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आधिकारिक प्रवक्ता द्वारा साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग का प्रतिलेख (02 जनवरी, 2020)

जनवरी 03, 2020

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार :मित्रों!, नमस्कार!

नमस्कार और 2020 की प्रथम सरकारी मीडिया ब्रीफिंग में आपका स्वागत है और इसलिए मैं इस कमरे में आप सभी का स्वागत करता हूं और जो हमें ऑनलाइन देख रहे है उन्हें बहुत ही खुश, स्वस्थ और समृद्ध नव वर्ष की शुभकामनाएं। मेरे पास कोई घोषणा नहीं है अत: हम प्रश्नोंत्तर सत्र प्रारंभ कर सकते है।

प्रश्न :रवीश! नव वर्ष की शुभकामनाएँ!, जहां तक भारत-जापान शिखर सम्मेलन का संबंध है, तो बस जल्दी से यह जांचना चाहता था कि क्या समया का कोई पुनर्निर्धारण हुआ है? क्या इस संबंध में बातचीत चल रही हैं और यह शिखर सम्मेलन संरचना को किस प्रकार बदल करता है? क्या हम इस वर्ष दो शिखर सम्मेलनों की आशा कर रहे हैं?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार :हम इस मामले में राजनयिक माध्यमों से जापानी पक्ष के संपर्क में हैं। हमें आशा है कि बहुत जल्द हम तारीख को अंतिम रूप दे देगें। यह एक वार्षिक कार्यक्रम है, शिखर सम्मेलन दिसंबर में आयोजित किया जाना चाहिए था जो स्थगित हो रहा है और सामान्य रूप से बाद के शिखर सम्मेलनों को प्रभावित नहीं करेगा। लेकिन इन सभी मामलों पर जापान की ओर से चर्चा होगी।

प्रश्न :नव वर्ष की शुभकामनाएं रवीश!

कुछ राजनयिकों के भारत की बातचीत से खुश नहीं होने के संबंध में खबरें आई थीं कि उन्होंने, उन्हें सीएए के बारे में चर्चा की है अथवा नहीं? बस इस बारे में स्पष्टता चाहते थे कि क्या भारत ने सभी विदेशी कार्यालयों से बातचीत की या उन्होंने यहां राजनयिकों से नई दिल्ली में बातचीत की?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार : आप गीता को देखिए, एक समाचार रिपोर्ट सामने आई है और मुझे लगता है कि रिपोर्ट मैं कह सकता हूं कि यह तथ्यात्मक रूप से गलत था । हमने अपने मित्रों और भागीदारों के साथ सभी भौगोलिक क्षेत्रों के देशों तक पहुंच स्थापित की, हमने अपने मिशनों और पोस्टों को लिखा, हमने उन्हें बताया कि मेजबान सरकार के साथ सीएए और एनआरसी पर अपने दृष्टिकोण साझा करे।अब तीन-चार मुद्दे हैं जिन्हें हमने मिशनों को साझा करने के लिए कहा था, पहला यह है कि यह एक आंतरिक प्रक्रिया है, यह भारत के लिए आंतरिक मामला है, द्वितीय हमने उनसे यह भी बताने को कहा कि यह अधिनियम पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से पहले से सताए गए भारत में आए अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने पर विचार करना, तीसरा हमने उन्हें यह भी बताया कि इससे मौजूदा रास्ते प्रभावित नहीं होते जो अन्य समुदायों को नागरिकता लेने से मिलते हैं और चौथा तलाश में रुचि यह भी किसी भी धर्म के किसी भी भारतीय नागरिक को नागरिकता लेने से वंचित नहीं करता है। और इससे भी महत्वपूर्ण बात मुझे जो लगती है वह है जो विदेशी प्रेस में छप रहा है कि इससे किसी भी रूप में संविधान के बुनियादी ढांचे में परिवर्तन नहीं होता है। इसलिए ये वे मुद्दे हैं जो हमने अपने राजदूतों और महावाणिज्यदूतों को बताए थे, हमने उनसे न केवल सरकार में बल्कि मीडिया तक भी अपने वार्ताकारों तक पहुंचने को कहा था। अब, बातचीत की प्रकृति विषय पर निर्भर हो सकती है। हम इस मामले पर दिल्ली में यहां एक बहुत ही सक्रिय कूटनीति का संचालन करते हैं लेकिन हम यह भी महसूस करते हैं कि इसमें बहुत कुछ स्पष्ट किया जाना है। दो आयामी कार्यनीति अपनाई गई थी उन तक पहुंचने के अलावा, आप जानते हैं, कुछ निवासी राजदूत और उच्चायुक्त जो यहां हैं, हम विदेशों में अपने राजदूतों और उच्चायुक्तों से विभिन्न देशों की राजधानियों के साथ जुड़ने के लिए भी कहेंगे।

