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आधिकारिक प्रवक्ता द्वारा साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग का प्रतिलेख (19 दिसंबर, 2019)

दिसम्बर 20, 2019

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार : मित्रों, नमस्कार, और इस साप्ताहिक ब्रीफिंग में आपका स्वागत है। कल संपन्न हुई 2 + 2 की बैठक में मेरा एक रीडआउट है। भारत और अमेरिका के बीच 2 + 2 मंत्रालय स्तर के बारे में बताऊंगा और उसके बाद मैं प्रश्नों के उत्तर दूंगा।

भारत-अमेरिका 2+2 की दूसरी बैठक कल 18 दिसंबर वाशिंगटन में हुई थी। बैठक बहुत सकारात्मक, बहुत सृजनात्मक थी और मुझे विश्वास है कि आप सभी ने चार सिद्धांतों पर प्रेस वक्तवय देखा होगा। बैठक में दो सत्र हुए। पहले एक घंटे का कार्यकारी सत्र था और एक और कार्यकारी सत्र था, इसी अवधि का मध्याह्न कार्यकारी भोज था। रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री दोनों के बीच 2 + 2 की बैठक शुरू होने से पहले उन्होंने अपने-अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। दोनों मंत्रियों ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी फोन पर वार्ता की।

2 + 2 और इस बैठक के अलावा, दोनों मंत्रियों का समानांतर कार्यक्रम भी था। विदेश मंत्री ने अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से मुलाकात की और उन्होंने सीनेट की विदेश संबंध समिति के साथ बैठक भी की। रक्षा मंत्री ने नॉरफ़ॉक नेवल बेस का दौरा किया और उन्होंने भारतीय समुदाय के साथ बातचीत भी की। बैठक पर एक संयुक्त वक्तव्य बहुत जल्द ही शाम को जारी किया जा रहा है और यह एक काफी ठोस संयुक्त वक्तव्य है जिसमें इस बैठक में हुए सहयोग और चर्चा शामिल है। किंतु, केवल बैठक से कुछ निष्कर्ष को बाहर निकालने के लिए आप जानते हैं कि यह वार्ता दोनों देशों के बीच संबंधों में विदेशी, सुरक्षा और रक्षा मुद्दों को क्रॉस कटिंग की समीक्षा है। चार मंत्रियों ने संकल्प लिया है कि उन्हें मिलकर काम करना चाहिए, वे भारत की अमेरिका सामरिक वैश्विक साझेदारी की पूरी क्षमता को साकार करने के लिए मिलकर काम करेंगे, लेकिन कुछ खास बातें है जो मैंने सोचा है कि मैं केवल प्रेस बयानों से उद्घृत करूंगा।

पहला यह था कि, भारत-प्रशांत पर चर्चा हुई थी जिसमें न केवल दोनों देशों को बल्कि पूरे क्षेत्र को लाभ पहुंचाने के लिए हमारी संबंधित शक्तियों का लाभ उठाने के तरीके शामिल थे। दोनों देश, स्थायी और पारस्परिक रूप से लाभप्रद रक्षा साझेदारी कैसे बना सकते हैं, इस पर कुछ चर्चा हुई। भारत ने आपदा लचीला बुनियादी संरचना के लिए गठबंधन सीडीआरआई के संस्थापक सदस्य के रूप में अमेरिका का स्वागत किया। आतंकवाद विरोधी सहयोग पर भी चर्चा हुई थी और आप संयुक्त वक्तव्य में इस चर्चा का कुछ संदर्भ देखेंगे। किस प्रकार दोनों देश व्यापार संतुलित परिणाम की दिशा में मिलकर काम कर सकते हैं। विज्ञान और प्रौद्योगिकी में सहयोग और इस संदर्भ में एक नया विज्ञान और प्रौद्योगिकी समझौता संपन्न हुआ और लोगों से लोगों के परस्पर संपर्क, आप जानते हैं, कि दोनों देशों के बीच इसे किस प्रकार सुगम बनाया जा सकता है।

