यात्रायें यात्रायें

प्रधानमंत्री तथा यूके के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन द्वारा मीडिया से बातचीत का प्रतिलेखन (12 नवंबर, 2015)

नवम्बर 12, 2015

भारत के प्रधानमंत्री (श्री नरेन्‍द्र मोदी) : प्रधानमंत्री श्री कैमरॉन, मीडिया के सभी साथियों, प्रधानमंत्री कैमरॉन आपने भारत और ब्रिटेन के संबंधों के प्रति जो उत्‍साह और आशावादी दृष्टिकोण दिखाया है, उसके लिए मैं आपका आभार प्रकट करता हूँ। आपने भारत और ब्रिटेन के संबंधों को सशक्‍त करने में बड़ा योगदान दिया है। मैं आपके गर्मजोशी से भरे स्‍वागत और भारत से आपके संबंधों को सशक्‍त बनाने में आपके योगदान के लिए आपका धन्‍यवाद करता हूँ। आपके निमंत्रण के लिए,आपके आदर-सत्‍कार के लिए, जिस प्रकार से आपने मेरे लिए समय दिया है, उसके लिए मैं आपका आभारी हूँ।

यू.के. की यात्रा पर, यहॉं आने पर मुझे बहुत प्रसन्‍नता है। यह समानत: भारत के लिए महत्‍वपूर्ण है और ऐतिहासिक तौर पर हम एक दूसरे से भली-भॉंति परिचित हैं। हमारे लोगों के बीच संबंध अतुलनीय हैं, हमारे मूल्‍य एक समान हैं और इससे हमारे संबंधों को विशेष स्‍वरूप मिला है। हर क्षेत्र में हमारी साझेदारी वाइब्रैन्‍ट है और हमारे संबंधों में निरन्‍तर विस्‍तार हो रहा है, जैसे ट्रेड और इन्‍वेस्‍टमेन्‍ट, डिफेन्‍स और सीक्‍योरिटी, शिक्षा और विज्ञान, क्‍लीन एनर्जी और स्‍वास्‍थ्‍य, टेक्‍नॉलॉजी और इनोवेशन, कला और संस्‍कृति। अन्‍तर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर हमारे साझा हित हैं जो हम दोनों देशों के लिए महत्‍वपूर्ण हैं। आज हमने निर्णय लिया है कि हम अपने पॉलिटिकल डॉयलॉग को और घनिष्‍ठ बनायेंगे और नियमित रूप से बाइलैटरल समिट करेंगे। हमारे साझा मूल्‍यों के आधार पर विश्‍व के अन्‍य क्षेत्रों में भी विकास के लिए साझेदारी को शुरू करेंगे और साथ ही साथ हर क्षेत्र में अपने द्विपक्षीय सहयोग को और अधिक गहरा बनायेंगे।

आज हमने सिविल न्‍यूक्लियर एग्रीमेन्‍ट पर हस्‍ताक्षर किये हैं। यह हमारे आपसी विश्‍वास का प्रतीक है और हमने क्‍लाइमेट चेन्‍ज का सामना करने के लिए हमारे दृढ़ संकल्‍प का परिचय भी दिया है। भारत के ग्‍लोबल सेन्‍टर फॉर न्‍यूक्लियर एनर्जी पार्टनरशिप में सहयोग पर समझौता हुआ है। इससे वैश्विक न्‍यूक्लियर इण्‍डस्‍ट्री में सेफ्टी और सीक्‍योरिटी और मजबूत होगी।

यू.के. के साथ रक्षा और सुरक्षा को हम बहुत मूल्‍यवान मानते हैं जिसमें डिफेन्‍स के नियमित ज्‍वाइन्‍ट एक्‍सरसाइज भी शामिल हैं और यह साझेदारी निरन्‍तर बढ़ती रहेगी। मुझे बहुत प्रसन्‍नता है कि फरवरी, 2016 में भारत में होने वाले इन्‍टरनेशनल फ्लीट रिव्‍यू में यू.के. भी शामिल होगा। भारत डिफेन्‍स के आधुनिकीकरण पर बल दे रहा है और इसलिए हम डिफेन्‍स मैन्‍यूफैक्‍चरिंग को मेक इन इण्डिया के मिशन में प्राथमिकता दे रहे हैं। मेरा विश्‍वास है कि यू.के. हमारे इस मिशन में एक महत्‍वपूर्ण साझेदार होगा।

