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21वीं सदी को नया स्वरूप देते भारत और अमरीका

सितम्बर 26, 2014

लेखक : मनीष चंद

फास्‍ट-ट्रैक कूटनीति और स्‍मार्ट विकास-केंद्रित कूटनीति नई दिल्‍ली की नई सरकार का दोहरा मंत्र है। दक्षिण एशियाई पड़ौसी देशों के नेताओं की मेजबानी से लेकर चीन और जापान जैसे मुख्‍य एशियाई भागीदारों को अपने साथ जोड़कर, भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी अब ऐसी दिशा-निर्धारक यात्रा पर अमरीका जा रहे हैं जो इसे नई ऊर्जा एवं ताकत के साथ ‘‘21वीं सदी की दिशा-निर्धारक भागीदारी’’ बनाएगी। नजारा, रंग, उच्‍च स्‍तरीय कूटनीति, संस्‍कृति, वाणिज्‍य एवं सृजनात्‍मकता- ये सभी प्रधान मंत्री मोदी की प्रथम अमरीका यात्रा (26-30 सितंबर) में दिखाई देने वाले विविधतापूर्ण तत्‍व हैं जो एक ब्‍लॉकबस्‍टर कूटनीतिक घटना साबित होने वाली है।

images/in__1.jpg(25 सितंबर, 2014 को प्रधान मंत्री अमरीका की अपनी पांच दिवसीय यात्रा आरंभ करते हुए)नए क्षितिज

प्रधान मंत्री की इस यात्रा में अनेक बातें पहली बार होंगी : यह न केवल प्रधान मंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी की पहली अमरीका यात्रा होगी, अपितु यह अमरीका के राष्‍ट्रपति बराक ओबामा के साथ उनकी पहली मुलाकात भी होगी। श्री मोदी न्‍यूयॉर्क शहर के बीचों-बीच सबसे बड़े सामुदायिक स्‍वागत को प्राप्‍त करने वाले पहले विदेशी नेता होंगे - लगभग 20,000 भारतीय अमरीकी उस मेडीसन स्‍क्‍वायर गार्डन में भारतीय नेता को बोलते हुए सुनेंगे, जो अपने विशाल मंच पर सेलेब्रिटी रॉक स्‍टारों और गायकों के प्रदर्शन के लिए बेहतर रूप से जाना जाने वाला प्रसिद्ध स्‍थान है। ऐसा भी पहली बार होगा जब किसी भारतीय नेता के भाषण को टाइम स्‍क्‍वायर, जो मैनहट्टन का ऐसा स्‍थान है जहां प्रतिदिन हजारों लोग आते – जाते हैं, में बड़े पर्दों पर सीधा प्रसारित किया जाएगा। ऐसा भी पहली बार होगा जब अमरीकी सीनेट ने 30 सितंबर के दिन को भारत-अमरीका भागीदारी दिवस के रूप में निर्धारित किया है, और उसी दिन प्रधान मंत्री वाशिंगटन में पूर्ण वार्ता के लिए राष्‍ट्रपति ओबामा से मुलाकात भी करेंगे।

प्रधान मंत्री की यात्रा से पहले, अमरीकी प्रशासन के वरिष्‍ठ अधिकारियों ने मोदी सरकार के प्रथम 100 दिनों के भीतर भारत की यात्रा की है, इनमें अमरीकी सक्रेटरी ऑफ स्‍टेट जॉन कैरी, रक्षा सचिव चुक हैगल, वाणिज्‍य सचिव पैनी प्रिट्जकर और डिप्‍टी सेक्रेटरी ऑफ स्‍टेट विलियम बर्न्‍स शामिल हैं। उन्‍होंने नई दिल्‍ली में व्‍यापक मुद्दों पर बातचीत की, जिससे दुनिया के सबसे पुराने और सबसे अधिक जनसंख्‍या वाले प्रजातंत्रों के नेताओं के बीच शिखर बैठक को सारगर्भित और सफल बनाने के लिए महत्‍वाकांक्षी एजेंडा बनाया जा सका।

images/in__1.jpg(अमरीकी सेक्रेटरी ऑफ स्‍टेट जॉन कैरी 01 अगस्‍त, 2014 को नई दिल्‍ली में प्रधान मंत्री से मुलाकात करते हुए)प्रतिबंधों को हटाना

