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पाकिस्‍तान की यात्रा पर विदेश मंत्री का हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स से साक्षात्‍कार

सितम्बर 05, 2012

प्रश्‍न: भारत एवं पाकिस्‍तान के बीच बहाल वार्ता प्रक्रिया का उद्देश्‍य परस्‍पर विश्‍वास की कमी को दूर करना तथा दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्‍य करना था। जब आपने इस्‍लामाबाद में अपने समकक्ष के साथ अपनी बैठक के लिए चल रही वार्ता का जायजा लेने के लिए तैयारी की, तो आपके आकलन के अनुसार, यह कवायद कितनी सार्थक रही है?

उत्‍तर: दोनों पक्षों के बीच मुद्दों के समाधान के लिए वार्ता सबसे उत्‍तम तरीका है। फरवरी 2011 में हमारी द्विपक्षीय वार्ता की बहाली के बाद से हमने कुछ दूरी तय की है। आर्थिक एवं वाणिज्यिक सहयोग तथा जन दर जन संपर्क समेत मैत्रीपूर्ण विनिमय के संवर्धन के क्षेत्र में कुछ प्रगति हुई है। आतंकवाद जैसे दूसरे क्षेत्रों में बहुत कुछ करने की जरूरत है तथा हमारे सामने चुनौतियां मौजूद हैं किंतु इनको इस बारे में बात करने में रूकावट नहीं बनना चाहिए कि इन कठिन मुद्दों को कैसे हल किया जाए।

प्रश्‍न: वार्ता प्रक्रिया में आगे क्‍या है? क्‍या आप वार्ता प्रक्रिया को सहयोग के अधिक मुद्दों एवं क्षेत्रों पर मंत्री स्‍तर पर स्‍तरोन्‍नत कर रहे हैं? विभिन्‍न क्षेत्रों में संबंधों में सुधार के लिए क्‍या आपके मन में कोई समयबद्ध लक्ष्‍य है?

उत्‍तर: अपने समकक्ष विदेश मंत्री हिना रब्‍बानी खार के साथ मेरी जो बैठक होने जा रही है उसके परिणाम का मैं पूर्वानुमान नहीं लगा सकता। फिर भी, हम आतंक एवं हिंसा मुक्‍त वातावरण में द्विपक्षीय वार्ता के माध्‍यम से पाकिस्‍तान के साथ सभी मुद्दों का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस स्‍तर पर, सुगठित वार्ता प्रक्रिया को मंत्री स्‍तर पर ऊपर उठाने का कोई प्रस्‍ताव नहीं है। राजनय में, हम दो देशों के बीच इस तरह के महत्‍वपूर्ण एवं जटिल मुद्दों के लिए कोई बनावटी समय सीमा निर्धारित नहीं कर सकते हैं।

प्रश्‍न: पाकिस्‍तान के नेतृत्‍व ने भारत – पाकिस्‍तान संबंध से निपटने की दिशा में उनके नवाचारी दृष्टिकोण, क्षेत्र के संबंध में उनके विजन के लिए प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह की खूब प्रशंसा की है। क्‍या आपको उम्‍मीद है कि प्रधान मंत्री इस साल पाकिस्‍तान का दौरा करने में समर्थ होगें? यदि पाकिस्‍तान प्रधान मंत्री की मेजबानी करने के लिए इतना उत्‍सुक है, तो डेलिवरेबल्‍स की दृष्टि से उन्‍हें क्‍या करना चाहिए जिससे भारत के प्रधान मंत्री की पाकिस्‍तान यात्रा संभव होती है?

