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आधिकारिक प्रवक्ता द्वारा वर्चुअल साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग की प्रतिलिपि (25 जून, 2020)

जून 26, 2020

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: नमस्कार और शुभ संध्या। इस वर्चुअल साप्ताहिक ब्रीफिंग में आपका स्वागत है! मैं एक घोषणा करते हुए शुरूआत करूंगा। यह वंदे भारत मिशन पर है। मेरे पास आपके लिए एक अपडेट है। वंदे भारत मिशन अब पिछले 7 हफ्तों से चालू है, कुल 513047 भारतीयों के लिए, जिन्होंने भारत में प्रत्यावर्तन के लिए विदेशों में हमारे मिशन में अपना अनुरोध पंजीकृत किया है। आज तक, 364209 भारतीय इस मिशन के तहत लौटे हैं। वंदे भारत मिशन के पहले 3 चरणों में, 5 महाद्वीपों के 50 से अधिक देशों से परिचालन के लिए लगभग 875 अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें निर्धारित की गई थीं। अब तक इनमें से 700 से अधिक उड़ानें भारत पहुंच चुकी हैं, जिनमें लगभग 150000 भारतीयों को प्रत्यावर्तित किया गया है। चरण 3 के तहत शेष 175 उड़ानें आने वाले दिनों में पहुंचने की उम्मीद है। वंदे भारत मिशन की इन उड़ानों ने दुनिया के कई हिस्सों में फंसे भारतीयों की तत्काल आवश्यकता को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हम अपने शेष हमवतन लोगों को विशेष रूप से जीसीसी देशों, अन्य स्थानों सहित मलेशिया, सिंगापुर वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारे प्रयासों को जारी रखने के लिए वंदे भारत मिशन के चरण 4 को 3 जुलाई 2020 से प्रभावी कर दिया जाएगा। चरण 4 में विशेष रूप से उन देशों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जहां अभी भी बड़ी संख्या में भारतीय फंसे हैं जिन्होंने वापसी के लिए पंजीकरण करवाया है। इनके अलावा, चार्टर्ड फ्लाइट परिचालन, जो 26 मई 2020 को शुरू हुई, पिछले हफ्तों में लगातार बढ़ा है। इन उड़ानों में कई नाविकों और विभिन्न स्थानों में फंसे शिपिंग कंपनियों के कर्मचारियों को भी वापस लाया गया है। अब तक, 130061 लोग इन चार्टर्ड उड़ानों के ज़रिए वापस लौटे हैं। इन उड़ानों की बहुत अधिक मांग हैं, विशेष रूप से खाड़ी क्षेत्र में और इसलिए हम इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। पड़ोसी देशों से भी भूमि सीमाओं के माध्यम से प्रत्यावर्तन होता रहा है। नेपाल, भूटान और बांग्लादेश से 84000 से अधिक भारतीय भूमि सीमा आव्रजन चौकियों के माध्यम से वापस लौटे हैं। नौसेना के जहाजों के माध्यम से प्रत्यावर्तन भी इस मिशन का हिस्सा रहा है। ऐसा ही एक प्रत्यावर्तन वर्तमान में चल रहा है। भारतीय नागरिकों को वापस लाने के लिए आईएनएस जलश्वा 24 जून को ईरान के बंदर अब्बास नामक बंदरगाह पर पहुंचा है और आज लोगों को सवार करना शुरू किया जाएगा। तो यह वंदे भारत मिशन पर अपडेट था और अब मैं आपके प्रश्नों का उत्तर दूंगा और पवन से अनुरोध करूंगा कि वे प्रश्न पढ़कर सुनाएं।

श्री पवन बढ़े, ओएसडी (पीआर): सवालों का पहला सेट नेपाल पर है। डीडी न्यूज से अभिषेक झा ने बिहार राज्य में बाढ़ के उपशमन के मुद्दे पर सवाल पूछा है - वे पूछते हैं, बिहार सरकार से सूचना मिली है कि नेपाल ने नदी तटबंधों के निर्माण का कार्य रुकवा दिया है। वर्तमान स्थिति क्या है? क्या भारतीय पक्ष ने नेपाल के समक्ष इस मुद्दे को उठाया है? द वीक से रेखा दीक्षित ने पूछा है - क्या हमें विदेश मंत्रालय की ओर से नेपाल द्वारा बिहार में बाढ़ उपशमन के कामों को रुकवाने पर प्रतिक्रिया मिल सकती है? बिज़नेस वर्ल्ड से मनीष कुमार झा ने पूछा है - बिहार सरकार ने बाढ़ के खतरों की चेतावनी दी है क्योंकि भारत के साथ अपनी सीमा पर नेपाल द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स, अनिवार्य रूप से बाढ़ नियंत्रण के लिए गंडक बाँध पर तटबंध मरम्मत कार्यों में बाधा खड़ी कर रही है। बिहार में शुरुआती मानसून के मद्देनजर, अब क्या स्थिति है और संकट से बचने के लिए विदेश मंत्रालय ने क्या कदम उठाए हैं? नवभारत टाइम्स से नरेंद्रनाथ ने पूछा है - क्या नेपाल और भारत के बीच सचिव स्तर की वार्ता का कोई प्रस्ताव है? क्या बिहार में बांध को लेकर विदेश मंत्रालय ने नेपाल से संपर्क किया है? बिहार सरकार ने लिखित रूप से विदेश मंत्रालय से यह अनुरोध किया था।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता:
देखिए, इसका मैं यह उत्तर दूंगा कि इन बाढ़ तटबंधों के काम के संबंध में, भारत और नेपाल के बीच बाढ़ और जलप्लावन के कार्यों के संबंध में पहले से ही एक द्विपक्षीय तंत्र मौजूद है, और तटबंध निर्माण और कटाव-निरोधी कार्य पहले ही शुरू हो चुके हैं और भारत-नेपाल सीमा पर कुछ प्रमुख नदियों पर ये कार्य चल रहे हैं। मानसून के इस मौसम में बाढ़ और जलप्लावन से होने वाली क्षति को कम करने के लिए दोनों पक्ष रियल-टाइम बेसिस पर समन्वय कर रहे हैं।

