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ब्रिक से ब्रिक्‍स तक : एक नई विश्‍व व्‍यवस्‍था का निर्माण करना

जुलाई 09, 2014

लेखक : मनीश चंद

वे नई उभरती विश्‍व व्‍यवस्‍था की ईंट हैं और इसे ईंट-दर-ईंट नए सिरे से बना रहे हैं। ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका – एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में फैली 5 उभरती प्रमुख महाशक्तियां – वैश्विक भागीदारी के नियमों को दृढ़ता से एवं उत्‍तरोत्‍तर फिर से लिख रहे हैं तथा अंतर्राष्‍ट्रीय भू-दृश्‍य को नया आकार देने के लिए अपनी सामूहिक आर्थिक एवं राजनयिक शक्ति का संयोजन कर रहे हैं।

ब्रिक शब्‍द का प्रयोग पहली बार अंतर्राष्‍ट्रीय निवेशक फर्म गोल्‍डमैन सच्‍स द्वारा चार उभरती अर्थव्‍यवस्‍थाओं अर्थात ब्राजील, रूस, भारत और चीन (ब्रिक) को इंगित करने के लिए उनके वैश्विक आर्थिक कागजात संख्‍या 66 "विश्‍व को बेहतर आर्थिक ब्रिक की जरूरत है" में किया गया। जो उभरते बाजारों में अपना धन लगाने की तलाश करने के लिए वैश्विक निवेशकों के अवसर के एक नए ध्रुव के रूप में आरंभ हुआ। वह अब ठोस बहुपक्षीय समूह के रूप में संगठित हो गया है जिसकी खासियत अनेक वैश्विक मुद्दों पर हितों में भरपूर समानता है। यह समूह एक नई विश्‍व व्‍यवस्‍था सृजित करने की प्रबल महत्‍वाकांक्षा के आधार पर कार्य कर रहा है जो उत्‍तर से दक्षिण और पश्चिम से पूरब की ओर शक्ति के अंतरण को दर्शाता है।

नया चक्र, नए क्षितिज

वैश्विक आर्थिक संकट की पृष्‍ठभूमि में जन्‍में ब्रिक देशों के नेताओं की पहली शिखर बैठक जून, 2009 में रूस के येकातरिनबर्ग में हुई। तब से चार और शिखर बैठकें हो चुकी हैं : ब्रासीलिया ने 2010 में दूसरी ब्रिक्‍स शिखर बैठक की मेजबानी की, जिसके बाद 2011 में सान्‍या में, 2012 में नई दिल्‍ली में और डरबन में 2013 में ब्रिक्‍स की शिखर बैठक हुई। ब्रिक्‍स शिखर बैठक का एक नया चक्र शुरू हो रहा है जिसमें ब्राजील 14 से 16 जुलाई, 2014 को फोर्टालेजा के रमणीक बीच शहर में 6वीं ब्रिक्‍स शिखर बैठक आयोजित कर रहा है। उपर्युक्‍त ढंग से 6वीं शिखर बैठक की टीम ''समावेशी विकास : संपोषणीय समाधान’’ है।

images/fo_1.jpgडरबन, दक्षिण अफ्रीका में आयोजित 5वीं ब्रिक्‍स शिखर बैठक (2013) में ब्रिक्‍स देशों के नेताछठीं शिखर बैठक में ब्रिक्‍स देशों के नेता पिछले कुछ वर्षों की महत्‍वपूर्ण उपलब्धियों की समीक्षा करने तथा इस समूह को और सशक्‍त बनाने के लिए आगे की राह का नक्‍शा तैयार करने एवं वैश्विक मामलों पर पश्चिम के वर्चस्‍व को खत्‍म करने तथा अपनी मजबूत आवाज के रूप में अपने स्‍टेटस को सुदृढ़ करने का प्रयास करेंगे। भारत के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी अपनी पहली ब्रिक्‍स शिखर बैठक में भाग लेने के लिए तत्‍पर हैं जो यह दक्षिण एशिया से बाहर उनकी पहली यात्रा है जो उनको न केवल ब्रिक्‍स एजेंडा को समृद्ध करने का अवसर प्रदान करेगी अपितु ब्रिक्‍स देशों के नेताओं के साथ - साथ द्विपक्षीय वार्ता के लिए इस शिखर बैठक में आमंत्रित दक्षिण अमरीका के अनेक देशों के नेताओं से मिलने का भी अवसर प्रदान करेगी।

