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प्रधानमंत्री की व्लादिवोस्तोक की आगामी यात्रा पर विदेश सचिव की मीडिया वार्ता का प्रतिलेख (सितंबर 02 , 2019)

सितम्बर 03, 2019

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : नमस्कार मित्रों, शुभ दोपहर। पूर्वी आर्थिक मंच में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री की व्लादिवोस्तोक यात्रा पर, द्विपक्षीय यात्रा से पहले आयोजित एक विशेष वार्ता में हमारे साथ जुड़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

यात्रा की तारीखें 4-5 सितंबर, 2019 हैं। मेरे साथ भारत के विदेश सचिव श्री विजय गोखले और संयुक्त सचिव (ईआरएस), श्री मनीष उपस्थित हैं। विदेश सचिव की प्रारंभिक टिप्पणी के बाद, हम प्रश्नोत्तर सत्र आरंभ करेंगे। महोदय, मैं प्रारंभिक टिप्पणी के लिए आपको आमंत्रित करता हूँ।

विदेश सचिव, श्री विजय गोखले :
धन्यवाद रवीश और नमस्कार देवियों और सज्जनों। मैं आपको प्रधानमंत्री की आगामी रूस यात्रा के बारे में जानकारी देना चाहता हूँ। यह मात्र 36 घंटे की छोटी सी यात्रा है। वे 4 सितंबर की सुबह व्लादिवोस्तोक पहुंचेंगे और 5 सितंबर की शाम व्लादिवोस्तोक से प्रस्थान करेंगे।

इस यात्रा के दो मुख्य उद्देश्य हैं। उन्हें राष्ट्रपति पुतिन द्वारा मुख्य अतिथि के रूप में पूर्वी आर्थिक मंच में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है। और दूसरा उद्देश्य यह है कि वे भारत और रूस के बीच 20वाँ शिखर सम्मेलन आयोजित करेंगे।

पूर्वी आर्थिक मंच, 2015 में रूस द्वारा आरंभ किया गया एक मंच है, इसके पिछले संस्करणों में, 2018 में हमारे पूर्व वाणिज्य और उद्योग मंत्री और 2017 में हमारे पूर्व विदेश मंत्री ने भाग लिया था। इस पूर्वी आर्थिक मंच में हमारी नियमित उच्च स्तरीय राजनीतिक स्तर की उपस्थिति रही है।

यात्रा के दो तत्वों का विवरण देने से पहले, मैं कार्यक्रम के कुछ तत्वों को साझा करना चाहता हूँ। दोपहर में यहाँ पहुँचने के बाद, राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी रूस के एक प्रमुख जहाज निर्माण यार्ड का संयुक्त दौरा करेंगे। यह संयंत्र बर्फ तोड़ने वाले और तेल टैंकरों सहित पोतों का निर्माण करता है। इस संयंत्र को देखने के लिए दोनों नेता साथ जाएंगे और फिर 4 सितंबर की दोपहर में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद रात्रिभोज का आयोजन होगा।

अगले दिन अर्थात् 5 सितंबर की सुबह, कुछ द्विपक्षीय बैठकें होंगी। पूर्वी आर्थिक मंच में मंगोलिया के राज्य प्रमुख और जापान और मलेशिया के प्रधानमंत्री भी शामिल होंगे लेकिन इस स्तर पर मैं इस बात की पुष्टि करने की स्थिति में नहीं हूँ कि इनमें से किनके साथ द्विपक्षीय बैठकें होंगी।

दोपहर में पूर्वी आर्थिक मंच के पूर्ण सत्र की बैठक होगी और उसके बाद प्रधानमंत्री के दिल्ली के लिए प्रस्थान से ठीक पहले राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री संयुक्त रूप से व्लादिवोस्तोक में हो रही एक प्रमुख जूडो चैम्पियनशिप देखने जाएंगे। छह सदस्यीय भारतीय जूडो टीम व्लादिवोस्तोक की इस चैम्पियनशिप में भाग ले रही है। यह एक अंतरराष्ट्रीय चैम्पियनशिप है।

जैसा कि मैंने उल्लेख किया है, पूर्वी आर्थिक मंच एक ऐसी घटना है जो व्लादिवोस्तोक में, 2015 से हर वर्ष आयोजित की जा रही है। मुख्य आयोजन हर वर्ष मई के महीने में सेंट पीटर्सबर्ग में होता है और प्रधानमंत्री उसमें एक भाषण देंगे। भारत-रूस व्यापार वार्ता भी होगी और इसके लिए 50 सदस्यीय फिक्की प्रतिनिधिमंडल भी उस समय व्लादिवोस्तोक जाने वाला है।

