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16वें गुट-निरपेक्ष आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री जी की ईरान यात्रा पर विदेश सचिव की मीडिया वार्ता का प्रतिलेखन

अगस्त 25, 2012

इस मीडिया वार्ता की वीडियो विदेश मंत्रालय के यू ट्यूब चैनल Youtube link : External website that opens in a new window पर भी देखी जा सकती है

सरकारी प्रवक्ता (श्री सैयद अकबरुद्दीन): नमस्कार मित्रो। गुट-निरपेक्ष आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री जी की तेहरान यात्रा पर विदेश सचिव की मीडिया वार्ता में आपका स्वागत है।

जैसा की आम तौर पर होता है हम इस मीडिया वार्ता का शुभारंभ विदेश सचिव के आरंभिक वक्तव्य से करेंगे जिसके बाद वे आपके कुछ प्रश्नों का उत्तर देंगे।

आरंभ करने से पूर्व मैं बताना चाहूँगा कि विदेश सचिव जी के साथ यहाँ संयुक्त सचिव (पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान तथा ईरान) श्री यश सिन्हा भी उपस्थित हैं जो इस विषय पर पूछे गए आपके प्रश्नों का उत्तर देने में विदेश सचिव जी की सहायता करेंगे।

इसी के साथ मैं विदेश मंत्री जी को आरंभिक टिप्पणी देने के लिए अनुरोध करता हों जिसके बाद प्रश्न-उत्तर सत्र होगा। विदेश सचिव महोदय।

विदेश सचिव (श्री रंजन मथाई): धन्यवाद अकबर।

प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह गुट-निरपेक्ष आंदोलन के राज्याध्यक्षों एवं शासनाध्यक्षों की 16वीं बैठक में भाग लेने के लिए 30 और 31 अगस्त, 2012 को तेहरान की यात्रा पर जा रहे हैं।

यह गुट-निरपेक्ष आंदोलन की तीसरी शिखर बैठक होगी जिसमें प्रधानमंत्री जी भाग ले रहे हैं। इससे पूर्व उन्होने जुलाई 2009 में मिस्र के शर्म-अल-शेख और सितंबर 2006 में हवाना, क्यूबा में आयोजित शिखर सम्मेलन में भाग लिया था। 30 अगस्त को आम बहस के दौरान प्रधानमंत्री जी शिखर सम्मेलन को संबोधित करेंगे।

तेहरान गुट-निरपेक्ष आंदोलन शिखर सम्मेलन की विषय वस्तु "संयुक्त वैश्विक अभिशासन के ज़रिए स्थायी शांति" है। 28 और 29 अगस्त को इस शिखर सम्मेलन के मंत्रिस्तरीय भाग में इस विषय पर गहन चर्चा होने की आशा है।

जैसा कि गुट-निरपेक्ष आंदोलन शिखर सम्मेलनों में प्रथा है, तेहरान शिखर सम्मेलन में भी विभिन्न वैश्विक, क्षेत्रीय एवं उप क्षेत्रीय मुद्दों के साथ साथ सामाजिक एवं आर्थिक विषयों पर व्यापक चर्चा होगी। आशा है कि इस शिखर सम्मेलन में एक अंतिम दस्तावेज़ पारित किया जाएगा जो एक लंबा दस्तावेज़ है और जिसमें सभी महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर इस शिखर सम्मेलन के दृष्टिकोण का उल्लेख होगा।

शिखर सम्मेलन से पूर्व प्रथा के अनुरूप मंत्रिस्तरीय बैठक होगी जिसका मैंने उल्लेख किया। इसका आयोजन 28 और 29 अगस्त को किया जाएगा। इससे पूर्व 26 और 27 अगस्त को वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक होगी। मंत्रिस्तरीय बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री श्री एस. एम. कृष्णा करेंगे। विदेश मंत्री जी फिलिस्तीन से संबंध गुट-निरपेक्ष आंदोलन मंत्रिस्तरीय समिति में भी भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे जिसका आयोजन अलग से 28 अगस्त को शाम में किया गया है। कल होने वाली वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में मैं भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करूंगा।

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू द्वारा प्रतिपादन किए जाने के बाद से ही गुट-निरपेक्षता भारत की विदेश नीति की आधारशिला रही है। पश्चय शीत युद्ध के बाद के समय में, जब विश्व दो सैनिक गुटों में विभाजित नहीं रह गया है, गुट-निरपेक्ष आंदोलन की उभरती विश्व व्यवस्था में नयी भूमिका है। आज गुट-निरपेक्ष आंदोलन खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण तथा वैश्विक अभिशासन की संस्थाओं में सुधार जैसी अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के समक्ष विद्यमान समकालीन चुनौतियों के संबंध में विकासशील देशों की चिंताओं को भी अभिव्यक्त करता है।

