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फिलिस्तीन से सम्बद्ध गुट निरपेक्ष आंदोलन समिति की मंत्रिस्तरीय बैठक में विदेश मंत्री जी का हस्तक्षेप

अगस्त 28, 2012

अध्यक्ष महोदय,
समिति के विशिष्ट सदस्यगण,


सबसे पहले मैं इस मंत्रिस्तरीय बैठक का आयोजन करने के लिए फिलिस्तीन से सम्बद्ध गुट निरपेक्ष आंदोलन समिति को धन्यवाद देना चाहूँगा। जैसा कि आप सब स्मरण कर सकते हैं, मूल रूप में यह बैठक इस माह के आरंभ में रमल्ला में होनी निर्धारित थी जिसका उद्देश्य फिलिस्तीनी लोगों के साथ एकजुटता का प्रदर्शन करना तह। दुर्भाग्यवश इस्राइल ने इस आधार पर बैठक को रोक दिया कि इनमें से कुछ सदस्यों के इस्राइल के साथ संबंध नहीं है। गुट निरपेक्ष आंदोलन समिति ने इस्राइल की इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की थी।

फिलिस्तीनी आंदोलन भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। वस्तुतः भारत 15 नवंबर, 1988 की अल्जीयर्स घोषणा के अनुसरण में 16 नवंबर, 1988 को फिलिस्तीन राज्य को स्वीकार करने वाला पहला गैर-अरब देश था। हमारा मानना है कि पश्चिम एशिया के संघर्ष का स्वरूप अनिवार्यतः राजनाइटिक है जिसका समाधान ताकत के आधार पर नहीं किया हज सकता। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद संकल्प 242 और 338 के प्रति हमारे समर्थन के अनुसरण में भारत वार्ता पर आधारित एक ऐसे समाधान का समर्थन करता है जिसके फलस्वरूप एक संप्रभु, स्वतंत्र, व्यवहार्य तथा एकीकृत फिलिस्तीन राज्य का उदय हो, जिसकी राजधानी पूर्वी जेरूसलम हो और जो सुरक्षित एवं मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर इस्राइल के साथ शांतिपूर्ण तरीके से रह सके।

जैसा की क्वार्टेट मैप और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद संकल्प 1397 और 1515 में कहा गया है। इसके अतिरिक्त हमने अरब शांति पहल का भी समर्थन किया है।

अध्यक्ष महोदय,

भारत ने अंतर्राष्ट्रीय मंचो पर हमेशा ही फिलिस्तीन आंदोलन के प्रति अपना अटल समर्थन व्यक्त किया है। सितंबर 2011 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए अपने सम्बोधन में प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने घोषणा की थी कि भारत संयुक्त राष्ट्र में एक समान सदस्य के रूप में फिलिस्तीन का स्वागत करना चाहता है। इस वर्ष जनवरी माह में जब मैंने रमल्ला का दौरा किया था तब उस समय मैंने भी फिलिस्तीनी राष्ट्रवाद के प्रति अपना समर्थन जारी रखने का ठोस संकल्प व्यक्त किया था।

भारत की सरकार और जनता को अगले माह राष्ट्रपति महमूद अब्बास की भारत यात्रा की उत्सुकता से प्रतीक्षा है।

भारत ने अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्रों में इस्राइल द्वारा अवैध तरीके से बस्तियाँ बसाने की प्रक्रिया पर रोक लगाने और फिलिस्तीन के भीतर लोगों एवं सामानों की मुक्त आवाजाही पर लगे प्रबंधों पर शीघ्र ढील देने का आह्वान किया है। पश्चिमी तट और पूर्वी जेरूसलम में बस्तियाँ बनाने संबंधी गतिविधियों से द्वि-राष्ट्र समाधान के बुनियादी ढांचे को खतरा उत्पन्न हो गया है। हमारा मानना है कि इस्राइल द्वारा अवैध बस्तियाँ बनाने पर रोक लगाना सीधी वार्ता की बहाली में पहला कदम होगा।

बस्तियाँ बसाने संबंधी गतिविधियों से फिलिस्तीनी लोगों के लिए मानवीय समस्याएं भी उत्पन्न हो गयी हैं और विस्थापितों और फिलिस्तीनी जनता के बीच तनाव और हिंसा में भी वृद्धि हुई है। इसलिए हम इस्राइल से पुनः आह्वान करते हैं कि वह बस्तियाँ बसाने संबंधी सभी गतिविधियां रोक दे। भारत फिलिस्तीन को विकास हेतु सहायता प्रदान करता रहा है। इस सहायता में क्षमता निर्माण उपाय एवं मानव संसाधन विकास के प्रति समर्थन शामिल है। हम फिलिस्तीन को विकास सहायता प्रदान करने के तौर तरीकों का नियमित रूप से पता लगते रहेंगे।

मध्य पूर्व और उत्तर अफ्रीका की राजनैतिक उथल पुथल एवं कुछ अन्य कारकों के कारण दुर्भाग्यवश मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया पृष्ठभूमि में चली गयी है। हम शांति प्रक्रिया की बहाली का समर्थन करते हैं। हमने इस्राइल और फिलिस्तीन के बीच प्रत्यक्ष संवाद का भी स्वागत किया था। तथापि पिछले दो वर्षों के दौरान होने वाली अनौपचारिक चर्चाओं के बावजूद सीधी वार्ता की बहाली की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। लोकतान्त्रिक मूल्यों एवं सिद्धांतों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता के अनुसरण में फिलिस्तीन में सुलह की प्रक्रिया का स्वागत है।

हम आशा करते हैं कि इन प्रयासों के लाभ शीघ्र सामने आएंगे और एकीकृत सरकार का गठन होगा, चुनाव आयोजित किए जाएंगे, फिलिस्तीन राज्य की संस्थाओं का पुनः एकीकरण होगा और फिलिस्तीनी समाज का पुनर्निर्माण एवं विकास हो सकेगा।

मैं दोहराना चाहूँगा कि भारत फिलिस्तीनी जनता के एक स्वतंत्र राज्य संबंधी जायज़ अधिकारों का समर्थन करता है जो इस्राइल के साथ शांति और सुरक्षा के साथ रह सके।

हमें आशा है कि गुट निरपेक्ष आंदोलन के इस सामूहिक प्रयास से सभी संबन्धित पक्षों को ठोस संकेत जाएगा और शांति प्रक्रिया बहाल हो सकेगी जिसके फलस्वरूप मध्य पूर्व में न्यायोचित, व्यापक और स्थायी शांति स्थापित हो सकेगी।

तेहरान
28 अगस्त, 2012



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