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भारत की परिष्कृत पूर्व की ओर देखो नीति ने गति पकड़ी

अगस्त 07, 2014

मनीष चन्दर द्वारा

पूर्व की ओर देखो। और एशियाई स्वनप्नम का अनुसरण करो। अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ बांधने, नियति को जोड़ने और पूरे क्षेत्र में समृद्धि के एक आर्क का निर्माण करते हुए, भारत की पूर्व की ओर देखो नीति एक उच्च प्रक्षेप पथ पर दौड़ रहा है। भारत की दक्षिण एशिया की कूटनीति को उच्च गति में डालने के बाद, दिल्ली में नई सरकार अब पूर्व की ओर देख रहा है क्योंतकि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज म्यांमार, 10 देशों के दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संघ (आसियान) और 18 देशों के पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (ई ए एस) के अध्य्क्ष, के लिए प्रस्थायन करने वाली हैं। म्यांमार में, मंत्री भारत और आसियान मंत्रिस्तरीय बैठक, आसियान क्षेत्रीय मंच (ए आर एफ) के विदेश मंत्रियों की बैठक और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लेंगी। कुल मिलाकर, ये अलग-अलग किन्तुी आपस में जुड़ी हुई बैठकें भारत की पूर्व की ओर देखो नीति के विभिन्न पहलुओं को दर्शाते हैं और भारत आसियान शिखर सम्मेलन और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नवंबर में म्यांमार की यात्रा के लिए सुर और दिशा स्थापित करेंगे।

परिष्कृत पूर्व की ओर देखो नीति

ये बैठकें विश्वओ की तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं के निवास आसियान और वृहद पूर्व एशिया क्षेत्र के साथ भारत के बढ़ते हुए संबंधों पर प्रकाश डालेंगी। 1990 के दशक के प्रारंभ में शुरू की गई भारत की पूर्व की ओर देखो नीति, जो अभूतपूर्व आर्थिक सुधारों के साथ ही हुआ, ने अब ठोस आर्थिक और रणनीतिक महत्वर हासिल कर ली है। लगभग दो वर्ष पहले, दिसंबर 2012 में, भारत और आसियान के नेता अपने संबंधों में दो निर्धारक घटनाओं का उत्स व मनाने के लिए भारतीय राजधानी में एकत्र हुए: आसियान के साथ भारत की क्षेत्रीय वार्ता भागीदारी की 20वीं वर्षगांठ और उनके वार्षिक शिखर सम्मेेलन की 10वीं वर्षगांठ। भारत और आसियान संबंधों ने अब एक नई उच्च गति चरण में प्रवेश किया है, जिसे विशेषज्ञों ने उचित नाम दिया है "परिष्कृ त पूर्व की ओर देखो'' नीति या "पूर्व की ओर देखो नीति: 3.0"।images/fo1.jpg नई दिल्ली में आसियान भारत स्मारक शिखर सम्मेलन, 2012 में राष्ट्रों /सरकारों के प्रमुख (दिसम्बयर, 2012)

आर्थिक तालमेल

आर्थिक रूप से, भारत और आसियान के संबंधों ने एक न रूकने वाली गति हासिल कर ली है। भारत और आसियान का व्यापार 80 बिलियन अमरीकी डॉलर को पार कर गया है। 2009 में वस्तुकओं में एक मुक्त व्यापार क्षेत्र पर हस्ताक्षर करना एक तरह का व्य्वसाय परिवर्तक था, और अब दोनों पक्ष सेवाओं और निवेश में भारत- आसियान मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने की उम्मीएद कर रहे हैं। संस्थागत ढांचा अपनी जगह पर स्थामपित होने के साथ, अब दोनों पक्षों को भारत और आसियान के व्यापार की मात्रा 2015 तक 100 बिलियन अमरीकी डॉलर तक बढ़ने और 2022 तक दुगुना होने का भरोसा है।

images/fo2.jpg बंदर सेरी बेगावान, ब्रुनेई, दारूस्सलाम में 8वीं पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में राष्ट्रों /सरकारों के प्रमुख (अक्टूबर, 2013)
रणनीतिक गहराई