प्रश्न :महोदय, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच एक समझौते की कुछ रिपोर्टें आई थीं, जिसमें कश्मीर मुद्दे पर चर्चा करने के लिए ओआईसी की बैठक बुलाई जाएगी और शायद सीएए पर भी, इसलिए, एक वर्ष से भी कम समय पहले भारत ने ओआईसी के एक सत्र में भाग लिया था। क्या सरकार सऊदी अरब तक पहुंच गई है या हम कोशिश कर रहे हैं, इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है क्या आपने आधिकारिक तौर पर किसी से कुछ सुना है?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार : श्रीधर, मेरे विचार से, दूसरा भाग बहुत स्पष्ट है, जैसा कि मैंने उल्लेख किया है कि हम कई देशों तक पहुंच चुके हैं। दूसरे भाग पर, मैं कह सकता हूं कि रिपोर्टें पूरी तरह से सट्टा हैं, मुझे लगता है कि यह खबर मूल रूप से पाकिस्तान से निकल रही है कि बैठक का आयोजन किया जा रहा है। ओआईसी द्वारा इस स्तर पर आयोजित किए जा रहे भारत संबंधी किसी भी मामले पर ओआईसी की ऐसी किसी बैठक के बारे में हमें जानकारी नहीं है।

प्रश्न :क्या आपके पास रायसीना डायलॉग के लिए आने वाले ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मोरिसन के कार्यक्रम की जानकारी है?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार : जिसके तहत रायसाना संवाद 14 से 16 जनवरी,2020 तक होने वाल है और इसमें दुनिया भर के सर्वश्रेष्ठ कार्यनीतिक विचारक भाग लेंगे और स्कॉट मॉरिसन ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री को भी इस आयोजन के लिए आमंत्रित किया गया है और उनका कार्यक्रम बनाया जा रहा है। और हम आपको यथासमय बताएंगे। मैं आपको एक बात और सूचित करना चाहूंगा कि हमें बहुत अच्छीप्रतिक्रिया मिली है। मेरे पास लगभग 10 विदेश मंत्रियों, राष्ट्रमंडल महासचिव के नाम हैं और यूरोपीय संघ के उच्च प्रतिनिधि ने भी उनकी भागीदारी की पुष्टि की है। इस प्रकार हम रायसीना वार्ता में बहुत उच्च स्तरीय भागीदारी देख पाएंगे।

प्रश्न :सिर्फ सीएए, एनआरसी मुद्दे पर अनुवर्ती कार्रवाई करने के लिए, क्योंकि ऐसी भी रिपोर्टें आई थीं जो यह सुझाती हैं कि बांग्लादेश ने लिखित आश्वासन मांगा है कि अप्रवासियों को वापस नहीं भेजा जाएगा और बांग्लादेश द्वारा कुछ सुरक्षा बंद करने थी, फोन सिग्नल काटने, सीमा पर सुरक्षा के मुद्दों के बारे में रिपोर्ट आई हैं, क्या आप कृपया इस बारे में विस्तार से बता सकते हैं?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार : फोन के मुद्दे पर आप देखते हैं कि एक रिपोर्ट थी कि उन्होंने रोक लगा दी है, फिर एक और रिपोर्ट आई थी कि निर्णय रद्द कर दिया गया है। इसलिए, जो भी हो, निर्णय मुझे लगता था कि इस समय यह जमीनी स्तर पर नहीं है। इसलिए, मेरे विचार से, यह स्वयं हल हो गया। दूसरी ओर, प्रश्न, हमने एनआरसी पर बांग्लादेश सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। हमने कहा है कि यह भारत का आंतरिक मामला है। इस मामले पर जो रिपोर्टें सामने आ रही हैं, वह स्रोत पर आधारित हैं और उसे सत्यापित नहीं किया जा सकता है। इसलिए मेरे लिए ऐसी खबरों पर टिप्पणी करना कठिन है।

