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उपराष्ट्रपति की लातविया यात्रा पर सचिव (पश्चिम) की मीडिया वार्ता का प्रतिलेख (20 अगस्त, 2019)

अगस्त 22, 2019

अवर सचिव (डिजिटल कूटनीति) : उपराष्ट्रपति की लातविया यात्रा पर रीगा, लातविया से इस विशेष पत्रकार सम्मेलन में आपका स्वागत है। उप-राष्ट्रपति कल रीगा पहुँचे और तब से वे कई कार्यक्रमों में व्यस्त हैं। मेरे साथ स्वीडन और लातविया में भारत की राजदूत, श्रीमती मोनिका मोहता, सचिव (पश्चिम), श्री ए गीतेश शर्मा और संयुक्त सचिव (सीई), डॉ. अंजू कुमार उपस्थित हैं, जो हमें उपराष्ट्रपति की विभिन्न व्यस्तताओं के बारे में जानकारी देंगे।

मैं सचिव (पश्चिम) को अपनी प्रारंभिक टिप्पणी देने के लिए आमंत्रित करूँगा, जिसके बाद हम कुछ प्रश्नों के उत्तर देंगे। महोदय, आपनी बात आरंभ करें।

सचिव (पश्चिम), श्री ए गीतेश शर्मा : शुभ संध्या, इस प्रेस वार्ता में आपका स्वागत है। माननीय उपराष्ट्रपति की बाल्टिक क्षेत्र के महत्वपूर्ण देशों के यात्रा जारी है। यह इस क्षेत्र की एक ऐतिहासिक यात्रा का हिस्सा है। वे पहले लिथुआनिया गए थे, अब लातविया में हैं और यहाँ से एस्टोनिया जाएंगे। यह यात्रा वास्तव में बहुत महत्वपूर्ण है। यह 1990 के दशक की शुरुआत में हमारे राजनयिक संबंधों की स्थापना के बाद से पहली उच्च स्तरीय यात्रा है।

यह यात्रा आशा के अनुरूप रही है। माननीय उपराष्ट्रपति ने आज सुबह स्वतंत्रता स्मारक का दौरा किया, वहाँ माल्यार्पण किया और उनका औपचारिक स्वागत किया गया। उन्होंने राष्ट्रीय इतिहास संग्रहालय का दौरा किया। यह लातविया के इतिहास की एक अद्भुत प्रस्तुति थी, इस संग्रहालय में लातविया राष्ट्र की ऐतिहासिक घटनाओं की एक श्रृंखला दर्शायी गयी है। इसके स्वतंत्र होने, अपनी स्वतंत्रता गंवा देने और फिर से अपनी स्वतंत्रता प्राप्त करने के विवरण संग्रहित हैं।

माननीय उपराष्ट्रपति इस प्रस्तुति को देखकर अत्यंत प्रसन्न हुए, जिसने हमें इस देश और इसके गौरवशाली इतिहास के बारे में बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान की। आज सुबह महामहिम, प्रधानमंत्री कृस्जैनिस कैरिंस के साथ उनकी बैठक हुई और सांस्कृतिक सहयोग, सीईपी - सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम पर एक समझौता ज्ञापन था, यह वास्तव में एक ऐसी चीज है जिसे दोनों देश काफी महत्व देते हैं।

हालाँकि, लातविया और भारत दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हैं, लेकिन दोनों देशों में एक बहुत ही मजबूत भावना है कि संस्कृत के द्वारा हमारे कुछ सांस्कृतिक संबंध हैं और इसे पूरी तरह से समझना अभी बाकी है। हमें अनेक समानताएँ दिखाई देती हैं, लेकिन इन पहलुओं की पहचान करने के लिए और अधिक संयुक्त गतिविधियाँ होनी चाहिए और इस सांस्कृतिक समानता के कारण एक भावनात्मक लगाव है।

