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यूके की अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा ब्रिटिश संसद में भाषण (12 नवंबर, 2015)

नवम्बर 12, 2015

लार्ड स्‍पीकर,
मि. स्‍पीकर,
मि. प्रधानमंत्री,


लंदन में आकर मुझे बड़ी प्रसन्‍नता हो रही है। इस भूमंडलीकृत विश्‍व में भी लंदन आज भी हमारे समय के लिए मानक है।

इस शहर ने पूरी दुनिया की विविधता को आत्‍मसात किया है और सबसे सुंदर मानव उपलब्धियों का प्रतिनिधित्‍व करता है।

और ब्रिटिश संसद में बोलकर मैं सही मायने में सम्‍मानित महसूस कर रहा हूं।

स्‍पीकर महोदय, हमारे लिए दरवाजे खोलने के लिए आपका धन्‍यवाद, यहां रॉयल कोर्ट के इस भव्‍य परिवेश में।

मैं जानता हूं कि इस समय संसद का सत्र नहीं चल रहा है।

प्रधानमंत्री कैमरन राहत महसूस करते हुए दिख रहे हैं।

परंतु प्रधानमंत्री महोदय, मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि आप एक चुनावी स्‍लोगन के लिए मेरे ऋणी हैं।

मैं जानता हूं कि आज शाम चेकर्स में आप मेरी मेजबानी कर रहे हैं।

परंतु मैं यह भी जानता हूं कि यदि मैं सदन के दोनों पक्षों के प्रति निष्‍पक्ष रहता हूं तो उसे भी आप समझेंगे।

विशेष रूप से इसलिए कि भारतीय मूल के ब्रिटिश सांसद सत्‍तापक्ष एवं विरोधी पक्ष की बेंचों के बीच समान रूप से बंटे हैं।

अत: मैं लेबर पार्टी को भी अपनी शुभकामनाएं देता हूं।

वस्‍तुत: चूंकि यह चुनाव के बाद अभी भी शुरुआती दिन हैं, मैं सदन के सदस्‍यों को अपनी हार्दिक बंधाई देता हूं।

और आज यहां मौजूद ब्रिटेन के प्रख्‍यात नेताओं तथा भारत के महान मित्रों का अभिवादन करता हूं।

भारत का आधुनिक इतिहास इस भवन से बहुत जुड़ा है।

हमारे संबंध में बहुत सारा इतिहास दिखाई दे रहा है।

ऐसे लोग भी हैं जो इतिहास के ऋणों एवं बकायों पर बलपूर्वक अपनी बात रखी है।

मैं बस यह कहूंगा कि भारत के अनेक स्‍वतंत्रता सेनानियों ने ब्रिटेन की संस्‍थाओं में अपनी आवाज प्राप्‍त की।

और आधुनिक भारत के अनेक निर्माता, जिसमें जवाहरलाल नेहरू से लेकर डा. मनमोहन सिंह तक मेरे अनेक विशिष्‍ट पूर्ववर्ती शामिल हैं,उनके दरवाजों से गुजरे हैं।

ऐसी अनेक चीजें हैं जिन पर कुछ भी कहना कठिन है कि वे ब्रिटिश हैं या भारतीय :

जगुआर या स्‍काटलैंड यार्ड, उदाहरण के लिए।

ब्रुक बांड चाय या मेरे स्‍व. मित्र लार्ड गुलाम नन की कढ़ी।

और हमारे बीच इस बात पर जोरदार बहस होती है कि क्‍या लार्ड की पिच पर स्विंग असमान होगा या इडेन गार्डन पर विकेट बहुत जल्‍दी क्रैक करेगी।

और लंदन से हम भांगड़ा रैप को उसी तरह पसंद करते हैं जिस तरह आप भारत से अंग्रेजी के उपन्‍यास पसंद करते हैं।

इस कार्यक्रम के लिए आते समय प्रधानमंत्री कैमरन तथा मैंने संसद के बाहर महात्‍मा गांधी जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुझे एक प्रश्‍न याद आ गया जो मुझसे एक विदेशी दौरे पर पूछा गया था।

गांधी जी की प्रतिमा ब्रिटिश संसद के बाहर क्‍यों है?

