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प्रधानमंत्री की बहरीन यात्रा के दौरान सचिव (पू.क्षे.) की मीडिया वार्ता का प्रतिलेख

अगस्त 25, 2019

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : मित्रों, नमस्कार और प्रधानमंत्री की संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन की यात्रा पर मनामा, बहरीन से इस विशेष वार्ता में आप सभी का स्वागत है। जैसा कि आप जानते हैं प्रधानमंत्री कल रात अबू धाबी पहुँचे थे। आज सुबह संयुक्त अरब अमीरात में उनके कई कार्यक्रम थे। आज दोपहर उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात से मनामा के लिए प्रस्थान किया और वे पहले ही प्रधानमंत्री से मिल चुके हैं।

आपको प्रधानमंत्री की पहले दिन की व्यस्तताओं के बारे में संक्षिप्त जानकारी देने के लिए मेरे साथ विदेश मंत्रालय के सचिव (आर्थिक संबंध), श्री टी. एस. तिरुमूर्ति उपस्थित हैं। मेरे साथ संयुक्त सचिव (खाड़ी) श्री नागेंद्र प्रसाद भी हैं। हम श्री तिरुमूर्ति द्वारा प्रारंभिक टिप्पणियों के साथ आरंभ करेंगे और उसके बाद यदि आपका कोई प्रश्न हो तो, हम कुछ प्रश्नों के उत्तर देंगे। महोदय, मैं आपको प्रारंभिक टिप्पणियों के लिए आमंत्रित करता हूँ।

सचिव (पू. क्षे.) श्री टी एस तिरुमूर्ति : आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। मैं यथासंभव स्पष्ट रहने की कोशिश करूँगा।

माननीय प्रधानमंत्री ने अपनी तीन देशों की यात्रा के दूसरे चरण में अबू धाबी का दौरा किया। वे कल देर रात यहाँ पहुँचे, पिछले चार वर्षों में संयुक्त अरब अमीरात की यह उनकी तीसरी यात्रा है।

प्रधानमंत्री की पहला कार्य रुपे कार्ड का शुभारंभ करना था। रुपे कार्ड को मध्य पूर्व में पहली बार लॉन्च किया जा रहा है और यह विदेशों में नकद विहीन लेनदेन के नेटवर्क का विस्तार करेगा।

इस अनूठे रुपे कार्ड को आरंभ करने के लिए एनपीसीआई और मर्करी के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए, जो बाद में स्थानीय बैंकों को भी रुपे कार्ड जारी करने का अधिकार प्रदान करेगा। रुपे कार्ड को आरंभ करने के समय सबसे प्रमुख अनिवासी व्यापारियों में से 20 व्यापारी उपस्थित थे और उन्होंने इस पहल का समर्थन करने की सहमति दी। उन्होंने जम्मू-कश्मीर निवेश कार्यक्रम में भाग लेने के लिए भी एक मजबूत समर्थन व्यक्त किया, इसकी योजना जम्मू और कश्मीर में निवेश और मानव संसाधन विकास के माध्यम से बनाई जा रही है।

शाही महल में, प्रधानमंत्री का औपचारिक स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री ने शाही महल में अबू धाबी के महामहिम, ताजनशीन शाहजादे शेख मोहम्मद बिन जायद अल-नाहयान के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों नेताओं ने कई मुद्दों पर चर्चा की।

महामहिम, ताजनशीन शाहजादे ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया जिसे उन्होंने अपने ‘दूसरे घर’ के रूप में संदर्भित किया। उन्होंने हमारे संबंधों और हम जिस स्तर तक पहुँच गए हैं, उसका बहुत गर्मजोशी से उल्लेख किया। उन्होंने चुनौतियों पर काबू पाने के लिए भारत और संयुक्त अरब अमीरात के साथ मिलकर काम करने के महत्व पर बल दिया।