नेताओं के मस्‍तिष्‍क में कई मुद्दे उठ रहे होंगे, परंतु कोई भी आसानी से यह कह सकता है कि उनका समग्र ध्‍यान भारत-अमरीका संबंधों को नई गति प्रदान करने पर होगा, जो 2008 की लीक से हटकर की गई सिविल न्‍यूक्‍लियर डील के बाद बदल गए थे, जिसने तब तक अलग-थलग रहे प्रजातंत्रों को भागीदार प्रजातंत्र बना दिया था। जबकि न्‍यूक्‍लियर डील, जिसे 1 2 3 करार के नाम से जाना जाता है, का काम पूरा नहीं हुआ है, तथापि, बेहतर भारत-अमरीका संबंधों के हिमायती यह कहते हैं कि अब 4 5 6 का समय आ गया है, जो संबंधों पर से प्रतिबंध हटाने की समान इच्‍छा शक्‍ति को प्रदर्शित करता है और जिसे 21वीं सदी की समावेशी और बहुलतावादी वैश्‍विक व्‍यवस्‍था को आकार देने के चल रहे प्रयास के केंद्र बिंदु के रूप में देखा जाता है।

व्‍यावसायिक कूटनीति

एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था के प्रधानमंत्री के व्‍यवसाय-हितैषी होने के साथ, व्‍यवसाय पर, और दोनों पक्षों के लिए लाभकारी अवसर पैदा करने के लिए सह-समृद्धि के दायरे को व्‍यापक बनाने पर ध्‍यान दिया जाएगा। यह प्रधान मंत्री के शीर्षस्‍थ अमरीकी मुख्‍य कार्यकारी अधिकारियों के साथ चर्चा में, विशेषत: न्‍यूयॉर्क और वाशिंगटन में, परिलक्षित होगा। इन मुलाकातों में, विगत तीन दशकों में सबसे बड़े संसदीय बहुमत प्राप्‍त करने वाले भारतीय नेता से अपेक्षा की जा रही है कि वे अमरीकी निवेशों को आकर्षित करने तथा भारत को एक विनिर्माण पावरहाउस बनाने एवं 100 स्‍मार्ट शहरों का निर्माण करने के अपने स्‍वप्‍न को साकार करने के लिए अमरीकी पूँजी एवं विशेषज्ञता की भागीदारी प्राप्‍त करने का मजबूत आधार तैयार करेंगे। वैश्‍विक निवेशक समुदाय को सकारात्‍मक संकेत देते हुए, बीमा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा को पहले ही 49 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है। रक्षा क्षेत्र को भी विदेशी निवेश के लिए खोल दिया गया है। बदले में, भारत अमरीकी सरकार से जीवनोपयोगी जनरिक औषधियों के लिए आईपीआर क्षेत्र को लागू करने तथा भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी व्‍यावसायिकों के वीजा शुल्‍क के बारे में भारत के हितों और चिंताओं के अनुसार कुछ उदारता दिखाने की अपेक्षा कर रहा है।

आर्थिक परिदृश्‍य में संभावनाएं असीम हैं, क्‍योंकि नई सरकार आर्थिक सुधारों की अपनी कही गई बात पर अमल कर रही है। अमरीका भारत का सबसे बड़ा व्‍यापारिक भागीदार है। दोनों पक्ष अब अपने द्विपक्षीय व्‍यापार को पांच गुणा बढ़ा कर 500 बिलियन डॉलर तक करने के बारे में सोच रहे हैं। व्‍यापारिक दृष्‍टि से भारत का पलड़ा भारी है। अमरीका पहले ही भारत में प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश का पांचवां सबसे बड़ा स्रोत है, जिसमें अप्रैल 2000 से मार्च 2014 तक अमरीका की ओर से हुआ संचयी एफडीआई प्रवाह लगभग 11.92 बिलियन डॉलर का रहा है। भारतीय कंपनियों ने पिछले कुछ वर्षों में अमरीका में 17 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया है।