आप जानते हैं कि माननीय उपराष्ट्रपति जी उच्च सदन यानी राज्य सभा की अध्यक्षता भी करते हैं। यह लातवियाई संसद के लिए बहुत ही दिलचस्प यात्रा थी - सेईमा और उन्होंने कार्यवाहक अध्यक्ष, सुश्री इनिस लीबिना-एग्निरे के साथ बैठक की। लातवियाई संसद का मैत्री समूह भी था, जो भारत के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित है और यह एक बहुत ही दिलचस्प और लाभकर बैठक थी जहाँ संसदों के बीच सहयोग, संसदीय प्रक्रियाओं, पद्धतियों पर चर्चा की गई थी। हमारे लोकतांत्रिक जीवन के पहलुओं पर चर्चा की गई थी जो एक-दूसरे के लिए सामान्य हैं और चुनावों सहित भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था के पैमाने को भी समझा गया। लातविया बहुत छोटा है, लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि हमारे पास एक-दूसरे से सीखने के लिए, एक-दूसरे को योगदान देने के लिए बहुत कुछ है। इसलिए यह पहलू सामने आया और यह यात्रा वास्तव में नई चीजों को बनाने और आगे बढ़ने के लिए थी।

लातविया के राष्ट्रपति द्वारा माननीय उपराष्ट्रपति का स्वागत किया गया था। एक एकांतिक बैठक और उसके बाद प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता हुई थी। मुझे लगता है कि प्रमुख विषय हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों का सुदृढ़ीकरण, लोकतंत्र में समानता, कानून के शासन के लिए सम्मान था, जो हमें एक-दूसरे के बहुत करीब लाता है। हम एक दूसरे के साथ काम करने में बहुत सहजता का अनुभव करते हैं।

यह दूसरा पहलू सामने आया है कि आर्थिक सामग्री के मामले में लातविया, भारत के लिए यूरोप का बहुत अच्छा प्रवेश द्वार हो सकता है, यह अपेक्षाकृत छोटा देश है, लेकिन यह हमें यूरोप में प्रवेश बिंदु प्रदान करता है। हम इसका दोहन कर सकते हैं, इसके अलावा शुद्ध द्विपक्षीय अभ्यास और व्यापार, आईटी (सूचना प्रौद्योगिकी), कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, व्यापार आदान-प्रदान, संस्कृति और फिल्मों के संबंध में भी सहयोग के अवसर हैं।

सभी बैठकों में यह बात वास्तव में उल्लेखनीय थी कि वार्ताकारों ने भारतीय फिल्मों, बॉलीवुड के साथ किस तरह का संपर्क किया है। वार्ताकारों ने उसके बारे में बहुत प्यार से बात की क्योंकि यह लोकप्रिय रूप से संदर्भित है और हमारी इच्छा है कि हमें इस क्षेत्र में और अधिक काम करना चाहिए।

फार्मास्यूटिकल्स एक अन्य क्षेत्र है, इसके अलावा दूरसंचार, जैव प्रौद्योगिकी जैसे कुछ निश्चित क्षेत्र हैं, जहाँ शायद हम लातविया से स्रोत प्राप्त कर सकते हैं क्योंकि वे बड़े तौर पर भारत की उपस्थिति में भी रुचि रखते हैं।

बाद में शाम को हमारा एक व्यापार मंच होगा जहाँ लातविया के राष्ट्रपति, हमारे माननीय उपराष्ट्रपति से मिलेंगे। इससे पता चलता है कि यह कार्यक्रम किस स्तर पर हो रहा है। इसलिए इन मैत्रीपूर्ण भावनाओं को एक-दूसरे की व्यावसायिक गतिविधि और व्यवसाय से संबंधित परिणामों में बदलने को काफी महत्व दिया जाता है।

शाम को राष्ट्रीय पुस्तकालय में महात्मा गांधी की आवक्ष प्रतिमा का अनावरण भी होगा। महात्मा गांधी शांति, अहिंसा और सरल जीवन के प्रतीक हैं। उनका संदेश लातविया सहित बाल्टिक क्षेत्र में बहुत गूंजता है। जब वे अपनी स्वतंत्रता को पुनः प्राप्त करने का प्रयास कर रहे थे, उस अवधि में उन्हें गांधीवादी संदेशों और गांधीवादी शिक्षाओं से सहारा मिला, मुझे लगता है, शायद राष्ट्रीय पुस्तकालय में महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थापित करने की पृष्ठभूमि भी यही रही होगी।

