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आधिकारिक प्रवक्ता द्वारा साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग का प्रतिलेख (30 जनवरी, 2020)

जनवरी 31, 2020

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : नमस्कार, शुभ दोपहर और इस साप्ताहिक ब्रीफिंग में आपका स्वागत है। प्रश्न आमंत्रित करने से पहले मैं एक घोषणा करना चाहता हूं और स्थिति बताना चाहता हूं।

यह घोषणा, श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे की भारत यात्रा के संबंध में है। वे हमारे प्रधानमंत्री के निमंत्रण पर 8-11 फरवरी, 2020 तक भारत की राजकीय यात्रा पर रहेंगे। वे 7 फरवरी को एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ पहुंचेंगे। 8 फरवरी का मुख्य बैठकों का दिन है। वे प्रधानमंत्री के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे। वे हमारे राष्ट्रपति से भी भेंट करेंगे और प्रात: विदेश मंत्री, श्रीलंका के प्रधानमंत्री से भेंट करेंगे।

दिल्ली में अपनी आधिकारिक व्यस्तताओं के बाद श्रीलंका के प्रधानमंत्री कोलंबो वापस जाने से पूर्व वाराणसी, सारनाथ, बोधगया, तिरुपति की यात्रा करेंगे। आप जानते हैं कि दोनों देशों के बीच कई उच्च स्तरीय दौरे हुए हैं। राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने चुनावी जीत के तुरंत बाद राष्ट्रपति के रूप में अपना पद संभालने के बाद भारत की यात्रा को अपने प्रथम गंतव्य के रूप में चुना है।

एक अपडेट एन-कोरोनावायरस पर है। आप जानते हैं कि भारत सरकार चीन में एन-कोरोनावायरस के प्रकोप से उत्पन्न स्थिति की नियमित समीक्षा कर रही है। जो व्यवस्थाएं की जा रही हैं, उन पर भी हम नियमित अपडेट ले रहे हैं। आपने हुबेई प्रांत में रहने वाले भारतीय नागरिकों को वापस लाने के लिए चीन से दो विमान संचालित करने का हमारा अनुरोध देखा होगा।

इसके लिए औपचारिक अनुरोध किया गया है। अब हम इस प्रक्रिया को शुरू करने से पहले चीन की ओर से औपचारिक मंजूरी की प्रतीक्षा कर रहे हैं और हमें आशा है कि यह मंजूरी जल्द ही दी जाएगी। इस बीच हमने पूरे प्रांत में 600 से अधिक भारतीयों के साथ संपर्क किया है और हम व्यक्तिगत रूप से भारत की यात्रा करने की उनकी स्वदेश वापसी की इच्छा का पता लगा रहे हैं।

बीजिंग में हमारा मिशन आवश्यक व्यवस्थाएं करने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रहा है। वापस आने की इच्छा रखने वाले लोगों के हवाई अड्डे तक आने की भी व्यवस्था कर रहे हैं। हम विदेशों में प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और उनके हित के लिए प्रतिबद्ध हैं और हम इस प्रक्रिया के संचालन में चीन सरकार द्वारा दिए गए समर्थन की भी सराहना करते हैं।

ये दो प्रारंभिक घोषणाएं हैं। अब मैं प्रश्न आमंत्रित करता हूं। मैं क्या करूंगा मैं पहले एन-कोरोनावायरस पर प्रश्नों के उत्तर दूंगा और फिर अन्य विषयों पर।

प्रश्न : चीन सरकार से अनुमति मिलने में इतना विलंब क्यों हो रहा है। ऐसी खबरें हैं कि अमेरिकी अपने लोगों को बाहर निकाल रहे हैं। तो आप अनुमति की प्रतीक्षा कर रहे हैं, मुझे लगता है कि कुछ दिन और लगेगें। तो इतना समय क्या लग रहा है, क्या चीन अनुमति देने में आनाकानी कर रहा है, इस बारे में नवीनतम स्थिति क्या है?

प्रश्न : प्रश्न एन-कोरोनावायरस से संबंधित ही है। क्या भारत सरकार, विदेश मंत्रालय के पास यह ब्यौरा है कि कितने भारतीय छात्र, चीन में कहां-कहां है और क्या उनमें से कोई प्रभावित है, क्योंकि भारत में आज पहला मामला केरला में आया है?