इकोनामिक पार्टनरशिप हमारे संबंधों का एक अहम और मजबूत स्‍तम्‍भ है। मेरा विश्‍वास है कि ये संबंध आने वाले समय में बड़ी तेजी से आगे बढ़ेंगे क्‍योंकि भारत में अपार सम्‍भावनायें हैं और ब्रिटेन में आर्थिक क्षमता और सामर्थ्‍य है। यू.के. भारत में तीसरा सबसे बड़ा निवेशक है। भारत यू.के. में जितना निवेश करता है वह बाकी ई.यू. देशों में निवेश से अधिक है। भारत में यू.के. के निवेश के प्रस्‍ताव के लिए हमने भारत में एक फास्‍ट ट्रैक मैकेनिज्‍म की व्‍यवस्‍था बनाने का निर्णय लिया है। हम इण्डिया-यू.के. सी.ई.ओ. फोरम के पुनर्गठन का स्‍वागत करते हैं। लन्‍दन के फाइनेन्‍शल मार्केट का फण्‍ड रेज़ करने के लिए हम और अधिक प्रयोग करने वाले हैं। मेरे लिए प्रसन्‍नता का विषय है कि हम भारतीय रेल के लिए लन्‍दन में रेलवे रूपी बॉण्‍ड जारी करने जा रहे हैं। यह एक तरह से स्‍वाभाविक है क्‍योंकि भारतीय रेल की यात्रा यहीं से शुरू हुई थी।

अगले दो दिनों में हमारी बिजनेस सेक्‍टर के साथ होने वाली एन्‍गेजमेन्‍ट्स का मैं उत्‍सुकता के साथ इन्‍तजार कर रहा हूँ। हम बिजनेस सेक्‍टर से कई महत्‍वपूर्ण एनाउन्‍समेन्‍ट्स की अपेक्षा करते हैं। मुझे प्रसन्‍नता है हमारी सरकार और प्राइवेट सेक्‍टर दोनों के बीच क्‍लीन एनर्जी औरक्‍लाइमेट सहयोग है। यह क्षेत्र महत्‍वपूर्ण भी है और इसमें अपार सम्‍भावनायें भी हैं। भारत ने क्‍लाइमेट चेन्‍ज पर जो एक व्‍यापक महत्‍वाकॉंक्षी राष्‍ट्रीय योजना बनाई है उसमें हमारे द्विपक्षीय सहयोग से लाभ पहुँचेगा। हम आशा करते हैं कि पेरिस में होने वाले सम्‍मलन में यू.एन. कन्‍वेन्‍शन ऑन क्‍लाइमेन्‍ट चेन्‍ज फ्रेमवर्क के अन्‍तर्गत ठोस परिणाम निकलेंगे और विश्‍व में सस्‍टेनेबल और लो कार्बन भविष्‍य के लिए एक निर्णायक रास्‍ता तय होगा।

आज कई और क्षेत्रों में ठोस परिणाम निकले हैं जिनका भारत की राष्‍ट्रीय प्राथमिकता से संबंध है। इनमें स्‍मार्ट सिटीज़,स्‍वास्‍थ्‍य, रिवर क्‍लीनिंग, स्किल और शिक्षा शामिल हैं। हम इस बात पर सहमत हैं कि सभी क्षेत्रों में हमारी साझेदारी के लिए टेक्‍नॉलॉजी, रिसर्च और इनोवेशन मजबूत नींव प्रदान करेंगे।

हम दोनों देश अपनी इस साझेदारी से जनता के लिए नये अवसर पैदा करेंगे और समृद्धि बढ़ायेंगे। साथ ही साथ साझा हितों को प्राप्‍त कर पायेंगे और अपनी चुनौतियों का ठीक से सामना कर सकेंगे, जैसे एशिया में शान्ति और स्थिरता,विशेषकर दक्षिण और पश्चिम एशिया में सामुद्रिक सुरक्षा, साइबर सुरक्षा तथा आतंकवाद और अतिवाद। इन सभी विषयों पर मैं और प्रधानमंत्री कैमरॉन आज और कल चेकर्स में और विस्‍तार से बात करने वाले हैं।