मुझे लगता है कि मैंने आपको अब तक की यात्रा का विवरण दे दिया है। एक बार फिर मैं दोहराता हूँ कि यह एक ऐतिहासिक यात्रा है, जो कई अन्य प्रकार की परिणाम उन्मुख गतिविधियों के लिए मंच बना रही है।

मेरा अनुमान है कि मुझे आपके पूछने से पहले इस बिंदु का उल्लेख करना चाहिए कि एक निवासी दूतावास की उपस्थिति से भारी अंतर पड़ता है और लगभग पाँच वर्ष पहले भारत में लातवियाई दूतावास खोला गया। यहाँ यह भावना बहुत मजबूत थी कि इसने हमारे संबंधों को मजबूत करने में योगदान दिया है और दुनिया के इस हिस्से में भारत द्वारा अपना दूतावास खोले जाने में भी इनकी रुचि है।

हम सतर्क थे और हमने जवाब भी दिया क्योंकि हम जवाब दे सकते हैं कि इस मामले को उस स्तर पर महत्व दिया जा रहा है, जिसकी उसे जरूरत है और जिसका वह हकदार है। हम सोचते हैं कि यह इस पर गंभीरता से विचार करने का सही समय हो सकता है और देखें कि हम ऐसा कैसे कर सकते हैं। इसलिए मुझे लगता है कि लातविया का पक्ष आश्वस्त है कि हम इसे बहुत अधिक महत्व देते हैं। तो हम निवासी मिशन के मुद्दे पर यहाँ हैं।

एक और बात, मैं बस इतना कहता हूँ कि हम लिथुआनिया से आ रहे हैं और हम देख रहे हैं कि भारतीय छात्र बाल्टिक के विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों तक तेजी से पहुँच बना रहे हैं। हमने लिथुआनिया में लगभग 1000 छात्रों को देखा और यहाँ उनकी संख्या 2000 के आसपास है। इसलिए वे बेहद खुश हैं और जहाँ तक विदेशी छात्रों की बात है, वे छात्रों की संख्या के मामले में पहले स्थान पर हैं

यह एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ वे खुशी महसूस करते हैं, भारतीय छात्रों का स्वागत करने के साथ-साथ उन्हें शिक्षा के लिए समर्पित बहुत गंभीर व्यक्ति माना जाता है, इसलिए उनका सम्मान भी किया जाता है। इस बात पर बहुत संतोष है कि भारतीय उच्च शिक्षा के लिए लातविया का चयन कर रहे हैं, इसलिए आज की लगभग सभी चर्चाओं और बैठकों में यह बात सामने आई। तो मैं यहाँ समाप्त करता हूँ। क्या आप कुछ जोड़ना चाहेंगे?

अवर सचिव (डिजिटल कूटनीति) : धन्यवाद महोदय। अब हम प्रश्नोत्तर सत्र आरंभ करते हैं।

प्रश्न: संयुक्त प्रेस बयान में कहा गया कि वे आतंक और समुद्री डकैती सहित अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। तो वास्तविक चर्चाएं क्या थीं, क्या वे कश्मीर के मामले पर केंद्रित थे या यह कुल मिलाकर आतंक और वैश्विक क्षेत्र में आतंक के खतरे के बारे में था?