प्रश्न : क्या उन्हें पहले दिल्ली में रखा जाएगा, या किस तरीके से उनके नमूने लिए जाएगें, या अस्पताल में रखे जाएगें, क्या प्रक्रिया होगी?

प्रश्न : इस स्तर पर भारत की यात्रा करने के लिए देख रहे चीनी नागरिकों के बारे में क्या स्थिति है? क्या वीजा प्रक्रिया में कोई बदलाव आया है?

प्रश्न : बस पिछले प्रश्न में जोड़ने के लिए, बहुत सारे विभिन्न व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल अक्सर चीन से भारत आते हैं, इसलिए चीन सरकार के साथ स्वास्थ्य की स्थिति या चिकित्सा जांच के मानकीकरण के रूप में प्रोटोकॉल बनाया गया है?

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : मैं पहले इन पांच प्रश्नों का उत्तर दूंगा। जहां तक पहले प्रश्न का संबंध है, आप जानते हैं कि प्रणालियों को लागू करने में समय लगता है, अनुमोदन प्राप्त करना एक पहलू है लेकिन उनकी इच्छा का पता लगाना होगा, आपको पहले उन भारतीयों से संपर्क करना होगा जो उस प्रांत में हैं। आपको व्यक्तिगत रूप से उनसे संपर्क करना होगा, उनके संपर्क में रहना होगा, उनकी इच्छा प्राप्त करनी होगी, अन्य संरचनाओं को लागू करना होगा। अब यह वह हिस्सा है जिसमें हम जुटे हुए थे। दूसरा पहलू, चीन की ओर से मंजूरी की मांग करना और इसमें समय लगता है।

मुझे नहीं लगता कि आप जो कह रहे हैं कि देरी हो रही है। एक प्रक्रिया है और एक बार प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद मुझे विश्वास है कि आवश्यक औपचारिक अनुमोदन प्रदान किए जाएंगे। हम आशा करते हैं कि यह यथाशीघ्र किया जाए।

चीन में कितने छात्र हैं, प्रांत में समग्र भारतीयों की संख्या कितनी है।

हुबेई प्रांत में जो भारतीय नागरिक है, जहां तक हमारी जानकारी है कि, देखिए पंजीकृत करने की कोई प्रणाली तो है नहीं, पंजीकरण आपकी स्वेच्छा से है, अगर आप करना चाहें तो हमारी जानकारी के अनुसार 1200 भारतीय होते है। यह ध्यान रखिए, उसमें से अभी कितनें है, यह बताना कठिन है। हमने जिन लोगों के साथ संपर्क किया है वे 600 से अधिक है और उनसे पूछा है कि आप कितने लोग, जो विशेष उड़ान जाएगी, उसमें जाना चाहेगें। इन लोगों को दिल्ली, या कहां, किस जगह पर रखेंगे, यह सारा मामला स्वस्थ्य मंत्रालय से संबंधित है। एक स्वास्थ्य प्रोटोकॉल है, आपने देखा होगा कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से नियमित अद्यतन जानकारियां आ रही हैं और अगर आप उन्हें देखें तो यह पता चलेगा कि कितने दिन का संगरोध है। कैबिनेट सचिवालय से प्रेस विज्ञप्ति आ रही है जिसमें यह सारा उल्लेख किया गया है तो इस मामलें में उनके पास ज्यादा जानकारी होगी। जो अंदर की प्रक्रिया है उसके बारे में मैं ज्यादा टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा। क्योंकि उसके लिए भारत में एक नोडल मंत्रालय है।

जो चीनी नागरिक भारत की यात्रा करना चाहते हैं, उनके बारे में, इस समय मुझे किसी भी प्रतिबंध की जानकारी नहीं है जो भारत की यात्रा करने के इच्छुक किसी भी व्यक्ति के लिए रखा गया है। आप जानते हैं कि दुनिया भर के हवाई अड्डों ने एक स्वास्थ्य प्रोटोकॉल लगाया है। भारतीय हवाई अड्डों सहित एक सक्रिय स्क्रीनिंग हो रही है। अभी तक यही स्थिति है लेकिन हमारी ओर से हमने चीन से भारत आने वाले लोगों की आवाजाही के मामले में कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है।

प्रश्न : इस एन-कोरोनावायरस पर, क्या आप हमारे साथ कोई आंकड़ा साझा कर सकते हैं कि विश्व स्तर पर कितने भारतीय प्रभावित हैं और आपके पास क्या जानकारी है और क्या ऐसे लोग है जो गंभीर रूप से बीमार हैं या दुनिया के किसी भी हिस्से में इस वायरस से किसी भारतीय की मृत्यु की सूचना प्राप्त हुई है?

