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घाना प्रसारण निगम के लिए अकरा में राष्ट्रपति का साक्षात्कार (13 जून, 2016)

जून 13, 2016

साक्षात्कारकर्ताः हम हमारे देश घाना में आपकी यात्रा से अति प्रसन्न हैं, और घाना प्रसारण निगम की ओर से आपका हार्दिक स्वागत करते हैं। आरम्भ में, क्या मैं महामहिम से परिप्रेक्ष्य में इस ऐतिहासिक यात्रा के बारे में बताने का आग्रह कर सकता हूं।

माननीय राष्ट्रपति (श्री प्रणब मुखर्जी): आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। मैं घाना की यात्रा के लिए महामहिम राष्ट्रपति महामा के निमंत्रण पर यहां आने पर बेहद खुश हूं।

आप इस तथ्य से अवगत हैं कि यहां तक कि वास्तविक आजादी से पहले, भारत ने अफ्रीकी महाद्वीप के साथ निकट संबंधों का निर्माण किया था। हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को दक्षिण अफ्रीका में औपनिवेशिक शासन के खिलाफ लड़ने के लिए बपतिस्मा दिया गया था। पूर्ण स्वतंत्रता से पहने, भारत के दक्षिण अफ्रीका के साथ व्यापार संबंध थे जो उस समय भारत के कुल विदेशी व्यापार का पांच प्रतिशत था। यह अफ्रीकी महाद्वीप के साथ हमारे गहरे रिश्ते को दर्शाता है। और महामहिम राष्ट्रपति के निमंत्रण पर घाना की मेरी यात्रा हमारे संबंधो को गहरा और विस्तृत बनाएगी।

हम नई दिल्ली में अक्टूबर 2015 को आयोजित भारत-अफ्रीकी मंच शिखर में महामहिम राष्ट्रपति महामा के योगदान की तहे दिल से सराहना करते हैं। इसलिए, यह आपके खूबसूरत देश की सुखद यात्रा सामान्य रूप में और विशेष रूप से घाना के लोगों के लिए अफ्रीकी लोगों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दोहराती है।

निश्चित रूप से आप घाना गणराज्य के संस्थापक राष्ट्रपति श्री नूरुमाह गणराज्य के बारे में जानते हैं। वह और भारत के प्रथम प्रधानमंत्री श्री जवाहर लाल नेहरू गुट निरपेक्ष आंदोलन के संस्थापक थे। वास्तव में, दो अफ्रीकी नेताओं - मिस्र के जमाल अब्दुल नासिर और महामहिम राष्ट्रपति क्वामे नूरुमाह ने गुट निरपेक्ष आंदोलन और भारत-अफ्रीका, एफ्रो-एशियाई संयोजन के लिए काफी योगदान दिया है। धन्यवाद।

साक्षात्कारकर्ताः महामहिम, हम आपकी इन प्रारंभिक टिप्पणियों पर उत्साहित हैं। अब आगे, मैं कहना चाहूंगा कि आप दुनिया में सबसे बड़े लोकतंत्र राज्य के प्रमुख हैं। आपका एक सार्वजनिक जीवन भी है जो पांच दशक से अधिक तक फैला हुआ है। महामहिम, घाना आपके अनुभव और ज्ञान को कैसे साझा कर सकता है?

माननीय राष्ट्रपतिः हमारा दोस्ती और सहयोग का यह बंधन लोकतंत्र है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है जो एक ही देश में एक विशाल विविधता का प्रबंधन करता है। हमारे पास 1.28 बिलियन लोग हैं जो 1600 बोलियां, 120 से अधिक भाषाओं का प्रयोग अपनी दैनिक जिंदगी में करते हैं। सभी तीन जातीय समूह - कॉकेशियन, द्रविड़ और मंगोलियाई - अभी तक एक संविधान के तहत, एक झंडे के नीचे हैं। और लोकतंत्र हमारे और घाना के बीच का बंधन है। हम घाना को न केवल पश्चिम अफ्रीका के लिए, बल्कि पूरे अफ्रीका के लिए लोकतंत्र, शांति और स्थिरता का रोल मॉडल मानते हैं।

साक्षात्कारकर्ताः महामहिम, घाना और भारत ने अपनी स्वतंत्रता के बाद से बहुत घनिष्ठ संबंध बनाए रखे हैं और ये संबंध इन दोनों देशों की जनता की भलाई के लिए विकसित हो रहा है। क्या आप हमें संक्षेप में बताएंगे कि आज आप भारत और घाना के बीच संबंधों को कैसे देखते हैं?

