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सचिव (पश्चिम) द्वारा भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन पर आभासी विशेष मीडिया वार्ता की प्रतिलिपि (15 जुलाई, 2020)

जुलाई 17, 2020

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: मित्रों, नमस्कार और गुड इवनिंग। भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन पर आभासी प्रारूप में इस विशेष वार्ता में आपका स्वागत है।

मेरे साथ मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) श्री विकास स्वरूप हैं। उनके साथ हैं, श्री संदीप आर्य, संयुक्त सचिव (यूरोप पश्चिम) और श्री संदीप चक्रवर्ती, जो संयुक्त सचिव पद पर हैं। मैं अब सचिव (पश्चिम) को उनकी प्रारंभिक टिप्पणी करने के लिए आमंत्रित करता हूँ, जिसके बाद वह आपके सवालों का जवाब देंगे । श्रीमान आप आएँ।

श्री विकास स्वरूप, सचिव (पश्चिम): धन्यवाद अनुराग।दोस्तों, 15 वाँ भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन अभी संपन्न हुआ है।यह आभासी रूप में आयोजित किया गया था और इसमें भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष, श्री चार्ल्स मिशेल और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष, सुश्री उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भाग लिया था। हमारे विदेश मंत्री, डॉ एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, श्री अजीत डोभाल और यूरोपीय संघ के विदेश और सुरक्षा नीति के उच्च प्रतिनिधि, श्री जोसेफ बोरेल भी शिखर सम्मेलन में शामिल हुए। यूरोपीय संघ के साथ हमारा संबंध बहुत सक्रिय है। यह लगभग सभी आयामों को कवर करता है - राजनीतिक, आर्थिक, सुरक्षा, व्यापार और निवेश, पर्यावरण, अनुसंधान और नवाचार, शिक्षा और संस्कृति जो लोगों के लोगों से मजबूत संबंधों को रेखांकित करता है। यूरोपीय संघ हमारा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है इसके साथ 100 बिलियन डॉलर से अधिक के माल का व्यापार होता है। हमारा 40 बिलियन डॉलर का एक बड़ा सेवा व्यापार भी है। यूरोपीय संघ भारत में 91 बिलियन डॉलर से अधिक के संचयी निवेश के साथ सबसे बड़े निवेशकों में से एक है। यूरोपीय संघ प्रौद्योगिकी, नवाचार और सर्वोत्तम प्रथाओं का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी है।

शिखर सम्मेलन का आयोजन नेताओं के बीच परस्पर सम्मान और प्रशंसा के साथ बहुत ही सौहार्दपूर्ण वातावरण में किया गया था, जो उनके बीच पिछले संबंधों की पहचान रही है। चर्चा में, महामारी पर संयुक्त प्रतिक्रिया, भारत-यूरोपीय संघ सामरिक भागीदारीऔर इसके विभिन्न आयामों को मजबूत करने, साथ ही साथ वैश्विक क्षेत्र में बहुपक्षवाद, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और समकालीन विकास के विषयों पर हमारे अभिसरण और सहयोग पर बातचीत हुई ।

महामारी के संदर्भ में, दोनों पक्षों ने वैश्विक स्तर पर संयुक्त, सहयोगी प्रतिक्रियाओं के महत्त्व को स्वीकार किया। पीएम ने कोविड -19 उपकरण - टीके, उपचार और निदान तक पहुँच में तेजी लाने के लिए यूरोपीय संघ की वैश्विक कोरोनावायरस पहल की सराहना की।एक दूसरे की ताकत और आपसी तालमेल जैसे कि फार्मास्यूटिकल्स और अनुसंधान में हमारी भूमिका को मान्यता देते हुए, यूरोपीय संघ और भारत ने कोरोनावायरस की प्रतिक्रिया में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की, जिसमें कोविड -19 उपकरणों की उपलब्धता, पहुँच और सामर्थ्य शामिल है। राष्ट्रपति मिशेल और राष्ट्रपति वॉन डेर लेयन दोनों ने भारत द्वारा यूरोपीय संघ के देशों को समय पर दवाओं की आपूर्ति के मामले में प्रदान की गई सहायता की बहुत सराहना की। उन्होंने सभी के लिए सार्वभौमिक और सस्ती वैक्सीन की पहल में भारत की सक्रिय भागीदारी की माँग की।