रक्षा पक्ष पर, रक्षा मंत्री के प्रेस वक्तव्य में कुछ चर्चाओं को शामिल किया गया है लेकिन रक्षा मंत्री और उनके अमेरिका समकक्ष के बीच मुख्य आकर्षण है: पहले त्रिकोणीय सेवा अभ्यास करने के लिए एक हॉट लाइन स्थापित करने को अंजाम दे रहे हैं, एनएचक्यू और अमेरिका-भारत बैक होम के बीच एक कड़ी बनाना और पांच वर्ष के अंतराल के बाद एक रक्षा नीति समूह वार्ता का आयोजन। क्षेत्रीय स्थिति पर भी निश्चित रूप से चर्चा हुई और यह भी कि भारत और अमेरिका बहुपक्षीय में एक साथ कैसे काम कर सकते हैं और कैसे दोनों देश एक के लिए बहुपक्षीय में सहयोग कर सकते हैं। जैसा कि मैंने उल्लेख किया है, यह बैठक बहुत अच्छी थी और इसने दोनों देशों के बीच भविष्य में सहयोग की दिशा तय की है। मुझे भारत-अमेरिका 2 + 2 बैठक के बारे में यही साझा करना था । अब मैं प्रश्नों के उत्तर दूंगा।

प्रश्न- महोदय, 2 + 2 वार्ता के बाद अमरीकी विदेश विभाग के अधिकारी ने कहा, आप नागरिकता संशोधन अधिनियम पर टिप्पणी करना आप जानते हैं कि यह अमेरिका की मुख्य चिंता है और वास्तव में धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा भी है और उन्होंने कहा कि वे सीएए पर चिंतित हैं कि वे धार्मिक मानदंडों के बारे में चिंतित हैं और फिर उन्होंने इस तथ्य के बारे में भी बात की कि इस पर बहस हो रही है और भारत में इस पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और न्यायालयों द्वारा इसकी समीक्षा की जाएगी। तो क्या इस मुद्दे को मेरे सचिव पोम्पियो ने 2 + 2 में उठाया था और क्या आप भारतीय प्रतिक्रिया के बारे में हमें बता सकते हैं?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार : आप देखते हैं, जैसा कि मैंने उल्लेख किया है कि 2 + 2 वार्ता, मेरा तात्पर्य है कि यह विदेश नीति, सुरक्षा और रक्षा पर क्रॉस कटिंग के मुद्दों की समीक्षा है । भारत का आंतरिक मामला होने के नाते इस मुद्दे पर 2 + 2 की बैठक में चर्चा नहीं की गई। तो यह आपके प्रश्न पर संक्षिप्त प्रतिक्रिया है।

प्रश्न : यह जानना चाहते थे कि क्या कश्मीर या नागरिकता संशोधन अधिनियम पर यदि 2 + 2 मंच में नहीं तो क्या विेदेश मंत्री और उनके समकक्ष अथवा रक्षा मंत्री और उनके समकक्ष के बीच वार्ता में इन मुद्दों को उठाया गया था?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार :
मुझे यह ज्ञात नहीं है कि विदेश मंत्री की सीनेट विदेश संबंध समिति के साथ बैठक में क्या चर्चा हुई, किंतु आप जानते है कि इस संबंध में, हमने अपना दृष्टिकोण कांग्रेस और प्रशासन सहित अमेरिका के वार्ताकारों के साथ साझा किया गया है और हमने उन बिंदुओं पर प्रकाश डाला है जो हमने संसद में व्यक्त किए हैं और बाद में जिनका प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने बार-बार उल्लेख किया गया है। मैं केवल इतना कह सकता हूं कि कांग्रेस ईएएम के सदस्यों के साथ उनकी बैठक के संदर्भ में इस मुद्दे पर विदेश मंत्री ने हमारे दृष्टिकोण साझा किए थे।

प्रश्न : ………… अश्रृव्य………..

