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यूके की अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा व्‍यवसाय बैठक में भाषण (12 नवंबर, 2015)

नवम्बर 12, 2015

महामहिम श्री डेविड कैमरन,
लंदन के लार्ड मेयर माननीय श्री एलन एरो,
देवियो एवं सज्‍जनो,


आज शाम आपको ज्‍वाइन करना मेरे लिए बड़ी प्रसन्‍नता की बात है। मुझे यह स्‍वीकार करना चाहिए कि इस महान देश में आने में मुझे कुछ विलंब हुआ है। परंतु खुशखबरी यह है कि मैं और महामहिम कैमरन निरंतर संपर्क में रहे हैं। विभिन्‍न स्‍थानों पर अक्‍सर हम मिलते रहे हैं तथा विचारों का आदान प्रदान करते रहे हैं।

मुझे न्यूयार्क में हमारी पिछली मुलाकात याद है जब उन्‍होंने बिल्‍कुल ठीक कहा था कि भारत और यूके को आर्थिक मोर्चे पर निकटता से काम करना चाहिए।

दोस्‍तो,

भारत और यूके कई शताब्दियों से एक दूसरे को बहुत अच्‍छी तरह जानते हैं। हमारी शासन प्रणाली भी ज्‍यादातर वेस्‍ट मिनिस्‍टर मॉडल पर आधारित है।
  • हमारी संस्‍थाएं एक दूसरे के साथ अंत:क्रिया करना जानती हैं;
  • हमारे लोग एक दूसरे के साथ काम करना जानते हैं;
  • हमारे व्‍यवसाय एक दूसरे के साथ विकास करना जानते हैं;
इसी वजह से यूके भारत के प्रमुख व्‍यापार साझेदारों में शामिल है।

यूके भारत में तीसरा सबसे बड़ा निवेशक भी है।

और मुझे यह जरूर जोड़ना चाहिए - यह एकतरफा नहीं है।

यूके के लिए भारत एफ डी आई के तीसरे सबसे बड़े स्रोत के रूप में उभरा है।

तथापि अपने आर्थिक संबंधों को और सुदृढ़ करने के लिए भारत और यूके के लिए महत्‍वपूर्ण संभावनाएं हैं।

हमें परस्‍पर सहमति का कारगर ढंग से उपयोग करना होगा जो एक दूसरे के लिए मौजूद है।

हम विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों का विकास करने के लिए उत्‍सुक हैं जिनमें यूके की स्थिति मजबूत है।

हम इस भागीदारी के लिए अनुकूल स्थितियों का सृजन करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

यहां मजबूत भारतीय समुदाय यूके के साथ बेहतर और बेहतर एकीकरण के लिए हमें निरंतर ढकेलता रहता है।

दोस्‍तो, जब से मेरी सरकार सत्‍ता में आई है तब से हम अर्थव्‍यवस्‍था को पटरी पर लाने के लिए अथक रूप से काम कर रहे हैं।

विशेष रूप से हमने भारत को व्‍यवसाय करने के लिए सरल एवं साधारण स्‍थान बनाने के लिए बहुत आक्रामकता के साथ काम किया है।

हमारा यह मानना है कि भारत में आम नागरिकों के जीवन में सुधार के लिए यह आवश्‍यक है।

हमारी कड़ी मेहनत के परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं।

हाल ही में आई एम एफ अध्‍यक्ष ने कहा कि आज भारत वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था में कुछ ब्राइट स्‍पॉट में शामिल है।

पिछले साल हमारी विकास दर 7.3 प्रतिशत थी।

अभी हाल ही में विश्‍व बैंक ने अनुमान व्‍यक्‍त किया है कि इस राजकोषीय वर्ष के लिए हमारी विकास दर 7.5 प्रतिशत होगी तथा आने वाले वर्षों में यह और भी बेहतर होगी।

इस प्रकार हम भाग्‍यशाली हैं कि हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

कारोबार करने की सरलता पर विश्‍व बैंक की 2016 की रिपोर्ट में भारत ने एक बार में 12 रैंक की छलांग लगाई है।

