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प्रधानमंत्री जी की जापान यात्रा पर टोकियो में विदेश सचिव द्वारा मीडिया वार्ता का प्रतिलेखन

मई 29, 2013

सरकारी प्रवक्‍ता(श्री सैयद अकबरूद्दीन):दोस्‍तो, नमस्‍कार। शुरू करने से पूर्व आप सबसे प्रतीक्षा कराने के लिए मैं क्षमा मांगना चाहूँगा परंतु फिर भी भारतीय डेडलाइन के लिए अभी भी समय उपलब्‍ध है। इस प्रकार, मुझे उम्‍मीद है आप सभी थोड़ी प्रतीक्षा कराने के लिए मुझे इस बार भी क्षमा कर देंगे।

हमारे साथ यहां विदेश सचिव महोदय मौजूद हैं जो आज की समूची घटनाओं के बारे में आप सभी को जानकारी प्रदान करेंगे अर्थात दो बैठकें जो प्रधान मंत्री जी ने अपने समकक्ष के साथ की तथा अन्‍य बैठकों के बारे में भी। हमारे साथ राजदूत दीपा वाधवा जी हैं जो टोकियो में हमारे राजदूत हैं। यदि आप उनसे कोई अन्‍य प्रश्‍न पूछना चाहें क्‍योंकि वह इस यात्रा के लिए संपूर्ण तैयारियों में शामिल रही हैं। यहां मेरे साथ मेरी दायीं ओर संयुक्‍त सचिव (पूर्वी एशिया) श्री गौतम बम्‍बावाले मौजूद हैं जो नई दिल्‍ली से इस यात्रा को हैंडल कर रहे हैं। अंत में हमारे साथ यहां परिचित हस्ति अर्थात प्रधान मंत्री जी के संचार सलाहकार श्री पंकज पचौरी मौजूद हैं। इन्‍हीं परिचयों के साथ अब मैं विदेश सचिव महोदय से निवेदन करूँगा कि वह संक्षेप में अपनी उद्घाटन टिप्‍पणी करें जिसके बाद यह मंच किसी भी प्रश्‍न के लिए खुला होगा जिसे आप पूछना चाहेंगे।

विदेश सचिव(श्री रंजन मथई):जैसा कि अकबर ने आप सभी को अभी-अभी बताया, हमें देरी हुई है परंतु यह देरी इसलिए हुई है कि शाम का कार्यक्रम केवल 15 मिनट पहले ही समाप्‍त हुआ है और हम यहां तुरंत आने में समर्थ हुए हैं।

आप सभी उन व्‍यापक कार्यक्रमों से अवगत हैं जो प्रधान मंत्री जी के पिछले दो दिनों में टोकियो में थे। इनमें जापान के महामहिम सम्राट एवं साम्राज्ञी के साथ मुलाकात शामिल है जिसमें केवल हमारे राजदूत महोदय मौजूद थे। इस प्रकार, यदि इस पर कोई प्रश्‍न होगा तो उसे आप उनसे पूछ सकते हैं। यह मुलाकात विशुद्ध रूप से महामहिम सम्राट एवं साम्राज्ञी के साथ प्रधान मंत्री एवं श्रीमती कौर के लिए एक निजी लंच के बाद आयोजित हुई।

पिछली रात प्रधान मंत्री महोदय तथा श्रीमती अबे ने प्रधान मंत्री एवं श्रीमती कौर के लिए एक निजी डिनर का आयोजन किया जो उनके परिचय को नया करने एवं कुछ सारवान विचार- विमर्श करने के लिए अवसर प्रदान किया। आज शाम दोनों प्रधान मंत्रियों के बीच बातचीत हुई, पहली वार्ता प्रतिबंधित स्‍वरूप की थी और उसके बाद शिष्‍टमंडल स्‍तरीय वार्ता हुई। शिष्‍टमंडल स्‍तरीय वार्ता के तुरंत बाद मीडिया वार्ता का आयोजन किया गया जहां मेरी समझ से आपमें से अधिकांश लोग मौजूद थे।

मैं आप सभी का ध्‍यान इस तथ्‍य की ओर भी लाना चाहता हूँ कि प्रधान मंत्री जी ने आज शाम दो प्रमुख भाषण दिया। पहला भाषण अर्थव्‍यवस्‍था एवं व्‍यवसाय पर केंद्रित था तथा यह निप्‍पॉन कीडानरेन के लिए था, तथा दूसरा भाषण भारत - जापान संबंधों के बृहद परिप्रेक्ष्‍य में था जो जापान - भारत संघ, जापान - भारत संसदीय मैत्री लीग और मैत्री विनिमय परिषद के लिए था, जिसने संयुक्‍त रूप से इस कार्यक्रम का आयोजन किया। मेरा विश्‍वास है कि आपमें से अधिकांश लोग पहले ही इन भाषणों को कवर कर चुके हैं, इसलिए मैं इस बारे में और अधिक नहीं बोलूँगा।

