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विदेश मंत्री की पाकिस्‍तान यात्रा के दौरान भारत एवं पाकिस्‍तान द्वारा जारी किया गया संयुक्‍त वक्‍तव्‍य

सितम्बर 08, 2012

  • वार्ता प्रक्रिया में प्रगति की समीक्षा करने के लिए पाकिस्‍तान की विदेश मंत्री महामहिम सुश्री हिना रब्‍बानी खार तथा भारत के विदेश मंत्री महामहिम श्री एस एम कृष्‍णा ने 8 सितंबर 2012 को इस्‍लामाबाद में बैठक की।
  • मंत्री स्‍तरीय वार्ता से पूर्व 7 सितंबर 2012 को भारत एवं पाकिस्‍तान के विदेश सचिवों की बैठक हुई।
  • वार्ता सौहार्दपूर्ण, निष्‍कपट एवं रचनात्‍मक वातावरण में हुई।
  • मंत्रियों ने द्विपक्षीय संबंधों की स्थिति की समीक्षा की तथा मुंबई ट्रायल में प्रगति समेत आतंकवाद रोधी मुद्दों एवं स्‍वापक नियंत्रण, मानवीय मुद्दों, वाणिज्यिक एवं आर्थिक सहयोग, वूलर बैराज / तुलबुल नेविगेशन परियोजना, सरक्रीक, सियाचीन, सी बी एम समेत शांति एवं सुरक्षा, जम्‍मू एवं कश्‍मीर तथा मैत्रीपूर्ण विनिमय के संवर्धन पर बैठकों के आयोजन पर संतोष व्‍यक्‍त किया।
  • मंत्रियों ने नोट किया कि वार्ता प्रक्रिया दोनों देशों के नेतृत्‍व की प्रतिबद्धता के अनुसार चल रही है, जिसे सभी बकाया मुद्दों का शांतिपूर्ण एवं परस्‍पर स्‍वीकार्य समाधान प्राप्‍त करने तथा भारत एवं पाकिस्‍तान के बीच विश्‍वास एवं चहुंमुखी सहयोग का संबंध स्‍थापित करने के लिए सर्वोच्‍च स्‍तर पर व्‍यक्‍त किया गया है।
  • मंत्रियों ने जुलाई 2011 में नई दिल्‍ली में अपनी पिछली बैठक के बाद से दोनों देशों के बीच उच्‍च स्‍तर के द्विपक्षीय विनिमय में वृद्धि पर संतोष व्‍यक्‍त किया, जैसे कि अप्रैल एवं अगस्‍त 2012 में नई दिल्‍ली एवं तेहरान में राष्‍ट्रपति आसिफ अली जरदारी एवं प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह के बीच नेतृत्‍व स्‍तरीय बैठकें, पाकिस्‍तान की राष्‍ट्रीय सभा के स्‍पीकर के निमंत्रण पर पाकिस्‍तान के लोक सभा की भारत के लोक सभा अध्‍यक्ष द्वारा अब तक की पहली द्विपक्षीय यात्रा, 35 साल बाद सितंबर 2011 में पाकिस्‍तान के वाणिज्‍य मंत्री की भारत यात्रा, अप्रैल 2012 में पाकिस्‍तान के वाणिज्‍य मंत्री की भारत की दूसरी यात्रा और फरवरी 2012 में भारत के वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्री की पाकिस्‍तान की अब तक की पहली द्विपक्षीय यात्रा। मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच निरंतर उच्‍च स्‍तरीय आदान प्रदान के महत्‍व को रेखांकित किया।
  • मंत्रियों ने वार्ता प्रक्रिया की रूपरेखा के अंदर सभी मुद्दों पर सारवान विचार विमर्श किया तथा जुलाई 2011 में अपनी पिछली समीक्षा बैठक के बाद से हुई प्रगति पर संतोष व्‍यक्‍त किया।
  • मंत्रियों ने रचनात्‍मक एवं परिणाम उन्‍मुख भागीदारी के माध्‍यम से शांतिपूर्ण ढंग से सभी बकाया मुद्दों का समाधान करने तथा भारत एवं पाकिस्‍तान के बीच मैत्रीपूर्ण, सहयोगात्‍मक एवं अच्‍छे पड़ोसी के संबंध स्‍थापित करने के लिए वार्ता प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के महत्‍व की पुष्टि की।