आपको याद होगा कि सुदूर पूर्व और आर्कटिक मामलों के प्रभारी, उप प्रधानमंत्री, ट्रुतनेव 20 जून को प्रधानमंत्री की यात्रा की तैयारी के लिए भारत आए थे और उसके बाद एक बहुत ही उच्च स्तरीय सरकारी और व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने 11-12 अगस्त को व्लादिवोस्तोक का दौरा किया था। इसमें चार राज्यों अर्थात् गुजरात, गोवा, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और हमारे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल शामिल थे।

वे लगभग 150 व्यापारियों के एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ गये थे और हमारी सरकार की तरफ से यह स्पष्ट इच्छा प्रकट की गई थी कि हम रूस के सुदूर पूर्व को एक ऐसे क्षेत्र के रूप में महत्व देते हैं जहाँ हम व्यापार कर सकते हैं और इसके साथ-साथ भारत-प्रशांत के संदर्भ में हमारे लिए यह भू-राजनीतिक महत्व का क्षेत्र है।

हमारे मुख्यमंत्रियों ने एक गोल मेज वार्ता में भाग लिया, जिसमें रूसी प्रांतों के 11 गवर्नर शामिल हुए थे। कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए, कई रूसी कंपनियों ने भी इसमें भाग लिया था। इसलिए हमने रूस के सुदूर पूर्व के साथ जुड़ने की गंभीर इच्छा प्रदर्शित की, जिससे हमारा अपेक्षाकृत सीमित आर्थिक और वाणिज्यिक संपर्क था क्योंकि हमारा ध्यान या तो यूरोप या रूस या मध्य एशियाई गणराज्यों के उत्तर में स्थित क्षेत्र पर रहा है।

कोयला और स्पष्ट रूप से तेल व गैस, हीरे, इमारती लकड़ी, पर्यटन कुछ संभावित क्षेत्रों में हैं और हमारे परिप्रेक्ष्य में हम इस क्षेत्र में खेती और जनशक्ति के निर्यात की संभावनाओं को भी देख रहे हैं। दुनिया के उस हिस्से में जनशक्ति की अत्यधिक कमी है।

और जैसा मैंने कहा, पूर्वी आर्थिक मंच का महत्व केवल इसलिए नहीं है कि हम मजबूत आर्थिक और वाणिज्यिक संबंध विकसित करना चाहते हैं। निकट भविष्य में भारत को कुछ संसाधनों की आवश्यकता होगी लेकिन उत्तरी सागर मार्ग के खुलने का कारण यह भी है कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण यूरोप के लिए आर्कटिक मार्ग 20 या 30 वर्ष पहले की अपेक्षा अब बहुत आसानी से उपलब्ध है। आर्कटिक से तेल और गैस की आपूर्ति की भी संभावना है। हमारे लिए पूर्वी आर्थिक मंच में शामिल होने के कई कारण हैं, इसीलिए प्रधानमंत्री ने पुतिन के निमंत्रण पर आसानी से सहमति व्यक्त की।

वार्षिक शिखर सम्मेलन भी व्लादिवोस्तोक में हो रहा है। पिछली बार दोनों नेता, पिछले वर्ष 5 अक्टूबर को दिल्ली में मिले थे और तब से ये चार बार मिल चुके हैं। ये दो बार ब्यूनस आयर्स और ओसाका में आयोजित जी-20 में, बिश्केक में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन में और पिछले नवंबर में सिंगापुर में आयोजित पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में मिले हैं।

पिछले शिखर सम्मेलन के बाद से हमारे राजनीतिक संपर्क काफी गहन हुए हैं। रूसी पक्ष से रक्षा मंत्री शोयगू हमारे यहाँ आए हैं। सरकार के दोबारा सत्ता में आने के बाद दो उप-प्रधानमंत्री हमारे यहाँ आए हैं, पहले उप-प्रधानमंत्री ट्रुटनेव है, जिनका मैंने उल्लेख किया है और दूसरे उप-प्रधानमंत्री बोरिसोव जो भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग के प्रमुख हैं। रूसी ड्यूमा या रूसी संसद के अध्यक्ष और उनके एनएसए भी हमारे देश आ चुके हैं।

हमारी ओर से, पिछले सप्ताह लावरोव के निमंत्रण पर हमारे विदेश मंत्री रूस गए थे। हमारे एनएसए जुलाई में रूस गए थे। हमारे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हाल ही में रूस से लौटे हैं, और वाणिज्य और उद्योग मंत्री ने चार मुख्यमंत्रियों के साथ व्लादिवोस्तोक का दौरा किया। पिछले एक वर्ष में और विशेष रूप से सरकार द्वारा दूसरी बार सत्ता संभालने के बाद राजनीतिक बातचीत और गहन हुई है।

