिक वित्‍त को सतत मध्‍यम आवधिक मार्ग पर स्‍थापित करने के लिए राजकोषीय नीति की विश्‍वसनीयता को बढ़ावा देने की आवश्‍यकता है :

अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्राकोष द्वारा अनुमान लगाया गया है कि अधिकांश सदस्‍य देश (आस्‍ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी और इटली) अपने घाटों को वर्ष 2010 के स्‍तर से आधा करने संबंधी टोरंटो लक्ष्‍य को प्राप्‍त कर लेंगे।1 कुछ मामलों में ठोस नीतिगत कार्रवाइयों से वस्‍तुत:

2010 के घाटे अपेक्षित स्‍तर से भी नीचे आ गए। विकासोन्‍मुख नीतियों, जिनसे मांग और पुनरुत्‍थान को बढ़ावा मिले, का अनुपालन करने की जरूरत को स्‍वीकार करते हुए संयुक्‍त राज्‍य अमरीका यह सुनिश्‍चित करते हुए राजकोषीय मजबूती की प्रक्रिया में गतिशीलता लाएगा कि इसका सार्वजनिक वित्‍त एक सतत और दीर्घावधिक मार्ग पर है, जिससे कि वर्ष 2013 में राजकोषीय संकुचन से बचा जा सके। यूनाइटेड किंगडम में वर्ष 2013 के घाटे का अनुमान टोरंटो लक्ष्‍यों के अनुरूप है, जिसमें चक्रीय आधार पर समायोजित नियमों का उपयोग किया गया है।

हो सकता है कि स्‍पेन 2013 के लक्ष्‍यों को प्राप्‍त न कर पाए, जिससे अर्थव्‍यवस्‍था की महत्‍वपूर्ण कमजोरी और इसके बैंकिंग क्षेत्र के पुनर्गठन का पता चलता है। अत: एक अत्‍यंत ही महत्‍वपूर्ण ढांचागत प्रयास घाटा नियंत्रण योजना का कार्यान्‍वयन किया जा रहा है।

अधिकांश उन्‍नत अर्थव्‍यवस्‍थाएं वर्ष 2016 तक ऋण-सकल घरेलू उत्‍पाद अनुपात में कमी लाने अथवा इसमें स्‍थिरता लाने के लिए टोरंटो प्रतिबद्धता को प्राप्‍त करने के मार्ग पर हैं।2 आशा है कि संघीय सरकार स्‍तर पर अमरीका वर्ष 2016 में इस प्रतिबद्धता को पूरा कर लेगा। परंतु अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार यह भी आशा है कि संघीय सरकार के ऋण में इसके उपरांत वृद्धि होगी।

इस लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने के लिए स्‍पेन को अतिरिक्‍त कार्रवाइयां करनी होंगी। जापान वित्‍तीय वर्ष 2010 के स्‍तर वित्‍तीय वर्ष 2015 तक अपने प्राथमिक घाटे को आधा करने संबंधी अपने मध्‍यम आवधिक लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने के मार्ग पर है। परंतु वित्‍तीय वर्ष 2021 से आगे ऋण – सकल घरेलू उत्‍पाद अनुपात में कमी लाने का दीर्घावधिक लक्ष्‍य प्राप्‍त करने के लिए इसे और कार्य करने की जरूरत होगी। अंतत:, हालांकि उन्‍नत अर्थव्‍यवस्‍थाओं ने मध्‍यम अवधि में सतत राजकोषीय वित्‍त को बढ़ावा देने पर अपनी सहमति व्‍यक्‍त की है, परंतु वर्ष 2016 में भी अनेक देशों में ऋण स्‍तर के उच्‍च बने रहने की आशा है।

इसके अतिरिक्‍त दीर्घावधिक संदर्भ में, विशेषकर लोगों की बढ़ती आयु के संदर्भ में सतत सार्वजनिक वित्‍त प्राप्‍त करने के लिए अतिरिक्‍त नीतिगत प्रयासों की आवश्‍यकता होगी।

2015 और 2016 तक सामान्‍य सरकारी ऋण – सकल घरेलू उत्‍पाद अनुपात के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्रा कोष के पूर्वानुमान का उपयोग।