प्रश्न :महोदय, नेपाल काला पानी सीमा का मुद्दा उठा रहा है और आप जानते हैं कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने के.पी. शर्मा ओली से मुलाकात की थी, तब नेपालियों की ओर से यह मुद्दा उठाया गया था और क्या इस मामले पर भारत और नेपाल के बीच कोई बात चल रही है?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार :मैं सबसे पहले नेपाल के प्रधानमंत्री के साथ प्रधानमंत्री से हुई बातचीत के बारे में बात करता हूं। मैं सभी पड़ोसी नेताओं को नए वर्ष की शुभकामनाएं देना अनिवार्य था जो प्रधानमंत्री ने श्री के.पी. शर्मा ओली जी के साथ भी किया था। यह हमारे सदियों पुराने संबंधों और सभ्यता के संपर्कों और"पड़ोस पहले" की भावना को ध्यान में रखते हुए था जिसे हम नेपाल के साथ साझा करते हैं। हमने एक प्रेस विज्ञप्ति साझा की है जहां हमने बातचीत के प्रासंगिक विवरणों को शामिल किया है। जहां तक सीमा प्रश्न का संबंध है, हमने अपनी स्थिति बिल्कुल स्पष्ट कर दी है।मैं केवल इस बात को दोहरा सकता हूं कि हमारे मानचित्र में भारत के संप्रभु क्षेत्र को सही ढंग से दर्शाया गया है और नए मानचित्र में नेपाल के साथ हमारी सीमा में किसी भी प्रकार से संशोधन नहीं किया गया है। नेपाल के साथ सीमा चित्रण अभ्यास मौजूदा तंत्र के तहत चल रहा है। हम दोनों देशों के बीच अपने घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों की भावना से बातचीत के माध्यम से बकाया सीमा मुद्दों को हल करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं ।

प्रश्न :महोदय, एक स्पष्टीकरण, आपने शुरूआत में यह कहा कि सीएए और एनआरसी को लेकरसभी देशों से संपर्क साधा गया है। आपने सीएए के बारे में बताया है कि क्या कुछ कहा गया है, एनआरसी के बारे में क्या ब्रीफ किया गया है?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार :नहीं, मूल रूप से देखें हमने उन्हें बताया है कि दोनों अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। सीएए और असम एनआरसी का आस-पास में कोई संबंध नहीं है। सीएए और असम एनआरसी के बारे में हमने यह बताया है कि यह उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए जनादेश के अनुरूप प्रक्रियाएं हैं, यह हमारा आंतरिक मामला है और हम क्या कर रहे हैं, यह उच्चतम न्यायालय के निर्देश के अनुसार है। यह उच्चतम न्यायालय के निर्देश के अनुसार है, इसका अधिदेश उच्चतम न्यायालय द्वारा किया जाता है और इसकी निगरानी उच्चतम न्यायालय द्वारा भी की जाती है। यदि आपने कुछ देशों को छोड़कर विश्व भर से प्राप्त प्रतिक्रिया पर ध्यान दिया है, तो हम महसूस करते हैं कि अधिकांश देशों ने स्वीकार किया है कि यह भारत का आंतरिक मामला है और यह उनकी प्रतिक्रियाओं और घोषणाओं में परिलक्षित हो रहा है।

