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प्रधानमंत्री की यूके की आगामी यात्रा पर विदेश सचिव द्वारा मीडिया वार्ता का प्रतिलेखन (10 नवंबर, 2015)

नवम्बर 11, 2015

सरकारी प्रवक्‍ता (श्री विकास स्‍वरूप) :दोस्‍तो नमस्‍कार तथा प्रधानमंत्री जी की यूनाइटेड किंगडम की आगामी यात्रा पर इस प्रेस वार्ता में आप सभी का स्‍वागत है। आज हमारे साथ विदेश सचिव डा. एस जयशंकर तथा संयुक्‍त सचिव (यूरोप पश्चिम) श्रीमती नंदिनी सिंगला मौजूद हैं।

विदेश सचिव महोदय यूके में प्रधानमंत्री जी के कार्यक्रम के बारे में विस्‍तृत सिंहावलोकन प्रदान करेंगे। उनके पास स‍मय की कमी है, इसलिए इसके बाद हम बहुत ज्‍यादा प्रश्‍न नहीं ले पाएंगे। मैं आप सभी को अग्रिम में चेतावनी दे रहा हूँ। इसी के साथ विदेश सचिव महोदय, अब यह मंच आपका है।

विदेश सचिव (डा. एस जयशंकर) : विकास आपका धन्‍यवाद। जैसा कि आप में से अधिकांश लोग जानते हैं, प्रधानमंत्री जी 12, 13 और 14 नवंबर तक यूके की तीन दिवसीय यात्रा पर जा रहे हैं। यह 9 साल बाद पहली द्विपक्षीय यात्रा है। प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने आखिरी बार 2006 में यूके का दौरा किया था। वह जी-20 शिखर बैठक के लिए भी 2009 में वहां गए थे।

कई कारणों यह यात्रा एक महत्‍वपूर्ण यात्रा है। मेरी समझ से आप में से अधिकांश लोग इस बात से सहमत होंगे कि यूके विश्‍व में काफी रूतबे के साथ एक प्रमुख महाशक्ति है तथा ऐसी महाशक्ति के साथ भागीदारी स्‍पष्‍ट रूप से विदेश नीति में महत्‍वपूर्ण है। यह सुरक्षा परिषद का, यूरोपीय संघ का, जी-8 का, जी-20 का, नाटो का, महत्‍वपूर्ण निर्यात नियंत्रण व्‍यवस्‍थाओं का, ओ ई सी डी का स्‍थायी सदस्‍य है। इससे आप सभी को अंदाजा लग गया होगा कि राजनीतिक चर्चा में किस तरह के मुद्दे शामिल होंगे।

दूसरा, यूके लंदन का शहर भी है। यह बहुत महत्‍वपूर्ण वित्‍तीय केंद्र है। साथ जब हम विदेश से पूंजी तथा प्रौद्योगिकी एवं सर्वोत्‍तम प्रथाओं को आकर्षित करना चाहते हैं, तो इस यात्रा के आर्थिक और निवेश से जुड़े पहलू बहुत महत्‍वपूर्ण होंगे।

तीसरा, डायसपोरा का पहलू। यूके में भारतीय डायसपोरा दूसरा सबसे बड़ा डायसपोरा है। मोटेतौर पर भारतीय मूल के व्‍यक्तियों की संख्‍या डेढ़ मिलियन के आसपास है। यूके में तीन लाख से अधिक एन आर आई भी रहते हैं। वे मोटेतौर पर यूके की कुल आबादी का 2 प्रतिशत हैं। राजनीतिक तौर पर भी उनका अच्‍छा प्रतिनिधित्‍व है। भारतीय मूल के 10 एमपी हैं, भारतीय मूल के 24 पीयर हैं। यह डायसपोरा से जुड़ा पहलू हैं।

उसके बाद, आधुनिक यूके, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से लैस यूके, स्‍वच्‍छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी से लैस यूके है। वास्‍तव में, यूके विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हमारे शीर्ष पांच साझेदारों में से एक है। यूके के साथ हमारे अनेक संयुक्‍त अनुसंधान, नवाचार तथा सहयोग कार्यक्रम हैं। वहां हमारे बीस हजार छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। वास्‍तव में, भारतीय छात्रों के लिए यह संभवत: यूएस के बाद विदेश जाने का दूसरा सबसे मनपसंद विकल्‍प है। इस प्रकार, यह पहलू है।