दोनों पक्षों के नेताओं ने भारत-यूरोपीय संघ की रणनीतिक साझेदारी को नए स्तरों तक विकसित करने के लिए अपनी गहरी रुचि और पूर्ण प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने सामरिक साझेदारी को अपनाया: विविध क्षेत्रों में संबंधों को उन्नत करने के लिए नए ढांचे के रूप में 2025 का रोडमैप - विदेश नीति, सुरक्षा, व्यापार और निवेश, आर्थिक सहयोग, नवीन और जलवायु-अनुकूल समाधानों पर सहयोग, डिजिटल प्रौद्योगिकियों और व्यापक व्यापार और निवेश समझौते की कनेक्टिविटी।

नेताओं ने माना कि कोविड के बाद के आर्थिक सुधार की प्राथमिकताएँ भारत और यूरोप के बीच आपूर्ति श्रृंखला लिंकेज पर चर्चा सहित उनके आर्थिक संबंधों के लिए पूरी संभावना को उजागर करने के अवसर प्रदान करते हैं। प्रधान मंत्री ने भारत में व्यापार करना आसान बनाने,विनियामक वातावरण सृजित करने और वैश्विक मूल्य आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ भारत को एकीकृत करने के अपने लक्ष्यों में सुधार करने के अपने प्रयासों के मद्देनजर यूरोपीय कंपनियों को भारत में एफडीआई के लिए आमंत्रित किया।

चल रहे सहयोग और आधुनिकीकरण और सतत विकास प्राथमिकताओं के लिए इसे और बढाते हुए निवेश, वित्तपोषण, प्रौद्योगिकी, सर्वोत्तम प्रथाओं और क्षमताओं को कवर करने पर भी चर्चा की गई।भारत ने शहरी परिवहन परियोजना जैसे कि पुणे और भोपाल में मेट्रो परियोजनाओं, कई सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं को कवर करने वाली नवीकरणीय ऊर्जा, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं और अपशिष्ट पुनर्चक्रण में यूरोपीय भागीदारी का स्वागत किया। यूरोपीय संघ ने जलवायु के अनुकूल भावी "यूरोपीय ग्रीन डील" के लिए अपनी गहरी प्रतिबद्धता और इस तरह के समाधानों पर अधिक गहन सहयोग करने में अपनी रुचि व्यक्त की। यूरोपीय संघ ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा रोधी संरचना के गठबंधन की भारत की पहल की सराहना की और दोनों पक्ष इन पहलों पर अपने सहयोग को सुदृढ़ करने पर सहमत हुए।नेताओं ने संसाधन दक्षता और वृत्तीय अर्थव्यवस्था पर एक संयुक्त घोषणा को अपनाया।

डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास पर चर्चा की गई और कृत्रिम बुद्धिमत्ता और 5जी जैसी प्रौद्योगिकी पर द्विपक्षीय वार्ता को उन्नत करने पर नेताओं द्वारा सहमति व्यक्त की गई। उन्होंने चल रहे अनुसंधान और नवाचार सहयोग की सराहना की,जिसमें स्वास्थ्य सेवा, जल, ऊर्जा, परिवहन, खाद्य और सूचना और संचार प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में परियोजनाएँ शामिल हैं। नेताओं ने वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग पर भारत-यूरोपीय संघ समझौते को नवीनीकृत करने का निर्णय लिया जो अनुसंधान सहयोग को आगे और सक्षम करेगा। नेताओं ने परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास में सहयोग के लिए यूरैटम (यूरोपीय परमाणु ऊर्जा समुदाय) और भारत के बीच समझौते कोअंतिम रूप देने का भी स्वागत किया।नेताओं ने भावी व्यापक कनेक्टिविटी साझेदारी की खोज के लिए दोनों पक्षों के लिए सहमति व्यक्त की। अध्यक्ष वॉन डेर लेयेन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर एक भारत - यूरोपीय संघ संयुक्त कार्यदल का प्रस्ताव रखा जिसका प्रधानमंत्री मोदी ने स्वागत किया।