रूस के साथ हमारा बहुत खास संबंध है। वार्षिक शिखर सम्मेलन पूरे परिदृश्य और मुख्य रूप से द्विपक्षीय संबंधों पर ध्यान देने का अवसर है। मुझे लगता है कि यह दोनों नेताओं की मंशा है और प्रधानमंत्री ने इस बात को कई बार कहा है।

हमें असैन्य, परमाणु और रक्षा से परे, अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों में रूस के साथ संबंधों को व्यापक बनाने की आवश्यकता है और इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए यह बहुत बड़ा सरकारी सह- व्यापार प्रतिनिधिमंडल व्लादिवोस्तोक गया था। तो स्पष्ट रूप से उन क्षेत्रों पर चर्चा होगी।

जाहिर है कि तेल और गैस हमारे लिए एक प्रमुख क्षेत्र है जिसे इस वार्ता में शामिल किया जाएगा। अंतरिक्ष हमारे लिए एक प्रमुख क्षेत्र है, रूसी सरकार ने गगनयान कार्यक्रम में सहयोग किया है जो हमारे लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। रेलवे का क्षेत्र भी महत्वपूर्ण है।

हम एक व्यवहार्यता रिपोर्ट को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं या यह भी कह सकते हैं कि रूस कुछ क्षेत्रों में गति बढ़ाने के लिए उन क्षेत्रों की व्यवहार्यता रिपोर्ट को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं। और स्पष्ट है कि वहाँ इस पर अनिवार्य रूप से चर्चा होगी कि शंघाई सहयोग संगठन, आरआईसी यानी रूस-भारत-चीन और ब्रिक्स में हम बेहतर तरीके से कैसे काम कर सकते हैं और जैसा कि आप जानते हैं कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन होने वाला है।

यदि समय उपलब्ध हुआ, तो स्पष्ट रूप से कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की जाएगी जिसमें खाड़ी की स्थिति, डीपीआरके पर चर्चा और निश्चित रूप से अफगानिस्तान में तेजी से विकसित होने वाली स्थिति भी शामिल है।

अतएव हम कई ठोस परिणामों की आशा करते हैं। वहाँ संयुक्त बयान का होना अपरिहार्य है, लेकिन हाइड्रोकार्बन सहयोग पर एक योजना उससे अधिक महत्वपूर्ण होगी। यह बताते हुए कि अन्वेषण और शोषण दोनों के मामले में तेल और गैस दोनों में सहयोग करने की क्या संभावनाएं हैं, एक पाँच वर्षीय योजना बनाई जाएगी और 2019-2024 तक की पाँच वर्ष की समय सीमा में खरीद के संदर्भ में हम खाड़ी पर पूर्ण निर्भरता से परे अपने तेल और गैस की आपूर्ति में विविधता लाना चाहते हैं ।

तेल और गैस क्षेत्रों के विकास के लिए भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और रूसी संस्थाओं के बीच कुछ आशय की अभिव्यक्ति के विशिष्ट पत्रों पर भी हस्ताक्षर किए जाएंगे। इनका विवरण प्रधानमंत्री की प्रेस वार्ता में दिया जाएगा। इसलिए मैं फिलहाल इसका खुलासा नहीं करूँगा।

कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए जाने की आशा है, कोक कोयले के निर्यात और खनन क्षेत्र में सहयोग के लिए कोल इंडिया और रूसी समकक्ष के बीच, मेटालर्जिकल कोल के आयात के लिए स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड और रूसी समकक्ष के बीच, ऑडियो-विजुअल सह उत्पादन के क्षेत्र में, बिजली के क्षेत्र में, चेन्नई और व्लादिवोस्तोक के बीच एक समुद्री मार्ग विकसित करने और काफी महत्वपूर्ण क्षेत्रों में 8 या 10 व्यापारिक समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर होने की भी आशा है। मैं उनके ब्योरों में नहीं जाऊँगा। मुझे विश्वास है कि इन्हें प्रेस वक्तव्य में शामिल किया जाएगा।

अतएव यह रूस के दौरे के समय प्रधानमंत्री के कार्यक्रम और कार्यसूची की व्यापक रूपरेखा है। देवियों और सज्जनों, मैं अपनी बात यहाँ समाप्त करूँगा और अगर इस विषय पर आपका कोई प्रश्न है तो मुझे उसका उत्तर देने में खुशी होगी।

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : धन्यवाद महोदय। हम केवल प्रधानमंत्री की रूस यात्रा के बारे में किए गये प्रश्नों का उत्तर देंगे।

प्रश्न : इस तथ्य को देखते हुए कि जब भारत-रूस संबंध की बात आती है तो रक्षा एक महत्वपूर्ण बिंदु है। क्या हम रक्षा में, विशेष रूप से केए226 के सौदे में कुछ प्रमुख घोषणाओं की आशा कर सकते हैं, बहुत से लोग आशा कर रहे हैं कि चूंकि अब इस सौदे पर बातचीत होते काफी समय हो गया है इसलिए हस्ताक्षर किए जा सकते हैं?