सदस्‍यों देशों ने ढांचागत राजकोषीय सुधारों को कार्यान्‍वित करने की अपनी प्रतिबद्धताओं में प्रगति की है। यूरो क्षेत्र ने भी राजकोषीय कॉम्‍पेक्‍ट को अंगीकार किए जाने के साथ अपनी राजकोषीय राजकोषीय रूपरेखाओं को सुदृढ़ बनाया है।

कुछ सदस्‍यों (इटली) ने पेंशन प्रणाली में सुधार लाने की प्रतिबद्धता के अनुरूप कार्य किए हैं, जबकि कुछ देश (फ्रांस और यूके) पेंशन सुधारों की दिशा में प्रगति कर रहे हैं। ब्राजील ने भी लोक सेवक पेंशन प्रणाली में सुधार का अनुमोदन किया है। स्‍पेन ने महत्‍वपूर्ण श्रम बाजार सुधार कार्यान्‍वित किया है। जी-20 के सभी सदस्‍य देशों में विभिन्‍न राजकोषीय कार्रवाइयों के संबंध में और प्रगति अपेक्षित है, जिससे सतत लोक वित्‍त तथा वैश्‍विक पुनर्संतुलन को बढ़ावा मिलेगा:

यूरो क्षेत्र में राजकोषीय अभिशासन में सुधार की प्रक्रिया पूरी किए जाने की आवश्‍यकता है; तथा अमरीका और जापान द्वारा महत्‍वाकांक्षी मध्‍यम आवधिक राजकोषीय योजनाओं को पूर्णत: कार्यान्‍वित करने की जरूरत है। भारत, इण्‍डोनेशिया तथा मैक्‍सिको द्वारा भी राज सहायता के क्षेत्र में सुधार जारी रखने की आवश्‍यकता है। विकृतियों में कमी लाने के उद्देश्‍य से अनेक उभरती एवं उन्‍नत अर्थव्‍यवस्‍थाओं द्वारा टैक्‍स सुधारों पर और प्रगति करने की जरूरत है।

उन्‍नत अर्थव्‍यवस्‍थाओं में मौद्रिक नीतियों ने पुनरुत्‍थान को समर्थित करने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है जबकि मूल्‍य में भी स्‍थायित्‍व कायम रखा गया है। उभरती बाजार अर्थव्‍यवस्‍थाओं में आमतौर पर मुद्रास्‍फीति से संबंधित दबाव कम हुए हैं, जो मुख्‍यत: धीमी विकास दर के कारण हुआ है।

पिट्सबर्ग शिखर सम्‍मेलन के बाद से अपेक्षाकृत अलोचनीय विनिमय दर व्‍यवस्‍थाओं वाली उभरती बाजार अर्थव्‍यवस्‍थाओं ने अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्राकोष की परोक्ष वर्गीकरण प्रणाली के अंतर्गत अनेक महत्‍वपूर्ण सुधारों को कार्यान्‍वित किया। विशेषकर चीन और रूस दोनों ने ही अपने-अपने विनिमय दर बॉण्‍डों को व्‍यापक बनाया है।

वर्ष 2005 के बाद से चीन के विनिमय दर में पर्याप्‍त वृद्धि हुई है, परंतु केंस शिखर सम्‍मेलन के बाद से वृहत्‍तर विनिमय दर लोचनीयता में प्रगति स्‍पष्‍ट ही रही है, जो विशेषकर अल्‍प समय और चीन के हालिया सुधारों के कारण हुआ है। वर्ष 2011 की पहली तिमाही में चीन में मुद्रा भण्‍डारों में कुछ कमी आई जो मुख्‍यत: इसके चालू खाते आधिक्‍य में कमी आने के कारण हुई। वर्ष 2012 की पहली तिमाही से मुद्रा भण्‍डार में संग्रहण बहाल हुआ।

