यात्रायें यात्रायें

कैलिफोर्निया में प्रधानमंत्री के पहले दिन के कार्यक्रम पर सरकारी प्रवक्‍ता द्वारा प्रेस वार्ता का प्रतिलेखन (26 सितंबर, 2015)

सितम्बर 28, 2015

सरकारी प्रवक्‍ता (श्री विकास स्‍वरूप) : दोस्‍तो नमस्‍कार तथा कैलिफोर्निया में प्रधानमंत्री जी के पहले दिन के कार्यक्रम पर इस प्रेस वार्ता में आप सभी का स्‍वागत है। मेरे साथ संयुक्‍त राज्‍य में हमारे राजदूत श्री अरूण सिंह हैं। इस प्रकार, हम आज के प्रधानमंत्री जी के कार्यक्रम की प्रमुख बातों का ब्‍यौरा देंगे, बताएंगे कि उन्‍होंने किन तरह के लोगों से मुलाकात की, परिणाम क्‍या थे और फिर मैं प्रधानमंत्री जी के कल के कार्यक्रम के बारे में भी आप सभी को संक्षिप्‍त जानकारी प्रदान करूँगा।

प्रधानमंत्री जी आज दोपहर में न्‍यूयार्क पहुंचे। उनका पहला कार्यक्रम भारतीय समुदाय के साथ था। यह एक सामुदायिक स्‍वागत था जिसका आयोजन वाशिंगटन में हमारे दूतावास और सैन फ्रांसिस्‍को में हमारे कांसुलेट जनरल द्वारा किया गया जिसके माध्‍यम से प्रधानमंत्री जी विश्‍व के इस भाग में भारतीय – अमरीकी डायसपोरा के अनेक वर्गों से मुलाकात करने में समर्थ हुए। उन्‍होंने सिख समुदाय के सदस्‍यों तथा कुछ अन्‍य प्रख्‍यात पी आई ओ से भी अलग से बातचीत की। इसके तुरंत बाद, वह टेस्‍ला मोटर्स के लिए रवाना हो गए। टेस्‍ला मोटर्स एलॉन मस्‍क नामक बहुत आइकानिक व्‍यक्ति के नेतृत्‍व में बहुत ही आइकानिक कंपनी है, जो उद्यमी हैं, जो अन्‍वेषक हैं, जो मानव हितैषी हैं तथा टेस्‍ला फैसिलिटी में चारों ओर उनको घुमाने के लिए प्रधानमंत्री का हमराही बनने के लिए वह निजी तौर पर वहां मौजूद थे। उन्‍होंने देखा‍ कि किस तरह टेस्‍ला इलेक्ट्रिक कारों का निर्माण होता है। वास्‍तव में, उन्‍होंने कहा कि हम सर्वोत्‍तम इलेक्ट्रिक कार या सर्वोत्‍तम बैटरी चालित कार के निर्माण के व्‍यवसाय में नहीं है; हम सर्वोत्‍तम कार बनाने के व्‍यवसाय में हैं। उन्‍होंने हमें वास्‍तव में यह दिखाया कि किस तरह पूरी तरह रोबोट पर आधारित फैसिलिटी इन टेस्‍ला कारों के विनिर्माण के लिए अधुनातन उपकरणों का उपयोग कर रही है। उनके पास नवीनतम मॉडल है, जो बहुत महंगा मॉडल है तथा उनके पास थोड़ी कम लागत वाला मॉडल शुरू करने की भी योजनाएं हैं – केवल सापेक्षिक दृष्टि से ‘थोड़ी कम लागत वाला मॉडल’। यह बैटरी से चलने वाली कार का प्रयोग करने के लिए लोगों को अनुमति प्रदान करने की दृष्टि से गेम चेंजर हो सकता है, जो उनके लिए किफायती भी हो सकती है। परंतु हमारे लिए इस बैठक से मुख्‍य लाभ उनका पावर वाल था जो दीर्घावधिक बैटरी है जिनमें अनेक अप्‍लीकेशन हो सकते हैं। प्रधानमंत्री जी यह देखने के लिए बहुत लालायित थे कि किस तरह हम बैटरी – इस पावर वाल संकल्‍पना का उपयोग भारत में विकास का मार्ग प्रशस्‍त करने के लिए कर सकते हैं। वास्‍तव में, जो उदाहरण दिया गया वह यह था कि जिस तरह सेलफोन आपको इस बात के लिए समर्थ बनाता है कि कुछ भी न होने की बजाय आपके पास मोबाइल टेलीफोन है, उसी तरह, पावर वाल संकल्‍पना, सोलर से चालित बैटरी भारत के अब तक के असीमित हिस्‍सों में ऊर्जा पहुंचाने में आपको समर्थ बना सकती है जहां इस समय आपके पास सौर पावर का प्रयोग करने के अलावा कुछ भी नहीं है और इस दीर्घावधिक बैटरी के माध्‍यम से लोग तुरंत ऊर्जा तक पहुंच प्राप्‍त कर सकते हैं। इस प्रकार, इस पर अच्‍छी - खासी चर्चा हुई।