सचिव (पश्चिम), श्री ए गीतेश शर्मा :
चूंकि हम अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में घनिष्ठ समझ रखते हैं, हम अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर, संयुक्त राष्ट्र में और अन्य मंचों पर भी, एक दूसरे को परस्पर समर्थन देते हैं, हम परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह की सदस्यता को लक्षित कर रहे हैं।

लातविया ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और वे परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह के अध्यक्ष भी थे। उनके बोर्ड में होने से हमने बहुत लाभ उठाया और हम काम करना जारी रखेंगे, इसलिए एक क्षेत्र यह है। हम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की भारत की स्थायी सदस्यता के मामले में निरंतर समर्थन के लिए भी तत्पर हैं।

हमने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत की आबादी वैश्विक आबादी के छठे हिस्से के बराबर है और अन्य साख के साथ हमारा दावा बहुत मजबूत है। इसलिए लातवियाई लोग भी भारत के दावे का सम्मान करते हैं, वे भारत के दावों का समर्थन करते हैं। अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और संयुक्त राष्ट्र की गैर-स्थायी सीट की भी उम्मीदवारी थी और हम एक-दूसरे की उम्मीदवारी के समर्थक हैं। इस तरह की समझ के साथ, यह आश्चर्यजनक नहीं होगा कि अन्य सभी पहलुओं पर हमारे बीच एक स्पष्ट चर्चा हुई।आतंकवाद हमारे लिए चिंता का विषय है और आतंकवाद ने हमारे देश को जिस तरह से प्रभावित किया है, हमें दृढ़ संकल्प होकर उसका मुकाबला करना है। अंतर्राष्ट्रीय समर्थन भी है जिसे हम अपनी बहुत मजबूत लोकतांत्रिक साख के आधार पर देख रहे हैं।हमने उन्हें उन महत्वपूर्ण मुद्दों पर जानकारी दी है जहाँ हमें अधिक समर्थन की आवश्यकता है और लातविया के यूरोपीय संघ का सदस्य होने के नाते, वे आतंकवाद और उससे संबंधित सभी पहलुओं, हमारे पड़ोसियों के साथ हमारे संबंधों को आगे बढ़ा सकते हैं, इसलिए उन सभी पहलुओं को पर्याप्त रूप से शामिल किया गया है और मैं कह सकता हूँ कि पारस्परिक रूप से भी ऐसा किया गया है।

लातवियाई पक्ष ने हमें इस क्षेत्र के आसपास की स्थिति और यहाँ तथा यूरोप में इसे देखने के तरीके पर भी जानकारी दी। इसलिए दोनों पक्षों को बहुत लाभ हुआ है। वास्तव में ये उच्च स्तरीय दौरे ऐसे क्षण होते हैं जब आपसी समझ को प्रबल करना होता है और मुझे कहना चाहिए कि यह एक ऐसा देश है जो हमेशा हमारे साथ है। इसलिए यह एक दूसरे के लिए महत्वपूर्ण मामलों पर विचारों के निरंतर आदान-प्रदान का एक हिस्सा है।

प्रश्न : संयुक्त बयान में जलवायु परिवर्तन का भी एक बिंदु था। तो प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता में किस तरह की चर्चा हुई?

सचिव (पश्चिम), श्री ए गीतेश शर्मा हम अन्य देशों के अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का हिस्सा बनने के लिए अवसर का विस्तार करने में रुचि रखते हैं। कुछ बदलाव ऐसे भी हैं जिन्हें अन्य देशों के इसमें शामिल होने से पहले किया जाना आवश्यक है। यहाँ के देश अक्षय ऊर्जा की ओर देख रहे हैं और भारत में नवीकरणीय ऊर्जा और सौर ऊर्जा की संभावनाओं पर बहुत अधिक ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

इसलिए हमने यह दोहराया कि हमारी इच्छा है कि अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन ऐसा हो जो सभी के लिए सार्थक हो और लातविया को भी इस पर विचार करना चाहिए। जलवायु परिवर्तन एक ऐसी समस्या है जो सभी को अनिवार्य रूप से चिंतित करती है, यह महत्वपूर्ण चर्चाओं में शामिल थी।

अवर सचिव (डिजिटल कूटनीति) : मुझे कोई अन्य प्रश्न नहीं दिखता है इसलिए हम इस विशेष मीडिया वार्ता को समाप्त करते हैं। हमसे जुड़ने के लिए आप सभी का धन्यवाद।

 

(समापन)
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