किसी अन्‍य देश ने इतना बड़ा सुधार नहीं किया है।

हम राज्‍य, जिला एवं शहर स्‍तर पर भी इन सुधारों को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सहयोगात्‍मक एवं प्रतिस्‍पर्धी संघवाद की भावना के साथ इस कार्य में राज्‍य संघीय सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं।

हाल ही में विश्‍व बैंक समूह की मदद से व्‍यवसाय करने की सरलता पर अपनी राज्‍य सरकारों की रैंकिंग निर्धारित की थी। इससे व्‍यवसाय अनुकूल इको सिस्‍टम सुनिश्चित करने के लिए राज्‍य सरकारों के बीच स्‍वस्‍थ प्रतियोगिता उत्‍पन्‍न हुई है। पहली बार व्‍यवसाय करने की सरलता पर किसी उप राष्‍ट्रीय अभ्‍यास में विश्‍व बैंक ने अपने आपको शामिल किया है।

दोस्‍तो,

आज भारत में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक युवाओं को रचनात्‍मक ढंग से रोजगार प्रदान करना है।

इस चुनौती को पूरा करने के लिए हमें विनिर्माण को जोर से धक्‍का देने की जरूरत है, जो कई दशकों से जी डी पी के 16 प्रतिशत के आसपास अटका हुआ है।

यह शेयर अल्‍प एवं मध्‍यम अवधि में 25 प्रतिशत के आसपास जरूर पहुंचना चाहिए।

इसी को ध्‍यान में रखकर, हमने ''मेक इन इंडिया'' पहल शुरू की है।

हम भारत को वैश्विक विनिर्माण केन्‍द्र बनाने के लिए सभी मोर्चों पर काम कर रहे हैं।

इस उद्देश्‍य को प्राप्‍त करने के लिए, कारोबार करने में सरलता के लिए जोशपूर्ण अभ्‍यास के अलावा हमने उद्योग एवं अवसंरचना के लिए फास्‍ट ट्रैक अनुमोदन एवं क्‍लीयरेंस की व्‍यवस्‍था की है।

आज हमारी रणनीति का हाल मार्क नीति आधारित शासन है।

पारदर्शी नीलामी तथा प्रमुख प्राकृतिक संसाधनों जैसे कि कोयला, स्‍पक्‍ट्रम, लौह अयस्‍क का आवंटन जैसे उपायों से निवेशकों के लिए समान अवसरों का सृजन हुआ है।

विदेशी निवेशों का प्रवाह बढ़ाने के लिए हमने एफ डी आई व्‍यवस्‍था को उदार बनाया है तथा रेलवे में 100 प्रतिशत एफ डी आई की अनुमति प्रदान की है।

हमने रक्षा एवं बीमा क्षेत्र में एफ डी आई की सीमा बढ़ाकर 49 प्रतिशत कर दी है।

हम ऐसी नीतियों में आखिरी मील के प्रचालनात्‍मक मुद्दों के प्रति भी सजग हैं।

इसी बात को ध्‍यान में रखकर इस सप्‍ताह के शुरू में हमने 15 क्षेत्रों में एफ डी आई व्‍यवस्‍था में महत्‍वपूर्ण परिवर्तन किए हैं।

उदाहरण के तौर पर : अब निर्माण क्षेत्र के लिए एफ डी आई नीति में कोई प्रतिबंध नहीं है।

इसी तरह वृक्षारोपण, ई-कामर्स तथा सिंगल ब्रांड रिटेल जैसे क्षेत्रों में बहुत मौलिक उदारीकरण किया गया है। इसके अलावा हमने अब अधिकांश एफ डी आई प्रस्‍तावों को आटोमेटिक रूट के तहत ला दिया है।

सुधारों के इस चक्र के आधार पर मैं कह सकता हूं कि भारत विदेशी निवेशों के लिए सबसे खुले देशों में से एक है।

अवसंरचना भारत के लिए एक अन्‍य बड़ी चुनौती है।

हम भविष्‍योन्‍मुख भौतिक एवं सामाजिक अवसंरचना का निर्माण करने के इच्‍छुक हैं।

अपने वित्‍तीय प्रबंधन में अपने ऊपर लगाए गए अनुशासन के माध्‍यम से हम अवसंरचना क्षेत्र के लिए अधिक संसाधनों का आबंटन करने में समर्थ हुए हैं।