इसके बाद, प्रधानमंत्री जी होटल वापस आ गए और उनसे एप्‍पल के सी ई ओ श्री टिम कुक ने मुलाकात की। एप्‍पल भी विश्‍व में सर्वाधिक आइकानिक कंपनियों में से एक है। वास्‍तव में, हाल ही में इसे विश्‍व में सबसे मूल्‍यवान कंपनी के रूप में आंका गया है तथा ऐसा उत्‍पादों की किस्‍म के कारण है, जिनका उन्‍होंने सृजन किया है। जैसा कि श्री टिम कुक ने कहा, हम बस प्रौद्योगिकी के व्‍यवसाय में ही नहीं हैं; प्रौद्योगिकी मानवता के साथ जिस तरह से इंट्रैक्‍ट करती है वही हमें इतना विशेष बनाता है। वास्‍तव में, उन्‍होंने कहा कि एप्‍पल के हर कर्मचारी के दिल में भारत का एक बहुत विशेष स्‍थान है जिसका सीधा सा कारण यह है कि जब श्री स्‍टीव जॉब्‍स बहुत युवा थे, तब वह प्रेरणा के लिए भारत गए थे। भारत में उन्‍होंने जो देखा उससे एप्‍पल का सृजन करने की इच्‍छा उनमें पैदा हुई; इस प्रकार, भारत हमारे लिए हमेशा विशेष रहेगा। उन्‍होंने प्रधानमंत्री की डिजिटल इंडिया पहल में साझेदार बनने की अपनी महती इच्‍छा व्‍यक्‍त की जो उनकी राय में एक परिवर्तनकारी पहल है, जो वास्‍तव में भारत में गेम चेंजर हो सकती है। प्रधानमंत्री जी ने कहा कि हम चाहेंगे कि एप्‍पल भारत में विनिर्माण शुरू करे। उन्‍होंने विशाल अवसर का उल्‍लेख किया जो भारत प्रस्‍तुत कर रहा है, यह तथ्‍य कि फॉक्‍सकॉन, जो एप्‍पल का सबसे बड़ा साझेदार है, ने भारत में एक विनिर्माण बेस स्‍थापित करने का पहले ही निर्णय ले लिया है। श्री टिम कुक ने सकारात्‍मक जवाब दिया। मेरी समझ से भारत उनकी दीर्घावधिक योजनाओं के लिए फिट है। संपूर्ण ऐप विकास अर्थव्‍यवस्‍था में उनकी विशेष रूचि थी क्‍योंकि यह उद्यमशीलता के लिए बहुत महत्‍वपूर्ण कारक हो सकता है जहां व्‍यक्तिगत ऐप विकासक ऐप यूनिवर्स का हिस्‍सा बन सकते हैं।

प्रधानमंत्री जी इस बात का उल्‍लेख करते रहे हैं कि एक निजी क्षेत्र है, एक सार्वजनिक क्षेत्र है और फिर एक व्‍यक्तिगत क्षेत्र है। जिस व्‍यक्तिगत क्षेत्र की वह बात कर रहे हैं वह ऐसे लोगों के बारे में है जो स्‍वयंभू उद्यमी हो सकते हैं तथा श्री टिम कुक ने कहा कि इस ऐप विकास टूल का प्रयोग करके लोग वास्‍तव में इस विशाल उद्योग का हिस्‍सा बन सकते हैं। उन्‍होंने चीन का उदाहरण दिया जहां वास्‍तव में उन्‍होंने कहा कि केवल ऐप विकास के लिए उन्‍होंने चीन में डेढ़ मिलियन नौ‍करियों का सृजन किया। इस प्रकार, यह भारत के लिए भी एक विशाल उदाहरण प्रस्‍तुत करता है। इसके बाद, एप्‍पल पे पर कुछ चर्चा हुई, इस बात पर भी चर्चा हुई कि किस तरह यह मोबाइल पेमेंट प्‍लेटफार्म हमारी जन – धन योजना तथा इस तरह की अन्‍य पहलों का भी हिस्‍सा हो सकता है।