महामहिम, ताजनशीन शाहजादे ने भारतीय समुदाय के मजबूत योगदान की सराहना की और इस बात को रेखांकित किया कि ये भावनाएं उनके हृदय से निकल रही हैं। उन्होंने कहा कि हमारे द्वारा निर्मित सेतुओं को और मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने कट्टरता मिटाने की दिशा में निकटता से काम करने के महत्व पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने भी इन मैत्रीपूर्ण भावनाओं को दोहराया और संयुक्त अरब अमीरात से अपने निकट संबंध को संदर्भित किया। उन्होंने हमारे संबंधों में आई नई ऊर्जा का उल्लेख किया और संयुक्त अरब अमीरात के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, ऑर्डर ऑफ जायद से उन्हें सम्मानित करने के लिए महामहिम, ताजनशीन शाहजादे के प्रति आभार व्यक्त किया।

उन्होंने उल्लेख किया कि 2017 में गठित सामरिक भागीदारी ने हमारे संबंधों को काफी महत्वपूर्ण बनाया है और रक्षा, सुरक्षा, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, अंतरिक्ष, व्यापार और निवेश आदि को शामिल करते हुए हमारे संबंधों को सही मायने में बहुमुखी बनाया है।

बाद में दोनों नेताओं ने एकांत में वार्ता की, जिसमें उन्होंने क्षेत्रीय मुद्दों सहित अनेक विषयों पर चर्चा की। प्रधानमंत्री को संयुक्त अरब अमीरात के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार द्विपक्षीय संबंधों में प्रधानमंत्री के योगदान, इस्लामी राष्ट्रों के साथ हमारे संबंधों को बढ़ाने के उनके प्रयासों और वैश्विक मंच पर भारत के महत्व को बढ़ाने के लिए प्रदान किया गया। प्रधानमंत्री 1.3 अरब भारतीयों की ओर से इस सम्मान को स्वीकार किया।

प्रधानमंत्री और महामहिम, अबू धाबी के ताजनशीन शाहजादे ने महात्मा गांधी पर एक डाक टिकट भी जारी किया। महात्मा गांधी की 150वीं वर्षगांठ मनाने के लिए संयुक्त अरब अमीरात में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। आपको याद होगा कि पिछले वर्ष तत्कालीन विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज की यात्रा के दौरान गांधी जायद संग्रहालय की सॉफ्ट लॉन्चिंग की गई थी।

महामहिम, ताजनशीन शाहजादे ने प्रधानमंत्री के सम्मान में दोपहर के भोज का आयोजन किया जिसके बाद प्रधानमंत्री ने बहरीन के लिए प्रस्थान किया।

प्रधानमंत्री अपनी तीन देशों की यात्रा के तीसरे चरण में बहरीन पहुँचे। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की बहरीन के स्वतंत्र राज्य की यह पहली यात्रा है। पिछली उच्च स्तरीय द्विपक्षीय यात्रा फरवरी 2014 में बहरीन के शाह, महामहिम शेख हमद बिन ईसा अल खलीफा की भारत यात्रा थी, इस यात्रा में महामहिम के साथ उनके कई मंत्री और 130 सदस्यीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल भी आया था।

शाही महल में एक औपचारिक स्वागत समारोह में अत्यंत उत्साह के साथ प्रधानमंत्री का स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री ने बहरीन के प्रधानमंत्री, रॉयल खलीफा बिन सलमान अल खलीफा के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। महामहिम प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच की ऐतिहासिक मित्रता और उत्कृष्ट सहयोग को स्मरण किया। उन्होंने पूर्व विदेश मंत्री, श्रीमती सुषमा स्वराज और पूर्व वित्त मंत्री, श्री अरुण जेटली के निधन पर अपनी संवेदना व्यक्त की।

उन्होंने प्रधानमंत्री की बहरीन यात्रा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने उच्च संयुक्त आयोग के अंतर्गत विदेश मंत्री - विदेश मंत्री स्तर पर की गई चर्चा और प्रगति की सराहना की। अब तक उच्च संयुक्त आयोग के दो दौर आयोजित हो चुके है।