नेताओं ने राजनीतिक परामर्श, नौसेना सहयोग जैसे विदेश नीति और सुरक्षा के क्षेत्र में चल रहे आदान-प्रदान और सहयोग का उल्लेख किया और समुद्री सुरक्षा पर एक नए संवाद के माध्यम से समुद्री सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने हिंद महासागर की स्थिरता और सुरक्षा को संरक्षित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया। आतंकवाद का मुकाबला करने, आतंकवादी वित्तपोषण, कट्टरपंथीकरण का विरोध करने और इन उद्देश्यों के लिए इंटरनेट के दुरुपयोग पर भी चर्चा की गई।दोनों पक्ष इस क्षेत्र में अपने आदान-प्रदान और सहयोग को तेज करेंगे।

नेताओं ने समकालीन वैश्विक पर्यावरण पर, और बहुपक्षवाद और संवाद एवं सहयोग तथा एक नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति सम्मान के आधार पर संयुक्त, समन्वित प्रतिक्रियाओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर चर्चा की। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और जी20 प्रेसीडेंसी की भारत की आगामी सदस्यता के संदर्भ में, दोनों पक्षों के बीच अधिक सक्रिय सहभागिता और सहयोग के प्रति पारस्परिक रुचि थी।

कुल मिलाकर, 15 वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन ने यूरोपीय संघ के साथ हमारी साझेदारी को मजबूत करने में मदद की है और सभी क्षेत्रों में संबंधों को उन्नत करने के लिए एक नया रोडमैप प्रदान किया है। विविधता के दो बड़े संघों के रूप में, लोकतंत्र, बहुलवाद और कानून के शासन के मूल्यों को साझा करना और एक नियम आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था और प्रभावी बहुपक्षवाद के लिए प्रतिबद्धता, भारत और यूरोपीय संघ के बीच साझेदारी हमारे जटिल विश्व में अच्छाई का एक उत्तम बल है।

आभासी शिखर सम्मलेन के दौरान पाँच दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया गया। अब मैं उनमें से प्रत्येक का संक्षिप्त विवरण दूँगा।

i) संयुक्त राजनीतिक वक्तव्य में, द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न आयामों, सामान्य हित के वैश्विक मुद्दों और संयुक्त कोरोनावायरस प्रतिक्रिया पर दोनों पक्षों के बीच विचार-विमर्श और अभिसरण का सारांश है।

ii) भारत-यूरोपीय संघ सामरिक भागीदारी: 2025 तक का रोडमैप, विदेशी और सुरक्षा नीति, व्यापार और निवेश, आधुनिकीकरण, सतत विकास, अनुसंधान और नवाचार, शिक्षा और विद्वानों के आदान-प्रदान, प्रवास और गतिशीलता, और वैश्विक शासन सहित विस्तृत क्षेत्रों को शामिल करते हुए हमारे संवाद और सहयोग के ढांचे को सारांशित करता है

iii) परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग में अनुसंधान और विकास सहयोग पर भारत-यूरोपीय परमाणु ऊर्जा समुदाय समझौता परमाणु ऊर्जा विभाग और यूरेटमके बीच परमाणु ऊर्जा के नागरिक अनुप्रयोगों (कृषि, स्वास्थ्य देखभाल,उद्योग) रेडियोधर्मी अपशिष्ट प्रबंधन, संलयन, परमाणु सुरक्षा और बचाव जैसे मुद्दों पर सहयोग को सक्षम बनाएगा।

iv) विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग समझौते का 5 और वर्षों के लिए नवीकरण जैव-प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा, ई-गतिशीलता, ऊर्जा दक्षता, समुद्री विज्ञान आदि जैसे क्षेत्रों में वैज्ञानिक परियोजनाओं और अनुसंधान आदान-प्रदान को जारी रखने में सक्षमता प्रदान करेगा।

