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गुट निरपेक्ष आंदोलन की तैयारी मंत्रिस्तरीय बैठक में "संयुक्त वैश्विक अभिशासन के ज़रिए स्थायी शांति" विषय पर हुई बहस में विदेश मंत्री जी का हस्तक्षेप

अगस्त 28, 2012

अध्यक्ष महोदय,
महानुभाव तथा विशिष्ट प्रतिनिधि,

सबसे पहले मैं इस बैठक का अध्यक्ष चुने जाने पर ईरान के विशिष्ट विदेश मंत्री को अपनी हार्दिक शुभ कामनाएँ देता हूँ। इस बैठक के लिए की गयी उत्कृष्ट व्यवस्थाओं तथा सौहार्दपूर्ण आतिथ्य-सत्कार के लिए ईरानी मेज़बानों को धन्यवाद देता हूँ।

आज जब हम तेहरान में विचार विमर्श कर रहे हैं तो मैं हमारे दोनों देशों के लोगों के बीच के सभ्यतामूलक संपर्कों और कार्यकलापों का भी स्मरण करना चाहूँगा। इस अवसर पर मैं पिछले तीन वर्षों के दौरान इस आंदोलन को सफल नेतृत्व प्रदान करने के लिए मिस्र की सरकार की भी सराहना करना चाहूँगा क्योंकि यह अवधि उस देश में गहन लोकतान्त्रिक बदलाव की रही है। हमारी इस बहस की विषय वस्तु महत्वपूर्ण एवं समसामयिक है। आज के तेज़ी से अंतर संबन्धित और अंतर निर्भर हो रहे विश्व में विभिन्न देशों की नीतियाँ पहले की अपेक्षा एक दूसरे के साथ कहीं बेहतर तरीके से जुड़ी हुई हैं।

वैश्वीकरण की प्रक्रिया ने हमें अपार अवसर उपलब्ध कराए हैं परंतु इसने उन बदलावों को भी बढ़ावा दिया है जिनका स्वरूप कहीं अधिक जटिल, बहु आयामी और अंतर्राष्ट्रीय है।

अध्यक्ष महोदय,

हमारे समय की केन्द्रीय चुनौतियाँ विश्व अर्थव्यवस्था एवं वित्त के प्रबंधन, स्थायी खाद्य एवं ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने, गरीबी उपसमन, भुखमरी एवं अभाव के उन्मूलन, महामारियों का मुक़ाबला करने, साक्षारता के स्तर में वृद्धि करने, सतत विकास सुनिश्चित करने और जलवायु परिवर्तन की समस्या का मुक़ाबला करने से जुड़ी हुई हैं। आतंकवाद, सामूहिक विनाश के हथियारों, जल दस्युता, मादक औषधों की तस्करी, संगठित अपराध और अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के समक्ष विद्यमान अन्य खतरों के कारण भी इस प्रकार की गंभीर चुनौतियाँ उत्पन्न हुई हैं।

वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिवेश की अनिश्चितता का विकासशील देशों पर विशेष प्रभाव पड़ा है। वैश्विक आर्थिक सुधार की प्रक्रिया अभी भी अनिश्चित बनी हुई है। यूरोज़ोन की स्थिति के कारण मामला और भी गंभीर हो गया है। इस समय वृहत आर्थिक स्थायित्व कायम रखने के लिए संवर्धित अंतर्राष्ट्रीय नीतिगत समन्वय बनाए रखना ज़रूरी है जो विश्व अर्थव्यवस्था में स्वस्थ सुधार लाने की प्रक्रिया के अनुकूल हो।

चूंकि विश्व जनसंख्या का 80 प्रतिशत और विश्व के युवाओं का लगभग 90 प्रतिशत विकासशील देशों में रह रहा है इसलिए हमारे समक्ष विद्यमान विकास और प्रगति की असीम चुनौतियाँ विद्यमान हैं। हमें अपने युवाओं को आवश्यक तकनीकी कौशल प्रदान करने की ज़रूरत है। त्वरित आर्थिक प्रगति को बढ़ावा देने के लिए हमें नौकरियों के अवसर सृजित करने की आवश्यकता है।