प्रश्न : क्या आप हमें एस400 सौदे के बारे में स्पष्ट रूप से कुछ बता सकते हैं, क्या भारत ने इस संबंध में रूस को कोई प्रारंभिक भुगतान किया है?

प्रश्न : मुझे लगता है कि आप इस बात पर जोर दे रहे हैं कि हम रूस के साथ अपनी ऊर्जा साझेदारी को कैसे व्यापक बना रहे हैं और प्रधानमंत्री की भी इसी पर प्राथमिकता होगी लेकिन इस बात को ध्यान में रखते हुए कि हम वहाँ से अपनी ऊर्जा का आयात करने के मामले में रूस के साथ अपनी ऊर्जा साझेदारी को किस हद तक व्यापक बनाना चाहते हैं? जब हमने अमेरिका के साथ संबंध की बात की थी, तब हमने कुछ लक्ष्य तय किए थे, लेकिन हमारी ऊर्जा की कितनी जरूरत हम रूस से पूरा करना चाहते हैं?

विदेश सचिव, श्री विजय गोखले : धन्यवाद। रक्षा क्षेत्र के संबंध में, स्पष्ट रूप से दोनों पक्षों के बीच चर्चा होगी, जैसा कि मैंने कहा कि यह हमारे सहयोग के स्तंभों में से एक है। जहाँ तक मैं जानता हूँ कि हमारे द्वारा किए गए किसी भी विशिष्ट समझौते के संबंध में कोई घोषणा नहीं की जाएगी।

जहाँ तक ए400 का सवाल है, इस मामले को रक्षा मंत्रालय संभाल रहा है। इसलिए आपको यह प्रश्न उनसे पूछना होगा कि हम समझौते के कार्यान्वयन में कितना आगे बढ़े हैं।

जहाँ तक तेल और गैस का संबंध है, जैसा कि मैंने कहा इस यात्रा का एक उद्देश्य इसमें विविधता लाना और किसी एक देश या किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता को कम करना है। इस हद तक हम दो पूरी तरह से अलग मुद्दों को देख रहे हैं। एक यह साबित करना है कि तेल और गैस की खोज उन क्षेत्रों में की जा रही है जहाँ इनके भंडार हैं और हम आशा करते हैं कि संभवत: घोषणा भी हो सकती है, मेरा मतलब है कि भारत सरकार द्वारा नहीं बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र की निगम द्वारा नए तेल क्षेत्र समूहों में कुछ निवेशों की घोषणा की जा सकती है।

दूसरा निश्चित रूप से रूस से एलएनजी का आयात है और जहाँ तक मुझे पता है उसमें भी कुछ ठोस है जिसकी या तो यात्रा के दौरान या यात्रा के तुरंत बाद घोषणा की जाएगी। इसलिए दूसरे शब्दों में, भारत और रूस के बीच ऊर्जा में अधिक से अधिक संबंध विकसित करने की इच्छा व्यक्त करने के पश्चात वास्तविक कार्रवाई होने वाली है।

प्रश्न : यह रूस में अपेक्षित द्विपक्षीय बैठकों के संबंध में है। आपने उल्लेख किया है कि मलेशियाई पक्ष के साथ एक द्विपक्षीय बैठक हो सकती है, जिसमें भारत जाकिर नाइक के मुद्दे को उठाएगा, मलेशिया से आने वाले कुछ विरोधाभासी बयानों पर विचार करते हुए उसके प्रत्यर्पण या निर्वासित होने की कितनी संभावना है?

प्रश्न : ऊर्जा संबंधों के बारे में, रूस और भारत के बीच एक तेल पाइपलाइन की बात चल रही थी, क्या इस पर अभी भी विचार किया जा रहा है या उसे छोड़ दिया गया है?

प्रश्न : क्या छह परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण के लिए किसी भी नए समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है और इन छह परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को कहाँ लगाया जाएगा?

