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फ्रांस में जी-7 शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री की यात्रा पर विदेश सचिव की मीडिया वार्ता का प्रतिलेख

अगस्त 27, 2019

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : मित्रों, नमस्कार और बिआरित्ज़ की इस विशेष मिडिया वार्ता में आपका स्वागत है। प्रधानमंत्री बिआरित्ज़ साझेदार के रूप में जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए कल यहाँ पहुंचे हैं।

कल से प्रधानमंत्री ने कई द्विपक्षीय बैठकें की। उन्होंने आज सुबह पहले सत्र में भी भाग लिया। आप सभी को उनकी व्यस्तताओं के बारे में बताने के लिए, मेरे साथ भारत के विदेश सचिव श्री विजय गोखले जी उपस्थित हैं, जो हमें सभी बैठकों के बारे में बताएंगे। महोदय, मैं आपको अपनी बात कहने के लिए आमंत्रित करता हूँ।

भारत के विदेश सचिव, श्री विजय गोखले : धन्यवाद। प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ अपनी बैठक समाप्त कर ली है और यह बिआरित्ज़ में उनकी अंतिम द्विपक्षीय बैठक थी और प्रधानमंत्री शीघ्र ही भारत की वापसी यात्रा के लिए प्रस्थान करेंगे।मुझे कल हुई बैठकों से आरंभ करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री श्री बोरिस जॉनसन से भेंट की। उनकी बातचीत बहुत अच्छी रही। यह द्विपक्षीय संबंधों पर केंद्रित थी। प्रधानमंत्री जॉनसन ने विशेष रूप से दोनों देशों के बीच साझेदारी को विकसित करने की आवश्यकता के बारे में बात की और उन्होंने माना कि यूनाइटेड किंगडम में प्रतिभाशाली लोगों को पहुंच दिया जाना महत्वपूर्ण है और उन्होंने कहा कि वे प्रतिभाशाली भारतीयों द्वारा ग्रेट ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था और समाज में लाए जाने वाले मूल्य को समझते हैं।

हमारे प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री जॉनसन को बधाई दी और कहा कि यह एक महत्वपूर्ण समय है जब वे ब्रेक्सिट के आयोजन के समय ग्रेट ब्रिटेन के प्रधानमंत्री हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि वे प्रधानमंत्री जॉनसन के साथ हैं, हम ग्रेट ब्रिटेन के साथ खड़े हैं और हम ब्रेक्सिट समाप्त होने के बाद उनके साथ काम करने के लिए तैयार हैं।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई है कि आर्थिक एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए एक छोटी टीम का गठन किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री जॉनसन के साथ आयोजित की गई प्रमुख चर्चा में इस बात पर ध्यान केंद्रित किया गया था कि ब्रेक्सिट के बाद हम इस साझेदारी को कैसे विकसित कर सकते हैं और अपने आर्थिक और वाणिज्यिक संबंधों को कैसे मजबूत कर सकते हैं। प्रधानमंत्री जॉनसन ने कहा कि आगामी 31 अक्टूबर को ब्रिटेन यूरोपीय संघ छोड़ देगा। इसलिए यह देखने के लिए हमने छोटी टीम बनाने का निर्णय लिया है कि हम इस रिश्ते को किस तरह से आगे बढ़ा सकते हैं।

दोनों नेताओं ने जी-7 पर कुछ चर्चाएं की थीं। दोनों ने साथ मिलकर अफ्रीका में काम करने के महत्व पर सहमति व्यक्त की। बोरिस जॉनसन ने जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण के मुद्दे का उल्लेख किया और प्रधानमंत्री ने उन्हें बताया कि हम महासागरों में प्लास्टिक कचरे और एकल उपयोग वाले प्लास्टिक के विरुद्ध एक राष्ट्रीय अभियान शुरू कर रहे हैं, जिसका उनके द्वारा स्वागत किया गया।