  • मं‍त्री इस बात पर सहमत हुए कि आतंकवाद शांति एवं सुरक्षा के लिए निरंतर खतरा उत्‍पन्‍न कर रहा है। उन्‍होंने प्रभावी एवं व्‍यापक ढंग से आतंकवाद का सामना करने के संबंध में दोनों देशों की मजबूत प्रतिबद्धता की पुष्टि की ताकि सभी रूपों एवं अभिव्‍यक्तियों के आतंकवाद के अभिशाप को दूर किया जा सके।
  • मंत्रियों ने मई 2012 में आंतरिक / गृह सचिव स्‍तरीय वार्ता के दौरान कानून की समुचित प्रक्रिया के अनुसार मुंबई आतंकी हमलों के सभी अपराधियों को शीघ्रता से दंडित करने के संबंध में पाकिस्‍तान द्वारा व्‍यक्‍त की गई प्रतिबद्धता को नोट किया।
  • मंत्रियों ने नोट किया कि मई 2012 में आंतरिक / गृह सचिव स्‍तरीय वार्ता के दौरान भारतीय पक्ष ने सूचित किया था कि समझौता एक्‍सप्रेस बम विस्‍फोट मामले में अभी जांच चल रही है तथा जब जांच पूरी हो जाएगी तो राजनयिक चैनलों के माध्‍यम से पाकिस्‍तानी प्राधिकारियों के साथ अद्यतन सूचना साझा की जाएगी।
  • मंत्रियों ने सितंबर 2011 में पाकिस्‍तान के स्‍वापक रोधी बल तथा भारत के स्‍वापक नियंत्रण ब्‍यूरो के बीच ‘औषधि की मांग में कमी तथा स्‍वापक औषधियों / मन:प्रभावी पदार्थों एवं अग्रगामी रसायनों व संबंधित मामलों में अवैध व्‍यापार की रोकथाम’ पर समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर होने का स्‍वागत किया तथा आशा व्‍यक्‍त की कि यह समझौता ज्ञापन नशीले पदार्थों के अवैध व्‍यापार के बढ़ते संकट पर नियंत्रण प्राप्‍त करने के लिए प्रभावी एवं स्‍थायी उपायों के माध्‍यम से भारत एवं पाकिस्‍तान के बीच परस्‍पर सहयोग में वृद्धि करने में सहायता करेगा।
  • मंत्रियों ने पिछले दो या तीन सालों में कैदियों एवं मछुआरों, जिसमें बीमारियों से पीडि़त लोग शामिल हैं, की रिहाई का स्‍वागत किया। वे इस बात पर सहमत हुए कि कांसुलर अक्‍सेस पर करार को पूरी तरह से कार्यान्वित करना चाहिए जिसमें दूसरे पक्ष द्वारा गिरफ्तारियों की तत्‍काल अधिसूचना, गिरफ्तारी के तीन माह के अंदर सभी व्‍‍यक्तियों को कांसुलर अक्‍सेस, सजा पूरी होने एवं उनके राष्‍ट्रीय दर्जे की पुष्टि के एक माह के अंदर कैदियों की रिहाई शामिल है। मंत्रियों ने न्‍यायिक समिति के सतत कार्य का भी स्‍वागत किया तथा वे प्रत्‍येक देश के कैदियों एवं मछुआरों की रिहाई एवं प्रत्‍यावर्तन के विभिन्‍न पहलुओं पर इसकी सिफारिशों के दूसरे देश द्वारा कार्यान्‍वयन तथा मछुआरों एवं कैदियों, विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों, किशोरों एवं अंतस्‍थ रूप से बीमार या गंभीर बीमारी या शारीरिक / मानसिक अपंगता से पीडि़त लोगों के मामलों से निपटने में मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की आवश्‍यकता पर सहमत हुए।
