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पाकिस्‍तान की यात्रा से पूर्व दि एक्‍सप्रेस ट्रि‍ब्‍यून से विदेश मंत्री का साक्षात्‍कार

सितम्बर 07, 2012

पाकिस्‍तान की यात्रा से पूर्व दि एक्‍सप्रेस ट्रि‍ब्‍यून से विदेश मंत्री का साक्षात्‍कार

3 दिवसीय यात्रा : मैं सद्भाव का संदेश लाया हूँ एस एम कृष्‍णा

एस एम कृष्‍णा ने कहा, ‘‘भारत एक मजबूत एवं स्थिर साझेदार के रूप में इस्‍लामाबाद चाहता है।’’

दि एक्‍सप्रेस ट्रि‍ब्‍यून : 7 सितंबर 2012

भारत शांतिपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता के माध्‍यम से पाकिस्‍तान के साथ सभी बकाया मुद्दों का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है : एस एम कृष्‍णा

पाकिस्‍तान की अपनी यात्रा से पूर्व दि एक्‍सप्रेस ट्रि‍ब्‍यून के साथ एक अनन्‍य साक्षात्‍कार में भारत की विदेश नीति के कर्णधार, संयमी विदेश मंत्री सोमनहल्‍ली मलैया कृष्‍णा ने कुछ उत्‍साहवर्धक टिप्‍पणी की हैं।

अन्‍य बातों के साथ-साथ उन्‍होंने इस बात पर बल दिया कि भारत एक मजबूत एवं स्थिर साझेदार के रूप में इस्‍लामाबाद चाहता है तथा बताया कि पाकिस्‍तान की भौगोलिक स्थिति उसे दक्षिण एवं मध्‍य एशिया के बीच सेतु बनने की आदर्श स्थिति में पहुंचाती है।

संयुक्‍त वार्ता प्रक्रिया के अंग के रूप में 3 दिन की यात्रा पर आज (शुक्रवार) पाकिस्‍तान पहुंचने वाले श्री एस एम कृष्‍णा अपने पाकिस्‍तानी समकक्ष हिना रब्‍बानी खार के साथ-साथ अन्‍य शीर्ष राजनीतिक नेताओं के साथ अनेक मुद्दों पर बातचीत करेंगे।

भारत एवं पाकिस्‍तान के बीच वाणिज्‍य एवं व्‍यापार के मोर्च पर पर्याप्‍त प्रगति हो जाने के बाद उनकी यह यात्रा हो रही है, तथा यह इससे भी उच्‍च स्‍तर की यात्रा प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह की यात्रा के लिए आधार निर्मित कर सकती है।

व्‍यापार से लेकर आतंकवाद, कैदियों से लेकर राजनीति और वाणिज्‍य दूतावास से लेकर कश्‍मीर तक हर मुद्दे के बारे में बात करते हुए अपने आगमन के अवसर पर ईमेल के माध्‍यम से श्री एस एम कृष्‍णा ने दि एक्‍सप्रेस ट्रि‍ब्‍यून से बात की।

नीचे संपूर्ण साक्षात्‍कार का पाठ संपादित किए बगैर दिया गया है।

प्रश्‍न: जब इस वर्ष बाद में भारत के प्रधान मंत्री डा. मनमोहन सिंह इस्‍लामाबाद की यात्रा पर जाएंगे तब क्‍या हम भारत एवं पाकिस्‍तान के बीच संबंधों के सुधार में रूकावट डालने वाले कुछ विवादास्‍पद मुद्दों पर किसी बड़ी सफलता की उम्‍मीद कर सकते हैं?

उत्‍तर: मैं इस बात से शुरूआत करना चाहूँगा कि मैं भारत सरकार तथा भारत के लोगों की ओर से पाकिस्‍तान सरकार एवं पाकिस्‍तान के लोगों के लिए सद्भाव का संदेश एवं वार्ता की मंशा लेकर आया हूँ। पाकिस्‍तान के साथ भारत परस्‍पर लाभप्रद चहुंमुखी सहयोग का संबंध स्‍थापित करने का इच्‍छुक है। हम पाकिस्‍तान को अपने इस क्षेत्र में शांति, प्रगति एवं खुशहाली की तलाश में अपने मजबूत एवं स्‍थिर साझेदार के रूप में देखना चाहते हैं।

