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भारत और जापान : दो का दम

अगस्त 30, 2014

 
लेखक: मनीष चंद

मैट्रो, बुलेट ट्रेन, बुद्धिज्‍म, व्‍यवसाय, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार। यह सब उस ताकतवर शराब के समान हैं, जिसे एशिया में पुनर्जागरण लाने की साझा कूटनीतिक मंशा ने और अधिक नशीला बना दिया है। टैंगो के लिए दो की जरूरत होती है और इस पर एशिया के दो दैदीप्‍यमान गणतंत्र और अग्रणी अर्थव्‍यवस्‍था, भारत और पाकिस्‍तान कदम ताल कर रहे हैं और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की 30 अगस्‍त से 3 सितंबर तक की जापान यात्रा के दौरान अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए तैयार हैं।

दिल्‍ली-टोकियो 3.0


विश्‍व के सबसे बड़े प्रजातंत्र और एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था के नेता के रूप में नरेंद्र मोदी की प्रथम जापान यात्रा भारत - जापान संबंधों के तीसरे चरण में प्रवेश कराने के लिए तैयार है। 21वीं सदी में वर्ष 2000 में जापान-भारत वैश्‍विक भागीदारी की शुरूआत, संबंधों को वैश्‍विक एवं कूटनीतिक भागीदारी के स्‍तर तक ले जाना विविधतापूर्ण भारत - जापान संबंधों में हाल ही में स्‍थापित मील के पत्‍थरों में से हैं। अब अभिवृद्धि एवं गतिवर्धन का समय आ गया है, और भारत एवं जापान के नेताओं ने बहु-आयामी भारत - जापान संबंधों को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए सही जोड़ी बनाई है।

मोदी का दौरा महत्‍वपूर्ण क्‍यों है

मोदी की जापान यात्रा के कई महत्‍वपूर्ण निशानियां हैं: ऐसा पहली बार होगा जब कोई भारतीय प्रधान मंत्री किसी एशियाई देश में पांच दिन रहेगा, यह एक ऐसा संकेत है जो दोनों देशों के बीच विशेष संबंधों को दर्शाता है। संभवत: ऐसा भी पहली बार हुआ है कि एक ही वर्ष में भारत और जापान दोनों देशों के नेताओं की द्विपक्षीय यात्रा हुई। जापान के प्रधान मंत्री शिन्‍जो अबे इस वर्ष जनवरी में गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्‍य अतिथि थे, और अब नरेंद्र मोदी जापान की यात्रा पर गए हैं।

images/Untitled_314.jpg जापान के प्रधान मंत्री मिस्‍टर शिन्‍जो अबे राजपथ पर गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्‍य अतिथि थे। (26 जनवरी, 2014)मनों का मिलन

चूँकि भारत और जापान के नेताओं की निर्विरोध व्‍यक्‍तिगत पहचान है और दोनों एक दूसरे के गहरे व्‍यक्‍तिगत प्रशंसक है, अत: यह दौरा मनों का मिलन साबित होने वाला है। प्रधान मंत्री मोदी और प्रधान मंत्री अबे दोनों आर्थिक सुधारों में गहरा विश्‍वास रखते हैं और इन्‍हें अपने-अपने देशों में चल रहे राष्‍ट्रीय पुनर्जागरण का शिल्‍पी माना जाता है। प्रधान मंत्री मोदी उन तीन लोगों में से एक हैं जिन्‍हें मिस्‍टर अबे ट्विटर पर फॉलो करते हैं। इनके दौरे से पहले प्रधान मंत्री मोदी ने ट्विटर पर अपनी यात्रा के प्रति उत्‍साह को इस प्रकार शेयर किया था: ‘‘भारत के साथ जापान की मैत्री समय की कसौटी पर कसी हुई है। हम ऐसे दो दैदीप्‍यमान लोकतंत्र हैं जो विश्‍व में शांति और समृद्धि को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं @AbeShinzo’’। भावनात्‍मक स्‍पंदन से भरे संकेत में प्रधानमंत्री ने जापानी भाषा में भी ट्वीट किया, जिसमें उन्‍होंने भारत - जापान सहयोग को एक नई ऊँचाई पर ले जाने की उम्‍मीद जताई।

images/Untitled_312.jpgप्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आगामी जापान यात्रा पर ट्वीटों की एक श्रृंखला के साथ अपने उत्‍साह को साझा किया।गुणधर्म एवं समानता

समान हितों के व्‍यक्‍तिगत गुणधर्म एवं समानता के चलते, सभी की निगाहें टोकियो में भारत और जापान के नेताओं की होने वाली वार्ता पर टिकी होंगी। एक शिखर वार्ता से किसी को क्‍या उम्‍मीद हो सकती है? सर्वप्रथम तो यह वार्ता एशिया की दूसरी और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍थाओं के बीच आगामी कुछ वर्षों में लगभग सभी क्षेत्रों में संवर्धित भागीदारी का मार्ग प्रशस्‍त करेगी। श्री मोदी की यात्रा भारत के राजनयिक-कूटनीतिक परिवेश में जापान के विशेष स्‍थान को रेखांकित करेगी और भारत के राष्‍ट्रीय पुनर्जागरण में जापान की महत्‍वपूर्ण भूमिका की पुन:पुष्‍टि करेगी।