विदेश सचिव, श्री विजय गोखले : मैं प्रश्नों का उत्तर विपरीत क्रम में दे रहा हूँ। इस वार्षिक शिखर सम्मेलन में कोई नया समझौता नहीं होने जा रहा है। हम इस समय कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की छह इकाइयों को लागू करने की प्रक्रिया में हैं और जाहिर है कि उस पहलू की प्रगति के बारे में कुछ चर्चा होगी।

भारत और रूस के बीच तेल की पाइपलाइन अभी भी चर्चा का विषय है, लेकिन निश्चित रूप से इसमें कुछ अन्य देशों को शामिल किया गया है और इसमें एकाधिक जटिलताएं शामिल हैं। इसलिए मैं मानता हूँ कि चर्चा के दौरान कोई ठोस विकास होना इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों का मुद्दा कैसे आगे बढ़ता है और साथ ही साथ पाकिस्तान के साथ हमारे संबंध कैसे आगे बढ़ते हैं क्योंकि यह पाइपलाइन इन दोनों क्षेत्रों से गुजरती है।

जहाँ तक मलेशिया और जाकिर नाइक का सवाल है, जैसा कि मैंने कहा, अभी तक हम द्विपक्षीय बैठकों की पुष्टि की प्रतीक्षा कर रहे हैं। मैं इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहता कि क्या मुद्दे उठाए जा सकते हैं लेकिन हम इसके बाद निश्चित रूप से एक वार्ता आयोजित करेंगे। यदि मलेशिया के साथ कोई बैठक होती है तो हम निश्चित रूप से मीडिया से उसकी चर्चा करेंगे।

प्रश्न : चूंकि एक विशाल व्यापार प्रतिनिधिमंडल व्लादिवोस्तोक जा रहा है, मैं समझता हूँ कि 1991-92 के बाद से भारत और व्लादिवोस्तोक यानी गुजरात और व्लादिवोस्तोक के बीच हीरे का कारोबार हो रहा है। पहली बात यह कि क्या अभी भी व्लादिवोस्तोक में हमारा एक वाणिज्य दूतावास है और भारत और व्लादिवोस्तोक के बीच हीरे के व्यापार के संबंध में क्या होने वाला है?

प्रश्न : व्लादिवोस्तोक में 150 भारतीय व्यापारियों और चार मुख्यमंत्रियों की यात्रा को देखते हुए, क्या हम जानते हैं कि सहयोग और निवेश के लिए कितने समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए थे और कुल संभव निवेश कितने का है, अन्य विवरण क्या है?

प्रश्न : यह आशा की जाती है कि सीमा पार आतंकवाद, एक ऐसा मुद्दा है जिस पर भारत अन्य प्रमुख देशों के साथ चर्चा कर रहा है, इस मुद्दे पर रूस का दृष्टिकोण क्या है, सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर, हम जानते हैं कि कश्मीर के मामले पर रूस भारत का समर्थन कर रहा है इसे पूरी तरह से एक आंतरिक मुद्दा कहा जा रहा है लेकिन सीमा पार आतंकवाद पर मास्को का क्या रुख रहा है?

विदेश सचिव, श्री विजय गोखले : धन्यवाद। जहाँ तक पहले प्रश्न का संबंध है, पुष्टि करने के लिए, हाँ, व्लादिवोस्तोक में हमारा वाणिज्य दूतावास है और यह वाणिज्य दूतावास संचालन में है और इसे बंद करने का कोई इरादा नहीं है। वास्तव में इसकी प्रमुखता बढ़ गई है क्योंकि भारत-प्रशांत का विषय हमारे लिए महत्वपूर्ण होता जा रहा है और अगर उत्तरी सागर मार्ग या आर्कटिक मार्ग खुल जाता है, तो शिपिंग उत्तरी सागर के मार्ग से व्लादिवोस्तोक होकर यूरोप तक जाएगी।

इसलिए हम वास्तव में यह परिकल्पना कर रहे हैं कि वाणिज्य दूतावास शायद कम प्रासंगिक होने की बजाय और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगा।

जहाँ तक हीरे के व्यापार की बात है तो आप बिल्कुल सही हैं, एक या दो भारतीय कंपनियां भी वहाँ निवेश कर रही हैं। विचार यह है कि इसे बेहतर तरीके से प्राप्त किया जाए क्योंकि भारत में एक बड़ा हीरा प्रसंस्करण उद्योग है और एक संभावना यह भी है कि अगर निजी क्षेत्र का निवेश संभव हो और इससे संबंधित जनशक्ति निर्यात भी हो सकता है क्योंकि वहाँ हीरे को संसाधित करने वाले लोगों की कमी है। तो यह एक ऐसा विषय है जो रूस के सुदूर पूर्व में हमारे प्रयासों का केंद्र बिंदु है।

