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नामीबिया के नए युग के साथ राष्ट्रपति का साक्षात्कार

जून 17, 2016

  • आप भारत-नामीबिया संबंध की वर्तमान स्थिति और इसके विकास पथ का आकलन कैसे करते हैं?

    भारत और नामीबिया उत्कृष्ट और समय परीक्षण संबंधों का आनंद ले रहा है, जो विश्वास और आपसी समझ के आधारित है। दोनों देश अच्छी तरह से स्थापित संसदीय परंपराओं और मजबूत संस्थानों के साथ जीवंत लोकतंत्र हैं।

    भारत-नामीबिया संबंधों की सीमा एवं विविधता को समझने के लिए, इतिहास में वापस जाना जरूरी है। 1946 में भारतीय अस्थायी सरकार द्वारा एक प्रतिनिधिमंडल भेजा गया था जिसने तत्कालीन दक्षिण पश्चिम अफ्रीका पर अपने जनादेश को जारी रखने के लिए संयुक्त राष्ट्र समझौता प्राप्त करने के लिए सफलतापूर्वक दक्षिण अफ्रीकी सरकार के प्रयासों को रोका है। भारत ने हर अंतरराष्ट्रीय मंच में नामीबिया मुक्ति संघर्ष के समर्थन में लगाम अपने हाथ में ली है और निर्वासन में नामीबिया नेतृत्व के लिए सभी संभव नैतिक, सामग्री और राजनीतिक समर्थन प्रदान किया है। नामीबिया की आजादी के बाद, नामीबिया के साथ भारत की भागीदारी लगातार फल-फूल रही है। द्विपक्षीय संबंधों की मजबूत नींव जिसे संस्थापक अध्यक्ष सैम नूजोमा के समय के दौरान रखी गई थी और जिसे आगे पूर्व राष्ट्रपति हिफिकेपून्ये पोहांबा के कार्यकाल के दौरान समेकित किया गया था। ये अब राष्ट्रपति हेग जिनगोब द्वारा प्रबलित और बढ़ाया जा रहा है।

    द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं में, व्यापार से संस्कृति तक, क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग से लेकर जन विनियमन तक लगातार सुधार देखा गया है। मैं हमारे द्विपक्षीय संबंधों की वर्तमान स्थिति से काफी खुश हूं।

    मुझे विश्वास है कि भविष्य में हमारे संबंधों हमें विकास के पथ पर ले जाएंगे। कई समानताओं स्पष्ट रूप से मौजूद हैं। यहां भारत में इन संसाधनों के लिए नामीबिया में खनिज संपदा और मांग की बहुतायत है। नामीबिया के लोगों में कौशल प्राप्त करने की मजबूत इच्छा है। भारत में उत्कृष्ट क्षमता निर्माण संस्थान हैं। मुझे विश्वास है कि हम कई नए क्षेत्रों में जीत की साझेदारी उत्पन्न कर सकते हैं।

  • श्रीमान राष्ट्रपित जी, क्या आप नामिबिया के राष्ट्र निर्माण और विकास में उनके लिए भारत की सहायता पर विवरण देना चाहते हैं?

    भारत विकास और राष्ट्र निर्माण में नामीबिया का भागीदार है और रहेगा। नामीबिया के पुनर्निर्माण कार्य के लिए भारत की प्रतिबद्धता, विशेष रूप से मानव संसाधन विकास और क्षमता निर्माण में दिखाई दे रही है और उसकी सराहना की गई है।

    नामीबिया की स्वतंत्रता तत्काल बाद, भारत सरकार ने N$ 22 मिलियन के सहायता पैकेज की घोषणा की, जिसने नामीबिया में भारतीय विशेषज्ञों को भेजना, भारत में नामीबिया वासियों का प्रशिक्षण, नामीबिया में विकास परियोजनाओं का कार्यान्वयन और आवश्यक उपकरणों का उपहार शामिल है। अब तक 1000 से अधिक नामिबिया वायिायों को आईटीईसी कार्यक्रम के तहत भारत में प्रशिक्षित किया गया है। कई भारतीय विशेषज्ञों - सरकारी और निजी - को आजादी के बाद से देश में नीति निर्माण के साथ शामिल किया गया है।