हाल के वर्षों में, भारत ने इस आर्थिक जीवंत क्षेत्र के साथ संबंधों को प्रेरित करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिसमें जकार्ता में आसियान के एक भारतीय मिशन की स्थापना, और व्यापार और निवेश के लिए एक आसियान- भारत केंद्र की स्थापना करने का निर्णय लेना भी शामिल है। जबकि व्यापार और निवेश भारत और आसियान संबंधों का मूल रहा हैं, दोनों पक्षों ने बेहद जरूरी रणनीतिक गहराई के साथ क्रॉस कटिंग सुरक्षा के मुद्दों और द्विपक्षीय संबंधों को व्या प्तन करने पर सहयोग का नया परिदृश्यि तैयार किया है। दक्षिण चीन सागर में बढ़ते हुए तनाव ने संबंधों के रणनीतिक आयाम में एक तात्कालिकता को जोड़ा है।

भारत और आसियान की विकास करती हुई अर्थव्यवस्थाओं और उनकी बढ़ती हुई ऊर्जा जरूरतों के साथ, एक अन्यो क्षेत्र जो दोनों पक्षों को करीब ला रही है वह समुद्री सुरक्षा का उद्यम और आतंकवाद और समुद्री डकैती का मुकाबला करने में सहयोग बढ़ाना है। भारत ने नेविगेशन की स्वतंत्रता के लिए लगातार आवाज उठाई है जिसे आसियान देशों और पूर्वी एशिया से एक समान रूप से अनुमोदन प्राप्तो हुआ है। इन राष्ट्र- पारीय मुद्दों पर, भारत न केवल आसियान के मंच पर सक्रिय है, बल्कि यह आसियान क्षेत्रीय मंच और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन प्रक्रिया में भी इन मुद्दों पर बहस को आकार देने में एक सक्रिय भागीदार रहा है। भारत 27 सदस्यीय आसियान क्षेत्रीय मंच को सुरक्षा के मुद्दों पर आम सहमति बनाने और एक समावेशी क्षेत्रीय संरचना के निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय मंच के रूप में देखता है। इस वर्ष, आसियान क्षेत्रीय मंच द्वारा इराक में कट्टरपंथी उग्रवाद में वृद्धि, सीरिया संकट, अफगानिस्तान और उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षणों सहित क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों के एक समूह पर चर्चा की उम्मीद है। हालांकि आसियान क्षेत्रीय मंच और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन की अपनी स्वयं की कार्यसूची और कारण हैं, फिर भी नई दिल्ली आसियान और भारत की रणनीतिक भागीदारी को ''क्षेत्र के साथ-साथ विश्व स्तर पर भी शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए एक सहारे'' के रूप में देखता है। भारत ने पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन, आसियान क्षेत्रीय मंच, आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक प्लस और विस्तारित आसियान समुद्री मंच जैसे क्षेत्रीय मंचों में भी आसियान की केन्द्रीयता को रेखांकित किया है।

दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाते हुए, भारत ने 2015 तक एक आसियान समुदाय के निर्माण, एक विकसित एशियाई सदी के अग्रदूत, आसियान एकता के लिए पहल (आई ए आई) और विकास अंतर को कम करने का मजबूती से समर्थन किया है। इन लक्ष्यों के अनुसरण में, भारत के एल एम वी (कंबोडिया, म्यांमार, लाओ पी डी आर और वियतनाम) देशों में उद्यमिता विकास केन्द्र (ई डी सी) और अंग्रेजी भाषा तथा प्रशिक्षण केन्द्रल (सी ई एल टी) के माध्यम से क्षमता निर्माण को मजबूत करने में तत्पार रहा है। भारत ने भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग (आई टी ई सी) कार्यक्रम के तहत आसियान देशों को 1100 से अधिक छात्रवृत्तियां भी प्रदान की है।