गुट-निरपेक्ष आंदोलन के संस्थापक सदस्य के रूप में भारत ने निरंतर यह सुनिश्चित करने के प्रयास किया है कि यह आंदोलन सहयोग और रचनात्मक कार्यकलापों के आधार पर न कि टकराव से आगे बढ़े। यह आंदोलन पारंपरिक उत्तर-दक्षिण विभाजन के अंतर को भी पाटने का प्रयास करता है। गुट निरपेक्ष आंदोलन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता स्थायी है और तेहरान शिखर सम्मेलन में हमारी भागीदारी का मार्गदर्शी सिद्धान्त भी यही होगा।

इस बहुपक्षीय कार्यक्रम से पूर्व 29 अगस्त को प्रधानमंत्री जी की ईरान के सर्वोच्च नेता और राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय बैठक होगी। वर्ष 2001 के बाद यह इस स्तर की पहली द्विपक्षीय यात्रा है। ईरान के साथ भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं तथा हाल के वर्षों में इन सम्बन्धों का और विस्तार हुआ है तथा इसमें हाइड्रोकार्बन, व्यापार और आथिक मामलों, महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय एवं द्विपक्षीय मुद्दों पर परामर्शों तथा सांस्कृतिक और लोगों से लोगों के बीच संपर्कों को शामिल किया गया है।

ईरान के नेता के साथ प्रधानमंत्री जी की बैठक के दौरान द्विपक्षीय सम्बन्धों की समीक्षा की जाएगी और पारस्परिक हित के मुद्दों पर चर्चा होगी। आशा है कि प्रधानमंत्री जी ईरान में भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से भी मुलाक़ात करेंगे।

अंततः प्रधानमंत्री जी इस शिखर सम्मेलन में भाग ले रहे गुट-निरपेक्ष आंदोलन के अन्य सदस्य देशों के नेताओं से भी मुलाक़ात करेंगे। हालांकि यह आगामी व्यवस्थाओं के अध्यधीन है क्योंकि विभिन्न नेताओं के आगमन और प्रस्थान समय में अंतर के कारण कम समय ही बच पता है। अनेक नेता 29 तारीख को देर से पहुँच रहे हैं जबकि कुछ 30 तारीख को पहुँच रहे हैं। परंतु आशा है कि बांग्लादेश, अफ़ग़ानिस्तान, नेपाल और पाकिस्तान के नेताओं के साथ बैठकें निर्धारित की जा सकेंगी। यदि समय रहा तो हम मिस्र के राष्ट्रपति के साथ भी बैठक आयोजित करने की योजना बना रहे हैं।

धन्यवाद

सरकारी प्रवक्ता: प्रश्नोत्तर आरंभ करने से पूर्व मैं अनुरोध करना चाहूँगा कि पहले गुट-निरपेक्ष आंदोलन और ईरान से संबन्धित प्रश्न ही पूछे जाएँ। यदि इसके बाद समय बचता है तो विदेश सचिव जी अन्य विषयों पर भी प्रश्नों का उत्तर देंगे। परंतु हम गुट-निरपेक्ष आंदोलन और ईरान से ही शुरुआत करेंगे।

प्रश्न: महोदय, कुछ दिनों पूर्व सूसन राइस यहीं थीं। स्पष्ट है कि जब ईरान के साथ भारत के सम्बन्धों की बात आती है तो अमरीका भी एक कारक होता है क्योंकि द्विपक्षीय कार्यकलापों के संदर्भ में उनके अपने विचार और भावनाएँ हैं। क्या उन्होने औपचारिक तौर पर इस बात को उठाया है कि वे चाहेंगे कि गुट-निरपेक्ष आंदोलन स्तर पर तथा ईरान के साथ होने वाली द्विपक्षीय बैठक के स्तर पर भारत अमरीका की चिंताओं को उठाए? भारत इस मुद्दे का समाधान किस प्रकार करेगा?

विदेश सचिव: सूसन राइस यहाँ वस्तुतः निजी यात्रा पर यहाँ आई थी परंतु हमारे बीच पूरी चर्चा हुई। राजदूत राइस के साथ गुट-निरपेक्ष आंदोलन के संबंध में चर्चा नहीं हुई। हमने ईरान और पश्चिम एशिया से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की परंतु औपचारिक रूप से इस प्रकार की किसी विषय पर चर्चा नहीं हुई।

प्रश्न: महोदय, इस हफ्ते एक रिपोर्ट आई थी कि ईरान चहबहार बन्दरगाह निवेश सौदे की अनुमति देने जा रहा है। उसी रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख भी किया गया था कि शायद अफ़ग़ानिस्तान इस संबंध में बहुत अधिक उत्सुक नहीं है। इसलिए मुझे इस बात का आश्चर्य हो रहा है कि इस बात पर भारत का क्या नज़रिया है? क्या भारत-अफ़ग़ानिस्तान-ईरान त्रिपक्षीय बैठक की कोई संभावना है?