अन्‍त में यू.एन. सीक्‍योरिटी काउन्सिल में भारत की स्‍थायी सदस्‍यता और अन्‍तर्राष्‍ट्रीय एक्‍सपोर्ट कन्‍ट्रोल रेजीम में भारत की सदस्‍यता के लिए ब्रिटेन के महत्‍वपूर्ण सामर्थ्‍य के लिए प्रधानमंत्री कैमरॉन का आभार व्‍यक्‍त करना चाहता हूँ।

आज पार्लियामेन्‍ट में सम्‍बोधन करने का मुझे सम्‍मान मिला है। इसके बाद मैं इण्डिया-यू.के. बिजनेस समिट को सम्‍बोधित करूँगा। इन दोनों अवसरों पर भारत और भारत-ब्रिटेन संबंधों पर विस्‍तार से अपने विचार प्रकट करूँगा। हमारे स्‍ट्रेटेजिक पार्टनरशिप के लिए आज हमने एक बोल्‍ड और महत्‍वाकॉंक्षी विज़न रेखांकित किया है और जो निर्णय हमने आज लिये हैं वह इस विज़न को पाने के हमारे दृढ़ विश्‍वास और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। आज के परिणामों से यह स्‍पष्‍ट होता है कि हमारे संबंध और नई ऊँचाइयों पर आज ही पहुँच चुके हैं।

प्रश्‍न : प्रधानमंत्री कैमरन, सत्‍ता आने के बाद से आप तीन बार भारत का दौरा कर चुके हैं। रिटर्न विजिट होने में इतना समय क्‍यों लग गया? और प्रधानमंत्री मोदी, भारत उत्‍तरोत्‍तर असहिष्‍णु स्‍थान बनता जा रहा है, क्‍यों?

ब्रिटिश प्रधानमंत्री (श्री डेविड कैमरन) : मैं आपके प्रश्‍न का उत्‍तर देना चाहूँगा। वास्‍तव में भारत ऐसा पहला प्रमुख देश है जिसका प्रधानमंत्री के रूप में मैंने दौरा किया, यह ऐसा प्रमुख देश भी है जिसका मैंने प्रतिपक्ष के रूप में दौरा किया। इस प्रकार, न केवल पिछले पांच वर्षों से अपितु पिछले दस वर्षों से इस संबंध में मजबूती देखने की मेरी इच्‍छा रही है। मेरी समझ से हमने उल्‍लेखनीय प्रगति की है। निवेश के आंकड़े बहुत आश्‍चर्यजनक हैं। भारत संयुक्‍त रूप से संपूर्ण यूरोपीय संघ की तुलना में ब्रिटेन में अधिक निवेश करता है और जी-20 के देशों की दृष्टि से ब्रिटेन भारत में सबसे बड़ा निवेशक, अमरीका, फ्रांस, जर्मनी से अधिक बड़ा निवेशक है। परंतु मेरी समझ से जहां हमारे बीच सहमति हुई है वह यह है कि हमें अपनी उपलब्धियों पर टिकने की बजाय हमें अपनी दृष्टि बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए और स्‍मार्ट शहर, डिजिटल इंडिया, स्‍वच्‍छ भारत जैसी परियोजनाओं को देखना चाहिए जहां हम विशेषज्ञता ला सकते हैं और वास्‍तव में साझेदारी का निर्माण कर सकते हैं। भारत शीघ्र ही विश्‍व में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था होगी। ब्रिटेन विश्‍व में पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था है। मेरी समझ से हमारे बीच वास्‍तविक क्षमता है।

जहां तक इस बात का संबंध है कि यात्रा करने में समय लग गया है, मुझे इस बात की खुशी है कि प्रधानमंत्री यहां हैं। पहले भी जी-20 में, अभी हाल ही में न्‍यूयार्क में कई बार हमारी मुलाकात हो चुकी है तथा हम इस यात्रा को मजबूत संबंधों का आधार बनाने के लिए सहमत हैं तथा यह वही है जो हम आज कर रहे हैं।

