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दिल्‍ली-कोलंबो संबंध : नई सीमाएं

मार्च 12, 2015

लेखक : मनीष चंद

नई शुरुआत, नई उम्मी्दें और नए क्षितिज

ये अभिव्यंक्तियां कुछ लोगों को शब्दारडंबरपूर्ण अतिशयोक्ति लगे लेकिन ये भारत और श्रीलंका के बीच के संबंधों के वर्तमान परिवर्तनकारी क्षण की मूल भावना के सारांश को प्रस्तुयत करते हैं जिसने इस साल जनवरी में कोलंबो में नई सरकार के गठन के बाद नए जोश और ऊर्जा का संचार हुआ है।

(प्रधानमंत्री नई दिल्लीर में 16 फरवरी, 2015 को श्रीलंका के डेमोक्रेटिक सोशलिस्टस रिपब्लिक के राष्ट्रधपति मैत्रीपाल सिरीसेना से मिलते हुए)

चार दौरे, नए क्षितिज

बमुश्किल तीन महीनों में, उच्च स्त6र की चार मुलाकातें हुई होंगी। इसकी शुरुआत श्रीलंका के विदेश मंत्री के भारत दौरे से हुई। उसके बाद राष्ट्र पति मैत्रीपाल सिरीसेना का ने 15-18 फरवरी तक नई दिल्ली का दौरा किया। अपने पहले विदेश दौरे में राष्ट्रपपति सिरीसेना द्वारा भारत का विकल्पर चुनने से यह स्प ष्टर संदेश गया कि भारत - श्रीलंका संबंधों ने रफ्तार पकड़ ली है, और यह आगे आने वाले दिनों में और अधिक सामरिक प्रभाव और आर्थिक हैसियत हासिल करेगा।श्रीसिरीसेना के विजिट के बाद भारत के विदेश मंत्री सुषमा स्व।राज ने द्वीपीय देश का दौरा किया। श्रीमती स्वीराज द्वारा व्यातपक मुद्दों पर की गई बातचीत ने ही प्रधान मंत्री नरेन्द्रि मोदी के 13-14 मार्च के श्रीलंका दौरे की नींव रखी। श्री मोदी के विजिट की प्रतीकात्म कता और महत्व इस बात से स्प्ष्टऔ हो जाता है कि यह 1987 में राजीव गांधी के दौरे के बाद द्वीपीय देश में किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला पूर्णतया विशिष्ट द्विपक्षीय विजिट होगा।

(विदेश मंत्री श्रीलंका के विदेश मंत्री मंगला समरवीरा से कोलंबो में 07 मार्च, 2015 को मिलते हुए)

मोदी का दौरा : एजेंडा में क्यां है ?

इस क्षेत्र के सभी लोगों का ध्यांन श्री मोदी और श्री सिरीसेना के बीच के बैठक पर होगा क्योंोकि वे व्या्पार एवं निवेश, विकासपरक सहयोग, रक्षा सहयोग और द्वीपीय राष्ट्र के पुनर्निर्माण सहित विविध क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों में बहुआयामी स्तसर पर तेजी लाने के लिए एक महत्वाीकांक्षी रोडमैप पेश करेंगे।

वार्ताओं के श्रीलंका में राजनीतिक सुलह प्रक्रिया और देश के संविधान के फ्रेमवर्क के भीतर श्रीलंकाई तमिलों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए एक स्थारयी समाधान खोजने पर केन्द्रित रहने की उम्मींद है। यह मुद्दा उस समय जोर पकड़ेगा जब प्रधानमंत्री मोदी जाफना, जो श्रीलंकाई तमिलों की बहुत बड़ी आबादी का स्थामन है, जाएंगे और कोलंबो में तमिल नेशनल एलायंस के नेताओं और प्रतिनिधियों तथा अलग-अलग समूहों के अन्यग राजनीतिक नेताओं से मिलेंगे। भारत के विदेश सचिव एस. जयशंकर ने उन व्यामपक विषयों, जो प्रधानमंत्री के भारत के प्रमुख द्वीपीय पड़ोसी के यहां ऐतिहासिक विजिट का निर्धारण करेंगे, की रूपरेखा बताते हुए कहा, ''राजनीतिक दृष्टि से मैं यह मानता हूं कि हम निश्चित रूप में सुलह प्रक्रिया को बढ़ावा देना और प्रोत्सामहित करना चाहते हैं, लोकतंत्र और सुधार का समर्थन करना चाहते हैं, और हम पर्यटन, दोनों देशों के बीच यात्रा के सहित लोगो से लोगों के बीच के सपंर्क का विस्ताार करना चाहते हैं1''