प्रश्न :महोदय, यह प्रश्न नीरव मोदी के साथ-साथ मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण अनुरोध से संबंधित है, क्या आप इस संबंध में हुई प्रगति साझा कर सकते हैं, आज लंदन में नीरव मोदी मामले की सुनवाई हुई और एंटीगन कोर्ट में भी मेहुल चोकसी ने नागरिकता के अधिकार के लिए जवाबी हलफनामा दायर किया है। भारत के प्रत्यर्पण के दावे, हम कैसे उठा रहे हैं और इस पूरी प्रक्रिया में प्रगति क्या है?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार : नीरव मोदी के मामले की सुनवाई लंदन के वेस्टमिंस्टर मेगिस्टरेट न्यायालय में हो रही है। अगली सुनवाई वीडियो लिंक शेयरिंग पर आज निर्धारित है और हमें यह देखना होगा कि उस सुनवाई में क्या हुआ लेकिन मोटे तौर पर मैं यह सारांश दे सकता हूं कि हम प्रतिबद्ध हैं, हम सभी संसाधनों लगा रहे हैं ताकि नीरव मोदी का भारत में शीघ्र प्रत्यर्पण सुनिश्चित किया जा सके।

प्रश्न : मेहुल चोकसी पर एक और क्या था?

उत्तर : मेहुल चोकसी पर हमने एंटीगुआ और बारबुडा सरकार से कानूनी कार्यवाही में तेजी लाने का अनुरोध किया है, ताकि मेहुल चोकसी के भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू की जा सके।

प्रश्न :क्षेत्रीय नेताओं के साथ प्रधानमंत्री की बातचीत के प्रश्न पर वापस आते हुए, क्या शेख हसीना के साथ बातचीत में एनआरसी का मुद्दा और बांग्लादेश में अवैध आप्रवासियों की संभावित वापसी का मुद्दा सामने आया?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार : हमने जो कुछ साझा किया है, उस पर आपने एक प्रेस विज्ञप्ति देखी होगी और इससे अधिक कुछ नहीं है जिसे मुझे साझा करना है। सीएए और एनआरसी पर हमारी स्थिति बता दी गई है, हम दुनिया भर के कई देशों के साथ बातचीत कर रहे हैं और मेरे पास इससे अधिक बताने के लिए कुछ नहीं है।

प्रश्न :…….रूस में छात्र....................................

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार :हम अपने दूतावास के संपर्क में हैं। दूतावास ने कंसल्टेंट से संपर्क किया है और वे भी विश्वविद्यालय के अधिकारियों के संपर्क में हैं। दोनों को शीघ्रातिशीघ्र मामले को सुलझाने को कहा गया है। हमें एक संकल्प की काफी आशा है जिससे छात्रों का कैरियर खतरे में नहीं पड़ेगा और यही आश्वासन हमें दोनों से मिला है। हम इस मामले में प्रगति पर निगरानी करते रहेंगे।

प्रश्न :.....स्वामी नित्यानंद मामले पर कोई अपडेट?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार :कोई अपडेट नहीं है। आप जानते हैं, पिछली बार जब मैंने आपके साथ इस मामले पर चर्चा की थी, तब भी हम एजेंसियों से कुछ संदेश प्राप्त होने की प्रतीक्षा कर रहे थे। लेकिन अपने दम पर, हमने अपने सभी मिशनों और पोस्टों पर एक संदेश भेजा है, जिसमें विदेशी सरकार से उसका पता लगाने की कोशिश करने में मदद मांगी गई है और वह अनुरोध अभी भी यथावत है लेकिन इससे अधिक कुछ नहीं है।

प्रश्न :विदेश मंत्री, हाल ही में विदेश मंत्री स्तर की वार्ता के लिए ईरान में थे, चाबहार बंदरगाह पर निश्चित रूप से चर्चा हुई होगी एंव बंदरगाह के इष्टतम उपयोग की दिशा में काम करना अच्छा है लेकिन आर्थिक साझेदारी, तेल भागीदारी और दोनों देशों के बीच तेल व्यापार को फिर से शुरू करने पर क्या कोई चर्चा हुई हैं?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार : मैं इस बात की जानकारी नहीं दे रहा हूं कि इस मामले पर चर्चा हुई या नहीं। हमने भारत-ईरान संयुक्त आयोग की 19वीं बैठक के बाद एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। चाबहार बंदरगाह पर भी कुछ चर्चा हुई थी। और वास्तव में भारत, अफगानिस्तान और ईरान के बीच हाल ही में चाबहार बंदरगाह पर त्रिपक्षीय बैठक हुई थी और उस बंदरगाह से बहुत अच्छा समाचार आ रहा है। आप जानते हैं कि बंदरगाह ने लगभग एक वर्ष पहले, दिसंबर 2018 में संचालन शुरू किया है। तब से भारत और चाबहार बंदरगाह के बीच, दोनों देशों के बीच,लगभग 4500 कंटेनरों की आवाजाही हुई हैं, लगभग आधे लाख कार्गो का संचालन हुआ हैं, अब हम ईरान के साथ संयोजकता बढ़ाने, इसे आगे ले जाने और मध्य एशिया के साथ अपने व्यापार संबंधों का विस्तार करने के लिए इस संयोजकता का उपयोग करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

