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ऊर्जा एवं जलवायु परिवर्तन पर भारत - यूके संयुक्‍त वक्‍तव्‍य

नवम्बर 12, 2015

  1. यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन और भारत गणराज्‍य के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि जलवायु परिवर्तन की समस्‍या से निपटना और ऊर्जा की सुरक्षित, सस्‍ती और संपोषणीय आपूर्ति को बढ़ावा देना भारत एवं यूके की साझी सामरिक प्रतिबद्धताएं हैं। उन्‍होंने इन लक्ष्‍यों के समर्थन में दोनों देशों के बीच सहयोग के मजबूत इतिहास को प्रशंसा के साथ नोट किया तथा इस संबंध में द्विपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता की।
  2. दोनों प्रधानमंत्रियों ने जलवायु परिवर्तन की समस्‍या से निपटने के लिए अपनी साझी तथा अडिग प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्‍होंने इस बात पर जोर दिया कि यह इस शताब्‍दी की सबसे बड़ी वैश्विक चुनौतियों में से एक है जिसके राष्‍ट्रीय एवं अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तरों पर प्रतिकूल प्रभाव हो रहे हैं। उन्‍होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देश पूर्व औद्योगिक स्‍तरों के अनुसार वैश्विक औसत तापमान में दो डिग्री सेल्सियस से नीचे वृद्धि को बनाए रखने के दीर्घावधिक लक्ष्‍य से सहमत हैं। उन्‍होंने संपोषणीय विकास के संदर्भ में अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग के महत्‍व पर जोर दिया जो ऊर्जा सुरक्षा एवं पहुंच, गरीबी उन्‍मूलन, आर्थिक विकास और नौकरी सृजन जैसे व्‍यापक लाभ प्रदान करेगा।
  3. दोनों प्रधानमंत्रियों ने घरेलू स्‍तर पर कदम उठाने की अपनी प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की। प्रधानमंत्री कैमरन ने इस बात को रेखांकित किया कि यूके 2050 तक ग्रीन हाउस गैस के अपने उत्‍सर्जन में कम से कम 80 प्रतिशत की कटौती करने के लिए प्रतिबद्ध है, जैसा कि जलवायु परिवर्तन अधिनियम 2008 में प्रतिपादित किया गया है तथा वह सर्वाधिक लागत प्रभावी ढंग से अपने कार्बन बजट को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात को उजागर किया कि भारत 2030 तक 2005 के स्‍तरों की तुलना में अपने उत्‍सर्जन में 33 से 35 प्रतिशत की कटौती करने के लिए प्रतिबद्ध है और राष्‍ट्रीय स्‍तर पर निर्धारित विकास के उपायों एवं प्राथमिकता के माध्‍यम से 2030 तक गैर जीवाश्‍म ईंधन आधारित ऊर्जा स्रोतों से संचयी रूप में अपनी 40 प्रतिशत विद्युत क्षमता स्‍थापित करेगा।
  4. प्रधानमंत्री मोदी तथा प्रधानमंत्री कैमरन ने दिसंबर, 2015 में जलवायु परिवर्तन पर पेरिस सम्‍मेलन में यूएन एफ सी सी सी के तहत एक महत्‍वाकांक्षी एवं व्‍यापक करार के लिए साथ मिलकर काम करने की शपथ ली, जो सभी पर लागू होगा।
  5. दोनों प्रधानमंत्रियों यूएन एफ सी सी सी के पक्षकारों के बीच भरोसा उत्‍पन्‍न करने के महत्‍व को स्‍वीकार करते हैं तथा पेरिस करार के अंदर एक पारदर्शी रूपरेखा शामिल करने का समर्थन करते हैं जो कार्रवाई के स्‍तर पर नियमित रूप से प्रगति की रिपोर्ट करने एवं टोह लेने के लिए सभी पक्षकारों की आवश्‍यकता को प्रतिबिंबित करे तथा उनके प्रयासों को सफल बनाने में सहायता प्रदान करे, जो यह प्रदर्शित करने के रूप में काम करेगा कि सभी पक्षकार अपने - अपने प्रयासों को कार्यान्वित कर रहे हैं।