खाड़ी की स्थिति और जेसीपीओए स्वीकार्य नहीं होने पर एक नया मार्ग खोजने की आवश्यकता पर एक संक्षिप्त चर्चा हुई और अफ़गानिस्तान पर भी कुछ चर्चा हुई जहाँ दोनों नेता इस पर कुछ स्पष्टता प्राप्त करने के महत्व पर सहमत हुए कि अगर और कभी भी संयुक्त राज्य अमेरिका और विभिन्न अफगान समूहों के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गये और उसकी घोषणा की गई, उसके बाद क्या होगा ।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के साथ एक संक्षिप्त बैठक हुई। जैसा कि आप जानते हैं कि प्रधानमंत्री अगले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा में जाएंगे और संयुक्त राष्ट्र महासचिव के जलवायु शिखर सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में भाग लेंगे।

श्री गटरेस ने उल्लेख किया कि वे जलवायु परिवर्तन पर प्रधानमंत्री के नेतृत्व के संबंध में बहुत उत्साही हैं। स्वयं प्रधानमंत्री ने एकल उपयोग वाले प्लास्टिक पर आरंभ की जा रही पहल की बात कही। उन्होंने अपनी नई पहल की व्याख्या करने के लिए कुछ समय लिया जो कि आपदा रोधी संरचना के लिए एक गठबंधन है। हम अगले महीने प्रधानमंत्री की न्यूयॉर्क यात्रा के समय इसका शुभारंभ किए जाने की आशा करते हैं।

इस संबंध में प्रधानमंत्री ने जो विचार व्यक्त किए, उनमें से एक यह था कि दुनिया एक वैश्विक आंदोलन में प्रशिक्षित स्वयंसेवकों का एक समूह बनाने के लिए एकजुट हो सकती है या नहीं जो आपदा के बाद उससे उबरने में देशों की मदद करेंगे। यह उन विचारों में से एक था जिनके बारे में उन्होंने बात की थी।

महासचिव ने जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में भारत के थर्मल पावर प्लांटों पर भी चिंता व्यक्त की और प्रधानमंत्री ने उन्हें बताया कि भारत ऊर्जा के नवीकरणीय रूपों, ऊर्जा के स्वच्छ रूपों की ओर बढ़ रहा है।

इस संबंध में प्रधानमंत्री ने परमाणु ऊर्जा का उल्लेख किया और कहा कि यह एक निवेश गहन उद्योग है, इसलिए निवेशकों के विश्वास को बनाने के लिए परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह की सदस्यता महत्वपूर्ण है और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने कहा कि वे इस संबंध में भारत की स्थिति को समझ रहे हैं और वे इस मामले में मदद करने के लिए तैयार हैं।

इसलिए मोटे तौर पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव के साथ चर्चाओं में संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री की आगामी भागीदारी के साथ-साथ प्रधानमंत्री की अपनी पहल पर ध्यान केंद्रित किया गया था, प्रधानमंत्री महात्मा गांधी की 150वीं वर्षगांठ मनाने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन के दौरान इसे आरंभ करने की इच्छा रखते हैं, शिखर सम्मेलन के एक विशेष समारोह में संयुक्त राष्ट्र महासचिव भी उपस्थित रहेंगे।

आज सुबह प्रधानमंत्री ने सेनेगल के राष्ट्रपति के साथ एक संक्षिप्त बैठक की। सेनेगल एक ऐसा देश है जो हमारे लिए महत्वपूर्ण है। हमारे उनके साथ पर्याप्त द्विपक्षीय संबंध हैं। यह एक द्विपक्षीय बैठक थी, जिसमे हमने अक्षय ऊर्जा सहित पश्चिम अफ्रीकी राज्यों के साथ सहयोग को और विकसित करने के तरीके पर चर्चा की। हमने सेनेगल को 250 ई-रिक्शा या सौर ऊर्जा से चलने वाले रिक्शे दिए हैं।

राष्ट्रपति ने विशेष रूप से इसका उल्लेख किया और प्रधानमंत्री को बताया कि प्रयोग और परीक्षण के बाद जल्द ही इन ई-रिक्शों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण आदेश दिया जाएगा। निश्चित रूप से प्रधानमंत्री ने उन्हें इसके साथ ही अन्य पहलों में समर्थन का आश्वासन दिया और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन पर एक संक्षिप्त चर्चा भी की। सेनेगल के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री से कहा है कि सभी बहुपक्षीय मुद्दों और सभी अंतरराष्ट्रीय मंचों में सेनेगल भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।