v) संसाधन क्षमता और वृत्तीय अर्थव्यवस्था पर संयुक्त घोषणा, नीति और विनियमों, सर्वोत्तम प्रथाओं और क्षमताओं के आदान-प्रदान में संवाद और सहयोग तथा गतिशीलता, आईसीटी, गतिशीलता, निर्माण, खाद्य और वस्त्र टेक्सटाइल सेक्टर जैसे क्षेत्रों में ऊर्जा दक्षता, अपशिष्ट प्रबंधन, रीसाइक्लिंग, वृत्तीय व्यापार मॉडल जैसे क्षेत्रों में तकनीकी आदान-प्रदान को सक्षम बनाएगा ।

भारत - यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन पर मेरा प्रारंभिक वक्तव्य यहाँ समाप्त होता है । अब आप प्रश्न पूछ सकते हैं।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: धन्यवाद महोदय। मैं अब सवालों पर आगे बढ़ता हूँ । मुझे व्यापार पर प्रश्नों का एक सेट मिला है ।ये सवाल काफी हद तक जानना चाहते हैं कि क्या एफटीए पर कोई प्रगति हुई है, क्या भारत यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते के पक्ष में है, क्या यूरोपीय संघ ने एफटीए पर बातचीत करने से पहले एक अलग निवेश संरक्षण समझौते का प्रस्ताव किया है?इसी तरह के सवाल मलयाला मनोरमा के जोमी थॉमस, इंडिया वर्सेस डिसइनफॉर्मेशन के शंकर कुमार, न्यूज 18 से माहा, टाइम्स नाउ के अतहर, आजतक के कमलजीत और पीटीआई से मानस द्वारा पूछे गए हैं। क्या आप इसका जवाब देना चाहेंगे?

श्री विकास स्वरूप, सचिव (पश्चिम): हाँ, मुझे लगता है कि उन सभी प्रश्नों को एक साथ जोड़ा जा सकता है और मैं उन विभिन्न प्रश्नों का एक संयुक्त उत्तर दे सकता हूँ जो व्यापक-आधार पर व्यापार और निवेश समझौते पर पूछे गए हैं। अब जैसा कि आप जानते हैं, भारत और यूरोपीय संघ ने काफी समय से इस व्यापक व्यापार और निवेश समझौते पर बातचीत की है, लेकिन 2013 के बाद सेउन पर बातचीत नहीं हुई है। इसलिए, पिछले साल दिसंबर में नए यूरोपीय आयोग द्वारा कार्यभार संभालने के बाद, हमारे वाणिज्य और उद्योग मंत्री, और यूरोपीय संघ के व्यापार आयुक्त आपस में मिले हैं, और उन्होंने इस मामले में एकजुट होने की इच्छा दिखाई ।नेताओं ने आज हमारे शिखर सम्मेलन में दोनों पक्षों पर कोविड पश्चात आर्थिक सुधार प्राथमिकताओं, आपूर्ति श्रृंखला लिंकेज के विविधीकरण में रुचि, भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार और निवेश संबंधों की पूर्ण क्षमता को पहचाननेपर जोर देनेऔर दोनों पक्षों में व्यापार से संबंधित मुद्दों को संबोधित करने के संदर्भ में चर्चा की । हमारे प्रधान मंत्री ने विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को आकर्षित करने और भारत सरकार के विनियामक वातावरण को उदार बनाने के लिए निरंतर प्रयास, साथ ही साथ व्यापार करने में आसानी में सुधार करने की हमारी प्राथमिकता पर जोर दिया।उन्होंने भारत में अवसरों का उपयोग करने के लिए यूरोपीय व्यवसायों को आमंत्रित किया और संदेश दिया कि अत्निम्भर भारत का उद्देश्य, भारत में घरेलू उत्पादन को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से एकीकृत करना है।इसलिए, आज 15 वें शिखर सम्मेलन की चर्चा के दौरान, सबसे महत्वपूर्ण परिणामों में से एक व्यापार और निवेश संबंधों पर इस उच्च-स्तरीय संवाद की स्थापना थी, जिसमें सभी व्यापार और बाजार के मुद्दों पर चर्चा होगी, साथ ही आपूर्ति श्रृंखला लिंकेज भी होंगे। दोनों पक्षों ने अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है और एक संतुलित, महत्वाकांक्षी और पारस्परिक रूप से लाभप्रद व्यापार और निवेश समझौतों के लिए काम करने के लिए सहमत हुए हैं। आगामी महीनों में होने वाले उच्च-स्तरीय संवाद से इन दोनों समझौतों को आगे ले जाने के लिए उच्च-स्तरीय मार्गदर्शन और निर्देश दिए जाने की उम्मीद है।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: अगला सवाल यह है कि क्या भारत-चीन एलएसी स्थिति पर चर्चा हुई?और वास्तव में, इन विषयों पर दूसरों से भी कुछ प्रश्न हैं। विओनसे सिद्धांत, टाइम्स नाउ से अथर्व, पीटीआई भाषा से दीपक रंजन, आजतक से कमलजीत, पीटीआई से मानस, एशियन एज से श्रीधर और हिंदुस्तान से पंकज पांडे द्वारा सवाल पूछे गए हैं।

