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5वीं भारत – यूएस सामरिक वार्ता पर संयुक्‍त वक्‍तव्‍य

जुलाई 31, 2014

भारत की विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्‍वराज तथा यूएस विदेश मंत्री श्री जॉन एफ केरी ने 5वीं वार्षिक भारत – यूएस सामरिक वार्ता में अपने – अपने शिष्‍टमंडलों का नेतृत्‍व किया।

दोनों पक्षों ने इस बात को स्‍वीकार किया कि उनकी नई सरकार को भारत की जनता द्वारा प्रदान किया गया निर्णायक जनादेश इस संबंध को फिर से ऊर्जावान बनाने के लिए एक अनोखा अवसर प्रदान करता है। उन्‍होंने विश्‍वास व्‍यक्‍त किया कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और राष्‍ट्रपति बराक ओबामा के बीच सितंबर, 2014 में वाशिंगटन डीसी में आयोजित होने वाली शिखर बैठक से इस संबंध में एक नई गति प्राप्‍त होगी।

दोनों पक्षों ने सामरिक वार्ता में वाणिज्‍य मंत्री पेन्‍नी प्रिट्जकर तथा वाणिज्‍य एवं उद्योग राज्‍य मंत्री निर्मला सीतारमन की भागीदारी का स्‍वागत किया तथा अपने उद्घाटन बैठक में द्विपक्षीय व्‍यापार एवं आर्थिक मुद्दों पर उनके बीच हुई रचनात्‍मक चर्चा का स्‍वागत किया। उन्‍होंने सैन्‍य अभ्‍यास, रक्षा व्‍यापार, सह उत्‍पादन एवं सह विकास तथा रक्षा के लिए नई प्रौद्योगिकियों पर अनुसंधान पर चर्चा को गहन करने के लिए सितंबर, 2013 में जारी रक्षा सहयोग पर शिखर बैठक स्‍तरीय संयुक्‍त घोषणा को ध्‍यान में रखते हुए अगस्‍त, 2014 में यूएस रक्षा मंत्री हेगल की यात्री की उम्‍मीद व्‍यक्‍त की।

दक्षिण एशिया में आतंकवाद सहित आतंकवाद से उत्‍पन्‍न एक समान खतरे को देखते हुए दोनों नेताओं ने आतंकवाद से निपटने, व्‍यापक विनाश के हथियारों के प्रसार, परमाणु आतंकवाद, सीमा पारीय अपराध से निपटने तथा संबंधित कानूनों के अनुपालन में आतंकी प्रयोजन के लिए इंटरनेट के दुरूपयोग को रोकने के लिए प्रयासों को गहन करने के लिए प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की। दोनों नेताओं ने आतंकवाद की खिलाफत पर संयुक्‍त कार्य समूह की प्रक्रिया, वरिष्‍ठ विशेषज्ञों के निरंतर आदान – प्रदान तथा 2014 में कार्य समूह की आगामी बैठक के जारी रहने का स्‍वागत किया। उन्‍होंने अगली मंत्री स्‍तरीय होमलैंड सुरक्षा वार्ता का आयोजन करने की योजनाओं का भी स्‍वागत किया। वे इस बात पर सहमत हुए कि उनके केंद्रीय प्राधिकारी परस्‍पर कानूनी सहायता एवं प्रत्‍यर्पण की प्रक्रियाओं में सुधार के तरीकों पर चर्चा करने के लिए बैठक करेंगे। वे साइबर सुरक्षा तथा साइबर अपराध कम करने के लिए क्षेत्र में अधिक सहयोग की दिशा में काम करने के लिए भी सहमत हुए।

दोनों नेताओं ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एन एस जी), प्रक्षेपास्‍त्र प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्‍यवस्‍था (एम टी सी आर), वासेनर व्‍यवस्‍था एवं आस्‍ट्रेलिया समूह में भारत के चरणबद्ध ढंग से प्रवेश की दिशा में नवंबर, 2010 से जारी प्रयासों की समीक्षा की। विदेश मंत्री जॉन केरी ने इन समूहों में भारत की सदस्‍यता के लिए संयुक्‍त राज्‍य के समर्थन की फिर से पुष्टि की तथा आई ए ई ए के साथ अपने अतिरिक्‍त प्रोटोकॉल की पुष्टि करने के लिए भारत के हाल के निर्णय का स्‍वागत किया। दोनों नेताओं ने इन प्रयासों को जल्‍दी से अंजाम पर पहुंचाने का समर्थन किया।