  6. प्रधानमंत्री कैमरन तथा प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात का स्‍वागत किया कि 159 देशों ने 88 प्रतिशत से अधिक वैश्विक उत्‍सर्जन को शामिल करते हुए पेरिस करार में राष्‍ट्रीय स्‍तर पर निर्धारित अंशदान के लिए प्रतिबद्धता प्रस्‍तुत की है। दोनों प्रधानमंत्रियों ने अभिसमय के लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने के उद्देश्‍य से आवधिक आधार पर कार्रवाई एवं सहायता दोनों को शामिल करते हुए वैश्विक स्‍टाफ टेक का समर्थन किया।
  7. दोनों नेताओं ने यह स्‍वीकार किया कि पेरिस करार को हमारे नागरिकों, व्‍यवसायों एवं निवेशकों के लिए दीर्घावधिक यात्रा निर्देश पर स्‍पष्‍ट संकेत प्रदान करने की जरूरत है ताकि स्‍वच्‍छ ऊर्जा को अधिक संवहनीय बनाने के लिए नवाचार एवं अनुसंधान तथा विकास को पोषित किया जा सके।
  8. दोनों प्रधानमंत्रियों ने जलवायु वित्‍त पोषण तथा विकसित देशों द्वारा व्‍यापक श्रेणी के सार्वजनिक एवं निजी दोनों स्रोतों से वर्ष 2020 तक प्रतिवर्ष 100 बिलियन अमरीकी डालर की राशि संयुक्‍त रूप से जुटाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता के महत्‍व पर जोर दिया जो उपशमन के सार्थक कदमों तथा कार्यान्‍वयन में पारदर्शिता के संदर्भ में है। भारत और यूके ने विकासशील देशों में उपशमन एवं अनुकूलन के प्रयासों की सहायता करने के लिए अनुमेय एवं अधिक सार्वजनिक एवं निजी जलवायु वित्‍त पोषण की महत्‍वपूर्ण भूमिका को स्‍वीकार किया। उन्‍होंने अभिसमय के लक्ष्‍यों की प्राप्ति में मदद के लिए निवेश में शिफ्ट लाने के लिए बाधाओं को दूर करने हेतु पर्यावरण की दृष्टि से स्‍वस्‍थ प्रौद्योगिकी के विकास एवं तैनाती तथा अनुसंधान एवं विकास में मदद के लिए जलवायु वित्‍त पोषण की भूमिका को भी स्‍वीकार किया।
  9. दोनों प्रधानमंत्रियों ने जलवायु लोच पर हमारी साझेदारी को नोट किया जिसके तहत जलवायु परिवर्तन के लिए भारत की राष्‍ट्रीय एवं राज्‍य कार्य योजनाओं के लिए यूके का समर्थन शामिल है। यह कार्यक्रम भारत की अत्‍यधिक असुरक्षित आबादी के लिए जलवायु जोखिम को कम करने, अनुकूलन की क्षमता तथा जलवायु परिवर्तन के लिए लोच को सुदृढ़ करने और अन्‍य देशों ने जो सबक लिया है उससे सबक लेने में मदद करेगा।
  10. दोनों नेता इस बात का नोट करके प्रसन्‍न थे कि जलवायु परिवर्तन एवं ऊर्जा पर भारत - यूके साझेदारी की सफलताएं पेरिस में इंडिया पैवेलियन में प्रदर्शित होंगी। उन्‍होंने इस बात को भी स्‍वीकार किया कि युवा जलवायु परिवर्तन से निपटने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं तथा साझी जलवायु चुनौतियों के नवाचारी समाधान विकसित करने के लिए दोनों देशों में युवा जलवायु नेटवर्कों के बीच सहयोग के लिए एक विजन को साझा किया।
  11. दोनों प्रधानमंत्रियों ने उपलब्‍ध विज्ञान पर आधारित जलवायु परिवर्तन का एक व्‍यापक आकलन प्रदान करने में जलवायु परिवर्तन पर अंतर्सरकारी पैनल (आई पी सी सी) के महत्‍व को स्‍वीकार किया। उन्‍होंने जलवायु परिवर्तन के समाधानों पर अधिक बल देने के महत्‍व को उजागर किया तथा वे आई पी सी सी कार्य समूह-3 के भारत और यूके के सह अध्‍यक्षों का समर्थन करने के लिए साथ मिलकर काम करने पर सहम‍त हुए क्‍योंकि वे आई पी सी सी के छठवें आकलन चक्र में जलवायु परिवर्तन के उपशमन के लिए विकल्‍पों के आकलन पर कार्य का नेतृत्‍व कर रहे हैं।