विदेश सचिव: जी हाँ। हम त्रिपक्षीय बैठक निर्धारित करने की भी योजना बना रहे हैं। वस्तुतः इस बात का सुझाव ईरान ने ही कल दिया है। यह बैठक तीनों देशों के उप विदेश मंत्री अथवा विदेश सचिवों के स्तर पर होगी। इस विषय पर भारत और ईरान के बीच काफी लंबे समय से बातचीत चल रही है। हमें हाल में ही एक रिपोर्ट प्राप्त हुई है जिसमें इस बन्दरगाह के संबंध में ईरान की योजनाओं पर विभिन्न विकल्पों का विश्लेषण किया गया है। इस रिपोर्ट को हमने भारतीय बन्दरगाह संघ के ज़रिए तैयार करवाया था जो हमें प्राप्त हो गयी है।

इसमें विभिन्न संभावनाओं का उल्लेख है और हम इसका अध्ययन कर रहे हैं। इसलिए फिलहाल चर्चाओं में शामिल विषयों के परिणामों का अनुमान लगाना थोड़ी जल्दबाज़ी होगी। परंतु हमें कहा गया है कि मेरे स्तर पर ही एक त्रिपक्षीय बैठक होगी।

प्रश्न: भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय, आर्थिक तथा व्यापार सम्बन्धों की वर्तमान स्थिति क्या है और दोनों देशों के बीच आर्थिक सम्बन्धों को गहन बनाने में अमरीकी प्रतिबंध से किस प्रकार बाधाएँ आएंगी?

विदेश सचिव: हमारे दोनों देशों के बीच मजबूत संबंध रहे हैं। वस्तुतः पिछले कुछ वर्षों के दौरान व्यापार सम्बन्धों में सुधार हुआ है। व्यापार संतुलन अभी भी ईरान के पक्ष में है क्योंकि हम भारी मात्रा में तेल की खरीद करते हैं जबकि भारत का निर्यात अपेक्षाकृत काफी कम है। यह एक पक्ष से 11 से 12 बिलियन अमरीकी डॉलर और दूसरे पक्ष से लगभग 2 या 3 बिलियन अमरीकी डॉलर है जो हमारे द्वारा उपयोग किए गए आंकड़े पर निर्भर करता है। हम चाहेंगे की ईरान के लिए भारतीय निर्यातों का विस्तार हो।

यदि आपको वास्तविक आंकड़े बताऊँ तो वर्ष 2011-2012 में कुल द्विपक्षीय व्यापार 15.9 बिलियन अमरीकी डॉलर का रहा जिसमें से 13.5 बिलियन अमरीकी डॉलर का आयात भारत में हुआ जबकि 2.4 या 2.5 बिलियन अमरीकी डॉलर के लगभग निर्यात भारत से किया गया।

हमने बार-बार इस बात पर बल दिया है कि हम औपचारिक रूप से उन्ही प्रतिबंधों को स्वीकार करते हैं जिनका कार्यान्वयन संयुक्त राष्ट्र द्वारा किया जाता है। परंतु इस बात को देखते हुए कि अन्य देशों द्वारा भी कई प्रकार के प्रतिबंध लगाए गए हैं, के कारण व्यापार के लिए बैंकिंग व्यवस्थाओं, नौवहन, बीमा इत्यादि के संदर्भ में भी समस्याएँ आती हैं। अतः व्यापार के स्तर खासकर ईरान से आयात किए जाने वाले तेल की मात्रा पर इसका प्रभाव पड़ता है।

प्रश्न: महोदय, सीरिया की समस्या का शांतिपूर्ण समाधान प्राप्त करने के लिए ईरान एक समाधान योजना के साथ आगे आ रहा है। क्या भारत को इस पर कुछ कहना है? क्या आप वर्तमान स्थिति पर भारत के नजरिए के बारे में कुछ बता सकते हैं?

विदेश सचिव: वस्तुतः अंतिम दस्तावेज़ यानि घोषणा, जिसे एक या दो माह पूर्व शर्म-अल-शेख में सम्पन्न किया गया था, में गुट-निरपेक्ष आंदोलन के दृष्टिकोण को दर्शाया गया था। इसके उपरांत हमे सीरिया के संबंध में अलग से किसी घोषणा जारी किए जाने के बारे में नहीं बताया गया है। शर्म-अल-शेख में इसी बात पर सहमति हुई थी कि राज्याध्यक्ष और शासनाध्यक्ष सीरिया की स्थिति का समाधान करने संबंधी अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों को नोट करते हैं। उन्होने श्री कोफी अन्नान के प्रयासों का स्वागत किया और संयुक्त दूत योजना एवं इसके 6 बिन्दुओं के साथ साथ सुरक्षा परिषद संकल्प 2042 तथा 2043 को पूर्णतः कार्यान्वित किए जाने का स्वागत किया।

उन्होने सीरिया सरकार द्वारा इस योजना को स्वीकार किए जाने का स्वागत किया। ये बातें उक्त दस्तावेज़ में हैं क्योंकि शर्म-अल-शेख में वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में इन पर चर्चा हुई थी। हम इस दृष्टिकोण का समर्थन करते हैं।

प्रश्न: महोदय, आपने सर्वोच्च नेता श्री खमेनी के साथ बैठक की बात कही थी। ईरानी पक्ष ने हमें बताया है कि भारत ही इस प्रकार की बैठक चाहता था। क्या आप बता सकता हैं कि इस बैठक में कौन कौन से मुद्दे उठाए जा सकेंगे? इसके साथ ही पिछली रात विक्टोरिया नोलांद ने विशेष रूप से कहा कि यदि भारत ईरान के समक्ष शांति और सुरक्षा से संबन्धित अमरीकी चिंताओं को उठता है तो उन्हें खुशी होगी। क्या आप इस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर सकते हैं? ये अमरीकी चिंताएँ क्या हैं और इस पर भारतीय पक्ष का क्या रुख रहेगा?