तेहरान में गुट निरपेक्ष आंदोलन की शिखर बैठक के दौरान अतिरिक्‍त समय में हाल की अपनी बैठक के दौरान प्रधान मंत्री डा. मनमोहन सिंह ने पाकिस्‍तान का दौरा करने के संबंध में उनके सुंदर निमंत्रण के लिए राष्‍ट्रपति जरदारी को धन्‍यवाद दिया। डा. सिंह ने यह भी कहा कि वह पाकिस्‍तान के साथ संबंधों को सामान्‍य बनाने के कार्य को बहुत महत्‍व देते हैं, तथा वह पाकिस्‍तान का दौरा करने के लिए उत्‍सुक हैं। यह भी स्‍पष्‍ट है कि यात्रा के लिए सही वातावरण सृजित करने की जरूरत है। सारभूत परिणाम प्राप्‍त करने के लिए अच्‍छी तरह से तैयारी करने की जरूरत होगी, जिससे दोनों देशों के बीच चहुंमुखी सहयोग के साथ रचनात्‍मक संबंध स्‍थापित करने की प्रक्रिया काफी सुदृढ़ हो सकती है। प्रधान मंत्री डा. सिंह ने राष्‍ट्रपति जरदारी से इस बात का भी उल्‍लेख किया कि इस तरह कि एक सामान्‍य भावना अवश्‍य होनी चाहिए कि पाकिस्‍तान अपनी धरती से भारत के विरूद्ध आतंकवाद से निपटने के लिए ऐसे सभी कार्य कर रहा है जिसे वह कर सकता है। दोनों नेताओं की इच्‍छा को ध्‍यान में रखते हुए, मैं महामहिम हिना रब्‍बानी खार के साथ यह पता लगाने का प्रयास करूंगा कि प्रधान मंत्री की सार्थक यात्रा में सुविधा प्रदान करने के लिए क्‍या किया जा सकता है।

प्रश्‍न: भारत एवं पाकिस्‍तान दोनों देशों के लिए सियाचीन एवं सरक्रीक पर किसी प्रकार का करार लो और दोपर आधारित करार करना क्‍यों लगभग असंभव हो रहा है?

उत्‍तर: भारत व्‍यावहारिक एवं तथ्‍यात्‍मक समाधान ढूंढ़ने के लिए शांतिपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता के माध्‍यम से पाकिस्‍तान के साथ सभी बकाया मुद्दों का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है। अपने द्विपक्षीय संबंधों की जटिलताओं को देखते हुए, हमें धैर्य रखना होगा क्‍योंकि जब हम आगे बढ़ेंगे तो एक दूसरे के साथ अधिक विश्‍वास एवं भरोसे का निर्माण करेंगे। ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे धैर्य एवं सयंम से प्राप्‍त न किया जा सके। साथ ही, हमें व्‍यापार एवं वाणिज्‍य की दिशा में, और साथ ही नियंत्रण रेखा के पार व्‍यापार एवं यात्रा की सुविधाओं में पिछले एक या दो वर्षों में दोनों देशों द्वारा उल्‍लेखनीय प्र‍गति की अनदेखी नहीं करनी चाहिए, जिसमें दोनों पक्षों के लोगों की प्रगति एवं कल्‍याण में योगदान करने की प्रचुर क्षमता है। मैं उम्‍मीद करता हूँ कि मेरी इस यात्रा के दौरान उदार वीजा करार पर सहमति होगी, जिससे जन दर जन संपर्कों में और तेजी आएगी।

प्रश्‍न: आतंकवाद एवं नशीले पदार्थों के अवैध व्‍यापार का मुकाबला करने के लिए दोनों देशों के सहयोग के बारे में खूब बात-चीत होती रहती है परंतु ठोस प्रगति बहुत कम है। भारत एवं पाकिस्‍तान दोनों देशों के समाजों के लिए संभावित रूप से हानिकर इन मुद्दों पर इस धीमी प्रगति के कारण क्‍या हैं?