  • मंत्रियों ने नोट किया कि जुलाई 2012 में नई दिल्‍ली में पाकिस्‍तान समुद्री सुरक्षा एजेंसी के महानिदेशक तथा भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक के बीच वार्ता हुई तथा वे उनकी बैठकें जारी रखने के महत्‍व पर सहमत हुए। उन्‍होंने यह भी निदेश दिया कि मार्च 2011 में भारत एवं पाकिस्‍तान के बीच आंतरिक / गृह सचिव स्‍तरीय वार्ता के बाद जारी किए गए संयुक्‍त वक्‍तव्‍य के पैरा 10 में निहित मछुआरों से संबंधित मुद्दों की दोनों देशों के संगत प्राधिकारियों द्वारा और जांच की जाए।
  • मंत्रियों ने आप‍राधिक मामलों में परस्‍पर सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए विचार विमर्श शुरू करने के लिए मई 2012 में दोनों देशों के आंतरिक / गृह सचिवों की पिछली बैठक के दौरान लिए गए निर्णय का स्‍वागत किया।
  • मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच विश्‍वासोत्‍पादक उपायों समेत शांति एवं सुरक्षा को बढ़ावा देने पर बल दिया तथा वे दिसंबर 2012 के उत्‍तरार्ध में नई दिल्‍ली में परमाणु एवं परंपरागत सी बी एम पर विशेषज्ञ समूहों की अलग से बैठकें बुलाने पर सहमत हुए। ­
  • मंत्रियों ने जम्‍मू एवं कश्‍मीर के मुद्दे पर विचार विमर्श किया तथा वे भिन्‍नताओं को सीमित करके और समानताओं का निर्माण करके शांतिपूर्ण समाधान ढूंढ़ने के विचार से सार्थक एवं अग्रदर्शी ढंग से विचार विमर्श जारी रखने की आवश्‍यकता पर सहमत हुए।
  • मंत्रियों ने नियंत्रण रेखा पारीय विद्यमान सी बी एम की समीक्षा की तथा अभिस्‍वीकार किया कि 2003 से युद्ध विराम जारी है। उन्‍होंने जुलाई 2011 में अपनी पिछली बैठक के दौरान नियंत्रण रेखा (एल ओ सी) के पार यात्रा एवं व्‍यापार के संबंध में लिए गए निर्णयों के कार्यान्‍वयन की भी समीक्षा की। उन्‍होंने इस बात पर संतोष व्‍यक्‍त किया कि जम्‍मू एवं कश्‍मीर के अधिकाधिक लोग नियंत्रण रेखा के पार यात्रा करने की सुविधा का लाभ लेने में समर्थ हो रहे हैं तथा नियंत्रण रेखा के पार व्‍यापार भी बढ़ रहा है जिससे नियंत्रण रेखा के दोनों तरफ रहने वाले लोगों को लाभ हो रहा है। उन्‍होंने नियंत्रण रेखा के पार व्‍यापार करने के दिनों की संख्‍या दो से बढ़ाकर प्रति सप्‍ताह चार किए जाने का भी स्‍वागत किया, जिसके बारे में उनके बीच सहमति पहले हो चुकी थी। 19 जुलाई 2012 को इस्‍लामाबाद में अपनी बैठक में नियंत्रण रेखा पारीय सी बी एम पर संयुक्‍त कार्य समूह (जे डब्‍ल्‍यू जी) द्वारा की गई सिफारिशों को ध्‍यान में रखते हुए मंत्रियों ने निम्‍नलिखित निर्णय लिया -

    नियंत्रण रेखा पारीय यात्रा :
    1. पर्यटन एवं धार्मिक स्‍थलों की यात्रा के वास्‍ते विजिट को शामिल करने के लिए नियंत्रण रेखा के दोनों तरफ नियंत्रण रेखा पारीय यात्रा का विस्‍तार किया जाएगा।
    2. नियंत्रण रेखा के दोनों तरफ पर्यटन के स्‍थलों एवं तीर्थस्‍थलों को नामोद्दिष्‍ट किया जाएगा तथा नामोद्दिष्‍ट प्राधिकारियों के पास सूचना उपलब्‍ध होगी।
    3. अधिकतम 15 व्‍यक्तियों के समूह में नामोद्दिष्‍ट टूर ऑपरेटरों द्वारा इस तरह की विजिट का आयोजन किया जाएगा।