मेरे पास संभावित समझौता ज्ञापनों का विवरण है जिन पर निजी क्षेत्र हस्ताक्षर करेगा। स्पष्ट रूप से सरकार सह-व्यापार प्रतिनिधिमंडल के बारे में यह विचार था कि सरकार तत्वावधान वाले समझौता ज्ञापनों के अलावा अपने द्वारा सुविधा प्रदान करेगी और मैंने उनमें से कुछ का उल्लेख किया है, सरकारें एक वाणिज्यिक प्रकृति के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर नहीं करेंगी, लेकिन फिक्की ने हमें जानकारी दी है कि कुछ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं और संबंधित कंपनियों के बारे में बताये बिना मैं कहूंगा कि लगभग 15 या 16 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं जिनमें से अधिकांश निजी क्षेत्र में हैं लेकिन कुछ में सार्वजनिक उपक्रम भी शामिल हैं।

पुनश्च, मुझे लगता है कि संबंधित क्षेत्र, खनन, कौशल विकास, इस्पात, चिकित्सा, शिक्षा और कृषि हैं। और जैसा कि मैंने कहा जिन समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं उनमें से अधिकांश निजी क्षेत्र के हैं।

जहाँ तक तीसरे प्रश्न का संबंध है, रूसी संघ ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे इस पूरे मुद्दे पर पूरी तरह भारत के साथ हैं। और जम्मू-कश्मीर का मुद्दा, चाहे वह धारा 370 हो, चाहे वह सीमा पार आतंकवाद हो, हमें इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस मामले में रूसी पक्ष पूरी तरह से हमारे साथ है और यह बात हाल ही में विदेश मंत्री के दौरे के समय भी दोहराई गई है।

प्रश्न : इसका ध्यान रखते हुए कि भारत ने अंततः अफगानिस्तान में मॉस्को प्रारूप में गैर-आधिकारिक - आधिकारिक प्रतिनिधियों को भेजा था और अब उन रिपोर्टों के साथ कि अमेरिका और तालिबान के बीच समझौते की रूपरेखा की जो प्रति काबुल में सरकार से साझा की गई या दिखाई गई है, क्या वास्तव में भारत और रूस के संदर्भ में इस समय भारत की चिंता का एक साझा आधार है, क्या आप मात्र एक पर्यवेक्षक हैं और यदि रूस पर प्रश्न समाप्त हो जाते हैं तो क्या हम कुलभूषण जाधव के लिए आज दोपहर में दी गई राजनयिक पहुंच के बारे में कुछ स्पष्टता प्राप्त कर सकते हैं।

प्रश्न : रूसियों ने अपने क्षेत्रों में भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण के बारे में भारत के सुझाव का स्वागत किया है। दो पुरुष और एक महिला, तीन अंतरिक्ष यात्रियों की बात की जा रही है। क्या आप हमें उस पर कुछ और जानकारी दे सकते हैं?

प्रश्न : महोदय, आपने रूस के सुदूर पूर्व में जन शक्ति निर्यात का उल्लेख किया है। क्या आप उस पर और चेन्नई और व्लादिवोस्तोक के बीच कनेक्टिविटी के बारे में विस्तार से बता सकते हैं, उसके लिए क्या योजनाएं हैं?

विदेश सचिव, श्री विजय गोखले : मैं फिर से विपरीत क्रम में उत्तर दूँगा। आप देख रहे हैं कि जहाँ कहीं भी जनशक्ति की कमी है, हम उन क्षेत्रों में कुछ कुशल लोगों को भेजने की संभावना तलाश रहे हैं। यह सुदूर पूर्वी रूस तक ही सीमित नहीं है, यह कुछ प्रयास हैं जो हम कई देशों में कर रहे हैं, लेकिन यह उन क्षेत्रों में से एक है जहाँ हमें लगता है कि एक अच्छी संभावना है।

अनिवार्य रूप से ये कुशल श्रमिक हैं और मैंने जिन क्षेत्रों उल्लेख किया है उनमें से अधिकांश रूस के सुदूर पूर्व में स्थित खनिज क्षेत्र या कृषि क्षेत्र हैं। हम अभी भी प्रारंभिक अवस्था में हैं क्योंकि जैसा हम अन्य देशों के साथ करते हैं, इसके लिए यूरोप के साथ किए जाने वाले समझौते की तरह एक समझौता होना चाहिए जिसे हम प्रवास और गतिशीलता समझौता या अन्य देशों के साथ हमारे श्रम समझौते के रूप में जानते हैं।