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार
: मैं इस पर कुछ और प्रश्नों के उत्तर दूंगा।

प्रश्न : यह जो उन 600 लोग से संपर्क किया जो वहां पर मौजूद है, सारे हुबेई प्रांत में है या फिर कही और भी है?

प्रश्न : ग्रेटर नोएडा में 7 फरवरी के बाद ऑटो एक्सपो है और जहां तक भारतीय उद्योगों का प्रश्न है तो यह काफी महत्वाकांक्षी होता जा रहा है। तो क्या आप जानते हैं कि वे सभी प्रतिनिधिमंडल आ रहे हैं क्योंकि चीन ने ऑटो एक्सपो के लगभग 20 प्रतिशत जगह ली है, चाहे वे आ रहे हैं या नहीं?

प्रश्न : चीन के लिए कोई यात्रा एडवाइजरी, मेरा तात्पर्य पूर्ण यात्रा एडवाइजरी से है कि किसी को भी चीन और उन देशों में भी नहीं जाना चाहिए जहां इस वायरस की पुष्टि हो गई है?

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : प्रभावित किसी भी भारतीय के प्रश्न पर मैं आपको बता सकता हूं कि हुबेई प्रांत में भारतीय नागरिकों के बीच हमारे पास जो जानकारी है, उसके अनुसार हमारे पास अब तक पुष्टि का कोई मामला नहीं आया है। मैंने दुनिया के किसी भी हिस्से में किसी भारतीय के प्रभावित होने के बारे में नहीं सुना है। आपने केरल में भारत में पहले मामले के बारे में साझा किया है, मैं समझता हूं कि इस पर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय पहले ही वक्तव्य दे चुका है।

जो दूसरा प्रश्न था कि क्या हमने संपर्क किया है, फिलहाल हम केवल हुबेई प्रांत में जो लोग है उन्हीं से संपर्क कर रहे हैं, उसके अलावा हमारा संपर्क करने को हमारा कोई इरादा अभी नहीं है।

जैसा कि मैंने उल्लेख किया है कि सभी सरकारें कुछ स्वास्थ्य प्रोटोकॉल लागू कर रही हैं, वे प्रणालियां लागू कर रही हैं और एक बार प्रणालियां लागू होने के बाद, आप आशा कर सकते हैं कि क्या इस वायरस से संक्रमित कोई व्यक्ति भारतीय क्षेत्र में आ रहा है अथवा या नहीं।

मुझे रद्द करने या स्थगन के बारे में कोई जानकारी नहीं है। मेरी सर्वश्रेष्ठ जानकारी के अनुसार यह यथावत निर्धारित है और हमने इसके विपरीत कुछ भी नहीं सुना है।

यात्रा एडवाइजरी के बारे में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने पहले ही एक एडवाइजरी जारी कर दी है और इसमें कहा गया है कि कृपया चीन की यात्रा करने से परहेज करें। तो उससे आगे कुछ भी नहीं है। इस पर बहुत बारीकी से नजर रखी जा रही है और यदि जो परामर्श किया जाएगा, उसे अद्यतन करने की आवश्यकता है।

प्रश्न : गुजरात के मुख्यमंत्री ने आप लोगों से कहा था कि आप लोगों से...... बहुत सारे छात्र आना शुरू हो गए है और दूसरी बात यह है कि गुजरात से कितने छात्र है जो चीन में रहते हैं?