विदेश सचिव: सबसे पहले मैं बताना चाहूँगा कि हमने वास्तव में ईरान के सर्वोच्च नेता के साथ एक बैठक निर्धारित करने का प्रस्ताव रखा था। हमें बताया गया है कि इसका प्रबंध किया जा रहा है। शीघ्र ही सही समय की जानकारी मिल जाएगी। इस बैठक के दौरान प्रधानमंत्री जी भारत-ईरान द्विपक्षीय सम्बन्धों से जुड़े सभी महत्वपूर्ण मुद्दों तथा हमारे हित चिंता के सभी विषयों को उठाएंगे। शांति और सुरक्षा वास्तव में हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि समग्र पश्चिम एशियाई क्षेत्र और खाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते हैं और तेल के आयात तथा हमारे निर्यातों के संदर्भ में भी यह क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।

अतः यह हमारी स्वयं की चिंता है और हम किसी अन्य के चिंताओं को अपने हितों के ऊपर प्राथमिकता नहीं दे सकते। वस्तुतः यह हमारी विशेष चिंता है। प्रधनमंत्री जी इन मुद्दों को निश्चित रूप से उठाएंगे तथा हमारे संदर्भ में पश्चिम एशिया से जुड़े मुद्दों और इस क्षेत्र में शांति तथा सुरक्षा से संबंद्ध मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

प्रश्न: महोदय, भारत द्वारा कुछ ईरानी छात्रों को निकाले जाने प्रतिक्रिया स्वरूप ही शायद ईरान द्वारा कुछ भारतीय छात्रों को निकाले जाने का मामला सामने आया है। इस मामले को विभिन्न स्तरों पर उठाया गया है। क्या ईरान के साथ होने वाली द्विपक्षीय बैठक में इस विषय पर चर्चा होगी? इस मामले की वर्तमान स्थिति क्या है?

विदेश सचिव: द्विपक्षीय कोंसली समिति की बैठक, जिसका आयोजन कुछ माह पूर्व ही किया गया था, सहित विभिन्न बैठकों के दौरान ईरानी पक्ष के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की जाती रही है। इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला है परंतु तेहरान में हम इस पर चर्चा करना जारी रखेंगे। हमारी आशा है कि इस मुद्दे का शीघ्र समाधान प्राप्त कर लिया जाएगा।

संयुक्त सचिव महोदय कोंसली समिति की उक्त बैठक में मौजूद थे और शायद वे आप सबको कुछ बताना चाहें।

संयुक्त सचिव (पीएआई) (श्री वाई के सिन्हा): पिछले दो वर्षों के दौरान ईरान के कुछ छात्रों के यहाँ से जाने का मामला सामने आया था और तीन भारतीय छात्रों को ईरान छोडने के लिए कहा गया था। जैसा कि विदेश सचिव जी ने बताया, हम इस बात को देख रहे हैं कि इस मुद्दे का समाधान सही तरीके से किस प्रकार किया जाए। विभिन्न मंचो और विभिन्न द्विपक्षीय बैठकों में इस पर चर्चा होती रही है और हम तेहरान में भी इस विषय पर बात करेनेगे। हमारी आशा है कि इस मुद्दे का शीघ्र ही समाधान निकल पाएगा।

प्रश्न: महोदय, संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत सुज़ेन राइस कुछ दिन पूर्व यहीं थी। मैं समझता हूँ कि उनके साथ सीरिया और ईरान पर चर्चा अवश्य हुई होगी? क्या द्विपक्षीय बैठक के संदर्भ में अमरीका हमसे आशा करता है कि हम ईरानी राष्ट्रपति को इस आशय का कोई संदेश संप्रेषित करें? दूसरा प्रश्न यह है कि हम गुट-निरपेक्ष आंदोलन शिखर बैठक में किन प्रस्तावों को आगे बढ़ाने जा रहे हैं? इस बैठक में हम किन मुद्दों पर विशेष बल देंगे?