ब्रिक्‍स पर बैंकिंग : नया विकास बैंक

एक दशक पहले जब से यह विचार उत्‍पन्‍न हुआ है तथा 2009 में शिखर बैठक की प्रक्रिया प्रारंभ हुई है तब से भारत ब्रिक्‍स के एजेंडा को आकार देने में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। अब तक आयोजित सभी 5 शिखर बैठकों में भारत के प्रधान मंत्री ने देश का प्रतिनिधित्‍व किया है। छठीं शिखर बैठक में एक नए प्रस्‍ताव को साकार किया जाएगा जिसे 2012 में भारत द्वारा रखा गया था - विकासशील विश्‍व के बहुपक्षीय बैंक की विजनरी परियोजना जिसका प्रबंधन ब्रिक्‍स द्वारा होगा तथा अवसंरचना वित्‍त एवं संपोषणीय विकास के लिए विकासशील विश्‍व की बढ़ती आवश्‍यकताओं के अनुरूप होगा। नई दिल्‍ली एवं डरबन में आयोजित पिछली दो शिखर बैठकों ने 15-16 जुलाई, 2014 को फोर्टालेजा शिखर बैठक में ब्रिक्‍स बैंक के औपचारिक उद्घाटन के लिए मंच तैयार किया है। इस बैंक का विस्‍तृत वास्‍तुशिल्‍प लगभग पूरा हो गया है तथा जब इसने 2012 के आसपास ऋण देना शुरू कर दिया है, तो न केवल बहुपक्षीय वित्‍त पोषण के नियमों को बदलने में गेम चेंजर बनने के लिए तत्‍पर है जिसे ब्रेटन बुड्स सिस्‍टम द्वारा निर्धारित किया गया है, अपितु वैश्विक वित्‍तीय अभिशासन के वास्‍तुशिल्‍प को पुनर्गठित करने के लिए भी तैयार है जो पश्चिम एवं वाशिंगटन की सहमति के पक्ष में बहुत ही झुका हुआ है। यद्यपि बैंक की रूपात्‍मकताओं को अभी सुदृढ़ किया जा रहा है, इस बात पर विस्‍तृत सहमति है कि इक्विटी पूंजीकरण को अभिशासित करने वाला प्रमुख सिद्धांत होगा जो यह आवश्‍यक बनाता है कि ब्रिक्‍स के सभी देशों के 10 बिलियन अमरीकी डालर प्रत्‍येक के समान शेयर हों। इसलिए, उम्‍मीद है कि बैंक की आरंभिक सब्‍सक्राइब पूंजी 50 बिलियन अमरीकी डालर होगी। अधिकृत पूंजी 100 बिलियन अमरीकी डालर होने की संभावना है। बैंक के अन्‍य प्रमुख आयाम जिसमें नाम, मुख्‍यालय तथा बैंक की अध्‍यक्षता शामिल है, के बारे में अ‍भी तक निर्णय नहीं हुआ है तथा फोर्टालेजा शिखर बैठक में ही तस्‍वीर साफ होगी।

images/fo_2.jpgनई दिल्‍ली, भारत में आयोजित चौथी ब्रिक्‍स शिखर बैठक (2012) में ब्रिक्‍स देशों के नेताउम्‍मीद है कि छठी शिखर बैठक में 100 बिलियन अमरीकी डालर की आकस्मिक रिजर्व निधि (सी आर ए) की औपचारिक घोषणा की भी उम्‍मीद है, जो पांच उभरती अर्थव्‍यवस्‍थाओं के पूंजी प्रवाह में अल्‍पावधिक अस्थिरता से निपटने के लिए उनको मजबूत विकल्‍प प्रदान करते हुए उनके लिए परकोटा के रूप में काम करेगी। सितंबर, 2013 में सेंट पीटर्सबर्ग में जी-20 शिखर बैठक के दौरान अतिरिक्‍त समय में ब्रिक्‍स देशों के नेताओं की बैठक में जो समझ बनी थी उसके अनुसार चीन 41 बिलियन अमरीकी डालर का योगदान देगा, जबकि ब्राजील, रूस और भारत में से प्रत्‍येक 18 बिलियन अमरीकी डालर का योगदान देंगे। दक्षिण अफ्रीका जो इस समूह में सबसे छोटी अर्थव्‍यवस्‍था है, सी आर एफ में 5 बिलियन अमरीकी डालर की प्रतिबद्धता करेगा।