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : देखिए मैं भारतीय की बात कर रहा हूं और मैंने अभी बताया कि अभी हमने 600 भारतीयों से संपर्क किया और हम यह पता कर रहें है कि उसमें से कितने लोग जो उड़ान हम संचालित करने वाले है उसमें, से कितने लोग आएगें। तो स्थिति वहीं है, मेरे पास राज्यवार ब्रेकअप नहीं है। जो भारतीय छात्र पहले आ गए है, अपने निजी पहल से, निजी साधन से आए है तो उनकी जानकारी मेरे पास नहीं होगी।

जो आवागमन होता है दो देशों के बीच में, हर बार यात्रा जो होती है एक देश से दूसरे देश में वह कोई जरूरी नहीं है कि दूतावास या वाणिज्य दूतावास को बता कर की जाए, उसकी जानकारी यहां पर हो सकती यदि वे है, वाणिज्य दूतावास या दूतावास के माध्यम से पंजीकरण करवा कर या उनको सूचित करके जाते हैं लेकिन ऐसी, कोई प्रक्रिया नहीं है। अपनी रिपोर्ट में भी सुना होगा कि काफी लोग पहले आ चुके थे, यह जो प्रकोप हुआ और इसकी जो जानकारी है उसके पहले काफी लोग आ चुके थे और इसलिए मैं बार-बार कहना चाहता हूं कि जो संख्या है, कुल संख्या क्या है और अभी भारतीयों की चीन में कितनी संख्या है, इसमें दोनों में काफी फर्क हो सकता है।

प्रश्न : नेपाल के बारे में नेपाल सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आगामी सागरमाथा वार्ता के लिए आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया है जो काठमांडू में 2-4 अप्रैल के दौरान आयोजित किया जाना है । क्या प्रधानमंत्री मोदी इस वर्ष इस वार्ता में हिस्सा ले रहे हैं?

दूसरा, नेपाल सरकार ने पाम तेल पर आयात की पाबंदियों को हटाने के लिए आधिकारिक तौर पर भारत को बरकरार रखा है। भारत की ओर से इस पर क्या कार्रवाई हो रहा है?

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : आप देखिए हमें नेपाल सरकार का एक पत्र प्राप्त हुआ है जिसमें आपके द्वारा उल्लेख किए गए सागरमाथा संवाद के लिए प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया गया है। आपमें से कई लोग इस बात से अवगत होंगे कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा के संबंध में एक निश्चित प्रक्रिया से गुजरता है और इस प्रक्रिया में उनकी व्यस्तताएं, उनकी अन्य प्रतिबद्धताएं भी शामिल हैं। हम आपको उचित समय पर प्रधानमंत्री की भागीदारी के बारे में अपने निर्णय के बारे में बताएंगे।

दूसरा प्रश्न पाम तेल के व्यापार पर था, आप जानते हैं कि मैंने पहले भी इसका उल्लेख किया है कि यह एक ऐसा मामला है जो व्यापार नीति से संबंधित है । मैंने विगत में उल्लेख किया है कि भारत सरकार द्वारा जारी की गई अधिसूचना देश विशिष्ट नहीं थी जिसे आप जानते हैं, यह एक निश्चित नीति से संबंधित है। इस मामले पर नेपाल सरकार ने हमसे संपर्क किया गया है और हम इस समय संबंधित विभागों के साथ आंतरिक विचार-विमर्श कर रहे हैं।

प्रश्न : हमने देखा है कि ब्रूसेल्स में क्या हुआ, क्या आप हमें यह बता सकते हैं कि भारत ने परदे के पीछे क्या किया?

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार
: परदे के पीछे हम जो करते हैं, वह परदे के पीछे ही रहेगा। मेरे लिए आपके साथ साझा करना मुश्किल होगा कि परदे के पीछे क्या हुआ लेकिन मैं आपके यह साथ साझा कर सकता हूं कि हमने यूरोपीय संघ की संसद के सीएए संकल्प को मतदान हेतु नहीं रखने के निर्णय को नोट किया है। जैसा कि मैंने पहले सीएए का उल्लेख किया है, भारत का आंतरिक मामला है। इसे उचित प्रक्रिया और लोकतांत्रिक माध्यमों से अपनाया गया है। हमने यह भी नोट किया है कि यूरोपीय आयोग, कि यूरोपीय संसद और उसके सदस्यों द्वारा व्यक्त की गई राय का उनका स्पष्टीकरण यूरोपीय संघ की आधिकारिक स्थिति का प्रतिनिधित्व नहीं करता है, लेकिन, लेकिन हम एमईपी यूरोपीय संसद और इस मामले में यूरोपीय संघ के अन्य हितधारकों के साथ जुड़ना जारी रखेंगे।

