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इस्‍लामाबाद में विदेश मंत्री की मीडिया वार्ता का प्रतिलेखन

सितम्बर 08, 2012

सरकारी प्रवक्‍ता (श्री सय्यद अकबरूद्दीन) : दोस्‍तो, नमस्‍कार। विदेश मंत्री महोदय कुछ प्रश्‍न लेने के लिए सहमत हो गए हैं। उनको डिनर के लिए जाना है, तथा हम अपने कार्यक्रम से थोड़ा पीछे चल रहे हैं। वह कुछ प्रश्‍नों के उत्‍तर देगें। हमें कोई उद्घाटन टिप्‍पणी प्राप्‍त नहीं होगी। उन्‍होंने जो कुछ कहा है वह सब आपको उपलब्‍ध है। आप अपने प्रश्‍नों से शुरू कर सकते हैं।

प्रश्‍न: महोदय, वीजा करार के बारे में इस सब वार्ता के बाद दिन के अंत में पाकिस्‍तान की विदेश मंत्री ने संपूर्ण लंबे प्रेस सम्‍मेलन के दौरान आतंकवाद का कोई उल्‍लेख नहीं किया। आप उस संपूर्ण ... (अश्रव्‍य) ... के दौरान उपस्थि‍त थे। वार्ता के इन घंटों तथा आपने उन्‍हें जो सब कुछ बताया उसके बाद आपको कैसा लगा कि आतंकवाद पर उन्‍होंने एक शब्‍द भी नहीं कहा?

विदेश मंत्री (श्री एस एम कृष्‍णा) : मेरे लिए जो मूल्‍यवान है वह संयुक्‍त वक्‍तव्‍य है जिसे मेरी वार्ता के बाद जारी किया गया है, तथा संयुक्‍त वक्‍तव्‍य में निश्चित रूप से आतंकवाद के बारे में उल्‍लेख किया गया है। इसलिए, यही मेरे लिए मायने रखता है।

प्रश्‍न : परंतु क्‍या इस बात पर आश्‍चर्य नहीं हुआ कि उन्‍होंने इसका उल्‍लेख तक नहीं किया?

विदेश मंत्री : संयुक्‍त वक्‍तव्‍य एक दस्‍तावेज है तथा उस वक्‍तव्‍य पर उन्‍होंने हस्‍ताक्षर किया है।

प्रश्‍न : संयुक्‍त वक्‍तव्‍य यह छाप छोड़ता है कि पाकिस्‍तान समझौता एक्‍सप्रेस घटना को 26/11 के समतुल्‍य बनाने में समर्थ हो गया है।

विदेश मंत्री : ये ऐसे मुद्दे हैं जिन्‍हें जब भी मैं पाकिस्‍तान आता हूँ या जब भी पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री भारत आते हैं तब हर बार उठाया जा रहा है। वे समझौता एक्‍सप्रेस का मुद्दा उठाते हैं और हम 26/11 का मुद्दा उठाते हैं और संयुक्‍त वक्‍तव्‍य में इन दोनों पहलुओं को शामिल किया गया है।

प्रश्‍न : महोदय, प्रधान मंत्री जी की यात्रा के लिए आपने जिन शर्तों के बारे में कहा उस पर बहुत भ्रम है तथा क्‍या आप इसे मुंबई हमले पर प्रगति से जोड़ रहे हैं?

विदेश मंत्री : प्रधान मंत्री जी की यात्रा के लिए ढेरों तैयारी की जरूरत होती है। प्रधान मंत्री जी की यात्रा होने के लिए तैयारी में महीनों लग जाते हैं। और प्रधान मंत्री की अन्‍य प्रतिबद्धताएं हैं। उनका कार्यक्रम देखना होगा। इसलिए, भारत के प्रधान मंत्री की संभावित पाकिस्‍तान यात्रा के बारे में मैं कोई प्रतिबद्धता नहीं कर सकता। निमंत्रण आया है जिसे प्रधान मंत्री जी को दे दिया गया है, तथा निमंत्रण को स्‍वीकार करना और उसके बाद ति‍थि तय करने का काम करना व्‍यक्तिगत रूप से प्रधान मंत्री जी पर निर्भर है। इसलिए, अभी इस बारे में केवल अनुमान लगाया जा सकता है।

प्रश्‍न : परंतु क्‍या कोई शर्त है? आपने कहा कि मुंबई पर किसी प्रगति संबंधी कोई शर्त नहीं होगी।

विदेश मंत्री : अभी हम प्रधान मंत्री जी को प्राप्‍त निमंत्रण के बिंदु पर हैं, इसलिए किसी शर्त का प्रश्‍न नहीं उठता।

प्रश्‍न : महोदय, सरबजीत के मुद्दे पर, क्‍या पाकिस्‍तान की ओर से कोई सकारात्‍मक संकेत है?