वास्‍तव में, जहां तक जन दर जन संपर्क का संबंध है, कृपया इस बात को भी ध्‍यान में रखें कि यूके के साथ हमारा पर्यटन संबंध बहुत ही महत्‍वपूर्ण है। हमारे यहां यूके से हर साल दस लाख से अधिक पर्यटक आते हैं और चार लाख भारतीय हर साल यूके के दौरे पर जाते हैं।

अंत में, यह ऐसा देश है जिसके साथ स्‍पष्‍ट रूप से हमारा बहुत विशेष इतिहास, बहुत अनोखा बंधन है। हमारी अनेक संस्‍थाएं एवं मूल्‍य एक जैसे हैं। मेरे कहने का तात्‍पर्य यह है कि यह सब इस यात्रा की पृष्‍ठभूमि है।

अब हमारे प्रधानमंत्री तथा प्रधानमंत्री कैमरन के बारे में, यह उनकी तीसरी बैठक होगी। पिछले साल ब्रिसबेन में जी-20 में उनकी मुलाकात हुई थी; इसके बाद इस साल संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा में सितंबर में उनकी मुलाकात हुई; और प्रधानमंत्री कैमरन तीन बार भारत के दौरे पर आ चुके हैं। वह और उनकी पार्टी दोनों ही भारत के साथ संबंधों को बढ़ाने की दृष्टि से जोरदार शब्‍दों में बोलते रहे हैं। इस प्रकार, हम उस रूचि को, उस प्रतिबद्धता को वापस कर रहे हैं और इसलिए यह यात्रा हो रही है।

इस कार्यक्रम के तत्‍वत: पांच स्‍तंभ हैं। सरकार दर सरकार चर्चा दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच होगी, 10, डाउनिंग स्‍ट्रीट में और चेकर्स में भी जो ब्रिटेन के प्रधानमंत्री का सरकारी निवास है। प्रधानमंत्री जी यूके की संसद को संबोधित करेंगे। कारोबारी बैठकें होंगी, दोनों देशों के सी ई ओ फोरम, जिसका पुनर्गठन किया गया है, की बैठक होगी और साथ ही यूके के वित्‍तीय और आर्थिक क्षेत्रों को वह संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री जी बर्किंघम पैलेस में महारानी के साथ लंच करेंगे। और वह भारतीय डायसपोरा के साथ बातचीत करेंगे।

प्रधानमंत्री जी सोलीहुल में जे एल आर फैक्‍ट्री भी जाएंगे, जो वास्‍तव में यूके में भारत के महत्‍वपूर्ण निवेश का सार है। उनके कई अन्‍य कार्यक्रम हैं जिसमें उस मकान का दौरा शामिल है जिसमें डा. बी आर अंबेडकर उस समय रहा करते थे, जब वह लंदन स्‍कूल ऑफ इकॉनामिक्‍स के छात्र थे, इसके अलावा वह टेम्‍स नदी के तट की दायीं ओर श्री बासावेश्‍वर की आवक्ष प्रतिमा का अनावरण भी करेंगे।

जहां तक इस यात्रा के विशेष पहलुओं या मुद्राओं का संबंध है, मेरी समझ से आपको चेकर्स में रूकने का स्‍थान मिलेगा। यह थोड़ा अस्‍वाभाविक है। अन्‍य प्रधानमंत्री वहां गए तो हैं परंतु हाल में नहीं। यूके की संसद में प्रधानमंत्री जी जो भाषण देंगे वह मेरी समझ से पहली बार होगा जब भारत का कोई प्रधानमंत्री वहां बोलेगा। प्रधानमंत्री कैमरन उनके अधिकांश कार्यक्रम के लिए उनके साथ होंगे और वास्‍तव में वह प्रधानमंत्री जी को हाउस ऑफ कामंस के चेंबर में लेकर जाएंगे।

प्रधानमंत्री मैंने पहले इसका उल्‍लेख नहीं किया संसद के निकट महात्‍मा गांधी जी की प्रतिमा, जिसका पिछले साल उद्घाटन हुआ था, पर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। हम आशा करते हैं कि इसके साथ हमारे राष्‍ट्रीय रंगों को सलामी दी जाएगी। और हम एक बहुत महत्‍वपूर्ण सामुदायिक कार्यक्रम की आशा कर रहे हैं। मेरी समझ से, मैंने कार्यक्रम के अधिकांश अन्‍य पहलुओं को शामिल कर लिया है।