देखिए, जो यूरोपीय संघ संसद का निर्णय था कि सीएए संकल्प पर वोट नहीं किया जाए उसे हमनें नोट किया है। हमने पहले भी कहा है कि सीएए भारत का एक आंतरिक मामला है और इसको जो अपनाया गया है, हमने एक उचित प्रक्रिया और लोकतांत्रिक तरीके से इसे अपनाया है। लेकिन, हमने यूरोपियन कमीशन का वक्तव्य भी देखा है जिसमें उन्होंने कहा है कि जो यूरोपियन संसद और यूरोपियन संसद के सदस्यों, का इस संबंध में जो मत है, वह यूरोपीय संघ की सरकारी स्थिति नहीं है। दोनों देश, भारत और यूरोपीय संघ रणनीतिक साझेदार है। साझेदारी को सुदृढ़ करने के लिए दोनों तत्पर है और हम आगे यूरोपियन संसद के सदस्य, यूरोपीय संघ और जितने सारे प्रासंगिक हितधारक है उनके साथ हम लगातार बातचीत करते रहेगें।

प्रश्न : गुजरात के मुख्यमंत्री ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अहमदाबाद आ रहे हैं। उन्होंने कोई तारीख नहीं बताई है लेकिन लोगों को यह बताया गया है कि 23 तारीख है । क्या हमें विदेश मंत्रालय से कोई पुष्टि मिल सकती है?

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : प्राय: यहां से यात्रा की घोषणा की जाती है। आप जानते हैं कि हम राजनयिक माध्यमों से अमेरिका की ओर से यात्रा की तारीखों और विवरणों को तैयार करने के लिए कार्रवाई कर रहे हैं। हम यथासमय, एक घोषणा करेंगे लेकिन इस समय मैं, इस बारे में कोई अन्य टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा।

इस समय, मैंने जो पिछले सप्ताह कहा था और उसके पहले भी कहा था, उसके अधिक बताने की स्थिति में नहीं हूं। मैं केवल इतना बता सकता हू्ं कि दोनों देश अभी भी राजनयिक माध्यम से बातचीत कर रहे है जिसमें यात्रा की तारीख और यात्रा के बारे में बाकी जो विवरण है उस पर चर्चा चल रही है, उस पर सलाह मशवरा चल रहा है और जैसे ही हमें इस पर पूरी जानकारी प्राप्त होगी, हम अपनी सामान्य प्रक्रिया के अंतर्गत इस बारे में घोषणा करेगें।प्रश्न : जैसा कि भारतीय विदेश सचिव ने पहले ही कार्यभार संभाल लिया था, क्या आप नेपाल के साथ सीमा मुद्दे की सचिव स्तर की बैठक पर नवीनतम अद्यतन, जानकारी देकर सकते हैं? क्या तारीख को अंतिम रूप दिया गया है?

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : जैसा कि मैंने अतीत में भी उल्लेख किया है कि राजनयिक माध्यमों से जिस बात पर चर्चा की जा रही है, मैं इस मंच से टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा। मैं जानता हूं कि आप एक चर्चा का उल्लेख कर रहे हैं जो सीमा मुद्दे से संबंधित है। मैं केवल अपनी पहले की स्थिति को दोहरा सकता हूं लेकिन यदि तारीखों की कोई पुष्टि होती है तो हमें घोषणा करने में प्रसन्नता होगी।

प्रश्न : पिछले सप्ताह गल्फ न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री ने कहा था कि वे यह नहीं समझ पा रहे हैं कि भारत ने इस नागरिकता संशोधन अधिनियम को क्यों लाया है और यह पूरी तरह अनावश्यक है। क्या इस बारे में आप कोई टिप्पणी करना चाहेंगे?