    4. इस तरह की विजिट के लिए परमिट एकल प्रवेश वाला एवं गैर विस्‍तारणीय होगा तथा केवल 15 दिन के लिए मान्‍य होगा।
    5. ग्रीष्‍मकाल के दौरान अर्थात अप्रैल से अक्‍टूबर के मध्‍य पर्यटन के स्‍थलों एवं धार्मिक स्‍थलों की यात्रा के लिए ट्रैवल की व्‍यवस्‍था की जाएगी।
    6. इस तरह की विजिट के लिए शुरू में चकोठी - उरी एवं रावलकोट - पुंछ क्रासिंग प्‍वाइंट से सीमा को पार किया जाएगा।
    7. दोनों पक्ष नियंत्रण रेखा के पार यात्रा के लिए आवेदनों को शीघ्रता से निपटाने में सुविधा प्रदान करेंगे। इन आवेदनों को प्रोसेस करने का समय 45 दिन से अधिक नहीं होना चाहिए।
    8. दोनों पक्ष आपातकालीन स्थिति में सीमा पार करने के लिए निर्धारित दिनों एवं गैर निर्धारित दिनों को नियंत्रण रेखा पार करने के लिए वैध प्रवेश परमिट धारकों को आवश्‍यक सहायता प्रदान करेंगे। नामोद्दिष्‍ट प्राधिकारियों द्वारा इसमें सुविधा प्रदान की जाएगी।
    नियंत्रण रेखा पारीय व्‍यापार :
    1. नियंत्रण रेखा पारीय व्‍यापार के लिए अनुमत मदों के 21 उत्‍पादों की सूची का दोनों पक्षों द्वारा सम्‍मान किया जाएगा।
    2. मासिक आधार पर दोनों पक्षों के व्‍यापारियों के बीच नियमित बैठकों में सुविधा प्रदान की जाएगी।
    3. नामोद्दिष्‍ट प्राधिकारी नियमित बैठकों के माध्‍यम से नियंत्रण रेखा पारीय व्‍यापार से संबंधित प्रचालनात्‍मक मुद्दों का समाधान करेंगे।
    4. नियंत्रण रेखा पारीय व्‍यापार के लिए सड़कों एवं पुलों के सुधार में सुविधा प्रदान की जाएगी।
    5. प्रचालन के क्रासिंग प्‍वाइंट्स पर परिवहन लिंकों को स्‍तरोन्‍नत किया जाएगा।
    6. दोनों पक्ष व्‍यावसायिक शिष्‍टमंडलों के आदान प्रदान में सुविधा प्रदान करने पर सहमत हुए।
  • इस बात पर सहमति हुई कि नियंत्रण रेखा पारीय सी बी एम पर संयुक्‍त कार्य समूह की बैठक द्विवार्षिक आधार पर होगी ताकि विद्यमान व्‍यवस्‍थाओं की समीक्षा की जा सके और नियंत्रण रेखा पारीय व्‍यापार एवं यात्रा के लिए अतिरिक्‍त सी बी एम एवं उपायों का सुझाव दिया जा सके।
  • दोनों पक्ष दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण आदान प्रदान को बढ़ावा देने की आवश्‍यकता पर सहमत हुए। उन्‍होंने विभिन्‍न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने के उपायों पर भी विचार विमर्श किया जिसमें धार्मिक स्‍थलों की यात्रा, मीडिया से जुड़े आदान प्रदान, खेल टूर्नामेंट के आयोजन और एक दूसरे के खिलाफ द्वेषपूर्ण प्रचार को बंद करने में सुविधा प्रदान करना शामिल है।
  • मंत्रियों ने नए वीजा करार पर हस्‍ताक्षर होने का स्‍वागत किया, जिससे द्विपक्षीय वीजा व्‍यवस्‍था उदार होगी तथा ऐसे अनेक उपाय शुरू किए जाएंगे जिनका उद्देश्‍य व्‍यावसायिक व्‍यक्तियों, पयर्टकों, तीर्थयात्रियों, बुजुर्गों एवं बच्‍चों की यात्रा में सहूलियत प्रदान करना, और इस प्रकार दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क में सुविधा प्रदान करना है, जिन्‍हें भारत एवं पाकिस्‍तान के बीच संबंधों का केंद्र बिंदु बना रहना चाहिए।
