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16वें गुट निरपेक्ष आंदोलन सम्मेलन में भाग लेने हेतु तेहरान प्रस्थान करने से पूर्व प्रधानमंत्री जी का वक्तव्य

अगस्त 28, 2012

मैं ईरान के राष्ट्रपति मोहम्मद अहमदीनेजाद के निमंत्रण पर तेहरान में आयोजित होने वाले 16वें गुट निरपेक्ष शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए आज प्रस्थान कर रहा हूँ।

भारत गुट निरपेक्ष आंदोलन का संस्थापक सदस्य है। शीत युद्ध तथा इसके वैचारिक एवं सैन्य संघर्ष के दौरान गुट निरपेक्ष आंदोलन तर्क और संतुलन का एक कारक बना रहा। विनाशात्मक और व्यर्थ संघर्ष से बचते हुए हमारा यह समूह आर्थिक और सामाजिक विकास पर ध्यान केन्द्रित करने में सफल रहा है और साथ ही यह पारस्परिक समझ बूझ को बढ़ावा देने एवं तनाव को कम करने में अग्रणी रहा है। इस शिखर सम्मेलन में मैं ज़ोर देना चाहूँगा की हमारे आंदोलन के वे मौलिक सिद्धान्त अभी भी प्रासंगिक बने हुए हैं, विशेषकर ऐसे विश्व में जिसमें अर्थव्यवस्था पर संकट आया हुआ है और भू-राजनैतिक परिदृश्य में अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।

इस बात को व्यापक तौर पर स्वीकार किया जा रहा है कि वैश्विक अभिशासन के पुरातन ढांचे समकालीन राजनैतिक एवं आर्थिक चुनौतियों का समाधान करने में सफल नहीं रहे हैं। इनमें से अनेक चुनौतियाँ, जैसे कि सीरिया में बदतर हो रही स्थिति, वैश्विक आर्थिक मंदी और नए एवं उभरते खतरोंका मुकावाला करने के लिए विश्वसनीय अंतर्राष्ट्रीय कार्यवाही की ज़रूरत है। 16वें गुट-निरपेक्ष आंदोलन की विषयवस्तु- संयुक्त वैश्विक अभिशासन के ज़रिए स्थायी शांति- अत्यंत ही प्रासंगिक है।

मैं इस बात पर बल दूँगा कि हमारे इस आंदोलन से वैश्विक अभिशासन के ढांचों में सुधार लाने और इन्हें लोकतान्त्रिक बनाए जाने के हमारे प्रयासों को ठोस राजनैतिक प्रोत्साहन मिलना चाहिए जो कि इन चुनौतियों का प्रभावी समाधान करने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

गुट निरपेक्ष आंदोलन के सदस्यों की विविधता और संख्या हमारे बीच सहयोग की अपार संभावनाएं उत्पन्न करती हैं जिनके आधार पर हम अपनी विकास चुनौतियों का समाधान कर सकते हैं। यह भी महत्वपूर्ण है कि हमारा यह आंदोलन पारस्परिक लाभ के अवसर उपलब्ध कराता है। भारत दक्षिण-दक्षिण सहयोग के इन प्रयासों में अपना योगदान देना जारी रखेगा।

तेहरान की अपनी यात्रा के दौरान मैं ईरान के नेता और शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले गुट निरपेक्ष देशों के अन्य नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करूंगा। मुझे इन देशों के साथ अपने द्विपक्षीय सम्बन्धों की समीक्षा करने का अवसर प्राप्त करने की प्रतीक्षा है। मुझे अपने अनेक समकक्षियों के साथ विभिन्न क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर भी विचार करने की प्रतीक्षा है।

नई दिल्ली
28 अगस्त, 2012



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