महामहिम, बहरीन के प्रधानमंत्री ने भारत के विकास और प्रगति और भारत के आर्थिक महत्व और विकास के अनुभव की सराहना की। उन्होंने बहरीन के आर्थिक विकास और प्रगति में भारतीय समुदाय के विशाल योगदान की गहराई से सराहना की। उन्होंने दोनों देशों की साझा आकांक्षाओं का उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री ने नई सरकार के गठन के कुछ महीनों के भीतर इस यात्रा पर अपनी खुशी व्यक्त की। उन्होंने बहरीन के प्रधानमंत्री और उनके द्वारा व्यक्त की गई संवेदनाओं के लिए महामहिम को धन्यवाद दिया।

प्रधानमंत्री ने महामहिम के उदारता पूर्वक बहरीन में भारतीयों के योगदान का उल्लेख करने और उनके कल्याण का ध्यान रखने के लिए महामहिम का आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने बहरीन के साथ पुराने संबंधों और रिश्तेदारी के बंधनों का उल्लेख किया। उन्होंने हमारे संबंधों, विशेष रूप से व्यापार, अंतरिक्ष, ऊर्जा, रक्षा और सुरक्षा आदि क्षेत्रों में प्राप्त की गई नई ऊंचाइयों पर संतोष व्यक्त किया।

प्रधानमंत्री ने 2004 में बहरीन के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा का उल्लेख करते हुए संकेतित किया कि हमने अब बहुत ही जीवंत और आगे की ओर देखने वाले संबंधों की स्थापना की है और बहरीन खाड़ी के लिए एक प्रवेश द्वार है। उन्होंने दोनों देशों के विदेश मंत्रियों द्वारा उच्च संयुक्त आयोग के माध्यम से किए गए उत्कृष्ट कार्यों पर महामहिम, बहरीन के प्रधान मंत्री से सहमति व्यक्त की।

दोनों पक्षों ने अंतरिक्ष, आईसीटी, ऊर्जा, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्रों में प्रगति और सहयोग पर भी चर्चा की। दोनों पक्षों ने संतोष व्यक्त किया कि द्विपक्षीय व्यापार में लगातार दो वर्षों से 20 प्रतिशत या उससे अधिक की वृद्धि हुई है और अब यह 1.28 अरब अमरीकी डॉलर पर पहुँच गया है।

उन्होंने एक-दूसरे के देश में अधिक निवेश और निवेश बहरीन द्वारा आबंटित 500 मिलियन अमरीकी डॉलर के कोष का स्वागत किया। भारत ने खलीज अल बहरीन बेसिन में पता लगाये गये तेल और शेल गैस के नए भंडार और ओवीएल के बीएपीसीओ के साथ आशय की अभिव्यक्ति पर हस्ताक्षर करने में अपने रुचि व्यक्त की।

मार्च 2019 में दोनों देशों के बीच बाह्य अंतरिक्ष के अनुसंधान और शांतिपूर्ण उपयोग के लिए किये गये समझौता ज्ञापन और अब इस यात्रा में क्यूबसैट के निर्माण में सहायता, ग्राउंड स्टेशन की स्थापना, डेटा साझाकरण और प्रशिक्षण में सहयोग के लिए इसरो और बहरीन के समकक्ष के बीच हस्ताक्षरित किए गए समझौता ज्ञापन का उल्लेख किया।

दोनों पक्षों ने मजबूत सुरक्षा सहयोग और उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच बातचीत का उल्लेख किया, जिनके दो दौर पहले हो चुके हैं। बहरीन पक्ष ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की उम्मीदवारी के लिए समर्थन व्यक्त किया।

दोनों पक्षों ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनुकरणीय सहयोग और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक-दूसरे को दिए गए समर्थन पर संतोष व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने 5 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय चेतना दिवस घोषित करने की बहरीन की पहल के लिए समर्थन भी व्यक्त किया।