इसके बाद, प्रधानमंत्री जी से माइक्रोसाफ्ट के श्री सत्‍या नाडेला, गूगल के श्री सुंदर पिचाई, क्‍वालकॉम के श्री पॉल जैकब्‍स, सिस्‍को के श्री जॉन चेंबर्स द्वारा मुलाकात की गई और वास्‍तव में इस बारे में चर्चा हुई कि किस तरह ये सभी आइकानिक कंपनियां डिजिटल इंडिया कार्यक्रम, स्किल इंडिया कार्यक्रम में योगदान कर सकती हैं। इसके बाद, वे सभी डिजिटल इंडिया डिनर के लिए चले गए जहां, मुझे पूरा यकीन है कि आप सभी मौजूद थे। इस प्रकार, मुझे उसके बारे में ज्‍यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं है। मूलरूप से प्रधानमंत्री जी ने डिजिटल इंडिया के लिए अपने विजन को प्रतिपादित करने के लिए इस प्‍लेटफार्म का प्रयोग किया, किस तरह डिजिटल इंडिया अभिशासन में सुधार के लिए, सेवाओं की शीघ्रता से डिलीवरी के लिए संपर्क में सुधार के लिए प्‍लेटफार्म बन सकता है तथा सभी भारतीयों के जीवन में परिवर्तनकारी प्रभाव उत्‍पन्‍न कर सकता है। आप सभी प्रधानमंत्री जी को सुन चुके हैं, आप सभी सुन चुके हैं कि किस तरह वह डिजिटल अंतराल को पाटने की योजना बना रहे हैं और किस सिलीकॉन वैली इस यात्रा में हमारे लिए सबसे बहुमूल्‍य साझेदारों में से एक हो सकती है। मैं यहीं पर अपनी वाणी को विराम देना चाहूँगा और राजदूत महोदय से अपेक्षा करूँगा कि मैंने अभी – अभी जो कहा है उसे वह संपूरित करें।

श्री अरूण सिंह (यूएस में भारतीय राजदूत) : मेरी समझ से विकास जी ने सबको अच्‍छी तरह शामिल कर दिया है। एक ही बात जिस पर मैं जोर देना चाहता हूँ वह यह है कि टेस्‍ला जाने का मुख्‍य कारण एवं रूचि नवीकरणीय ऊर्जा पर बल एवं कार्यक्रम जिस पर सरकार जोर दे रही है, की दृष्टि से उनकी बैटरी प्रौद्योगिकी तथा ऊर्जा भंडारण क्षमता है क्‍योंकि बैटरी की ऊर्जा भंडारण क्षमता हमारे लिए काफी महत्‍व रखती है। इसलिए न केवल सौर ऊर्जा से संबंधित भंडारण, जब आप इसका उत्‍पादन करते हैं, अपितु सभी अन्‍य स्रोतों द्वारा पीक और ऑफपीक विद्युत उत्‍पादन को ध्‍यान में रखते हुए भी इसका भंडारण महत्‍वपूर्ण है। यह महत्‍वपूर्ण था तथा एक और भाव था कि जब बैटरी की लागत कम होगी, तो भारत में इस तरह की प्रौद्योगिकी के लिए विशाल संभावना होगी। यह ऐसी चीज है जिसकी हमें तलाश है। एप्‍पल और भारत में उनकी रूचि की दृष्टि से, मेरी समझ से ऐसा भाव था कि भारत में डिजाइन में ढेर सारे नवाचार हो रहे हैं। भारत में ढेर सारा ऐप विकसित हो रहा है तथा विनिर्माण क्षेत्र में उपस्थिति सहित जब एप्‍पल मध्‍यम एवं दीर्घावधिक संरचना में भारत में अपनी उपस्थिति का विस्‍तार करेगा, तो एप्‍पल प्‍लेटफार्म से संबंधित ऐप विकासकों के लिए अवसरों में वृद्धि होगी। यह निश्चित रूप से, सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा होगा। यही केवल दो बातें थीं, जिन पर मैं जोर देना चाहता था।

सरकारी प्रवक्‍ता : जैसा कि आप सभी जानते हैं, प्रधानमंत्री जी जी-4 शिखर बैठक से कैलिफोर्निया आए थे। यदि आपका इससे भी संबंधित कोई प्रश्‍न हो, तो मुझे उत्‍तर देकर प्रसन्‍नता होगी। जो भी हो, अब यह मंच प्रश्‍नों के लिए खुला है।

प्रश्‍न (विद्या, इंडिया पोस्‍ट) : मैं बस यह जानना चाहती हूँ कि टिम कुम तथा हर किसी से हमने जो बातचीत एवं चर्चा की है, तो क्‍या उन्‍होंने भारत में निवेश करने के लिए किसी राशि तथा भारत में सृजित होने वाले रोजगार के बारे में कोई वादा किया है?