उत्‍तर: आतंकवाद हमारे क्षेत्र में शांति एवं सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरा है। इस महामारी से प्रभा‍वी ढंग से एवं व्‍यापक रूप से निपटने में सहयोग करना हर किसी के हित में है। शायद आपको ज्ञात हो कि मई 2012 में अपनी पिछली बैठक के दौरान हमारे गृह / आंतरिक सचिव मुंबई आतंकी हमलों की जांच समेत एक दूसरे के सरोकार के मुद्दों पर भारत की राष्‍ट्रीय जांच एजेंसी तथा पाकिस्‍तान की संघीय जांच एजेंसी के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए सहमत हुए। उन्‍होंने आपराधिक मामलों में परस्‍पर सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए परस्‍पर कानूनी सहायता संधि पर वार्ता शुरू करने का सैद्धांतिक निर्णय भी लिया। उन्‍होंने मानव के अवैध व्‍यापार, नकली मुद्रा, साइबर अपराध एवं रेड नोटिस के मुद्दों पर आगे बढ़ने के लिए तकनीकी ब्‍यौरा तैयार के लिए दोनों देशों की जांच एजेंसियों (भारत का केंद्रीय जांच ब्‍यूरो और पाकिस्‍तान की संघीय जांच एजें‍सी) की शीघ्र बैठक आयोजित करने का भी निर्णय लिया। तथापि, मैं इस बात पर बल देना चा‍हता हूँ कि उत्‍पादक होने के लिए आतंकवाद के विरूद्ध सहयोग में उच्‍च स्‍तर के विश्‍वास की जरूरत होती है। हम आशा करते हैं कि हमारे आंतरिक / गृह सचिवों तथा ऊपर उल्लिखित एजेंसियों के बीच विचार विर्मश से अपेक्षित स्‍तर का विश्‍वास एवं भावना पैदा होगी कि इस मुद्दे पर भारत के सरोकारों पर प्रभावी ढंग से ध्‍यान दिया जा रहा है।

जहां तक नशीले पदार्थों के अवैध व्‍यापार का संबंध है, हम आशा करते हैं कि इस संकट का सामना करने के लिए सितंबर 2011 में भारत के स्‍वापक नियंत्रण ब्‍यूरो तथा पाकिस्‍तान के स्‍वापक रोधी बल के बीच हस्‍ताक्षरित समझौता ज्ञापन इस क्षेत्र में सहयोग में वृद्धि करने में सहायता करेगा।

प्रश्‍न: भारत मुंबई हमलों में कथित रूप से शामिल लोगों (लखवी एवं उसके साथी) के विरूद्ध पाकिस्‍तान में मामले की प्रगति से आंशिक रूप से भी संतुष्‍ट नहीं दिखता है। आपकी राय में, पाकिस्‍तान को क्‍या करना चाहिए जिससे भारत प्रगति से सं‍तुष्टि महसूस करे?

उत्‍तर:भारत ने सर्वोच्‍च स्‍तर बल देने समेत मुंबई आतंकी हमलों में शामिल लोगों के संबंध में पाकिस्‍तान में ट्रायल को तेजी से एवं सफलतापूर्वक पूरा करने की आवश्‍यकता पर लगातार बल दिया है। प्रधान मंत्री डा. सिंह ने हाल ही में इस बात का उल्‍लेख किया है कि इस संबंध में कार्रवाई एक प्रमुख विश्‍वासोत्‍पादक उपाय होगा, यह कार्रवाई विश्‍वास की कमी को दूर करने में सहायता करेगी तथा हम दोनों देशों के बीच जिस तरह का संबंध देखना चाहते है उसके लिए भारत में सार्वजनिक समर्थन के निर्माण में भी सहायता करेगी।

प्रश्‍न: मुंबई हमलों में स्‍वयं के निर्दोष होने संबंधी हाफिज सईद के दावे को भारत किस रूप में देखता है?

उत्‍तर: उसके विरूद्ध उपलब्‍ध आकाट्य एवं अविवाद्य साक्ष्‍य तथा भारत के विरूद्ध आतंकी कृत्‍यों में उसकी भागीदारी के उसके सुविख्‍यात रिकार्ड के आधार पर अच्‍छी तरह से तैयार किए गए मामले में ऐसा कोई दावा टिक नहीं सकता।

प्रश्‍न: आज भी कई भारतीय पाकिस्‍तानी जेलों में बंद हैं तथा कई पाकिस्‍तानी भारतीय जेलों में बंद हैं। यदि दोनों देश कम से कम उन लोगों को तत्‍काल रिहा कर दें जिनकी सजा पूरी हो गई है तथा उन लोगों को भी रिहा कर दें जिन पर जासूसी के प्रमाणित मामलों में शामिल होने का कोई आरोप नहीं है, तो क्‍या यह विश्‍वासोत्‍पादक उपायों (सी बी एम) में वृद्धि नहीं करेगा?