ब्रिक्‍स के कार्य

राजनय का कार्य उत्‍तरोत्‍तर व्‍यवसाय बनता जा रहा है तथा ब्रिक्‍स भी इस पर कोई अपवाद नहीं है। पांच देशों के बीच समानताओं एवं सिनर्जी पर आधारित अंत्रा ब्रिक्‍स व्‍यापार बढ़कर 203 बिलियन अमरीकी डालर हो गया है तथा नेताओं पूरा विश्‍वास है कि यह 500 बिलियन अमरीकी डालर पर पहुंच जाएगा। डरबन, दक्षिण अफ्रीका में पांचवीं शिखर बैठक में ब्रिक्‍स व्‍यवसाय परिषद का उद्घाटन किया गया जिसमें ब्रिक्‍स के प्रत्‍येक सदस्‍य देश से पांच शीर्ष व्‍यवसाय नेता शामिल हैं। व्‍यवसाय परिषद को ब्रिक्‍स के देशों तथा वृहद विकासशील विश्‍व में समृद्धि के चाप को बढ़ाने का कार्य सौंपा गया है।

images/fo_3.jpgसान्‍या, चीन में आयोजित तीसरी ब्रिक्‍स शिखर बैठक (2011) में ब्रिक्‍स देशों के नेतासामरिक कैलकुलस

पिछले कुछ वर्षों में, इस समूह ने घोषित सामरिक चरित्र प्राप्‍त किया है तथा पांचों देश वर्तमान समय के ज्‍वलंत वैश्विक मुद्दों पर अपने संयुक्‍त दृष्टिकोण का निर्माण कर रहे हैं। इन मुद्दों में ईरान के परमाणु मुद्दा तथा सीरिया में मानवीय दुर्गति का उद्भव से लेकर माले एवं पश्चिम अफ्रीका में बढ़ती अराजकता शामिल है। इस संदर्भ में, ब्रिक्‍स देशों के राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की वार्षिक बैठक व्‍यापक श्रेणी की सुरक्षा चुनौतियों एवं वैश्विक मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण निर्मित करने के लिए उपयोगी मंच साबित हुई है। अंत्रा ब्रिक्‍स सहयोग के लिए जिन क्षेत्रों की पहचान की गई है उनमें अन्‍य के अलावा आतंकवाद की खिलाफत, समुद्री सुरक्षा एवं साइबर सुरक्षा शामिल हैं। इस साल, फोर्टालेजा शिखर बैठक में इराक में सांप्रदायिक विभाजन, सीरिया में दयनीय स्थिति तथा यूक्रेन में संकट प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं जो नेताओं के राजनयिक ध्‍यान की मांग करेंगे।

समूह के आर्थिक एवं सामरिक आयामों के अलावा ब्रिक्‍स ने 20 से अधिक क्षेत्रों जो ब्रिक्‍स देशों में रहने वाले 3 बिलियन से अधिक लोगों के जीवन को प्रत्‍यक्ष या परोक्ष रूप से प्रभावित करते हैं, को शामिल करते हुए बहुस्‍तरीय अंत:क्रिया की एक विस्‍तृत रूपरेखा भी तैयार की है। शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य, आपदा प्रबंधन, शहरीकरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा नवाचारी साझेदारी का निर्माण आदि को शामिल करने के लिए अंत्रा ब्रिक्‍स सहयोग में दृढ़ता से विस्‍तार हुआ है। ब्रिक्‍स की हवेली को नए विचारों एवं पहलों से भरा-पूरा रखने के लिए इन क्षेत्रों का कामकाज देखने वाले अधिकारी एवं ब्रिक्‍स मंत्री नियमित रूप से मिलते रहते हैं।