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार :
नहीं, मेरा तात्पर्य है, आप जानते है कि वहां एक अंतर है जब आप यह कहते है कि क्या प्रश्न किया गया था या नहीं तो मैं कह सकता हूं कि यह नहीं किया गया था। यदि आप मुझसे पूछें कि क्या हमने इस मामले पर अपने दृष्टिकोण को साझा किया है, तो मैं हां कह सकता हूं और मैंने आपको यह भी बताया कि बैठक में जहां यह हमारा दृष्टिकोण था, उसे साझा किया गया था।

प्रश्न : ………… अश्रृव्य………….

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार : हां, मेरा तात्पर्य है कि मैने विदेश मंत्री का कार्यक्रम पढ़ा है और जैसा कि मैंने कहा कि हमने अतीत में भी इसे साझा किया है और उस बैठक में आपको पता है कि हमने अपने परिप्रेक्ष्य साझा किए हैं।

प्रश्न : ............ अश्रृव्य………..

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार
: यह सही है, हां । मैंने पहले ही उल्लेख किया है, मैंने यही स्पष्ट किया है।

प्रश्न : तो तीसरे सैन्य समझौते की क्या स्थिति है?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार : देखिए, मेरा तात्पर्य है कि अब आपको इंतजार करना होगा और 2 + 2 पर बहुत सारे प्रश्न होंगे। मेरा अनुरोध है यह है कि, कृपया संयुक्त वक्तव्य बाहर होने तक प्रतीक्षा करें। संयुक्त वक्तव्य में सहयोग के अनेक क्षेत्र हैं जिनका उल्लेख किया गया है और इससे बहुत से प्रश्नों के उत्तर मिलेंगे जो आप जानते हैं, मेरा तात्पर्य है कि मैं उसका उत्तर नहीं दे सकता जो आप पूछना चाहते हैं। मुझे लगता है कि आप को प्रतीक्ष करनी होगी क्योंकि आप जानते है कि हम सिर्फ केवल बाहर क्या किया जा रहा है इसे देखने की कोशिश कर रहे हैं । इसलिए अगले कुछ घंटों में संयुक्त बयान होगा।

प्रश्न : पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की स्थिति बदलने के लिए कदम उठाने की शुरुआत कर रहा है। क्या आपको इस बारे में कुछ कहना है?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार
: नहीं, मेरा तात्पर्य है कि आपको विशिष्ट होना होगा मेरा तात्पर्य है कि आप यह प्रश्न किस संदर्भ में पूछ रहे हैं? मेरा तात्पर्य है कि मैं इतना ही कह सकता हूं कि आपको और अधिक विशिष्ट होना होगा ताकि ये उत्तर दे सकूं।

प्रश्न जारी : आप जानते हैं, कानूनी तौर पर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को एकीकृत करने के लिए।

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार : नहीं, आप देखते हैं कि मुझे लगता है कि हमने ऐसी रिपोर्टें देखी हैं कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर सरकार द्वारा जाहिरा तौर पर जारी एक आदेश है जहां मुझे लगता है कि उन्होंने सेवाओं के नामकरण को किसी और चीज में बदल दिया है। अब हम इसकी जांच कर रहे हैं लेकिन मैं केवल इतना कह सकता हूं कि नामबदलने से यह तथ्य नहीं बदलता कि पाकिस्तान ने अभी भी एक ऐसे क्षेत्र पर अवैध कब्जा कर रखा है जो भारत का हिस्सा है।

प्रश्न : क्या आप चीन के विदेश मंत्री वांग यी की यात्रा की पुष्टि कर सकते हैं क्योंकि उनके 21 तारीख को आने का समाचार है और कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि वे आगरा आ रहे हैं?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार : ठीक है, मुझे लगता है कि मैं इस स्तर पर पुष्टि नहीं कर सकता, आपको प्रतीक्षा करनी होगी। आप बहुत जल्द एक घोषणा सुनेंगे।