श्री विकास स्वरूप, सचिव (पश्चिम): ठीक है, मैं कहूँगा कि वैश्विक और क्षेत्रीय विकास की समीक्षा के एक रूप में, चीन के साथ हमारे संबंध सामने आए।प्रधान मंत्री ने भारत-चीन संबंध पर सामान्य रूप से और सीमावर्ती क्षेत्रों की वर्तमान स्थिति पर हमारे विचार साझा किए ।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: तो, अगला सवाल सिद्धांत का है। वह जानना चाहता है कि इस शिखर सम्मेलन में सीमा पार से आतंकवाद मुद्दे पर कितनी चर्चा हुई?

श्री विकास स्वरूप, सचिव (पश्चिम): जैसा कि आप संयुक्त वक्तव्य से देखेंगे कि दोनों नेताओं ने आतंकवाद की साझा चुनौती पर विचारों के आदान-प्रदान में काफी विस्तार से चर्चा की, जो सभी देशों के सामने एक समस्या है।इस संदर्भ में, पाकिस्तान का जिक्र, भारत और क्षेत्र के अन्य देशों के विरुद्ध उसके द्वारा जारी गतिविधियों और साथ-साथ वैश्विक आतंकवाद,दोनों सन्दर्भों मेंआया।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: रक्षक न्यूज के रंजीत कुमार जानना चाहते हैं - "दक्षिण चीन सागर, हिंद महासागर जैसे क्षेत्रों में समुद्री सुरक्षा के मुद्दे, क्या शिखर सम्मेलन के दौरान उन पर चर्चा की गई?"

श्री विकास स्वरूप, सचिव (पश्चिम): मैं उनसे संयुक्त वक्तव्य और संयुक्त वक्तव्य के पैरा 10 का उल्लेख करूँगा, जो स्पष्ट रूप से कहता है कि नेता समुद्री सुरक्षा पर संवाद शुरू करने और सुरक्षा और रक्षा पर परामर्श करने और नौसेना के सहयोग में वृद्धि करने पर सहमत हुए ।वे हिंद महासागर में सुरक्षा और स्थिरता को बनाए रखने की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। यूरोपीय संघ के पक्ष ने भारतीय नौसेना द्वारा विश्व खाद्य कार्यक्रम को प्रदान किए गए नौसैनिक एस्कॉर्ट की बहुत सराहना की और यूरोपीय संघ-एटलांटा और भारतीय नौसेना के बीच अधिक से अधिक सहयोग की माँग की।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: शिखर सम्मेलन में यूरोपीय संघ द्वारा उठाए गए जम्मू-कश्मीर और सीएए के संदर्भ में मानवाधिकार मुद्दा था? यह एशियन एज से श्रीधर का सवाल है और सीएनएन न्यूज 18 के माहा से भी ऐसा ही सवाल है।