सरकारी प्रवक्‍ता : आपने डिनर के समय कुछ घोषणाएं देखी हैं। पॉल जैकब्‍स द्वारा 150 मिलियन अमरीकी डालर का निवेश करने की घोषणा की गई है। इस प्रकार, कुछ लोगों ने कुछ सार्वजनिक घोषणाएं की हैं। इन मामलों में, इन विशिष्‍ट आंकड़ों का उल्‍लेख किया गया है। अन्‍य मामलों में, इस बात के संकेत हैं कि इस पर काम करने के लिए लोग वस्‍तुत: बहुत गंभीर है। परंतु मेरा अनुमान है कि वे विशिष्‍ट घोषणाएं करने के लिए अभी तैयार नहीं हैं।

प्रश्‍न (नताशा) : क्‍या आप हमें इस बारे में थोड़ा और बता सकते हैं कि क्‍या नौकरियों के विस्‍तृत आंकड़ों के बारे में जानकारी प्रदान करना संभव है, जिनकी आप इन सभी डिजिटल इंडिया पहल के परिणाम के तौर पर अपेक्षा कर सकते हैं तथा क्‍या आप प्रारंभिक गोलमेज जो कल होने वाले हैं, के बारे में भी कुछ बता सकते हैं?

श्री अरूण सिंह : जहां तक सृजित होने वाली नौकरियों का संबंध है, अब हर साल जिस तरह का प्रौद्योगिकीय विकास हो रहा है उससे मेरी समझ से कोई अगले पांच वर्षों या दस वर्षों के लिए अनुमान व्‍यक्‍त कर सकता है। आपको यह देखना होगा कि उनकी मंशा क्‍या है और लोग अपने निवेश के समर्थन की दृष्टि से बहुत गंभीर मंशा व्‍यक्‍त कर रहे हैं और वास्‍तव में किसी और बात के अलावा क्‍वालकॉम ने भारत में स्‍टार्टअप की सहायता के लिए 150 मिलियन अमरीकी डालर की घोषणा की है तथा इससे किस तरह के रोजगार उत्‍पन्‍न होने की संभावना है, इस समय इस बारे में कोई भी कल्‍पना नहीं कर सकता है। इस प्रकार, मेरी समझ से यदि आप चर्चा पर गौर करें, यहां जो टिप्‍पणियां की गईं उन पर गौर करें, तो आपको स्‍पष्‍ट अंदाजा लग सकता है कि डिजिटल प्रौद्योगिकी की दृष्टि से भारत इको सिस्‍टम का अभिन्‍न अंग पहले से ही है, जैसा कि संयुक्‍त राज्‍य में है, न केवल भारतीय अमरिकियों के माध्‍यम से जो काम कर रहे हैं, न केवल भारतीय कंपनियों के माध्‍यम से जो यहां सर्विसिंग कंप‍नियां हैं, अपितु भारत में साझेदारी में भी ढेर सारा काम हो रहा है। इस प्रकार, इस इको सिस्‍टम का भारत पहले से ही अभिन्‍न अंग है और इसलिए विदेश जाने पर स्‍पष्‍ट रूप से संभावना है तथा इसलिए प्रधानमंत्री जी की यहां उपस्थिति, उनका संदेश, इन सभी कंपनियों के अग्रणी सी ई ओ के साथ उनकी बातचीत इसी पर केंद्रित है। कल, दो कार्यक्रम होने वाले हैं जो इससे जुड़े हैं। पहला कार्यक्रम यह है कि कल स्‍टार्टअप पर एक बड़ा कार्यक्रम हो रहा है जिसे यहां टी आई ई द्वारा और भारत से नैस्‍कॉम द्वारा किया जा रहा है जहां, नैस्‍काम भारत से कतिपय संख्‍या में सफल स्‍टार्टअप को ला रहा है और वे यहां कुछ सफल स्‍टार्टअप के साथ बातचीत करेंगे और मुद्दों पर चर्चा होगी तथा इस बारे में भी चर्चा होगी कि हम किस तरह इस पहलू को आगे बढ़ा सकते हैं। इस प्रकार, यह महत्‍वपूर्ण होगा। नवीकरणीय ऊर्जा की दृष्टि से, जो प्रधानमंत्री जी की यहां की यात्रा की दृष्टि से बहुत ही महत्‍वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है, हमारा बल नवीकरणीय ऊर्जा पर है और जैसा कि मैंने बताया, यह टेस्‍ला के दौरे का अंग है। कल, हम स्‍टानफोर्ड विश्‍वविद्यालय के प्रीकोर्ट ऊर्जा संस्‍थान तथा यूएस के वाणिज्‍य विभाग एवं ईओएस के साथ मिलकर एक कार्यक्रम कर रहे हैं। ऊर्जा मंत्री डा. मोनिज भी इस कार्यक्रम के लिए यहां उपस्थित रहेंगे। वहां कुछ और लोग भी होंगे –इस क्षेत्र के विचारक, शिक्षाविद, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, वेंचर पूंजी से स्‍टार्टअप, वित्‍तीय सेवा क्षेत्र से प्रतिनिधि, वे सभी नवीकरणीय ऊर्जा से संबंधित पहलुओं पर विचार – विमर्श करेंगे तथा देखेंगे कि हम किस तरह इसे भारतीय संदर्भ में आगे ले जा सकते हैं। इस प्रकार, यह कल के कार्यक्रम का मुख्‍य बिंदु है।