आज, विदेश मंत्री किशिदा तथा एम ई टी आई मंत्री मोटेगी ने प्रधान मंत्री जी से शाम के समय उस समय मुलाकात की जब वह प्रधान मंत्री जी के साथ अपनी पहली बैठक के लिए जाने वाले थे। जापान के डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता जो इस पद पर पिछले चुनाव के समय से बने हुए हैं - वर्तमान नेता श्री केइडा हैं - नई कोमेटो पार्टी के नेता श्री यामागुची ने भी प्रधान मंत्री जी से मुलाकात की।

टोकियो में गतिविधियों की उनकी रेंज के दौरान प्रधान मंत्री जी द्वारा शामिल मुख्‍य संदेश यह है कि भारत जापान के साथ अपनी सामरिक एवं वैश्विक साझेदारी का विस्‍तार करना चाहता है। इसके तहत राजनीतिक विनिमय, आर्थिक वार्ता एवं सामरिक मामले शामिल हैं। जैसा कि प्रधान मंत्री जी ने इसे प्रस्‍तुत किया, भारत और जापान के बीच वैश्विक एवं सामरिक साझेदारी का उद्देश्‍य हमारे सामरिक संबंधों को पूरी तरह से एक नई ऊंचाई पर पहुंचाना है जिसके अंतर्गत सभी क्षेत्र शामिल हों जैसे कि आर्थिक सहयोग, व्‍यापार विकास, हमारी वर्तमान साझेदारी के सामरिक क्षेत्रों में जापान की सहायता से भारत में अवसंरचना विकास।

आप सभी ने दोनों प्रधान मंत्रियों द्वारा आज पहले जारी किए गए संयुक्‍त वक्‍तव्‍य को देखा होगा। उन्‍होंने वास्‍तव में इस पर आपकी मौजूदगी में हस्‍ताक्षर किया है। मैं इस दस्‍तावेज की कुछ प्रमुख बातों के बारे में उल्‍लेख करना चाहूँगा। यह सामरिक एवं वैश्विक साझेदारी को रेखांकित करता है तथा इसमें इस साझेदारी के तहत कुछ विशिष्‍ट मुद्दे शामिल हैं। उदाहरण के लिए, भारत और जापान द्विपक्षीय नौसैन्‍य अभ्‍यास को संस्‍थानीकृत करने पर सहमत हुए हैं, जिन्‍हें अधिक बारंबारता के साथ तथा यूनिक रूप से संचालित किया जाएगा। जापान सरकार ने भारत को यूएस-2 एम्फिबियस एयरक्राफ्ट की बिक्री करने का प्रस्‍ताव किया है। इसके बारे में पहले ही सूचित किया जा चुका है। यह ऐसे कुछ अवसरों में से एक है जहां जापान ने किसी विदेश राष्‍ट्र को सैन्‍य एवं सिविल सहयोग के साथ इस प्रकार के दोहरे उपयोग के उपकरण की बिक्री करने का प्रस्‍ताव किया है। मैं आपका ध्‍यान इस तथ्‍य की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ कि इसके दोहरे प्रयोग हैं। इसका उद्देश्‍य यह है यह असाधारण क्षमता वाला एयरक्राफ्ट है जो समुद्र तल से बहुत अधिक ऊंचाई पर भी उतर सकता है जहां तरंगे बहुत ऊंची होती हैं तथा इसकी रेंज बहुत ही लंबी है इसलिए इसके सिविलियन के साथ-साथ संभावित रूप से सैन्‍य प्रयोग भी हैं।

हमारे प्रधान मंत्री जी ने भारत की विकास प्रक्रिया और डी एम आई सी, डेडिके‍टेड फ्रेट कोरिडोर के लिए जापान के अडिग समर्थन को नोट किया तथा आज यह सहयोग के एक नए क्षेत्र के रूप में उभर रहा है जो चेन्‍नई– बंगलुरू औद्योगिक कोरिडोर के नाम से विख्‍यात है और ये जापान की इस प्रतिबद्धता के प्रतीक हैं। आप सभी जानते हैं कि हमारे राजदूत महोदय ने नवीनतम अवसंरचना विकास करारों पर हस्‍ताक्षर किया है जिसे जापान के ओ डी ए से वित्‍त पोषित किया जाएगा तथा यह 71 बिलियन येन की मुंबई मेट्रो लाइन-IIIपरियोजना है।

जापानी पक्ष ने चेन्‍नई – बंगलुरू औद्योगिक कोरिडोर पर बहुत अधिक बल दिया है। जापानी उद्योग का एक महत्‍वपूर्ण वर्ग इस विशिष्‍ट क्षेत्र में निवेश कर रहा है और इसलिए उनका यह मानना है कि इस विशिष्‍ट कोरिडोर में भविष्‍य के लिए बहुत अधिक संभावना है। इसके अंग के रूप में, एक व्‍यापक एकीकृत मास्‍टर प्‍लान के लिए एक प्रारंभिक अध्‍ययन कराया गया है तथा अब हमने इस मास्‍टर प्‍लान को आगे बढ़ाने के लिए विचारार्थ विषयों को पूरा कर लिया है।