विदेश सचिव: मैंने सुसन राइस के साथ हुई चर्चा के बारे में पूछे गए प्रश्न का उत्तर पहले ही दे दिया है। वह यहाँ निजी यात्रा पर आई थीं और मैंने इस अवसर पर कुछ मुद्दों को उठाया भी था। मैं स्पष्ट करना चाहूँगा कि हमने संयुक्त राष्ट्र के समक्ष विद्यमान अनेक मुद्दों पर चर्चा की। उनके साथ मेरी चर्चाओं का यही आधार था और निश्चित रूप से सीरिया और ईरान दोनों के संबंध में बात हुई और मैंने पहले ही बता दिया है कि उक्त स्तर पर इस संबंध में चर्चा हुई थी।

जहां तक गुट-निरपेक्ष आंदोलन को सक्रिय बनाने का संबंध है मैं समझता हूँ कि गुट-निरपेक्ष आंदोलन उन मुद्दों पर अपना ध्यान केन्द्रित करे जो पूरे आंदोलन और इसके सदस्यों को एक जुट करते हैं न कि विवादास्पद मुद्दों को। हम चाहेंगे कि वैश्विक अभिशासन, संयुक्त राष्ट्र सहित अन्य अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में संतुलन, एक स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में सुधार इत्यादि पर विशेष बल दें। हम खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा तथा सतत विकास से जुड़े मुद्दों पर विशेष बल देना चाहेंगे। रियो सम्मेलन में इन मुद्दों का उल्लेख आया था तथा अन्य सम्मेलनों में भी इन विषयों को उठाया जाएगा।

अब गुट-निरपेक्ष आंदोलन के सदस्य देशों जिनमें विश्व के लगभग सभी विकासशील देश शामिल हैं, के लिए समय आ गया है कि वे इन वैश्विक मुद्दों के संदर्भ में साझे दृष्टिकोण का पता लगाने पर विशेष बल दें ताकि सभी विकासशील देशों के हितों को संरक्षित रखा जा सके।

प्रश्न: दिल्ली में इस्राइली राजनयिक पर हुए हमले और अन्य स्थानों पर हुए हमलों से जुड़ा मुद्दा भी था जिसे इरानियों से जोड़ कर देखा जा रहा है। दिल्ली पुलिस की जो टीम ईरान गयी थी उसने तथाकथित रूप से कहा है कि उन्हें बहुत अधिक सहयोग नहीं मिला। अब यह मुद्दा किस प्रकार आगे बढ़ेगा? क्या यह संदेश भी दिया जाएगा कि नई दिल्ली को इन ताकतों के बीच शतरंज की बिसात नहीं बनानी चाहिए?

विदेश सचिव: मैं यह कहते हुए अपनी बात आरंभ करूंगा कि ईरान गए पुलिस टीम की रिपोर्ट हमें प्राप्त नहीं हुई है। इस रिपोर्ट के प्राप्त होने के बाद ही हम निर्णय ले सकेंगे कि आगे क्या करने की ज़रूरत है। परंतु सामान्य संदर्भ में हम जब भी तेहरान में होते हैं और विभिन्न सरकारी एवं मंत्री स्तर पर बैठकें करते हैं तो हम निश्चित रूप से ईरान से इस बात पर बल देते हैं कि उन्हें इस मामले में पूरा सहयोग करना चाहिए ताकि हम इस हमले की जड़ में पहुँच सकें और यह सुनिश्चित कर सकें कि भारत किसी अन्य देश के संघर्षों में न फसें। परंतु जैसा कि मैंने बताया मैं इससे अधिक ब्योरे नहीं दे सकता क्योंकि दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट अभी भी प्राप्त नहीं हुई है।

प्रश्न: महोदय, जैसा कि आप जानते हैं शर्म-अल-शेख तथा क्यूबा में आयोजित गुट निरपेक्ष आंदोलन के पिछले दो सम्मेलनों में प्रधानमंत्री जी ने भाग लिया था और भारत तथा पाकिस्तान के बीच होने वाली बैठक के संदर्भ में यह समाचार का एक बड़ा मुद्दा था। क्या हम प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठक से कुछ ठोस बातों के सामने आने की आशा कर सकते हैं? क्या आप बता सकते हैं इस बार किस मुद्दे पर विशेष बल दिया जाएगा? जैसा कि आप जानते हैं शर्म-अल-शेख में अच्छी उपलब्धियां प्राप्त हुई थीं।

विदेश सचिव: जैसा कि मैंने आरंभ में बताया, मैं इतना ही कह सकता हूँ कि हम इन बैठकों का निर्धारण कर रहे हैं। बैठकों की समाप्ति के उपरांत मैं एक प्रेस वार्ता करूंगा।

प्रश्न: आपने अभी अभी बताया कि आपको दिल्ली पुलिस टीम की रिपोर्ट की जानकारी नहीं है।

विदेश सचिव: हमें ये प्राप्त नहीं हुई है।

प्रश्न: यह असामान्य बात नहीं लगती है कि वे विदेश मंत्रालय की जानकारी के बिना ही वहाँ चले गए?

विदेश सचिव: मैं स्पष्ट करता हूँ। वे हमारे द्वारा प्रबंधित बैठक में भाग लेने के लिए वहाँ गए थे। मैं ये बताना चाह रहा हूँ कि यात्रा के अंत में कुछ निष्कर्ष निकलता है और रिपोर्ट बनाई जाती है जो वस्तुतः हमें प्राप्त नहीं हुई है।

प्रश्न: अमरीका और इस्राइल ने सुझाव दिया है कि गुट निरपेक्ष आंदोलन शिखर सम्मेलन के लिए भी संयुक्त राष्ट्र महासचिव की यात्रा के लिए तेहरान उपयुक्त जगह नहीं है। क्या इस विषय पर भारत को कुछ कहना है?