प्रश्‍न (सीमा सिरोही, इकोनॉमिक टाइम्‍स) : मुझे आश्‍चर्य हो रहा है कि प्रधानमंत्री जी ने श्री सत्‍या नडेला आदि जैसे सी ई ओ के साथ जो निजी बैठकें की हैं, क्‍या उन्‍होंने उनमें ऐसी किसी चुनौती का उल्‍लेख किया जिसे उनको भारत में जूझना पड़ता है और यदि हां तो, क्‍या आप हमें उनके बारे में कुछ बता सकते हैं?

सरकारी प्रवक्‍ता : मेरी समझ से चर्चा के दौरान अवसरों की उपलब्‍धता पर बल दिया गया। वास्‍तव में उन्‍होंने यहां प्रधानमंत्री जी के साथ कार्यक्रम से पूर्व बैठक में बात की जो आंशिक रूप से शिष्‍टाचार मुलाकात जैसी थी क्‍योंकि वे सभी यहां आ रहे हैं। परंतु यह बहुत सारवान बैठक थी जो 25 से 30 मिनट तक चली तथा काफी चर्चा हुई। परंतु आवश्‍यक रूप से फोकस अवसरों पर था – यहां आधारित उद्यमों के लिए अवसर, भारत के लिए अवसर तथा साझेदारी के संभावना।

प्रश्‍न (नारायण लक्ष्‍मण, दि हिंदू) : मेरा प्रश्‍न यह है कि क्‍या अगले भावी कदमों के बीच आप .. (अश्रव्‍य) ... इस बात पर कोई चर्चा हुई कि .... (अश्रव्‍य) ... बहुत अधिक विवाद तथा भारत और भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था में स्‍मार्ट सिटी अन्‍य वेंचर है। इस प्रकार, कैसे भारतीय .... (अश्रव्‍य) ... मु्द्दा क्‍योंकि वे .... (अश्रव्‍य) ... भारतीय?

सरकारी प्रवक्‍ता : पहली बात तो यह है कि यहां मैं भारत सरकार की नीति के बारे में कोई बात नहीं करने जा रहा हूँ क्‍योंकि यह मेरा अधिदेश नहीं है। मैं भारत – यूएस सहयोग के बारे में बात करूँगा। दूसरी बात, आप जिस एन एस ए मुद्दे का उल्‍लेख कर रहे हैं वह यूएस से संबंधित मुद्दा है, न कि भारत से संबंधित मुद्दा है। मेरी समझ से भारत में जो हो रहा है उसकी दृष्टि से ऐसा अनुभव किया जा रहा है कि डिजिटल प्रौद्योगिकी में प्रचुर संभावना है, लोगों को सशक्‍त बनाने के लिए, सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देने के लिए और सूचना तक पहुंच का लोकतां‍त्रीकरण करने के लिए। मेरी समझ से हम सूचना, शिक्षा तक पहुंच के विस्‍तार, आम जनता तक उनको पहुंचाने की दृष्टि से हम इन्‍हीं पहलुओं पर विचार कर रहे हैं ताकि हम सशक्‍तीकरण एवं समावेशन को प्रोत्‍साहित कर सकें।

प्रश्‍न : मेरा अनुमान है ... (अश्रव्‍य) ... उदाहरण के लिए .... (अश्रव्‍य) ... यह बी जे पी से संबंधित था, इस दल की निगरानी हो रही थी तथा निश्चित रूप से इसके राष्‍ट्रीय सुरक्षा सरोकार हैं? क्‍या वे गंभी हैं अथवा .... (अश्रव्‍य) ...