दोनों प्रधान मंत्री भारत में हाई स्‍पीड रेलवे या मुंबई – अहमदाबाद रूट पर शिंकनसेन की संभावित शुरूआत पर एक संयुक्‍त संभाव्‍यता अध्‍ययन को सह वित्‍त पोषित करने पर भी सहमत हुए हैं। जैसा कि आप सभी जानते हैं, इस समय जापान की प्रमुख उपलब्धियों में से एक शिंकनसेन या हाई स्‍पीड रेल है तथा हम सभी जापान की असाधारण उपलब्धियों से परिचित हैं। हम यह देखने के लिए एक संयुक्‍त संभाव्‍यता अध्‍ययन कराने जा रहे हैं कि कैसे यह हमारे रेलवे की प्राथमिकताओं को देखते हुए उनकी समग्र योजना में फिट बैठता है तथा इस संभाव्‍यता अध्‍ययन के पूरा हो जाने के बाद हम इसे आगे बढ़ाना चाहते हैं।

भारत और जापान रेयर अर्थ के क्षेत्र में भी सहयोग कर रहे हैं। पिछले नवंबर में हमारे राजदूत महोदय द्वारा एक सरकार दर सरकार ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किया गया था तथा यह पहले ही लागू हो चुका है। भारत और जापान की कंपनियां– इंडियन रेयर अर्थ लिमिटेड तथा टोयोटा सुशो – रेयर अर्थ आक्‍साइड की बिक्री पर बातचीत कर रही हैं।

जैसा कि मैंने बताया, आप सभी ने मुंबई मेट्रो परियोजना के लिए राजनयिक नोट्स के आदान– प्रदान को देखा है। इस साल जापान ओ डी ए की कुल प्रतिबद्धता सर्वाधिक होगी जो 3 बिलियन से अधिक है तथा मेरी समझ से संयुक्‍त वक्‍तव्‍य में इसी का उल्‍लेख है।

आप संयुक्‍त वक्‍तव्‍य से देख सकते हैं कि दोनों प्रधान मंत्रियों ने हम अधिकारियों को वार्ता की गति तेज करने का निदेश दिया है– मैं उनके शब्‍दों को दोहराता हूँ– परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण प्रयोगों पर सहयोग के लिए द्विपक्षीय करार पर वार्ता की गति तेज करे ताकि हम जल्‍दी से जल्‍दी करार करने में समर्थ हो सकें।

जन दर जन आदान – प्रदान के क्षेत्र में भी अनेक पहलें की गई हैं जिसके बारे में बाद में विस्‍तार से बताने के लिए मैं अपने राजदूत महोदय से निवेदन करूँगा, यदि आपमें से किसी की इसमें रूचि होगी। आई आई टी, हैदराबाद इनमें से एक है; भारतीय सूचना प्रबंध संस्‍थान, जबलपुर इसी तरह का एक दूसरा संस्‍थान है; तथा जेनेसिस कार्यक्रम जिसके अंतर्गत प्रधान मंत्री अबे ने कहा कि वह चाहते हैं कि एक हजार से अधिक नौजवान भारतीय जापान आएं और यहां का दौरा करें, ये सभी इसके उदाहरण हैं। भारत की सराहना की गई, जिसे उत्‍साहवर्धक शब्‍दों में वर्णित किया गया जो वास्‍तव में 2020 में ओलंपिक गेम्‍स की मेजबानी करने के लिए जापान की बोली का समर्थन है।

इसलिए, सारांश रूप में मैं यह कहना चाहूँगा कि प्रधान मंत्री जी की टोकियो की यात्रा बहुत ही सफल यात्रा रही है जिसने भारत एवं जापान के बीच सामरिक सूझ-बूझ में विस्‍तार का मार्ग प्रशस्‍त किया है जो, जैसा कि स्‍वयं प्रधान मंत्री जी ने कहा है, एशिया में एवं विश्‍व में शांति एवं स्थिरता में योगदान देगी।

पूरी तरह से एक अलग नोट पर, मैंने इस बात का उल्‍लेख किया था कि प्रधान मंत्री एवं विदेश मंत्री दोनों ने ही कहा था कि छत्‍तीसगढ़ में हुए हमलों से उन्‍हें धक्‍का लगा है तथा इस पर उन्‍होंने अपनी ओर से संवेदना व्‍यक्‍त की तथा इसे लोकतंत्र में अस्‍वीकार्य के रूप में बताया गया तथा कहा गया कि इस तरह के हमले नहीं होने चाहिए।

मैंने आई आई टी, हैदराबाद का उल्‍लेख किया था। हमने वाणिज्यिक क्षेत्र में जापानी पक्ष के साथ अनेक मुद्दों को उठाया। प्रधान मंत्री जी ने जापान से जेनेरिक्‍स एवं भेषज उत्‍पादों के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया को आसान एवं त्‍वरित बनाने का आग्रह किया। और उन्‍हें आश्‍वासन दिया गया कि जापानी पक्ष इसे देखेगा। जैसा कि आप सभी जानते हैं, यह ऐसा मुद्दा है जो काफी समय से लंबित है।

शांति अध्‍ययन संकाय के माध्‍यम से स्‍थापित होने वाले नालंदा विश्‍वविद्यालय के लिए जापान के योगदान का उल्‍लेख किया गया। और अंत में, हम वास्‍तव में बहुत गर्व महसूस कर रहे हैं जापान के महामहिम सम्राट एवं सम्राज्ञी इस साल नवंबर के अंत में या दिसंबर के शुरू में भारत के दौरे पर आएंगे।