इस प्रश्‍न पर मेरा उत्‍तर है :

ब्रिटेन के लोग इतने चतुर हैं कि उन्‍होंने उनकी महानता को पहचान लिया है;
भारतीय इतने उदार हैं कि वे उनके मूल्‍यों को मानते हैं;
हम दोनों ही बहुत भाग्‍यशाली हैं कि उनके जीवन एवं मिशन से हम प्रभावित हुए हैं;

और हम दोनों ही अपने संबंध के भविष्‍य को आगे बढ़ाने के लिए आपस में जुड़े अपने इतिहास की अच्‍छाइयों का उपयोग करने में बहुत स्‍मार्ट हैं।

इस प्रकार मैं यहां आज एक अतिथि शासनाध्‍यक्ष के रूप में नहीं खड़ा हूं, जिसे लोकतंत्र के इस मंदिर में बोलने का सम्‍मान दिया गया है।

मैं यहां एक साथी संस्‍था तथा साझी परंपरा के प्रतिनिधि के रूप में हूं।

और कल प्रधानमंत्री और हम विंब्‍ले में होंगे।

भारत में भी प्रत्‍येक युवा फुटबाल खिलाड़ी बेकहम जैसा बनना चाहता है।

विंब्‍ले जीवन के डेढ़ मिलियन धागों का जश्‍न होगा जो हमें बांधता है; डेढ़ मिलियन लोग - भारत में अपनी विरासत पर जिनको गर्व है;ब्रिटेन में घर पर जिनको गर्व है।

यह उन सभी के लिए आनंद की अभिव्‍यक्ति होगा जो हमारे बीच साझा है : मूल्‍य, संस्‍थाएं, राजनीतिक प्रणाली, खेल, संस्‍कृति एवं इतिहास।

और यह हमारी जीवंत साझेदारियों तथा एक साझे भविष्‍य की स्‍वीकृति होगी।

यूनाइटेड किंगडम सिंगापुर और मारीशस के बाद भारत में तीसरा सबसे बड़ा निवेशक है।

भारत यूनाइटेड किंगडम में विदेशी प्रत्‍यक्ष निवेश की परियोजनाओं का तीसरा सबसे बड़ा स्रोत है।

भारतीय सम्मिलित रूप में शेष यूरोपीय संघ की तुलना में ब्रिटेन में अधिक निवेश करते हैं।

ऐसा इसलिए नहीं है कि वे दुभाषिए की लागत बचाना चाहते हैं, अपितु इसलिए है कि उनको ऐसा माहौल मिलता है जो उनके लिए परिचित एवं सुखदायी है।

इसकी वजह से एक भारतीय आयकन टाटा एक ब्रिटिश आयकन को चलाने में सफल हुआ है और आपके देश का निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा नियोक्‍ता बन गया है।

यूके भारत के छात्रों के लिए मनपसंद गंतव्‍य बना हुआ है। और मुझे इस बात की प्रसन्‍नता है कि भारत की एक कंपनी सूचना प्रौद्योगिकी में उनको कौशल प्रदान करने के लिए ब्रिटेन के एक हजार छात्रों को भारत ला रही है।

हम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के सर्वाधिक उन्‍नत क्षेत्रों में साथ मिलकर काम कर रहे हैं। हम खाद्य एवं स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा की स्‍थायी मानवीय समस्‍याओं का समाधान ढूंढ रहे हैं तथा जलवायु परिवर्तन जैसी नई चुनौतियों के उत्‍तरों की तलाश कर रहे हैं।

हमारी सुरक्षा एजेंसियां साथ मिलकर काम करती हैं ताकि हमारे बच्‍चे सुरक्षित घर वापस लौटें और हमारा आपस में अधिकाधिक जुड़ा जीवन साइबर स्‍पेस पर खतरों का शिकार न हो।

हमारे सशस्‍त्र बल एक दूसरे के साथ अभ्‍यास करते हैं ताकि वे उन मूल्‍यों को अधिक मजबूती से समझ सकें जिनका हम प्रतिनिधित्‍व करते हैं।