विदेश मंत्री : पिछली रात को जब मैंने राष्‍ट्रपति जी से इसका उल्‍लेख किया, तो राष्‍ट्रपति जी ने इसे बहुत गंभीरता से लिया है और उन्‍होंने अपने कार्यालय को इसकी निश्चित रूप से छानबीन करने का निर्देश दिया है। और हमारा दृष्टिकोण इस तथ्‍य को ध्‍यान में रखते हुए मानवीय आधार पर है कि उन्‍होंने पाकिस्‍तान की जेल में लगभग 20 वर्ष बिता लिया है। और उनकी आयु, उनका स्‍वास्‍थ्‍य, ये सब चीजें ऐसे कारक बन रही हैं जिस पर पाकिस्‍तान सरकार को ध्‍यान देना होगा।

प्रश्‍न : महोदय, आपने कहा कि जब मैं वापस जाऊँगा तो मैं प्रधान मंत्री जी को अपना आकलन उपलब्‍ध कराऊँगा, तथा सुश्री खार ने कहा कि उनका आकलन सकारात्‍मक होगा। क्‍या आप इस बारे में कुछ सुराग दे सकते हैं कि आपका आकलन क्‍या होगा?

विदेश मंत्री : मेरी समझ से यह मेरे और प्रधान मंत्री जी के बीच की बात है। मैं मीडिया के माध्‍यम से अपने प्रधान मंत्री जी से बात नहीं कर सकता। क्‍या आप नहीं समझते कि यदि आप मेरी जगह होते तो आप भी ऐसा नहीं करते? या आप ऐसा करते?

प्रश्‍न : महोदय, प्रेस सम्‍मेलन के दौरान पाकिस्‍तान की विदेश मंत्री ने जम्‍मू एवं कश्‍मीर, सरक्रीक, सियाचीन पर आगे बढ़ने संबंधी पाकिस्‍तान की इच्‍छा के बारे में बोला, तथा इसे संबंध के आगे बढ़ने के संदर्भ में रखा। क्‍या आपने भी इसे प्रस्‍ताव के रूप में, सुझाव के रूप में रखा, कि आप मुंबई से आगे बढ़ रहे हैं?

विदेश मंत्री : मुंबई पूरी तरह वार्ता के अंतर्गत शामिल है तथा मुंबई पर एवं भारत पर हुए इस जघन्‍य अपराध के दोषियों को दंडित करने के लिए उन्‍हें अनुवर्ती कार्रवाई करनी होगी। भारत इससे पीछे नहीं हट रहा है, हम प्रत्‍येक विचारणीय अवसर पर इस पर जोर दे रहे हैं तथा हम ऐसा करना जारी रखेंगे। इसके अलावा, अपने कश्‍मीर का उल्‍लेख किया, आपने सियाचीन का उल्‍लेख किया, आपने सरक्रीक का उल्‍लेख किया। ये ऐसे मुद्दे हैं जो मौजूद हैं तथा उन्‍हें दरकिनार नहीं किया जा सकता है। किंतु हम चरण दर चरण दृष्टिकोण की वकालत कर रहे हैं, जिसकी मैंने दो साल पहले वकालत की थी जिसे पूर्णत: अस्‍वीकार कर दिया गया, और इस बार मेरी समझ से पाकिस्‍तान ने उसे स्‍वीकार किया है और उनका भी यह विश्‍वास है कि चरण दर चरण दृष्टिकोण दोनों देशों के लिए सबसे तर्कसंगत दृष्टिकोण है। जैसा कि एक बार पुन: प्रधान मंत्री जी ने अपने एक प्रेस सम्‍मेलन में कहा था कि हम कश्‍मीर शब्‍द से भयभीत नहीं हैं। हम कश्‍मीर पर भी बात करने के लिए तत्‍पर हैं। परंतु इसके लिए, मुद्दों पर विचार विमर्श करने के लिए आपको सही परिवेश की जरूरत है। और मेरी समझ से, हम ऐसे किसी मुद्दे पर वार्ता के लिए पाकिस्‍तान से संपर्क करने के इच्‍छुक हैं जिस पर वे वार्ता करना चाहते हैं।

प्रश्‍न : महोदय, पाकिस्‍तान की विदेश मंत्री ने कहा कि हमें पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए। तब आपने उस भावना को प्रतिध्‍वनित किया कि हम पीछे मुड़कर नहीं देखेंगे, हम इतिहास के बंधक नहीं होंगे। क्‍या इस वक्‍तव्‍य का यह अर्थ नहीं निकाला जा सकता कि आप 26/11 को नजरअंदाज करने के इच्‍छुक हैं। क्‍या यह 26/11 से छूट है? क्‍या आप 26/11 को भूल नहीं रहे हैं?

विदेश मंत्री : 26/11 को दरकिनार करने का कोई प्रश्‍न ही नहीं है। जब हमने यह कहा तब हमारा अभिप्राय उन युद्धों से था जो लड़े गए तथा अन्‍य विभिन्‍न घटनाक्रमों से था। किंतु निकट अतीत में, पिछले तीन वर्षों में जो घटित हुआ है उसे हम नहीं भुला सकते हैं। हम इस पर मुलम्‍मा नहीं चढ़ा सकते। यह वार्ता में पूरी तरह विद्यमान है।

आपका बहुत – बहुत धन्‍यवाद, और मैं आशा करता हूँ कि यहां इस्‍लामाबाद में आपका प्रवास बहुत अच्‍छा रहा होगा।

सरकारी प्रवक्‍ता : आपका बहुत – बहुत धन्‍यवाद।

(समाप्‍त)

इस्‍लामाबाद
8 सितंबर, 2012



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