अब मैं अपनी वाणी को विराम देना चाहूँगा तथा यह मंच प्रश्‍नों के खुला है। धन्‍यवाद।

प्रश्‍न :महोदय, आज प्रधान मंत्री कार्यालय के सदस्‍यों में से एक ने दोपहर में हमारे साथ वार्ता की थी। उन्‍होंने ने हमें बताया कि असैन्‍य परमाणु सहयोग पर दो ट्रैक होंगे– उन्‍होंने कहा कि हम इस बात पर काम करना जारी रखेंगे कि कैसे हम इसे हासिल कर सकते हैं तथा दूसरी ओर उन्‍होंने अनेक चीजों के बारे में बात की जिन्‍हें भारत को करना होगा। तथा उन्‍होंने कहा कि हम कोई डेडलाइन या डेटलाइन निर्धारित नहीं कर सकते हैं। मोटेतौर पर उन्‍होंने ने कहा कि इसमें दो साल लग जाएं। क्‍या आप इस पर कुछ कहना चाहेंगेॽ

विदेश सचिव :मैं आश्‍वस्‍त नहीं हूँ कि वह जिन दो ट्रैक का उल्‍लेख कर रहे थे वे क्‍या हैं। हमारी एक वार्ता प्रक्रिया है जो असैन्‍य परमाणु सहयोग करार के लिए सतत वार्ता प्रक्रिया है जिसे विदेश मंत्रालय तथा परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा साथ मिलकर हैंडल किया जाता है। यह प्रक्रिया जारी रहेगी। संभवत: वह वार्ता के अन्‍य सेट का उल्‍लेख कर रहे होंगे जिसे हमने निर्यात नियंत्रण व्‍यवस्‍था पर स्‍थापित किया है जहां वार्ता का हमारा एक अन्‍य सेट है जो सतत रूप से जारी है। परंतु यदि आप देखें, तो इसके बावजूद संयुक्‍त वक्‍तव्‍य में सभी चार निर्यात नियंत्रण व्‍यवस्‍थाओं में भारत की पूर्ण सदस्‍यता के लिए साथ मिलकर काम करने पर सहमति है। अब मुझे ज्ञात नहीं है कि कहां से दो साल की समय सीमा उभरी है। जहां तक हमारा संबंध है, हम इस आधार पर चल रहे हैं कि वार्ता की प्रक्रिया की गति तेज करने का निर्णय लिया गया है।

प्रश्‍न :क्‍या सी टी बी टी और एन पी टी पर हस्‍ताक्षर किए बगैर पूर्ण सदस्‍यता प्राप्‍त करना संभव है?

विदेश सचिव : मेरी समझ से चारों निर्यात नियंत्रण व्‍यवस्‍थाएं अपने दम पर काम करती हैं। ये ऐसे मुद्दे हैं जिन पर हमारा दृष्टिकोण सर्वविदित है। और निर्यात नियंत्रण व्‍यवस्‍था नए सदस्‍यों को स्‍वीकार करने के संपूर्ण निकाय की स्‍वीकृति के आधार पर आगे बढ़ती है।

प्रश्‍न : मैं आपको निर्यात नियंत्रण व्‍यवस्‍था से जुड़े प्रश्‍न पर वापस लाना चाहता हूँ। क्‍या आप इस बारे में थोड़ा विस्‍तार से बता सकते हैं क्‍योंकि इसमें कुछ बातों के बारे में बात की जाती हैॽ ऐसा कहा गया है कि दोनों प्रधान मंत्री एक प्रभावी राष्‍ट्रीय निर्यात नियंत्रण प्रणाली के महत्‍व को स्‍वीकार करते हैं। अब हमने राष्‍ट्रीय निर्यात नियंत्रण प्रणाली के संबंध में बहुत काम किया है। क्‍या इसका अभिप्राय यह है कि हमने अब तक जो किया है वह जापान के मानकों से कम हैॽ और दूसरा प्रश्‍न, जब यह कहा गया है कि जमीनी नियम तैयार करने के लिए काम करना जारी रखने की प्रतिबद्धता है तो क्‍या इसकी व्‍याख्‍या समर्थन के रूप में की जा सकती है क्‍योंकि परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह की पिछली बैठक में जापान का दृष्टिकोण थोड़ा भिन्‍न थाॽ

विदेश सचिव :मेरीसमझ से ये दो अलग– अलग मुद्दे हैं। वे जमीन तैयार करने के बारे में बात करते हैं, न कि जमीनी नियम, जो भारत के प्रवेश का मार्ग तैयार कर रहा है।

प्रश्‍न :क्‍या इसे समर्थन के रूप में माना जा सकता है?