सरकारी प्रवक्‍ता : यहां उद्योग जगत के रहनुमाओं के साथ मैंने जिन बैठकों में शिरकत की उनमें इससे संबंधित कोई चर्चा नहीं हुई। स्‍पष्‍ट रूप से अवसरों तथा सामाजिक, आर्थिक लाभों पर चर्चा हुई तथा उन अवसरों पर चर्चा हुई जो इसके माध्‍यम से उपलब्‍ध होंगे तथा रोजगार सृजन के अवसरों, प्रौद्योगिकी अपनाने के अवसरों पर चर्चा हुई जो विकास और प्रौद्योगिकी की दृष्टि से लंबी छलांग भरने के लिए भारत के लिए उपलब्‍ध होंगे।

प्रश्‍न (मनीष झा) : मेरा प्रश्‍न न्‍यूयार्क में जी-4 शिखर बैठक के बारे में है। संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद सुधार के लिए आगे की राह क्‍या है तथा हमारी रणनीति क्‍या है? क्‍या हम किसी समय सीमा पर विचार कर रहे हैं? द्वितीयत: श्री मोदी की कैलिफोर्निया यात्रा की पूर्व संध्‍या पर कुछ विशेषज्ञों ने डिजिटल इंडिया मिशन में निजता के मुद्दों को लेकर सरोकार व्‍यक्‍त किया है। क्‍या इनमें से किसी बैठक में इन मुद्दों को भी उठाया गया?

सरकारी प्रवक्‍ता : जहां तक आपके दूसरे प्रश्‍न का संबंध है, किसी ने भी इस विशिष्‍ट मुद्दे को नहीं उठाया। अब हम आपके पहले प्रश्‍न पर आते हैं। जहां तक जी-4 का संबंध है, यदि आपने इस बैठक के अंत में जारी किए गए संयुक्‍त वक्‍तव्‍य को देखा है, तो इसमें स्‍पष्‍ट रूप से एक निश्चित समय सीमा का आह्वान किया गया है, समय सीमा संयुक्‍त राष्‍ट्र की 70वीं वर्षगांठ है जो शुरू हो चुकी है, जो सितंबर, 2016 तक चलती रहेगी। इस प्रकार, चार नेताओं के बीच इस बात पर सहमति हुई कि यह हमें संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के काफी समय से लंबित सुधार को प्रभावी बनाने का ऐतिहासिक अवसर प्रस्‍तुत करता है। इस प्रयोजन के लिए रणीनीति तैयार की जानी है क्‍योंकि समान सोच वाले देशों का गठबंधन यथासंभव बड़ा होना चाहिए जो सुधार पूर्व टेम्‍पलेट के लिए है तथा जो एक मंच पर आ सके तथा अंतर्सरकारी वार्ता के लिए आवश्‍यक स्थितियों का सृजन कर सके ताकि यह अपने तार्किक अंजाम तक पहुंच सके।

प्रश्‍न (कनिका श्रीधर) : यहां प्रौद्योगिकी नेताओं के साथ प्रधानमंत्री जी ने जो निजी बैठकें की हैं उनके संबंध में मेरा एक प्रश्‍न है ... (अश्रव्‍य) ... दोनों देशों के बीच सूचना का आदान – प्रदान तथा नि:शुल्‍क सेवाओं की पहुंच इसके बार विशाल उत्‍प्रवासन प्रणाली तथा पहुंच की मात्रा जो यहां शिक्षा प्रणाली तक भारत के लोगों को प्राप्‍त होगी और विलोमत:। इस प्रकार, क्‍या इससे संबंधित किसी प्रकरण पर चर्चा हुई? क्‍या बेहतर उत्‍प्रवासन नीति के लिए क्षितिज पर कोई उम्‍मीद की किरण है?