विदेश सचिव: इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव को ही निर्णय लेना है।

प्रश्न: महोदय, आपने बताया कि एक त्रिपक्षीय बैठक में आप अपने ईरानी एवं अफगानी समकक्षियों के साथ बैठक करने जा रहे हैं। मैं समझता हूँ कि यह कार्यक्रम सम्मेलन से पूर्व का है। फिर भी भारत किन प्रस्तावों को आगे बढ़ाना चाहेगा।

विदेश सचिव: विशेष रूप से चहबहार पर चर्चा करने का प्रस्ताव है और जब मैं अपने समकक्षियों की बात करता हूँ तो यह स्वाभाविक है कि मेरे ईरानी समकक्षी भी वहाँ रहेंगे। मैं इस बात के प्रति आश्वस्त नहीं हूँ कि क्या अफ़ग़ानिस्तान के समकक्षी वही होंगे जो आम तौर पर मेरे साथ बात करते हैं। परंतु उन्होने बताया है कि उप विदेश मंत्री स्तर का प्रतिनिधित्व होगा। हम चाहते हैं कि चहबहार के संबंध में आम चर्चा को आगे बढ़ाया जाए और इस बात पर भी चर्चा हो कि अवसंरचना, बन्दरगाहों, चहबहार के विकास तथा अफ़ग़ानिस्तान तक एक वैकल्पिक मार्ग की अवसंरचना पर चर्चा हो जिसे हम निश्चित रूप से बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं। इसलिए हम इस पर चर्चा करेंगे।

परंतु जैसा कि मैंने बताया कि चूंकि ईरान की अवसंरचना अच्छी है और अब वे दो चरणों में अवसंरचना का विकास करना चाहते हैं और इसलिए उनके पास इनमें भागीदारी करने का विकल्प मौजूद है। वे अलग से भी एक औद्योगिक क्षेत्र का विकास करना चाहते हैं और वे इस क्षेत्र के लिए निवेश आमंत्रित कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त सड़क अवसंरचना भी है जो पहले से ही चहबहार को अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से जोड़ता है। ईरान के पास रेल लाइनों का विकास करने की भी योजना है जो न सिर्फ चहबहार से अफ़ग़ानिस्तान की सीमा पर जाएगा बल्कि मसाद के ज़रिए तुर्कमेनिस्तान सीमा तक पहुंचेगा। ये सभी बातें अफ़ग़ानिस्तान के पुनर्निर्माण और औद्योगिक विकास के संदर्भ में रोचक संभावनाएं उत्पन्न करती हैं जिनमें हमारा भी महत्वपूर्ण हित है।

अफ़ग़ानिस्तान के लिए भी अपने देश में एक वैकल्पिक मार्ग प्राप्त करना महत्वपूर्ण होगा जिसके ज़रिए वे महत्वपूर्ण आपूर्तियाँ प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए मुझे लगता है कि यह साझे हित का मामला है और हम इस पर ध्यान देने जा रहे हैं। परंतु जैसा कि मैंने बताया इन रोचक विचारों में हित के सामान्य मामलों के बीच हमेशा से यह बात सामने आती है कि यह किस प्रकार कार्य करेगा, इसमें कितनी लागत आएगी और क्या यह रियायती होगी। यदि यह मॉडल नहीं तो कौन सा मॉडल बेहतर और रियायती होगा। इन बातों पर हमें विशेषज्ञ स्तरीय सलाह की आवश्यकता होगी।

जैसा कि मैंने बताया हमें भारतीय बन्दरगाह संघ से कतिपय विशेषज्ञ विचार प्राप्त हुए हैं। इन पर मैं ईरानी और अफगानी समकक्षियों के साथ चर्चा करूंगा और फिर इसे आगे बढ़ाऊंगा। इस संदर्भ में शायद हमें विशेषज्ञ स्तर पर एक संयुक्त कार्यदल की ज़रूरत पड़ेगी जो निर्णय ले सके कि पारस्परिक रूप से सहमत व्यवस्था ही आगे बढ़ने का सर्वोत्तम तरीका होगा परंतु अभी कुछ कहना जल्दबाज़ी होगी।

प्रश्न: यदि पुनः सीरिया से जुड़े मुद्दे की बात की जाए तो यह भी तेहरान में कार्यसूची का एक मुद्दा हो... (अश्रव्य)... शर्म-अल-शेख शिखर सम्मेलन में काफी बातें हुई थी... (अश्रव्य)... क्या किसी अन्य देश के प्रतिनिधिमंडल के साथ किसी द्विपक्षीय बैठक का कार्यक्रम है?