उत्‍तर: मैं इस बात से पूरी तरह सहमत हूँ कि ऐसे सभी कैदियों को शीघ्रता से रिहा कर देना चाहिए तथा प्रत्‍यार्वतित कर देना चाहिए जिन्‍होंने अपनी सजा पूरी कर ली है। इस संबंध में गृह एवं आंतरिक सचिवों के बीच कोई सहमति को जोश के साथ लागू करने की जरूरत है। मैं इस बात का उल्‍लेख करना चाहता हूँ कि पिछले एक या दो वर्षों में दोनों देशों की ओर से भारी संख्‍या में कैदियों एवं मछुआरों को उनके देश में वापस भेजा गया है। मुझे प्रसन्‍नता है कि कैदियों एवं मछुआरों, विशेष रूप से महिलाओं, बुर्जुगों, किशोरों एवं गंभीर बीमारी या शारीरिक / मानसिक अपंगता से पीडि़त या अंतस्‍थ रूप से बीमार लोगों के मामलों को देखने में मानवीय दृष्टिकोण का सुनिश्चिय करने में दोनों देशों की सरकारों के प्रयासों को द्वपिक्षीय न्‍यायिक समिति‍ तथा ऐसे व्‍यक्तियों के कल्‍याण एवं समय पर उनकी रिहाई सुनिश्चित करने के कार्य में शामिल गैर सरकारी संगठनों के कार्य से पर्याप्‍त समर्थन प्राप्‍त हुआ है।

प्रश्‍न: सी बी एम जैसी भावना से, यदि दोनों देश मुंबई एवं कराची में अपने अपने वाणिज्‍य दूतावास की स्‍थापना करने का निर्णय लेते हैं, जो अब तक मुंबई राजनीति के कारण रूका पड़ा है, तो क्‍या इससे सहायता नहीं मिलेगी?

उत्‍तर: व्‍यापार एवं वाणिज्‍य के लिए तथा बहुलवादी मेगा शहर के रूप में मुंबई एवं कराची का महत्‍व स्‍वयं सिद्ध है। कराची में भारतीय महावाणिज्‍य दूतावास और मुंबई में पाकिस्‍तान के महावाणिज्‍य दूतावास द्वारा कार्य की बहाली से निश्चित रूप से वाणिज्‍य एवं व्‍यापार तथा जन दर जन संपर्कों की गति तेज करने में सहायता मिलेगी। कुछ साल पहले इस संबंध में प्रस्‍ताव के बाबजूद इन वाणिज्‍य दूतावासों के पुन: न खुलने के सरल उत्‍तरों की मैं तलाश नहीं करूंगा। यह कहना पर्याप्‍त होगा कि हम ऐसे प्रस्‍ताव के पक्ष में हैं तथा पाकिस्‍तान की सरकार के साथ आवश्‍यक तौर तरीकों पर विचार विर्मश करने के इच्‍छुक हैं।

प्रश्‍न: आधिकारिक तौर पर ऐसा नहीं लगता कि दोनों देशों को वीजा प्रतिबंधों में ढील देने के बारे में कोई आपत्ति है किंतु जब इस मामले पर अंतिम निर्णय लेने की बारी आती है, तो ऐसा लगता है कि कुछ अकथ्‍य कारणों से यह प्रक्रिया अवरूद्ध हो जाती है। कृपया इस पर अपने विचार व्‍यक्‍त करें।

उत्‍तर: एक नए एवं उदारीकृत वीजा करार को अंतिम रूप दिया जा चुका है। इसमें पर्यटकों, व्‍यावसायिकों, बुर्जुगों एवं अपने रिश्‍तेदारों व मित्रों से मिलने के इच्‍छुक लोगों के लिए वीजा सुविधाएं शुरू करने या उसमें काफी सुधार करने का प्रयास किया गया है। मैं यह कहना चाहता हूँ कि भारत ने एक पक्षीय रूप से अनेक कदम उठाया है जिसमें व्‍यवसाय वीजा जल्‍दी से प्रदान करना, योग्‍य मामलों में पुलिस रिपोर्ट के बिना वीजा प्रदान करना और छात्र एवं चिकित्‍सा श्रेणी का वीजा शुरू करना आदि शामिल हैं।

प्रश्‍न: अब चूंकि ऐसा प्रतीत होता है कि दोनों देश घनिष्‍ट चहुंमुखी संबंध स्‍थापित करने के इच्‍छुक हैं, क्‍या दोनों देशों की सरकारें रेल, सड़क एवं हवाई संचार की बारंबारता में वृद्धि करने और साथ ही मीडिया उत्‍पादों एवं मीडिया के लोगों की एक दूसरे देश में आवाजाही पर सभी प्रतिबंध हटाने पर विचार कर रही हैं?