सरकारी प्रवक्‍ता : मैं यह कह सकता हूँ कि इन मुद्दों पर हम उन लोगों के साथ नियमित आधार पर चर्चा करते हैं जहां हम महसूस करते हैं कि हम जिन नीतियों की तलाश में हैं उनकी दृष्टि से कोई प्रभाव हो सकता है। इस प्रकार, यहां फोकस पूरी तरह से प्रौद्योगिकी तथा इसके द्वारा सृजित होने वाले अवसरों पर था। यह चर्चा का मुख्‍य बिंदु था तथा स्‍टार्टअप एवं साझेदारी के माध्‍यम से भारत में लोगों के लिए इससे जो अवसर सृजित हो सकते हैं तथा प्रौद्योगिकी सृजन जो यह यूएस कंपनियों के लिए सृजित करेगा। इस प्रकार, यहां इन बातों पर फोकस था।

प्रश्‍न : यह प्रश्‍न टेस्‍ला मोटर्स के साथ प्रधानमंत्री मोदी की बैठक के बारे में है। क्‍या इस बारे में कोई चर्चा हुई कि अपनी इलेक्ट्रिक कारों के लिए टेस्‍ला जिस प्रौद्योगिकी का प्रयोग कर रहा है उसको एब्‍जार्ब किया जाएगा अथवा क्‍या भारत में बैटरियों के लिए टेस्‍ला विनिर्माण सुविधाएं स्‍थापित कर रहा है अथवा क्‍या यह केवल इस बारे में परिचय मात्र था कि किस तरह यहां प्रौद्योगिकी का प्रयोग हो रहा है?

सरकारी प्रवक्‍ता : मैं नही समझता कि टेस्‍ला ने भारत में कोई विनिर्माण सुविधा स्‍थापित करने के लिए किसी तात्‍कालिक योजना का संकेत दिया है। परंतु मुद्दा यह था कि जिस तरह की बैटरी प्रौद्योगिकी या भंडारण प्रौद्योगिकी उनकी है वह भारत के लिए प्रासंगिक है। हमें इसका अध्‍ययन करने तथा उस पर और काम करने की जरूरत है ताकि देखा जा सके कि भारत में किस ढंग उसका प्रयोग किया जा सकता है या प्रयोग के लिए अनुकूलित किया जा सकता है। जब यह चर्चा आगे बढ़ेगी, तो भारत में उत्‍पादन करने की संभावना है या नहीं – यह अनुवर्ती चरणों पर होगा?

प्रश्‍न (अभिषेक, इंडिया टीवी) : जी-4 की मीटिंग को इस नजरिये से भी देखा जा रहा है कि आप लोग पुरानी सरकार का जो पैकेज है उसको आगे बढ़ा रहे हैं और जी-4 के जरिये परमानेन्‍ट मेम्‍बरशिप भारत को मिलेगी तो कुछ करना है। यह एक रिएक्‍शनरी ब्‍लॉक बना रहा है। बाकी देश और एकजुट होकर आपका विरोध करेंगे। यह खतरा, इस तरह की आवाजें सामने आई हैं। आपको यह दृष्टिकोण कितना वास्‍तविक लगता है कि ऐसा करने से उल्‍टा नतीजा होगा। पिछली सरकार ने जो किया उसी को आप जारी रख रहे हैं, कुछ नया नहीं कर रहे हैं।

आधिकारिक प्रवक्‍ता : पहली बात तो यह है कि भारत की कोई भी सरकार आप ले लीजिये, प्रत्‍येक सरकार ने चाहा है कि भारत संयुक्‍त राष्‍ट्र की सुरक्षा परिषद का स्‍थायी सदस्‍य बने। कोई भी सरकार नहीं आई है जिसने यह कहा हो कि हम नहीं चाहते हैं कि भारत स्‍थायी सदस्‍य बने। तो पहली बात यह कि इस विषय को लेकर विदेश नीति में सततता है। दूसीर बात जो आपने कही है, तो जी-4 देशों का ही समूह है यह बात आपकी सही है लेकिन चार की पॉवर कितना मल्‍टीप्‍लाई हो सकती है। चार देश क्‍यों साथ आए हैं क्‍योंकि हर देश की अपनी स्‍ट्रेन्‍थ है, जापान की अपनी स्‍ट्रेन्‍थ है, जर्मनी की अपनी स्‍ट्रेन्‍थ है, ब्राजील और भारत की तो अपनी स्‍ट्रेन्‍थ है ही, तो ये चार देश इसलिए साथ आए कि एकजुट होकर हम करेंगे तो चार की पॉवर चार सौ हो सकती है क्‍योंकि यह दो स्‍टेज में होगा। पहले एक संकल्‍प पारित होना होगा जिसमें यह कहा जायेगा कि संयुक्‍त राष्‍ट्र की सुरक्षा परिषद का विस्‍तार और सुधार हो और सुधार की प्रक्रिया क्‍या हो और उसके पश्‍चात कौन-कौन देश नये सदस्‍य बनेंगे यह बात आयेगी। वहॉं तक आने के लिए आपको एक पस्‍ताव तो पारित करना पडेगा। उसके लिए एक से बेहतर है जितने ज्‍यादा लोग साथ आ सकें। यह चार देशों का समूह अफ्रीकी देशें, कैरिबियन देशों और एल-69 से बात करेगा। जैसा कि आपने देखा है, छोटे द्वीपीय विकासशील देशों की क्‍या अपेक्षाएं हैं। तो विस्‍तृत उद्देश्‍य यही है कि जितना बड़ा गठबंधन हम बना सकें, जितना बड़ा गठबंधन हम खड़ा कर सकें क्‍योंकि कोई भी इस तरह का प्रस्‍ताव पारित होने के लिए संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा में 129 मतों की आपको आवश्‍यकता होगी। 129 मत जुटाने के लिए हम पूरा प्रयास करेंगे।