प्रश्न : महोदय, पुर्तगाल के प्रधानमंत्री यहां भारत में हैं और उन्होंने प्रधानमंत्री से भी मुलाकात की है, इसलिए क्या आप हमारे साथ साझा कर सकते हैं कि क्या बातचीत हुई थी और क्या भारत और पुर्तगाल के बीच कोई समझौता हुआ था?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार : ठीक है, आप देखते हैं और आप जानते होंगे कि पुर्तगाल के प्रधानमंत्री एंटोनियो कोस्टा आयोजन समिति के सदस्य हैं जो महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती मनाने के लिए गठित की गई थी। यह बैठक कुछ समय पहले हुई थी, वह भारत आए हैं क्योंकि उन्हें उस संदर्भ में उस बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया था और वे प्रधानमंत्री के निमंत्रण पर यहां आए थे।
इससे पहले आज प्रात: उन्होंने प्रधानमंत्री के साथ बैठक की। प्रधानमंत्री ने सबसे पहले उन्हें धन्यवाद दिया कि हम सभी इस महत्वपूर्ण अवसर से जुड़े रहें। मेरे विचार से जिन मुद्दों पर चर्चा हुई है और विशेष रूप से मेक इन इंडिया के संदर्भ में प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री कोस्टा को विभिन्न क्षेत्रों में भारत में उपलब्ध अवसरों का उल्लेख किया और उन्होंने पुर्तगाली कंपनियों से आग्रह किया कि उन्हें भारत में आने और निवेश करने के लिए भारत में उपलब्ध अवसरों का उपयोग करना चाहिए, जिनमें सस्ता श्रम शामिल हैं।
भारत-यूरोपीय संघ के संबंधों पर भी कुछ चर्चा हुई और विशेष रूप से भारत और यूरोपीय संघ के बीच होने वाली शिखर वार्ता के संदर्भ में कि इसे और कैसे सुदृढ़ किया जा सकता है। और हां, कोई समझौता नहीं हुआ, यह एक कार्यकारी यात्रा है, यह पूर्ण द्विपक्षीय यात्रा नहीं थी। इस यात्रा का उद्देश्य महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाने के लिए आयोजन समिति की बैठक में शामिल होना था।

प्रश्न : पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी का एक बयान आया कि जिसमें उन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम के बारे में छात्र विरोध पर पुलिस बल के प्रयोग और अन्य चीजों को भी मिलाने के संबंध में भारत सरकार पर प्रश्न उठाया है। आप इसे कैसे देखते हैं और आप इस संबंध में क्या उत्तर देना चाहेंगे?)

प्रश्न : भारत ने स्पष्ट किया है कि वास्तव में क्या हुआ है मेरा तात्पर्य है कि इस विधेयक में क्या है और इस पर उनकी प्रतिक्रिया क्या है क्योंकि यह भी पता चलता है कि इन देशों में यह एक प्रकार से खोज है उनकी धर्मनिरपेक्षता पर प्रश्न उठते है, वे अल्पसंख्यकों के साथ किस प्रकार का व्यवहार कर रहे हैं, तो आप जानते है कि सभी विचार उन्हें अच्छा नहीं लग रहे होगें।

प्रश्न : अफगानिस्तान से एक प्रतिनिधिमंडल आया है, अफगानिस्तान से छह सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल यहां है और वे राजनीतिक नेताओं से भेंट कर रहे है तो क्या विदेश मंत्रालय इसे आयोजित कर रहा है अथवा वे स्वयं यहां है और क्या हम इन समुदायों को भारत में प्रवास करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार
: मुझे इस यात्रा के बारे में मुझे पता नहीं है इसमें विदेश मंत्रालय किस रूप में शामिल है। मेरा तात्पर्य है कि यदि हमने इसका आयोजन किया होता, तो हमें मालूम होता।
विरोध प्रदर्शनों पर पाकिस्तानी विदेश मंत्री द्वारा दिए गए वक्तव्य के बारे में, आप जानते हैं कि मेरा तात्पर्य है कि मैं बार-बार उन्हें न केवल विदेश मंत्री के वक्तव्यों के बारे में बताता रहा हूं बल्कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को भी कहा जाता रहा है कि उन्हें अपने भीतर देखना चाहिए और पड़ोसी देश में क्या हो रहा है, उसमें दखल नहीं देनी चाहिए। उन्हें चाहिए और जैसा कि हमने कई बार कहा है कि उन्हें एक सामान्य पड़ोसी की तरह व्यवहार करना शुरू कर देना चाहिए। यदि आप देखें कि उनको देश में क्या चल रहा है और बहुत सी चीजें हो रही हैं तो मुझे लगता है कि यह कुछ ऐसा है जिसे उन्हें अन्य देशों पर उंगली उठाने से पहले ध्यान में रखना चाहिए।