श्री नरेन्‍द्र मोदी : यह बात सही है कि दस साल का अन्‍तराल रहा लेकिन मेरे कार्यकाल में भी पिछले एक साल में ग्‍यारह मंत्री भारत से यहॉं आये और ग्‍यारह मंत्री यहॉं से भारत आये। इसलिए भारत और ब्रिटेन का जो संबंध है,विकास की जो नई ऊँचाइयों पर जाने का सामूहिक प्रयास है, वह निरन्‍तर चल रहा है। प्रधानमंत्री जी के साथ दो बार विस्‍तार से चर्चा करने का मुझे अवसर मिला है और हमारे संबंधों पर और अधिक कार्य करने की दिशा में हम काफी आश्‍वस्‍त हैं।

आपने और एक सवाल जो पूछा है, भारत बुद्ध की धरती है, भारत गॉंधी की धरती है। इसलिए हमारे संस्‍कारों में, एक बात हमारी रगों में है कि समाज के मूलभूत मूल्‍यों के खिलाफ किसी भी बात को भारत स्‍वीकार नहीं करता है और इसलिए हिन्‍दुस्‍तान के किसी भी कोने में कोई भी घटना घटी है, भारत के लिए वह घटना एक हो या दो हो या तीन हो, सवा सौ करोड़ के देश में एक घटना का महत्‍व है कि नहीं है, यह हमारे लिए मायने नहीं रखता है। हमारे लिए हर घटना गंभीर होती है। हम इसको किसी भी हालत में प्रोटेक्‍ट नहीं करते हैं। कानून कठोरता से कार्रवाई करता है और करेगा और भारत एक वाइब्रैन्‍ट डेमोक्रेसी है जो संविधान के तहत सामान्‍य से सामान्‍य नागरिक के जीवन को हर प्रकार की सुरक्षा, विचारों की रक्षा, उससे प्रतिबद्ध है और इस काम पर हम कमिटेड हैं।

प्रश्‍न : महोदय, मेरा प्रश्‍न दोनों प्रधानमंत्रियों से है। भारत और यूके दोनों ही समान आतंकी गुटों से आतंकवाद के शिकार हैं। हमारे दोनों देशों के शहरों पर ऐसे लोगों द्वारा बमबारी हो रही है जो आतंकवाद के समान स्रोत से भयभीत हैं। दोनों देशों ने अफगानिस्‍तान में आतंकियों के समान सेट से जानें गंवाई हैं। आज की आपकी चर्चा में, क्‍या आपने साझे सरोकारों पर चर्चा की? और क्‍या आप इस क्षेत्र में कुछ सहयोग पर सहमत हुए हैं?

श्री नरेन्‍द्र मोदी : धन्‍यवाद। आतंकवाद के प्रति आपने जो चिंता जताई यह चिंता मानवतावाद में विश्‍वास करने वाल हर किसी की चिंता है। मैं आज इस बात को बड़े संतोष के साथ कहना चाहता हूँ कि यूनाइटेड नेशन्‍स में आतंकवाद के मुद्दों को लेकर जितने इनिशियेटिव लिये गये हैं उसमें भारत और ब्रिटेन दोनों ने कंधे से कंधा मिलाकर हर चीज़ में इनिशियेटिव लिया है। अफगानिस्‍तान में ब्रिटेन के काफी सैनिकों ने अपना जीवन दिया है तो भारत ने भी अपने कई अच्‍छे अफसरों को वहॉं गंवाया है। हम दोनों देश ऐसे हैं जो आतंकवाद के कारण परेशान हैं। इसलिए आतंकवाद के खिलाफ लड़ना एक या दो या तीन देशों का विषय नहीं है। यह हर एक मानवतावादी की जिम्‍मेदारी है। आज आतंकवाद इस प्रकार फैला है, इसकी कोई सीमायें नहीं हैं, इसके कोई भूभाग नहीं हैं। हर दिन नये संगठन के नाम से जन्‍म लेते हैं, हर दिन नये इक्‍युपमेन्‍ट उनके हाथ में आते हैं। अब आतंकवादी कोई इक्‍युपमेन्‍ट मैन्‍युफैक्‍चरिंग तो करते नहीं हैं। सबसे पहले, महात्‍मा गॉंधी कहते थे, कि न्‍याय तब आता है जब आपको ज्ञान हो कि अन्‍याय किसको कहते हैं। हम टेररिस्‍ट किसको कहते हैं? टेररिस्‍टों का मददगार कौन है? यूनाइटेड नेशन्‍स में इसके संबंध में एक प्रस्‍ताव है उसकी परिभाषा करने के लिए। अभी तक उसका कोई निपटारा नहीं हो रहा है, वैसे ही अटका पड़ा है। इसमें हम और ब्रिटेन दोनों शरीक हैं कि इसकी व्‍याख्‍या होनी चाहिये। इसलिए मानवतावादी शक्तियों को एक होना चाहिये। जो टेररिस्‍ट हैं, जो टेररिस्‍टों को मदद करते हैं, उन शक्तियों को आइसोलेट करना चाहिये और मानवतावाद की रक्षा करने के लिए हम सबको मिल-जुलकर प्रयास करना चाहिये।