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार
: हमने बांग्लादेश सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है कि इसे क्यों लाया गया है। आपने अपने वक्तव्य में यह भी पढ़ा होगा कि भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध कभी बेहतर नहीं रहे हैं और हमारे पास बांग्लादेश से उनके वक्तव्य और टिप्पणियां भी आ रही हैं कि यह भारत का आंतरिक मामला है।

प्रश्न : ब्रिटिश अधिकारियों से भारत के बार-बार अनुरोध करने के बावजूद, वास्तव में 26 जनवरी को लंदन में भारतीय उच्चायोग के बाहर विरोध प्रदर्शन किया गया था। इसलिए जब हम बार-बार ब्रिटिश अधिकारियों को ऐसी अनुमति नहीं देने के लिए कह रहे हैं तो आप इन विरोधों को वास्तव में किस नजरिए से देखते हैं। भारत विरोधी, विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, फिर भी वे हमारे अनुरोध पर कोई ऐतली-चुने नहीं हैं। आप इसे कैसे देखते हैं?

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : आपको मालूम है कि उच्चायुक्त ने 26 जनवरी से पहले ब्रिटिश गृह सचिव से मुलाकात की थी, क्योंकि 26 जनवरी वह तारीख थी जब विरोध के लिए नोटिस दिया गया था। हां, हमने ब्रिटिश सरकार को अवगत कराया था कि अतीत में जो कुछ हुआ उसके आधार पर आप आगजनी और हिंसा की घटनाओं को जानते हैं, उन्हें न केवल यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त तैयारी करनी चाहिए कि भवन और उच्चायोग सुरक्षित रहें बल्कि जो लोग भवन के अंदर काम कर रहे हैं उनकी सुरक्षा की सुनिश्चित की जाए।

कुछ घटनाएं हुईं हैं। हमने इस मामले को ब्रिटिश सरकार के समक्ष फिर से उठाया है कि यह कुछ ऐसा है जो मूल रूप से मिशन के कार्यकरण में कठिनाई पैदा करता है और हम आशा करते हैं कि जब भी ऐसी घटनाएं या ऐसी सूचनाएं प्रदर्शन के लिए दी जाती हैं तो ब्रिटिश सरकार भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न होने दे, इसके लिए पर्याप्त कदम उठाए।

प्रश्न : यूरोपियन संसद में कल नागरिकता कानून पर बहस के दौरान अनेक बार यह जिक्र किया गया कि भारत और यूरोपियन संघ के बीच शिखर सम्मेलन होने वाला है और भारत से हम उसका पक्ष जानना चाहेगें तो ये कब होने वाला है, क्या इसकी तारीखें निश्चित हो गई है?

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : जहां तक मेरी जानकारी है, दोनों देशों के बीच में 14 द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन हो चुके है और जो चौदहवां द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन था वो नवम्बर 2017 में हुआ है। उसके बाद जो नया यूरोपियन कमीशन संविधान हुआ है। उनके साथ हम लगातार बातचीत कर रहे है। पंद्रहवां भारत-यूरोपियन संघ शिखर सम्मेलन की तारीख को अंतिम रूप देने पर कार्रवाई की जा रही है और जैसे ही ये तारीखे नियत हो जाती है हम उनकी घोषणा करेगें।

प्रश्न : विदेश मंत्री अफ्रीका, नाइजर और ट्यूनीशिया की यात्रा पर थे, अत: भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन पर, कोई भी योजना है कि इस वर्ष यह भारत में कब होने जा रहा है, तारीखों पर कोई पुष्टि और दूसरा, क्या हम इस्लामी सहयोग विदेशी मंत्री संगठन की बैठक में भारत को आमंत्रित किए जाने की आशा कर सकते हैं। क्योंकि पिछली बार हमने वहां भारत की उपस्थिति देखी थी?

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : सच कहूं तो दोनों प्रश्न बहुत काल्पनिक हैं। भारत अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन के संबंध में, अगला शिखर सम्मेलन देय हो चुका है। और जब हमे स्थल और तारीखों के बारे में पुष्टि प्राप्त हो जाएगी, हम यथासमय इसकी घोषणा कर देगें।

ओआईसी पर देखिए विदेश मंत्री की अफ्रीका यात्रा का फोकस पूरी तरह से द्विपक्षीय संबंधों पर था। विदेश मंत्री का पदभार संभालने के बाद से अफ्रीकी महाद्वीप की यह उनकी पहली यात्रा थी। अनेक मुद्दों पर चर्चा की गई और हम देखेंगे कि इस संबंध में आगे क्या होता है, लेकिन मैं, वास्तव में इस पर अधिक जानकारी साझा नहीं कर सकता।

प्रश्न : यूरोपीय संघ में हमने सुना है कि यूरोपीय संसद के सदस्य बार-बार इस बात का उल्लेख कर रहे थे कि भारत को याद दिलाया गया है कि शायद सीएए और एनआरसी भारत की विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय संधि प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन करते हैं। तो क्या आपको लगता है कि इन कानूनों ने विशेष रूप से मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों के संदर्भ में भारत की किसी भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता का उल्लंघन किया है?

