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जापान और थाईलैंड की सरकारी यात्रा पर जाने से पूर्व प्रधानमंत्री के बयान, 27-31 मई, 2013

मई 27, 2013

मैं आज पूर्व की यात्रा पर जा रहा हूँ, जिसमें मैं, हमारे महत्वपूर्ण मित्रों और सहयोगियों जापान और थाईलैंड की यात्रा करूंगा।

मेरी जापान की यह यात्रा हमारे दोनों देशों के बीच वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए है, जो पिछले साल वहां पर आसन्न आम चुनाव के कारण आस्थगित हो गया था। जापान, भारत के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और वैश्विक भागीदार है। हमारे हितों में बढ़ती हुई समनुरूपता है और मैं इस संबंध को एशिया में स्थायी स्थिरता और समृद्धि के लिए हमारे दृष्टिेकोण के एक अनिवार्य अंग के रूप में देखता हूँ। मेरे अच्छे मित्र प्रधानमंत्री शिंजो अबे के नेतृत्व में जापान की नई सरकार के साथ अपने शिखर सम्मेलन में, मैं भारत-जापान रणनीतिक और वैश्विक भागीदारी के क्रमिक शिखर सम्मेिलनों द्वारा प्रदान की गई गति को आगे बढ़ाऊंगा।

इस यात्रा के दौरान मेरा प्रस्ताव जापान के साथ हमारे संबंधों को राजनीतिक, सुरक्षा और ऊर्जा के क्षेत्रों में मजबूत करने का है। हम अपने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों के सशक्तिकरण व संतुलन द्वारा हमारे व्यापक आर्थिक सहयोग भागीदारी की पूरी क्षमता का दोहन करने के तरीके तलाशेंगे। यह यात्रा दोनों सरकारों को हमारी साझेदारी में पश्चिमी समर्पित माल-भाड़ा कॉरिडोर और दिल्ली मुंबई औद्योगिक कॉरीडोर जैसी प्रमुख परियोजनाओं में प्रगति का जायजा लेने और सार्थक व पारस्परिक रूप से लाभप्रद सहयोग के लिए द्विपक्षीय संबंध को सुविधाजनक बनाने की भी अनुमति देगा।

मुझे उम्मीद है कि प्रधानमंत्री अबे के साथ साझा हित के महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम पर भी विचारों का आदान प्रदान होगा।

जापान की पिछली प्रत्येभक यात्रा की तरह, मैं जापान के महामहिम सम्राट और महारानी के साथ शालीन दर्शकों के लिए तत्पर हूँ। मुझे जापान में सभी राजनीतिक क्षेत्रों के नेताओं, जापानी व्यापार और उद्योग के प्रमुखों तथा जापान में जीवन के सभी क्षेत्रों से भारत के मित्रों के साथ बातचीत करने का भी अवसर मिलेगा।

मेरा अन्य गंतव्य, थाईलैंड, एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय सहयोगी के साथ ही आसियान के केन्द्रस में स्थित एक क्षेत्रीय अगुआ है। प्रधानमंत्री यिंगलक शिनावात्रा के साथ मेरी बातचीत के दौरान, मैं 2012 में हमारे गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में उनकी महत्वापूर्ण भारत यात्रा के बाद से हमारे संबंधों में आयी नई गतिशीलता को और आगे ले जाऊंगा।

थाईलैंड और भारत सदियों पुराना लोगों के परस्पकर, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को साझा करते हैं। समुद्री पड़ोसी होने के नाते, हम समुद्री सुरक्षा में भी सामूहिक हितों को साझा करते हैं। थाईलैंड के साथ हमारी रक्षा और सुरक्षा सहयोग की प्रगति अच्छी है और अपनी इस यात्रा के दौरान मेरा इसे और बढ़ाने का प्रयास रहेगा। आसियान में हमारे शीर्ष व्यापार और निवेश भागीदार के रूप में, थाईलैंड इस क्षेत्र के साथ भारत के एकीकरण का एक अनिवार्य हिस्सा है।

भारत के लिए थाईलैंड का महत्व भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच संपर्क के एक केंद्र के रूप में भी इसकी क्षमता पर टिका है। त्रिपक्षीय राजमार्ग परियोजना म्यांमार के जरिए हमारे पूर्वोत्तर को थाईलैंड के साथ जोड़ेगा और वाणिज्यिक और सांस्कृतिक सपंर्क के लिए अवसर पैदा करेगा।

मैं इस यात्रा का उपयोग आसियान के साथ मजबूत भागीदारी के निर्माण के लिए हमारी प्रतिबद्धता पर फिर से बल देने के लिए भी करना चाहता हूँ। थाईलैंड, बिम्सटेक और मेकांग गंगा सहयोग पहल में हमारे उप-क्षेत्रीय वचनबद्धता का भी एक प्रमुख घटक है। जापान और थाईलैंड की मेरी यात्राओं से हमारी 'पूर्व की ओर देखो' नीति को और गहराई मिलेगी तथा नया अर्थ जुड़ेगा और एशिया प्रशांत क्षेत्र में शांति, समृद्धि और स्थिरता को योगदान मिलेगा।

नई दिल्ली
27 मई 2013



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