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तीसरी भारत – अफ्रीका मंच शिखर बैठक के लिए संपादक मंच में अफ्रीका के पत्रकारों के साथ प्रधानमंत्री की बातचीत

अक्तूबर 23, 2015

सरकारी प्रवक्‍ता (श्री विकास स्‍वरूप) : दोस्‍तो नमस्‍कार। ह‍मारे लिए यह बड़े गर्व की बात है कि भारत के प्रधानमंत्री आप सभी से मिलने के लिए ... (अश्रव्‍य) ...

मैं प्रधानमंत्री के बारे में केवल कुछ शब्‍द कहना चाहूँगा यदि आपमें से कोई ... (अश्रव्‍य) ... वास्‍तव में उनको किसी परिचय की जरूरत नहीं है। गुजरात के एक छोटे से शहर वाडनगर से 7, रेस कोर्स रोड की उल्‍लेखनीय यात्रा, जो प्रधानमंत्री जी का सरकारी निवास है था जहां आज आप सभी मौजूद हैं।

वह ऐसे पहले नेता है जिनको पिछले 30 वर्षों में स्‍पष्‍ट एवं सहज बहुमत के साथ चुना गया है तथा प्रशासक के रूप में उनका पिछला रिकार्ड जिन्‍होंने विकास को नीतियों के केंद्र में रखा है, अतुलनीय है। उन्‍होंने सबका साथ, सबका विकास का जो नारा दिया है उसने एक नई क्रांति को प्रेरित किया है जिसकी वजह से भारत विश्‍व में सबसे तेजी से विकास करने वाली अर्थव्‍यवस्‍थाओं में से एक बन गया है। वह ऐसे व्‍यक्ति हैं जो इस भारत – अफ्रीका मंच शिखर बैठक तथा ... (अश्रव्‍य) ... के लिए जिम्‍मेदार हैं।

इसी के साथ अब मैं प्रधानमंत्री से निवेदन करूँगा कि आप अपनी बात शुरू करें।

भारत के प्रधानमंत्री (श्री नरेंद्र मोदी) : आप सभी का बहुत – बहुत स्‍वागत है। संभवत: आपमें से कुछ लोगों को पहले भारत का दौरा करने का अवसर मिला हो और आपमें से कुछ लोगों के लिए संभवत: यह पहला अवसर है जब आप भारत आए हैं। मुझे उम्‍मीद है कि यहां पर आपके आराम का अच्‍छी तरह ध्‍यान रखा जा रहा होगा। मैं जानता हूँ कि यह एक आधिकारिक कार्यक्रम है परंतु यदि आपका इस बारे में कुछ सुझाव हो कि आपके लिए जो कार्यक्रम स्‍थापित किया गया है उसके अलावा यहां आप कुछ चाहते हैं, तो उसकी व्‍यवस्‍था की जा सकती है। मैं यह भी चाहता हूँ कि यहां की आपकी यात्रा न केवल भारत – अफ्रीका मंच शिखर बैठक के संदर्भ में महत्‍वपूर्ण हो, अपितु यह तथ्‍य कि यह भारत की यात्रा है, यह महत्‍वपूर्ण है और मेरी सरकार की ओर से पूरे प्रयास किए जाएंगे।

मेरा यह मानना है कि यह भारत – अफ्रीका मंच शिखर बैठक अनेक दृष्टि से बहुत महत्‍वपूर्ण है। निश्चित रूप से, भारत के लिए यह देखते हुए यह शिखर बैठक महत्‍वपूर्ण है कि हम मेजबान देश हैं परंतु यह पहली शिखर बैठक है जिसमें अफ्रीका के सभी 54 देशों को आमंत्रित किया गया है तथा सभी 54 देश इसमें भाग ले रहे हैं। इस दृष्टि से भारत –अफ्रीका मंच शिखर बैठक अपनी तरह का सबसे बड़ा कार्यक्रम तथा इस स्‍तर पर साझेदारी है।

हमें अब तक जो सूचना प्राप्‍त हुई है उसके अनुसार राष्‍ट्राध्‍यक्ष, शासनाध्‍यक्ष के स्‍तर पर 40 देशों का प्रतिनिधित्‍व होगा तथा शेष देशों का प्रतिनिधित्‍व वरिष्‍ठ मंत्रियों के स्‍तर पर होगा। इस बार भारत – अफ्रीका मंच शिखर बैठक के साथ मिलकर व्‍यापार मंत्रियों का सम्‍मेलन भी आयोजित किया जा रहा है क्‍योंकि हम चाहते हैं कि आने वाले दिनों और महीनों और वर्षों में भारत और अफ्रीका के बीच आर्थिक संबंध और सुदृढ़ होने चाहिए।

इससे पहले 2008 में और 2011 में भारत – अफ्रीका मंच शिखर बैठक की दो बैठकें हो चुकी हैं और अब यह तीसरी भारत – अफ्रीका मंच शिखर बैठक हो रही है। पिछली दो शिखर बैठकें बांजुल फार्मूला के आधार पर आयोजित की गई थीं तथा उस दृष्टि से बहुत सीमित देश आए थे और भाग लिए थे। परंतु इस बार, वास्‍तव में हमने इस फार्मूला से बाहर निकलने और यह सुनिश्चित करने का निर्णय लिया कि अफ्रीका के सभी देशों से भागीदारी होनी चाहिए।