    नामीबिया की आजादी के बाद शुरुआती दिनों में, भारत ने स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई प्रणाली आदि जैसे विविध क्षेत्रों में सहायता प्रदान की है। बाद के दशको में, भारत ने प्रौद्योगिकी प्रदर्शन केन्द्रों की स्थापना में भी की है; पानी के लिए बोर होल्स इंस्टाल करवाए हैं, कृषि प्रशिक्षण संस्थानों में बायोगैस इकाइयां स्थापित की हैं; स्ट्रीट लाइट के लिए सौर परियोजनाओं में मदद की है; इंदिरा गांधी मातृत्व क्लिनिक के लिए प्रतिभाशाली इन्क्यूबेटरों को उपहार के रूप में देने के साथ साथ ट्रैक्टर और डीजल इंजन पंप की आपूर्ति की है। भारत ने कई मौकों पर नामीबिया के लिए सूखा राहत भी प्रदान की है। भारत ने हाल ही में, नामीबिया स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए US$5 मिलियन के आईसीटी उपकरण प्रदान किए हैं, जो ग्रामीण स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने में मदद करेगा। भारत ने नामीबिया विश्वविद्यालय (यूएनएएम) में इंजीनियरिंग और सूचना प्रौद्योगिकी संकाय की स्थापना के लिए US$12.3 मिलियन अनुदान सहायता भी प्रदान की है।

    हमारी विकास भागीदारी एक सतत कहानी है। प्रस्तावों नामीबिया में सूचना प्रौद्योगिकी एवं उद्यमशीलता विकास केंद्र में उत्कृष्टता केन्द्र की स्थापना के लिए विचाराधीन है, जो नामीबिया अधिकारियों की क्षमता को मजबूत बनाने और रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद करेगा।

  • आप क्या सोचते हैं कि कौन से विशिष्ट क्षेत्र दो देशों के बीच वर्धित व्यापार और व्यापार बातचीत के लिए सबसे गुंजाइश प्रदान करते हैं?

    यहां नामीबिया और भारत की अर्थव्यवस्थाओं में कई समानताएं हैं। यह दोनों पक्षों के व्यावसायिक समुदायों को सहयोग करने के लिए महत्वपूर्ण क्षमता प्रदान करता है।

    द्विपक्षीय व्यापार आंकड़े पूरी तरह से दोनों देशों के बीच वास्तविक या संभावित व्यापार को प्रकट नहीं करते हैं। बहुत सारे भारतीय माल को अन्य दक्षिण अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ (एसएसीयू) सदस्य देशों सहित तीसरे देशों के माध्यम से नामीबिया में आयात किया जाता है।

    यहां खनिज संसाधनों, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, नवीकरणीय ऊर्जा और छोटे और मध्यम उद्यमों जैसे क्षेत्रों में सहयोग के लिए काफी गुंजाइश है।

  • यहां विशेष रूप से दक्षिणी अफ्रीकी क्षेत्र में महत्वपूर्ण विकास हुआ है, और आर्थिक एकीकरण क्षेत्र में पिछले कई वर्षों में भारत भी एक नए उत्साह के साथ अफ्रीका के साथ संलग्न है। भारत इस क्षेत्र में, विशेष रूप से एसएडीसी/एयू क्षेत्र के आर्थिक विकास में क्या भूमिका निभा सकता है।

    एक साथ मिलकर, भारत और अफ्रीका ने मानवता के एक तिहाई का गठन किया है। हम दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक हैं। भारत और अफ्रीका अब दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक हैं और उन्हें मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में दो चमकीले स्पॉट माना जाता है। अफ्रीकी राष्ट्र अफ्रीका में शांति, सुरक्षा और विकास की जिम्मेदारी लेने के लिए एक दूसरे के साथ साझेदारी एवं सहयोग बढ़ा रहा है। आर्थिक सुधारों और बुनियादी ढांचे के विकास का सफल उदाहरण सभी महाद्वीप में दोहराया जा रहा है। ये सब बहुत सकारात्मक विकास है।