जहां तक यूके के साथ द्विपक्षीय रिश्‍तों का संबंध है, यह 2004 से ही अब 11 साल से एक सामरिक संबंध है और यूके तथा भारत एक दूसरे के देशों में वास्‍तव में अग्रणी निवेशक हैं। भारत में यूके निवेश के लिए हमारे आंकड़े 22 बिलियन अमरीकी डालर से अधिक हैं। यह भारत में एफ डी आई के वर्तमान स्‍तर का 9 प्रतिशत है। यूके में भारतीय निवेश का आंकड़ा प्राप्‍त करना काफी कठिन काम है, परंतु मेरी समझ से कारगर अनुमान यह है कि यह पिछले कई वर्षों से प्रतिवर्ष 500 से 600 मिलियन अमरीकी डालर की रेंज में है।

यूके में भारतीय एफ डी आई निवेश की संख्‍या 122 है। वहां नौकरी पैदा करने में हमारा महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। व्‍यापार की दृष्टि से भी यूके हमारा महत्‍वपूर्ण साझेदार है। यूके के साथ हमारे व्‍यापार का मूल्‍य 18 बिलियन अमरीकी डालर के आसपास है। माल में व्‍यापार का मूल्‍य 14 बिलियन अमरीकी डालर के आसपास है जिसमें हमारे निर्यात का मूल्‍य 9 बिलियन अमरीकी डालर से अधिक है। हम लगभग 5 बिलियन अमरीकी डालर मूल्‍य की सामग्री का आयात करते हैं और सेवाओं में हमारा व्‍यापार 4 बिलियन अमरीकी डालर से अधिक है।

जैसा कि मैंने बताया, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य देखरेख और संस्‍कृति में यूके के साथ हमारी साझेदारी बहुत मजबूत है। 800 भारतीय कंपनियां यूके में प्रचालन कर रही हैं। इस प्रकार, यह मोटेतौर पर हमारे संबंध की स्थिति है।

जहां तक होने वाली चर्चाओं का संबंध है, स्‍पष्‍ट रूप से वैश्विक एवं क्षेत्रीय दोनों मुद्दों पर राजनीति एवं सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर ढेर सारी चर्चा होगी जिसमें आतंकवाद एवं अतिवाद की खिलाफत शामिल होगी।

हम आर्थिक भागीदारी को गहन करने का प्रयास करेंगे। इस प्रकार, इस पर भी काफी बल दिया जाएगा, विशेष रूप से इसलिए कि भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था को फिर से जिंदा करने में रूचि बढ़ रही है। मेरी समझ से, वास्‍तव में संदेश यह है कि भारत में व्‍यापार करना सरल होता जा रहा है यह अब गूंज रहा है। इस प्रकार, आप कारोबारी करार देखेंगे जिनमें से कुछ की घोषणा इस यात्रा के दौरान कारोबारी कार्यक्रम में की जाएगी। मेरी समझ से आर्थिक कार्यक्रम पर प्रधानमंत्री जी के भाषण से काफी हद तक रूचि उत्‍पन्‍न होगी।

कई परिणाम दस्‍तावेज होंगे। ज्‍यादातर हम सभी महत्‍वपूर्ण यात्राओं की समाप्ति पर संयुक्‍त वक्‍तव्‍य देते हैं। परंतु इसके अलावा, हम रक्षा और सुरक्षा साझेदारी पर, विकास साझेदार पर एक वक्‍तव्‍य की अपेक्षा कर रहे हैं क्‍योंकि आज भारत और यूके दोनों ही ओडीए प्रदान करते हैं और विदेश में परियोजनाएं करते हैं। इस प्रकार, हम वहां साथ मिलकर काम करने में कुछ लाभ देख रहे हैं। ऊर्जा एवं जलवायु परिवर्तन पर एक वक्‍तव्‍य होगा और संभवत: एक तरह से विस्‍तृत वक्‍तव्‍य, विजन वक्‍तव्‍य होगा जिसमें सभी चीजों का उल्‍लेख होगा।

यह तत्‍वत: वह संदर्भ है जिसमें यह यात्रा हो रही है, जिसे आप मोटेतौर पर वहां से अपेक्षा कर सकते हैं। मुझे कुछ प्रश्‍नों के उत्‍तर देकर प्रसन्‍नता होगी।

प्रश्‍न :महोदय, क्‍या आप टाटा फैक्‍ट्री, जे एल आर फैक्‍ट्री के दौरे के बारे में हमें थोड़ा विस्‍तार से बता सकते हैं?