मौजूदा स्थिति पर आप जानते हैं, मैं केवल शांति एकता और भाईचारे के लिए प्रधानमंत्री की अपील का उल्लेख कर सकता हूं। हम यह भी बताना चाहेंगे और कुछ अन्य संगठनों द्वारा भी ऐसे वक्तव्य दिए गए हैं कि हमारे लोकतंत्र और देश की अन्य संस्थाएं वे शांतिपूर्ण तरीके से किसी भी मतभेद से निपटने के लिए अच्छी तरह से सुसज्जित हैं। मुझे नहीं लगता कि किसी बाहरी एजेंसी के पास किसी ऐसे मामले पर टिप्पणी करने के लिए कोई औचित्य है जो भारत के लिए पूरी तरह से आंतरिक है।

बांग्लादेश और अफगानिस्तान के बारे में आप देखते हैं कि मुझे लगता है कि पिछली बार मैंने बांग्लादेश और अफगानिस्तान दोनों पर इस प्रश्न का उत्तर दिया था लेकिन मैं दोहरा सकता हूं। आपने टिप्पणी की हैं कि बांग्लादेश के साथ कुछ बैठकों आदि को स्थगित किया जा रहा है, रद्द कर दिया गया है। हमें यह समझना होगा कि बांग्लादेश के साथ 75 से अधिक वार्ता तंत्र हैं जो घटित हो रहे हैं और तिथियों का निर्णय पारस्परिक परामर्श के माध्यम से किया जाता है । हमारी समझ एक ऐसा संबंध है जो हमारे दोनों देशों के बीच उतना ही करीब है, जिसे यहां-वहां की यात्रा स्थगित करने के संदर्भ में परिभाषित नहीं किया जाना चाहिए। किसी भी मामले में बांग्लादेश ने ऐसी यात्राओं के कारणों के बारे में बताया है आप जानते हैं कि इसे क्यों स्थगित किया गया है।

वास्तव में बांग्लादेशी विदेश मंत्री का एक वक्तव्य है जिसमें उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि संयुक्त जल आयोग को क्यों स्थगित किया गया और वह अनिवार्य रूप से कहते हैं कि उनके पास छह नदियों के आंकड़े नहीं थे और इसलिए जो चर्चा हो सकती थी वह फलदायी नहीं होती है। फिर मैं इस बात को दोहराना चाहूंगा कि आप जानते हैं कि क्या हो रहा है और यह कुछ ऐसा है जिसे बांग्लादेश ने समझा है, भारत के भीतर जो कुछ हो रहा है वह एक आंतरिक मामला है और बांग्लादेश के साथ हमारे उत्कृष्ट संबंध हैं। हम उत्सुक हैं और दोनों देश वास्तव में भविष्य में अपनी साझेदारी को और गहरा करने के लिए मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हैं और हम संबंधों को मजबूत करने के अपने प्रयासों में बहुत सफल हैं। मुझे नहीं लगता कि बैठकों के लिए पुनर्निर्धारण की कुछ इक्का-दुक्का घटनाओं में बहुत कुछ पढ़ा जाना चाहिए जो हमें बहुत स्पष्ट प्रतीत होता है।

अफगानिस्तान के संबंध में, आप देखते हैं कि हमारे पास और विशेष रूप से उनके पक्ष से बाहर आए वक्तव्य के संदर्भ में, विशेष रूप से जब हमने अल्पसंख्यकों के बारे में बात की थी, हमने कहा कि हमने यह नहीं कहा कि अफ़गानिस्तान की, वर्तमान सरकार के तहत धार्मिक उत्पीड़न हो रहा है।