विदेश सचिव : यह समर्थन है। यह सदस्‍यता की दिशा में भारत के अग्रसर होने के लिए बहुत स्‍पष्‍ट रूप से समर्थन है।

प्रश्‍न :राष्‍ट्रीय निर्यात नियंत्रण प्रणाली के बारे में थोड़ा विस्‍तार से बताएंॽ

विदेश सचिव :मेरी समझ से इस लाइन का संबंध उस व्‍यापक ब्रीफिंग से है जो हमने अपनी निर्यात नियंत्रण व्‍यवस्‍थाओं के नियम पर अपने अन्‍य साझेदारों को तथा जापान को प्रदान किया है। हो सकता है कि आपको ज्ञात हो कि हमारे एस सी ओ एम ई टी ने सूचीबद्ध किया है क्‍योंकि उन्‍हें स्‍तरोन्‍नत कहा जाता है तथा वास्‍तव में इसकी घोषणा उस समय की गई थी जब आई ए ई ए के महानिदेशक दिल्‍ली में थे तथा हमारे अधिकांश साझेदारों द्वारा यह स्‍वीकार किया गया है कि आज इसकी हमारी सूची वास्‍तव में एन एस जी, एम टी सी आर तथा अन्‍य निर्यात नियंत्रण व्‍यवस्‍थाओं की सर्वोत्‍तम प्रथाओं के अनुरूप है जिसे डी जी एफ टी द्वारा एस सी ओ एम ई टी कहा जाता है। मेरी समझ से यह उसकी स्‍वीकृति है।

प्रश्‍न : महोदय, जापान के लोगों के लिए घरेलू राजनीति कितनी महत्‍वपूर्ण होगीॽ जब हम आज के कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे तब हमने जापान सरकार और भारत सरकार दोनों के विरूद्ध कुछ विरोध प्रदर्शन देखा जिसमें यह कहा जा रहा था कि परमाणु का निर्यात नहीं होना चाहिए। जापान जिस रास्‍ते पर चलेगा उसके निर्धारण में घरेलू राजनीति कितनी महत्‍वपूर्ण होगीॽ

विदेश सचिव :मैं जापान की घरेलू राजनीति पर बिल्‍कुल भी टिप्‍पणी नहीं कर सकता। ऐसा करना मेरे लिए उपयुक्‍त नहीं होगा। मैंने जो कहा उसका अभिप्राय यह है कि यदि आप देखें, तो वक्‍तव्‍य में भी जापान के प्रधान मंत्री ने औपचारिक रूप से भारत के गैर प्रसार संबंधी उत्‍कृष्‍ट रिकार्ड को स्‍वीकार किया है। वास्‍तव में, संयुक्‍त वक्‍तव्‍य में इसका उल्‍लेख भी किया गया है। मेरी समझ से हम ऐसी स्थिति में पहुंच रहे हैं जहां आज जापान एवं भारत के बीच सहयोग की संभावनाएं निर्णायक रूप से आगे बढ़ रही हैं। जैसा कि आप जानते हैं, जापान के प्रधान मंत्री ने हाल ही में अनेक देशों का दौरा किया था जहां उन्‍होंने वास्‍तव में असैन्‍य परमाणु सहयोग पर हस्‍ताक्षर किया। हमारे राजदूत महोदय इस पर थोड़ा विस्‍तार से बताने की स्थिति में होंगी, संभवत: वह हमें बता सकती हैं कि वे देश कौन हैं जिनके साथ उन्‍होंने करार किया है। परंतु मेरी समझ से वह अनेक देशों के साथ असैन्‍य परमाणु सहयोग पर एक जिम्‍मेदार नीति की दिशा में अग्रसर हो रहे हैं तथा निश्चित रूप से उन्‍होंने चीजों की इस योजना में भारत के विशेष स्‍थान को स्‍वीकार किया है।

जापान में भारत के राजदूत (सुश्री दीपा गोपालन वाधवा):ये देश हैं:तुर्की, यू ए ई, वियतनाम। मेरा यह मानना है कि शीघ्र ही वह पूर्वी यूरोप, पुराने…(अश्रव्‍य)…देशों के दौरे पर जाने वाले हैं तथा मेरी समझ से इसका उद्देश्‍य वास्‍तव में समान है। इस प्रकार, वे निश्चित रूप से परमाणु रिएक्‍टर के साथ बाजार में निकले हैं क्‍योंकि उनका यह विश्‍वास है कि इस देश में सुरक्षा के मानक बहुत ऊंचे हैं।

विदेश सचिव :मेरी समझ से आपने जिस घरेलू राय का उल्‍लेख किया उसकी दृष्टि से यह एक महत्‍वपूर्ण बिंदु है। घरेलू राय बहुत तीक्ष्‍ण रूप से सुरक्षा पर भी केंद्रित होती है। और जापान के प्रधान मंत्री ने उल्‍लेख किया, जापान के विदेश मंत्री ने उल्‍लेख किया कि जापान की प्रौद्योगिकी में सुरक्षा का पहलू ऐसा पहलू है जिस पर आज वे जोर दे रहे हैं।

प्रश्‍न : महोदय,संयुक्‍त वक्‍तव्‍य में महाराष्‍ट्र में एक गैस आधारित आई पी पी के बारे में उल्‍लेख है। क्‍या आप जापान द्वारा स्‍थापित किए जाने वाले इस आई पी पी के स्‍थान एंव आकार के बारे में थोड़ा विस्‍तार से बता सकते हैंॽ