अकेले इस साल हमने साथ मिलकर तीन अभ्‍यास किए हैं।

और अंतर्राष्‍ट्रीय क्षेत्र में आपकी मदद से भारत के लिए वैश्विक संस्‍थाओं एवं व्‍यवस्‍थाओं में अपना उचित स्‍थान प्राप्‍त करना अधिक संभव हुआ है। और इससे हम दोनों को अपने साझे हितों को आगे बढ़ाने में मदद मिली है।

अध्‍यक्ष महोदय,

जैसा कि हमारी साझेदारी मजबूत है, हमारे जैसे संबंध के लिए हमें अपनी महत्‍वाकांक्षाएं ऊंची निर्धारित करनी चाहिए।

हम दो लोकतंत्र हैं; दो मजबूत अर्थव्‍यवस्‍थाएं हैं और दो नवाचारी समाज हैं।

हम एक दूसरे से परिचित हैं तथा हमारे बीच साझेदारी का एक लंबा अनुभव है।

ब्रिटेन का पुनरुत्‍थान आकर्षक है। वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था के भविष्‍य पर इसका प्रभाव मजबूत बना हुआ है।

और अध्‍यक्ष महोदय भारत पूरी दुनिया के लिए आशा एवं अवसर की एक नई किरण है।

यह केवल अंतर्राष्‍ट्रीय संस्‍थाओं का सार्वभौमिक निर्णय नहीं है।

यह केवल संख्‍या का गणित नहीं है : 1.25 बिलियन आबादी वाला देश जिसकी 800 मिलियन आबादी की आयु 35 साल से कम है।

यह आशावाद हमारे युवाओं की ऊर्जा एवं कड़ी मेहनत, परिवर्तन के लिए उत्‍सुकता तथा उसे प्राप्‍त करने में आत्‍मविश्‍वास से आया है।

यह हमारे कानूनों, नीतियों, संस्‍थाओं एवं परंपराओं में सुधार के लिए निर्भीक एवं लगातार उपायों की देन है।

हम अपने विनिर्माण क्षेत्र के इंजन को चिंगारी दे रहे हैं; अपने खेतों को अधिक उत्‍पादक एवं अधिक लोचपूर्ण बना रहे हैं; अपनी सेवाओं को अधिक नवाचारी एवं दक्ष बना रहे हैं; अपने युवाओं के लिए वैश्विक कौशलों का निर्माण करने पर प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ रहे हैं;स्‍टार्टअप उद्योगों में क्रांति ला रहे हैं और अगली पीढ़ी की अवसंरचना का निर्माण कर रहे हैं जिसका पृथ्‍वी पर फुटप्रिंट हल्‍का होगा।

हम विकास के जिस रास्‍ते पर चल रहे हैं केवल उससे ही हमारी गति नहीं आई है, अपितु उस बदलाव से आई है जो हम हर नागरिक के लिए जीवन की गुणवत्‍ता में लाना चाहते हैं।

हम जिस भारत का सपना देखते हैं उसका काफी कुछ अभी भी हमसे दूर है :

सभी के लिए आवास, बिजली, पानी एवं स्‍वच्‍छता;
प्रत्‍येक नागरिक के लिए बैंक खाता एवं बीमा;
आपस में जुड़े तथा समृद्ध गांव; और स्‍मार्ट एवं संपोषणीय शहर।

ये लक्ष्‍य ऐसे हैं जिनके लिए तिथियां निश्चित की गई हैं, न कि ये आशा की किरण मात्र हैं।

और गांधी जी से प्रेरित होकर हमारे साथ परिवर्तन की शुरुआत हो गई है - जिस तरह से सरकार काम करती है।

शासन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही है।

निर्णय तेजी एवं निर्भीकता से लिए जा रहे हैं।

संघवाद अब केन्‍द्र - राज्‍य संबंधों में कोई फाल्‍ट लाइन नहीं है, अपितु टीम इंडिया की नई साझेदारी की यह परिभाषा बन गया है।

आज नागरिकों पर आसानी से भरोसा किया जाता है, न कि उन पर प्रमाण एवं प्रक्रिया का बोझ है। व्‍यवसाय ऐसा माहौल प्राप्‍त कर रहे हैं जो खुला है तथा जिसमें काम करना सरल है।

सेलफोन से जुड़े राष्‍ट्र में डिजिटल इंडिया सरकार एवं लोगों के बीच संबंध को परिवर्तित कर रहा है।