प्रश्न :इस नित्यानंद मामले पर आपने जो चर्चा की है, क्या यह वही है, मोटे तौर पर वही है जिसके बारे में आपने पिछली बार बात की थी या आपने एक नया संदेश भेजा है?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार : यह वही संदेश है जिसके बारे में मैंने पिछली बार बात की थी।

प्रश्न :महोदय, चीन के साथ मैं समझता हूं कि सीमा निपटान के मुद्दे पर शीघ्र समाधान होने की खबरें आ रही हैं। उस पर कोई अद्यतन? इस मामले में समाधान क्या है?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार :सच कहूं तो एसआर वार्ता में जो मालूम हुआ, उसके विवरण में मिलना मुश्किल होगा। हमें जो कुछ भी साझा करना था, हमने इसे एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से साझा किया है। दो या तीन बातें है जो हम उजागर कर सकते है, जिसमें पहला यह है कि यह लग रहा था कि यह भारत-चीन संबंधों के सामरिक नजरिए से संबोधित किया जाना चाहिए और दूसरा यह भी तय किया गया था कि जबकि उन चर्चाओं एसआर वार्ता ढांचे के तहत चलती रहेगीं किंतु सीमा पर शांति होनी चाहिए जो द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

प्रश्न :भारत और चीन द्वारा दो अलग-अलग बयान जारी किए गए थे। इसलिए चीन की ओर से कहा गया कि सीमा मुद्दों के समाधान के लिए व्यावहारिक उपाय सुझाए गए थे। क्या आप इसे विस्तारपूर्वक बता सकते हैं?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार :नहीं, मैं ऐसा नहीं कर सकता. ये संवेदनशील वार्ताएं हैं । सीमा वार्ताएं हमेशा बहुत संवेदनशील होती हैं और यह काफी समय से चल रहा है। प्रत्येक वर्ष कुछ प्रगति की जाती है और हम यह तय करते हैं कि जनता को कितना बताना चाहिए और हम पहले ही प्रेस विज्ञप्ति में साझा कर चुके हैं ।

प्रश्न :ऐसी खबरें थीं कि तीन दिन तक 3 जनवरी से 5 जनवरी तक गैर सिख तीर्थयात्रियों को करतारपुर गुरुद्वारे जाने की अनुमति नहीं मिलेगी? पाकिस्तान से इस तरह की खबरें सामने आ रही हैं। क्या यह मुद्दा उठाया गया है?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार : नहीं, मैं नहीं जानता, लेकिन वर्तमान प्रणाली का संरचना गृह मंत्रालय कर रहा है, हम उस सूची को पाकिस्तान के साथ साझा करते हैं। एक निश्चित समय सीमा है और पाकिस्तान फिर से यह कहते हुए सूची लौटाता है कि यदि स्वीकार्य है या वे कुछ नाम हटाना चाहते हैं, तो वे हमें सूचित करते हैं। वर्तमान में मेरे पास इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है

प्रश्न :रवीश आपको नव वर्ष की शुभकामनाएं! आपने एसआर वार्ता के दौरान कहा था, यह निर्णय लिया गया था कि सीमा प्रश्न को दोनों देशों के संबंधों को सामरिक दृष्टिकोण से सुलझाया जाना चाहिए। क्या आप कृपया इस सामरिक दृष्टिकोण पर थोड़ा और विस्तार से बता सकते हैं?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार : नव वर्ष की शुभकामनाएँ! भारत और चीन के बीच संबंधों का विभिन्न सीमाओं, व्यापार, निवेश, लोगों से लोगों के परस्पर संबंध आदि में विस्तार हुआ है। हाल ही में, हमने चेन्नई में अनौपचारिक बातचीत की थी। इससे पहले हमने वुहान में पहला अनौपचारिक शिखर सम्मेलन किया था। इसलिए दोनों पक्ष विभिन्न मुद्दों पर बात कर रहे हैं। जब मैं कहता हूं कि सामरिक अभिविन्यास तो इसका मतलब है कि एक मुद्दे का समग्र संबंध पर असर नहीं होना चाहिए।