हमने जो कुछ कहा है और हमारे गृह मंत्री द्वारा भी यह स्पष्ट किया गया है कि पिछली मुजाहिदीन और तालिबान सरकारों के दौरान धार्मिक अल्पसंख्यकों को जानबूझकर 2001 में धर्म के आधार पर प्रताड़ित किया गया था और हम सभी इस बात से अवगत हैं। तालिबान ने इन लोगों को या तो इस्लाम में बदलने या देश छोड़ने का आह्वान जारी किया। हम यह भी जानते हैं कि वर्तमान सरकार ने अपने संवैधानिक प्रावधानों और कानूनों के अनुसार अल्पसंख्यकों की चिंताओं को काफी हद तक दूर किया है।

प्रश्न : बांग्लादेश के एक मंत्री का बयान भी सामने आया था कि यदि भारत में अवैध रूप से बांग्लादेशी रह रहे हैं तो भारत सरकार हमें उनकी सूची दे, हम उन्हें वापस बुलाने पर विचार करेंगे। तो क्या बांग्लादेश ने इस सूची के बारे में आधिकारिक तौर पर हमसे संपर्क किया है और क्या भारत के पास ऐसी कोई सूची है?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार : नहीं, आपको इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि अवैध नागरिकों की स्वदेश वापसी, और यह केवल बांग्लादेश का मामला नहीं है, यदि आप किसी देश को बताते हैं कि आपके देश में उनके देश के अवैध नागरिक हैं और यदि वह देश इस बात से सहमत है कि वे उनके नागरिक हैं तो यह प्रावधान मौजूद है और यह लंबे समय से है और यह भारत और बांग्लादेश के बीच कोई नई बात नहीं है।

यदि हमारे पास ऐसी सूची है तो हम उनके साथ साझा करते हैं और यदि वे इस बात की पुष्टि करते हैं कि हां ये उनके नागरिक हैं और यह पिछले कई वर्षों से चल रहा है और यह कोई नई बात नहीं है। इसलिए यदि यह साबित हो जाता है तो ये लोग बांग्लादेश वापस जाते हैं और स्पष्ट रूप से इस सहयोग के लिए हम बांग्लादेश सरकार के बहुत आभारी हैं कि जब भी ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई तो उन्होंने इस संबंध में हमारी सहायता की है।

प्रश्न : धन्यवाद श्री कुमार। मैं जामिया में दो दिन पहले मिला था, बिल्कुल डर लगता है विदेशी छात्र, वस्तुतः परिसर से भाग रहे है और उनमें से दो अफगान नागरिकों ने कहा कि वे युद्धग्रस्त देश से आए हैं, लेकिन वे इतना कभी नहीं डरे है। जबकि मैं समझता हूं कि जामिया में एक डीन छात्र कल्याण है जो ऐसे प्रश्नों, ऐसे मुद्दों को संबोधित करते हैं। क्या यहां मिशन अपने छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय के संपर्क में आए हैं या आपने उन्हें कुछ आश्वासन दिया है?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार : आप देखिए, मुझे लगता है कि यह निश्चित रूप से है कि आप क्या बात कर रहे थे, एक कानून और व्यवस्था की समस्या है और मुझे लगता है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां स्थिति का समाधान करने के लिए अपनी पूरी कोशिश कर रही हैं। यदि हमें सरकार से आधिकारिक रूप से ऐसा संचार प्राप्त होता है तो हमें यह देखना होगा कि इसके बारे में क्या किया जाना है लेकिन इस स्तर पर मुझे ऐसे किसी अनुरोध के बारे में जानकारी नहीं है जो हमारे पास आया है।