    भारत अफ्रीका का एक करीबी साथी होने के लिए खुश है। हमारी विकास भागीदारी सामरिक चिंताओं से परे है। यह साझेदारी अफ्रीका की प्रचुर मात्रा में खनिज संपदा के संकीर्ण लेंस से अफ्रीकी क्षेत्र को नहीं देखती है। भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन (आईएएफएस) की बैठकों का आयोजन 2008 के बाद से वास्तव में उनके संबंधित ताकत तालमेल को कायम करने के लिए भारत और अफ्रीका दोनों के प्रयासों का प्रतीक है, और पारस्परिक रूप से लाभप्रद संबंधों में बदल रहा है।

    भारत अब तक रियायती ऋण में US$ 7 और अफ्रीका के लिए US$ 1.2 बिलियन के अनुमोदन पर प्रतिबद्ध है। हमारे व्यापार की मात्रा अब US$ 70 बिलिन से अधिक है। अफ्रीका में भारतीय निवेश अब US$ 3.2 बिलियन से अधिक है। 34 अफ्रीकी देश भारतीय बाजार में शुल्क मुक्त प्रवेश का आनंद ले रहे हैं। भारत विविध क्षेत्रों में अफ्रीका में 100 से अधिक क्षमता निर्माण संस्थान बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    अक्टूबर 2015 में आईएएफएस III के आयोजन पर, भारत ने पांच वर्षों में 50,000 अफ्रीकी छात्रों को प्रशिक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यूएन शांति मिशन के साथ 80 प्रतिशत से अधिक भारतीय सेना को अफ्रीका में तैनात किया गया है। भारत ने सोमालिया में अफ्रीकी संघ मिशन के लिए यूएन एवं एयू ट्रस्ट फंड के लिए US$ 3 मिलियन और माली में अफ्रीकी संघ मिशन के लिए ट्रस्ट फंड के लिए $ 1 का योगदान दिया है।

  • राष्ट्रपति मुखर्जी, आपने एक बार देषर डाक नामक एक बंगाली समाचार पत्र के साथ एक पत्रकार के रूप में काम किया है। क्या आप हमारे साथ अपने पत्रकारिता कैरियर के मुख्य आकर्षण को साझा कर सकते हैं? एक पत्रकार के रूप में आपकी मुख्य चुनौतियां क्या थी?

    मीडिया समाज का दर्पण है। यह लोकतांत्रिक संस्थाओं और प्रक्रियाओं का रक्षक और संबल है। पत्रकार सिर्फ घटनाक्रमों की रिपोर्टिंग करने में ही नहीं बल्कि जनता को शिक्षित करने और बड़े पैमाने पर उनका मार्गदर्शन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पत्रकारिता के साथ मेरा कार्यकाल मेरे लिए एक महान अध्ययन अभ्यास था, क्योंकि इसने मुझे लोगों के दैनिक जीवन में आने वाली चुनौतियो, सरकार से उनकी उम्मीदों, उनकी आशाओं के बारे में मेरे देश में एक अंतर्दृष्टि प्रदान की है।

    भारतीय मीडिया का प्रभाव, विश्वसनीयता और गुणवत्ता को अच्छी तरह से दुनिया भर में मान्यता प्राप्त है। हमारा मीडिया पैमाने में फल फूल रहा है। इसका महत्व आगे उच्च साक्षरता स्तर और संचार प्रौद्योगिकी में क्रांति के साथ बढ़ा है। न्यू मीडिया ने पारंपरिक, ऑडियो-विजुअल, डिजिटल और सामाजिक मीडिया के बीच समानता के बारे में है। यह विचारों, आकांक्षाओं और हमारे लोगों के व्यवहार को आकार देने, हमारे देश के दूरस्थ कोनों के लिए एक शक्तिशाली साधन बन गया है।