प्रश्न :क्या कोई विशेष मुद्दा है जिसके बारे में आप बात कर रहे हैं?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार : मैं सीमा मुद्दे के बारे में बात कर रहा हूं। मैंने अभी उल्लेख किया है। मेरा मतलब है कि सीमा वार्ता चल रही है और इसलिए यह मुद्दा चल रहा है। इसलिए एक ही समय में संबंध और अन्य सभी पहलुओं पर, सभी सीमाओं पर आगे बढ़ना चाहिए।

प्रश्न :प्रिय श्री रवीश, आपने सूचित किया कि आपके पास ओआईसी की इस घोषणा के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है कि कश्मीर पर एक बैठक का आयोजन किया जा रहा है लेकिन पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की है। अब, जब भारत ने सऊदी अरब के साथ मित्रता करने के लिए काफी निवेश किया है। आपने यह भी बताया कि हम कश्मीर पर अपनी को लेकर दुनिया के सभी देशों में गए हैं, आपने उन्हें क्या बताया है? कहा जा रहा है कि यह सब मलेशिया के दबाव में हो रहा है, क्या हम उन तक नहीं पहुंचे हैं? क्या हम अपनी कश्मीर नीति पर उन्हें मना नहीं पा रहे हैं?

आधिकारिक प्रवक्‍ता, श्री रवीश कुमार : मुझे लगता है कि आपने एक ही समय में इतने सारे देशों को जोड़ा है । यदि आप पाकिस्तान द्वारा जारी वक्तव्य को देखें तो उन्होंने यह भी कहा है कि इसकी परिकल्पना की गई है लेकिन आपके द्वारा दावे के अनुसार इसकी पुष्टि नहीं की गई है।

अब वे परिकल्पित, नियोजित आदि शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि पाकिस्तान का कोई बयान यह कह रहा है कि ऐसा हो रहा है। आप जानते हैं कि ओआईसी की विदेश मंत्री परिषद् की बैठक होती है, जो प्रत्येक वर्ष होती है और यह इस वर्ष भी होगी। तो आइए देखते हैं, आप जानते हैं, मैं यह कहते हुए सही हूं कि ओआईसी द्वारा आयोजित की जा रही किसी भी भारत केंद्रित बैठक के बारे में हमें अभी तक कोई जानकारी नहीं है। जहां तक मलेशिया का संबंध है, हमने अपनी चिंता को बहुत अच्छी तरह से और स्पष्ट रूप से जाना है और आप जानते हैं कि कुछ समय पहले हमने मलेशियाई प्रधानमंत्री द्वारा केएल शिखर सम्मेलन में दिए गए वक्तव्य पर टिप्पणी की थी और इस संदर्भ में हमने मलेशियाई सीडीए में भी बुलाया था। हमने उनसे कहा कि यह लंबे समय से चले आ रहे उन संबंधों की भावना को ध्यान में रखते हुए सही नहीं है जिन्हें हम मलेशिया के साथ साझा करते हैं, हमने उन्हें यह भी बताया है कि यह अच्छी सलाह नहीं थी और कुछ ऐसा है जिसे आसानी से टाला जा सकता था। हम सभी देशों और कई अन्य देशों तक अपने विचार व्यक्त करने का प्रयास कर रहे हैं जो ओआईसी का भी हिस्सा हैं।

अच्छा है, अब कोई प्रश्न शेष नहीं है। आप सभी का शामिल होने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। यह कुछ आंकड़ें है, कि वर्ष 2019 में हमने 80 रिकॉर्ड ब्रीफिंग की हैं, जिनमें साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग, और विशेष गणमान्य व्यक्तियों द्वारा विभिन्न यात्राओं से संबंधित ब्रीफिंग शामिल हैं।

बहुत-बहुत धन्यवाद!

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