मेरी समझ से इससे भारत और अफ्रीका के बीच संबंध एक नई ऊंचाई पर पहुंचेंगे। मेरी समझ से यह साझेदारी तथा यह समानता जो सभी देशों को प्रदान की जा रही है। यह हमारी ओर से पहल है तथा मेरी समझ से इसी वजह से यह शिखर बैठक पिछली दो शिखर बैठकों से अलग है। विभिन्‍न स्‍तरों पर, शीर्ष स्‍तर पर बैठकें होंगी। मेरी समझ से यह सभी के साथ साझेदारी है जिससे अफ्रीका के हर कोने में एक नई ताजगी आने वाली है। यह नई ताजगी केवल अफ्रीका के लिए ही नहीं है, अपितु भारत के लिए भी है जिसे यह शिखर बैठक हमारे संबंधों में एक नई ताजगी लाने जा रही है।

मुझे बताया गया है कि आप सभी का यहां पर एक सप्‍ताह का कार्यक्रम है जिसके दौरान आपको देश के विभिन्‍न भागों में ले जाया जाएगा तथा आप स्‍वयं प्रगति और विकास देखेंगे। परंतु आपके अलावा ऐसे 400 पत्रकार हैं जो इस कार्यक्रम को कवर करने के लिए अफ्रीका से आ रहे हैं तथा वे अपने खर्च पर तथा अपने स्‍वयं के संसाधनों पर आ रहे हैं। मेरी समझ से इससे पता चलता है कि इस शिखर बैठक को वे कितना महत्‍व दे रहे हैं। हर किसी से मेरी जो बातचीत होती रहती है उससे पता चला है कि वास्‍तव में यह शिखर बैठक पूरी दुनिया का ध्‍यान आकृष्‍ट कर रही है तथा वास्‍तव में लोग इसे बहुत महत्‍व की नजरों से देख रहे हैं तथा मैं इसे बहुत अच्‍छे संकेत के रूप में देखता हूँ।

भारत और अफ्रीका के देशों के बीच संबंध, ये संबंध तथा ये रिश्‍ते जो हमारे बीच हैं, केवल राजनीतिक एवं आर्थिक नहीं हैं अपितु हमारी बहुत समृद्ध सांस्‍कृतिक परंपरा भी है। ऐसा कहा जाता है कि लाखों साल पहले वास्‍तव में पृथ्‍वी के दो भाग एक ही थे तथा काफी समय बाद वे भूमि के दो अलग – अलग खंड बने, एक खंड एशिया था तथा दूसरा खंड अफ्रीका था; और हमारा एक महासागर है जो हमें विभाजित करता है। वास्‍तव में, भारत का पश्चिमी तट तथा अफ्रीका का पूर्वी तट समुद्र द्वारा जुड़ा हुआ है।

मैं भारत के पश्चिमी तट से गुजरात राज्‍य हूँ। वास्‍तव में गुजरातियों ने ही शुरू में अफ्रीका के साथ व्‍यापार एवं वाणिज्‍य तथा समुद्री संबंधों की शुरूआत की। आज भी 2,70,000 भारतीय अफ्रीका में रहते हैं जिनमें से कई गुजराती हैं। वास्‍तव में, मेरे भी अफ्रीका के साथ न केवल उसी समय लिंक थे जब मैं गुजरात का मुख्‍यमंत्री था, अपितु उससे पहले भी अफ्रीका के साथ मेरे लिंक थे। अफ्रीका महाद्वीप के साथ मेरा संबंध हमेशा से रहा है तथा जब भी अतिथि आए, तो उन्‍होंने हमेशा मुझसे मुलाकात की। अफ्रीका की विभिन्‍न हस्तियों के साथ हमेशा मेरे संबंध बहुत अच्‍छे रहे हैं। इस प्रकार, वैयक्तिक दृष्टि से मैं इस क्षेत्र के हमेशा बहुत करीब रहा हूँ।

वास्‍तव में, अफ्रीका और भारत के बीच अनेक समानताएं हैं तथा भारत और अफ्रीका दोनों मिलकर विश्‍व की एक तिहाई आबादी का प्रतिनिधित्‍व करते हैं। वास्‍तव में भारत की आबादी संपूर्ण अफ्रीका महाद्वीप की आबादी जितनी है। वास्‍तव में, अफ्रीका पूरी दुनिया में सबसे युवा क्षेत्र का प्रतिनिधित्‍व करता है तथा भारत भी युवाओं का ही देश है। संभवत: जब हम आज के विश्‍व को देखते हैं, तो ये ऐसे मात्र दो स्‍थान हैं जहां 65 प्रतिशत आबादी की आयु 35 साल से कम है तथा मेरा यह मानना है कि भारत और अफ्रीका दोनों के लिए यह बड़े सौभाग्‍य की बात है।

भारत और अफ्रीका के बीच द्विपक्षीय व्‍यापार बहुत तेजी से बढ़ रहा है तथा पिछले कुछ वर्षों में इसमें 8 से 9 गुना वृद्धि हुई है। मेरा यह मानना है कि इस शिखर बैठक के बाद हमारे द्विपक्षीय व्‍यापार में हमें बहुत अधिक उछाल देखने को मिलेगा। आज अफ्रीका में भारत एक प्रमुख निवेशक भी है तथा यह विशेष रूप से तेल क्षेत्र में है और यह अफ्रीकी अर्थव्‍यवस्‍था को एक नई गति देने जा रहा है।