विदेश सचिव : यह डी एम आई सी के तहत है।

जापान में भारत के राजदूत :यह अर्ली बर्ड परियोजनाओं में से एक है।

विदेश सचिव :मुझे जानकारी नहीं है कि क्‍या हमने कोई स्‍थान तय किया है।

प्रश्‍न :महोदय,रेयर अर्थ के संबंध में, वाणिज्यिक उत्‍पादन कब से शुरू होने की संभावना हैॽ और क्‍या इसके लिए कोई चाइनीज एंगल है क्‍योंकि चीन से जापान को रेयर अर्थ का निर्यात अब उनके द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित कर रहा हैॽ

विदेश सचिव :मैं पहले प्रश्‍न का उत्‍तर दूँगा और यह उत्‍तर यह है कि वार्ता ऐसे स्‍तर पर है जहां हम दो वाणिज्यिक संस्‍थाओं के बीच रूपरेखा तैयार करने का प्रयास कर रहे हैं। पिछले नवंबर में हमारे राजदूत महोदय तथा जापान के सम‍कक्ष ने अंतर्सरकारी करार पर हस्‍ताक्षर किया था जो एक संयुक्‍त उद्यम के माध्‍यम से रेयर अर्थ के क्षेत्र में सहयोग को संभव बनाएगा जो हमारी दोनों सरकारों का एक निश्चित लक्ष्‍य है। अब हम जो करने जा रहे हैं वह यह है कि प्रत्‍येक सरकार द्वारा जिन दो संस्‍थाओं की पहचान की गई है– हमारी ओर से इंडियन रेयर अर्थ लिमिटेड और जापान की ओर से टोयोटा सुशु– वाणिज्यिक करार करने के लिए ताकि वे उत्‍पादन शुरू कर सकें। जब आप वाणिज्यिक करार कर लेते हैं, तो आपको मूल्‍य, मात्रा आदि जैसे मुद्दों पर निर्णय लेने की जरूरत होती है। इस समय यह सब वार्ता के अधीन है। एक लेखाकरण प्रक्रिया है जिसका पालन करना होगा। जब यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी तो मेरी समझ से उन्‍हें उत्‍पादन शुरू करने में समर्थ हो जाना चाहिए। हमें वास्‍तव में बताया गया था कि जापानी पक्ष की ओर से संयंत्र वास्‍तव में तैयार हो जाने वाला है या यह पहले से ही तैयार हो चुका है।

प्रश्‍न : क्‍या आप इस धारणा से सहमत हैं कि भारत– जापान व्‍यापार दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों से मेल खाने में असफल रहा हैॽ उदाहरण के लिए, दोतरफा व्‍यापार केवल लगभग 18 बिलियन डालर है और वास्‍तव में वर्तमान वित्‍त वर्ष के दौरान इसमें गिरावट आई है। ऐसा क्‍यों हो रहा हैॽ कृपया इस पर अपनी टिप्‍पणी दें।

विदेश सचिव :मैं राजदूत महोदय से निवेदन करूँगा कि वह सबसे पहले व्‍यापार के आंकड़ों के बारे में बताएं और इसके बाद मैं इस धारणा के बारे में अपनी राय व्‍यक्‍त करूँगा।

जापान में भारत के राजदूत :मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि ऐसी धारणा कैसे बनी क्‍योंकि मेरी समझ से एक वर्ष में यह लगभग 13 मिलियन डालर से बढ़कर 18 मिलियन डालर हो गया है। इस प्रकार, निश्चित रूप से इसमें कोई गिरावट नहीं आई है। हो सकता है कि इसमें उतनी वृद्धि न हो रही हो जितना हम चाहते हैं तथा यह संभवत: हमारी अपेक्षाओं के अनुरूप न हो परंतु निश्चित रूप से यह विकास के पथ पर है।

विदेश सचिव :मैं यह कहूँगा कि प्रधान मंत्री जी ने बार-बार कहा है तथा जापान के प्रधान मंत्री ने उनसे सहमति व्‍यक्‍त की है कि 18 बिलियन डालर का व्‍यापार वास्‍तव में दोनों देशों की क्षमता से बहुत कम है। मैं इसे हमारे संबंधों के बारे में व्‍यापक प्रचार से नहीं जोड़ना चाहूँगा। हमें उस सच्‍चाई से निपटने की आवश्‍यकता है जहां हमारा व्‍यापार दस साल पहले था, जहां आज यह है और जहां इसके जाने की संभावना है। हम इस बात पर ध्‍यान दे रहे हैं कि इसके कहां जाने की संभावना है। हमारा यह विश्‍वास है कि हमारे व्‍यापार में वृद्धि के लिए प्रचुर संभावनाएं हैं तथा ऐसे अनेक क्षेत्र हैं जिनमें हम साथ मिलकर काम कर रहे हैं। और हमारा यह विश्‍वास है कि निवेश नी‍त व्‍यापार विकास एक बहुत महत्‍वपूर्ण कारक होगा। हमें जरूर याद करना चाहिए कि अगस्‍त, 2011 में ही व्‍यापक आर्थिक साझेदारी करार पर हस्‍ताक्षर किया गया तथा सबसे मात्र डेढ़ साल की अवधि बीती है। मेरी समझ से अगले दो वर्षों में आप देखेंगे कि सी ई पी ए की पूर्ण क्षमता का उपयोग हो रहा है। और जब भारत में जापानी निवेश में वृद्धि होगी तो आप दोनों देशों के बीच व्‍यापार संबंध में समवर्ती वृद्धि देखेंगे। हमें बार-बार यह आश्‍वासन दिया गया है कि भारी संख्‍या में जापान की कंपनियों ने अब भारत को ऐसे क्षेत्र के रूप में निर्धारित किया है जहां वे निवेश करना चाहती हैं।

