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रक्षा और अंतर्राष्‍ट्रीय सुरक्षा साझेदारी

नवम्बर 12, 2015

भारत और यूके बदलते विश्‍व में प्रमुख साझेदार हैं। दोनों देश एक जैसे खतरों एवं चुनौतियों से जूझ रहे हैं जिसमें हिंसक अतिवाद एवं आतंकवाद का दंश; हिंसक संघर्ष; व्‍यापक विनाश के हथियारों का प्रसार और गंभीर संगठित अपराध शामिल हैं।

नियमों पर आधारित अंतर्राष्‍ट्रीय व्‍यवस्‍था को बनाए रखने की अपनी परंपरा वाले देश के रूप में भारत और यूके अंतर्राष्‍ट्रीय प्रणाली को सुदृढ़ करने तथा वैश्विक खतरों से बेहतर ढंग से निपटने के लिए गहन साझेदारी विकसित करने के लिए का संकल्‍प करते हैं।

रक्षा सहयोग

भारत और यूके सामरिक क्षेत्रों में क्षमता साझेदारी स्‍थापित करके अपने रक्षा संबंध को स्‍तरोन्‍नत करेंगे जिसके माध्‍यम से वे सिद्धांत, प्रशिक्षण तथा अन्‍य घटकों पर साथ मिलकर काम करेंगे जिन पर सेना की कारगरता निर्भर होती है। ये साझेदारियां दोनों देशों के बीच सामरिक क्षमता के अंतरण को संभव बनाएंगी जिसमें आपसी हित के क्षेत्रों में रक्षा प्रौद्योगिकी एवं विनिर्माण शामिल हैं।

भारत - यूके प्रौद्योगिकी क्षमता साझेदारियों की सहायता से दोनों देश नए क्षेत्रों में अनुसंधान विकसित करेंगे और अपनी रक्षा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग परियोजनाओं को आगे बढ़ाएंगे।

मेक इन इंडिया
दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच इस बात पर सहमति हुई है कि उनकी सरकारें देशज रक्षा परियोजनाओं पर मेक इन इंडिया के समर्थन में साथ मिलकर काम करेंगी।

उन्‍होंने अपने - अपने रक्षा उद्योगों के बीच बढ़ते सहयोग का स्‍वागत किया और उसे प्रोत्‍साहित किया।

वैश्विक मुद्दे

यूके आज भी संयुक्‍त राष्‍ट्र में सुधारों का प्रबल समर्थक है और संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए प्रयासों में सक्रियता से शामिल है। यूके ने विस्‍तारित संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में स्‍थाई सीट के लिए भारत की उम्‍मीदवारी के लिए अपना समर्थन प्रदान करना जारी रखा है।

भारत और यूके संयुक्‍त राष्‍ट्र द्वारा शुरू किए गए शांति अभियानों की कारगरता में सुधार के लिए हाल की शांति रक्षा अभियान समीक्षा पर फालोअप के लिए साथ मिलकर काम करेंगे।

दोनों देश निरस्‍त्रीकरण एवं अप्रसार पर अपनी वार्ता को गहन करेंगे तथा सभी निर्यात नियंत्रण व्‍यवस्‍थाओं में भारत की सदस्‍यता की दिशा में काम करेंगे।

आतंकवाद की खिलाफत
भारत और यूके सभी रूपों एवं अभिव्‍यक्तियों के आतंकवाद के विरूद्ध एक साथ खड़े हैं तथा अंतर्राष्‍ट्रीय आतंकवाद पर व्‍यापक अभिसमय को जल्‍दी से अंतिम रूप देने का समर्थन करते हैं।

वे आई एस आई एल, अलकायदा, लश्‍करे तैयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन, हक्‍कानी तथा संबद्ध गुटों सहित आतंकी नेटवर्कों के लिए सभी वित्‍तीय एवं रणनीतिक समर्थन को ध्‍वस्‍त करने के लिए साथ मिलकर काम करना जारी रखेंगे। दोनों देशों ने मुंबई में नवंबर, 2008 के आतंकी हमले के दोषियों को दंडित करने के लिए पाकिस्‍तान से अपने आह्वान को भी दोहराया।

भारत और यूके आतंकी हमलों को रोकने तथा हिंसक अतिवाद की खिलाफत करने के लिए साथ मिलकर काम करना जारी रखेंगे जिसमें सर्वोत्‍तम प्रथाओं एवं प्रौद्योगिकिेयों का आदान - प्रदान शामिल है।