श्री डेविड कैमरन : आज हमने आतंकी खतरे पर प्रारंभिक चर्चा की, जिससे हम दोनों जूझ रहे हैं। हम कल सवेरे इस मुद्दे पर गहन चर्चा करने वालें हैं। उदाहरण के लिए, भारत को मुंबई की गलियों में आतंकवाद का दंश झेलना पड़ा है। हमने लंदन की गलियों में यह दंश झेला है तथा हमें विशेष रूप से इस इस्‍लामिक अतिवादी हिंसा और आतंकवाद का सामना करना होगा जो न केवल हमारे देशों को अपितु पूरी दुनिया को भी काफी क्षति पहुंचा रहा है। मैं दलील देता हूँ, मैं इसे करूँगा, केवल आतंकी गुट को बंद करना पर्याप्‍त नहीं है, अशासित स्‍थान को बंद करना पर्याप्‍त नहीं है, जो ऐसा कार्य है जो अफगानिस्‍तान में हुआ; यह प्रयास करना और आश्‍वस्‍त करना कि देश का संचालन ऐसी सरकार द्वारा हो जिसके पास उस देश से बाहर आतंकी समूहों को रखने की ताकत हो। हमें उस नैरेटिव से भी निपटना होगा जिसका आतंकी प्रयोग करते हैं, शिकायत की संस्‍कृति के माध्‍यम से वे अपने अनुचित कार्यों को उचित ठहराने का प्रयास करते हैं और मेरी समझ से यह कल हमारी चर्चा का अंग होगा।

प्रश्‍न : प्रधानमंत्री आपका धन्‍यवाद, प्रधानमंत्री कैमरन, क्‍या आपसे पूछ सकता हूँ आप इस देश में प्रधानमंत्री मोदी का स्‍वागत करते हुए कितना सहज महसूस कर रहे हैं, इस तथ्‍य को देखते हुए कि प्रधानमंत्री के रूप में दो साल के आपके कार्यकाल में उनको इस देश की यात्रा की अनुमति गुजरात के मुख्‍यमंत्री के रूप में उनके रिकार्ड के कारण नहीं दी गई थी? और यूरोप पर, क्‍या मैं आपसे पूछ सकता हूँ कि डोनाल्‍ड टस्‍क ने कहा है कि जब तक यूरोपीय संघ अपनी बाहरी सीमाओं को सुदृढ़ नहीं करेगा तब तक सेनगेन का कोई भविष्‍य नहीं होगा। क्‍या आप उनसे सहमत हैं?

और आपका इस बारे में क्‍या कहना कि मार्टिन शुल्‍ज जो यह कहते हैं कि यूरोप बैंकरों पर लाखों पाउंड खर्च करके बहुत प्रसन्‍न है जो उनकी मदद करते हैं, परंतु जब प्रवासियों की मदद करने की बात आती है, तो स्थिति काफी दयनीय हो जाती है?

प्रधानमंत्री मोदी, क्‍या मैं आपसे पूछ सकता हूँ कि अगले दो सालों में यूनाइटेड किंगडम ने इस बात पर जनमत संग्रह होगा कि यूरोपीय संघ में उसे बने रहना चाहिए या उससे बाहर निकलना चाहिए? क्‍या आप यूरोपीय संघ के बाहर यूनाइटेड किंगडम का भविष्‍य देखते हैं?