मुझे पता है कि दो साल पहले भी भारत की पहचान निवेश करने के लिए संभावित रूप से सर्वोत्‍तम देश के रूप में की गई थी। परंतु आज सी ई ओ के कार्यालयों में इस तरह की राय में महत्‍वपूर्ण रूप से व्‍यापक वृद्धि हो रही है, यह ऐसा अभिमत है जिसे हमने उस समय प्राप्‍त किया जब प्रधान मंत्री जी ने किडानरेन को संबोधित किया। हम बैठे थे तथा भारी संख्‍या में कारोबारी व्‍यक्तियों से बात कर रहे थे जिन्‍होंने कहा कि अब समय आ गया है। संभवत: वे वैश्विक स्थिति, हमारी अपनी नीतियों के विकास की प्रतीक्षा कर रहे थे तथा देख रहे थे। परंतु मेरी समझ से अब वे इस निर्णय पर पहुंच गये हैं कि भारत में निवेश करना जापान के लिए फायदेमंद है।

प्रश्‍न :यहप्रश्‍न विदेश सचिवएवं राजदूत महोदय के लिए है जो पूरी तरह से भिन्‍न मुद्दे पर है। हाल ही में दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय में एक मामला था जहां उन्‍होंने केंद्र सरकार को सुभाष चंद्र बोस की राख के स्‍थान का सुनिश्‍चय करने के लिए निर्देश दिया है। मैं राजदूत महोदय से बस यह जानना चाहता हूँ कि क्‍या हमारा दूतावास इस संबंध में कोई कार्रवाई कर रहा है। क्‍या आप इसे देख रहे हैंॽ ऐसा माना जाता है कि उनकी राख टोकियो के एक मंदिर में है। चूंकि न्‍यायालय ने केंद्र सरकार को यह पता लगाने का निर्देश दिया है कि राख कहां है इसलिए क्‍या आप इस बारे में कुछ बताना चाहेंगेॽ

विदेश सचिव : यह एक ऐसा मुद्दा है जो राष्‍ट्रीय स्‍तर पर बहुत महत्‍वपूर्ण है तथा इस संबंध में कोई गलतफहमी नहीं है कि यह मुद्दा कितना महत्‍वपूर्ण है। परंतु हमें विशिष्‍ट हिदायतों की प्रतीक्षा करनी होगी। जैसा कि आप जानते हैं इस देश में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौजूदगी, इस देश में उनकी गतिविधियों, इस देश में उनकी राख, उनकी यादों से जुड़ा एक लंबा इतिहास है।

प्रश्‍न :महोदय,एंफिबियस एरोप्‍लेन के अधिग्रहण के संबंध में क्‍या कोई समय सीमा निर्धारित की गई है?

विदेश सचिव :इस संबंध में मैं बहुत स्‍पष्‍ट रूप से बताना चाहूँगा। हमारे बीच जो सहमति हुई है वह इस एयरक्राफ्ट की संभाव्‍यता की जांच करने तथा यह देखने के लिए एक संयुक्‍त कार्य समूह की स्‍थापना करने के बारे में है कि इसका प्रयोग कहां किया जा सकता है, क्‍या इसका विनिर्माण संयुक्‍त रूप से किया जाना चाहिए। ऐसे अनेक मुद्दे हैं जिन्‍हें देखने की जरूरत होगी। हमें एक बिल्‍कुल नयाप्रस्‍ताव प्राप्‍त हुआ है। यह आवश्‍यक है कि यह बृहत्‍तर रूपरेखा के अनुरूप हो कि हम दोनों कैसे आगे बढ़ते हैं, जैसा कि मैंने कहा यह दोहरे प्रयोग वाला एयरक्राफ्ट है तथा एक सिविलियन परियोजना एवं रक्षा परियोजना के रूप में है। हमें इसका अध्‍ययन करना होगा। इस प्रकार, संयुक्‍त कार्य समूह विभिन्‍न प्रकार के मुद्दों की जांच करेगा जैसे कि इसकी क्षमता क्‍या है, इस एयरक्राफ्ट के प्रयोग क्‍या होंगे, क्‍या इसका संयुक्‍त रूप से उत्‍पादन किया जा सकता है, कौन सी एजेंसियां इसका प्रयोग करेंगी, ऑफ टेक क्‍या होगा, इस तरह के अनेक मुद्दों की जांच करनी होगी। यह अभी शुरूआती दिन है परंतु मेरी समझ से तथ्‍य यह है कि यह बहुत असाधारण क्षमता वाला एयरक्राफ्ट है। इसकी लंबी रेंज, बहुत तरंगित समुद्र में उतरने एवं उड़ान भरने की इसकी क्षमता को देखते हुए यह एक प्रौद्योगिकीय उपलब्धि है। इस प्रकार, निश्चित रूप से हम चाहेंगे कि हम इसे देखें।

प्रश्‍न :जैसा कि आपने बताया, जापान ने तीन महत्‍वपूर्ण कोरिडोर परियोजनाओं को शुरू किया है। परंतु उनमें से अधिकांश समय सूची से पीछे चल रही हैं। इसका कारण क्‍या है?