विदेश मंत्री जॉन केरी ने रक्षा, रेलवे, ई-कामर्स एवं बीमा सहित भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के अनेक क्षेत्रों में विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाए जाने का स्‍वागत किया। दोनों पक्ष भारत के विनिर्माण एवं अवसंरचना क्षेत्र में निवेश के लिए विशिष्‍ट क्षेत्रों की पहचान करने के लिए सहमत हुए जिसमें इस संबंध में एक नई पहल की स्‍थापना भी शामिल है। उन्‍होंने व्‍यवसाय का बेहतर माहौल सृजित करने के लिए भारत – यूएस सी ई ओ मंच को शक्ति प्रदान करने की भी इच्‍छा व्‍यक्‍त की।

विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्‍वराज तथा यूएस विदेश मंत्री श्री जॉन केरी ने साझेदारी की भावना से द्विपक्षीय व्‍यापार एवं आर्थिक सरोकारों पर चर्चा करने का संकल्‍प व्‍यक्‍त किया जिसमें भारत में मंत्री स्‍तरीय व्‍यापार नीति मंच में चर्चा शामिल है जिसके बारे में दोनों सरकारें उम्‍मीद करती हैं कि 2014 के उत्‍तरार्ध में इसका आयोजन किया जाएगा जिसके दौरान व्‍यापार एवं निवेश के प्रमुख मुद्दों पर ध्‍यान केंद्रित किया जाएगा। दोनों पक्षों ने वाणिज्यिक वार्ता का विस्‍तार करने की योजना बनाई। वे इस बात पर भी सहमत हुए कि भारत इस साल परस्‍पर सुविधाजनक तिथि को उच्‍च प्रौद्योगिकी सहयोग समूह के अगले चक्र की मेजबानी करेगा।

विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्‍वराज ने पहली बार नवंबर, 2014 में भारत की वार्षिक प्रौद्योगिकी शिखर बैठक में साझेदार के देश के रूप में संयुक्‍त राज्‍य का स्‍वागत किया। दोनों नेताओं ने इस कार्यक्रम के तुरंत बाद द्विपक्षीय संयुक्‍त विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी समिति की अगली बैठक बुलाने की उम्‍मीद व्‍यक्‍त की। यूएस विदेश मंत्री जॉन केरी ने वैश्विक स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा एजेंडा (जी एच एस ए) के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का स्‍वागत किया जिसमें एंटी माइक्रोबियल प्रतिरोधकता एवं टीकाकरण के क्षेत्रों में प्रतिबद्धता शामिल है।

दोनों नेताओं ने अनुसंधान एवं तैनाती के घटकों में उन्‍नत स्‍वच्‍छ ऊर्जा के लिए साझेदारी (पी ए सी ई) के तहत किए गए कार्य का स्‍वागत किया। उन्‍होंने स्‍वच्‍छ ऊर्जा के ऑफ ग्रिड स्रोतों त‍क ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच में भारतीय नागरिकों को लाने में स्‍वच्‍छ ऊर्जा के माध्‍यम से ऊर्जा पहुंच को बढ़ावा देने (पी ई ए सी ए) की नई पहल की समीक्षा की। उन्‍होंने सौर प्रौद्योगिकी, दूसरी पीढ़ी के जैव ईंधन तथा ऊर्जा दक्ष भवनों में संयुक्‍त स्‍वच्‍छ ऊर्जा अनुसंधान एवं विकास केंद्र की मदद से क्राफ्ट परिणामों का स्‍वागत किया। उन्‍होंने वातानुकूलन के लिए बिजली की मांग कम करने के लिए स्‍पेस कूलिंग पर विद्यमान पहलों का विस्‍तार करने की भी मंशा व्‍यक्‍त की।