इसलिए अभी हम इसे लागू करने के चरण में नहीं हैं, लेकिन मैं कह सकता हूँ कि हमें रूसी पक्ष से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है और अब इस यात्रा के समाप्त होने के बाद हम इसका पता लगाने के लिए आगे बढ़ेंगे। यह हमारे लिए महत्वपूर्ण है और हम इसे प्राथमिकता देंगे।

जहाँ तक कनेक्टिविटी का सवाल है, जैसा कि मैंने कहा, चेन्नई और व्लादिवोस्तोक के बीच शिपिंग लिंक बनाने का प्रयास है। मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मेरे कहने का यह मतलब नहीं है कि चेन्नई और व्लादिवोस्तोक के बीच एक शिपिंग सेवा की घोषणा तुरंत होने वाली है लेकिन मुझे लगता है कि एक मान्यता है कि उत्तरी मार्ग के अब यूरोप के लिए एक वैकल्पिक मार्ग होने की संभावना है, हमें इसको आर्थिक लाभ के संदर्भ में देखना चाहिए जो हमें एशिया के उत्तर पूर्व और उससे आगे ले जा सकता है।

विशेष रूप से इसलिए, क्योंकि इस क्षेत्र में बहुत से नये तेल और गैस क्षेत्र तथा खनिज पाये जाते हैं। इसलिए मैं सोचता हूँ कि यह एक प्रक्रिया की शुरुआत है और इसमें थोड़ा समय लगेगा लेकिन हमने महसूस किया कि इसे आरंभ करना महत्वपूर्ण है और प्रधानमंत्री की व्लादिवोस्तोक की पूरी यात्रा अनिवार्य रूप से इस तथ्य का संकेत है कि हम रूस के इस हिस्से को महत्व देते हैं, यह एक ऐसा हिस्सा है जिसकी हमने पिछले, छह या सात दशकों में चिंता नहीं की है।

जहाँ तक दूसरे प्रश्न का संबंध है, रूस उन कुछ देशों में से एक है, जिनके पास मानव अंतरिक्ष उड़ान में एक छोर से दूसरे छोर तक की क्षमता है और इसलिए वे हमारे स्वाभाविक साझेदार हैं।

मेरे पास अंतरिक्ष यात्रियों या प्रशिक्षण कार्यक्रम पर इसके अलावा कोई विस्तृत जानकारी नहीं है कि वे जानते हैं कि उनके द्वारा दोनों देशों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। कुछ प्रशिक्षण रूस में होंगे, कुछ प्रशिक्षण भारत में भी होंगे। इस पर अभी भी काम चल रहा है, मेरे पास किसे चुना जा रहा है या प्रशिक्षण की प्रकृति क्या है आदि के बारे में कोई और विवरण नहीं है जिसे मैं आपके साथ साझा कर सकूँ।

जहाँ तक पहले प्रश्न का संबंध है, हालाँकि आपका प्रश्न रूस से संबंधित नहीं है, मैं केवल यह कहना चाहता हूँ कि जहाँ तक भारत और रूस का संबंध है, हमारे पास समान आधार हैं। हम दोनों मानते हैं कि इस प्रक्रिया के अंत में संयुक्त राज्य अमेरिका और तालिबान के बीच चर्चा का जो भी परिणाम हो, हम वहाँ एक स्थिर राजनीतिक स्थिति देखने की आशा करते हैं जहाँ एक राजनीतिक व्यवस्था हो और जहाँ यह गारंटी हो कि शांति समझौते या समझौते के बाद की प्रक्रिया आयोजित होगी।

इस हद तक हमारे नियमित परामर्श होते हैं, सबसे हाल ही में जब विदेश मंत्री रूस में थे तब भी परामर्श हुआ था और मोटे तौर पर हम इस पर रूस के साथ समान विचार रखते हैं। इसलिए हम आशा करते हैं कि जैसे-जैसे हम आगे बढ़ेंगे हमें पता चलेगा और अभी तक कोई घोषणा नहीं हुई है। हम उनके साथ मिलकर काम करना जारी रखेंगे।

इस प्रश्न के संबंध में कि अगर अंतर-अफगान वार्ता का अगला दौर हुआ और अगर हमें आमंत्रित किया जाता है तो हम किस तरह का प्रतिनिधित्व करेंगे। मैं अटकलें नहीं लगाना चाहता, लेकिन इस स्तर पर मैं कहना चाहता हूँ कि यह एक महत्वपूर्ण बिंदु है और इस मामले पर हम बहुत गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

मेरे सहकर्मियों ने मुझे बताया है कि हम जल्द ही श्री कुलभूषण सुधीर जाधव को आज दी गई राजनयिक पहुँच से संबंधित एक बयान जारी करेंगे।