उभरते बाजार देशों ने इस बात पर चिंता व्‍यक्‍त की कि उन्‍नत अर्थव्‍यवस्‍थाओं में मौद्रिक नीतियों को आसान बनाने से इन अर्थव्‍यवस्‍थाओं में पूंजी प्रवाह की भिन्‍नता और स्‍तर को बढ़ाने में योगदान मिला है और साथ ही अन्‍य वित्‍तीय तत्‍वों की भूमिका ही बढ़ी है, जिससे वृहत्‍त आर्थिक नीतियों का प्रबंधन जटिल हुआ है। सदस्‍यों ने आमतौर पर इस बात को स्‍वीकार किया कि उन्‍नत अर्थव्‍यवस्‍थाओं की घरेलू मौद्रिक नीतियों को घरेलू लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करने के उद्देश्‍य से बनाया गया है, जबकि नीतियों के संभावित नकारात्‍मक प्रभावों के विरुद्ध सजग रहने की जरूरत को भी स्‍वीकार किया गया है।

ढांचागत नीतियां

महत्‍वपूर्ण ढांचागत सुधारों का कार्यान्‍वयन विकास के संवर्धन तथा नौकरियों के सृजन और वैश्‍विक पुनर्संतुलन अर्थात सामाजिक सुरक्षा जाल और निवेश पैटर्नों को प्रभावित करने वाली नीतियों के लिए महत्‍वपूर्ण हैं। तथापि, सदस्‍यों ने इस बात पर अपनी सहमति व्‍यक्‍त की कि ढांचागत सुधार प्रतिबद्धताओं का आकलन करना विशेष रूप से कठिन होता है क्‍योंकि इसके कार्यान्‍वयन और प्रभावों को समझने में समय लगता है। इतने के बाद सदस्‍य देश ढांचागत सुधारों का अनुपालन करने की प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त करते हैं

जो लघु आवधिक रोजगार लाभों को उपलब्‍ध कराने तथा घरेलू स्‍तर पर नौकरियों को बढ़ावा देने के साथ-साथ वैश्‍विक अर्थव्‍यवस्‍था के संतुलन में सहायता प्रदान करने के जरिए किया जाएगा।

ओईसीडी का अनुमान है कि सभी ढांचागत सुधार प्रतिबद्धताओं की तीनों तिमाहियों के लिए कार्यान्‍वयन संबंधी कार्य किए जा रहे हैं, जिसके जरिए लगभग एक तिहाई प्रतिबद्धताओं का कार्यान्‍वयन किया जा सकेगा। कार्यान्‍वयन सुधारों में प्रगति आमतौर उन्‍नत एवं उभरती अर्थव्‍यवस्‍थाओं में एक समान है।

तथापि, ढांचागत सुधारों की विभिन्‍न श्रेणियों में प्रगति असमान रही है और सुधारों को कार्यान्‍वित करने के लिए बेहतर महत्‍वाकांक्षा की जरूरत है, जिसका पुनर्संतुलन, नौकरियों के सृजन तथा ठोस विकास के संवर्धन पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा।

अनेक उन्‍नत अर्थव्‍यवस्‍थाओं द्वारा उत्‍पाद बाजार सुधारों (यूरो क्षेत्र, जापान) पर और प्रगति करने की जरूरत है। आमतौर पर उभरते बाजारों द्वारा व्‍यावसायिक एवं निवेश पर्यावरण में सुधार लाने की भी आवश्‍यकता है, जिससे अवसंरचना क्षेत्र में निवेश और संभावित विकास को बढ़ावा मिलेगा तथा वित्‍तीय समावेश का मार्ग प्रशस्‍त होगा।

वैश्‍विक पुनर्संतुलन को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य से अमरीका द्वारा निजी बचतों को प्रोत्‍साहित करने की जरूरत है; जर्मनी को घरेलू मांग में वृद्धि करने के उपाय कार्यान्‍वित करने चाहिए और कुछ उभरते बाजारों को घरेलू खपत में वृद्धि करने और निवेश की प्रभाविता में सुधार लाने की आवश्‍यकता है।

व्‍यापार, वित्‍तीय क्षेत्र तथा विकास नीतियां

विभिन्‍न देशों ने प्रमुख क्षेत्रों में प्रवेश बाधाओं को दूर करने सहित टैरिफों में कमी लाने तथा व्‍यापार प्रणालियों को उदार बनाने की दिशा में विभिन्‍न देशों की प्रगति पर विश्‍व व्‍यापार संगठन, अंकटाड, विश्‍व बैंक तथा ओईसीडी द्वारा नजर रखी जा रही है।