पिछली दो भारत – अफ्रीका मंच शिखर बैठकों के बाद भारत ने 7.4 बिलियन डालर का रियायती ऋण प्रदान किया है तथा अवसंरचना, कृषि, उद्योग, ऊर्जा एवं जल जैसे क्षेत्रों में सुविधाओं की वृद्धि के लिए इसका उपयोग किया गया है। आज 40 से अधिक देशों में 100 से अधिक परियोजनाएं कार्यान्‍वयन के अधीन हैं।

इसी भावना के साथ, भारत ने 100 से अधिक संस्‍थानों में 1.2 बिलियन डालर का निवेश किया है तथा यह मानव संसाधन विकास में काफी योगदान दे रहा है। मेरे लिए, मेरी समझ से मुझे जिस बात से सबसे अधिक खुशी होती है वह यह है कि भारत और अफ्रीका के बीच यह साझेदारी मानव संसाधन विकास के लिए क्षमता निर्माण के क्षेत्र में है। और पिछले कुछ वर्षों में, हमें अफ्रीका के लगभग 25 हजार छात्रों को शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रदान करने का सौभाग्‍य प्राप्‍त हुआ है और मेरी समझ से यह भारत के लिए बड़े सौभाग्‍य की बात है। अफ्रीका के अनेक नेताओं ने भारत में शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्राप्‍त किया है, जो आज सत्‍ता में हैं तथा शीर्ष पदों पर हैं।

मेरी समझ से भारत और अफ्रीका के बीच एक अन्‍य पहलू भी है जो हमें अफ्रीका के कई देशों के साथ जोड़ता है और यह सौर ऊर्जा है जिससे अफ्रीका के कई देशों को लाभ हो रही है। मेरी समझ से यह राष्‍ट्रों का बहुत मजबूत समुदाय बनने जा रहा है तथा आने वाले समय में जलवायु परिवर्तन की समस्‍या, जिससे निपटने और लड़ने के लिए पूरा विश्‍व प्रयास कर रहा है, हम जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का उपशमन करने और कम करने में बहुत प्रमुख भूमिका निभाने जा रहे हैं।

मेरी समझ से, भारत और अफ्रीका दोनों ही इस बात पर गर्व महसूस कर सकते हैं कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन की समस्‍या से जूझ रही है, वैश्विक तापन से संबंधित सरोकारों को लेकर चिंतित है, मेरी समझ से भारत और अफ्रीका दोनों में एक परंपरा रही है और पर्यावरण को प्रदूषित न करने या पर्यावरण को क्षति न पहुंचाने की उनकी संस्‍कृति रही है तथा संभवत: हमने हम पाप किया है और विश्‍व की इस बड़ी समस्‍या में सबसे कम योगदान दिया है। मेरी समझ से भारत और अफ्रीका के बीच यह एक सामान्‍य कारक है।

मेरा यह मानना है कि इस शिखर बैठक के दौरान तथा शिखर बैठक के बाद हम बहुत महत्‍वपूर्ण निर्णय लेने जा रहे हैं जिससे भारत और अफ्रीका दोनों में आत्‍मविश्‍वास की एक नई भावना जगेगी, हमारे संबंध गहन और करीबी होंगे तथा मेरी समझ से हम साथ मिलकर उसकी नींव रख सकते हैं जिसका हम पूरी दुनिया को योगदान कर सकते हैं।

एक बार पुन: आप सभी का बहुत – बहुत स्‍वागत है। शिखर बैठक के दौरान भी मुझे आप सभी का अभिवादन करने का अवसर प्राप्‍त होगा। धन्‍यवाद।

सरकारी प्रवक्‍ता : इस संबोधन के लिए, प्रधानमंत्री जी, आपका बहुत – बहुत धन्‍यवाद।

प्रधानमंत्री जी ने सामूहिक फोटोग्राफ से पहले आप में से प्रत्‍येक के साथ व्‍यक्तिगत फोटोग्राफ के लिए अपनी सहमति प्रदान की है।

तीसरी भारत – अफ्रीका मंच शिखर बैठ के लिए संपादक मंच में अफ्रीका के पत्रकारों के साथ प्रधानमंत्री जी का लिखित साक्षात्‍कार

प्रश्‍न : सामाजिक – अ‍ार्थिक और राजनीतिक दृष्टि से भारत के लिए अफ्रीका का सामरिक महत्‍व क्‍या है? क्‍या अफ्रीका के साथ भारत की भागीदारी संसाधनों के लिए धक्‍का-मुक्‍की में चीन के साथ कैचअप की प्रक्रिया है?

उत्‍तर : शिखर बैठक में अफ्रीका के सभी देशों की भागीदारी, जिसमें 40 से अधिक देशों से राष्‍ट्राध्‍यक्ष या शासनाध्‍यक्ष के स्‍तर पर भागीदारी शामिल है, भारत और अफ्रीका के बीच मैत्री एवं परस्‍पर विश्‍वास के गहन रिश्‍तों का प्रमाण है।

यह ऐसा संबंध है जो सामरिक आयाम से परे है। यह मजबूत भावनात्‍मक रिश्‍तों वाला संबंध है। हमारे रोचक इतिहास, हमारे सदियों पुराने भाईचारे के संबंधों, वाणिज्‍य एवं संस्‍कृति के संबंधों, उपनिवेशवाद के खिलाफ हमारे साझे संघर्ष, सभी लोगों में समानता, अस्मिता एवं न्‍याय के लिए हमारी ललक और हमारी प्रगति तथा विश्‍व में अपनी आवाज उठाने के लिए हमारी साझी आकांक्षाओं द्वारा यह संबंध निर्मित हुआ है। हमारे बीच सद्भाव एवं परस्‍पर विश्‍वास का बहुत बड़ा भंडार है।