ब्रिक्‍स क्‍यों मायने रखता है : 5 की शक्ति

वैश्विक भू-राजनीति के अस्‍पष्‍ट अल्‍फाबेट में ब्रिक्‍स संक्षिप्‍ताक्षर का एक विशेष करेक्‍टर एवं महत्‍व है क्‍योंकि इन पांच देशों में वैश्विक जी डी पी का 20 प्रतिशत है जो पी पी पी पर 24 ट्रिलियन अमरीकी डालर बनता है, यहां 40 प्रतिशत विश्‍व की आबादी रहती है तथा विश्‍व का एक चौथाई भू-क्षेत्र है। ब्रिक्‍स एक अनोखा समूह है क्‍योंकि यह ऐसा समूह नहीं हो जो भूगोल से बंधा है जैसे कि यूरोपीय संघ या आसियान; या समुदाय आधारित क्‍लब नहीं है जैसे कि ओपेक या सुरक्षा आधारित गठबंधन नहीं है जैसे कि नाटो। इस समूह को मजबूत करने के लिए इसे जहां से ताकत मिलती है वह विश्‍व व्‍यवस्‍था को परिवर्तित करने एवं समावेशी विकास और संपोषणीय समाधान की तलाश में विश्‍व को शामिल करने के लिए ब्रिक्‍स देशों की संयुक्‍त सामरिक इच्‍छा है, जो फोर्टालेजा में छठी शिखर बैठक की मास्‍टर थीम है।

शंकालु प्र‍कृति के लोग इस समूह की कड़ी आलोचना करते हैं और खारिज करते हैं तथा इसे एक और वार्ता की दुकान की संज्ञा देते हैं तथा नौसिखिए लोग इस बात को उजागर करने में कभी नहीं थकते कि ब्रिक्‍स अर्थव्‍यवस्‍थाओं के विकास का वक्र नीचे गिर रहा है। परंतु यह विकृत तस्‍वीर है। यह सच है कि कुछ देशों में विकास की दर घटी है परंतु अधिकांश ब्रिक्‍स अर्थव्‍यवस्‍थाएं अभी भी तर्कसंगत दर से विकास कर रही हैं जब विकासशील विश्‍व की ज्‍यादातर अर्थव्‍यवस्‍थाएं अभी भी गहन गत्‍यावरोध के दौर से गुजर रही हैं। वैश्विक अभिशासन की संस्‍थाओं का सुधार ब्रिक्‍स का प्रेरक बल बना हुआ है, जिसमें संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के दो स्‍थायी सदस्‍य (चीन और रूस) तथा इस प्रतिष्ठित सीट के लिए तीन आकांक्षी सदस्‍य (भारत, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील) शामिल हैं। और हम उम्‍मीद कर सकते हैं कि संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के सुधार एवं विस्‍तार के लंबे समय से लंबित मामले को आगे बढ़ाने के लिए अपेक्षित महत्‍वपूर्ण बल का निर्माण करने के लिए ब्रिक्‍स के नेता नए सिरे से सामूहिक प्रयास करेंगे। कवियों ने दिल की इच्‍छा के करीबी दुनिया के निर्माण के बारे में वागदग्‍धता के साथ अपने विचारों को व्‍यक्‍त किया है; और अब ब्रिक्‍स के राजनयिकों एवं नेताओं की बारी है कि वे वैश्विक भू-राजनीति को परिवर्तित करने के लिए कवियों की कल्‍पना को अधिक ठोस रूप दें तथा अधिक लोकतांत्रिक विश्‍व व्‍यवस्‍था का निर्माण करें। यदि ब्रिक्‍स इसमें सफल होता है, तो वे अपने नाम को अधिक सार्थक करेंगे।

(श्री मनीश चंद इंडिया राइट्सwww.indiawrites.org जो अंतर्राष्‍ट्रीय संबंधों एवं इंडिया स्‍टोरी पर केंद्रित एक ई-मैग्‍जीन है, के मुख्‍य संपादक हैं)

इस लेख में व्‍यक्‍त किए गए विचार अनन्‍य रूप से लेखक के निजी विचार हैं।

संदर्भ:

छठी ब्रिक्‍स शिखर बैठक की आधिकारिक वेबसाइट :
2009 से 2014 तक संयुक्‍त ब्रिक्‍स घोषणाएं :
सचिव (पश्चिम), सचिव (आर्थिक संबंध) और सरकारी प्रवक्‍ता द्वारा आगामी ब्रिक्‍स शिखर बैठक पर मीडिया वार्ता का प्रतिलेखन (6 जुलाई, 2014)
छठी ब्रिक्‍स शिखर बैठक : फोर्टालेजा से क्‍या उम्‍मीद रखें
ब्रिक्‍स देशों के मौन संशय, दक्षिण - दक्षिण ब्रिक्‍स बैंक क्रांति का उद्घाटन



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