प्रश्न : यह जापान के प्रधानमंत्री श्री आबे की स्थगित यात्रा के बारे में है। पहला, यात्रा स्थगित किए जाने के सही कारण क्या हैं और दूसरा यह है कि यह एक द्विपक्षीय तंत्र है, वार्षिक शिखर सम्मेलन, बस यह समझने के लिए, क्या कोई वैकल्पिक स्थान है जिस पर चर्चा की गई थी या हम इसे कहीं और आयोजित कर सकते थे, गुवाहाटी?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार :
यह अब पुरानी बात है और मुझे नहीं लगता कि मैं फिर से उस बारे में कुछ बताऊंगा जिसे मैने पिछले सप्ताह साझा किया है। मैंने उल्लेख किया था कि यात्रा नहीं हो रही है और मैं सोचता हूं कि जब भी हमारे पास भविष्य में कोई तारीख निश्चित होगी तो हम आपको इसकी घोषणा करेंगे। मैं आपके साथ केवल यह साझा कर सकता हूं कि भारत और जापान दोनों एक दूसरे के संपर्क में हैं और पारस्परिक रूप से सुविधाजनक तारीख नियत करने का प्रयास कर रहे हैं और जब भी इसे अंतिम रूप दिया जाता है तो मैं आपके साथ साझा करूंगा।

प्रश्न
: आप को कितनी आशा है कि कश्मीर का मुद्दा बहुपक्षीय मंच पर नहीं उठाया जाएगा क्योंकि हमने देखा है कि यूएनएससी एक ऐसा देश है जो इसे उठाने का प्रयास कर रहा है, एक बार नहीं बल्कि पिछले सप्ताह फिर से देखा गया कि इस देश ने ऐसा करने का प्रयास किया है।

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार :
आशा है कि, यह एक बहुत ही कठिन प्रश्न है। पूरी दुनिया आशावान होकर आगे बढ़ती है, लेकिन मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि जैसा कि मैंने अतीत में कहा है कि 370 से संबंधित घटनाक्रमों पर हमारी स्थिति ऐसी है, जो अब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को पता है। मैं समझाता हूं कि हमने उन्हें स्पष्ट किया है, हमने उन्हें बताया है कि यह भारत का आंतरिक मामला है और हमने यह भी बताया है कि ऐसा क्यों किया गया है और यह आउटरीच जारी है। हमने स्पष्ट किया है और जब भी वक्तव्य दिए गए हैं तो आप जानते हैं कि हमने उन वक्तव्यों पर भी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इसलिए हम आशा करते हैं और आशा करते हैं कि अनुच्छेद 370 से संबंधित घटनाक्रमों का औचित्य अंतर्राष्ट्रीय समुदाय और बहुपक्षीय संगठनों तक पहुंच गया है।

प्रश्न : इस नागरिकता संशोधन अधिनियम के लिए हमारा तर्क यह था कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का प्रतिशत 1947 में 23 प्रतिशत से घटकर अब लगभग 2 या 3 प्रतिशत रह गया और हाल ही में गृह मंत्री ने इसका भी उल्लेख किया था। लेकिन पाकिस्तान ने कल इस्लामाबाद से एक औपचारिक बयान जारी किया है जिसमें वे कहते हैं कि ये आंकड़े पूरी तरह से झूठे हैं और यह कभी 23% नहीं था और यह 1941 की जनगणना से लिया गया है और इसमें विभाजन के समय हुए प्रवासन को ध्यान में नहीं रखा गया है। तो क्या आपके पास आधिकारिक प्रतिक्रिया है क्योंकि हम हमेशा यह बनाए रखते रहे हैं कि 23% से यह घटकर 2 या 3% रह गया और इसलिए यह स्वयं इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने अपने अल्पसंख्यकों के साथ किस तरह का व्यवहार किया है लेकिन इस तथ्य के आलोक में क्या उन्होंने इन आंकड़ों पर विवाद किया है?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार : गृह मंत्री द्वारा संसद में जो वक्तव्य दिया जाता है, मेरा तात्पर्य यह है कि यह कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं है। अब आप संसद में गृह मंत्री के वक्तव्य को पाकिस्तान द्वारा बताए जा रहे वक्तव्य को रखने का प्रयास कर रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि मुझे उस प्रश्न का जवाब देने की आवश्यकता है।