रक्षा संबंधों में सुधार

रक्षा संबंधों में सुधार आ रहा है। सितंबर, 2013 में दोनों पक्षों ने एक संयुक्‍त रक्षा सहयोग घोषणा पर हस्‍ताक्षर किए थे, जिसमें प्रौद्योगिकी हस्‍तांतरण नीतियों को सरल बना कर तथा रक्षा प्रणालियों का मिलकर विकास एवं मिलकर उत्‍पादन करने की संभावनाएं तलाश करने की परिकल्‍पना की गई है। दोनों पक्ष आगामी दौरे के दौरान अपने रक्षा संरचना करारों को नवीकृत करने की उम्‍मीद कर रहे हैं।

images/in__1.jpg(अमरीकी रक्षा सचिव चुक हैगल 08 अगस्‍त, 2014 को नई दिल्‍ली में प्रधान मंत्री से मुलाकात करते हुए)आतंकवाद से लड़ने में सहयोग

अफगानिस्‍तान में हो रहे बदलाव तथा ईराक एवं मध्‍य-पूर्व में आतंकवाद के बढ़ते खतरों की पृष्‍ठभूमि में, आतंकवाद से लड़ने और सुरक्षा सहयोग को आगामी वार्ताओं में बल प्राप्‍त होने की उम्‍मीद है। यह श्री मोदी की ग्राउण्‍ड जीरो पर सांकेतिक यात्रा से प्रदर्शित होगा, जो न्‍यूयॉर्क के वर्ल्‍ड ट्रेड सेंटर की वह जगह है जिसे 11 सितंबर, 2001 को बर्बरतापूर्ण आतंकी हमलों का निशाना बनाया गया था और जहां नव-उद्घाटित 9/11 संग्रहालय और स्‍मारक है।

वैश्‍विक भागीदारी

विविध क्षेत्रों एवं बढ़ते और समभिरूपित हो रहे हितों से संबंधित अफ्रीका से अफगानिस्‍तान तक विश्‍व भर में फैले 36 द्विपक्षीय वार्ता कार्यतंत्रों के साथ, यह बहुमुखी भारत-अमरीका संबंधों का यह एक टर्निंग प्‍वाइंट है।

दुनियाभर में फैल रही अस्‍थिरता के दायरे के साथ, हर कोई अफगानिस्‍तान, सीरिया, ईराक और मध्‍य-पूर्व की छिन्‍न-भिन्‍न स्‍थिति सहित व्‍यापक क्षेत्रीय एवं वैश्‍विक ज्‍वलंत मुद्दों पर केंद्रित चर्चा किए जाने की उम्‍मीद कर सकता है। क्षेत्रीय वैश्‍विक मुद्दों पर यह पल्‍लवित हो रहा सहयोग भारत-अमरीका भागीदारी को वास्‍तविक रूप में वैश्‍विक और कूटनीतिक बनाता है। सीएनएन के फरीद जकीरा को दिए गए साक्षात्‍कार में श्री मोदी ने भारत-अमरीका सहयोग के वैश्‍विक स्‍वरूप को रेखांकित किया है।

images/in__1.jpg(विदेश मंत्री और अमरीका के विदेश मंत्री जॉन केरी 31 जुलाई, 2014 को नई दिल्‍ली में 5वें भारत-अमरीका कूटनीतिक संवाद की सह-अध्‍यक्षता करते हुए)‘‘भारत और अमरीका के बीच संबंधों को केवल दिल्‍ली और वाशिंगटन की सीमाओं में नहीं बांधा जाना चाहिए। इनकी परिधि बहुत अधिक व्‍यापक है। अच्‍छी बात यह है कि दिल्‍ली और वाशिंगटन दोनों का मूड सद्भावनापूर्ण और समझदारी भरा है। दोनों पक्षों ने इसमें भूमिका निभाई है।’’ इस बात को रेखांकित करते हुए कि भारत और अमरीका इतिहास और संस्‍कृति से एक साथ जुड़े हुए हैं, प्रधान मंत्री ने विश्‍वास जताया कि ‘‘ये संबंध और अधिक घनिष्‍ठ होंगे।’’