भारत और अफ्रीका की आबादी विश्‍व की कुल आबादी का एक तिहाई है। इस आबादी का एक बड़ा हिस्‍सा युवाओं का है। वास्‍तव में, इस शताब्‍दी में भारत और अफ्रीका में विश्‍व की युवा आबादी का एक महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा निवास करता है। उनका भविष्‍य काफी हद तक इस विश्‍व को आकार प्रदान करेगा।

आज भारत और अफ्रीका वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था के‍ लिए उम्‍मीद के किरण हैं। आज भारत विश्‍व की सबसे तेजी से विकास करने वाली प्रमुख अर्थव्‍यवस्‍था है। अफ्रीका में भी तेजी से विकास हो रहा है। यद्यपि भारत और अफ्रीका दोनों ही अपने –अपने लोगों के लिए समृद्धि एवं शांति को बढ़ावा देने के लिए अपनी ओर से काफी कुछ करेंगे, फिर भी हमारी साझेदारी एक – दूसरे के लिए महान ताकत का स्रोत बन सकती है, एक – दूसरे के आर्थिक विकास की गति तेज करने और सुदृढ़ करने के लिए तथा एक अधिक न्‍यायोचित, समावेशी, साम्‍यपूर्ण और संपोषणीय विश्‍व का निर्माण करने के लिए भी। हमारे पूरक संसाधन एवं बाजार हैं और हमारे पास मानव पूंजी की शक्ति है। हमारा एक साझा वैश्विक विजन है।

अफ्रीका के साथ साझेदारी के लिए हमारा दृष्टिकोण सशक्तीकरण, क्षमता निर्माण, मानव संसाधन विकास, भारतीय बाजार तक पहुंच, और अफ्रीका में भारतीय निवेशों के लिए समर्थन के उद्देश्‍य द्वारा संचालित है ताकि अफ्रीका के लोग स्‍वतंत्र रूप से अपने लिए चयन करने में सक्षम हो सकें तथा अपने महाद्वीप के विकास की जिम्‍मेदारी उठाने में सक्षम हो सकें। अफ्रीका के साथ हमारा संबंध अनोखा है तथा इसका उल्‍लेख करने की कोई जरूरत नहीं है।

प्रश्‍न : भारत और अफ्रीका के बीच संबंधों ने अफ्रीका महाद्वीप की विकास प्रक्रिया में कैसे और किस हद तक मदद की है? यह किस तरह दोनों के लिए लाभप्रद स्थिति है?

उत्‍तर : हाल के वर्षों में, अफ्रीका का विकास बहुत आकर्षक रहा है। सबसे महत्‍वपूर्ण बात यह है कि यह अफ्रीकी विजन, नेतृत्‍व त‍था इस महाद्वीप में आर्थिक विकास का समर्थन करने और शांति को सुदृढ़ करने के प्रयासों की देन है। संपोषणीय विकास तथा लोगों के सशक्‍तीकरण, विशेष रूप से युवाओं एवं महिलाओं के सशक्‍तीकरण में अफ्रीका से सफलता की कहानियों के अनेक प्रेरक उदाहरण एवं मॉडल हैं।

भारत का यह सौभाग्‍य है कि वह अफ्रीका का विकास साझेदार है। जब से अफ्रीका के देशों ने आजादी प्राप्‍त करनी शुरू की है तभी से हम अफ्रीकी देशों में मानव संसाधन विकास में मदद कर रहे हैं। आज हमारे सहयोग ने अनेक रूप ले लिया है तथा मात्रा एवं पैमाने की दृष्टि से यह तेजी से बढ़ रहा है।

आज अफ्रीका के 34 देशों को 1.25 बिलियन की आबादी वाले भारतीय बाजार में ड्यूटी फ्री अक्‍सेस प्राप्‍त है। पिछली दो भारत – अफ्रीका मंच शिखर बैठकों में, हमने 7.4 बिलियन अमरीकी डालर की रियायती ऋण सहायता की प्रतिबद्धता की है, जो अफ्रीका में अवसंरचना के विकास, हल्‍के विनिर्माण, लोक सेवाओं तथा स्‍वच्‍छ ऊर्जा के क्षेत्र में योगदान कर रही है। हमने 1.2 बिलियन अमरीकी डालर की अनुदान सहायता की प्रतिबद्धता की है जिससे अफ्रीका में वित्‍तीय मानव संसाधन विकास तथा 100 से अधिक क्षमता निर्माण की संस्‍थाओं की स्‍थापना में मदद मिल रही है। पिछले तीन वर्षों में ही, भारत में 25 हजार अफ्रीकियों को प्रशिक्षित या शिक्षित किया गया है। अखिल अफ्रीका ई-नेटवर्क, जो आज अफ्रीका के 48 देशों को कनेक्‍ट कर रहा है, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और मानव विकास का एक नया राजमार्ग बन रहा है। भारत अफ्रीका में विदेशी प्रत्‍यक्ष निवेश के प्रमुख एवं तेजी से विकास करने वाले स्रोत के रूप में उभरा है। अफ्रीका जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्‍या भी बढ़ रही है।