  12. दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत और यूके बीच विद्यमान ऊर्जा साझेदारी को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता की। भविष्‍य को ध्‍यान में रखते हुए वे इस बात पर सहमत हुए कि उनके मंत्रियों की नियमित शिखर बैठकों के लिए बैठक होनी चाहिए ताकि वे सामरिक प्राथमिकताओं पर द्विपक्षीय सहयोग के लिए अपने विचारों को साझा कर सकें और अवसरों का पता लगा सकें तथा ऊर्जा साझेदारी के सभी क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ा सकें जिसमें अनुसंधान, विकास एवं प्रदर्शन पर संयुक्‍त साझेदारी तथा स्‍वच्‍छ प्रौद्योगिकी तथा नवीकरणीय, गैस एवं परमाणु ऊर्जा की तैनाती शामिल है।
  13. सहयोग की इस विस्‍तृत रूपरेखा के तहत प्रधानमंत्री मोदी एवं प्रधानमंत्री कैमरन ने दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग सुदृढ़ करने लिए एक समझौता ज्ञापन (एम ओ यू) पर हस्‍ताक्षर होने का स्‍वागत किया जो विद्युत बाजार सुधार, ऊर्जा दक्षता, आफशोर विंड, सौर विद्युत, स्‍मार्ट ग्रिड, ऊर्जा भंडार और आफ ग्रिड नवीकरणीय ऊर्जा सेवाओं जैसे क्षेत्रों में विद्यमान सफलताओं को सुदृढ़ करेगा और भविष्‍य में घनिष्‍ठ सहयोग को बढ़ावा देगा। उन्‍होंने ऊर्जा की सामरिक आयोजना पर भारत और यूके के बीच सहयोग के विस्‍तार का भी स्‍वागत किया।
  14. दोनों प्रधानमंत्रियों ने द्विपक्षीय असैन्‍य परमाणु सहयोग करार पर वार्ता की सफल समाप्ति का स्‍वागत किया जो भावी सहयोग की रूपरेखा प्रदान करेगा तथा परमाणु ऊर्जा साझेदारी के लिए भारतीय वैश्विक केंद्र के साथ असैन्‍य परमाणु पर संयुक्‍त प्रशिक्षण एवं अनुभव की साझेदार को प्रोत्‍साहित करने के लिए यूके तथा भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग के बीच एक एम ओ यू पर हस्‍ताक्षर होने की घोषणा की।
  15. प्रधानमंत्री कैमरन तथा प्रधानमंत्री मोदी ने नवाचारी समधान तलाश करने एवं विस्‍तार को सुगम बनाने तथा स्‍वच्‍छ ऊर्जा की लागत कम करने के लिए उनके अनुप्रयोग में अनुसंधान एवं विकास पर वैश्विक साझेदारी के महत्‍व की फिर से पुष्टि की। वे ऐसी पहलों पर घनिष्‍टता से साथ मिलकर काम करने पर सहमत हुए जिससे इस संबंध में वैश्विक प्रयासों में वृद्धि होगी तथा समन्‍वय बेहतर होगा। प्रधानमंत्री कैमरन ने सौर प्रौद्योगिकी एवं अनुप्रयोग के संवर्धन के लिए एक अंतर्राष्‍ट्रीय सौर गठबंधन के लिए भारत की पहल के लिए यूके का समर्थन व्‍यक्‍त किया।
  16. दोनों प्रधानमंत्रियों ने नए संयुक्‍त नवीकरणीय ऊर्जा शोध केंद्रों के लिए शोध परिषद यूके और भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग से संयुक्‍त वित्‍त पोषण के 10 मिलियन पाउंड की घोषणा की जिससे भारत - यूके स्‍वच्‍छ अनुसंधान कार्यक्रम का कुल मूल्‍य 60 मिलियन पाउंड हो जाएगा। उन्‍होंने स्‍वच्‍छ ऊर्जा क्षेत्र में निवेश जुटाने में अपने - अपने देशों में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका का स्‍वागत किया जो नवाचार को प्रेरित करेगा और नई प्रौद्योगिकियों के प्रयोग की गति तेज करेगा।