विदेश सचिव :मैं आपको जो बता सकता हूँ, वह यह है कि, जैसा कि मैंने कहा, यह यूके में किसी भारतीय कंपनी द्वारा हमारा सबसे बड़ा निवेश है। वास्‍तव में, मेरी समझ यह है कि यह यूके में निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा विनिर्माण नियोक्‍ता है। आज जे एल आर फैक्‍ट्री 4,25,000 वाहनों का उत्‍पादन करती है जो वास्‍तव में पूरी दुनिया में बेचे जाते हैं। कृपया नोट करें कि जब पहली बार इसका अधिग्रहण किया गया था तब यह कंपनी घाटे में चल रही थी; इसको मुनाफे में लाने में लगभग 5 साल लग गए और वास्‍तव में इसके राजस्‍व में बहुत अधिक वृद्धि हुई है।

मेरी समझ से कई तरीकों से यह हमारे दोनों देशों के बीच अधिक समकालीन आर्थिक संबंध का एक प्रतीक है। मैं यह कहना चाहूँगा कि इस फैक्‍ट्री के दौरे से यह संदेश मिलेगा कि हम नौकरियां सृजित करते हैं न कि हम नौकरियां लेते हैं। मेरा यह मानना है कि यह विशेष सुविधा जो हम प्राप्‍त करने जा रहे हैं, इसकी कुछ बहुत अनोखी विशेषताएं हैं जिसमें प्‍लांट का बहुत आधुनिक एल्‍युमिनियम बॉडी बिल्डिंग पार्ट शामिल है। मेरी समझ से मोटेतौर पर ये ऐसे घटक थे जो हमारी सोच में आए जब हम इस यात्रा की योजना बना रहे थे।

प्रश्‍न :महोदय, हालांकि आपने इस संबंध में कुछ झलकी प्रदान की है कि इस यात्रा का परिणाम क्‍या होगा, इसके बावजूद, अनेक मुद्दे ऐसे हैं जिनका विस्‍तार से उल्‍लेख नहीं हुआ है। वीजा के मुद्दे पर, वीजा के अधिक शुल्‍क के मुद्दे पर और राजनीतिक दृष्टि से तथा कारोबार के अनुसार भी भारत और यूके बीच मतभेद रहे हैं, यूके की ओर से राजनीतिक रूप से तत्‍परता रही है परंतु भारत बहुत अधिक आगे नहीं गया है। जब इतने लंबे समय बाद प्रधानमंत्री जी जा रहे हैं ...


विदेश सचिव :किस पर तत्‍परता?

प्रश्‍न :यूके भारत के साथ अधिक व्‍यवसाय करने का इच्‍छुक रहा है परंतु भारत की ओर से, मैं नहीं समझता कि बहुत ज्‍यादा प्रगति हुई है। क्‍या आप इस पर थोड़ा विस्‍तार से बता सकते हैं? इस समय यूके से भारत के लिए प्रमुख टेकअवे क्‍या है?


विदेश सचिव :हमें इस यात्रा को इस रूप में लेना चाहिए कि वस्‍तुत: क्‍या कुछ घटित हो सकता है, न कि क्‍या घटित नहीं हुआ है। मेरी समझ से, इनमें से अनेक यात्राओं के बहुत व्‍यावहारिक परिणाम निकले हैं। अब मैं आपको बस यह बताने का प्रयास करूँगा कि लंदन में आप क्‍या देखने की उम्‍मीद कर सकते हैं।