अफ्रीका का विकास भारत के लिए एक विशाल अवसर है, ठीक उसी तरह से जैसे कि अफ्रीका के संसाधन, जिसमें तेल शामिल है, भारत के आर्थिक विकास को संचालित करते हैं तथा अफ्रीका में संपदा एवं नौ‍करियों का सृजन करते हैं। इस महाद्वीप की प्रगति से वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था की स्थिरता एवं गति में काफी वृद्धि होगी तथा इससे भारत को भी लाभ होगा।

प्रश्‍न : कुछ विश्‍लेषकों का यह कहना है कि उपनिवेशवाद तथा नव-उपनिवेशवाद के प्रभाव अफ्रीका की शांति, स्थिरता एवं विकास में बाधा के रूप में काम कर रहे हैं। भारत भी इसी तरह के ऐतिहासिक विरासत से गुजरा है परंतु हड़ताल एवं विखंडन के इस चक्र को तोड़ने में सफल हो गया है तथा अभिशासन, विकास और प्रगति पर अपना ध्‍यान केंद्रित कर रहा है। इस संबंध में, अफ्रीका के लिए भारत क्‍या सीख दे रहा है?

उत्‍तर : भारत की आजादी का अफ्रीका में उपनिवेशवाद के खिलाफ संघर्ष तथा स्‍वतंत्रता आंदोलन पर बहुत सकारात्‍मक असर हुआ था। हमें इस बात पर गर्व है कि अफ्रीकी देशों की आजादी और रंगभेद की समाप्ति में हमने उनका मजबूती के साथ सहयोग किया है।

अफ्रीका को हम से किसी सबक की जरूरत नहीं है। उपनिवेशी विरासत ने हम सभी पर लंबा एवं गहन प्रभाव छोड़ा है। अफ्रीका भी कठिन दौर से गुजरा है। तथापि, आज अफ्रीका आकर्षक प्रगति कर रहा है। आज यह महाद्वीप पहले से कहीं अधिक स्थिर है। अफ्रीकी देश अपने विकास, शांति एवं सुरक्षा के लिए जिम्‍मेदारी लेने के लिए एकजुट हो रहे हैं। अफ्रीका के लोग उत्‍तरोत्‍तर बड़ी संख्‍या में अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। हम देख रहे हैं कि आर्थिक सुधारों तथा क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग एवं एकीकरण की दिशा में प्रयास बढ़ रहे हैं। आर्थिक विकास की गति तेज हो गई है। आज अफ्रीका की लगभग 95 प्रतिशत आबादी के पास मोबाइल फोन है। शिक्षा, नवाचार, महिलाओं का सशक्‍तीकरण, कौशल विकास तथा प्रकृति का संरक्षण आदि जैसे क्षेत्रों में उनकी पहलें बहुत प्रशंसनीय हैं।

निश्चित रूप से, आज भी अफ्रीका को विकास की अनेक सुपरिचित चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। वहां सुरक्षा की नई समस्‍याएं हैं जिसमें आतंकवाद एवं अतिवाद की समस्‍या शामिल है जिससे विश्‍व के दूसरे हिस्‍से भी प्रभावित हैं।

उपलब्धियों, प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों तथा विशाल एवं प्रतिभावान युवा आबादी की दृष्टि से अफ्रीका का एक समृद्ध इतिहास है। मुझे पूरा यकीन है कि अफ्रीका का नेतृत्‍व और अफ्रीका के लोग ''एजेंडा 2063 : अफ्रीका जो हम चाहते हैं’’ के विजन को साकार करेंगे।

भारत मित्र एवं साझेदार के रूप में अफ्रीका के देश जिस भी ढंग से चाहेंगे उस ढंग से उनकी सहायता करने के लिए अपने अनुभव, विशेषज्ञता एवं संसाधनों को साझा करने के लिए सदैव तैयार रहेगा। चूंकि हमारी अनेक चुनौतियां अफ्रीका की चुनौतियों जैसी हैं, इसलिए हमारे समाधान अफ्रीका के संदर्भ में प्रासंगिक हो सकते हैं।

प्रश्‍न : अधिक द्विपक्षीय व्‍यापार एवं निवेश से लाभ उठाने के लिए भारत और अफ्रीका दोनों क्‍या कर सकते हैं?2008 में पहली भारत - अफ्रीका मंच शिखर बैठक (आई ए एफ एस-1) के बाद से इस क्षेत्र में उपलब्धियां क्‍या हैं?

उत्‍तर : मुझे भारत और अफ्रीका के बीच व्‍यापार एवं निवेश संबंधों की दृष्टि से प्रचुर अवसर दिखते हैं। इस शताब्‍दी में भारत सबसे अधिक आबादी वाला देश होगा तथा अफ्रीका सबसे अधिक आबादी वाला महाद्वीप होगा। हम दोनों ही युवाओं की आबादी वाले देश हैं। अफ्रीका में विशाल संसाधन भी मौजूद हैं। अफ्रीका और भारत दोनों का विकास होगा, तेज गति से आधुनिकीकरण एवं शहरीकरण होगा।

हमारी आर्थिक साझेदारी गति पकड़ रही है। अफ्रीका के साथ भारत का व्‍यापार, जो वित्‍त वर्ष 2007-08 में 30 बिलियन अमरीकी डालर के आसपास था, वित्‍त वर्ष 2014-15 में दोगुना से भी अधिक बढ़कर 72 बिलियन अमरीकी डालर के आसपास हो गया है। भारत और अफ्रीका में आर्थिक प्रगति के अलावा, 2008 में पहली भारत – अफ्रीका मंच शिखर बैठक के संदर्भ में सभी सबसे कम विकसित देशों को भारतीय बाजारों में ड्यूटी फ्री अक्‍सेस प्रदान करने संबंधी भारत के निर्णय से व्‍यापार को भी लाभ हुआ है। अफ्रीका के 34 देश इस स्‍कीम के प्रत्‍यक्ष लाभार्थी हैं।