  17. प्रधानमंत्री मोदी ने बड़े पैमाने पर भारत की नवीकरणीय ऊर्जा की महत्‍वाकांक्षा को साकार करने के लिए सस्‍ती दर पर दीर्घावधिक वित्‍त पोषण की आवश्‍यकता पर प्रकाश डाला तथा संभावित भूमिका को नोट किया जो लंदन शहर इस प्रयोजन के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय पूंजी जुटाने में निभा सकता है। प्रधानमंत्री कैमरन ने ग्रीन इन्‍वेस्‍टमेंट बैंक के साथ यूके जलवायु निवेश उद्यम की घोषणा की जो भारत और अफ्रीका में नवीकरणीय ऊर्जा तथा ऊर्जा दक्षता की परियोजनाओं में यूके जलवायु वित्‍त पोषण के लिए कुल 200 मिलियन पाउंड तक का निवेश करेगा।
  18. प्रधानमंत्री कैमरन ने यह भी घोषणा की कि यूके भारत में स्‍वच्‍छ ऊर्जा वित्‍त पोषण की बाधाओं का नवाचारी समाधान ढूंढ़ने के लिए सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों को एक साथ लाने के लिए भारत सरकार द्वारा पृष्‍ठांकित एक स्‍वतंत्र भारतीय पहल अर्थात हरित वित्‍त पोषण के लिए भारतीय नवाचार प्रयोगशाला के लिए यूके वित्‍त पोषण प्रदान करेगा।
  19. दोनों प्रधानमंत्रियों ने सबके लिए सुरक्षित, सस्‍ती एवं संपोषणीय ऊर्जा प्रदान करने में कौशल एवं विशेषज्ञता की साझेदारी के महत्‍व की फिर से पुष्टि की। प्रधानमंत्री कैमरन ने भारत के विद्युत क्षेत्र में राष्‍ट्रीय एवं राज्‍य स्‍तरीय सुधारों की सहायता के लिए तकनीकी सहायता के पांच वर्षीय कार्यक्रम के लिए 10 मिलियन पाउंड की घोषणा की।
  20. प्रधानमंत्री कैमरन ने स्‍वच्‍छ ऊर्जा एवं जलवायु परिवर्तन के लिए एक नई चेवनिंग फेलोशिप स्‍कीम की भी घोषणा की जो तीन वर्षों में भारत के ऊर्जा क्षेत्र के भावी नेताओं तथा जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र के विशेषज्ञों को अध्‍ययन के लिए तथा साझेदारियों का निर्माण करने के लिए यूके लाएगी।
  21. दोनों प्रधानमंत्रियों ने ऊर्जा पर मजबूत भारत - यूके वाणिज्यिक साझेदारी का उल्‍लेख किया जो दोनों देशों में नौकरियों एवं राजस्‍व के सृजन में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा रही है। विशेष रूप से उन्‍होंने भारत में 2 बिलियन पाउंड का निवेश करने, 3 गीगावाट से अधिक सौर विद्युत अवसंरचना का निर्माण करने के लिए लाइटसोर्स की योजनाओं का स्‍वागत किया जिसमें श्री इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर फाइनांस लिमिटेड के साथ साझेदारी शामिल है तथा उन्‍होंने हाल की इस घोषणा का भी स्‍वागत किया कि यूके की प्रौद्योगिकी कंपनी - इंटेलीजेंट इनर्जी ने 10 वर्षों में 1.2 बिलियन पाउंड के कुल संविदा मूल्‍य से भारत में 27,400 दूरसंचार टावरों को दक्ष, स्‍वच्‍छ तथा सस्‍ती ऊर्जा प्रदान करने के लिए भारतीय कंपनी जी टी एल के ऊर्जा प्रबंधन व्‍यवसाय का अधिग्रहण करने के लिए एक करार पर हस्‍ताक्षर किया है। दोनों प्रधानमंत्री यह स्‍वीकार करते हुए दोनों देशों में प्रचालन कर रही यूके एवं भारतीय कंपनियों का समर्थन करने पर सहमत हुए कि यह इस बारे में विशेषज्ञता एवं अनुभव को साझा करने के लिए महत्‍वपूर्ण है कि किस तरह अच्‍छी तरह से काम करने वाले ऊर्जा एवं गैस बाजार ऊर्जा सुरक्षा एवं आर्थिक विकास को बढ़ावा दे सकते हैं तथा लागत प्रभावी न्‍यून कार्बन संक्रमण को अंजाम दे सकते हैं।
  22. प्रधानमंत्री कैमरन तथा प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों की समृद्धि बढ़ाने के लिए ऊर्जा एवं जलवायु परिवर्तन के क्षेत्रों में साथ मिलकर काम करना जारी रखने के महत्‍व एवं परस्‍पर लाभ पर जोर दिया।


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