दोनों देश आतंकवाद एवं जिस विचारधारा पर यह टिका है उस विचारधारा की खिलाफत करने के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए साथ मिलकर काम करेंगे। वे समुदायों, सभ्‍य समाज तथा उद्योग के साथ मिलकर कारगर राष्‍ट्रीय रणनीतियों को लागू करने के लिए सरकारों के कदमों का समर्थन करने के लिए संयुक्‍त राष्‍ट्र तथा वैश्विक आतंकवादरोधी मंच के माध्‍यम से काम करेंगे।

साइबर

भारत और यूके साइबर एवं डिजिटल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रमुख साझेदार है जिसमें प्रधानमंत्री मोदी की डिजिटल इंडिया पहल का समर्थन शामिल है। ई-गवर्नेंस पर नए एम ओ यू से डिजिटल सरकार के लाभों को नागरिकों तक पहुंचाने में सहयोग का निर्माण होगा।

दोनों देश सरकार के रूप में तथा उद्योग, सभ्‍य समाज, शैक्षिक संस्‍थाओं एवं तकनीकी समुदाय के साथ मिलकर काम करेंगे ताकि सुनिश्चित हो कि इंटरनेट से अभिव्‍यक्ति की आजादी, नवाचार, समाज के अंदर और पूरी दुनिया में सहयोग एवं समावेशन संभव हो।

भारत और यूके अपने देश के साइबर सुरक्षा पेशेवरों को विश्‍व स्‍तरीय विशेषज्ञता, शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए साथ मिलकर काम करेंगे। इसकी सहायता के लिए दोनों देश भारत के लिए यूके की चेवनिंग साइबर छात्रवृत्ति कार्यक्रम का विस्‍तार करने और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण में एक उत्‍कृष्‍टता केंद्र स्‍थापित करने पर सहमत हुए हैं।

वे अपनी कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कारगरता एवं दक्षता बढ़ाने तथा सीमा पारीय अपराधों तथा ऑनलाइन बाल एवं शोषण से निपटने की उनकी सामर्थ्‍य बढ़ाने के लिए अपना संयुक्‍त कार्य जारी रखेंगे और उसे और सुदृढ़ करेंगे। इस संबंध में, दोनों पक्ष साइबर अपराध एवं साइबर फोरेंसिक सहयोग, दूरसंचार परीक्षण एवं सुरक्षा प्रमाणन पर एम ओ यू को अंतिम रूप देने की संभावनाओं का पता लगाएंगे, जैसा कि फरवरी, 2015 में दूसरी भारत - यूके साइबर वार्ता के दौरान सहमति हुई थी।

भारत और यूके एक साथ और अपने - अपने देश के प्रौद्योगिकी उद्योगों के साथ वैश्विक वी प्रोटेक्‍ट पहल पर काम करेंगे ताकि ऑनलाइन बाल एवं शोषण की समस्‍या हल हो सके।

यूके नया भारतीय साइबर अपराध समन्‍वय केंद्र स्‍थापित करने पर अग्रिम प्रदान करेगा तथा इस क्षेत्र में प्रैक्टिसनर और नीति - निर्माताओं के बीच विशेषज्ञ स्‍तरीय लिंक का विकास किया जाएगा।

दोनों देश अपने - अपने देश के नेटवर्कों एवं आई सी टी अवसंरचना की लोच में सुधार करने तथा साइबर घटनाओं का उपशमन करने एवं उन पर प्रतिक्रिया करने की उनकी सामर्थ्‍य एवं योग्‍यता बढ़ाने के लिए साथ मिलकर काम करेंगे जिसमें सी ई आर टी दर सी ई आर टी सहयोग पर एक एम ओ यू पर जल्‍दी से निर्णय लेना शामिल है।

गंभीर एवं संगठित अपराध

भारत और यूके आपराधिक नेटवर्कों को नष्‍ट एवं ध्‍वस्‍त करने अपराधियों को सजा दिलाने तथा अपने नागरिकों की रक्षा करने के लिए सूचना की साझेदारी, प्रचालनात्‍मक सहयोग तथा सर्वोत्‍तम प्रथाओं के आदान - प्रदान के माध्‍यम से गंभीर एवं संगठित अपराध के विरूद्ध अपना सहयोग बढ़ाने के लिए साथ मिलकर काम करेंगे।