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम इसे कैसे देखें। जहां तक हमारा संबंध है मुझे नहीं लगता कि हम किसी भी अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और अनुबंध का उल्लंघन कर रहे हैं क्योंकि हम यूरोपीय संसद के कुछ सदस्यों की तुलना में सीएए को बहुत अलग दृष्टि से देखते हैं।

प्रश्न : ऐसी खबरें हैं कि मतदान मार्च में होगा, इसलिए क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि यह प्रस्ताव पारित होने के खतरे के बजाय भारत के लिए अस्थायी राहत की तरह है, यह अभी भी हमारे सिर पर लटका हुआ है और दूसरा, आप टिप्पणी करते हैं कि यूरोपीय आयोग ने कहा है कि यूरोपीय संसद और उसके सदस्यों के विचार, यूरोपीय संघ के विचार नहीं हैं, लेकिन क्या यह सच नहीं है कि यूरोपीय संसद यूरोपीय संघ के तंत्र का हिस्सा है, तो यह वक्तव्य किस प्रकार वैध है?

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार
: यह कुछ ऐसा है जिसे आपको यूरोपीय आयोग से पूछना है।

प्रश्न जारी : लेकिन यूरोपीय संसद यूरोपीय आयोग का हिस्सा है?

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : मैं यह कह रहा हूं कि यूरोपीय आयोग द्वारा यह सटीक वक्तव्य दिया गया है। मैंने यह वक्तव्य नहीं बनाया है। उन्होंने एक वक्तव्य दिया है, कृपया उस वक्तव्य को देखें यह बहुत स्पष्ट है जिसे आप जानते हैं। जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, तो यह यूरोपीय आयोग के साथ आयोजित किया जाएगा लेकिन आप जानते हैं कि यह मेरा वक्तव्य नहीं है, मैंने केवल वक्तव्य का हवाला दिया है।

पहले प्रश्न पर, आप देखते है अब और मार्च के बीच काफी समय है, तो मैं वास्तव में कुछ भी नहीं कहना चाहता, लेकिन अब और मार्च के बीच मुझे लगता है कि कोई भी भविष्यवाणी नही कर सकता कि क्या होगा।

प्रश्न : ठीक एक घंटे पहले, दिल्ली में ब्रिटिश उच्चायोग ने भारतीय मिशन पर हुए हमलों और लंदन में भारतीय राजनयिकों के सामने आने वाली धमकियों पर अफसोस व्यक्त किया था। क्या आप इस पर कोई टिप्पणी करना चाहेंगे?

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : नहीं, मैंने वक्तव्य नहीं देखा है, लेकिन आप जानते है कि यह मूल रूप से मैंने जो उल्लेख किया है उससे मेल खाता है कि हिंसा, आगजनी का कोई भी कृत्य मिशन के कामकाज को प्रभावित करती है और मुझे लगता है कि हमने अतीत में ब्रिटेन के साथ इस मुद्दों को दृढ़ता से उठाया है। इस बार भी इस मामले को यूके सरकार के समक्ष उठाया गया है।

प्रश्न : यह प्रश्न फिर से एन-कोरोनावायरस के बारे में है, क्या सरकार ने सभी छात्रों से चीन से भारत वापस आने का आग्रह किया है?