    मुझे विश्वास है कि मीडिया को जन हित के एक प्रहरी के रूप में कार्य करना चाहिए। उन्हें जनता के विचारो को आकार देना चाहिए और उन्हें प्रभावित करना चाहिए। एक ही समय में, उदासी और अंधेरे को अकेले न्यूज़ कवरेज पर हावी नहीं होना चाहिए। समाज में अच्छा और महान है, उसे दर्शाने के लिए एक सचेत प्रयास करना चाहिए। मीडिया को बेहतरी के लिए सकारात्मक और प्रेरणादायक बदलाव पर प्रकाश डालना चाहिए। मीडिया की शक्ति का प्रयोग उदारवाद, सार्वजनिक जीवन में मानवतावाद और शालीनता को बढ़ावा देने के लिए करना चाहिए।

  • आपको पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा 1969 में राजनीति में पेश किया गया था। कृपया करके हमारे साथ विश्व स्तर पर सम्मानित स्वर्गीय भारतीय राजनीति विशारद की अपनी सबसे प्यारी यादों को साझा करें?

    पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी वास्तव में बीसवीं सदी की सबसे उल्लेखनीय हस्तियों में से एक थी। उन्होंने भारत के भाग्य को परिभाषित करने में एक प्रमुख भूमिका निभाई है।

    मैं आधुनिक भारत की सबसे गतिशील प्रधानमंत्रियों में से एक के साथ अपने सहयोग को याद करके खुश हूं, वो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित नेता थी और लोगों के प्रति जिनका समर्पण और प्रतिबद्धता अद्वितीय थी। श्रीमती इंदिरा गांधी ने वैश्विक शांति, निरस्त्रीकरण और नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था के लिए एक अथक योद्धा थी। वह न केवल अपने देश में, बल्कि दुनिया भर में फैले उत्पीड़न की एक अथक विजेता थी।

    श्रीमती इंदिरा गांधी ने 16 वर्षों तक भारत के प्रधानमंत्री के रूप में सेवा की है और अपने कार्यकाल के दौरान, वह मजबूती से विदेशी प्रभुत्व से पूरे अफ्रीकी महाद्वीप की कुल मुक्ति के लिए प्रतिबद्ध रही हैं।

    साम्राज्यवाद विरोधी, दुनिया भर के मुक्ति आंदोलनों के लिए समर्थन, और विशेष रूप से नामीबिया की स्वतंत्रता के साथ साथ दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ संघर्ष के लिए उनकी विदेश नीति एक प्रमुख आधारशिला थी। इस संबंध में श्रीमती गांधी के प्रयासों भावपूर्ण समकालीन इतिहास का हिस्सा हैं, और ऐसे संबंध बनाएं जो आज बहुत नजदीकी बन गए हैं।

    11 जनवरी 1982 में नई दिल्ली में अफ्रीकी छात्र संघ द्वारा आयोजित अफ्रीका वीक सांस्कृतिक महोत्सव में बोलते हुए, उन्होंने कहा, ‘‘...............मानवजाति तब तक पूरी तरह से मुक्त नहीं हो सकती है, जब तक उपनिवेशवाद, नस्लवाद और रंगभेद के अंतिम अवशेष को हटाया नहीं जाता। हमने लगातार दक्षिणी अफ्रीका के बहादुर लोगों की मुक्ति के संघर्ष और सरकारों एवं सीमावर्ती राज्यों के लोगों के लिए हमारी एकजुटता और अटूट समर्थन को दोहराया है। उन्होंने आजादी के लिए बलिदान दिए हैं, उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा है। हमने स्वतंत्रता के लिए नामिबिया के लोगों के अधिकार के लिए हमारे पूर्ण समर्थन की पुष्टि हैं और दक्षिण पश्चिम अफ्रीकी लोक संघ के नेतृत्व में संघर्ष के साथ हमारी एकजुटता को व्यक्त की हैं।’’

    श्रीमती गांधी ‘‘मानवता की एक नई अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के निर्माण की आवश्यकता के प्रति आश्वस्त थी जहां शक्ति करुणा से संयमित हो, जहां ज्ञान और क्षमता सम्पूर्ण मानव सेवा में हो’’। गुट निरपेक्ष आंदोलन के अध्यक्ष के रूप में, 1983 में संयुक्त राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने टिप्पणी की थी कि ‘‘कमजोर की सुरक्षा मजबूत की ताकत है।’’

