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प्रधानमंत्री की फ्रांस की आगामी यात्रा पर विदेश सचिव के वक्तव्य का प्रतिलेख

अगस्त 23, 2019

भारत के विदेश सचिव, श्री विजय गोखले : प्रधानमंत्री ने कल शाम राष्ट्रपति मैक्रों के साथ उत्कृष्ट चर्चा की। यह चर्चा 90 मिनट से अधिक समय तक चली और यह चर्चा बहुत सौहार्दपूर्ण और मित्रवत परिवेश में हुई और इस चर्चा से फ्रांस और भारत दोनों के रणनीतिक साझेदार होने की पुष्टि हुई हैं।

उनके चर्चा के विषयों में जी -7 की आगामी बैठक पर चर्चा भी शामिल थी।

प्रधानमंत्री ने इस बैठक के लिए भारत को आमंत्रित करने के लिए राष्ट्रपति मैक्रों को धन्यवाद दिया और प्रधानमंत्री ने अवगत कराया कि भारत उन सभी पहलुओं पर फ्रांस के साथ खड़ा है जिन पर फ्रांस अनुसरण कर रहा है और हम जी -7 बैठक के लिए फ्रांस के एजेंडे को पूरा करने में सफलता की कामना करते हैं।

स्पष्टतः, शनिवार और रविवार को बिरिट्ज़ में हो रही जी -7 बैठक का प्रमुख विषय पर्यावरण और वैश्विक ऊष्मता है।

प्रधानमंत्री ने अवगत कराया कि पेरिस समझौते के लिए भारत प्रतिबद्ध है, जिसमे भारत ने महत्वपूर्ण प्रतिबद्धताएं की हैं जिनको पूरा करने की इसकी मंशा है और प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि जी -7 देशों और बड़े पैमाने पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को पर्यावरण के संबंध में अपनी वैश्विक ऊष्मता के लिए, प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण के लिए, वैश्विक वित्तपोषण के लिए, ऊर्जा के उपयोग की अधिक कुशल प्रणालियों को स्थानांतरित करने आदि की प्रतिबद्धता को पूरा करना चाहिए।

द्विपक्षीय पक्ष पर, इस क्षेत्र में भारत और फ्रांस के बीच भारत-प्रशांत पर सहयोग की संभावनाओं पर दोनों नेताओं के बीच कुछ चर्चा हुई।

जैसा कि आप जानते हैं कि फ्रांस में एक द्वीप क्षेत्र, रीयूनियन द्वीप है, और दोनों नेताओं के बीच कुछ चर्चा हुई कि दोनों पक्ष भारत-प्रशांत में दिक्चालन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए कैसे सहयोग कर सकते हैं।

साइबर सुरक्षा निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है जिसमें दोनों देशों की रुचि हैं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक अन्य क्षेत्र है। फ्रांस के राष्ट्रपति और भारत के प्रधानमंत्री ने चर्चा की कि हम इस क्षेत्र में कैसे सहयोग कर सकते हैं।

रक्षा और असैन्य परमाणु में द्विपक्षीय सहयोग पर भी सामान्य चर्चा हुई। ये लंबे समय से चल रहे सहयोग के क्षेत्र हैं। हमने अभी क्रमशः नौसेना और वायु अभ्यास, वरुणा और गरुण का समापन किया है। सेना का अभ्यास होने वाला है।

प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से कहा कि हमारे यहाँ फ्रांस से आने वाले छात्रों की संख्या बहुत अधिक है। उन्होंने खुशी जताई कि हमारी फ्रांस के साथ माइग्रेशन और मोबिलिटी की साझेदारी है जो छात्रों को फ्रांस में आने के बाद भी कुछ वर्षों तक काम करने के लिए रहने की अनुमति देता है।

और समग्र रूप में, दोनों देशों के बीच एक समझ थी कि हम आने वाले दिनों और महीनों में द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाएंगे।

क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की गई। उनमें से कुछ जो हमारे क्षेत्र से संबंधित थे, उनमें से कुछ जो फ्रांस के आसपास के क्षेत्र से संबंधित थे, लेकिन उन पर भी चर्चा की गई थी, जिन्हे राष्ट्रपति मैक्रों द्वारा भी अवगत कराया गया था, जो अपने सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद की बहुत स्पष्ट निंदा थी।

संयुक्त बयान से आप देखेंगे कि दोनों नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद की विशेष रूप से निंदा की है।

विशेष रूप से हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तैयबा, और जैश-ए-मोहम्मद जैसे कई आतंकवादी संगठनों का भी संयुक्त बयान में उल्लेख किया गया है, जिनसे विशेष रूप से दोनों देशों और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए खतरा है।

आपने प्रेस वक्तव्यों को देखा होगा जिन्हे लाइव किया गया था जिसमें राष्ट्रपति मैक्रों ने बहुत स्पष्ट रूप से कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच के मुद्दों को द्विपक्षीय रूप से हल किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने अनुच्छेद 370 पर सरकार द्वारा हाल ही में उठाए गए कदमों को पूरी तरह से आंतरिक मामला बताया।

दोनों नेता इस मामले और अन्य मामलों पर संपर्क में बने रहने के लिए भी सहमत हुए।

कुल मिलाकर मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही संतोषजनक चर्चा थी जो प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति के साथ की थी।

आज प्रातः वे फ्रांस के प्रधानमंत्री के साथ बातचीत करेंगे और फिर संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन की यात्रा के लिए रवाना होने से पहले भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे।

धन्यवाद।
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