श्री पवन बढ़े, ओएसडी (पीआर): नेपाल के मानचित्र पर नेपाल के संविधान के संशोधन पर, इंडिया वर्सेज डिसइनफार्मेशन से श्री शंकर कुमार ने पूछा है - क्या नेपाल द्वारा नए मानचित्र के समावेश के लिए संसद द्वारा संशोधित विधेयक पारित किए जाने के बाद नेपाल के अधिकारियों ने अपने भारतीय समकक्षों से संपर्क किया था? दैनिक भास्कर से मुकेश कौशिक ने पूछा है - नेपाल के नए आधिकारिक मानचित्र में लिपुलेख क्षेत्र को नेपाल क्षेत्र में दिखाया गया है। कैलाश मानसरोवर यात्रा इसी क्षेत्र से होकर गुजरती है। नेपाल का यह नया मानचित्र और आधिकारिक दावे कैलाश मानसरोवर यात्रा पर क्या असर डालेगा? न्यूज 24 से संजीव त्रिवेदी ने पूछा है - क्या नेपाल द्वारा नए मानचित्र पर कानून पारित करने के बाद भारत सरकार ने नेपाल के साथ कोई संपर्क स्थापित किया है?

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: आपने 13 जून को मीडिया के प्रश्नों पर हमारी प्रतिक्रिया देखी होगी, जिसमें हम विस्तृत जानकारी दी थी। हम पहले ही इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट कर चुके हैं, इसलिए मैं आगे कुछ भी नहीं कहना चाहूंगा।

श्री पवन बढ़े, ओएसडी (पीआर):
डब्ल्यूआईओएन से सिद्धांत सिबल ने नेपाल के साथ व्यापार पर एक सवाल पूछा है - ऐसी खबरें हैं कि पश्चिम बंगाल की राज्य सरकार ने काकरविट्टा के पूर्वी सीमा बिंदु से नेपाली कार्गो ट्रकों की आवाजाही रोक दी है। क्या इस पर कोई टिप्पणी मिल सकती है?

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: सिद्धांत, मैं आपको पुष्टि कर सकता हूं कि काकरविट्टा पानीटंकी सीमा समेत अन्य जगहों पर व्यापार और आपूर्ति बिना किसी बाधा के चल रही है, और दोनों देशों के बीच व्यापक व्यापार संबंध हैं। लॉकडाउन के बावजूद हमारा द्विपक्षीय व्यापार बढ़ रहा है। वास्तव में, मई के महीने में यह 300 मिलियन अमेरिकी डॉलर को पार कर गया और वर्तमान समय में कोविड के कारण चुनौतियां होने के बावजूद, हमने नेपाल को आवश्यक वस्तुओं के व्यापार और आपूर्ति की निरंतर और सुचारू प्रवाह सुविधा प्रदान की है।

श्री पवन बढ़े, ओएसडी (पीआर): एबीपी न्यूज़ से प्रणय उपाध्याय ने पूछा है - हाल ही में कुछ खबरें आई हैं, जो बताती हैं कि नेपाल सेना कालापानी, लिपुलेख और लिम्पिडुरा क्षेत्रों में नई सीमा चौकियों का निर्माण कर रही है, क्या इस संबंध में तनाव से बचने के लिए नेपाल सरकार के साथ कोई सैन्य या राजनयिक स्तर की वार्ता हुई है? द वीक से रेखा दीक्षित ने सवाल पूछा है - क्या भारत भी सम्पूर्ण सीमा पर सशस्त्र कर्मियों को तैनात करेगा?

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता:
प्रणय, मैं इस मुद्दे पर आगे कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा।

श्री पवन बढ़े, ओएसडी (पीआर):
नेपाली संविधान में नागरिकता संबंधी संशोधन पर, सिद्धांत सिबल ने पूछा है - नेपाल के सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के नेता – बिश्नु रिजाल ने भारत के साथ पुरानी "रोटी बेटी का रिश्ता” के बारे में कहा था। यहां तक ​​कि उनका देश भी एक नया कानून बना रहा है, जिसके तहत नेपाली नागरिकों से शादी करने वाली भारतीय महिलाओं को सात साल बाद नागरिकता मिलेगी। कोई प्रतिक्रिया मिलेगी? द हिंदू से कल्लोल ने पूछा है - नेपाल का संशोधित नागरिकता कानून विदेशी महिलाओं को नेपाली नागरिक बनने के लिए सात साल तक इंतजार करवाएगा। यह उन भारतीय महिलाओं को प्रभावित करेगा जिन्होंने नेपाली पुरुषों के साथ विवाह किया है। विदेश मंत्रालय इसका क्या उत्तर देगा?