उत्‍तर: पाकिस्‍तान के साथ भारत परस्‍पर सहयोगात्‍मक एवं उत्‍पादक संबंध निर्मित करना चाहता है। संयोजकता में वृद्धि इस तरह के द्विपीक्षय संबंध का सुविधा प्रदाता एवं परिणाम दोनों है। जैसेजैसे जन दर जन संपर्क तथा वाणिज्‍य एवं व्‍यापार में वृद्धि होगी, हमारे देशों के बीच विद्यमान व्‍यापार एवं यात्रा संबंधों का विस्‍तार करने की जरूरत होगी। हम पाकिस्‍तान के साथ अपनी सीमा पर और अधिक व्‍यापार बिंदु खोलने पर विचार करने के इच्‍छुक हैं। हम पिछली सार्क शिखर बैठक के उस विषय का पूर्णत: समर्थन भी करते हैं जिसे बहुत उपयुक्‍त ढंग से‘‘सेतुओं का निर्माण करना’’ के रूप में रखा गया। न केवल पाकिस्‍तान के साथ अपितु संपूर्ण सार्क क्षेत्र के अंदर क्षेत्रीय संयोजकता में वृद्धि के लिए भारत ने ठोस प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत किया है। हम सार्क के अंदर तथा इसके बाहर भी मल्‍टी माडल संयोजकता विकसित करने में सार्क देशों एवं अन्‍य पडो़सी देशों के साथ सहयोग कर रहे हैं तथा इन प्रयासों में पाकिस्‍तान के सक्रियता से शामिल होने की उम्‍मीद करते हैं। भारत ने सार्क रूपरेखा में मोटर वाहन एवं रेलवे पर दो क्षेत्रीय करारों का भी प्रस्‍ताव रखा है। पाकिस्‍तान की भौगोलिक स्थिति उसे दक्षिण एवं मध्‍य एशिया के बीच सेतु बनने की आदर्श स्थिति में खड़ा करती है। हमारे देशों से होकर गुजरने वाले नए व्‍यापार एवं ऊर्जा राजमार्ग आमतौर पर प्राचीन काल के सिल्‍क रूट से संबद्ध खुशहाली ला सकते हैं।

किन्‍हीं दो देशों के बीच संबंधों के केंद्र में लोग होते हैं, तथा भारत एवं पाकिस्‍तान के मामले में भी ऐसा ही है जो ऐसे दो देश हैं जिनकी संस्‍कृति एवं इतिहास काफी हद तक एक जैसा है। हमारे लोगों के बीच अंत:क्रिया तथा मीडिया के क्षेत्र में आदान प्रदान में वृद्धि से इस एक दूसरे की एवं इस साझी विरासत की बेहतर समझ को बढ़ावा देने तथा इसका परिरक्षण करने की आवश्‍यकता में काफी मदद मिलेगी। हमारी फिल्‍में, संगीत, टी वी सिरियल, कलाकार एवं लेखक एक दूसरे के देश में काफी लोकप्रिय हैं। मुझे प्रसन्‍नता है कि पाकिस्‍तान के अनेक युवा कलाकारों को भारत में उत्‍तरोत्‍तर सफलता मिल रही है। हम इसे प्रोत्‍साहित करते हैं क्‍योंकि ऐसे लोगों की सफलता में अधिक विश्‍वास एवं बेहतर समझ के बीज छिपे होते हैं।

प्रश्‍न: क्‍या आप स्‍पष्‍ट रूप से कह सकते हैं कि नवीकृत शांति प्रक्रिया अप्रतिवर्त्‍य है?और यदि मुंबई जैसा कोई और हमला हो जाता है, तो क्‍या उससे यह प्रक्रिया पटरी से हट जाएगी?