इसके अलावा, हम एक भारतीय निवेश अवसंरचना निधि का गठन कर रहे हैं।

हमने अपने स्‍वयं के संसाधनों से इस निधि में 3.5 बिलियन अमरीकी डालर जमा करने का लक्ष्‍य रखा है।

हम परिसंपत्ति के प्रबंधन के लिए पेशेवरों की एक टीम गठित कर रहे हैं।

हम रेल, रोड तथा अन्‍य क्षेत्रों में परियोजनाओं के लिए कर मुक्‍त अवसंरचना बांड का तंत्र भी लेकर आए हैं।

हम अपने संबंध को गहन करने तथा भारत की अवसंरचना में उनकी रुचि का उपयोग करने के लिए ब्रिटिश सरकार, उद्योग तथा वित्‍तीय बाजारों के साथ मिलकर काम करेंगे।

बहुत जल्‍दी ये बांड हमारे वित्‍तीय बाजारों के बीच भागीदारी के लिए मजबूत लिखत बन जाएंगे।

दोस्‍तो,

विनियमन एवं कराधान से जुड़े ऐसे अनेक मुद्दे थे जो विदेशी निवेशकों की भावनाओं को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर रहे थे।

हमने काफी समय से लंबित अनेक चिंताओं को दूर करने के लिए बहुत निर्णायक कदम उठाए हैं।

उनमें से कुछ का मैं आपको उदाहरण दे रहा हूँ :
  •  हमने सुरक्षा एवं पर्यावरणीय स्‍वीकृति सहित विनियामक स्‍वीकृतियों की गति तेज की है;
  •  हमने रक्षा औद्योगिक लाइसेंस की वैधता अवधि तीन साल से बढ़ाकर 18 साल तक कर दी है;
  •  हमने लगभग 60 प्रतिशत रक्षा सामग्री लाइसेंस प्रक्रिया से बाहर से प्राप्‍त की है तथा अनेक प्रतिबंधों को उदार किया है जैसे कि निर्यात के लिए अंतिम प्रयोग प्रमाण पत्र;
  •  हमने स्‍पष्‍ट रूप से कहा है कि हम भूतलक्षी कराधान का सहारा नहीं लेंगे और कई तरीकों से इस दृष्टिकोण को प्रदर्शित किया है;
  •  इसमें एफ पी आई पर न्‍यूनतम वैकल्पिक कर न लगाने का विकल्‍प चुनना शामिल है;
  •  हमने एफ पी आई तथा अन्‍य विदेशी निवेशकों के लिए कंपोजिट सेक्‍टर कैप की संकल्‍पना लागू की है।
  •  हमने वैकल्पिक निवेश निधि के विनियमों को अधिसूचित किया है;
  •  हमने रियल एस्‍टेट इनवेस्‍टमेंट ट्रस्‍ट के लिए पूंजी अधिलाभ कर व्‍यवस्‍था को तर्कसंगत बनाया है;
  •  हमने स्‍थायी स्‍थापना के मानदंडों को संशोधित किया है;
  • हमने दो साल के लिए सामान्‍य परिहार रोधी नियमों के कार्यान्‍वयन को आस्‍थगित रखने का भी निर्णय लिया है;
  •  हमने संसद में जी एस टी विधेयक पेश किया है; हमें उम्‍मीद है कि हम 2016 में इसे शुरू कर पाएंगे;
  •  हम दिवालियापन की एक नई संहिता पर काम कर रहे हैं; शीघ्र ही कंपनी कानून अधिकरण का गठन हो जाएगा।
दोस्‍तो,

हम यह आश्‍वस्‍त करना चाहते हैं कि हमारी कर व्‍यवस्‍था पारदर्शी एवं अनुमेय है।

हम यह भी देखने के लिए लालायित हैं कि असली निवेशकों तथा ईमानदार करदाताओं को कर संबंधी मामलों पर जल्‍दी से एवं निष्‍पक्ष निर्णय प्राप्‍त हो।