विदेश सचिव :डी एफ सी वेस्‍ट ट्रैक पर है।

जापान में भारत के राजदूत :मैं भी सहमत हूँ। मैं नहीं मानता कि ये परियोजनाएं समय सूची से पीछे चल रही हैं। डेडिकेटेड फ्रेट कोरिडोर ट्रैक पर है। मेरी समझ से यह मार्च, 2017 के आसपास तैयार हो जाना चाहिए, हमें कुछ ऐसा ही बताया गया है। और मेरी समझ से डी एम आई सी भी संभवत: कार्यान्‍वयन चरण में पहुंच गया है क्‍योंकि बहुत सारे अध्‍ययन पूरे हो गए हैं। चेन्‍नई– बंगलुरू औद्योगिक कोरिडोर वास्‍तव में इस क्षेत्र में तथा अवसंरचना निर्माण में अनेक विद्यमान जापानी निवेश को शामिल करने जा रहा है। और मेरी समझ से मास्‍टर प्‍लान तैयार करने का काम पूरा हो गया है। इस प्रकार, मैं नहीं समझता कि विलंब हुआ है।

विदेश सचिव :वास्‍तव में जब आप डी एम आई सी की बात करते हैं, तो मैं समझता हूँ कि हमारे साथ श्री अमिताभ कांत मौजूद हैं जो डी एम आई सी के सी ई ओ हैं। डी एम आई सी के माध्‍यम से जिस आकार एवं पैमाने को हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है वह वास्‍तव में गेम चेंजर है। यह भारत के संपूर्ण पश्चिमी भाग में औद्योगिक विकास के स्‍वरूप को परिवर्तित कर सकता है। मैं आपको बस एक उदाहरण देना चाहूँगा, यदि आप धोलेरा के लिए योजनाओं को देखें जो इस कोरिडोर का एक हिस्‍सा है, कुछ जानकार लोगों द्वारा मुझे बताया गया कि यह शेनझेन से बड़ा है। मेरा तात्‍पर्य यह है कि इतने बड़े पैमाने पर इसकी योजना बनाई जा रही है। इस प्रकार, यह दीर्घ अवधि की परियोजना होगी तथा इसमें कुछ समय तो लगेगा ही। परंतु जब यह साकार हो जाएगी, तो पश्चिमी भारत में औद्योगिक दृष्टि से यह सबसे बड़ी परियोजना होगी।

प्रश्‍न :महोदय, एक प्रश्‍न जो जापान से संबंधित नहीं है। क्‍या यह सच है कि मुंबई पुलिस ने पाकिस्‍तान के अंपायर असद राऊफ को वापस लाने के लिए विदेश मंत्रालय से संपर्क किया हैॽ

विदेश सचिव :मैंने इस बारे में नहीं सुना है परंतु मैं पिछले दो दिनों से बाहर हूँ। जब मैं वापस जाऊँगा तो मैं इसे चेक करूँगा।

प्रश्‍न :महोदय,ऐसा लगता है कि जापान अभी हाल में चीन के आक्रामक रवैए को लेकर चिंतित हुआ है। आज उन्‍होंने इस बारे में भी बात की कि कैसे ताकत एवं बल के आधार पर वे सीमाओं को परिवर्तित करने का प्रयास कर रहे हैं। क्‍या पिछले दो दिनों के दौरान इन सरोकारों को साझा किया गया?

विदेश सचिव :मेरी समझ से जब प्रधान मंत्री जी ने कहा कि भारत एवं जापान के बीच सामरिक एवं वैश्विक साझेदारी न केवल हमारे दोनों देशों के हित में है अपितु एशिया, एशिया प्रशांत क्षेत्र के हित में भी है और इसलिए इस क्षेत्र के महत्‍व को देखते हुए पूरे विश्‍व के हित में है, तो मैं समझता हूँ कि हम स्थिरता की संरचनाओं का निर्माण करने की दृष्टि से बात कर रहे हैं। स्‍पष्‍ट रूप से इसका तात्‍पर्य यह है कि हमारे बहुत सारे हित समान हैं, हमारे बहुत सारे सरोकार समान हैं, हम इस बारे में बहुत सारे विचारों को साझा करते हैं कि कैसे हमारे क्षेत्र में सुरक्षा का बेहतर वास्‍तुशिल्‍प निर्मित किया जा सकता है।

सरकारी प्रवक्‍ता :यदि अब और कोई प्रश्‍न न हो, तो आप सभी का बहुत– बहुत धन्‍यवाद।

(समाप्‍त)

टोकियो
29 मई, 2013



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