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता:
देखिए, हमने इस पर रिपोर्ट देखी है। मैं ये कहूंगा कि भारत और नेपाल के लोग, हम गहरी जड़ें और पारिवारिक बंधन साझा करते हैं और ये बंधन हमारे दोनों देशों के बीच घनिष्ठ, सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाते हैं।

श्री पवन बढ़े, ओएसडी (पीआर): यूनीवार्ता के सचिन बुधौलिया ने पूछा है - ऐसी खबरें हैं कि चीन ने कुछ हेक्टेयर भूमि और नेपाल के एक गांव पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। भारत इस रहस्योद्घाटन को कैसे देखता है? न्यूज 24 से संजीव त्रिवेदी और न्यूज नेशन से मधुरेंद्र ने भी इसी तरह की तर्ज पर सवाल पूछा है।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा।

श्री पवन बढ़े, ओएसडी (पीआर): पाकिस्तान पर बढ़ते हैं, डब्ल्यूआईओएन से सिद्धांत सिबल ने पूछा है - पाकिस्तान और एफएटीएफ की ग्रे लिस्टिंग पर कोई प्रतिक्रिया है? ये भी कहा है कि अमेरिकी विदेश विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है, इस्लामाबाद ने जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक, मसूद अज़हर और लश्कर-ए-तैयबा के 2008 के मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड साजिद मीर जैसे आतंकियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए घरेलू प्राधिकरणों का इस्तेमाल करने का कोई प्रयास नहीं किया।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: देखिए, एफएटीएफ पर, पाकिस्तान एफएटीएफ की "ग्रे लिस्ट” में बना हुआ है और इस पर कार्रवाई करना अभी बाकी है। उन्हें अपनी कार्ययोजना के तहत 27 में से 13 बिंदुओं पर प्रगति दिखाना अभी बाकी है। इन सब के बावजूद कार्यवाही पूरी करने की हर समय-सीमा समाप्त हो चुकी है और यह बहुत पहले ही समाप्त हो चुका है। एफएटीएफ द्वारा पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रखना हमारे रुख को स्पष्ट करता है कि पाकिस्तान ने आतंक वित्तपोषण और उस देश में मौजूद सुरक्षित ठिकानों के संबंध में अंतर्राष्ट्रीय चिंताओं को संबोधित करने के लिए कोई ठोस कार्यवाही नहीं की है।

श्री पवन बढ़े, ओएसडी (पीआर): डीडी न्यूज से अभिषेक झा ने पूछा है - अमेरिकी विदेश विभाग की रिपोर्ट में 2008 के मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड मसूद अज़हर और साजिद मीर पर मुकदमा चलाने में पाकिस्तान की शालीनता के बारे में कहा गया है। इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: खैर, यह केवल हमारे रुख को स्पष्ट करता है कि पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादियों और आतंकवादी संस्थाओं के लिए एक सुरक्षित ठिकाना बना हुआ है।

श्री पवन बढ़े, ओएसडी (पीआर): एशियन एज से श्रीधर कुमारस्वामी पूछ रहे हैं - पाकिस्तान ने 4 भारतीय नागरिकों को आतंकवादी करार दिया है, इस पर विदेश मंत्रालय की क्या प्रतिक्रिया है?

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता:
खैर, यह दिलचस्प है कि पाकिस्तान ने इस खबर पर आश्चर्य व्यक्त किया है कि संयुक्त राष्ट्र ने अपनी 1267 प्रतिबंध सूची में पाकिस्तान द्वारा प्रस्तावित भारतीय नागरिकों के नाम डालने की मंजूरी नहीं दी है। इससे केवल यहीं उम्मीद की जा सकती है क्योंकि आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले उन राज्यों पर स्पष्ट रूप से कोई भरोसा नहीं किया जा सकता है, चाहे वह दूसरों पर काल्पनिक दोष लगाना हो या जम्मू-कश्मीर का प्रचार अभियान हो।

श्री पवन बढ़े, ओएसडी (पीआर): न्यूज 24 के संजीव त्रिवेदी ने पूछा है - दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग में कर्मचारियों की संख्या घटाने पर विदेश मंत्री द्वारा रिलीज में कहा गया है कि ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि एक कर्मचारी आतंकवादियों के साथ मिला था। क्या विदेश मंत्रालय इस पर थोड़ा और विस्तार से बता सकता है?

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: मैं आपको हमारी प्रेस विज्ञप्ति का सन्दर्भ दूंगा, जिसमें हमने स्पष्ट रूप से उनके प्रत्यावर्तन के कारण बताए हैं।

श्री पवन बढ़े, ओएसडी (पीआर): डॉयचे वेले उर्दू से जावेद अख्तर ने पूछा है - पाकिस्तान में फंसे और आज लौटने वाले भारतीयों के बारे में कोई अपडेट?