और प्रधानमंत्री मोदी, क्‍या मैं आपसे पूछ सकता हूँ, कल रात वेम्‍बले स्‍टेडियम में स्‍पष्‍ट रूप से आपके लिए एक भव्‍य स्‍वागत समारोह होगा परंतु आज ऐसे अनेक लोग हैं जो विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं तथा कह रहे हैं, और मैं सोच रहा हूँ कि आप उनसे क्‍या कहेंगे, कि गुजरात के मुख्‍यमंत्री के रूप में आपका रिकार्ड ठीक नहीं है, आप उस सम्‍मान के हकदार नहीं हैं जो सामान्‍यतौर पर विश्‍व के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेता को दिया जाता है?

श्री डेविड कैमरन : ढेर सारे प्रश्‍न हैं और मैं उनके उत्‍तर देने का प्रयास करूँगा। यहां प्रधानमंत्री मोदी का स्‍वागत करते हुए मुझे प्रसन्‍नता हो रही है। वह भारत के लोगों से प्रचुर जनमत लेकर आए हैं जिन्‍होंने रिकार्ड एवं ऐतिहासिक बहुमत के साथ उनको प्रधानमंत्री बनाया है। जहां तक इस बात का संबंध है कि अतीत में क्‍या हुआ, कानूनी कार्यवाही हुई, जैसा कि मेरे सहयोगी प्रीति पटेल ने भी कहा आज कुछ देर पहले, उस समय ब्रिटिश सरकार से अभ्‍यावेदन दाखिल किया गया। जब हम भारत और ब्रिटेन के बीच भारी साझेदारी पर चर्चा कर रहें है, तो हम दोनों की सोच में यह बात है कि हमारे देश इस संसद के साथ अपनी साझेदारी को सुदृढ़ करने के लिए साथ मिलकर काम करें।

आपने जो दूसरा मु्द्दा उठाया है, उसके बारे में मेरा यह मानना है कि संकट की घड़ी में बैंकों को मानना यह नहीं है कि वे अनोखे रूप में आश्‍चर्यजनक चीजें या आश्‍चर्यजनक लोग हैं परंतु यदि आप बैंकों को ढहने देंगे, तो वे अपने अन्‍य व्‍यवसायों को भी गिरा देंगे। इसी वजह से, हमने इस देश में प्रणाली को सुधारा है जहां यदि भविष्‍य में बैंक संकट में फंसते हैं, तो उनको उनके अपने क्रेडिटर द्वारा न कि करदाताओं द्वारा संकट से बाहर निकाला जाता है।

जहां तक प्रवासियों की मदद का संबंध है, मेरी समझ से ब्रिटेन इस मामले में यूरोप के किसी दूसरे देश की तुलना में अपना सिर गर्व से ऊपर उठा सकता है और सीरिया शरणार्थी संकट में मदद करने, पड़ोसी देशों की मदद करने, सीरिया में लोगों की मदद करने और निश्चित रूप से शरणार्थियों शिविरों की मदद करने में संयुक्‍त राज्‍य अमरीका के अलावा विश्‍व में किसी अन्‍य देश की तुलना में अधिक किया है। अमरीका को छोड़कर किसी और देश ने हमसे ज्‍यादा नहीं किया है।

जहां तक डोनाल्‍ड टस्‍क जो कहते हैं सेनगेन के बारे में, उसका संबंध है : ब्रिटेन सेनगेन नहीं है। यूरोपीय संघ का हिस्‍सा होते हुए भी हमने अपनी सीमाएं रखी हैं। इस प्रकार, वास्‍तव में मेरे लिए यह कहना नहीं है, परंतु स्‍पष्‍ट रूप से मैं इस प्रवासी संकट ने निपटने में यूरोप के अपने सहयोगियों की मदद करना चाहता हूँ। इसी वजह से, हमने यूरोपीय शरणार्थी सहयता अधिकारियों की मदद करने में यूरोप के किसी अन्‍य देश की तुलना में वास्‍तव में अधिक किया है, जो सेनगेन की बाहरी सीमाओं पर इस संकट से निपटने के लिए मदद कर रहे हैं तथा हम ऐसा करना जारी रखेंगे।