केवल संपर्क

जैसे भारत अपने विस्तारित पड़ोसियों के साथ अपने कूटनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को गहरा कर रहा है तो संपर्क राज मंत्र है। भारत ने कई संपर्क परियोजनाओं को शीघ्रता से पूरा करने को प्रबलता से प्रोत्सा हित किया है जो क्षेत्रीय एकीकरण को तीव्र करने और आसियान प्लस संपर्क पर मास्टर प्लान (एम पी ए सी) का समर्थन किया है। नई दिल्ली 2015 तक आसियान- भारत ट्रांजिट परिवहन समझौते के लिए वार्ता के निष्कलर्ष की भी उम्मीभद कर रहा है। भारत- म्यांमार- थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग का तमु- कलेवा- कलेम्योत क्षेत्र अच्छीी प्रगति पर है – 2016 में इस परियोजना के पूरा होने से इस क्षेत्र के साथ भारत के बहुआयामी संबंधों में एक नई स्फूोर्ति का सृजन होगा। भारत ने इस राजमार्ग का लाओस, कंबोडिया और वियतनाम तक विस्ता0र करने, आसियान देशों में बंदरगाहों के साथ इसकी संबद्धता और विशेष आर्थिक क्षेत्रों जैसे मॉडलों के साथ इसके एकीकरण का समर्थन किया है। दक्षिण पूर्व एशिया तक संपर्क को बढ़ाना क्षेत्र की सीमा से लगे हुए भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की आर्थिक ऊर्जा और उद्यम को खोलने के लिए महत्वपूर्ण है।

images/fo3.jpgप्रस्तावित भारत- म्यांमार- थाईलैंड राजमार्ग का मानचित्र

सांस्कृतिक समानता

संपर्क केवल भौगोलिक और भौतिक नहीं है; इस क्षेत्र के साथ भारत के संबंधों को सजीव करने वाले संपकों में इतिहास पर आधारित सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संपर्क तथा एक साझा सभ्यता स्था न है। यह भारत से दक्षिण पूर्व एशियाई देशों को प्रवाहित बौद्ध धर्म है क्योंचकि पूरे क्षेत्र से बौद्ध धर्म के अनुयायी बोधगया, वह पवित्र स्थान जहां भगवान बुद्ध को बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ, में श्रद्धेय तीर्थ स्थांन महाबोधि मंदिर में तीर्थ यात्रा के लिए आते हैं। ज्ञान के प्राचीन पीठ नालंदा विश्वविद्यालय का पुनरुद्धार अब आसियान का एक उत्तसम प्रदर्शन परियोजना बन गया है और यह भारत और दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों का प्रतीक गया है। भारत ने नालंदा विश्वविद्यालय को एक अंतरराष्ट्रीय ज्ञान केन्द्रा बनाने के लिए कई आसियान और पूर्वी एशियाई देशों के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर किया है।

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एशियाई स्वहप्न

इस सांस्कृतिक रस विद्या और रेल, सड़क और समुद्री लिंक के एक जटिल जाल को मजबूत बनाना एशियाई सदी की एक ऊंची उड़ान भरने वाला दृष्टिकोण है जो उत्तर से दक्षिण और पश्चिम से पूर्व में आर्थिक महत्वक के चल रहे बदलाव के साथ तेजी से वास्तविक होता जा रहा है। एशियाई स्वथप्नम के विकास में बहुत कुछ दांव पर लगा हुआ है; अंत में, यह भारत और आसियान क्षेत्र के लगभग 1.8 बिलियन लोगों की बढ़ती हुई उम्मीसदों और आकांक्षाओं के बारे में है जो एक बदलते विश्व में अपनी जगह बनाने के लिए मचल रहे हैं। विश्वं एक प्रवाह में है, और कई समीकरण बदल सकते हैं, किन्तुक भारत और आसियान संबंध न केवल दृढ़ रहेगा बल्कि आने वाले समय में नए महत्वहपूर्ण अवस्थाा पर पहुंचने के लिए भी तैयार दिखता है।

(मनीष चंद, इंडिया राइट्स नेटवर्क, www.indiawrites.org, अंतरराष्ट्रीय मामलों और भारत की कहानी पर केंद्रित एक पोर्टल और ई- जर्नल के मुख्य संपादक हैं)

इस लेख में व्यक्त विचार पूरी तरह से लेखक के हैं।

सन्दर्भ


ब्रुनेई दारुसलाम में 11वें आसियान- भारत शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन वक्तव्य:
आसियान भारत स्मारक शिखर सम्मेलन, नई दिल्ली का विजन वक्तमव्य :
शांति, प्रगति और साझा समृद्धि के लिए आसियान- भारत भागीदारी को लागू करने के लिए कार्य योजना के कार्यान्वयन में प्रगति पर कार्यकारी रिपोर्ट, 11वें आसियान- भारत शिखर
सम्मेलन, बंदर सेरी बेगावान में अध्यक्ष का वक्तव्य, 10 अक्टूबर, 2013:
नई दिल्ली से ब्रूनेई तक: भारत- आसियान संबंधों में तेजी।



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