चीन से भी आगे निकलते हुए आज अफ्रीका में भारत विकासशील देशों से सबसे बड़े निवेशक के रूप में उभरा है।

अफ्रीका के लिए हमारी ऋण सहायता, जो संचयी रूप से पहली दो भारत – अफ्रीका मंच शिखर बैठकों से 7.4 बिलियन अमरीकी डालर है, अफ्रीका में अवसंरचना का सृजन कर रही है तथा द्विपक्षीय व्‍यापार को तेज कर रही है। इसी तरह, अफ्रीका के विशाल संसाधन तथा कृषि योग्‍य भूमि की उपलब्‍धता न केवल अफ्रीका की समृद्धि का साधन बनेगी, अपितु भारत की तेजी से बढ़ती मांग को पूरा करने का एक प्रमुख स्रोत भी बन सकती है।

भारत ने अफ्रीका में मानव संसाधन विकास तथा संस्‍थाओं की स्‍थापना में विकास साझेदारी पर अपना ध्‍यान केंद्रित किया है जिससे अफ्रीका में कौशलों एवं क्षमताओं का निर्माण हो रहा है, जिसमें कृषि, खाद्य प्रसंस्‍करण, टेक्‍सटाइल, लघु उद्योग आदि जैसे क्षेत्र शामिल हैं जिससे भारत तथा अन्‍य देशों को होने वाले निर्यात में वृद्धि हो रही है।

मैं इस बात का भी उल्‍लेख करना चाहूँगा कि अफ्रीका के बाजारों को एकीकृत करने से संबंधित अफ्रीका के प्रशंसनीय प्रयास द्विपक्षीय व्‍यापार एवं निवेश को भी प्रेरित करेंगे।

जैसा कि भारत और अफ्रीका दोनों ही 21वीं सदी में अवसरों के नए फ्रंटियर के रूप में उभर रहे हैं, मैं उम्‍मीद करता हूँ कि तीसरी भारत – अफ्रीका मंच शिखर बैठक में अफ्रीका के नेताओं के साथ इस बात पर विचार किया जाएगा कि किस तरह हम अपनी आर्थिक साझेदारी का और विस्‍तार कर सकते हैं तथा अधिक अनुकूल वैश्विक आर्थिक परिवेश तथा संस्‍थानिक रूपरेखा का निर्माण करने की दिशा में भी काम कर सकते हैं।

प्रश्‍न : जुलाई, 2015 में ब्रिक्‍स देशों द्वारा स्‍थापित नया विकास बैंक किस तरह अफ्रीकी देशों को लाभ पहुंचा सकता है?

उत्‍तर : नया विकास बैंक एक महत्‍वपूर्ण है जिसका वैश्वि‍क वित्‍तीय व्‍यवस्‍था पर प्रचुर प्रभाव हो सकता है। हाल के समय में एशियाई अवसंरचना विकास बैंक के साथ बहुपक्षीय वित्‍तीय संस्‍था पर यह संभवत: पहली प्रमुख पहल है। इसकी वजह से बैंक की स्‍थापना में ब्रिक्‍स के पांच देश समान साझेदार के रूप में एक मंच पर आए हैं, जो ऐसी संस्‍थाओं की वित्‍तीय संरचना के पूरी तरह नए सिद्धांत को दर्शाता है। विकासशील देशों के हितों एवं अनुभवों को ध्‍यान में रखकर ऋण देने की प्रथाएं तैयार की जाएंगी। इसने विकासशील देशों में अवसंरचना निवेश के वित्‍त पोषण के लिए एक नया दरवाजा खोला है। मेरी समझ से अफ्रीका फोकस का एक प्रमुख क्षेत्र होगा तथा हम आशा करते हैं कि भविष्‍य में इस बैंक की एक अफ्रीकी विंडो या क्षेत्रीय उपस्थिति होगी।

प्रश्‍न : कृषि तथा संबंधित गतिविधियां अफ्रीका महाद्वीप के लोगों की जीविका का मूल आधार हैं। इस पर भारत की भी काफी आबादी निर्भर है। कृषि की संपोषणीय प्रथाओं को अपनाने एवं बनाए रखने में भारत किस तरह अफ्रीका की मदद कर सकता है?

उत्‍तर : अफ्रीका में विश्‍व की 60 प्रतिशत कृषि योग्‍य भूमि है, परंतु यह वैश्विक खाद्य उत्‍पादन का मात्र 10 प्रतिशत उत्‍पादन करता है। कृषि क्षेत्र का विकास न केवल अफ्रीका के आर्थिक विकास, रोजगार और खाद्य सुरक्षा को संचालित कर सकता है, अपितु यह अफ्रीका को विश्‍व के खाद्य के कटोरे के रूप में भी परिवर्तित कर सकता है। हाल के समय में अफ्रीका की उपलब्धियां अफ्रीका में कृषि के विकास में हमारे विश्‍वास को बढ़ाती हैं।