परंतु स्‍पष्‍ट रूप से, आपके पास बाहरी सीमाओं का कोई सिस्‍टम होना चाहिए या आंतरिक सीमाओं का कोई सिस्‍टम होना चाहिए। आपकी सीमाएं ऐसी नहीं हो सकती जो किसी भी स्‍तर पर काम न करे। परंतु, जैसा कि मैंने कहा, ब्रिटेन सेनगेन से बाहर बना रहेगा। हम अपनी सीमाएं रखेंगे। हमारा यह मानना है कि हमारी सुरक्षा के लिए यह जरूरी है। मेरी समझ से आपके सभी प्रश्‍नों का यह उत्‍तर है।

श्री नरेन्‍द्र मोदी : एक तो keep the record straight. इसके लिए मैं आपको जानकारी दूँ। मैं 2003 में यहॉं आया था और बहुत ही स्‍वागत और सम्‍मान के साथ मैनें उस समय भी यहॉ कार्यक्रमों में भाग लिया था। यू.के. ने कभी भी मुझे यहॉं आने पर रोका नहीं है। कभी कोई प्रतिबन्‍ध नहीं लगाया है। मेरे समयाभाव के कारण मैं नहीं आ पाया हूँ, यह अलग बात है। तो यह गलत परसेप्‍शन है, उसको करेक्‍ट कर लीजिये।

दूसरी बात है कि दो साल के बाद रेफरेण्‍डम होगा। मैं मानता हूँ यहॉं के नागरिक बहुत समझदार हैं। मुझे उनको कोई टिप देने की जरूरत नहीं है, लेकिन जहॉं तक भारत का सवाल है, यूरोपियन यूनियन में अगर हमारा कोई प्रवेश द्वार है तो वह ब्रिटेन है और हमारा सबसे ज्‍यादा आर्थिक कारोबार किसी के साथ है, तो ब्रिटेन के साथ है। हम इसी प्रवेश द्वार से गुजर कर बाकी देशों में जा रहे हैं। तो हमारा तो भला यही है कि हम तो ब्रिटेन को हमारा ही प्रवेश द्वार मानकर ही आगे बढ़ना चाहेंगे।

प्रश्‍न : मेरा आप दोनों से सवाल है। मेरा सवाल यह है कि भारत इस समय एक बड़े बदलाव के दौर से गुज़र रहा है और उसमें महत्‍वपूर्ण रोल आपके द्वारा शुरू की गई कई योजनाओं का भी है।मेरा प्रधानमंत्री जी आपसे सवाल है कि भारत की आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियों में आप किस तरह के सहयोग की ब्रिटेन से आशा कर रहे हैं?

मेरा कैमरॉन साहब से सवाल है कि भारत और ब्रिटेन के बहुत पुराने और ऐतिहासिक संबंध हैं। आप इन संबंधों को पुनर्परिभाषित करने के लिए किस तरह की नई भूमिका में दिखाई देंगे या किस तरह की नई कोशिशें करेंगे ताकि ये संबंध और प्रगाढ़ हों।