प्रौद्योगिकी एवं नवाचार

दूसरे, इस यात्रा से भारत, जो जापान का सबसे बड़ा एफडीए प्राप्‍तकर्ता है, के अवसंरचना एवं आर्थिक परिदृश्‍य को बदलने में जापान की नायक के समान भूमिका को रेखांकित करेगी। दिल्‍ली–मुम्‍बई औद्योगिक कॉरीडोर तथा पश्‍चिमी फ्रेट कॉरीडोर- जो ऐसी निराली परियोजनाएं हैं जो भारत - जापान भागीदारी के चिरस्‍थायी यादगार होंगी, में जापान ने पहले ही भारी मात्रा में निवेश कर दिया है। आगामी वार्ता में जापान से सहायताप्राप्‍त अन्‍य चेन्‍नई - बेंगलूरू कॉरीडोर के लिए नई गति प्राप्‍त होने की उम्‍मीद है। जापान की प्रौद्योगिकी एवं विशेषज्ञता भी 100 स्‍मार्ट शहरों के निर्माण के भारत सरकार के घोषित मिशन को मूर्त रूप देने में सहायक होगी।

तीसरे, जबकि प्रधान मंत्री मोदी भारत की शासन व्‍यवस्‍था एवं अर्थव्‍यवस्‍था में सुधार करने के लिए प्रौद्योगिकी की भूमिका पर जोर दे रहे हैं, ये वार्ताएं अधुनातन प्रौद्योगिकियों के अंतरण पर ध्‍यान केंद्रित करेंगी। आखिरकार, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार भारत - जापान संबंधों के मुख्‍य स्‍तंभ हैं। जापान की प्रौद्योगिकी एवं इंजीनियरों ने दिल्‍ली मेट्रो को बनाने में मदद की है, और इसने भारत की राजधानी में लाखों लोगों के यात्रा करने के तरीके को बदल दिया है। अब, इस सफलता की कहानी को मुम्‍बई मेट्रो में प्रतिरूपित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। हाई स्‍पीड ट्रेन नेटवर्क- जो अपनी प्रसिद्ध बुलेट ट्रेन शिनकांशेन के साथ जापान की ताकत है, बनाने के भारत के प्रयास को एक बड़ा सहारा मिलेगा। बुलेट ट्रेन समझौते पर एक बार हस्‍ताक्षर होने और मुहर लग जाने के बाद, यह भारत - जापान संबंधों की हाई-स्‍पीड लेन का प्रतीक बन जाएगा।

images/Untitled_313.jpg दिल्‍ली मेट्रो जापान की प्रौद्योगिकी एवं इंजीनियरों की मदद से बनाई गई थी।सिविल परमाणु करार

सिविल परमाणु करार के लिए बातचीत 2010 में शुरू हुई थी। ऐसे संकेत हैं कि बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है। तथापि, ऐसी किसी व्‍यवस्‍था की तकनीकी जटिलता के चलते, कोई भी परिणाम की समय-सीमा तय नहीं कर सकता। परमाणु करार हो जाने के बाद यह भारत - जापान संबंधों में नए युग की शुरूआत करने वाला होगा।

व्‍यापार: सीमा को हटाना

वर्ष 2011 में व्‍यापक आर्थिक भागीदारी करार पर हस्‍ताक्षर होने के बाद भारत - जापान संबंधों ने आर्थिक रूप से धीरे-धीरे ऊँचाई की ओर प्रगति की है। 1000 से अधिक जापानी कंपनियों ने भारत में अपने बेस बनाए हैं, जिससे जापान भारत में चौथा सबसे बड़ा निवेशकर्ता बन गया है। इनमें नामवर ब्रांड सोनी, टोयोटा, हिटाची और मित्‍शुबिशी शामिल हैं। विगत 12 वर्षों में, जापानी कंपनियों ने भारत में 12.66 बिलियन डॉलर का निवेश किया है, जो भारत में कुल प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश का 7 प्रतिशत है। भारत और जापान के बीच इतना कुछ घटित होने के बाद भी यह आश्‍चर्य की बात है कि द्विपक्षीय व्‍यापार केवल 18 बिलियन डॉलर पर ही अटका हुआ है, परंतु जापान पर नजर रखने वाले कहते हैं कि अब इसे बढ़ाने का समय आ गया है। दोनों पक्षों को इस आंकड़े को शीघ्र ही बढ़ा कर दुगुना करने का विश्‍वास है, कुछ विशेषज्ञ कह रहे हैं कि 2020 तक द्विपक्षीय व्‍यापार 100 बिलियन डॉलर तक पहुँच जाएगा।