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: हां, मैं इस बात की पुष्टि कर सकता हूं कि भारतीय नागरिकों का प्रत्यावर्तन आज आईसीपी अटारी से शुरू हो गया है और यह कल और परसों भी चलने की अपेक्षा है। वास्तव में, 748 भारतीय नागरिकों ने पाकिस्तान से लौटने के लिए पंजीकरण करवाया है और हम भारतीय उच्चायोग और राज्य सरकारों के साथ समन्वय में उन्हें वापस लाने में मदद कर रहे हैं।

श्री पवन बढ़े, ओएसडी (पीआर): न्यूज नेशन से मधुरेंद्र ने पूछा है - पाकिस्तान ने एक बार फिर ओआईसी में कश्मीर का मुद्दा उठाया है। भारत की प्रतिक्रिया क्या है?

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्‍ता:
देखिए, मधुरेंद्र, मैं आपको बताना चाहूंगा कि हमारे रुख में कोई अस्पष्टता नहीं है और हम स्पष्ट और सुसंगत रहे हैं। भारत के सम्पूर्ण आंतरिक मामलों में ओआईसी की कोई अधिस्थिति नहीं है, जिसमें केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर का मामला शामिल है। उन्हें भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। हम पहले ही कह चुके हैं कि ओआईसी को इस तरह की अनुचित टिप्पणियां देने से बचना चाहिए।

श्री पवन बढ़े, ओएसडी (पीआर): एच -1 बी वीजा मुद्दे पर मेरे पास 2 सवाल हैं। एबीपी न्यूज से प्रणय उपाध्याय ने पूछा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में एच 1 बी, एच 2 बी, बी 1 और बी 2 सहित कई अन्य वीजा श्रेणियों में कटौती की घोषणा की है। भारत इस तरह की कटौती पर अपनी चिंता जताता रहा है। ऐसी स्थिति में भारत की पूर्ण उपेक्षा पर विदेश मंत्रालय की क्या प्रतिक्रिया है? द प्रिंट से नैनीमा बासू ने पूछा है - भारत ने एच -1 बी वीजा मुद्दे पर प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी है? आप कैसे सुनिश्चित हैं कि अमेरिका इसे दिसंबर 2020 के बाद नहीं बढ़ाएगा।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता:
हमने राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा 22 जून को जारी किए गए उद्घोषणा को देखा है, जिसमें गैर-आप्रवासी वीजा धारकों की कुछ श्रेणियों और उनके परिवार के सदस्यों की प्रवेश को 31 दिसंबर 2020 तक अस्थायी रूप से निलंबित करने की सूचना है। इससे भारतीय कुशल पेशेवरों की आवाजाही प्रभावित होने की संभावना है, जो अमेरिका में वैध तरीके से काम करने के लिए इन गैर-आप्रवासी वीजा कार्यक्रमों का लाभ उठाते हैं। हम हितधारकों के परामर्श से, भारतीय नागरिकों और उद्योग पर इस आदेश के प्रभाव का आंकलन कर रहे हैं। लोगों से लोगों के बीच संपर्क और व्यापार और विशेष रूप से प्रौद्योगिकी और नवाचार क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग अमेरिका-भारत साझेदारी का एक महत्वपूर्ण आयाम है। महत्वपूर्ण कौशल लाते उच्च-कुशल भारतीय पेशेवर, तकनीकी रिक्तियों को पाटते हैं और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को प्रतिस्पर्धा में बढ़त देते हैं। वे ऐसे कार्यबल का भी एक महत्वपूर्ण घटक हैं जो स्वास्थ्य, सूचना प्रौद्योगिकी और वित्तीय सेवाओं सहित अन्य प्रमुख क्षेत्रों में कोविड-19 संबंधित सहायता प्रदान करने में सबसे आगे हैं। अमेरिका ने हमेशा प्रतिभाओं का स्वागत किया है और हमें उम्मीद है कि भविष्य में भी हमारे पेशेवरों का यूएसए में स्वागत किया जाता रहेगा।

श्री पवन बढ़े, ओएसडी (पीआर): मेरे पास रक्षामंत्री की मॉस्को यात्रा पर 3 प्रश्न हैं। ईटीवी भारत से - जैसा कि कल हमारे रक्षा मंत्री ने मॉस्को में विजय दिवस परेड में हमारे देश का प्रतिनिधित्व किया था, क्या आप भारत-रूस रक्षा सौदों में क्या प्रगति हुई है, इसका विवरण दे सकते हैं? साथ ही, भारत द्वारा रूस से एस -400 मिसाइल प्रणाली की खरीद पर अमेरिका का नवीनतम रुख क्या है? राष्ट्रीय रक्षा से शैलेश ने पूछा है - रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विजय दिवस समारोह में हिस्सा लेने के लिए हाल में रूस का दौरा किया, क्या रूस के साथ चल रहे भारत-चीन एलएसी गतिरोध से संबंधित कोई चर्चा हुई? यदि हाँ, तो परिणाम क्या निकला? रूस भारत और चीन दोनों का मित्र है, संघर्ष के मामले में, क्या रूस भारत का साथ देगा? क्या भारत को इस पर कोई आश्वासन मिला है? बिजनेस वर्ल्ड के मनीष कुमार झा ने पूछा है - रूस के रक्षा मंत्री की यात्रा और विदेश मंत्री एस जयशंकर जी के संबोधन के दौरान, सरकार से सरकार सौदे के तहत रूस से 12 एसयू-30 एमकेआई और 21 एमआईजी-29 की खरीद के बारे में खबरें आई थीं। क्या विदेश मंत्रालय इसपर स्पष्टीकरण दे सकते है?