माननीय राष्ट्रपतिः जैसा कि मैंने पहले उल्लेख किया है कि न केवल लोकतंत्र हम दोनों के बीच का मजबूत संबंध है, बल्कि हमारे बहुआयामी संबंध में हमारी अभिव्यक्ति - व्यापार, निवेश, आर्थिक सहयोग, विभिन्न क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मंचों पर घनिष्ठ सहयोग - गहरे रिश्ते को दर्शाता है। हमारा व्यापार विस्तृत हो रहा है। यह एक अरब डालर के आसपास है। हमारा निवेश लगभग एक अरब डालर का है और हम व्यापार में निवेश में पर्याप्त सुधार होने की उम्मीद कर रहे हैं क्योंकि घाना को पहले ही एक निम्न मध्य आय आर्थिक व्यवस्था के रूप में और वस्तुतः अपनी गरीबी रेखा को कम करने वाले पश्चिम अफ्रीकी देशों के पहले देश के रूप में मान्यता प्राप्त है।

इसलिए, मैं महसूस करता हूं कि यहां हमारे आर्थिक सहयोग के विस्तार व्यापार करने, व्यापार एवं निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाने, और जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद प्रतिरोध जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर आम धारणा साझा करने की अपार गुंजाइश है। आतंकवाद प्रतिरोध जो आतंकवादी ताकतों के विरोध करता है। आतंकवाद पूरी दुनिया की शांति और अक्षोभ के लिए सबसे बड़ा खतरा है।

साक्षात्कारकर्ताः महामहिम, हम घाना एवं भारत के बीच के संबंध को अन्य स्तर पर ले जाने के संदर्भ में हमारे देश में आपकी इस ऐतिहासिक यात्रा में आपकी कुछ संलग्नताओं के बारे में जानना चाहते हैं?

माननीय राष्ट्रपतिः जैसा कि मैंने आपको बताया है, हमारे में कई समानताएं थी। इन दोनों देशों को औपनिवेशिक शासकों द्वारा शोषित किया गया था और उन्होंने इन देशों की पूरी आर्थिक और राजनीतिक योग्यता को फलने नहीं दिया था। हमें घाना से थोड़ा पहले स्वतंत्रता मिली थी। हमारे स्वयं के अनुभवों से, हमने पाया कि देश को विकसित करने का सबसे अच्छा तरीका है - अपनी स्वयं की क्षमताओं का निर्माण करना। हमारे विकास अनुभवों में हमने पाया है कि यदि हम अपने मित्र देशों की मदद उनकी क्षमता को विकसित करने में करते हैं, यदि हम उन देशों में क्षमता निर्माण का साधन बनते हैं, यह बहुत मददगार होगा। मैं आपको छोटा सा उदाहरण दूंगा।

हम आईटीईसी नामक भारत के एक कार्यक्रम का उदाहरण लेते हैं। यह भारतीय तकनीकी सहयोग व्यवस्था के तहत एक प्रशिक्षण कार्यक्रम है। हर साल हम विभिन्न देशों को स्लॉट की एक बड़ी संख्या प्रदान करते हैं। हम भारतीय आईटीईसी कार्यक्रम द्वारा प्रदत्त स्लॉट्स का पूर्ण लाभ उठाने के लिए घाना की प्रशंसा करते हैं, यह भारतीय सांस्कृतिक संबंधों के तहत हमारा छात्रवृत्ति कार्यक्रम है। इसलिए हमने इन स्लॉट को दोगुना करने का फैसला किया है। यह तीसरे भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन के महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक है कि अगले पांच वर्षो के भीतर हम रियायती ब्याज दरों, द्विपक्षीय एड्स के के साथ क्रेडिट की हमारी लाइन के माध्यम से सभी अफ्रीकी देशों को 10 अरब डालर तक हमारा समर्थन देंगे और प्रशिक्षण अवसर भी प्रदान करेंगे क्योंकि विभिन्न देशों से अफ्रीकी राजनेता, सेना के जवानों को भारतीय प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षण मिला है। इस तरह, हम हमारे सहयोग को गहरा और विस्तृत करने की कोशिश कर रहे हैं।

साक्षात्कारकर्ताः बहुत बढ़िया! राष्ट्रपति महोदय, मुझे आपसे आईटीईसी के बारे में सुनकर बहुत खुशी हो रही है क्योंकि मैं आईटीईसी कार्यक्रम का एक लाभार्थी हूँ। 2008 में, मैं इसके लिए भारत में था। इसलिए, हम सब की तरफ से आपको बधाई और हमारा आभार। महामहिम, आप कुछ दिन के लिए घाना में है। वास्तव में आपको क्या घाना में ले आया है? आज, आप क्या कर करने जा रहे हैं?