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : नहीं, देखो हमारा काम लोगों को यह बताना नहीं है कि क्या करना है। हम उस प्रांत में मौजूद भारतीय नागरिकों के लिए दो उड़ानें एक साथ आयोजित रहे हैं। हमने उनकी पुष्टि से पूछा है कि क्या उन्हें भारत वापस लाना चाहेगा और यदि वे भारत वापस आना चाहते हैं तो वे हमें बता सकते हैं और फिर उन्हें उन उड़ानों में समायोजित किया जा सकता है।

प्रश्न : यूरोपीय संसद में जो सांसद है उनमें से कुछ ऐसे भी है जो कश्मीर गए थे, तो आपको लगता है कि जो कश्मीर वाला दौरा था वो एक कूटनीतिक प्रयास बहुत काम नहीं आया है?

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार :
देखिए इसमें समस्या यह है कि आपको जो कुछ भी करना है, जैसाकि कोई भी प्रस्ताव है, कोई भी यात्रा है, वह कारगार होगी कि नहीं, उसके डर से हम वो कार्रवाई करना बंद कर दे यह मेरे ख्याल से गलत है। उसके बाद, यहां पर जो हमारे 15 प्रतिनिधि है उन्हें हम कश्मीर ले गए और हमें जो प्रतिक्रिया उनसे मिली है वह बहुत सकारात्मक मिली है। तो इसलिए यह सोच कर कि इसका क्या परिणाम निकलेगा अगर हम काम ना करें तो मुश्किल हो जाएगी।

प्रश्न : नेपाल सरकार के एक बहुत ही शीर्ष पदाधिकारी ने वास्तव में भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने की पेशकश की थी, तो आप इसे कैसे देखते हैं?

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : देखो, आप मध्यस्थता पर हमारे विचार जानते हैं। मैं, वास्तव में, हमारे मत क्या रहे है, आप उन्हें अवगत है, उसमें कुछ जोड़ने की आवश्यकता नहीं है।

प्रश्न : एक बहुत ही उच्च स्तरीय स्रोत जिसके साथ मैंने मुलाकात की थी, उसमें कहा गया था कि सार्क और सीमा पार आतंकवाद के भविष्य के बीच कोई संबंध नहीं है और सार्क को पुनर्जीवित किया जाना चाहिए, तो इस पर भारत की क्या स्थिति है कि जब सार्क के सदस्य देश कह रहे हैं कि आंतकवाद का कोई संबंध नहीं है और निश्चित रूप से उस पर आपका नजरिया एक बहुत अलग है।

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : आप हमारे विचारों को जानते हैं।

प्रश्न जारी : क्या आप कृपया विस्तार से बता सकते हैं?

प्रश्न : नेपाल कह रहा है कि वह सार्क की अपनी अध्यक्षता देना चाहता है, तो आप इसे कैसे देखते है?

आधिकारिक प्रवक्ता, श्री रवीश कुमार : देखिए दोनो प्रश्न संबंधित है। पहले एक अंग्रेजी में पूछा गया था, आपने हिन्दी में पूछा है तो मैं दोनों में उत्तर देता हूं।

अनेक अवसरों पर हमने सार्क प्रक्रिया पर अपनी स्थिति स्पष्ट की। भारत के, एक को छोड़कर, सभी सार्क देशों के साथ उत्कृष्ट द्विपक्षीय संबंध हैं लेकिन जब आपके यहां सीमा पार आतंकवाद होता है जहां कोई देश सीमा पार आतंकवाद का समर्थन करता है और जब कोई भी देश किसी दूसरे देश के आंतरिक मामले हस्तक्षेप करता है तो क्षेत्रीय सहयोग बुरी तरह प्रभावित होता है।

इसके पहले भी अनेक बार हमने यह बात कही है कि सार्क सम्मेलन की प्रक्रिया पर हमारी स्थिति क्या है। भारत के रिश्ते सार्क के सारे देशों के साथ, एक को छोड़कर, बहुत ही अच्छे है। लेकिन जब हम क्षेत्रीय सहयोग की बात करते है तो यदि यह माहौल है जिसमें सीमा पार आतंकवाद को अगर कोई देश समर्थन करता है, अगर कोई देश दूसरे देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करता है तो ऐसे माहौल में क्षेत्रीय सहयोग, जो सार्क सहयोग है एक संकाय के रूप में है उसे आगे बढ़ाना कठिन है।

मुझे कोई और प्रश्न नहीं दिख रहा है। आप सभी का शामिल होने के लिए धन्यवाद। बहुत-बहुत धन्यवाद।

(समापन)
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