  • मंत्रियों ने पाकिस्‍तानी राष्‍ट्रीय कला परिषद तथा भारतीय सांस्‍कृतिक संबंध परिषद के बीच संस्‍कृति के क्षेत्र में सहयोग पर समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किए जाने का स्‍वागत किया।
  • दोनों पक्षों ने सियाचीन, सरक्रीक तथा वूलर बैराज / तुलबुल नेविगेशन परियोजना पर विचारों का आदान प्रदान किया तथा इस बात पर सहमति हुई कि परस्‍पर स्‍वीकार्य समाधान ढूंढ़ कर इन मुद्दों का प्रभावी ढंग से समाधान करने की जरूरत है तथा ऐसा करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्‍होंने सिंधु जल संधि के प्रावधानों का पालन करने के महत्‍व की भी पुष्टि की।
  • मंत्रियों ने द्विपक्षीय व्‍यापार एवं वाणिज्यिक संबंधों को सामान्‍य करने की दिशा में हुई प्रगति पर संतोष व्‍यक्‍त किया। मंत्रियों ने दृढ़ता के साथ दोहराया कि दोनों पक्ष व्‍यापार संबंधों को पूरी तरह सामान्‍य बनाने के लिए दोनों देशों के वाणिज्‍य मंत्रियों द्वारा तैयार किए गए रोड मैप का ईमानदारी से पालन करेगें। वे इस बात पर सहमत हुए कि मजबूत एवं परिवर्धित आर्थिक साझेदारी दोनों देशों के लोगों के हित में है।
  • मंत्रियों ने पिछले साल लिए गए निर्णय के अनुसरण में भारत पाकिस्‍तान संयुक्‍त आयोग को पुन: सक्रिय बनाए जाने का स्‍वागत किया। उन्‍होंने संयुक्‍त आयोग के पूर्ण सत्र की अध्‍यक्षता की, जिसकी 2007 के बाद पहली बार बैठक हुई। उन्‍होंने सभी आठ तकनीकी स्‍तरीय कार्य समूहों की बैठकों पर संतोष व्‍यक्‍त किया तथा नोट किया कि इन समूहों ने कृषि, शिक्षा, पर्यटन, स्‍वास्‍थ्‍य, सूचना एवं प्रसारण, सूचना प्रौद्योगिकी एवं दूर संचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पर्यटन के क्षेत्रों में परस्‍पर लाभप्रद सहयोग का पता लगाने के लिए अनेक सुझाव दिया है। उन्‍होंने विदेश सचिवों की रिपोर्ट पर गौर किया तथा उसे अनुमोदित किया, जो संलग्‍न है।
  • मंत्रियों ने सार्क के लक्ष्‍यों एवं उद्देश्‍यों के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की तथा वे सार्क रूपरेखा के अंदर क्षेत्रीय विकास के लिए सहयोग को बढ़ावा देने के वास्‍ते संयुक्‍त रूप से प्रयास करने पर सहमत हुए।
  • मंत्री उपर्युक्‍त पैरा 4 में यथा निहित सभी आठ सिग्‍मेंट्स पर सचिव स्‍तरीय वार्ता का अगला दौर शुरू करने पर सहमत हुए। इन बैठकों का कार्यक्रम राजनयिक चैनलों के माध्‍यम से तैयार किया जाएगा। वे इस बात पर भी सहमत हुए कि ये सभी बैठकें 2013 में नई दिल्‍ली में उनकी अगली समीक्षा बैठक से पूर्व आयोजित की जाएंगी।
  • भारत के विदेश मंत्री ने पाकिस्‍तान के राष्‍ट्रपति एवं प्रधान मंत्री से मुलाकात की।

भारत - पाकिस्‍तान संयुक्‍त आयोग के तकनीकी स्‍तरीय कार्य समूहों द्वारा सहयोग के लिए अभिचिह्नित क्षेत्र