समुद्री
भारत और यूके सुरक्षित अंतर्राष्‍ट्रीय समुद्री क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए साथ मिलकर काम करेंगे। वे समुद्र के कानून पर संयुक्‍त राष्‍ट्र अभिसमय सहित अंतर्राष्‍ट्रीय कानून के स्‍वीकृत सिद्धांतों के अनुसरण में नौवहन एवं ओवरफ्लाइट की आजादी बनाए रखने एवं बढ़ावा देने के लिए साथ मिलकर काम करेंगे।

दोनो देश हिंद महासागर में अपने नौसैन्‍य सहयोग को सुदृढ़ करेंगे जिसमें द्विपक्षीय अभ्‍यासों की कोंकण श्रृंखला बढ़ाने के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय बेड़ा समीक्षा में रॉयल नेवी की भागीदारी तथा समुद्री क्षेत्र जागरूकता (एम डी ए) बढ़ाने के लिए सूचना का आदान - प्रदान शामिल है।

भारत और यूके जल दस्‍युता के दंश से निपटने के लिए साथ मिलकर काम करेंगे, सोमालिया के तट पर जल दस्‍युता पर संयुक्‍त राष्‍ट्र संपर्क समूह में निकटता से समन्‍वय करेंगे और जल दस्‍युता एवं समुद्री अपराधों का जबाव देने के लिए पश्‍चवर्ती राज्‍यों की क्षमता निर्मित करने के लिए साथ मिलकर काम करेंगे।

उपर्युक्‍त प्रतिबद्धताएं भारत और यूके को नए खतरों एवं चुनौतियों से निपटने में बेहतर ढंग से संभव बनाएंगी जिससे 21वीं शताब्‍दी में लोकतंत्र जूझ रहे हैं।

अनुबंध : सहयोग के लिए तंत्र

भारत और यूके द्विवार्षिक प्रधानमंत्री - प्रधानमंत्री शिखर बैठकों के माध्‍यम से अपने द्विपक्षीय संबंध को गहन करेंगे, जिसकी मदद उनके वार्षिक विदेश कार्यालय परामर्श और एन एस ए - एन एस ए वार्ता के माध्‍यम से की जाएगी।

दोनों देश रक्षा मंत्रियों के बीच तथा संयुक्‍त / एकीकृत तथा एकल सर्विस चीफ के बीच वार्षिक सामरिक वार्ता का आयोजन करेंगे।

दोनों देश वार्षिक रक्षा परामर्श समूह तथा कार्यपालक संचालन समूह की वार्ता का आयोजन करेंगे और संयुक्‍त्‍बल एवं एकीकृत रक्षा स्‍टाफ सहयोग का समन्‍वय करने के लिए छठवें संचालन समूह का गठन करेंगे।

भारत और यूके अपने द्विवार्षिक सैन्‍य अभ्‍यास कार्यक्रम को गहन करेंगे जिसकी शुरूआत भारत में 2017 के लिए नियोजित नेवल, आर्मी और एयर फोर्स के अभ्‍यासों से होगी।

दोनों देश अपने - अपने रक्षा एवं स्‍टॉफ कॉलेजों तथा प्रशिक्षण संस्‍थानों के बीच प्रशिक्षण तथा व्‍याख्‍यान विनिमय कार्यक्रमों को सुदृढ़ करेंगे।

दोनों देश आतंकवाद की खिलाफत एवं साइबर पर अपने वार्षिक संयुक्‍त कार्य समूहों का विकास करेंगे जिसमें सी ई आर टी - यूके और सी ई आर टी - भारत के बीच घनिष्‍ठ संपर्कों को प्रोत्‍साहित करना शामिल है।

भारत और यूके पश्चिम एशिया, पूर्वी एशिया एवं बहुपक्षीय क्षेत्र में मुद्दों पर चर्चा करने के लिए औपचारिक रूप से स्‍थापित अपने परामर्शों तथा अफगानिस्‍तान में समस्‍याओं पर चर्चा करने के लिए अपने संयुक्‍त कार्य समूह को सुदृढ़ करेंगे।

दोनों देश निरस्‍त्रीकरण तथा अप्रसार के मुद्दों पर अपना नियमित परामर्श जारी रखेंगे।

भारत और यूके समुद्री मुद्दों सहित दक्षिण एशिया पर एक नई वार्षिक वरिष्‍ठ अधिकारी वार्ता का आयोजन करके इस क्षेत्र में अपने सहयोग को गहन करेंगे।



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