अत: अध्‍यक्ष महोदय, कवि टी एस इलियट से माफी मांगते हुए हम आदर्श और सच्‍चाई के बीच किसी छाया को नहीं आने देंगे।

यदि आप भारत आएंगे तो आप परिवर्तन की बयार को महसूस करेंगे।

यह पूरी दुनिया से निवेशों के भारी मात्रा में प्रवाह में प्रतिबिंबित होता है;
हमारी अर्थव्‍यवस्‍था की स्थिरता में वृद्धि में प्रतिबिंबित होता है;
उम्‍मीद एवं समावेशन के 190 मिलियन नए बैंक खातों में प्रतिबिंबित होता है;
लगभग 7.5 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से हमारी विकास दर में प्रतिबिंबित होता है; और
तेजी से उत्‍थान में प्रतिबिंबित होता है;
व्‍यवसाय करने की सरलता पर हमारी रैंकिंग में।

और सबका साथ सबका विकास हमारे राष्‍ट्र का विजन है जिससे हर नागरिक जुड़ा है, भागीदारी करता है और समृद्ध होता है।

यह केवल आर्थिक समावेशन के लिए आह्वाहन नहीं है।

यह हमारी विविधता का भी एक जश्‍न है; सामाजिक सौहार्द के लिए ललक और व्‍यक्तिगत आजादियों एवं अधिकारों के लिए प्रतिबद्धता है।

यह हमारी संस्‍कृति की कालातीत प्रतिध्‍वनि है; यह हमारे संविधान का आधार है और यह हमारे भविष्‍य का आधार होगा।

अध्‍यक्ष महोदय,

दोस्‍तो एवं सदस्‍यो, भारत की प्रगति मानवता के छठवें भाग की नियति है।

और इसका अभिप्राय यह भी होगा कि विश्‍व अपनी समृद्धि को लेकर अधिक विश्‍वस्‍त है और अपने भविष्‍य को लेकर अधिक सुरक्षित है।

यह भी स्‍वाभाविक एवं अपरिहार्य है कि हमारे आर्थिक संबंधों में असीम विकास होगा।

यदि हम अपनी अनोखी ताकतों तथा भारत में उपलब्‍ध अवसरों के आकार एवं आयाम को संयोजित करें तो हम अपराजेय साझेदारियों का निर्माण करेंगे।

हम अधिक निवेश एवं व्‍यापार देखेंगे। हम सेवा क्षेत्र में नए दरवाजे खोलेंगे।

हम रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी में यहां और भारत में अधिक साझेदारी करेंगे। हम नवीकरणीय ऊर्जा तथा परमाणु ऊर्जा पर साथ मिलकर काम करेंगे।

हम विज्ञान के रहस्‍यों का पता लगाएंगे तथा प्रौद्योगिकी एवं नवाचार की शक्ति का उपयोग करेंगे।

हम डिजिटल विश्‍व के अवसरों को साकार करेंगे।

हमारे युवा एक दूसरे से तथा एक दूसरे के साथ अधिक सीखेंगे।

परंतु जिस तरह यह संबंध समृद्ध है जिसमें इतनी सारी संभावनाएं हैं, उसे केवल हमारी परस्‍पर समृद्धि की दृष्टि से मापा नहीं जा सकता है।

अध्‍यक्ष महोदय,

हमारा समय ऐसा है जब पूरी दुनिया में अनेक परिवर्तन हो रहे हैं। हमारे समक्ष जो भविष्‍य खुल रहा है उसे हम अभी तक पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं।

जैसा कि पिछले युगों में था, यह उस विश्‍व से भिन्‍न होगा जिसे हम जानते हैं।

इस प्रकार हमारे अनिश्चित युग के अनदेखे रास्‍तों में, हमें इस विश्‍व के लिए ऐसी दिशा में मजबूती से कदम रखने में मदद करने के लिए साथ मिलकर काम करना चाहिए जो उन आदर्शों का दर्पण हो जिन पर हम चलते हैं।

क्‍योंकि इसमें न केवल हमारे दोनों देशों की सफलता निहित है अपितु उस विश्‍व का वायदा भी है जिसकी हम कामना करते हैं।