  • 27 जुलाई 2011 को नई दिल्‍ली में उनकी पिछली बैठक के दौरान भारत के विदेश मंत्री तथा पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसरण में 6 सितंबर 2012 को इस्‍लामाबाद में भारत - पाकिस्‍तान संयुक्‍त आयोग की बैठक हुई। दोनों पक्षों ने संयुक्‍त आयोग को सक्रिय किए जाने का स्‍वागत किया। निम्‍नलिखित आठ तकनीकी स्‍तरीय कार्य समूहों (टी एल डब्‍ल्‍यू जी) ने विचार विमर्श किया तथा संबंधित क्षेत्रों में परस्‍पर लाभप्रद सहयोग के अवसरों की पहचान की :
    1. कृषि
    2. शिक्षा
    3. पर्यावरण
    4. स्‍वास्‍थ्‍य
    5. सूचना
    6. आई टी एवं दूरसंचार
    7. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
    8. पर्यटन
  • कृषि पर कार्य समूह ने सहयोग के अवसरों पर विचार विमर्श किया तथा सहयोग के कतिपय क्षेत्रों की पहचान की जिसमें जैव प्रौद्योगिकी के प्रयोग के माध्‍यम से फसल सुधार के क्षेत्रों में विशेषज्ञों का आदान प्रदान एवं वैज्ञानिकों का प्रशिक्षण, बीज क्षेत्र में सहयोग, संगरोध से संबंधित मामले, पशुधन एवं डेरी विकास क्षेत्र, अधिक दक्षता वाली सिंचाई प्रणाली तथा वर्षा जल संचयन शामिल हैं।
  • शिक्षा पर कार्य समूह ने स्‍कूली एवं उच्‍च शिक्षा, अनौपचारिक शिक्षा तथा प्रौढ़ साक्षरता के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के अवसरों का पता लगाया। इसने पाकिस्‍तान के उच्‍च शिक्षा आयोग तथा भारत के विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग के बीच संस्‍थानिक संबंध, पाकिस्‍तान के राष्‍ट्रीय व्‍यावसायिक एवं तकनीकी प्रशिक्षण आयोग तथा भारत के अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के बीच संबंध एवं पाकिस्‍तान के नेशनल बुक फाउंडेशन और भारत के नेशनल बुक ट्रस्‍ट एवं राष्‍ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के बीच आदान प्रदान के माध्‍यम से सहयोग बढ़ाने की संभावना का भी पता लगाया।
  • पर्यावरण पर कार्य समूह ने पर्यावरण से संबंधित विभिन्‍न मुद्दों पर विचार विमर्श किया तथा जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यावरणीय संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण एवं स्‍वच्‍छ विकास मशीनरी, जैव विविधता एवं संपोषणीय वन संरक्षण, ठोस अपशिष्‍ट प्रबंधन के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति हुई। वे ज्ञान की हिस्‍सेदारी एवं क्षमता निर्माण के लिए संस्‍‍थानिक संबंधों की स्‍थापना समेत अनुभवों एवं सर्वोत्‍तम प्रथाओं को साझा करने पर भी सहमत हुए।
  • स्‍वास्‍थ्‍य पर कार्य समूह पोलियो उन्‍मूलन में सहयोग बढ़ाने और प्रतिरक्षण के कवरेज में वृद्धि करने, महिला एवं बाल स्‍वास्‍थ्‍य में सहयोग करने, ग्रामीण क्षेत्रों में मानव संसाधनों को बनाए रखने के लिए अनुभव की हिस्‍सेदारी, पाकिस्‍तान की औषधि विनियामक एजेंसी तथा भारत के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन के बीच विनियामक व्‍यवस्‍था एवं संस्‍थानिक सहयोग पर सूचना के आदान प्रदान पर सहमत हुआ। वे भेषज पदार्थों एवं जैव पदार्थों में गुणवत्‍ता आश्‍वासन एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमत हुए।