    श्रीमती इंदिरा गांधी का दृढ़ विश्वास था कि छोटे देशों की दुनिया के भविष्य का निर्धारण करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका थी। उन्होंने विकासशील देशों को ‘‘औद्योगिक क्रांति के छोटे चरण’’ के रूप में संदर्भित किया था और कहा कि उन्हें न्याय दिए जाने की जरूरत है। भारत के उद्देश्य को आगे बढ़ाने में, उन्होंने कभी भी अन्य विकासशील देशों की आकांक्षाओं के खिलाफ काम नहीं किया है और न ही उनकी प्राथमिकताओं में समझौता किया है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण, वैश्विक संसाधनों के इष्टतम उपयोग और राजनीतिक और आर्थिक प्रणाली के पुनर्गठन से संबंधित असंख्य समस्याओं को पूरे विश्व समुदाय के सहकारी प्रयासों की जरूरत है।

    श्रीमती इंदिरा गांधी को हमेशा विकासशील देशों के बीच में सामंजस्य, एकता और वर्धित आर्थिक सहयोग बनाए रखने, उनके स्वायत्त विकास, सामूहिक आत्म निर्भरता और उत्तर एवं दक्षिण के बीच न्यायसंगत और लोकतांत्रिक बातचीत पर उनके अथक प्रयासों के लिए याद किया जाएगा।

    घरेलू नीतियों के संदर्भ में, श्रीमती इंदिरा गांधी गरीबों एवं सबसे वंचित वर्गों तक पहुंची थी। उन्होंने भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जबरदस्त प्रयास किए। पर्यावरण और ऊर्जा श्रीमती गांधी के एजेंडे पर उच्च प्राथमिकता मुद्दे थे। मुझे याद है कि एक बार उनेंने सभी राज्यों के मुख्य मंत्रियों को लिखकर हर बच्चे के लिए एक पेड़ लगाने का सुझाव दिया। उन्होंने पारंपरिक ऊर्जा बचत प्रौद्योगिकियों के मूल्य पर जोर दिया है - और नई प्रौद्योगिकियों के विकास और भारत की जरूरतों के लिए उन्हें अपनाने पर जोर दिया है।

  • अब आप 80 वर्ष से अधिक की हो गई हैं और अभी तक आप अत्याधिक काम करती हैं यानी आप दिन में 18 घंटे काम करती हैं। अपनी दीर्घायु और अत्यधिक सराहनीय कार्य नैतिकता के रहस्य को हमारे साथ साझा करें। कृपया हमें उस चीज के बारे में बताएं जिसके लिए आप भावुक महसूस करती हैं।

    मुझे लगता है कि यदि आप में अपने लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए जुनून है, तो कई अन्य बाते रास्ते में आना शुरू हो जाती हैं।

    मैंने हमेशा माना है कि देश और लोगों की सेवा करने का अवसर सबसे बड़ी सेवा है जिसके लिए एक व्यक्ति कामना कर सकता है।

    जन सेवक के लिए अपने देश का प्रथम नागरिक चुने जाने से अधिक कोई बड़ा इनाम नहीं होता है।

    मैंने यात्रा के दौरान विशाल, अविश्वसनीय परिवर्तन देखे हैं जिसने मुझे बंगाल के छोटे से गांव के लैम्प की झिलमिलाहट से दिल्ली का दीपाधार बना दिया है। मैं एक लड़का था जब मेरे राज्य, बंगाल में अकाल पड़ा था जिसने लाखों लोगो की जान ले ली थी; वो दुख और पीड़ा अब भी मुझ में से गई नहीं है। भारत ने कृषि, उद्योग और सामाजिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में एक बड़ा सौदा हासिल किया है; लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

    मुझे विश्वास है कि हमारा राष्ट्रीय मिशन गरीबी के अभिशाप को नष्ट करना और युवाओं के लिए ऐसे अवसरों का निर्माण करना है जिससे वे हमारे भारत को आगे ले जा सके। हमें उन्हें नीचे से उपर उठाना है ताकि गरीबी को आधुनिक भारत के शब्दकोश से मिटाया जा सके। हमारे विकास के वास्तविक होने के लिए, हमारे देश के सबसे गरीब व्यक्ति को महसूस करना चाहिए कि वे भारत की बढ़ती कथा का हिस्सा हैं।