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: रक्षा मंत्री जी की मॉस्को यात्रा के दौरान हुई चर्चा के बारे में, मैं आपको 23 जून को उनकी प्रेस वार्ता और विशिष्ट रक्षा उपकरणों की खरीद पर उनके द्वारा की गई टिप्पणियों का सन्दर्भ दूंगा, कृपया ये सवाल रक्षा मंत्रालय से पूछें।

श्री पवन बढ़े, ओएसडी (पीआर): द वायर के देविरुपा मित्रा ने पूछा है - क्या भारत आरआईसी रक्षा प्रमुख की बैठक के संबंध में चीन द्वारा समर्थित रूसी प्रस्ताव का समर्थन करता है?

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: देविरुपा, मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है और मैं टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा। मैं चाहूंगा कि आप 23 जून को आयोजित आरआईसी वीडियो कॉन्फ्रेंस में विदेश मंत्री द्वारा दी गई शुरुआती संबोधन की ओर अपना ध्यान आकर्षित करें।

श्री पवन बढ़े, ओएसडी (पीआर): सीएनएन न्यूज 18 से माहा सिद्दीकी ने पूछा है - क्या यूके से भारत को कोई ऐसी सूचना मिली है कि विजय माल्या को अभी प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता, क्योंकि राजनैतिक शरण के अनुरोध पर विचार चल रहा है?

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता:
माहा, मेरे पास उस पर कोई और अपडेट नहीं है। आपने सुना होगा कि मैंने पिछले सप्ताह ब्रीफिंग में बताया था कि हम उनके शीघ्र प्रत्यर्पण के लिए यूके से संपर्क कर रहे हैं और उनके शरण अनुरोधों पर, हमने अवगत कराया है कि इस तरह के अनुरोध का कोई आधार नहीं है क्योंकि भारत में उनका किसी प्रकार से कोई उत्पीड़न होने का आधार नहीं है।

श्री पवन बढ़े, ओएसडी (पीआर): द हिंदू से कल्लोल ने पूछा है - तालिबान ने कहा है कि अफगान सिख, नेदान सिंह के अपहरण के पीछे उनका हाथ नहीं हैं। अपहरणकर्ता हमारे हाथ लगे तो हम उनको सजा देंगे। क्या भारत इस बयान का जवाब देगा?

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता:
कल्लोल, मैंने 22 जून को मीडिया के प्रश्नों का उत्तर दिया था आपने वो देखा होगा, जिसमें हमने श्री नेदन सिंह के अपहरण की कड़ी निंदा की है, और हम इसे आतंकवादियों द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाने और उनके उत्पीड़ित करने के रूप में देखते हैं और ये सब उनके बाहरी समर्थकों के इशारे पर होता है। हमने अफगानिस्तान से उसकी सुरक्षित और शीघ्र रिहाई सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।

श्री पवन बढ़े, ओएसडी (पीआर): एशिया नेट से प्रशांत ने पूछा है - क्या विदेश मंत्रालय ने केरल को वंदे भारत की उड़ानों से आने वाले सभी यात्रियों के कोविड परीक्षण से संबंधित व्यावहारिक मुद्दों के बारे में सूचित किया है?

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: प्रशांत, केरल सरकार ने एक सुझाव दिया था कि वंदे भारत की उड़ानों से लौटने वाले यात्रियों का कोविड परीक्षण किया जाए, और खाड़ी देशों में हमारे मिशनों के साथ परामर्श के बाद, हमने उन्हें जवाब दिया, केरल सरकार को जवाब दिया और बताया कि इस संबंध में व्यावहारिक कठिनाइयाँ हैं। वर्तमान में, केवल संयुक्त अरब अमीरात के पास पूर्ण परीक्षण की व्यवस्था है, कतर सीमित परीक्षण प्रदान करता है, और क्षेत्र के अन्य देशों में, पूर्व परीक्षण संभव नहीं है, क्योंकि लागत, समय और परीक्षण की उपलब्धता के संबंध में कुछ मुद्दे हैं। इस बारे में केरल सरकार को अवगत कराया गया है।