पिछले कुछ दशकों में भारत ने कृषि एवं डेयरी के क्षेत्रों में उल्‍लेखनीय प्रगति की है। हम इन क्षेत्रों में अग्रणी वैश्विक उत्‍पादकों में शामिल हैं। भारत ने कम पूंजी गहन खेती तथा जैव विविधता की विविध परिस्थितियों के संदर्भ में सफलता हासिल की है, जो अफ्रीका के लिए बहुत प्रासंगिक हो सकता है। वास्‍तव में, 1960 के दशक से अफ्रीका के विभिन्‍न देशों में भारत से कृषि विशेषज्ञ तैनात किए गए हैं। भारत में कृषि संबद्ध पाठ्यक्रमों के लिए छात्रवृत्तियां अफ्रीका में बहुत लोकप्रिय हैं। अफ्रीका के साथ हमारी विकास साझेदारी में कृषि आज भी प्राथमिकता के क्षेत्रों में से एक है। इसके अनेक रूप हैं : मानव संसाधन विकास, अफ्रीका में कृषि संबद्ध संस्‍थाओं का सृजन, सिंचाई परियोजनाएं, प्रौद्योगिकी अंतरण तथा खेती की आधुनिक प्रथाएं। चूंकि आज हम भविष्‍य की ओर देख रहे हैं, हम इन क्षेत्रों में अफ्रीका के साथ काम करना जारी रखेंगे, परंतु नई चुनौतियों को भी दूर करेंगे : जलवायु अनुकूल कृषि तथा जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलन। हम खेती पश्‍चात प्रसंस्‍करण तथा आपूर्ति श्रृंखला पर भी अपना ध्‍यान केंद्रित करेंगे। मैं इस संबंध में, अफ्रीका की प्राथमिकताएं जानने की भी प्र‍तीक्षा करूँगा।

प्रश्‍न : भारत और अफ्रीका के बीच आर्थिक साझेदारी व्‍यापार एवं निवेश से आगे निकल कर प्रौद्योगिकी अंतरण, ज्ञान की हिस्‍सेदारी तथा क्षमता निर्माण तक फैल चुकी है। अगले कुछ वर्षों में भारत से और क्‍या अपेक्षा हो सकती है?

उत्‍तर : भारत - अफ्रीका आर्थिक साझेदारी लेन-देन पर आधारित नहीं है। यह हमारे लोगों का जीवन बदलने में दक्षिण – दक्षिण सहयोग की ताकत तथा हमारी साझी नियति में विश्‍वास पर आधारित है।

भारत अफ्रीका के हमारे दोस्‍तों की आवश्‍यकताओं एवं प्राथमिकताओं के अनुसरण में हमेशा काम करेगा। हम नई प्रौद्योगिकी द्वारा सृजित अवसरों एवं संभावनाओं का उपयोग करने के लिए भी साथ मिलकर काम करेंगे तथा जलवायु परिवर्तन जैसी नई चुनौतियों का सामना करेंगे। भविष्‍य के लिए रोड मैप हमारे साझे विजन एवं लक्ष्‍यों तथा हमारी अपनी ताकतों एवं क्षमताओं को प्रतिबिंबित करेगा।

हम मानव संसाधन विकास, संस्‍था निर्माण, अवसंरचना, स्‍वच्‍छ ऊर्जा, कृषि, स्‍वास्‍थ्‍य, शिक्षा और कौशल विकास पर अपना ध्‍यान देना जारी रखेंगे। हम जलवायु परिवर्तन की समस्‍या को दूर करने तथा नीली अर्थव्‍यवस्‍था के संपोषणीय विकास पर भी साथ मिलकर काम करेंगे।

हम आने वर्षों में निश्चित रूप से अपनी साझेदारी को बहुत अधिक ऊंचाई पर ले जाएंगे। हम अफ्रीका के साथ अपने विकास साझेदारी कार्यक्रम की व्‍यापक समीक्षा के आधार पर, विशेष रूप से क्षमता निर्माण, अवसंरचना सहायता तथा प्रौद्योगिकी अंतरण और अफ्रीका के अपने साझेदारों के साथ चर्चा की दृष्टि से अपनी साझेदारी को अधिक कारगर भी बनाएंगे।

प्रश्‍न : क्‍या वैश्‍विक राजनीतिक एवं आर्थिक व्‍यवस्‍था में सुधार लाने के लिए भारत की प्रतिबद्धता संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद का सदस्‍य बनने के लिए भारत की आकांक्षाओं से जुड़ी है?

उत्‍तर : आज विश्‍व में राजनीतिक, आर्थिक एवं प्रौद्योगिकीय परिवर्तन इतने बड़े पैमाने पर हो रहा है जिसे हाल के इतिहास में शायद ही पहले कभी देखा गया हो। संयुक्‍त राष्‍ट्र की जब स्‍थापना हुई थी तब इसके जितने सदस्‍य थे उससे आज इसके सदस्‍य चार गुना अधिक हो गए हैं। आज अधिकारों के बारे में जागरूकता तथा प्रगति के लिए आकांक्षाएं बहुत व्‍यापक हैं। वैश्विक शक्ति का वितरण पहले से अधिक है। आज हम डिजिटल रूप में एक – दूसरे जुड़े विश्‍व में रह रहे हैं, जो वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था के चरित्र को परिवर्तित कर रहा है। शांति एवं सुरक्षा के लिए चुनौतियां अधिक जटिल, अननुमेय तथा अपरिभाषित हो गई हैं। कई तरीकों से हमारा जीवन भूमंडलीकृत हो रहा है परंतु हमारे पहचान के इर्द-गिर्द फाल्‍ट लाइनें बढ़ रही हैं। आतंकवाद, साइबर तथा अंतरिक्ष खतरों, अवसरों एवं चुनौतियों के पूरी तरह नए फ्रंटियर हैं। जलवायु परिवर्तन एक महत्‍वपूर्ण वैश्विक चुनौती है। विकासशील देश शहरीकरण की एक नई लहर की जटिलताओं के दौर से गुजर रहे हैं।