विदेश सचिव: मैं स्पष्ट करता हूँ। मैंने जो पढ़ा वह शर्म-अल-शेख शिखर सम्मेलन का नहीं था बल्कि दो माह पूर्व आयोजित वरिष्ठ अधिकारियों मंत्रिस्तरीय बैठक से लिया गया था। वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में वह दस्तावेज़ तैयार किया गया जिसे अब तेहरान शिखर सम्मेलन का परिणाम दस्तावेज़ होना चाहिए। मुझे यह नहीं कहा गया है की भाषा में बदलाव होना चाहिए। जो बातें मैंने कही वे गुट निरपेक्ष आंदोलन और पूरे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की इच्छा को प्रतिबिम्बित करते हैं कि सीरिया में सुलह और शांति होनी चाहिए, संयुक्त राष्ट्र और अरब लीग के पूर्व संयुक्त विशेष दूतों की योजना और इसकी 6 सूत्रीय योजना का समर्थन किया जाना चाहिए।

साथ ही सीरिया सरकार द्वारा इसे स्वीकार करना एक सकारात्मक कदम है। अब तक की यही स्थिति है।

आम बहस के दौरान निश्चित रूप से हम आशा करेंगे कि विभिन्न नेता अपने विचार व्यक्त करें। हम भी निश्चित रूप से अपने विचार व्यक्त करेंगे और हमारी स्थिति जगज़ाहिर है। इस बात को हमने सभी चर्चाओं में स्पष्ट किया है। हमने द्विपक्षीय बातचीत में भी स्पष्ट किया है कि हम सीरिया में वर्तमान संघर्ष को समाप्त करने के लिए सीरिया के नेतृत्व में ही एक समावेशी प्रक्रिया चाहते हैं। हमारा मानना है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को सिर्फ सीरिया के नेतृत्व में चलाई जाने वाली प्रक्रिया का समर्थन करना चाहिए।

इसमें संयुक्त राष्ट्र को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। इसलिए यदि आप हमारे मतदान के रिकॉर्ड को देखें तो हमने निरंतर संयुक्त राष्ट्र की भूमिका का समर्थन किया है चाहे इस मिशन का अनुवीक्षण करना हो या संयुक्त विशेष दूतों का समर्थन करना। हमारा नज़रिया यही रहेगा और हम इसका समर्थन करते रहेंगे।

मैंने कहा कि हम निश्चित रूप से मिस्र के राष्ट्रपति के साथ भी एक बैठक निर्धारित करना चाहेंगे। हमे बताया गया है कि शायद सीरिया के प्रधानम्नतरी श्री हल्की भी तेहरान आ रहे हैं। इसका सही सही ब्योरा अभी प्राप्त नहीं हुआ है। परंतु जब हम वहाँ होंगे तो हम देखेंगे कि अन्य नेताओं के साथ लघु बैठकों की ज़रूरत या संभावना है कि नहीं। शासनाध्यक्ष एवं राज्याध्यक्ष स्तर के एक या दो नेता होंगे।

वस्तुतः कुल मिलकर हमे बताया गया है कि मूल रूप में तीस देशों के राज्याध्यक्ष और शासनाध्यक्ष रहेंगे। हमारा मानना है कि यह संख्या इससे आगे भी बढ़ सकती है। इसलिए यह इस बात पर निर्णय करता है कि वहाँ कौन-कौन आते हैं और हमारे पास कितना समय है। प्रधानमंत्री जी निश्चित रूप से उनके साथ चर्चा करना चाहेंगे। हमारा दृष्टिकोण हमेशा से यही रहा है कि एक ऐसे परिणाम के लिए समर्थन जुटाया जाए जिससे सीरिया के लोगों को अपना उद्देश्य प्राप्त करने में मदद मिले।

प्रश्न: जहां तक ईरान की परमाणु नीति का संबंध है, वैश्विक परिदृश्य में कई तरह के दबाव और खिंचाव हैं। मैं जानना चाहता हूँ कि यात्रा से पूर्व भारत का क्या दृष्टिकोण है? एक सिद्धान्त यह है कि परमाणु निवारक से बेहतर परमाणु शस्त्र सम्पन्न ईरान होगा। अभी यही स्थिति बन रही है इसलिए मैं जानना चाहता हूँ कि यात्रा से पूर्व इस संबंध में भारत की अद्यतन स्थिति क्या है?

विदेश सचिव: गुट निरपेक्ष आंदोलन में ईरान का कोई विशेष संदर्भ नहीं है। परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के संबंध में चर्चा होगी। मैं इतना ही बताना चाहूँगा क्योंकि यह महत्वपूर्ण है और इसी से आपके प्रश्न के दूसरे भाग का जन्म होता है।

प्रश्न: महोदय, द्विपक्षीय बैठकें भी होगी?