श्री पवन बढ़े, ओएसडी (पीआर): चीन पर आते हैं, हमें कई सवाल मिले हैं। मैं कुछ सवाल पढ़ूंगा। डिस-इंगेजमेंट और डी-एस्केलेशन और डब्ल्यूएमसीसी पर, टाइम्स नाउ से श्रींजॉय ने पूछा है - 22 जून और 24 जून की बैठकों के बाद, भारत और चीन दोनों ने घोषणा की कि वे डिसइंगेज और डी-एस्केलेट के लिए सहमत हैं। क्या चीन द्वारा सैनिकों को वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू हो गई है? एबीपी न्यूज के प्रणय उपाध्याय ने पूछा है - क्या आप चीन के साथ हुई हालिया संवादों में सीमा तनाव को लेकर डिस-इंगेजमेंट और डी-एस्केलेशन पर हुई सहमति पर जानकारी साझा कर सकते हैं? मिंट से एलिजाबेथ रोशे ने पूछा है - डब्ल्यूएमसीसी में वरिष्ठ सैन्य कमांडरों के बीच हुई वार्ता के बाद आप भारत-चीन संबंधों को कैसे परिभाषित करेंगे? क्या तनाव कुछ कम हुए हैं? क्या दोनों पक्षों के बीच बेहतर समझ बनी है? क्या इस बारे में कोई अनुमान है कि चीन किस चीज से प्रेरित होकर ऐसा कदम उठाया? उन्होंने आगे पूछा है - इस सप्ताह जो कुछ हुआ, क्या उसके बाद सैन्य या डब्ल्यूएमसीसी स्तर पर कोई और वार्ता की योजना बनाई गई? क्या मई में तनाव शुरू होने के बाद से अब तक दोनों पक्षों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच कोई संपर्क हुआ है? क्या विदेश सचिव और उनके समकक्ष के बीच या चीनी सरकार में किसी और से कोई संपर्क हुआ है, क्या 17 जून के बाद से दोनों विदेश मंत्रियों के बीच कोई संपर्क हुआ है? न्यूज़ 18 इंडिया से नीरज कुमार ने पूछा है - डब्ल्यूएमसीसी की बैठक के बाद, चीन के आधिकारिक बयान में 6 और 22 जून के समझौतों के कार्यान्वयन के बारे में कहा गया है, जबकि भारत के बयान में, केवल 6 जून के समझौते को कार्यान्वयन के बारे में कहा गया है, इसका क्या मतलब है? क्या 6 जून और 22 जून के समझौतों के कार्यान्वयन पर दोनों देशों के बीच कोई मतभेद हैं?

इसी तरह के सवाल अमर उजाला से शशिधर पाठक, दब्लुईआईओएन से सिद्धांत सिबल, एबीपी से अग्नि रॉय, इंडियन एक्सप्रेस से शुभजीत रॉय, डीडी न्यूज से अभिषेक झा ने भी पूछे हैं। नवीनतम उपग्रह चित्रों और बढ़ी हुई तैनाती पर - न्यूज 24 से संजीव त्रिवेदी ने पूछा है - पर्यवेक्षकों का कहना है कि चीन टालने के लिए वार्ता का उपयोग एक सामरिक चाल की तरह कर रहा है। एलएसी पर बढ़ी हुई चीनी तैनाती के उपग्रह चित्र संचारित हुए हैं। विदेश मंत्रालय का क्या कहना है? न्यूज़ 18 इंडिया से नीरज कुमार ने पूछा है - क्या चीन ने उत्तरी लद्दाख के कुछ हिस्सों में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाई है?