माननीय राष्ट्रपतिः आजादी के तुरंत बाद हमारी कृषि अत्यधिक पिछड़ी हुई थी। कृषि विज्ञान पर अनुसंधान और विकास पर जोर देते हुए, आज हम चावल, गेहूं की सबसे अग्रणी उत्पादकों में से एक के रूप में उभरे हैं और खाद्यान्न के शुद्ध आयातक होने के बजाय, अब खाद्यान्न का एक निर्यातक है। कुछ साल में, हम चावल और गेहूं के सबसे बड़े उत्पादक बन गए हैं। कुछ वर्ष पहले हमारा कुल अनाज उत्पादन 268 मिलियन टन पहुंच गया था। ये अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में हमारे पर्याप्त सहयोग के उदाहरण हैं।

निवेश का उदाहरण लें। हम मानते हैं कि हम सहायता कर सकते हैं क्योंकि तकनीक है जिसका हम उपयोग करते हैं, विकासशील देशों के लिए उपयुक्त है। प्रौद्योगिकियों जिसे हमने अत्यधिक विकसित देशों से उधार लिया है अधिक अपेक्षाकृत जटिल हो सकती है, लेकिन वे जरूरी नहीं है कि उपयुक्त हो। हमने उपयुक्त प्रौद्योगिकी पर जोर दिया है। इसलिए, जैसा कि मैंने आपको बताया कि विकास सहयोग में हमारा पूरा उद्देश्य अपने अनुभवों को साझा करना और एक दूसरे से सीखना है।

हम स्वयं को किसी से बेहतर नहीं मानते हैंद्ध हम बराबर हैं। हम हमारे दुखों, औपनिवेशिक स्वामी द्वारा शोषण में बराबर भागीदार हैं, और हम हमारे विकासात्मक उद्देश्यों में बराबर हैं और आगे बढ़ रहे हैं। इसलिए, हमें हमारे बराबरी के रिश्ते पर भरोसा है और हमें एक दूसरे के सहयोग, समझ और विश्वास से लाभ होगा।

साक्षात्कारकर्ताः
यह वास्तव में मेरे लिए बहुत ताजा लग रहा है। राष्ट्रपति महोदय, हम एक उत्तरोतर अस्थिर दुनिया में रह रहे हैं। भारत आज एक प्रमुख शक्ति बन रहा है, आप आज के भू-राजनीतिक संदर्भ में भारत की भूमिका को कैसे देखेंगे?

माननीय राष्ट्रपतिः मैं आपसे सहमत हूँ कि यह एक अस्थिर स्थिति है। उदाहरण के लिए, भारत तीन से अधिक दशकों से सीमा पार से आतंकवाद से पीड़ित है और घाना द्वारा किए गए आतंकवाद को नियंत्रित करने के प्रयासों की हम पूरी तरह से सराहना करते हैं और समझते हैं। जैसा कि मेरा विश्वास है, आतंकवाद का सीमाओं के लिए कोई सम्मान नहीं है, प्रचंड विनाश के अलावा कोई विचारधारा और न ही उनका कोई धर्म है। वे विनाश में विश्वास करते हैं।

इसलिए यह आवश्यक है कि हम सभ्य दुनिया के लिए एक दूसरे के निकट सहयोग के साथ े एकीकृत कार्रवाई करके इस बुराई के खिलाफ लड़े और आतंकवाद की इस बीमारी से दुनिया को बचाएं। और यहाँ हम आतंकवाद के खिलाफ लड़ने में सरकार और घाना के लोगों के साथ हाथ में हाथ डालकर खड़े हैं।

साक्षात्कारकर्ताः
महामहिम, हम अपनी चर्चा के अंत पर हैं। मैं विनम्रतापूर्वक कहना चाहूंगा कि भारत ने एक विकासशील राष्ट्र के रूप में शुरू किया था लेकिन आज भारत सभी स्तरों पर विकसित दुनिया के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है ... (अश्रव्य) ... और मुझे यकीन है कि आपको भारत के राष्ट्रपति होने पर गर्व है। इस चर्चा पर आपके द्वारा हमें दिए अंतिम विचारों के रूप में घाना भारत के आगे बढ़ने के उदाहरण का अनुकरण कैसे कर सकता है?

माननीय राष्ट्रपतिः
जैसा कि मैंने आपसेसे कहा था, हमारे विकास के अनुभवों में हमने विभिन्न समस्याओं का सामना किया है और हम एक दूसरे के अनुभवों से सीख सकते हैं। ऐसा नहीं है कि एक देश सब ने दूसरे पर महारत हासिल कर ली है। मैं आपको एक उदाहरण देता हूँ। शुरुआत से ही भारत ने लोकतंत्र के साथ शुरू किया है, और हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लागू करने के पाठ्यक्रम में, हमने पाया कि लोकतंत्र संस्थानों की स्थापना के साथ सफल हो सकता है और संस्थागत समर्थन के बिना लोकतांत्रिक कामकाज मुश्किल हो जाता है। 1992 संविधान के बाद, घाना के लोगों और सरकार लगातार भारतीयों की तरह उनके लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने में अपने विश्वास की वजह से आगे बढ़ रहे हैं। और इस तरह से हम हमारे सहयोग को गहरा और विस्तृत कर सकते हैं, हम अपने विचारों, अपने अनुभवों को साझा कर सकते हैं और लाभ पाने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं को अपना सकते हैं।

माननीय राष्ट्रपतिः धन्यवाद। और मैं एक अरब भारतवासियों और सरकार की ओर से घाना के लोगों को अपनी शुभकामनाएं व्यक्त करना चाहता हूं।

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