अध्यक्ष महोदय,

सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्यों (एमडीजी) की प्राप्ति समावेशी, न्यायसंगत एवं सतत वैश्विक विकास के लिए अनिवार्य है। अब तक हुई प्रगति को देखते हुए वर्ष 2015 के बाद भी सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्यों पर बल देना महत्वपूर्ण होगा जिसके लिए विकासशील देशों को संवर्धित वित्तीय एवं प्रौद्योगिक समर्थन की ज़रूरत होगी।

अफ्रीकी महाद्वीप में जिस प्रकार की कठिन विकास चुनौतियाँ हैं उतनी विश्व के किसी अन्य भाग में नहीं। इस आंदोलन को विकास कार्यसूची में अफ्रीका की प्राथमिकता सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करना होगा। अपनी ओर से हम द्विपक्षीय तौर पर और साथ ही भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन एवं दक्षिण-दक्षिण सहयोग की रूपरेखा के अंतर्गत अपनी विकास सहायता में वृद्धि कर रहे हैं। हमे निश्चित रूप से बहुपक्षीय व्यापार वार्ताओं के दोहा दौर में विकास कार्यसूची की केन्द्रीयता सुरक्षित रखनी होगी।

अध्यक्ष महोदय,

आज सतत विकास सुनिश्चित करने और जलवायु परिवर्तन की समस्या का समाधान करने की अनिवार्यता पहले से कहीं अधिक स्पष्ट है। हाल में ही हमने रियो+20 सम्मेलन का सफलता पूर्वक आयोजन किया। यह महत्वपूर्ण है कि हम इसके परिणामों को हूबहू और साझे परंतु भिन्न दायित्वों के सिद्धान्त के आधार पर मूर्त रूप देने के यथा संभव सभी प्रयास करें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हम नीति निर्णय प्रक्रिया में विकासशील विश्व की भूमिका को महत्वपूर्ण मानते हैं।

अध्यक्ष महोदय,

आतंकवाद हमारे समय का सबसे बड़ा नासूर है जो हमारे बहुलवादी समाजों के सामाजिक-आर्थिक ढांचे पर वार करता है। हमे आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई को उच्चस्तर तक ले जाना होगा। आतंकवाद के संदर्भ में बिलकुल बर्दाश्त नहीं करने की नीति अपनायी जानी चाहिए। अब समय आ गया है कि हम अपेक्षित राजनैतिक इच्छा शक्ति का प्रदर्शन करें और संयुक्त राष्ट्र में अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद से सम्बद्ध व्यापक अभिसमय पर अपनी सहमति व्यक्त करें। सोमालिया तट पर जल दस्युता के कारण भी लोगों को अपार दुख झेलने पड़ रहे हैं और इससे समुद्री व्यवसाय की लाइनों के समक्ष भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। विशेषकर संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में इस खतरे का मुकबाला करने के लिए ठोस अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाई की ज़रूरत है।

आज ज़रूरत इस बात की है यह आंदोलन सार्वभौमिक परमाणु निशस्त्रीकरण तथा परमाणु हथियारों से मुक्त विश्व का लक्ष्य प्राप्त करने के प्रयासों में और भी सक्रिय भूमिका निभाए। वर्तमान वैश्विक अभिशासन की रूपरेखा की स्पष्ट असफलता के कारण भी वैश्विक चुनौतियों का मुक़ाबला करने की हमारी क्षमता सीमित हुई है। आज समय आ गया है कि विकसित और विकासशील देश विश्व के समक्ष विद्यमान चुनौतियों का मुक़ाबला करने और अवसरों का लाभ लेने के लिए अंतर्राष्ट्रीय कानून एवं बहुपक्षीय नीति निर्णय से संबन्धित मान्यता प्राप्त मानदंडों के आधार पर मिलजुल कर कार्य करें।