टाइम्स नाउ से अथर खान ने पूछा है - उपग्रह चित्रों से पता चला है कि चीनी संरचनाएं गल्वान में वापस आ गई हैं। क्या इसका मतलब यह है कि सैन्य और राजनयिक स्तर पर उनके साथ कई जुड़ावों के बावजूद, चीन ने अपने डी-एस्केलेशन और सत्यापनीय डिसइंगेजमेंट की प्रतिज्ञा का सम्मान नहीं किया है। इस पर विदेश मंत्रालय का रुख क्या है? साथ ही, डीबीओ और देपसांग के सामने 30% तक सेना बढ़ाने की खबरें भी आईं हैं, इस पर क्या टिप्पणी करेंगे। सीएनबीसी से परीक्षित लूथरा ने पूछा है – खबरें आईं हैं कि चीन ने गल्वान में दुबारा संरचना बनवाया है जिसे 15 जून को भारतीय सैनिकों द्वारा नष्ट कर दिया गया था। इसके साथ ही चीनियों ने गल्वान और एलएसी के अन्य क्षेत्रों में सेना की तैनाती, निर्माण गतिविधि बढ़ा दी है। देपसांग से भी इसकी खबरें आईं हैं। क्या यह दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते का विरोध नहीं है? एबीपी न्यूज से प्रणय उपाध्याय ने पूछा है - क्या आप स्पष्ट कर सकते हैं कि क्या चीनी पीएलए सैनिकों ने गल्वान घाटी के पीपी 14 में दुबारा टेंट लगाया है या नहीं। क्या यह टेंट एलएसी के भारतीय हिस्से में है या उनकी तरफ है? आज तक, चीनी और भारतीय सैनिकों ने कितनी जगहों पर ऐसी परिस्थिति का सामना किया है? न्यूज़ नेशन से मधुरेंद्र, एसोसिएट प्रेस से अशोक शर्मा, एशियन एज से श्रीधर कुमारस्वामी, यूएनआई से अनीश कुमार, टाइम्स नाउ से श्रिनीजॉय, एनडीटीवी से कादंबिनी शर्मा, आईएनएस से आरती टिकू सिंह, हिंदुस्तान से पंकज पांडे, इंडियन एक्सप्रेस से सुभोजीत, सीएनएन न्यूज़ 18 से माहा, इंडिया वर्सेज डिसइनफार्मेशन से शंकर, द वायर से देविरूपा मित्रा, यूनीवार्ता से सचिन बुधौलिया ने भी इसी तरह से सवाल पूछे हैं। कल जारी किए गए चीनी एमएफए और एमओडी के बयान पर, द ट्रिब्यून से संदीप दीक्षित ने पूछा है – पूरी गल्वान घाटी पर चीन का कब्ज़ा होने के संबंध में एमएफए और एमओडी चीन द्वारा देरी से जारी किए गए बयानों पर विदेश मंत्रालय की क्या राय है? एनडीटीवी से कादंबिनी शर्मा ने पूछा है - चीनी एमएफए का एक बयान आया था कि विदेश मंत्रालय फर्जी खबर दे रहा है। यह सम्पूर्ण सीमा तंत्र की वार्ता, खैर इस पर क्या प्रतिक्रिया है? भविष्य की वार्ता और अनौपचारिक शिखर वार्ता पर, न्यूज़ नेशन से मधुरेंद्र ने पूछा है - इस वर्ष मोदी और जिनपिंग के बीच अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के बारे में कोई ऐसी जानकारी जो एमईए साझा करना चाहता है?द प्रिंट से नैनीमा ने पूछा है - क्या भारत और चीन के बीच एसआर स्तर के संवाद पर भी विचार किया जा रहा है? पीटीआई भाषा से दीपक रंजन ने पूछा है - चीन लद्दाख के हालिया घटनाक्रमों के मध्य लगातार साजिश रच रहा है। नए मोर्चों खोलने की खबरें आ रही हैं। सरकार और मंत्रालय कूटनीतिक स्तर पर क्या कर रहे हैं? अमेरिका भारत का सामरिक भागीदार है, क्या हमें अमेरिका से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है?रक्षक न्यूज़ से रंजीत कुमार ने पूछा है - चीन के साथ चल रहे सैन्य तनाव के मद्देनजर, क्या भारत राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70 वीं वर्षगांठ का उत्सव कार्यक्रम मनाएगा?

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: मैं देख रहा हूँ कि आप सभी ने मुझसे ढेर सारे सवाल किए हैं। मैं विस्तार में इनका जवाब दूंगा।

हाल के दिनों में, हमने भारत चीन सीमा क्षेत्रों के पश्चिमी क्षेत्र में सामने आए घटनाक्रम पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। विशेष रूप से, 20 जून के हमारे वक्तव्य में प्रासंगिक तथ्य प्रदान किए गए थे और स्पष्ट रूप से बताया गया था कि चीनी कार्यवाहियों के कारण ही क्षेत्र में तनाव बढ़ा है और 15 जून के हिंसक झड़प के बारे में भी बताया गया है जिसमें सैनिक हताहत हुए थे।

मई की शुरुआत में, चीनी पक्ष ने गल्वान घाटी क्षेत्र में भारत के सामान्य, पारंपरिक गश्त स्वरूप में बाधा डालने के लिए कार्यवाही की थी। परिणामी झड़प को जमीनी कमांडरों द्वारा द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकॉल के प्रावधानों के अनुसार संबोधित किया गया था। मई के मध्य में, चीनी पक्ष ने पश्चिमी क्षेत्र के अन्य क्षेत्रों में यथास्थिति को बदलना चाहा। हमने दोनों राजनयिक और सैन्य चैनलों के माध्यम से चीनी कार्यवाही पर अपना विरोध दर्ज किया और यह स्पष्ट किया कि इस तरह का कोई भी बदलाव हमारे लिए अस्वीकार्य था। इसके बाद, वरिष्ठ कमांडरों ने 6 जून 2020 को मुलाकात की और एलएसी पर डी-एस्केलेशन और डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया आरम्भ करने पर सहमति व्यक्त की जिसमें पारस्परिक कार्यवाही करना शामिल थी। दोनों पक्ष एलएसी का सम्मान और अनुसरण करने और यथास्थिति को बदलने के लिए कोई गतिविधि न करने को सहमत हुए।

जैसा कि मैंने 20 जून को अपने बयान में उल्लेख किया है, चीनी पक्ष ने गल्वान घटी क्षेत्र में एलएसी के संबंध में इस समझौते का निरादर किया और एलएसी के पार संरचनाओं को खड़ा करना चाहा। जब इस प्रयास को नाकाम कर दिया गया, तब चीनी सैनिकों ने 15 जून 2020 को हिंसक कार्यवाही की जिसकी वजह से सीधे तौर पर कई सैनिक हताहत हुए। इसके बाद, दोनों पक्ष इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में तैनात हैं, जबकि सैन्य और राजनयिक संपर्क जारी है।