उत्‍तर: प्रधान मंत्री जी इस मुद्दे पर बहुत स्‍पष्‍ट हैं। उन्‍होंने उपयुक्‍त समय पर पाकिस्‍तान का दौरा करने का निमंत्रण स्‍वीकार किया है। वह अच्‍छी तरह से तैयार यात्रा चाहते हैं, जिससे उपयुक्‍त परिणाम प्राप्‍त हो सकें।

प्रश्‍न: हम ‘‘उपयुक्‍त परिणामों’’ के बारे में बहुत अधिक सुनते रहते हैं, जो प्रधान मंत्री की पाकिस्‍तान यात्रा को अनिवार्य बनाएंगे? नई दिल्‍ली बड़े टेक अवेज पर क्‍यों जोर दे रहा है, यह देखते हुए कि इतने सारे भारतीय प्रधान मंत्री पाकिस्‍तान का दौरा कर चुके हैं तथा हम अभी भी सभी प्रमुख मुद्दों पर अटके हुए हैं? अथवा जब आप भारत के प्रधान मंत्री की पाकिस्‍तान यात्रा के बारे में विचार करते हैं, तो 26/11 के मुंबई हमले ने चीजों को बहुत कठिन बना दिया है?

उत्‍तर: मैं नहीं समझता कि प्रधान मंत्री जी ने अपनी यात्रा के लिए किसी बड़े टेक अवेज, जैसा कि आप इसे पुकार रहे हैं, की शर्त रखी है। वह केवल यह कह रहे हैं कि इतनी महत्‍वपूर्ण यात्रा के लिए समय एवं माहौल उपयुक्‍त होना चाहिए, तथा परिणामों को ध्‍यान में रखते हुए यात्रा की अच्‍छी तरह से तैयारी होनी चाहिए।

प्रश्‍न: पाकिस्‍तान कहता है कि वार्ता प्रक्रिया को शर्तों पर आधारित न बनाया जाए। क्‍या वार्ता पर प्रगति के लिए यह शर्त रखी गई है कि पाकिस्‍तान मुंबई हमले के षड़यंत्रकारियों एवं दोषियों को दंडित करने के लिए सार्थक कदम उठाए? पाकिस्‍तान कहता है कि वे किसी सशर्त दृष्टिकोण का अनुसरण नहीं करते हैं जैसे कि जम्‍मू एवं कश्‍मीर के मुद्दे को सभी अन्‍य मुद्दों के ऊपर रखना?

उत्‍तर: राजनय में, वार्ता के लिए कोई पूर्व शर्त निर्धारित नहीं की जाती है। निश्चित रूप से हम ऐसा नहीं कर रहे हैं। आपको ज्ञात होगा कि बहाल वार्ता के अंतर्गत विभिन्‍न मुद्दों पर सचिव स्‍तरीय वार्ता के दो दौर पूरे हो चुके हैं तथा अपने पाकिस्‍तान समकक्ष के साथ वार्ता प्रक्रिया में प्रगति की समीक्षा करने के लिए मैं पाकिस्‍तान जा रहा हूँ। फिर भी, हमने निरंतर पाकिस्‍तान को सूचित किया है कि वार्ता के सार्थक, व्‍यापक एवं स्‍थायी होने के लिए यह आवश्‍यक है कि पाकिस्‍तान आतंकवाद से संबंधित हमारे सरोकारों पर ध्‍यान दे जिसमें मुंबई आतंकी हमले का मामला भी शामिल है। इससे विश्‍वास की कमी काफी हद तक दूर होगी तथा अंतत: संबंधों के सामान्‍य होने का मार्ग प्रशस्‍त होगा।

प्रश्‍न: क्‍या आप समझते हैं कि भारत को चाहिए था कि वह मुंबई आतंकी हमले के गवाहों के साथ जिरह करने के लिए न्‍यायिक आयोग को अनुमति दे देता? दोनों देशों के पास समान साक्ष्‍य अधिनियम हैं। यह एक पूर्व निश्चित निष्‍कर्ष हो सकता है कि पैनल की रिपोर्ट जिसे जिरह का अधिदेश प्राप्‍त नहीं था, उसे पाकिस्‍तान में न्‍यायालय द्वारा अस्‍वीकार कर दिया जाएगा? तब आपने आयोग को क्‍यों अनुमति दी तथा अब पाकिस्‍तान दलील देता है कि वे अग्रिम में परिणाम जानते हुए भी भारतीय मांगों की भिन्‍नता में पैनल भेजने के लिए सहमत हुए?