विदेश सचिव: जी हाँ पहले मुझे इसे समाप्त करने दीजिए। जैसा कि मैंने बताया इसी के आधार पर द्विपक्षीय बैठकें होगी। शासनाध्यक्षों एवं राज्याध्यक्षों ने आईएईए शासी मण्डल ने इसे पारित किए जाने के संबंध में चर्चा की और अंत में कहा गया है कि "राज्याध्यक्ष एवं शासनाध्यक्ष इस बात पर बल देते हैं कि निर्णय सर्वसम्मति से और आईएईए सदस्य देशों की भागीदारी से किए जाने चाहिए तथा आईएईए के निर्णय संविधि के अनुरूप होने चाहिए और इसमें शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा के अनुसंधान एवं विकास संबंधी सदस्य देशों के अधिकार प्रभावित नहीं होने चाहिए।

यदि ऐसा होता है तो परमाणु हथियारों के अप्रसार से संबंध संधि के अंतर्गत एक पूर्ण राष्ट्रीय परमाणु ईंधन चक्र का विकास किया जा सकता है जो शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए हो।" यही भाषा उभर कर सामने आई है। वस्तुतः हमने ईरान के परमाणु कार्यक्रम के संबंध में होने वाली सभी चर्चाओं में इसी भाषा का उपयोग किया है। यही हमारा दृष्टिकोण है और इसे आईएईए के समक्ष स्पष्ट कर दिया गया है। हमारा मानना है कि प्रत्येक राज्य पक्षकार का अधिकार है कि वह शांतिपूर्ण प्रयोजनों के लिए परमाणु ऊर्जा का उपयोग कर सकता है। यह कार्य इस तरीके से किया जाए कि उनके अधिकार और दायित्व दोनों का सम्मान हो सके।

प्रश्न: मैं सचिव महोदय से दो स्पष्टीकरण चाहता हूँ। तमिलनाडू की मुख्यमंत्री जयललिता ने प्रधानमंत्री जी को पत्र लिखकर बताया है कि श्रीलंका के दो सैन्य अधिकारी गोपनीय तरीके से नीलगिरी में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। सिर्फ तमिलनाडू की मुख्यमंत्री ही नहीं अपितु तमिलनाडू के सभी राजनैतिक दलों ने मांग की है कि इन दोनों लोगों को तत्काल श्रीलंका वापस भेजा जाए। दूसरी बात यह है कि तमिलनाडू की मुख्यमंत्री ने यह मांग भी की है कि कच्छ द्वीप ही तमिल मछुआरों का एक मात्र समाधान है।

तमिल मछुआरों को प्रतिदिन श्रीलंका नौसेना द्वारा निशाना बनाया जा रहा है। तमिलनाडु के राजनैतिक दलों का मानना है कि कच्छ द्वीप को दोबारा प्राप्त करने से ही तमिल मछुआरों का स्थायी समाधान निकाल सकेगा। क्या आप इन दो मुद्दों पर अपनी टिप्पणी देना चाहेंगे?

प्रश्न: महोदय, यह रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज से संबन्धित है। ये लोग वहीं हैं।

विदेश सचिव: मुझे अद्यतन पत्र की जानकारी नहीं है परंतु पूर्व में हमने कुछ ऐसे पत्र देखे थे जो प्रधानमंत्री जी को संबोधित थे न कि हमारे मंत्री जी को। जहां तक हमारा मानना है, यह रक्षा मंत्रालय का मामला है और हम रक्षा मंत्रालय के संपर्क में हैं कि वे क्या निर्णय लेते हैं और हम उसका समर्थन करेंगे।

जहां तक मछुआरों से जुड़े मुद्दे का संबंध है, भारत-श्रीलंका समुद्री सीमा का निर्धारण 1974 में ही कर दिया गया था। सरकार द्वारा इस प्रश्न को दोबारा उठाए जाने संबंधी किसी प्रस्ताव की जानकारी विदेश मंत्रालय को नहीं है।

प्रश्न: मैं जानना चाहता हूँ कि क्या ईरान-पाकिस्तान-भारत पाइपलाइन योजना को समाप्त कर दिया गया है क्योंकि अब इस संबंध में बात नहीं होती है?

विदेश सचिव: मैं समझता हूँ कि इस संबंध में बातचीत हुई है। आप कुछ बताना चाहेंगे?

संयुक्त सचिव (पीएआई): भारत और ईरान के बीच संयुक्त कार्यदल की बैठक में इस विषय पर चर्चा हुई है। इसकी अगली बैठक अगले माह नई दिल्ली में हो रही है। यह संयुक्त कार्यदल हाइड्रोकार्बन से संबन्धित है।

प्रश्न: महोदय, आपने हमे बताया कि इस शिखर सम्मेलन के दौरान अतिरिक्त समय में भारत के प्रधानमंत्री और पाकिस्तान के राष्ट्रपति के बीच बैठक होने वाली है। इस बैठक में प्रधानमंत्री जी किन मुद्दों को उठाएंगे? क्या प्रधानमंत्री जी पाकिस्तानी ज़मीन से सोशल नेटवर्किंग मीडिया के ज़रिए चलाए गए हाल के घृणा अभियान के बारे में भी अपनी चिंताएँ व्यक्त करेंगे?

विदेश सचिव: जैसा कि मैंने बताया हम पाकिस्तान के नेता सहित अन्य नेताओं के साथ बैठकें निर्धारित करने की प्रक्रिया में हैं। इस बैठक के उपरांत मैं एक प्रेस वार्ता करूंगा और उठाए गए मुद्दों के संबंध में आप सबको जानकारी दूँगा।

सरकारी प्रवक्ता: आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। इसी के साथ इस मीडिया वार्ता का समापन होता है।

(समाप्त)

नई दिल्ली
25 अगस्त, 2012



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