स्‍पष्‍ट रूप से, यदि प्रधानमंत्री जी यूके के व्‍यवसाय एवं वित्‍तीय सर्कल के साथ बातचीत करते हैं, हमारी नीतियों, हमारी आर्थिक नीतियों पर उनके साथ बातचीत करते हैं, स्‍पष्‍टता, प्राधिकार एवं विश्‍वसनीयता के साथ, तो इससे भारत में निवेश आने की संभावना प्रभावित होगी जो सही मायने में भारत में नौकरियां लेकर आएगा। अब यदि आप करारों पर नजर डालें जिन पर हम बातचीत कर रहे हैं, जहां तक हमारी बातचीत पहुंची है तथा उन साझेदारियों पर नजर डालें, जो होने की संभावना है, उनमें से कई कुछ आगे बढ़ चुकी हैं तथा अन्‍य का वास्‍तव में जमीनी स्‍तर पर असर है।

उदाहरण के लिए, यदि आप कौशल की पहल पर नजर डालें, तो वास्‍तव में इसका अभिप्राय यह है कि आप अधिक मूल्‍य की नौ‍करियों का सृजन कर रहे हैं। यदि आप स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़ी पहलों पर नजर डालें, तो आप भारत में स्‍वास्‍थ्‍य देखरेख तक पहुंच और स्‍वास्‍थ्‍य देखरेख की गुणवत्‍ता दोनों में सुधार कर रहे हैं। यदि आप स्‍वच्‍छ प्रौद्योगिकी पर नजर डालें, तो आप गंगा जीर्णोद्धार अभियान से जुड़ सकते हैं। यदि आप ऊर्जा को देख रहे हैं, आज ब्रिटेन स्‍वच्‍छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी है। मेरी समझ से, भारत को परिवर्तित करने के लिए भारत में इन फ्लैगशिप अभियानों पर नजर डालिए, फिर देखिए कि बाहर क्‍या हो रहा है और दोनों देशों के बीच संबंध को देखिए।

राजनीतिक और रक्षा के क्षेत्र में भी, उदाहरण के लिए, मैं तर्क दे सकता हूँ कि आज भी यूके के पास विश्‍व के अनेक भागों में अपनी उपस्थिति के माध्‍यम से ढेर सारा अनुभव, ज्ञान है जो हमारे लिए रोचक है। उदाहरण के लिए, आज भी अफगानिस्‍तान में उनकी एक टुकड़ी है। यदि यूके के साथ आतंकवाद की खिलाफत पर आपका कोई समझौता होता है, तो उससे भारत और सुरक्षित होगा।

प्रत्‍येक यात्रा की कोई न कोई तड़क भड़क होती है, परंतु आपके लिए मेरा यह सुझाव है कि इसके अंत में इस प्रकार की यात्राओं से बहुत ही व्‍यावहारिक परिणाम आएंगे।

प्रश्‍न :विदेश सचिव महोदय, जैसा कि मैं समझता हूँ, संभवत: इसकी योजना बन रही थी, प्रधानमंत्री जी को कैंब्रिज भी जाना था। वह वहां क्‍यों नहीं जा रहे हैं? क्‍या यह विरोध प्रदर्शन की वजह से है?कारण क्‍या है?

विदेश सचिव :किसी भी चरण पर उनके कार्यक्रम में ऐसा कभी नहीं था कि प्रधानमंत्री जी कैंब्रिज जाएंगे। प्रधानमंत्री जी के वहां जाने से पूर्व मैं स्‍वयं दो बार यूके जा चुका हूँ, कार्यक्रम की योजना बनाने के लिए। यह कभी भी योजना में नहीं था और यह कोई मुद्दा नहीं है।

प्रश्‍न :महोदय, प्रधानमंत्री जी अंबेडकर जी के घर भी जा रहे हैं। यह किसलिए और क्‍या कोई राजनीतिक घोषणा भी होगी वहां से?


विदेश सचिव :जैसा मुझे पता है, यह वह मकान है जहां डा. अंबेडकर 1921-22 में उस समय रहा करते थे जब वह लंदन स्‍कूल ऑफ इकॉनामिक्‍स में पढ़ते थे। और फिर, कई सारे लोग जो यह महसूस करते हैं कि उनका सम्‍मान होना चाहिए और यह कि यूके में उनकी उपस्थिति एवं उनकी शिक्षा की दृष्टि से एक संदेश है, तो यह महसूस किया गया कि इस मकान का अधिग्रहण किया जाना चाहिए। इस साल कुछ समय पहले महाराष्‍ट्र सरकार द्वारा इस मकान का अधिग्रहण किया गया है, मुझे कहना चाहिए कि विदेश मंत्रालय की मदद से।