प्रश्‍न : क्‍या आपको इस बारे में कोई अनुमान है कि राष्‍ट्रपति ओबामा के साथ परसों होने वाली बैठक की अवधि कितनी है तथा एजेंडा के विषय क्‍या – क्‍या हैं?

सरकारी प्रवक्‍ता : जब दो नेता मिलते हैं, तो समय की कोई निर्धारित सीमा नहीं होती है। कोई भी घंटी बजाकर यह नहीं कह सकता कि बैठक अब खत्‍म हो चुकी है। मुद्दों पर चर्चा करने के लिए जितनी देर तक उनको चर्चा करने की जरूरत होगी उतनी देर तक वे चर्चा करेंगे। मैं बस यह कह सकता हूँ कि बैठक 11.00 बजे शुरू हो जाएगी। ऐसा समझा जाता है कि इस बैठक के बाद दोनों नेता संभवत: इस बारे में अपने विचार व्‍यक्‍त करें कि उन्‍होंने किन बातों पर चर्चा की। यह तभी पता चलेगा जब आप जानेंगे कि एजेंडा क्‍या था।

प्रश्‍न (यशवंत) : प्रधानमंत्री जी के आज के भाषण पर मेरा एक प्रश्‍न है ... (अश्रव्‍य) ...

सरकारी प्रवक्‍ता : फ्रंटरूम में बैक रूम के आपरेशन को कभी प्रकट नहीं किया जाता है।

प्रश्‍न : यहां हुए विरोधों में से कुछ पर आधिकारिक प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त की गई?

सरकारी प्रवक्‍ता : मैंने कोई विरोध नहीं देखा।

प्रश्‍न : यहां प्रधानमंत्री जी की उपस्थिति के थोड़ी देर बाद ऐसा हुआ।

सरकारी प्रवक्‍ता : यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। हमें इस पर कोई टिप्‍पणी नहीं करनी है।

प्रश्‍न : प्रधानमंत्री अमेरिकी जमीन पर हैं और अमेरिका के मंच से भारत की स्‍थायी सदस्‍यता के दावे को सही प्रकार कह रहा है उसका समर्थन करता रहा है। परसों जब राष्‍ट्रपति से ओबामा से प्रधानमंत्री मोदी मिलेंगे तो क्‍या इस तरह की कोई बात होगी कि जो अमेरिका पीछे से डोर खींचने की कोशिश में लगा है, जो जानकारी हमें मिल रही है तो एक दो-टूक बात होगी कि आखिर अमेरिका स्‍थायी सदस्‍यता को लेकर चाहता क्‍या है।

आधिकारिक प्रवक्‍ता : आप बैकडोर से फिर यही सवाल पूछ रहे हैं कि क्‍या मुद्दे हैं। मैं फिर कह रहा हूँ कि अभी मैं प्रकाश नहीं डाल सकता हूँ कि क्‍या मुद्दे होंगे। जब मुलाकात होगी उसके बाद आपको पता लग जायेगा कि क्‍या मुद्दों पर चर्चा हुई। धन्‍यवाद।

(समाप्‍त)


टिप्पणियाँ

टिप्पणी पोस्ट करें

  • नाम *
    ई - मेल *
  • आपकी टिप्पणी लिखें *
  • सत्यापन कोड * Verification Code