इसके बावजूद, वैश्विक व्‍यवस्‍था, इसकी संस्‍थाएं तथा हमारी सोच आज भी उन्‍हीं परिस्थितियों को प्रतिबिंबित करती है जो पिछले विश्‍व युद्ध की समाप्ति के समय मौजूद थीं। इन संस्‍थाओं ने बहुत अच्‍छा काम किया है परंतु नए युग में कारगर एवं प्रासंगिक बने रहने के लिए उनमें सुधार होना आवश्‍यक है। यदि वैश्विक संस्‍थाओं एवं प्रणालियों में अनुकूलन नहीं होगा, तो उनकी प्रासंगिकता खतरे में पड़ जाएगी। हमारा विश्‍व अधिक विखंडित हो सकता है तथा हमारे युग की चुनौतियों एवं परिवर्तनों से निपटने की हमारी सामूहिक सामर्थ्‍य भी कमजोर पड़ जाएगी।

इसी वजह से भारत वैश्विक राजनीतिक, अ‍ार्थिक एवं सुरक्षा संस्‍थाओं में सुधार की वकालत करता है। यह जरूरी है कि वे अधिक लोकतांत्रिक, समावेशी तथा हमारे विश्‍व का प्र‍तिनिधित्‍व करने वाली बनें। आज किसी भी संस्‍था में यह चरित्र नहीं होगा, यदि वह अफ्रीका या विश्‍व के सबसे बड़े लोकतंत्र, जहां विश्‍व की आबादी का छठवां भाग रहता है, को प्रतिनिधित्‍व नहीं देगी। इसी वजह से हम संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद तथा वैश्विक वित्‍तीय संस्‍थाओं में सुधार की बात करते हैं। भारत और अफ्रीका, जहां विश्‍व की एक तिहाई आबादी रहती है, को इन सुधारों के लिए एक आवाज में बोलना जारी रखना चाहिए।

प्रश्‍न : भारत और अफ्रीका के बीच सहयोग की दृष्टि से तीसरी भारत – अफ्रीका मंच शिखर बैठक (आई ए एफ एस-III) से मूर्त परिणाम के रूप में क्‍या उत्‍पन्‍न होगा?

उत्‍तर : हमारा उद्देश्‍य साझेदारी की भावना को गहन करना, अपने अंतर्राष्‍ट्रीय भाईचारे को सुदृढ़ करना और अपने सहयोग का विस्‍तार करना है। जब मैं अफ्रीका के विजन को देखता हूँ, जिसे एजेंडा 2063 नामक दस्‍तावेज में बहुत चतुराई के साथ वर्णित किया गया है, तो मुझे यकीन हो जाता है कि विकास के हमारे लक्ष्‍य तथा हमारी अंतर्राष्‍ट्रीय आकांक्षाएं निकटता से संरेखित हैं। यह आने वाले वर्षों में हमारी साझेदारी की नींव होगी।

दिल्‍ली में तीसरी भारत – अफ्रीका मंच शिखर बैठक में, हम अपनी विकास साझेदारी के लिए पर्याप्‍त रूप से उच्‍चतर एवं महत्‍वाकांक्षी लक्ष्‍यों को निर्धारित करने की आशा करते हैं। हमने पिछले दशक के अपने अनुभव के आधार पर इसे अधिक कारगर बनाने का भी लक्ष्‍य रखा है। पहले की तरह हमारा प्राथमिक उद्देश्‍य उनके विकास की गति को तेज करने के लिए उनके प्रयासों में अफ्रीका के अपने साझेदारों की मदद करना है। हम अपने समय की प्रमुख चुनौतियों को भी दूर करेंगे जिनमें खाद्य, स्‍वास्‍थ्‍य एवं पर्यावरणीय सुरक्षा शामिल हैं। हम ऐसी स्थितियों का सृजन करेंगे जो हमारे देशों के बीच व्‍यापार एवं निवेश के प्रवाह को प्रेरित करेंगी। हम जलवायु परिवर्तन की समस्‍याओं को दूर करने के लिए साथ मिलकर काम करेंगे। हम संपोषणीय नीली अर्थव्‍यवस्‍था जैसे नए क्षेत्रों में अवसरों का पता लगाएंगे। हमारी पहलों का उद्देश्‍य यह होगा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष विज्ञान तथा नेटवर्क जुड़े विश्‍व की शक्ति का प्रयोग जीवन बदलने के लिए हो। यह कोई एक तरफा रास्‍ता नहीं है। हम जीवन के सभी क्षेत्रों में अफ्रीका की सफलता की असंख्‍य गाथाओं से काफी कुछ सीखने की भी आशा रखते हैं।

हम वैश्विक प्‍लेटफार्म पर भी अपनी साझेदारी को सुदृढ़ करेंगे तथा समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद की खिलाफत में सहयोग सहित अपने सुरक्षा सहयोग को गहन करेंगे।

तीसरी शिखर बैठक, जिसमें पहली बार अफ्रीका के सभी देश भाग लेंगे, भारत – अफ्रीका साझेदारी के एक नए युग की शुरूआत करेगी।
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