हमारे पास अपनी साझेदारी संयुक्‍त राष्‍ट्र की सदस्‍यता, राष्‍ट्रमंडल और जी-20 की सदस्‍यता की ताकत है।

हम ऐसे विश्‍व में रह रहे हैं जहां दूर के किसी क्षेत्र में अस्थिरता जल्‍दी से हमारी दहलीजों तक पहुंच जाती है। हम इसे कट्टरता और शरणार्थियों की चुनौतियों में देखते हैं।

फाल्‍ट लाइनें अब राष्‍ट्रों की सीमाओं से आगे निकलकर हमारे समाजों के जाल और हमारे शहरों की गलियों में पहुंच रही हैं।

और आतंकवाद एवं अतिवाद एक ऐसी वैश्विक ताकत है जो अपने बदलते नामों, गुटों, भूभागों एवं लक्ष्‍यों की तुलना में अधिक बड़ी है।

हमारे समय की इस चुनौती से लड़ने के लिए विश्‍व को एक आवाज में बोलना चाहिए तथा एकजुट होकर काम करना चाहिए।

हमें संयुक्‍त राष्‍ट्र में अविलंब अंतर्राष्‍ट्रीय आतंकवाद पर व्‍यापक अभिसमय को अपनाना चाहिए।

आतंकी गुटों के बीच कोई अंतर या राष्‍ट्रों के बीच कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।

उन सभी को अलग थलग करने का संकल्‍प होना चाहिए जो आतंकियों को पनाह देते हैं तथा ऐसे राष्‍ट्रों के साथ खड़ा होने की तत्‍परता होनी चाहिए जो ईमानदारी से उनसे लड़ते हैं।

और हमें ऐसे देशों में अतिवाद के विरुद्ध सामाजिक आंदोलन चलाना चाहिए जहां यह सबसे अधिक प्रचलित है और धर्म एवं आतंकवाद के बीच संबंध को काटने का हर संभव प्रयास होना चाहिए।

हमारी समृद्धि एवं महासागरों का बहुत महत्‍व है।

अब हमें अपने साइबर एवं आउटर स्‍पेस को भी सुरक्षित रखना होगा।

हमारे हित अनेक क्षेत्रों में संरेखित हैं।

स्थिर, खुशहाल तथा एकीकृत दक्षिण एशिया में हमारा साझा हित है जो समृद्धि के लिए एक साझे मार्च में साथ मिलकर चल रहा है।

हम ऐसा अफगानिस्‍तान चाहते हैं जो अफगानिस्‍तान के महान लोगों के सपनों के अनुसार गढ़ा गया हो, न कि अन्‍यों के अतर्कसंगत भय तथा अकूत महत्‍वाकांक्षाओं द्वारा।

वैश्विक वाणिज्‍य एवं समृद्धि के लिए शांतिपूर्ण, स्थिर हिंदमहासागर क्षेत्र जरूरी है। और एशिया - प्रशांत क्षेत्र के भविष्‍य का हम सभी पर प्रचुर प्रभाव होगा।

हम दोनों के पश्चिम एशिया तथा खाड़ी क्षेत्र में विशाल हित हैं।

और अफ्रीका में जहां अनेक चुनौतियों के बीच हम साहस, विवेक, नेतृत्‍व और उद्यम के अनेक आशानुकूल संकेत देख रहे हैं। भारत ने अभी अभी एक अफ्रीका शिखर बैठक का आयोजन किया है जिसमें सभी 54 देशों तथा 42 नेताओं ने भाग लिया।

हमें अपने ग्रह के संपोषणीय भविष्‍य के लिए एक न्‍यून कार्बन युग शुरू करने में भी सहयोग करना चाहिए।

यह एक वैश्विक जिम्‍मेदारी है जिसे हमें इस माह के उत्‍तरार्द्ध में पेरिस में जरूर ग्रहण करना चाहिए।

विश्‍व ने सुधारात्‍मक कदम का एक सुंदर संतुलन तैयार किया है - साझी किंतु विभेदीकृत जिम्‍मेदारी तथा संबंधित क्षमता।