जब इस मकान का अधिग्रहण किया गया था तब वह बहुत अच्‍छी हालत में नहीं था। इस प्रकार, इस मकान में इस समय जीर्णोद्धार का काम चल रहा है। मुझे इस बात का उल्‍लेख जरूर करना चाहिए कि यह बहुत ही छोटा मकान है। मेरी समझ से यदि आप दो कमरों के मकान को देखें, तो वह इस आडोटोरियम का आधा होगा, हो सकता है कि इससे भी कम हो। इस प्रकार, मेरी समझ यह है कि वहां पर डा. अंबेडकर से जुड़ी वस्‍तुओं को प्रदर्शित किया जाएगा। और प्रधानमंत्री जी अपनी इस यात्रा के दौरान उस मकान को राष्‍ट्र को समर्पित करेंगे।

एक तरह से वहां कोई बड़ा कार्यक्रम नहीं है। प्रधानमंत्री जी वहां जाएंगे। यह एक तरह से ऐसी जगह है जहां कुछ भी बड़ा संभव है। वह वास्‍तव में इस मकान के अंदर जाएंगे, वहां ये कमरे हैं, वह बिल्डिंग को समर्पित करेंगे और वास्‍तव में बस यही कार्यक्रम है।

प्रश्‍न :विदेश सचिव महोदय, हाल ही में चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिटेन के दौरे पर गए थे, जहां हर दृष्टि से उनका राजकीय सम्‍मान हुआ। मैं जानता हूँ कि आपका काम तुलना करना नहीं है परंतु किस रूप में प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा आप्टिक्‍स और परिणाम की दृष्टि से चीन के राष्‍ट्रपति की यात्रा से आगे निकल जाएगी? और अधिक विशिष्‍ट रूप में, असैन्‍य परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में हम क्‍या उम्‍मीद कर सकते हैं? क्‍या कोई प्रगति होने की उम्‍मीद है?

विदेश सचिव :सबसे पहली बात, मैं तुलना के व्‍यवसाय में नहीं हूँ। अब जब मैं इस व्‍यवसाय में नहीं हूँ, तो मैं यह भी कह सकता हूँ कि वास्‍तव में सेब और संतरे में तुलना करना व्‍यावहारिक नहीं है। मेरी समझ से यूके के साथ हमारा एक भिन्‍न इतिहास है। जैसा कि मैंने बिल्‍कुल शुरू में ही कहा था, हमारे बीच एक रिश्‍ता है। यह मूल्‍यों एवं इतिहास तथा संस्‍थाओं एवं विचारों का रिश्‍ता है। हमारा एक बड़ा समुदाय यूके में रहता है। उदाहरण के लिए, मैं आशा करता हूँ कि विम्‍बले के लिए काफी लोग आएंगे। मुझे यकीन नहीं है कि वहां पर पिछली यात्रा की तरह ही कुछ होगा, जिसका आप उल्‍लेख कर रहे हैं, जिसकी मैं इससे तुलना नहीं कर रहा हूँ।

इस प्रकार, मेरी समझ से हमारा संबंध एक अलग संबंध है। मेरी समझ से यूके भी इसे स्‍वीकार करता है कि यह भिन्‍न ऐतिहासिक आधार के साथ, भिन्‍न संभावनाओं के साथ, रिश्‍तों के एक भिन्‍न स्‍तर के साथ एक भिन्‍न संबंध है। और जहां तक इस बात का संबंध है कि यह किस तरह काम करेगा, मेरा यह मानना है कि कृपया प्रतीक्षा कीजिए और देखिए कि क्‍या होता है। तस्‍वीरें आपको हर चीज बताएंगी जो आप जानना चाहेंगे।

मेरी समझ से असैन्‍य परमाणु ऊर्जा पर यूके के साथ कुछ न कुछ होगा परंतु यहां भी हमारा दृष्टिकोण बहुत अलग है। इस प्रकार, मैं उससे तुलना नहीं करूँगा। धन्‍यवाद।


सरकारी प्रवक्‍ता
: विदेश सचिव महोदय को जाना है, हमें यहीं पर इस वार्ता का खत्‍म करना होगा।

(समाप्‍त)



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