    मुझे विश्वास है कि भारतीय होने के नाते, हमें अतीत से सीखना चाहिए और उसी समय में भविष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। मेरे विचार में, शिक्षा रसविधा है जो ज्ञान संचालित 21वीं सदी में समृद्धि के लिए भारत और अन्य विकासशील देशों का नेतृत्व कर सकती है। जिस सिद्धांत की मैं वकालत करता हूं वो हैः ज्ञान के लिए सभी और सभी के लिए ज्ञान।

    मैंने ऐसे भारत का सपना देखा है जहां उद्देश्य की एकता जन हित को बढ़ाती है; जहां केन्द्र एवं राज्यों का संचालन सुशासन की एक विलक्षण दृष्टि से किया जाए; जहां हर क्रांति हरित हो; जहसं लोकतंत्र का अर्थ महज पांच साल में एकबार वोट देने का अधिकार ही नहीं है, बल्कि हमेशा जन हित में बात करना भी हो; जहां ज्ञान बुद्धिमता बन जाए और जहां युवा अपनी अभूतपूर्व ऊर्जा और प्रतिभा को सामूहिक कारण में ढाल सके।

  • अब इस साक्षात्कार के केन्द्र बिंदु पर आते हैं कि दक्षिण-दक्षिण सहयोग के संदर्भ में इस यात्रा का क्या महत्व है?

    भारत और नामीबिया दोनों विकासशील देश हैं। हम दोनों ने अपनी अपनी विकास यात्रा को पार करके, अनुभव प्राप्त किया है जो कई मायनो में हमारे लिए अद्वितीय है और एक दूसरे के लिए प्रासंगिक हैं। यहां कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां भारत नामीबिया के अनुभवों से सीख सकता है। भारत नामीबिया से सीख सकता है कि इसने कैसे एक स्थायी तरीके से अपने पर्यटन उद्योग को विकसित किया है। नामीबिया का मत्स्य और समुद्री प्रसंस्करण उद्योग में भी भारतीय उद्योग के लिए कई महत्वपूर्ण सबक हैं। इसी प्रकार, यहां कृषि, उद्योग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विशेष रूप से आईसीटी जैसे कई क्षेत्र हैं, जहां नामीबिया भारतीय अनुभव से फायदा उठा सकता है। मेरी इस यात्रा के दौरान, मैं विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत बनाने के तरीको एवं साधनों पर चर्चा की आशा करता हूं।

  • आपकी एतिहासिक यात्रा को देखते हुए नामीबिया में भारतीय निवेश के मामले में क्या हम अधिक व्यापार अवसरों की उम्मीद कर सकते हैं?

    आज, भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रही बड़ी अर्थव्यवस्था है। नामीबिया के लिए मेरी यात्रा भी तब हो रही है, जब भारत सरकार अपनी अर्थव्यवस्था, खासकर घरेलू औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रहा है। इसने हमारे देशों, जो अब तक असली क्षमता से नीचे बने हुए हैं, के बीच, व्यापार, व्यवसाय और निवेश के लिए काफी अवसर प्रदान किए हैं।

    नामीबिया के लिए मेरी यात्रा के दौरान, मैं राष्ट्रपति डॉ हेग जी. जेनगोब से व्यवसाय और व्यापार संबंधों सहित द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा करूंगा।

  • आप नामीबिया में भारतीय निवेश में वृद्धि की संभावनाओं को कैसे देखते हैं? और क्या चुनौतियां हो सकती हैं?