जिनके पास साधन और तकनीकी ज्ञान है उनको स्‍वच्‍छ ऊर्जा एवं स्‍वस्‍थ पर्यावरण के लिए मानव जाति की सार्वभौमिक आकांक्षा को पूरा करने में जरूर मदद करना चाहिए।

और जब हम संयम की बात करते हैं तो हमें केवल जीवाश्‍म ईंधन पर रोक लगाने के बारे में ही नहीं सोचना चाहिए अपितु हमें अपनी जीवनशैली को सरल बनाने के बारे में भी सोचना चाहिए।

हम सभी को अपनी भूमिका जरूर निभानी चाहिए। भारत के लिए 2022 तक 175 गीगावाट की अतिरिक्‍त नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता तथा2030 तक उत्‍सर्जन में 33 से 35 प्रतिशत की कटौती एक व्‍यापक रणनीति के दो महत्‍वपूर्ण कदम मात्र हैं।

मैंने सर्वाधिक अनजुड़े गांवों में भी सौर ऊर्जा को हमारे जीवन का अभिन्‍न अंग बनाने के लिए सी ओपी 21 बैठक के दौरान एक अंतर्राष्‍ट्रीय सौर गठबंधन का भी प्रस्‍ताव किया है।

ब्रिटेन में इस बात की संभावना अधिक होती है कि आप बारिश के बजाय धूप से बचने के लिए छाते का प्रयोग करते हैं। परंतु मेरी टीम ने अधिक सटीक ढंग से सौर गठबंधन की सदस्‍यता परिभाषित की है : आपको उष्‍णकटिबंध के अंदर स्थित होना होगा।

और हमें इस बात की प्रसन्‍नता है कि यूनाइटेड किंगडम इस मापदंड पर खरा है।

इसलिए हम इस प्रयास में एक बहुमूल्‍य साझेदार के रूप में नवाचारी ब्रिटेन को शामिल करने की आशा रखते हैं।

प्रधानमंत्री कैमरन तथा मैं वस्‍तुत: इस बात से बहुत प्रसन्‍न हूं कि संवहनीय एवं सुगम्‍य स्‍वच्‍छ ऊर्जा पर सहयोग हमारे संबंधों का एक महत्‍वपूर्ण स्‍तंभ है।
अध्‍यक्ष महोदय,

यह हमारे दो महान देशों के लिए एक विशाल क्षण है।

अत: हमें अपने अवसरों का उपयोग जरूर करना चाहिए, सहयोग की बाधाओं को दूर करना चाहिए, हमारे संबंधों में पूर्ण विश्‍वास पैदा करना चाहिए तथा एक दूसरे के हितों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए।

ऐसा करने के लिए हम अपनी सामरिक साझेदारी को परिवर्तित करेंगे और हम प्रयास करेंगे कि इस संबंध को अग्रणी वैश्विक साझेदारियों में से एक के रूप में गिना जाए।

ब्रिटेन के सर्वाधिक प्रसिद्ध बार्ड के आह्वान के अनुसार हमें पुरुषों के कार्यों में वृद्धि का उपयोग करना चाहिए, विश्‍व को काम करने की प्रेरणा मिली है।

और हमें ऐसा जरूर करना चाहिए।

परंतु अपनी साझेदारी के प्रयोजन को परिभाषित करने में हमें भारत के एक महान सपूत की ओर देखना चाहिए, जिसके लंदन में मकान को मैं शनिवार को सामाजिक न्‍याय के लिए समर्पित करूंगा।

डा. बी आर अंबेडकर जिनकी अब हम 125वीं वर्षगांठ मना रहे हैं, न केवल भारत के संविधान तथा हमारे संसदीय लोकतंत्र के वास्‍तुकार थे।

उन्‍होंने कमजोर, दलित तथा बहिष्‍कृत लोगों के उत्‍थान का भी समर्थन किया।

और उन्‍होंने मानवता की सेवा में हमें एक ऊंचे उद्देश्‍य के लिए ऊपर उठाया;
भविष्‍य में न्‍याय, समानता, अवसर का निर्माण करने के लिए;
और सभी इंसानों की अस्मिता के लिए;
और लोगों में शांति के लिए।

इसी प्रयोजन के लिए आज भारत और यूनाइटेड किंगडम ने अपने आपको समर्पित किया है।

धन्यवाद।


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