उत्‍तर: यह उतना सरल नहीं है जितना आप इसे सरल बना रहे हैं। ये जटिल कानूनी मुद्दे हैं जिसमें कार्यपालक को कानून की सीमाओं के अंदर तथा सभी संबंधितों से विचार विमर्श करके काम करना होता है।

प्रश्‍न: ऐसा प्रतीत होता है कि राष्‍ट्रपति आसिफ अली जरदारी सियाचीन मुद्दे के शीघ्र समाधान के लिए उत्‍सुक हैं? इस बात को ध्‍यान में रखते हुए कि उनके लिए यह एक बड़ा ‘‘टेक अवे’’ होगा, क्‍या भारत इस पर दाव लगा रहा है? और क्‍या आप अब भी वार्ता प्रक्रिया के लिए चरण दर चरण दृष्टिकोण का अनुसरण कर रहे हैं अथवा क्‍या आप समझते हैं कि प्रमुख मुद्दों पर ध्‍यान देने का समय आ गया है, जिसके बारे में अनेक लोग कहते हैं कि दोनों देशों के बीच विश्‍वास की बहाली के लिए यह आवश्‍यक है?

उत्‍तर: हम वार्ता के माध्‍यम से दोनों देशों के बीच सभी बकाया मुद्दों के समाधान के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारा यह दृढ़ मत है कि हमारे दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्‍य बनाने के लिए चरण दर चरण दृष्टिकोण सबसे वास्‍तविक दृष्टिकोण है। अंतर्ग्रस्‍त मुद्दों की जटिलताओं को देखते हुए, हमें सबसे पहले ‘करणीय’ पर कार्रवाई करते हुए आगे बढ़ना होगा और साथ ही अधिक दुरूह मुद्दों के समाधान के लिए हमें अपनी ओर से ईमानदारी से प्रयास जारी रखना होगा।

प्रश्‍न: क्‍या आप पाकिस्‍तान के आंतरिक मंत्री के इस सुझाव के प्रति खुला विचार रखते हैं कि दोनों देशों को सुरक्षा मामलों पर सहयोग करना चाहिए? क्‍या मुंबई हमले के मामले में एक संयुक्‍त जांच का भी सुझाव आया था? महोदय, इन पर आपकी क्‍या प्रतिक्रिया है?

उत्‍तर: भारत एवं पाकिस्‍तान के बीच गृह / आंतरिक सचिव स्‍तर पर वार्ता के अंतर्गत हमारी संबंधित एजेंसियों के बीच सुरक्षा मामलों पर सहयोग के लिए सहमति हुई है। लेकिन इन करारों को अमली जामा पहनाना चुनौतीपूर्ण कार्य है। घोषित मंशा तथा दृष्टिगोचर कदम में अंतर नहीं होना चाहिए। अतीत में, संयुक्‍त आतंकवाद-रोधी मशीनरी (जे ए टी एम) के साथ हमारा अनुभव बहुत अच्‍छा नहीं था, जिसे दोनों देशों के बीच स्‍थापित किया गया था तथा इसीलिए उसे आगे नहीं बढ़ाया गया। जहां तक मुंबई आतंकी हमले का मामला है, हमारा विश्‍वास है कि हमने पाकिस्‍तान को पर्याप्‍त से अधिक साक्ष्‍य उपलब्‍ध करा दिया है जिससे वे इस जघन्‍य अपराध के सभी दोषियों को दंड देने में समर्थ हो सकें।

प्रश्‍न: महोदय, आप एक ऐसे राज्‍य से आते हैं जहां भारत – पाकिस्‍तान कथा उससे बिल्‍कुल भिन्‍न है जो भारत के इस भाग में है। क्‍या इसने इस मुद्दे से निपटने में आपकी सहायता की है?

उत्‍तर: पाकिस्‍तान के हमारा संबंध एक भारतीय मुद्दा है तथा इसे क्षेत्रीय या प्रांतीय दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता है। मैं इस मुद्दे को भारतीय परिप्रेक्ष्‍य में देखता हूँ।

प्रश्‍न: हमें भारत – पाकिस्‍तान क्रिकेट मैच कितना जल्‍दी देखने को मिलेगा?

उत्‍तर: आपको यह उत्‍तर बीसीसीआई एवं पीसीबी से प्राप्‍त करना चाहिए।

नई दिल्‍ली
5 सितंबर 2012



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