एलएसी पर हुईं घटनाओं और झड़प को हाल की घटनाक्रमों की बड़ी तस्वीर के साथ जोड़कर समझने की जरूरत है। इससे उन महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाने में भी मदद मिलेगी, जिन्हें दोनों पक्ष संबोधित करना चाहते हैं। इस मामले का मूल ये है कि मई की शुरुआत से, चीनी पक्ष एलएसी पर बड़ी मात्रा में युद्ध-सामग्री और सेनाओं की एक बड़ी टुकड़ी को इकट्ठा कर रहा है। यह हमारे विभिन्न द्विपक्षीय समझौतों, विशेष रूप से 1993 के भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति और अमन के रखरखाव पर बड़े समझौते के प्रावधानों के अनुसार नहीं है। इसमें उल्लिखित है कि ‘हर पक्ष वास्तविक नियंत्रण रेखा के दोनों तरफ अपनी-अपनी सैन्य बलों को न्यूनतम स्तर पर रखेंगे जो दोनों देशों के मध्य दोस्ताना और अच्छे संबंधों के अनुकूल हो’। जाहिर है, भारतीय पक्ष को जवाबी तैनाती करनी पड़ी और इसके बाद तनाव सामने आया।

वास्तविक नियंत्रण रेखा का सम्मान करना और कड़ाई से इसका अनुसरण करना, सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और अमन का आधार है और 1993 और उसके बाद के समझौतों में स्पष्ट रूप से मान्यता दी गई है। भारतीय सैनिक भारत-चीन सीमा क्षेत्रों के सभी क्षेत्रों में एलएसी के संरेखण से पूरी तरह परिचित हैं और इसका पूर्ण अनुसरण करते हैं। वे लंबे समय से गल्वान घाटी सहित पूरे एलएसी में गश्त लगा रहे हैं। भारतीय पक्ष द्वारा बनाई गई सभी अवसंरचनाएं हमेशा एलएसी के अपने पक्ष में ही रही हैं। भारतीय पक्ष ने कभी भी एलएसी पार कोई कार्रवाई नहीं की और कभी भी यथास्थिति को बदलने का प्रयास नहीं किया। हालाँकि, चीनी पक्ष ने ऐसा नहीं किया और इसके कारण समय-समय पर झड़प होती रही है।

कई वर्षों में, दोनों पक्षों ने गश्त करने का एक पैटर्न विकसित किया है और यह अपेक्षा करना उचित है कि गश्त लगाने वालों को अपने वैध कर्तव्यों का निर्वहन करने से रोका नहीं जाना चाहिए। दुर्भाग्य से, हमने पिछले कई वर्षों में गश्त में अनेक बाधाओं का अनुभव किया है जो अक्सर एकतरफा यथास्थिति बदलने के प्रयासों के कारण सामने आता रहा है। ऐसी स्थितियों के लिए, जब दोनों पक्ष एक-दूसरे से मुठभेड़ करते हैं, प्रक्रियाओं और मानदंडों के एक सेट पर पारस्परिक रूप से सहमति बनी है। ये कई समझौतों और समझौता ज्ञापनों में परिलक्षित हैं। जबकि चीन पहले से इन समझौतों का निरादर कर चुका है, लेकिन इस साल चीनी सेनाओं का आचरण सभी पारस्परिक नियमों की पूर्ण अवहेलना है।

सैनिकों के बड़ी टुकड़ी की तैनाती और व्यवहार में बदलाव, अनुचित और असमर्थनीय दावों से बढ़े हैं। गल्वान घाटी पर हाल में चीनी रुख का बदलना इसका एक उदाहरण है।

सीमा क्षेत्रों में शांति और अमन बरक़रार रखना, हमारे द्विपक्षीय संबंधों का आधार है। यह जरूरी है कि मौजूदा स्थितियों का समाधान करने के लिए दोनों पक्षों द्वारा स्थापित तंत्र का उपयोग किया जाए। कल भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्य तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) की बैठक थी, इसलिए, यह एक बड़ा विकास था। इससे पहले 22 जून को वरिष्ठ सैन्य कमांडरों के बीच चर्चा हुई थी, जो 6 जून 2020 को उनके बीच हुए समझौते के कार्यान्वयन पर केंद्रित था।

आप इस बात से भी अवगत हैं कि दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने 17 जून 2020 को बातचीत की थी और इस बात पर सहमति जताई थी कि समग्र स्थिति को एक जिम्मेदार तरीके से संभाला जाएगा, और यह कि 6 जून के डिसइंगेजमेंट समझौते का कार्यान्वयन किया जाएगा।

हम उम्मीद करते हैं कि चीनी पक्ष इस समझौते का ईमानदारी से अनुसरण करेगा और सीमावर्ती क्षेत्रों में तेजी से शांति और अमन की बहाली सुनिश्चित करेगा। मौजूदा स्थिति का बना रहना, संबंधों के विकास के माहौल को सिर्फ बिगाड़ेगा।

क्या कोई और सवाल है पवन?

श्री पवन बढ़े, ओएसडी (पीआर): नहीं सर, मेरे पास कोई और सवाल नहीं है।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: तो, धन्यवाद, ब्रीफिंग यही समाप्त होती है। अगले हफ्ते दुबारा मुलाकात होगी।

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