अधिकांश सदस्‍यों ने विश्‍व व्‍यापार संगठन के अनुरूप व्‍यापार उपचार उपायों के जरिए अनुचित व्‍यापार प्रथाओं की समस्‍या का समाधान करने सहित अन्‍य तरीकों से संरक्षणवाद का प्रतिरोध करने की अपनी प्रतिबद्धता कायम रखी है। तथापि कुछ क्षेत्रों में राजनैतिक परिवेश संरक्षणवादी उपायों के नए स्‍वरूप को स्‍वीकार करते प्रतीत हो रहे हैं, जिनका प्रतिरोध किया जाना चाहिए।

वित्‍तीय स्‍थिरता बोर्ड जी-20/एफएसबी के सहमत वित्‍तीय सुधारों के कार्यान्‍वयन की कठोर निगरानी का समन्‍वय एवं संवर्धन करने तथा पिछले वर्ष स्‍थापित कार्यान्‍वयन मॉनिटरन के लिए एफएसबी की समन्‍वय रूपरेखा के तहत जी-20 को रिपोर्ट करने के लिए जिम्‍मेदार है।

इस प्रक्रिया में छ: प्राथमिक सुधार क्षेत्रों (बैसेल 3, जी-एसआईएफआई के लिए नीतिगत उपाय, समाधान रूपरेखा, ओटीसी डेरिवेटिव, मुआवजा प्रथाएं, शैडो बैंकिंग) में राष्‍ट्रीय कार्यान्‍वयन प्रगति पर मानक निर्धारण निकायों के सहयोग से गहन मॉनिटरन और व्‍यापक रिपोर्टों की जरूरत होती है जो जी-20 नेताओं को प्रस्‍तुत एफएसबी की रिपोर्ट में उल्‍लिखित है। संबंधित मानक निर्धारण के सहयोग से एफएसबी अन्‍य सहमत नियामक सुधारों के कार्यान्‍वयन पर भी रिपोर्ट करता है और उन्‍हें कार्यान्‍वित करने के लिए एफएसबी सदस्‍यों द्वारा किए गए उपायों से संबंधित सूचनाओं का प्रकाशन करता है।

अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्रा कोष अपने अनुच्‍छेद-IV निगरानी तथा एफएसएपी आकलनों के जरिए इसके सदस्‍य देशों में हुई प्रगति की समीक्षा करता है। अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्राकोष और विश्‍व बैंक के कर्मचारियों के समन्‍वय से एफएसबी ने एक अध्‍ययन तैयार किया है, जिसके जरिए उभरते बाजारों एवं विकासशील अर्थव्‍यवस्‍थाओं पर मंशा रहित परिणामों के संबंध में सहमत नियामक सुधारों की सीमा तय की गई है। अन्‍य अंतर्राष्‍ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर विश्‍व बैंक विकासशील देशों में विकास और विकास कार्यसूची का आकलन करना जारी रखेगा। इसमें विकास को बढ़ावा देने तथा विकास के अंतर को कम करने पर बाह्य परिवेश एवं रूपरेखा नीतियों के प्रभाव भी शामिल हैं।

इसके अतिरिक्‍त वे इस क्षेत्र में प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की दिशा में हो रही प्रगति पर भी नजर रखते हैं।

निष्‍कर्ष

समग्र रूप में केंस तथा पूर्व के शिखर सम्‍मेलनों की सुधार प्रतिबद्धताओं के संबंध में आगे बढ़ने की दिशा में प्रगति हुई है परंतु अनेक महत्‍वपूर्ण क्षेत्रों में और प्रगति तथा नई कार्रवाइयों की जरूरत है। भावी आकलनों को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्‍य से सदस्‍य देशों ने स्‍वीकार किया कि नीतिगत प्रतिबद्धताएं यथासंभव विशिष्‍ट एवं ठोस होनी चाहिए और इन्‍हें ठोस, सतत एवं संतुलित विकास के समग्र लक्ष्‍यों की दिशा में योगदान देना चाहिए।

हम सभी नीतिगत क्षेत्रों में पूर्व की प्रतिबद्धताओं के संबंध में हुई प्रगति का आकलन करने के लिए साझे नजरिए की आवश्‍यकता पर भी सहमत होते हैं।



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