दोनों नेताओं ने भारत – यूएस असैन्‍य परमाणु सहयोग के पूर्ण कार्यान्‍वयन के लिए अपनी प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की। उन्‍होंने सितंबर, 2013 की स्थिति के अनुसार एन पी सी आई एल के साथ पूर्व प्रारंभिक कार्य करार को लागू करने के लिए वेस्टिंग हाउस को प्रदत्‍त कार्यवाही के प्राधिकार का स्‍वागत किया। दोनों पक्षों ने एन पी सी आई एल तथा यूएस कंपनी वेस्टिंग हाउस एवं जनरल इलेक्ट्रिक हिताची से मूल्‍य निर्धारण एवं संविदा संबंधी ब्‍यौरों को अंतिम रूप देने के लिए आवश्‍यक कार्य की गति तेज करने का आग्रह किया। उन्‍होंने सरकार दर सरकार वार्ता को आगे बढ़ाने तथा भारत में यूएस निर्मित प‍रमाणु विद्युत संयंत्रों की स्‍थापना में सुविधा प्रदान करने की उम्‍मीद व्‍यक्‍त की।

दोनों नेताओं ने परमाणु सुरक्षा, परमाणु सुरक्षा विनियामक प्रक्रियाओं, परमाणु सुरक्षा साझेदारी के लिए भारतीय वैश्विक केंद्र (जी सी एन ई पी) की स्‍थापना तथा मौलिक भौतिकी के क्षेत्र में परियोजनाओं पर द्विपक्षीय वार्ता में प्रगति का भी स्‍वागत किया। उन्‍होंने उच्‍च तीव्रता की सुपर कंडक्टिंग प्रोटोन अक्‍सीलरेटर परियोजना, तीस मीटर टेलीस्‍कोप, मानसून अध्‍ययन तथा संयुक्‍त महासागर सर्वेक्षण में भारतीय प्रतिभागिता में सुविधा प्रदान करने के लिए करारों एवं व्‍यवस्‍थाओं की गति तेज करने का आग्रह किया। दोनों नेताओं ने यूएस राष्‍ट्रीय विज्ञान प्रतिष्‍ठान के अंतर्राष्‍ट्रीय अनुसंधान एवं शिक्षा साझेदारी (पी आई आर ई) कार्यक्रम में भारत के शामिल होने की सराहना की, जो अभिचिह्नित विषयों में उच्‍च गुणवत्‍ता की अनुसंधान परियोजनाओं के लिए सहायता प्रदान करने में सुविधा प्रदान करेगा।

विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्‍वराज तथा यूएस विदेश मंत्री श्री जॉन केरी ने पृथ्‍वी प्रेक्षण, अंतरिक्ष अन्‍वेषण तथा उपग्रह नौवहन के क्षेत्र में भारत और संयुक्‍त राज्‍य के बीच सिविल अंतरिक्ष सहयोग का स्‍वागत किया। ध्‍यान दिए जाने वाले नए क्षेत्रों में पृथ्‍वी प्रेक्षण के लिए दोहरी फ्रीक्‍वेंसी के माइक्रोवेव उपग्रह को संयुक्‍त रूप से साकार करना तथा सेवाएं शुरू करना शामिल हो सकता है। दोनों पक्षों ने अंतरिक्ष के माध्‍यम से परिस्थिति की जागरूकता तथा टक्‍कर परिहार जैसे आपसी हित के क्षेत्रों को शामिल करने के लिए 2014 में अं‍तरिक्ष सुरक्षा पर चर्चा जारी रखने की योजना बनाई।

दोनों पक्षों ने भावी सहयोग के एक महत्‍वपूर्ण क्षेत्र के रूप में शिक्षा एवं कौशल विकास की पहचान की। उन्‍होंने भारत में राष्‍ट्रव्‍यापी छात्र मूल्‍यांकन में सुधार के लिए भारतीय एवं यूएस परीक्षण सेवा संस्‍थाओं के बीच साझेदारी का आह्वान किया।

विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्‍वराज तथा यूएस विदेश मंत्री श्री जॉन केरी ने इस बात को स्‍वीकार किया कि दक्षिण एशियाई क्षेत्र, एशिया में तथा वैश्विक स्‍तर पर क्षेत्रीय शांति, स्थिरता एवं समृद्धि में सही मायने में भारत और यूएस के बीच समारिक साझेदारी महत्‍वपूर्ण कर सकती है। उन्‍होंने अन्‍य साझेदार देशों की संयुक्‍त रूप से सहायता करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की जिसमें अफगानिस्‍तान में क्षमता निर्माण, केन्‍या, लाइबेरिया एवं मालावी में कृषि प्रबंधन परियोजनाएं और रूवांडा एवं घाना में खुले सरकारी मंच के लिए सहायता प्रदान करना शामिल है। उन्‍होंने म्‍यांमार के माध्‍यम से दक्षिण एशिया एवं आसियान के बीच व्‍यापार एवं परिवहन संयोजकता का निर्माण करने के लिए भारत, संयुक्‍त राज्‍य अमरीका एवं जापान के साथ मिलकर काम करने की आवश्‍यकता पर जोर दिया जिसमें आर्थिक कोरिडोर का विकास शामिल है।

दोनों नेताओं ने जलवायु परिवर्तन पर यूएन रूपरेखा अभिसमय के तहत डरबन प्‍लेटफार्म पर तदर्थ कार्य समूह के कार्य के 2015 में पेरिस में सफल परिणाम की दिशा में काम करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की। दोनों पक्षों ने जलवायु परिवर्तन पर भारत – यूएस संयुक्‍त कार्य समूह के तहत द्विपक्षीय परामर्श के पहले चक्र का आयोजन किया तथा 2020 पश्‍चात अवधि के लिए एक महत्‍वाकांक्षी जलवायु परिवर्तन करार पर अपनी परिवर्धित वार्ता को जारी रखा और स्‍मार्ट ग्रिड, स्‍वच्‍छ प्रौद्योगिकी, ऊर्जा दक्षता, अनुकूलन रणनीति, संपोषणीय वानिकी तथा आर ई डी डी+ मुद्दों के क्षेत्रों में द्विपक्षीय प्रयासों को सुदृढ़ करना जारी रखा।

विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्‍वराज तथा यूएस विदेश मंत्री श्री जॉन केरी ने यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की कि संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद ने यूएन चार्टर में परिकल्‍पना के अनुसार अंतर्राष्‍ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने में अपनी भूमिका को कारगर ढंग से निभाना जारी रखा है। यूएस विदेश मंत्री जॉन केरी ने इस बात की पुष्टि की कि संयुक्‍त राज्‍य संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की उम्‍मीद करता है जिसमें भारत स्‍थायी सदस्‍य के रूप में शामिल हो। दोनों नेताओं ने यूएन मुद्दों पर विस्‍तृत वार्ता में शांति स्‍थापना पर विद्यमान वार्ता का उन्‍नयन करने की मंशा व्‍यक्‍त की जिसके पहले चक्र का भारत ने सितंबर में संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा के सत्र से पूर्व आयोजन करने का प्रस्‍ताव किया।

दोनों नेताओं ने अखंड, स्‍वतंत्र एवं संप्रभु अफगानिस्‍तान के लिए अपने समर्थन की फिर से पुष्टि की। उन्‍होंने आतंकी घटकों की ओर से काफी धमकी के बावजूद मतदान करने के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करने के लिए अफगानिस्‍तान के लोगों के दृढ़ निश्‍चय की प्रशंसा की। उन्‍होंने राष्‍ट्रपति पद के दोनों उम्‍मीदवारों तथा वर्तमान चुनाव प्रक्रिया में शामिल अफगानिसतान की सभी संस्‍थाओं के संयुक्‍त राष्‍ट्र के साथ मिलकर काम करने के प्रयासों का स्‍वागत किया ताकि चल रही प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके जिससे चुनाव देश के लिए एकता एवं ताकत का स्रोत बन सके और इस क्षेत्र में स्थिरता का भी स्रोत बन सके। दोनों पक्ष इस मुद्दे पर अफगानिस्‍तान के साथ अपनी भागीदारी जारी रखने के लिए सहमत हुए।

विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्‍वराज तथा यूएस विदेश मंत्री श्री जॉन केरी ने सभी रूपों में आतंकवाद के लिए अपनी निंदा को दोहराया तथा आतंकियों के सुरक्षित आश्रयों एवं अवसंरचना को नष्‍ट करने तथा अलकायदा एवं लश्‍कर-ए-तायबा सहित आतंकी नेटवर्क को समाप्‍त करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की। दोनों नेताओं ने पाकिस्‍तान से नवंबर, 2008 के मुबंई हमलों के षडयंत्रकारियों को सजा दिलाने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।

दोनों नेताओं ने इराक में वर्तमान स्थिति पर अपनी गहरी चिंता व्‍यक्‍त की जिससे इराक के लोगों की सुरक्षा तथा इराक की भौगोलिक एकता के लिए सीधा खतरा उत्‍पन्‍न हो गया है। उन्‍होंने इस बात की पुष्टि की कि वे इराक के अपने – अपने नागरिकों की सुरक्षा एवं संरक्षा को सर्वोच्‍च प्राथमिकता देते हैं। वे अंतर्राष्‍ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ इराक के लोगों की लड़ाई में तथा इराक की एकता एवं भौगोलिक अखंडता को बनाए रखने के लिए उनके प्रयासों में उनके साथ खड़े हैं क्‍योंकि दोनों नेताओं का यह मानना है कि स्थिर, शांतिपूर्ण एवं अखंड तथा लोकतांत्रिक इराक क्षेत्रीय एवं वैश्विक शांति एवं सुरक्षा के हित में है।

दोनों पक्षों ने गाजा एवं इजरायल में हिंसा में भारी वृद्धि पर अपना सरोकार व्‍यक्‍त किया, जिसकी वजह से असंख्‍य नागरिकों के जीवन का नुकसान हुआ है तथा संपत्ति को क्षति पहुंची है। उन्‍होंने दोनों पक्षों से अधिकतम संयम बरतने का आह्वान किया तथा उम्‍मीद व्‍यक्‍त की कि मध्‍य पूर्व मुद्दे के एक व्‍यापक समाधान की दिशा में शांति वार्ता की जल्‍दी से बहाली और स्‍थायी युद्ध विराम के लिए आवश्‍यक स्थितियों का सृजन किया जाएगा। उन्‍होंने सीरिया में निरंतर हिंसा तथा मानवीय स्थिति के बिगड़ने पर भी अपनी गहरी चिंता व्‍यक्‍त की, जिससे इस क्षेत्र की सुरक्षा एवं स्थिरता पर महत्‍वपूर्ण रूप से प्रभाव पड़ रहा है। दोनों नेताओं ने 2012 की जिनेवा घोषणा के अनुसरण में इस संकट के सीरिया के नेतृत्‍व में व्‍यापक राजनीतिक समाधान के महत्‍व को दोहराया। उन्‍होंने सभी पक्षकारों से अपेक्षित राजनीतिक इच्‍छाशक्ति का प्रदर्शन करने, संयम बरतने और अपने – अपने मतभेदों को दूर करने के लिए साझी जमीन ढूंढ़ने का प्रयास करने के लिए प्रतिबद्धता करने का आग्रह किया।

दोनों नेताओं ने साझेदारी को और आगे बढ़ाने के लिए महत्‍वाकांक्षी योजनाएं विकसित करने का कार्य जारी रखने के लिए दोनों पक्षों के विभागों एवं मंत्रालयों को प्रोत्‍साहित किया। यूएस विदेश मंत्री श्री जॉन केरी ने नई दिल्‍ली में 5वीं सामरिक वार्ता का आयोजन करने के लिए विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्‍वराज का धन्‍यवाद किया। वे 2015 में संयुक्‍त राज्‍य में अगले चक्र का आयोजन पर सहमत हुए।

नई दिल्‍ली,
जुलाई 31, 2014



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