हमारे यहाँ आने से ठीक पहले राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ बैठक संपन्न हुई। यह काफी लंबी बैठक थी, निश्चित रूप से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी थी और आप सभी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को सुना, इसलिए मैं इसका विवरण नहीं दूंगा, बाद में 40 मिनट की बैठक हुई थी और यह मुख्य रूप से व्यापार और ऊर्जा के मुद्दों पर केंद्रित थी। प्रधानमंत्री ने संयुक्त राज्य अमेरिका से ऊर्जा आयात के महत्व पर बात की। उन्होंने इस तथ्य का उल्लेख किया कि 4 अरब अमरीकी डॉलर के आयात पर पहले से ही बात चल रही है और हम इसे आगे बढ़ाने की आशा करते हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि प्रधानमंत्री अगले महीने संयुक्त राज्य अमेरिका जाएँगे और इस संदर्भ में वे ह्यूस्टन में ऊर्जा कंपनियों के शीर्ष सीईओ के साथ एक गोलमेज सम्मेलन करने वाले हैं, इसका उद्देश्य दोगुना है।

एक, यह देखना कि हम अमेरिका से अधिक ऊर्जा कैसे आयात कर सकते हैं और दूसरा यह कि हम संयुक्त राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में कैसे निवेश कर सकते हैं। बल्कि यह कि भारतीय कंपनियां अमेरिका के ऊर्जा क्षेत्र में कैसे निवेश कर सकती हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प ने इसका बहुत स्वागत किया। वास्तव में राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस पर बहुत उत्साह से बात की कि भारत ऊर्जा का एक बड़ा आयातक बन गया है और उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वे इस उद्देश्य के लिए प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों को ह्यूस्टन भेजने के लिए तैयार हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि द्विपक्षीय ऊर्जा संबंध आगे बढ़े। इसके बाद व्यापार के मुद्दों पर भी कुछ चर्चा हुई। मैं विवरणों में नहीं जाऊंगा, आप सभी जानते हैं कि व्यापार के मुद्दे क्या हैं, लेकिन जैसा कि आप जानते हैं जब प्रधानमंत्री ने ओसाका में राष्ट्रपति ट्रम्प से भेंट की, तो प्रधानमंत्री ने उन्हें स्पष्ट रूप से इसके बारे में बताया था, अब जब प्रधानमंत्री को फिर से चुना गया है और चुनाव बीत चुके हैं, तो हम अब व्यापार के मुद्दों पर आगे की ओर देखने की स्थिति में हैं और हमारे वाणिज्य और उद्योग मंत्री, श्री पीयूष गोयल को वाशिंगटन भेजने का प्रस्ताव दिया गया।

यह संभवत: इसलिए सफल नहीं हो सका क्योंकि संयुक्त राज्य अमेरिका अन्य वार्ताओं में शामिल था लेकिन प्रधानमंत्री ने अपना प्रस्ताव दोहराया और उन्होंने सुझाव दिया कि यह ऐसा प्रस्ताव था जिसके लिए हम रचनात्मक दृष्टिकोण रख सकते हैं कि दोनों पक्षों को इसे नए सिरे से देखना चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए।

दोनों नेताओं ने इस पर सहमति व्यक्त की है और अधिमानतः प्रधानमंत्री की वाशिंगटन यात्रा से पहले व्यापार मंत्रियों के बीच एक बातचीत होगी, जिसमें हम व्यापार के मुद्दों की पूरी श्रृंखला पर चर्चा करेंगे। अनिवार्य रूप से चर्चा का सार यही था। यह एक बहुत ही सौहार्द्रपूर्ण और सकारात्मक बैठक थी। इसने उन चर्चाओं का अनुसरण किया जो प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति ट्रम्प से एक सप्ताह पहले टेलीफोन पर की थीं। प्रधानमंत्री के दूसरे कार्यकाल में, कार्यालय संभालने के लगभग 100 दिनों में यह दोनों नेताओं की तीसरी, बैठक या बातचीत है।

तो यह द्विपक्षीय बैठकों का सार है, जी-7 की बैठकें अभी भी जारी हैं। प्रधानमंत्री इस समय डिजिटल पहल पर मुख्य वक्ता हैं। उन्होंने जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापमान वृद्धि पर भारत की पहल के बारे में भी बताया।हम इस यात्रा के बहुपक्षीय पहलू और वाशिंगटन में होने वाली बैठकों के द्विपक्षीय पहलू दोनों में संतुष्टि की भावना और प्रधानमंत्री की संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन साम्राज्य की बहुत सफल यात्रा, जो आजादी के बाद यह किसी प्रधानमंत्री की पहली बहरीन यात्रा है, और कुछ दिनों पहले फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रोन के साथ एक बहुत ही सफल द्विपक्षीय बैठक के बाद बहुत संतोष के साथ वापस जाएंगे।