हमारी पहलों के परिणामस्‍वरूप,
  • विदेशी निवेशकों की भावनाएं तथा विदेशी निवेश का अंत:प्रवाह सकारात्‍मक हो गया है।
  • पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में एफ डी आई अंत:प्रवाह में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
  • हाल ही में अर्नस्‍ट एण्‍ड यांग द्वारा भारत को निवेश के लिए सबसे आकर्षक गंतव्‍यों में से एक के रूप में आंका गया है। 2015 की पहली छमाही में ग्रीन फील्‍ड निवेश के लिए शीर्ष गंतव्‍यों की रैंकिंग में भारत पहले स्‍थान पर है।
  • यू एसए की विदेश नीति नामक पत्रिका ने भारत को एफ डी आई गंतव्‍य में नंबर वन के रूप में बताया है।
  • विकास, नवाचार तथा नेतृत्‍व पर 100 देशों के एक अध्‍ययन में फ्रास्‍ट एण्‍ड सुनिवान द्वारा भारत को पहला स्‍थान दिया गया है।
  • भारत ने निवेश के लिए आकर्षण की दृष्टि से अपनी अंकटाड रैंकिंग में सुधार किया है तथा वह 15वें स्‍थान से 9वें स्‍थान पर आ गया है।
  • भारत ने विश्‍व आर्थिक मंच के वैश्विक प्रतिस्‍पर्धी सूचकांक में भी 16 स्‍थान की छलांग लगाई है।
  • मूडी ने भारत की रेटिंग को सकारात्‍मक के रूप में अपग्रेड किया है।
इस प्रकार, 18 माह में ही हमने वैश्विक खिलाडि़यों की नजरों में भारत की विश्‍वसनीयता को सफलतापूर्वक बहाल कर दिया है।

पीपीपी के माध्‍यम से हम ऐसे क्षेत्रों में निजी निवेश को प्रोत्‍साहित कर रहे हैं, जहां पहले केवल सरकार निवेश किया करती थी।

हम बाजार में अनुशासन लाने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में अपनी भागीदारी भी कम कर रहे हैं।

हम पी पी पी परियोजनाओं के गठन एवं कार्यान्‍वयन में आपके अनुभव से सीखने के लिए लालायित हैं।

मैं निजी तौर पर इस बात का कायल हूं तथा आपको आश्‍वस्‍त करना चाहता हूँ कि भारत सभी अन्‍वेषकों एवं उद्यमियों के बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

हमने आई पी प्रशासन में पारदर्शिता एवं ऑनलाइन प्रोसेसिंग के लिए अनेक पहलें की हैं।

एक व्‍यापक राष्‍ट्रीय आई पी आर नीति को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

दोस्‍तो,

हम चाहते हैं कि हमारे सपनों को साकार करने में आप सक्रियता से भाग लें। तेज एवं कारगर ढंग से लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करने के लिए हमारी प्रतिबद्धता एवं आक्रामकता ब्रिटेन की कंपनियों को प्रचुर अवसर प्रदान करती है। इन अवसरों में निम्‍नलिखित शामिल हैं - 50 मिलियन मकानों का निर्माण करना, 100 स्‍मार्ट शहर स्‍थापित करना, हमारे रेल नेटवर्क एवं स्‍टेशनों को आधुनिक बनाना, नए रेलवे कोरिडोर स्‍थापित करना, 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा का उत्‍पादन करना, पारेषण एवं वितरण नेटवर्क का निर्माण करना, राष्‍ट्रीय राजमार्गों, पुलों एवं मेट्रो रेल नेटवर्क का निर्माण करना। अवसंरचना के सृजन एवं माल के उत्‍पादन के लिए इतनी विशाल संभावना किसी अन्‍य देश में नहीं उपलब्‍ध होगी। इससे भी महत्‍वपूर्ण यह है कि इस धरती पर ऐसा कोई स्‍थान नहीं है जो इतने बड़े पैमाने पर प्रयोग एवं खपत की संभावना प्रस्‍तुत कर सकता है।