समभिरूप हित


इस दैदीप्‍यमान संबंध को पुनर्बलित करना कूटनीतिक परिदृश्‍य में हितों के समभिरूपन को बढ़ाने वाला है। पूर्वी एशिया में अशांति के बीच, रक्षा संबंधों को नया शस्‍त्र प्राप्‍त हुआ है, जिसमें दोनों देश 2+2 रक्षा संवाद शुरू कर रहे हैं और इसमें रक्षा एवं विदेश मंत्रालयों के वरिष्‍ठ अधिकारी शामिल होंगे। तटीय सुरक्षा एक महत्‍वपूर्ण क्षेत्र है, जिसमें दोनों देश संयुक्‍त कार्रवाइयां कर रहे हैं, और जापान भारत को इस क्षेत्र में पूर्ण सुरक्षा प्रदान करने वाले देश के रूप में देख रहा है। जापान द्वारा अपने रक्षा निर्यात कानून में छूट देने के ऐतिहासिक निर्णय लिए जाने के साथ, एक निकट भागीदार के रूप में भारत बड़े फायदे में रहता हुआ प्रतीत होता है। टोकियो शीघ्र ही नई दिल्‍ली को एक हाई-टैक महत्‍वाकांक्षी एयरक्राफ्ट बेचने के लिए तैयार होता नजर आ रहा है।

सांस्‍कृतिक सौहार्द्र

राजनयिक सहभागिता के इस उभरते हुए संबंध में, सांस्‍कृतिक एकता की नई सुगंध बिखरी है। जापान में भारत के पूर्व राजदूत रहे आफताब सेठ कहते हैं - ऋषितुल्‍य कवि रवीन्‍द्रनाथ टैगोर, भविष्‍यदृष्‍टा स्‍वामी विवेकानंद और न्‍यायमूर्ति राधाबिनोद पाल, जो युद्ध अपराध न्‍यायाधिकरण में अपराधी न होने का निर्णय सुनाने वाले और असहमत होने वाले अकेले न्‍यायाधीश थे, ने भारत को जापानी कल्‍पना में भारत को जीवित रखा। बुद्धिज्‍म ने भारत - जापान संबंधों को चिरस्‍थायी आध्‍यात्‍मिक जोड़ प्रदान करने का काम किया है, जिसमें हजारों जापानी पर्यटक बिहार के बौद्ध तीर्थ स्‍थलों पर आते हैं। भारतीय फिल्‍में एक मजबूत सांस्‍कृतिक संबंध बनाती हैं। जापान में रजनीकांत बहुत लोकप्रिय हैं और उन्‍हें प्‍यार से ‘ओडोरी महाराजा’ के नाम से पुकारा जाता है। भारत के बड़े शहरों में सुशी और टेम्‍पुरा रेस्‍टोरेंटों के खुलने के साथ ही, भारत में जापानी भोजन के नए दीवाने बन रहे हैं। इसी तरह जापान में भारत के कुजीन और नृत्‍य रूप लोकप्रिय हो रहे हैं।

एशियाई शताब्‍दी


आर्थिक, कूटनीतिक अथवा सांस्‍कृतिक, कोई किसी भी क्षेत्र में देख ले, भारत के लिए जापान का महत्‍व और जापान के लिए भारत महत्‍व समान होता जा रहा है। साथ ही, भारत और जापान, जो संशोधित संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में स्‍थायी सदस्‍यता प्राप्‍त करने के इच्‍छुक हैं, का यह पल्‍लवित होता हुआ संबंध उभरते हुए एशिया के लिए और सौहार्द्रपूर्ण एशियाई शताब्‍दी के स्‍वप्‍न को साकार करने के सामूहिक प्रयासों के लिए एक सुखद समाचार है।

(मनीष चंद अंतरराष्‍ट्रीय मामलों पर केंद्रित एक वेब पोर्टल और ई-पत्रिका इंडिया राइट्स नेटवर्क,www.indiawrites.org तथा इंडिया स्‍टोरी के मुख्‍य संपादक हैं।)

इस लेख में अभिव्‍यक्‍त विचार लेखक के स्‍वयं के विचार हैं।


संदर्भ:
प्रधानमंत्री के जापान के सरकारी दौरे (25-27 जनवरी, 2014) के अवसर पर संयुक्‍त वक्‍तव्‍य
प्रधानमंत्री के जापान के सरकारी दौरे (25-27 जनवरी, 2014) के दौरान हस्‍ताक्षरित दस्‍तावेजों की सूची
प्रधानमंत्री के जापान के दौरे पर संयुक्‍त वक्‍तव्‍य: राजनयिक संबंधों की 60वीं वर्षगांठ के बाद भारत और जापान के बीच कूटनीतिक एवं वैश्‍विक भागीदारी का सशक्‍तीकरण
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