श्री विकास स्वरूप, सचिव (पश्चिम): हाँ, यूरोपीय संघ की इन मुद्दों के बारे में बेहतर समझ होने के संदर्भ में राष्ट्रपति चार्ल्स मिशेल द्वारा एक उचटता सा सन्दर्भ था।इस वर्ष फरवरी में हमारे विदेश मंत्री की ब्रसेल्स की यात्रा के दौरान हुई चर्चाओं के प्रति आभार, और आपने यूरोपीय संघ की प्रेस कॉन्फ्रेंस देखी होगी जिसमें उन्होंने इसका उत्तर दिया था और वे इन मुद्दों को संबोधित करने में भारतीय संस्थानों में अपना विश्वास व्यक्त करते हैं।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: अगला सवाल नेताली से है, "मैं पूछना चाहती हूँ कि भारत-यूरोपीय संघ जल साझेदारी कितनी आगे बढ़ी है?

श्री विकास स्वरूप, सचिव (पश्चिम): खैर, वहाँ भी मैं आपको भारत-यूरोपीय संघ की रणनीतिक साझेदारी, "रोडमैप टू 2025" की ओर संकेत करूँगा, जिसमें भारत और यूरोपीय संघ के बीच जल साझेदारी पर एक काफी विस्तृत विवरण है।दोनों पक्ष अब जल परसंयुक्त कार्य दल और भारत-यूरोपीय संघ जल मंच के साथ-साथ भारत-यूरोपीय संघ जल भागीदारी के संदर्भ में जल संबंधी मामलों को मजबूत करने पर सहमत हुए हैं। हमसुशासन और समन्वय के संयोजन, साथ ही साथ उपयुक्त रणनीति, तकनीकी दृष्टिकोण, अनुसंधान और नवाचार प्रौद्योगिकियों की आवश्यकता को दर्शाते हुए विभिन्न प्राथमिकता क्षेत्रों में आईईडब्ल्यूपी के लिए निरंतर समर्थन सुनिश्चित करेंगे।

वे जल प्रबंधन जैसे मानकों, क्षेत्रों में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने में सक्षम बनाने के लिए दोनों पक्षों के हितधारकों के बीच साझेदारी को बढ़ाएँगे। इसलिए, जाहिर है कि यह भारत और यूरोपीय संघ के बीच चर्चा का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र था।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: तो, ‘द प्रिंट’ से नैनिमा से एक अनुवर्ती प्रश्न है। क्या भारत द्वारा यूरोपीय संघ से रक्षा खरीद पर कोई चर्चा हुई थी?

श्री विकास स्वरूप, सचिव (पश्चिम): इस विशेष पहलू पर कोई बड़ी विस्तृत चर्चा नहीं हुई, लेकिन दोनों पक्षों ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच रक्षा साझेदारी को बढ़ाने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की।और जैसा कि आप जानते हैं कि रक्षा पक्ष के शीर्ष अधिकारी इस साल जनवरी में भारत आए थे और उस समय कुछ अच्छी चर्चाएँ हुई थीं।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: एलिजाबेथ रोश से बीटीआईए पर एक और अनुवर्ती सवाल है, "क्या बीटीआईए के समापन के लिए कोई समय सीमा निर्धारित की गई है?"

श्री विकास स्वरूप, सचिव (पश्चिम): बीटीआईए के समापन के लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है, लेकिन दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए हैं कि जिन दो मंत्रियों को अब इस चर्चा को आगे बढ़ाने के लिए अधिकृत किया गया है, उन्हें जल्द से जल्द मिलना चाहिए। उम्मीद है, अगले कुछ महीनों में।

श्री अनुराग श्रीवास्तव, आधिकारिक प्रवक्ता: आगे कोई और प्रश्न नहीं है। तो यह हमारी वार्ता की समाप्ति है। हमारे साथ जुड़ने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद और आपका धन्यवाद श्रीमान ।

श्री विकास स्वरूप, सचिव (पश्चिम): आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

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