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : महोदय, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

प्रश्न : आपने व्यापार और क) कश्मीर के मुद्दे पर बात की, क्या बातचीत हुई और ख) व्यापार के मुद्दे पर, सिर्फ स्पष्टीकरण दें।

भारत के विदेश सचिव, श्री विजय गोखले : कश्मीर मुद्दे पर आप सुन चुके हैं कि राष्ट्रपति ट्रम्प और प्रधानमंत्री ने क्या कहा है।

प्रश्न जारी :…….. सुना नहीं जा सका………..

भारत के विदेश सचिव, श्री विजय गोखले : प्रधानमंत्री ने हमारी स्थिति स्पष्ट कर दी है और इस बैठक में आगे कोई चर्चा नहीं हुई।

प्रश्न जारी : और कल रात ट्रम्प ने क्या कहा?

भारत के विदेश सचिव, श्री विजय गोखले : इस बैठक में आगे कोई चर्चा नहीं हुई, मैं आपको सिर्फ उस बैठक के बारे में जानकारी दे रहा हूँ जो अभी हुई थी। जब प्रधानमंत्री ने यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री जॉनसन से भेंट की तब भी इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई।

प्रश्न: क्या संयुक्त राष्ट्र महासचिव के साथ बैठक में यह मुद्दा उठाया गया था?

भारत के विदेश सचिव, श्री विजय गोखले : वहाँ कुछ चर्चा हुई और अनिवार्य रूप से प्रधानमंत्री ने आंतरिक मामले पर हमारी मूल स्थिति को स्पष्ट किया कि धारा 370 संविधान के अंतर्गत है, तथ्य यह है कि अंतर्राष्ट्रीय मोर्चे पर या क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को खतरे में डालने के लिए भारत द्वारा किसी भी तरह से कोई कदम नहीं उठाया गया है। इस तथ्य पर कि जम्मू और कश्मीर राज्य में सामान्य स्थिति वापस आ रही है, कई क्षेत्रों में प्रतिबंधों को काफी उदार कर दिया गया है या पूरी तरह से हटा दिया गया है और निश्चित रूप से यह रेखांकित किया गया है कि इस राज्य में लोगों को 30 या इससे अधिक वर्षों से आतंकवाद का सामना करना पड़ा है और यह प्राथमिक खतरा है, यह हमारी चिंता है और इसलिए कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ प्रतिबंध लागू रहेंगे और उत्तरोत्तर इन्हें उठा लिया जाएगा।

लेकिन जैसा कि मैंने कहा, मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ, संयुक्त राष्ट्र महासचिव का प्रधानमंत्री को बुलाने का प्राथमिक उद्देश्य जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन था जो उनकी प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री जी ने कहा है कि हम इस पर उनके साथ खड़े होंगे और जलवायु परिवर्तन पर जो चर्चाएँ हुई हैं, मैं आपको पहले ही बता चुका हूँ।

प्रश्न : क्या टेररिज्म के मुद्दे पर भी कोई बात हुई या जो प्राइम मिनिस्टर ने डोनाल्ड ट्रम्प से बात की फोन पर उसमें उन्होंने कहा था कि रिजनल लीडर्स की जो रिटॉरिकल लैंग्वेज है, इनसाइटफुल लैंग्वेज ….

(क्या आतंकवाद के मुद्दे पर कोई बातचीत हुई थी या प्रधानमंत्री ने डोनाल्ड ट्रम्प से फोन पर बात की थी जहाँ उन्होंने कहा था कि क्षेत्रीय नेताओं की बयानबाजी और भड़काऊ भाषा….)

भारत के विदेश सचिव, श्री विजय गोखले : प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ट्रम्प और प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के बीच हुई बैठकों में इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई। मैं इससे अधिक विशिष्ट नहीं हो सकता।

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : इस वार्ता में आने के लिए आप सभी का धन्यवाद।

(समापन)

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