प्रश्न : यूनिसेफ प्रमुख ने सीएए का मुद्दा भी उठाया है और उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के लिए चिंता व्यक्त की है और आग्रह किया है कि बच्चों की आवाज सुनी जानी चाहिए, आप क्या कहते हैं?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार : मुझे लगता है कि प्रश्न के दूसरे भाग का मैने उत्तर दिया था और वास्तव में मैने जब उस प्रश्न का उत्तर दिया था तब मैने मैं कई एक या दो अंय संगठनों द्वारा दिए गए बयान शामिल किए थे। सीएए पर ही भारत सरकार के विचारों को संसदीय बहस में बहुत स्पष्ट रूप से व्यक्त किया गया है। तब से प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की ओर से भी कई वक्तव्य दिए गए हैं। और फिर मेरा तात्पर्य है कि मैं विस्तार में कह सकता हूं, मेरा तात्पर्य है कि मैं कह सकता हूं कि यह भारत के लिए एक आंतरिक मामला है, यह किसी भी धर्म के किसी भी भारतीय नागरिक को नागरिकता से वंचित नहीं करता है जो पहले से ही तीनों देशों द्वारा सताए अल्पसंख्यक हैं। उन्हें भारतीय नागरिकता प्रदान करने पर विचार है। यह एक सकारात्मक कार्रवाई है और जैसा कि मैंने कहा कि हमने इस मामले पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ अपने दृष्टिकोण साझा किए हैं।

प्रश्न : हाल ही में हमें पता चला है कि चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चर्चा के लिए कश्मीर मुद्दे को आगे बढ़ाने का प्रयास किया था और बाद में इसे वापस ले लिया गया। तो क्या आपने इसके बारे में चीन से संपर्क किया और क्या स्थिति थी, नई स्थिति है कि चीन ने इसे उठाने की कोशिश की और वे इसे कैसे उठाएगें?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार : हम समझते हैं कि एक देश ने 17 दिसंबर को परामर्श करने का अनुरोध किया गया था। बाद में, इस अनुरोध को वापस ले लिया गया। भारत पाकिस्तान संबंध के किसी भी पहलू पर 17 दिसंबर को यूएनएससी के सदस्य देशों के बीच चर्चा नहीं हुई थी।

प्रश्न : ……………..अश्रृव्य………… हमने उनसे बात की है कि बदले में हमें किस तरह की प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार : नहीं, हमारी समझ को विस्तार से देखें कि दुनिया भर के देशों ने समझा है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम एक ऐसा मामला है जो पूरी तरह से भारत के लिए है और उन्होंने इस निर्णय के पीछे के औचित्य और तर्क को भी समझा है और वे यह भी समझ चुके हैं कि यह भेदभावपूर्ण नहीं है, कि यह एक सकारात्मक कार्रवाई है, इसलिए यह कुछ ऐसा है जो उनके पास गया है और प्रयास और आउटरीच जारी रहेगी।

प्रश्न : अफगानिस्तान और बांग्लादेश के बारे में, आपने कहा कि उत्पीड़न अतीत में हुआ और वर्तमान शासन काफी अच्छा काम कर रहा है। पाकिस्तान के बारे में क्या है?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार : पाकिस्तान, बहुत स्पष्ट है मुझे लगता है, उत्पीड़न जारी है आप देखते हैं। तथ्य यह है कि मैंने पाकिस्तान को छोड़ दिया यह बहुत स्पष्ट है कि पाकिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न हो रहा है, उनका एक अंतर्राष्ट्रीय दायित्व है कि वे सह-धर्मवादी और उन अल्पसंख्यकों की देखभाल करें जो उनके देश में हैं क्योंकि वे देखभाल नहीं कर रहे हैं।

धन्यवाद. कोई और प्रश्न नहीं है। इस साप्ताहिक ब्रीफिंग का समापन होता है। सभी का शामिल होने के लिए धन्यवाद।

(समापन)
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