मछुआरों का मुद्दा एजेंडा के मुख्य् मुद्दों में शामिल होना चाहिए क्यों कि इसका दोनों ही देशों में भारी राजनीतिक प्रभाव पड़ता है। दोनों ही पक्ष इस मुद्दे का रचनात्महक और मानवीय तरीके से निपटारा करना चाहेंगे। इस दौरे का मुख्यं आकर्षण प्रधानमंत्री मोदी का श्रीलंकाई संसद को संबोधन होगा जो भारत - श्रीलंका संबंधों के लिए एक दीर्घकालिक संकल्पमना और हिंद महासागर को शांति एवं अवसर के एक जोन के रूप में देखने के नई दिल्ली की ऊंची संकल्पलना को उड़ान देगा।

(थलाईमन्नारर पीयर स्टेदशन)
विकासपरक कूटनीति

विकासपरक सहयोग भारत - श्रीलंका की बढ़ती भागीदारी के प्रमुख स्तं भ का निर्माण करता है, और इसमें प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान उल्लेेखनीय उभार देखने को मिलेगा। उल्लेेखनीय है कि जाफना में किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला दौरा होगा, और सुसंगत बात यह है कि इसका फोकस भारत की विकासपरक कूटनीति के परिवर्तनकारी पहलू पर होगा। भारत ने श्रीलंका में 50,000 मकान बनाने का वचन दिया था - 42,000 मकान नार्दर्न प्रांत में, 4,000 मकान पूर्वी प्रांत में, और 4,000 मकान सेंट्रल और यूवा प्रांतों में। यह तीव्र गति की विकासपरक कूटनीति है क्यों कि लगभग तीन वर्षों के अंतराल में भारत 27,000 मकान बनाने में सक्षम रहा है। प्रधानमंत्री इन 27,000 मकानों में से कुछ मकानों को, नागरिक युद्ध में विस्थानपित हुए कुछ लोगों को औपचारिक रूप से सौंपेंगे। इस पहल से विस्थांपित हुए लोगों को अपनी जिंदगी की नई सिरे से शुरुआत होने की उम्मीपद जगी है। मीडिया के चकाचौंध और सुर्खियों से दूर भारत की विकास सहायता और साफ्ट लोन ने ऐसे लोगों में पुनरुत्थाधन की नई आशा का संचार हुआ है जो अभी ज्याफदा दिन नहीं बीते, उम्मीैद और आशा से वंचित थे।

भारत का 800 मिलियन डालर का अधिकतर ऋण रेलवे क्षेत्र और कनेक्टिविटी परियोजनाओं में बदलाव लाने में और नवीकरण में लगाए गए हैं और जिसके परिणाम हम सभी लोग देख सकते हैं। दक्षिणी लाइन, जो कालूतरा – गाले - मतार तक सुनामी से तहस-नहस हो गया था, अब बहाल और पुनर्निर्मित कर दिया गया है। इसी तरह, उत्तगरी लाइन ओमानथाई से कांकेसंथुराई तक, उत्तारी-पश्चिमी लाइन तलाईमन्नायर से मेडावच्छिया तक, केकेएस बंदरगाह और पलाई रनवे भारत की, पड़ोसी देश, जो अपनी नियति नए सिरे से लिख रहा है, के पुनरुत्थारन को उत्प्रेओरित करने के लिए अपनी ओर से कुछ करने की अथक प्रतिबद्धता के शानदार उदाहरण हैं। जब प्रधानमंत्री मोदी तलाईमन्नानर पीयर रेलवे स्टेकशन का उद्घाटन करने वाली पट्टिका का अनावरण करेंगे तो लोग चारों तरफ हर किसी के मुस्कटराते चेहरे की उम्मी द कर सकते हैं।

आर्थिक कूटनीति
आर्थिक दृष्टि से दोनों देश अपने 5 बिलियन डालर से अधिक के द्विपक्षीय व्यांपार को और आगे ले जाने की उम्मी द कर रहे हैं। यह उम्मीबद की जाती है कि भारत कुछ ऐसे प्रोत्सााहनों की घोषणा करेगा जिनसे श्री लंका अपने निर्यातों को बढ़ाने में सक्षम हो पाएगा। 2002 में हस्तााक्षरित किया गया एफटीए एक तरह से शानदार बदलाव लाने वाला था। भारत अब 800 मिलियन अमरीकी डालर से अधिक के समग्र निवेश के साथ श्रीलंका के चार सबसे बड़े निवेशकों में से एक है। 2013 में श्रीलंका में भारतीय निवेश 50.52 मिलियन अमरीकी डालर रहा।