हम अपनी नीतियों एवं लोगों के माध्‍यम से इस क्षमता का उपयोग करने का प्रयास कर रहे हैं।

डिजिटल इंडिया और स्किल इंडिया जैसे अभियान इस प्रक्रिया में भाग लेने के लिए लोगों को तैयार करने के लिए गढ़े गए हैं। उनकी ऊर्जा का पूरी तरह से दोहन करने के लिए हमने स्‍टार्ट अप इंडिया अभियान भी शुरू किया है। हमने हाल की अवधि में स्‍टार्ट अप की संख्‍या में भारी वृद्धि देखी है।

इनमें से कुछ ने स्‍थापित वैश्विक खिलाडि़यों को चुनौती देना शुरू भी कर दिया है।

दोस्‍तो,

भारत एक बड़ी आई टी क्रांति की दहलीज पर है।

हम अपने 1.25 बिलियन लोगों को तेजी से सेवाएं प्रदान करने के लिए उसे प्रोत्‍साहित कर रहे हैं।

नई प्रौद्योगिकी तथा नवीकरणीय ऊर्जा हमारा नया मंत्र है।

हम जो भी कहेंगे, वह सब स्‍वच्‍छ एवं हरित तरीके से करेंगे।

ऊर्जा दक्षता, जल पुनर्चक्रण, अपशिष्‍ट से ऊर्जा, स्‍वच्‍छ भारत तथा नदियों की स्‍वच्‍छता इन पहलों में शामिल हैं।

ये पहलें आधुनिक प्रौद्योगिकी एवं मानव संसाधन में निवेश के लिए अतिरिक्‍त अवसर प्रदान करती हैं।

हमारा देश ऐसा है जहां जोशीले युवा हैं तथा मध्‍यम वर्ग की संख्‍या बढ़ रही है।

भारत में एक विशाल घरेलू बाजार है।

मैं यह कहता आया हूं कि लोकतंत्र, जनांकिक और मांग के तीन डी हमारी बुनियादी ताकत हैं।

इसके अलावा भारत में प्रतिभावान युवाओं ने अब जोखिम उठाना शुरू कर दिया है। वे उद्यमी बनना पसंद कर रहे हैं।

इस प्रकार अब हम डी से ई की ओर अग्रसर हो गए हैं जो उद्यमशीलता है।

दोस्‍तो,

भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के उड़ान भरने के लिए आवश्‍यक स्थितियां सृजित हो गई हैं।

भारत इससे पहले बाहर से प्रतिभा, प्रौद्योगिकी तथा निवेश को समाहित करने के लिए इतनी अच्‍छी तरह तैयार नहीं था। मैं आपको आश्‍वस्‍त कर सकता हूं कि आने वाले दिनों में इसमें और बेहतरी आएगी। हम आपके विचारों, नवाचारों तथा उद्यमों का खुले दिल से स्‍वागत करेंगे।

हम अपनी नीतियों एवं प्रक्रियाओं में आवश्‍यक संशोधन करने के लिए तैयार हैं। प्रधानमंत्री कैमरन के विजनरी एवं डायनामिक नेतृत्‍व तथा भारत में उनकी रुचि को देखते हुए मैं निजी तौर पर ब्रिटिश सरकार तथा ब्रिटेन की कंपनियों के साथ काम करने के लिए लालायित हूं।

इन्‍हीं शब्‍दों के साथ मैं भारत में आप सभी के आने का स्‍वागत करता हूं।

मैं आप सभी को आश्‍वासन देता हूं कि आपके सपने को साकार करने में मैं निजी तौर पर ध्‍यान दूंगा।

आप में से कई लोगों का संबंध भारत से है; आप में से कई लोग पहले से ही भारत में हैं।

परंतु आप में से जो लोग वहां नहीं हैं उनसे मैं जरूर कहना चाहूंगा कि :
  • इस समय भारत में होना बुद्धिमानी है;
  • इसके अलावा हम भारत में निवेश करने को सरल बना रहे हैं; और
  • मेरा विश्‍वास कीजिए, हम मेक इन इंडिया के लिए इसे और भी बेहतर बना रहे हैं।
धन्यवाद।


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