उत्‍तर: हम सबकी यही इच्‍छा है कि भारत एवं पाकिस्‍तान की शांति प्रक्रिया में कोई रूकावट न आए। परंतु हिंसा एवं आतंक के माहौल में इस तरह की प्रक्रिया अधिक प्र‍गति नहीं कर सकती है। यह उम्‍मीद करना अवास्‍तविक होगा कि जिस तरह का जघन्‍य आतंकवाद हमने मुंबई में देखा उसके साथ शांति एवं सहयोग का सह अस्तित्‍व हो सकता है। आतंकी ताकतों से प्रभावी ढंग से तथा व्‍यापक रूप से निपटना एवं यह सुनिश्चित करना सभी देशों की जिम्‍मेदारी है कि दूसर देशों के विरूद्ध आतंकी कृत्‍यों के लिए उनके भूभाग का प्रयोग न किया जाए।

प्रश्‍न: कश्‍मीर पर भारत एवं पाकिस्‍तान दोनों के वर्तमान अभिव्‍यक्‍त रवैए के बावजूद, क्‍या आप वास्‍तविक रूप से यह कह सकते हैं कि दोनों देश कई दशक पुरानी इस समस्‍या का आउट आफ बाक्‍स समाधान ढूंढ़ लेंगे?

उत्‍तर: यह याद किया जा सकता है कि 2004 से 2008 की अवधि के मध्‍य भारत एवं पाकिस्‍तान के बीच अब तक के सबसे सार्थक एवं उत्‍पादक विचार विर्मश हुए, जिसमें जम्‍मू एवं कश्‍मीर का मुद्दा भी शामिल था। ये विचार विर्मश इस साझी समझ पर आधारित थे कि सीमाएं पुन: नहीं खीं‍ची जा सकती हैं किंतुएक दूसरे के साथ व्‍यापार करने एवं नियंत्रण रेखा (एल ओ सी) के दोनों तरफ अबाध रूप से लोगों को आने जाने में समर्थ बनाकर उन्‍हें असंगत बनाने की दिशा में हम काम कर सकते हैं। हमें उन विचार विर्मशों को आगे बढ़ाने एवं सुदृढ़ करने की जररूत है। मैं यह कहना चाहता हूँ कि उपर्युक्‍त अवधि के दौरान नियंत्रण रेखा के पार से शुरू किए गए सी बी एम के फलस्‍वरूप नियंत्रण रेखा के दोनों तरफ से भारी संख्‍या में लोग दूसरी तरफ रह रहे अपने परिवारों से मिलने में समर्थ हुए हैं, तथा सीमा रेखा पर नामित दो बिंदुओं के माध्‍यम से करोड़ों रूपए मूल्‍य के माल का व्‍यापार हुआ है। पिछले एक वर्ष में माननीय हिना रब्‍बानी खार तथा मैंने नियंत्रण रेखा पर व्‍यापार एवं यात्रा की सुविधाओं में और सुधार करने के लिए कुछ महत्‍वपूर्ण निर्णय लिया है। व्‍यापार करने के दिनों की संख्‍या पहले ही दो दिन से बढ़ाकर चार दिन प्रति सप्‍ताह कर दी गई है। कार्यान्वित किए जाने वाले कुछ अन्‍य उपायों में शामिल हैं - व्‍यापार की आधारभूत सुविधाओं में सुधार, यात्रा के लिए 6 माह के अनेक प्रवेश वाले परमिटों की शुरूआत, रिश्‍तेदारों से मुलाकात करने के अलावा पर्यटन एवं धार्मिक यात्रा के लिए यात्रा की शुरूआत और नियंत्रण रेखा के पार व्‍यापार के लिए बैंकिंग सुविधाओं की शुरूआत। भारत व्‍यापार एवं यात्रा के लिए नियंत्रण रेखा पर अतिरिक्‍त बिंदु खोलने का इच्‍छुक है।

प्रश्‍न: भारत ने अफगानिस्‍तान के दक्षिण पूर्व में भारी निवेश किया है तथा पाकिस्‍तानी नेतृत्‍व को वहां आपके देश की मौजूदगी को लेकर हमेशा संदेह रहा है। यहां इस्‍लामाबाद के प्राधिकारियों को आप कैसे आश्‍वस्‍त करेंगे कि काबूल में नई दिल्‍ली की मौजूदगी को खतरे के रूप में नहीं देखना चाहिए?