प्रश्न : विदेश सचिव, क्या मैं अफगानिस्तान पर पिछले प्रश्न को जारी रख सकता हूँ क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है जहाँ भारत और रूस के बीच चर्चा हुई है और जैसा कि बताया गया है, हमने वास्तव में तालिबान के साथ बातचीत के लिए एक गैर-आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भेजा है। मेरा प्रश्न है कि क्या भारत और रूस को लगता है कि आपने अभी जिन वार्ताओं का उल्लेख किया उनके परिणामों को वैध करार दिया जा सकता है, क्योंकि भारत और रूस दोनों ने कहा है कि काबुल सरकार को सामने और किसी भी चर्चा के केंद्र में होना चाहिए, जबकि वह इस वार्ता का हिस्सा भी नहीं रही है।

प्रश्न : आईसीटी से संबंधित एक त्वरित प्रश्न, क्या 5-जी या दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय साइबर सुरक्षा की कार्यसूची के संबंध में भी कुछ है?

प्रश्न : ऐसी खबरें आई हैं कि भारत ने रूस और जापान को एक नया त्रिपक्षीय समूह बनाने के लिए बुलाया है, क्या आप हमें इसके बारे में अधिक जानकारी दे सकते हैं?

विदेश सचिव, श्री विजय गोखले : जहाँ तक अंतिम प्रश्न का संबंध है, साझा करने के लिए कोई विवरण नहीं है क्योंकि अब तक इस विषय पर कोई निर्धारित बैठक या निर्धारित चर्चा नहीं हुई है। मैं बस इतना कह सकता हूँ कि हम रूस के सुदूर पूर्व में किसी तीसरे देश के साथ काम करने में रुचि रखते हैं क्योंकि हमारा मानना है कि अन्य देशों में भी वहाँ निवेश करने की क्षमता है और हम उनके साथ साझेदारी करना चाहेंगे।

इसलिए मुझे लगता है कि यह हमारी ओर से इरादे का एक सामान्य कथन है कि हम न केवल द्विपक्षीय निवेश करने के लिए, बल्कि रूस के सुदूर पूर्व में तीसरे देशों के साथ साझेदारी करने के लिए तैयार हैं, कोई भी ऐसा देश नहीं है जिससे हम विशेष रूप से इस स्तर पर चर्चा कर रहे हैं।

5-जी और साइबर सुरक्षा पर, मैं सिर्फ यह उल्लेख करना चाहता हूँ कि नेताओं के स्तर पर कोई चर्चा होने की संभावना नहीं है। हमारी रूस के साथ एक साइबर-सुरक्षा वार्ता है लेकिन इस विशेष मुद्दे पर, यदि कोई चर्चा होती है तो मुझे आश्चर्य होगा, हालांकि स्पष्ट रूप से मैं यह नहीं बता सकता कि दोनों नेताओं द्वारा किन विषयों पर चर्चा की जाएगी।

जहाँ तक पहले प्रश्न का संबंध है, मुझे इस मामले में बहुत सावधान रहना है और केवल यह कहना है कि चलिए देखते हैं। सबसे पहले मुझे लगता है कि हम सभी शांति पहलों का समर्थन करते हैं, हम उन सभी का हिस्सा रहे हैं और कुछ मामलों में भले ही हम आरंभ में उनका हिस्सा नहीं रहे, हम उनका समर्थन करते रहे हैं।

हमारा मुद्दा यह है कि इस संबंध में हमारी स्थिति बहुत स्पष्ट है कि समझौते के बाद की स्थिति कैसी होगी। हम एक ऐसी प्रणाली को पसंद करते हैं जिसमें संवैधानिक वैधता हो, जिसमें एक राजनीतिक जनादेश हो, जो स्थिरता सुनिश्चित करे, और सबसे महत्वपूर्ण जो आतंकवादियों और उनके समर्थकों के लाभ उठाने के लिए कोई जगह नहीं छोड़ती है। मुझे लगता है हमारा यही दृष्टिकोण है।

हमने अभी तक अमेरिका - तालिबान समझौते का विवरण नहीं सुना है। जब हम विवरण सुनेंगे तब हम एक बयान देंगे या टिप्पणी करेंगे लेकिन तब तक मेरे लिए किसी भी रिकॉर्ड के साथ आना मुश्किल होगा।

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : धन्यवाद महोदय, धन्यवाद मनीष। प्रधानमंत्री की रूस यात्रा पर यह विशेष वार्ता समाप्त होती है। हमसे जुड़ने के लिए आप सभी का धन्यवाद।

(समापन)
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