न्यूल इनर्जी: इनर्जी सिक्यू2रिटी भारत - श्रीलंका के विकसित होते रिश्तोंत, जो अब नए क्षेत्रों में प्रवेश कर रहा है, का एक प्रमुख पहलू के रूप में उभर कर सामने आया है। दोनों देशों ने फरवरी में नई दिल्ली में राष्ट्रपपति सिरीसेना के विजिट के दौरान सिविल न्यूदक्लियर इनर्जी के शांतिपूर्ण इस्तेयमालों में सहयोग करने की एक संधि पर हस्तारक्षर किया। श्री मोदी के विजिट से इस रिश्तेय को और आगे ले जाने में मदद मिलेगी। इस दृष्टि से त्रिंकोमाली के निकट सामपुर में भारत द्वारा एक थर्मल पावर संयंत्र के निर्माण में हुई अत्यटधिक प्रगति देखी जा सकती है।

सांस्कृ तिक कूटनीति : लोक शक्ति सामरिक एवं आर्थिक फलकों के अलावा प्रधानमंत्री का दौरा उन संस्कृेतिपरक और सम्यटतापरक बंधनों को सुसंगत करेगा जो दोनों भ्रातृ पड़ोसियों को जोड़ता है। श्री मोदी जब प्राचीन विरासत सिटी, अनुराधापुरा का दौरा करेंगे और कोलंबों में महाबोधी सोसायटी में प्रार्थना करेंगे तो बौद्ध आध्याेत्मिक संबंधों की बात सामने आएगी। वे जाफना कल्चसर सेंटर का भी उद्घाटन करेंगे जो दो राष्ट्रों के बीच सांस्कृधतिक सहक्रिया को रेखांकित करेगा। लोगो से लोगों के बंधन भारत - श्रीलंका संबंधों को गतिमान रखते हैं। तथ्य इसकी बयानी करते हैं : 118 साप्तानहिक फ्लाइट्स हैं। हम दरअसल श्रीलंका में पर्यटकों के सबसे बड़े स्रोत हैं। लगभग 200,000 भारतीय हरेक साल श्री लंका विजिट करते हैं। और लगभग 260,000 श्रीलंकाई प्रत्येकक वर्ष भारत विजिट करते हैं।

भावी पथ

घरों, विद्यालयों और अस्पगतालों से लेकर सड़कों, हवाई अड्डों, और बंदरगाहों का निर्माण करने तक, भारत पड़ोसी देश के पुनर्निर्माण और पुनरुत्थाोन में अत्य,न्त सक्रियता से जुड़ा हुआ है।

भूगोल, इतिहास, और संस्कृंति। बिजनेस, बौद्ध धर्म और रणनीति। भारत और श्रीलंका के बीच के संबंध, विविध तत्वों को मिश्रित करते हुए, और भारत और श्री लंका के लोगों के बीच मित्रता और भाई सदृश समानुभूति द्वारा उत्प्रे रित, सही मायनों में बहुविध हैं।

द्विपक्षीय व्याूपार के अभ्युंत्था न से फोकस दिल और दिमाग के गहरे संबंधों को नया करने पर होगा। दोनों देशों द्वारा एक दूसरे के तरफ संभावनाओं की नजर से देखने के साथ भारत - श्रीलंका संबंधों ने रफ्तार वाले दौर में प्रवेश कर लिया है। कोलंबो की नई सरकार के, इंडिया स्टोेरी के अफसाने को द्वीपीय देश के निरंतर सामने आते पुनरुत्थालन के साथ जोड़ने के प्रति उत्सा्हित होने के साथ भारत - श्रीलंका संबंधों के लिए दरअसल आकाश की सीमा ही बची है।

इस समय की कसौटी पर खरे उतरे रिश्ते में नई संभावनाओं के खुलने की उम्मीटद करिए।

(मनीष चंद अंतराष्ट्री य मामलों और इंडिया स्टोंरी पर संकेन्द्रित ई-मैगजीन जर्नल, इंडिया राइट्स नेटवर्क, www.indiawrites.org, के प्रमुख संपादक हैं)


संदर्भ

सेशल्स , मारीशस और श्री लंका में प्रधानमंत्री के आगाम दौरे (9 मार्च, 2015) पर विदेश सचिव और सचिव (पश्चिम) द्वारा मीडिया ब्रीफ्रिक का ट्रांसस्किप्टे
सेशल्स , मॉरीशस और श्रीलंका के लिए अपने प्रस्थािन से पहले प्रधानमंत्री का बयान
श्रीलंका के राष्ट्र.पति के भारत के राजकीय विजिट के दौरान हस्ता क्षरित करारों/समझौता ज्ञापनों की सूची (16 फरवरी, 2015)
श्रीलंका के डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट2 रिपब्लिक के राष्ट्रापति के राजकीय विजिट के दौरान प्रधानमंत्री का मीडिया बयान (16 फरवरी, 2015)
श्रीलंका के विदेश मंत्री द्वारा कोलंबो में दिए गए डिनर में विदेश मंत्री की टिप्पयणियां



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