अध्यक्ष महोदय,

हमे ऐसे नजरिए की ज़रूरत है जो समावेशी, पारदर्शी तथा बहुपक्षवाद से जुड़ा हो जिनके आधार पर हम इन चुनौतियों से पार पासकें। हमारा विचार है कि इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। हमे ऐसे लोकतान्त्रिक, न्यायतथा तथा वैध अंतर्राष्ट्रीय रूपरेखा का विकास करने में अपने प्रयासों में तेज़ी लाने की ज़रूरत है जो समसामयिक हकीकतों को प्रतिबिम्बित कर सके।

भारत इस बात के प्रति आश्वस्त है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक समाधान प्राप्त किए जाने तक संयुक्त राष्ट्र के अन्य सुधारों को अपूर्ण नहीं माना जाएगा। हमे और भी प्रातिनिधिक अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय रूपरेखा की आवश्यकता है जिसमें विकासशील देशों को बेहतर आवाज़ एवं प्रतिनिधित्व मिल सके। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष में कोटे एवं अभिशासन सुधारों की वर्तमान मंद गति में तेज़ी लायी जानी चाहिए।

वर्ष 2011 के आरंभ से पश्चिम एशिया तथा उत्तर अफ्रीका के विभिन्न भागों में लोगों द्वारा अपने राजनैतिक, सामाजिक एवं आर्थिक जीवन में बेहतर भूमिका निभाने की गहन इच्छा उभर कर सामने आती रही है। इन जायज़ आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए आवश्यक है कि सभी पक्ष हिंसा का परित्याग करें। अहिंसा, समावेशी राजनैतिक प्रक्रियाओं इत्यादि द्वारा लाया जाने वाला बदलाव न सिर्फ स्थायी है बल्कि सामाजिक समरसता एवं स्थायित्व को भी बढ़ावा देता है।

इस संदर्भ में हम सीरिया के घटनाओं पर विशेष रूप से चिंतित हैं क्योंकि इस बात की भी संभावना है कि ये घटनाएँ सीरिया की सीमाओं से आगे बढ़ जाएँ। अतः इस संघर्ष के और सैन्यीकरण से निश्चित रूप से बचना होगा। हम सीरिया के नेतृत्व में एक ऐसी समावेशी राजनैतिक प्रक्रिया के प्रति अपना समर्थन दोहराते हैं जिससे सीरियाई समाज के सभी तबकों की जायज़ आकांक्षाएँ पूरी हो सकें और सीरिया की स्वतंत्रता, क्षेत्रीय अखंडता तथा संप्रभुता का सम्मान हो सके।

अध्यक्ष महोदय,

पश्चिम एशिया और उत्तर अफ्रीका के घटनक्रमों के कारण फिलिस्तीन का मुद्दा पीछे नहीं पड़ना चाहिए। हम 1967 के पूर्व की सीमाओं पर आधारित फिलिस्तीनी लोगों के लिए एक देश प्राप्त करने के उनके अधिकारों का समर्थन करना जारी रखेंगे जिसकी राजधानी पूर्वी जेरूसलम हो और जो इस्राइल के साथ शांतिपूर्ण तरीके से रह सके। हम संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता के लिए फिलिस्तीन द्वारा आवेदन किए जाने का भी समर्थन करना जारी रखेंगे।

इस आंदोलन की विविधता हमारी सबसे बड़ी ताकत है। हम एक दूसरे के विकास मार्गों, विशिष्ट सांस्कृतिक परम्पराओं तथा शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में स्थायी विश्वास का सम्मान करते हैं। भारत की पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गांधी ने गुट निरपेक्ष आंदोलन को सही मायने में विश्व का सबसे बड़ा शांतिपूर्ण आंदोलन बताया था।

इस आंदोलन को और मजबूत बनाने के लिए हमे समान विचारों के साथ आगे बढ्ने और इसके सदस्य देशों के बीच विद्यमान सहक्रियाओं का प्रभावी तरीके से उपयोग करने की ज़रूरत है। मुझे विश्वास है कि इस शिखर सम्मेलन के दौरान होने वाले विचार विमर्श हमारे इस आंदोलन के लिए समकालीन एवं स्थायी विज़न का विकास करने में उपयोगी सिद्ध होंगे।

तेहरान
28 अगस्त, 2012



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