प्रधानमंत्री अब बहरीन में रहने वाले तीन लाख पचास हजार से अधिक लोगों के भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे। इसके बाद वे महामहिम, बहरीन के शाह से भेंट करेंगे और महामहिम, बहरीन के शाह प्रधानमंत्री के सम्मान में भोज आयोजित करेंगे।

कल, प्रधानमंत्री श्रीनाथ जी मंदिर जाएँगे और इसका जीर्णोद्धार आरंभ करेंगे। जैसा कि आप जानते हैं, श्रीनाथ मंदिर 19वीं शताब्दी में शाही संरक्षण के अंतर्गत स्थापित किया गया था और इसे खाड़ी क्षेत्र में पहला और सबसे पुराना मंदिर होने का गौरव प्राप्त है। इस यात्रा में मंदिर के 200वें वर्ष में प्रधानमंत्री द्वारा मंदिर के जीर्णोद्धार का शुभारंभ किया जाएगा। धन्यवाद।

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : धन्यवाद महोदय। यदि आपका कोई प्रश्न हो तो हमारे पास एक या दो प्रश्नों के लिए समय है।

प्रश्न :…… सुना नहीं जा सका……

सचिव (पू.क्षे) श्री टी एस तिरुमूर्ति : इस समय हम दोनों कर प्रणालियों की अनुकूलता को देख रहे हैं क्योंकि बहरीन की ओर से कराधान की एक अलग प्रणाली है, वास्तव में कुछ श्रेणियों पर उनके यहाँ कोई कर नहीं है, इसलिए हमारा पक्ष पहले से कुछ अधिक व्यापक कर प्रणाली की आशा कर रहा है। हम बहरीन के साथ इस तरह के समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।

प्रश्न :…………. सुना नहीं जा सका………….

सचिव (पू.क्षे.) श्री टी एस तिरुमूर्ति : अबू धाबी में व्यापारिक समुदाय द्वारा किसी भी चिंता की कोई अभिव्यक्ति नहीं की गई थी। उन्होंने रुपे कार्ड के लिए समर्थन व्यक्त किया और साथ ही, जैसा कि मैंने उल्लेख किया है, उन्होंने जम्मू-कश्मीर में निवेश करने की उत्सुकता भी व्यक्त की और उन्होंने जम्मू-कश्मीर के मानव संसाधन विकास में भाग लेने में भी अपनी उत्सुकता व्यक्त की तथा वे 'इन्वेस्ट कश्मीर बिजनेस समिट' में भाग लेने के लिए उत्सुक हैं।

प्रश्न : भारत से बहुत से लोग यहाँ काम करने के लिए आ रहे हैं। क्या इस बार प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान आप उनके लिए कोई खास काम करेंगे?

सचिव (पू.क्षे) श्री टी एस तिरुमूर्ति : मुझे लगता है कि सबसे पहले वे समुदाय से मिल रहे हैं और हमें बहुत अधिक बातचीत होने की आशा है, लेकिन इसके अलावा राजनयिक मुद्दे और समुदाय के कल्याण से जुड़े और जो यहां काम करने आए हैं, उनसे संबंधित मुद्दे भी हैं, हम इनकी नियमित समीक्षा करते रहते हैं।

हम बहरीन पक्ष के साथ नियमित रूप से और जब भी विभिन्न स्तरों पर मुद्दे होते हैं, उनकी समीक्षा करते हैं। इसलिए, मुझे लगता है कि भारत बेहद स्पष्ट है कि बहरीन के साथ हमारा सहयोग व्यापक रूप से सुरक्षा, संरक्षण और भारतीय समुदाय के कल्याण और भारतीय श्रम के महत्व को शामिल करेगा।

आधकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। मनामा, बहरीन से यह विशेष वार्ता अब समाप्त होती है। इसमें आने के लिए आप सभी का धन्यवाद।

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