भविष्‍य का मार्ग प्रशस्‍त करना

अतएव, दोनों पक्षों की ओर से मजबूत राजनीतिक इच्‍छाशक्‍ति प्रदर्शित की गई है, जो इस महत्‍वपूर्ण संबंध को कारगर बनाने और आने वाले वर्षों के लिए ऊर्जा एवं सक्रियता प्राप्‍त करने के लिए महत्‍वपूर्ण है। अगणित तरीकों से इंडिया स्‍टोरी और अमेरिकन ड्रीम के व्‍याख्‍याकार सहयोजित हो रहे हैं। विभिन्‍न अमरीकी विश्‍वविद्यालयों में पढ़ रहे 100,000 से भी अधिक भारतीय छात्र और अमरीका में रह रहा 3 मिलियन का भारतीय समुदाय भारत और अमरीका के स्‍वप्‍नों के एकाकार होने का उदाहरण हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि जहां भारत-अमरीका संबंध का आंकड़ा लोगों के आपसी मेल-मिलाप के पैमाने पर अद्वितीय है, वहीं उसमें शिक्षा, अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में संबंध फल-फूल रहे हैं। और इन क्षेत्रों में भविष्‍य में काम करने की आवश्‍यकता है।

ट्रेडीशन, टैलेंट, टूरिज्‍म, ट्रेड और टैक्‍नोलॉजी - ये 5 ‘टी’ हैं जो प्रधान मंत्री ने ब्रांड इंडिया को नई ऊर्जा प्रदान करने की दूर की सोच के रूप में बताए थे और इंडिया स्‍टोरी अमरीका के साथ घनिष्‍ठ भागीदारी से बल प्रदान कर सकती है। अमरीका भी भारत को एक बढ़ रहे बाजार, एक नवाचार केंद्र और एक उत्‍थानशील एशियाई शक्‍ति के रूप में देख रहा है। अब बड़ा सोचने और भारत एवं अमरीका की 1.5 बिलियन जनता के लिए नई संभावनाएं तलाश करने वाली 21वीं शताब्‍दी की दिशा-निर्धारक भागीदारी करने का समय आ गया है।

(मनीष चंद अंतरराष्‍ट्रीय मामलों पर केंद्रित एक वेब पोर्टल और ई-पत्रिका इंडिया राइट्स नेटवर्कwww.indiawrites.org,तथा इंडिया स्‍टोरी के मुख्‍य संपादक हैं।).,

इस लेख में अभिव्‍यक्‍त विचार लेखक के स्‍वयं के विचार हैं।

संदर्भ :

वाशिंगटन डीसी में राष्‍ट्रपति बराक ओबामा के साथ प्रधान मंत्री की शिखर बैठक पर संयुक्‍त वक्‍तव्‍य (27 सितम्‍बर, 2013)

चौथे भारत-अमरीका कूटनीतिक संवाद पर संयुक्‍त वक्‍तव्‍य

‘‘18 जुलाई, 2005 को भारत-अमरीका संयुक्‍त वक्‍तव्‍य- एक वर्ष बाद’’

भारत और अमरीका : दूरदृष्‍टि

भारत-अमरीका संबंधों के नवीकरण की भावना : ललित मानसिंह

भारत-अमरीका संबंधों का ‘नया सामान्‍य’ भविष्‍य

अमरीका-भारत शैक्षिक संबंध : एक नवाचार-प्रेरित कार्यबल का निर्माण

 



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