    वर्तमान में, नामीबिया में भारतीय निवेश जिंक स्मेल्टिंग और खनन, रेलवे स्लीपर निर्माण, फार्मास्यूटिकल्स, पैकेजिंग, डायमंड कटिंग और पॉलिशिंग आदि के क्षेत्रों में किया गया है। नामीबिया प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक संसाधनों के साथ सम्मानित है। मुझे लगता है कि यहाँ उत्कृष्ट अवसरों का लाभ उठाने के लिए भारत के निवेशको की महत्वपूर्ण रूचि है। भारत सरकार भारत से नामीबिया के लिए अधिक निवेश की सुविधा प्रदान करने के लिए खुश होगी। हालांकि, इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक स्थिति ने निवेशकों को नए संसाधनों की प्रतिबद्धता में सतर्क बना दिया है। आकर्षक शर्तों और भारतीय उद्योग की चिंताओं को संबोधित करना भारतीय निवेशकों के लिए एक सकारात्मक वातावरण पैदा करेगा।

  • भारत को एक निवेश गंतव्य के रूप में दुनिया भर में निवेशकों के लिए एक प्रमुख विकल्प का दर्जा दिया गया है। अनुमोदन रेटिंग्स इसे चीन से दोगुना और ब्राजील से छह गुना अधिक दर्षाती है। महामहिम, क्या आप हमारे साथ इस अद्भुत सफलता के नुस्खे को साझा कर सकते हैं?

    भारतीय अर्थव्यवस्था की कई आंतरिक ताकते हैं जो इसे अन्य देशों से अलग करती हैं। बड़े घरेलू बाजार, मजबूत संस्थाएं, जनसांख्यिकीय लाभ, उत्कृष्ट विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर्यावरण और आर्थिक गतिविधियों को सक्षम करने के लिए मजबूत कानूनी ढांचा ऐसे कुछ कारक हैं जो भारत को अद्वितीय स्थान देती है।

    इसके अलावा, हमारी विकास रणनीति सभी के साथ क्षमता निर्माण पर जोर देती है। यह हमारा दृढ़ विश्वास है कि आर्थिक और सामाजिक समस्याओं को लोगों द्वारा स्वयं हल किया जा सकता है, अगर उनके पास आवश्यक कौशल और विशेषज्ञता हो। हमारे औपनिवेशिक अनुभव ने हमें सिखाया है कि यह अपनी क्षमता का विकास करना और दूसरों पर निर्भर न रहना महत्वपूर्ण है। इसलिए, हमारे स्वतंत्रता के समय से ही हमने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, चिकित्सा आदि में कौशल के निर्माण पर जोर दिया है। हमने उच्च स्तर के कई तकनीकी और शैक्षणिक संस्थानों का निर्माण किया है। नतीजतन, भारत आज लगभग हर क्षेत्र में अत्यधिक प्रतिभावान मानव संसाधन के लिए घर है। हम दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी वैज्ञानिक और तकनीकी जनशक्ति हैं।

    आज, भारत सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था की असली क्षमता को अनलॉक करने के लिए और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए ‘स्वच्छ भारत’, ‘डिजिटल इंडिया’, ‘स्मार्ट सिटी’, ‘मेक इन इंडिया’, जैसे कई अभिनव कार्यक्रमों को शुरू किया है।यह भारतीय अर्थव्यवस्था की गतिशीलता है जो भारत को विदेशी निवेशकों के लिए एक प्रमुख गंतव्य बना रही है।

  • आखिरी पर कम नहीं, हम निवेश, कौशल हस्तांतरण, मानव क्षमता और कौशल विकास और निश्चित रूप से दक्षिण-दक्षिण सहयोग के संदर्भ में अपने दौरे के बाद हम संभावित रूप से क्यो देखेंगे?

    अपनी इस यात्रा के दौरान, दोनों पक्ष द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा करेंगे और हमारे संबंधो को मजबूत बनाने और उसे पुनः उर्जित करने के उपायों पर निर्णय लेंगे। भारत को नामीबिया के विकास भागीदार होने पर गर्व है। हमारी भागीदारी में कृषि, एसएमई, स्वास्थ्य, शिक्षा, आदि जैसे कई क्षेत्रों को शामिल किया गया है। हम आगे इन क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करना चाहते हैं। हम इस प्रयास में हमारे साथ निजी क्षेत्र सहित सभी हितधारकों को लेकर चलना चाहते हैं। मुझे दोनों पक्षों के संयुक्त प्रयास पर पूरा भरोसा है, जो हमारे संबंधों को एक नई ऊंचाई तक पहुंचाएगा।
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