श्री नरेन्‍द्र मोदी : देखिये, भारत जिस दिशा में प्रगति करना चाहता है। एक छोटा सा उदाहरण देता हूँ। हमारे यहॉं टेली-डेन्सिटी बहुत है, करीब 27-28 हजार टावर हैं और वे डीजल का उपयोग करते हैं, हमें डीजल इम्‍पोर्ट करना पड़ता है, क्‍लाइमेट के लिए तकलीफ पैदा करते हैं। यू.के. के पास हाइड्रोजन फ्यूल सेल्‍स की टेक्‍नॉलॉजी है। हम चाहते हैं कि भारत को यह टेक्‍नॉलॉजी उपलब्‍ध हो। तो हमारे ये जो 27-28 हजार टावर हैं जो निकट भविष्‍य में 40,000 होने की सम्‍भावना है। तो हमें जो डीजल इम्‍पोर्ट करना पड़ता है उससे मुक्ति होगी, एनवायरनमेन्‍ट की हम मदद कर पायेंगे, यह टेक्‍नॉलॉजी हमारे काम आयेगी। हमारे यहॉं कोल माइनिंग होता है। अब कोल को हम ग्रीन टेक्‍नॉलॉजी से कैसे माइनिंग करें, कोल से गैसिफिकेशन केसे करें, हम क्‍लीन एनर्जी की दिशा में कैसे जायें, स्किल लेवल कैसे करें। यू.के. ने कॉम्प्रिहेन्सिव स्किल डेवलपमेन्‍ट की दिशा में बहुत काम किया है। हेल्‍थ सेक्‍टर में अच्‍छे अस्‍पतालों की दिशा में काम किया है। इन सारे विषयों पर चर्चा हुई है और इन सारी बातों में भारत के गरीब से गरीब व्‍यक्ति को किस प्रकार से वैश्विक संबंध काम आ सकते हैं, वैश्विक पूँजी निवेश कैसे काम आ सकता है, उस दिशा के हमारे प्रयासों में आज मेरी यू.के. की इस यात्रा से मैं विश्‍वास से कह सकता हूँ कि इन सारे विषयों को हम सफलतापूर्वक आगे बढ़ायेंगे।

श्री डेविड कैमरन : धन्‍यवाद। मुझे कहना चाहिए कि मैं इसे एक आधुनिक, गतिशील साझेदारी के रूप में देखता हूँ। यह संभवत: सच है कि बरसों से भारत के बीच संबंध एक तरह से अतीत में कुछ खराब हुए थे। मेरी समझ से हाल के वर्षों में ये संबंध गलत धारणाओं के कारण खराब हुए थे कि भारत के साथ व्‍यापार बस आउटसोर्सिंग के बारे में है। आज के संबंध को देखिए। यदि कोई 20 साल पहले आपसे यह कहा होता कि ब्रिटेन में सफल कार विनिर्माताओं में से एक, जिसकी पूरी दुनिया में बिक्री हो रही है और विस्‍तार हो रहा है, भारतीय पूंजी, ब्रिटिश डिजाइन और विनिर्माण विशेषज्ञता का मिश्रण होगी, तो लोग कहते कि सच में क्‍या यह होने जा रहा है? यह सब जगुआर लैंड रोवर ने कर दिखाया है, यह तो मात्र एक उदाहरण है।

मेरी समझ से यह समय अतीत की भ्रांतियों से ऊपर उठकर इस संबंध को सुदृढ़ करने तथा यह स्‍वीकार करने का है कि यह दो देशों की बहुत अधिक गतिशील साझेदारी है जो समान चुनौतियों से जूझ रहे हैं; हम किस तरह विकास करें और समृद्ध हों, हम किस तरह आतंकवाद से लड़ें, किस तरह हम अपने बच्‍चों के भविष्‍य के लिए हरित पर्यावरण का सुनिश्‍चय करें? अब हम इन सब चीजों के बारे में बात कर रहे हैं। मेरी समझ से आकर्षण यह है कि प्रधानमंत्री मोदी के स्‍मार्ट शहर, स्‍वच्‍छ भारत, डिजिटल प्रौद्योगिकी, कुशल भारत, जिसके तहत भारत के 10 लाख युवाओं को कुशल बनाना है, के विजन में, इस भविष्‍य का साथ मिलकर निर्माण करने में ब्रिटेन के लिए भूमिका निभाने के लिए प्रचुर अवसर हैं। इसी वजह से आज हम इतने सारे क्षेत्रों में इतने सारे करारों पर हस्‍ताक्षर करके उत्‍साहित हैं जो दर्शाते हैं कि यह सही मायने में बहुत अधिक गतिशील साझेदारी है।

इसी के साथ, अब हमारा समय समाप्‍त हो रहा है, आज दोपहर में दो भाषण हैं जिसमें पहला भाषण संसद में है – और हमें जरूर जाना चाहिए तथा उसका सर्वाधिक उपयोग करना चाहिए। आप सभी का बहुत – बहुत धन्‍यवाद।


पेज की प्रतिक्रिया

टिप्पणियाँ

टिप्पणी पोस्ट करें

  • नाम *
    ई - मेल *
  • आपकी टिप्पणी लिखें *
  • सत्यापन कोड * Verification Code