उत्‍तर: अफगानी लोगों की सहायता करने के लिए अफगानिस्‍तान के अनुरोध पर अफगानिस्‍तान में भारत विकासात्‍मक एवं मानवीय कार्य में शामिल है क्‍योंकि वे शांतिपूर्ण, स्‍थिर, समावेशी, लोकतांत्रिक एवं बहुलवादी अफगानिस्‍तान का निर्माण कर रहे हैं। भारत न तो राष्‍ट्रीय हितों को पूरा करने के लिए अफगानिस्‍तान को रणभूमि के रूप में देखता है और न ही अफगानिस्‍तान के पुन: निर्माण एवं विकास के लिए अपने सहायता को लाभ रहित गेम के रूप में देखता है। अफगानिस्‍तान में दो बिलियन अमरीकी डालर के हमारे सहायता कार्यक्रम का ज्‍यादातर उद्देश्‍य अभिशासन, स्‍वास्‍थ्‍य, शिक्षा, कृषि एवं रोजगार सृजन के महत्‍वपूर्ण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं एवं क्षमता का निर्माण करना है। यह अफगानी प्राधिकारियों से परामर्श करके विकसित किया गया है तथा उस देश के सभी क्षेत्रों में व्‍याप्त है। अफगानिस्‍तान ऐसे देशों में से एक है जिसके साथ हमारे सदियों से संबंध रहे हैं तथा ऐसे देश के साथ सच्‍चे एवं मैत्रीपूर्ण सहयोग का उद्देश्‍य किसी दूसरे देश के विरूद्ध केंद्रित नहीं है। मेरा विश्‍वास है कि पाकिस्‍तान की जनता के बेहतर सूचित वर्ग में भी इस सच्‍चाई की अनुभूति निरंतर बढ़ रही है। ऐसे देशों के रूप में जिनका अफगानिस्‍तान में शांति एवं स्थिरता पर महत्‍वपूर्ण रूप से दाव पर लगा है, हमें ऐसी शांति एवं स्थिरता में योगदान करने की अपनी भूमिका पर विचार विर्मश करने में समर्थ होना चाहिए।

प्रश्‍न: क्‍या यह संभव है कि भारत और पाकिस्‍तान अफगानी खेल के अंत में समान पृष्‍ठ पर हो सकते हैं?

उत्‍तर: इस क्षेत्र के देशों के रूप में भारत एवं पाकिस्‍तान दोनों का स्‍वाभाविक रूप से शांतिपूर्ण, स्‍थि‍र, समावेशी, लोकतांत्रिक एवं बहुलवादी अफगानिस्‍तान में महत्‍वपूर्ण रूप से दाव पर लगा है। व्‍यापार एवं ऊर्जा के पारगमन केंद्र के रूप में विकसित होने का प्रयास करने वाले अफगानिस्‍तान से दोनों देशों एवं उनकी जनता को प्रचुर मात्रा में लाभ होगा। अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय ने भी इस विजन का समर्थन किया है। इस तरह का अफगानिस्‍तान तभी अस्तित्‍व में आ सकता है जब उसके मामलों में कोई बाहरी दखल न हो तथा अफगानिस्‍तान के लोगों को अपने भविष्‍य का चयन करने के लिए उन पर छोड़ दिया जाए। भारत ऐसे विकल्‍पों का सम्‍मान करता है तथा उम्‍मीद करता है कि सभी अन्‍य देश भी ऐसा ही करेंगे।

प्रश्‍न: आप पाकिस्‍तान के प्राधिकारियों को कैसे आश्‍वस्‍त करेंगे कि भारत बलूचिस्‍तान में चल रही उथल - पुथल में किसी भी तरह से शामिल नहीं है?

उत्‍तर: हमने सर्वोच्‍च स्‍तर पर अनेक अवसरों पर यह कहा है तथा मैं आपके पाठकों के लाभ के लिए यहां दोहराना चाहता हूँ कि भारत एक स्थिर एवं खुशहाल पाकिस्‍तान देखना चाहता है जो अपने खुद के हित में तथा इस क्षेत्र के हित में आतंकवाद के विरूद्ध परकोटे के रूप में काम करे। बलूचिस्‍तान के संदर्भ में समय समय पर भारत के विरूद्ध लगाए गए आरोपों से हम अ‍त्‍यंत निराश हैं, क्‍योंकि भारत का उससे कोई लेना देना नहीं है।

दि एक्‍सप्रेस ट्रिब्‍यून, 7 सितंबर 2012 में प्रकाशित



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