  • सूचना पर कार्य समूह ने सूचना एवं प्रसारण से संबंधित मुद्दों पर विचार विमर्श किया। इस संदर्भ में पत्रकारों एवं सूचना पेशेवरों के आदान प्रदान, एक दूसरे के देश में फिल्‍म महोत्‍सव के आयोजन, भारतीय जन संचार संस्‍थान (आई आई एम सी) तथा उपयुक्‍त पाकिस्‍तान संस्‍थान के बीच और भारत के फिल्‍म एवं टेलीविजन संस्‍थान (एफ टी आई आई) तथा पाकिस्‍तानी दूरदर्शन निगम एवं पाकिस्‍तानी प्रसारण निगम के शिक्षाविदों के बीच सेमिनार / कार्यशाला आयोजित करने, आधिकारिक समाचार एजेंसियों के बीच सूचना का आदान प्रदान करने और टीवी एवं रेडियो कार्यक्रमों का आदान प्रदान करने को भावी सहयोग के रूप में अभिचिह्नित किया गया। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि दोनों देशों के बीच समर्थकारी माहौल निर्मित करने में मीडिया अग्रणी भूमिका निभा सकती है।
  • आई टी एवं दूरसंचार पर कार्य समूह ने सहयोग के अवसरों पर विचार विमर्श किया। पाकिस्‍तान ने पाकिस्‍तान में आई सी टी कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए भारतीय कंपनियों को आमंत्रित किया। भारत ने पाकिस्‍तान के लिए भारत में अनुकूलित ई-अभिशासन कार्यशाला आयोजित करने की पेशकश की। उन्‍होंने अंतर्राष्‍ट्रीय डोमेन नाम (आई डी एन), ई-अभिशासन पर सर्वोत्‍तम प्रथाओं, खुला स्रोत प्रौद्योगिकी एवं आई टी समर्थित सेवाओं को साझा करने में सहयोग की संभावनाओं पर विचार विमर्श किया। इस समूह ने आईटी एवं दूरसंचार के पेशेवरों के लिए वीजा सुविधा में सुधार करने पर बल दिया। भारत ने दोनों देशों के बीच टेली मेडिसीन संबंध स्‍थापित करने के लिए प्रस्‍ताव अग्रेषित करने की पेशकश की।
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर कार्य समूह ने भारत एवं पाकिस्‍तान में राष्‍ट्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी नवाचार प्रणाली पर विचार विमर्श किया। वे संयुक्‍त कार्यशालाओं / सेमिनारों एवं संक्षिप्‍त प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन के माध्‍यम से साझे हित के क्षेत्रों में काम करने पर सहमत हुए। उन्‍होंने इस प्रकार के सहयोग के लिए औष‍धीय पादपों एवं हर्बल मेडिसीन (पाकिस्‍तान में), नवीकरणीय ऊर्जा (भारत में) के क्षेत्रों की पहचान की। दोनों पक्ष एक दूसरे के विज्ञान लोकप्रियता कार्यक्रमों / गतिविधियों में भाग लेने पर भी सहमत हुए।
  • पर्यटन पर कार्य समूह ने पर्यटन उद्योग तथा दोनों देशों में इसके लिए मौजूद संभावनाओं पर चर्चा की। उन्‍होंने विशेष रूप से सूचना की हिस्‍सेदारी, अनुसंधान एवं विकास, पर्यटन के क्षेत्र में मानव संसाधन विकास, गंतव्‍य प्रबंधन, विपणन एवं संवर्धन, बैठक प्रोत्‍साहन सम्‍मेलन एवं प्रदर्शनी (एम आई सी ई) पर्यटन, यात्रा एवं अतिथि सत्‍कार उद्योग में सहयोग के क्षेत्रों का पता लगाया एवं पहचान की।

इस्‍लामाबाद
8 सितंबर 2012



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