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उप-राष्ट्रपति की ग्वाटेमाला यात्रा के दौरान सचिव (पूर्व) द्वारा मीडिया वार्ता की प्रतिलिपि

मई 09, 2018

वक्ता 1: नमस्कार मित्रों। उच्च स्तरीय बैठकों के बाद माननीय उपराष्ट्रपति आज ग्वाटेमाला के नेताओं के साथ थे, हम इस मीडिया वार्ता के लिए तैयार हैं और इस वार्ता में मैं सचिव (पूर्व), श्रीमती प्रीति सरन, संयुक्त सचिव (एलएसी), श्री पार्थ सत्पथी और ग्वाटेमाला में हमारे राजदूत श्री सजीव बाबू कुरुप का स्वागत करता हूँ। मैं सचिव (पूर्व) से एक प्रारंभिक टिप्पणी देने का अनुरोध करता हूँ और इसके बाद हम प्रश्नोत्तर सत्र आरंभ करेंगे।

सचिव (पूर्व), श्रीमती प्रीति सरनः धन्यवाद, नमस्कार मित्रों। मैं आपको आज दिन की घटनाओं के बारे में बताऊँगी। आप जानते हैं कि आज ग्वाटेमाला की यात्रा के साथ माननीय उपराष्ट्रपति ने अपनी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा आरंभ की, ग्वाटेमाला अपनी अर्थव्यवस्था और आबादी के हिसाब से, मध्य अमेरिका का सबसे बड़ा देश है। ग्वाटेमाला, मध्य अमेरिका में उत्तर को दक्षिण से जोड़ने के साथ-साथ प्रशांत महासागर को अटलांटिक महासागर से जोड़ता है, इसलिए यह हमारे आर्थिक हितों के संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थान पर स्थित है।

तथ्य यह है कि हमारे उपराष्ट्रपति ने ग्वाटेमाला के साथ दक्षिण मध्य अमेरिका की यात्रा शुरू करने का निर्णय किया है, जिसकी ग्वाटेमाला के नेतृत्व द्वारा सराहना की गई। ग्वाटेमाला के राष्ट्रपति के साथ हुई वार्ता से आरंभ कर आज उनकी तीन महत्वपूर्ण बैठकें हुईं। इसके बाद उन्होंने संसद के अध्यक्ष से भेंट की और ग्वाटेमाला के उपराष्ट्रपति के साथ पूर्ण द्विपक्षीय प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक आयोजित की गई, जो वास्तव में देश के कार्यकारी राष्ट्रपति हैं। माननीय उपराष्ट्रपति के साथ अपनी बैठक के तुरंत बाद ग्वाटेमाला के राष्ट्रपति कोस्टारिका में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में गए।

जैसा कि मैंने पहले उल्लेख किया था, ग्वाटेमाला के पूरे नेतृत्व ने इस बात की गहरी प्रशंसा की कि उपराष्ट्रपति ने जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री और विभिन्न राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व करने वाले संसद सदस्यों के एक बहु-पक्षीय प्रतिनिधिमंडल सहित उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ ग्वाटेमाला जाने का निर्णय लिया। भारत के सुदृढ़ लोकतंत्र की सराहना की गई और उन्होंने कहा कि वे वास्तव में भारत की राजनीतिक लोकतांत्रिक बहुलवादी संरचना के साथ-साथ इसकी आर्थिक विकास कहानी से भी काफी कुछ सीख सकते हैं।

राष्ट्रपति की बैठक में उपराष्ट्रपति और विदेश मंत्री भी थे। उपराष्ट्रपति के साथ उनकी बैठक में उनके प्रतिनिधिमंडल के अन्य वरिष्ठ सदस्य भी थे, जो उपराष्ट्रपति सचिवालय के साथ-साथ विदेश कार्यालय और संसद के अध्यक्ष दोनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ग्वाटेमाला पक्ष के प्रतिनिधिमंडल में संसद का पूरा कार्यकारी बोर्ड शामिल था।

मैं चर्चा में शामिल कुछ खास पक्षों के बारे में बताऊँगी और उसके बाद विशिष्ट बिंदुओं की बात करूँगी। तो चर्चा के संदर्भ में दोनों पक्षों के नेतृत्व द्वारा दोहराया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण तत्व यह तथ्य था कि भारत और ग्वाटेमाला में बहुत मजबूत आर्थिक संबंध हैं। ग्वाटेमाला के नेतृत्व ने भारत के मजबूत लोकतंत्र, इसकी विविधता, समृद्ध भारतीय संस्कृति और आर्थिक विकास के लिए इसे बधाई दी।

जैसा कि मैंने पहले उल्लेख किया था, उन्होंने कहा कि ग्वाटेमाला भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को बढ़ाने के लिए अच्छी स्थिति में है और इस संदर्भ में उन्होंने ग्वाटेमाला में काम कर रही भारतीय कंपनियों की मौजूदगी की सराहना की, ग्वाटेमाला के राष्ट्रपति ने विशेष रूप से बजाज मोटरसाइकिलों की सफलता की कहानी को संदर्भित किया जबकि अन्य विदेशी कंपनियों ने भी ग्वाटेमाला में अपने उत्पादों को बेचा है, लेकिन बजाज द्वारा प्रदान की गई मजबूत मरम्मत सेवाओं और सुविधाओं के कारण यह मोटर साइकिलों की बिक्री में अन्य सभी कंपनियों से आगे है।

अन्य क्षेत्रों में बड़ी संभावनाएं देखी गई हैं, जिनमें एक फार्मास्यूटिकल्स है और जहां नेताओं को लगता है कि हम कृषि क्षेत्र, कृषि अकादमिक आदान-प्रदान, कृषि उत्पादों, वन्य जीवन संरक्षण, शिक्षा क्षेत्र, , आईटी और आईटीईएस और निश्चित रूप से ऑटोमोबाइल और फार्मास्यूटिकल्स में और बेहतर सहयोग कर सकते हैं ।

संस्कृति पर भी चर्चा की गई थी। ग्वाटेमाला में योग की प्रशंसा की गई और सिनेमा की संभावित क्षमता पर बात हुई। ग्वाटेमाला की एक फिल्म को मुंबई में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मिला और इसकी सराहना की गई। ग्वाटेमाला के राष्ट्रपति ने खुद कहा था कि वे भारतीय सिनेमा के प्रशंसक है और ग्वाटेमाला के साथ टेलीविजन और सिनेमा दोनों में अधिक सहयोग चाहते हैं। पर्यटन एक अन्य क्षेत्र है, जिसमें दोनों देशों के युवाओं को जोड़ने की क्षमता और इच्छा है।

क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई। ग्वाटेमाला बहुत अच्छी स्थिति में है। यह मध्य अमेरिका के क्षेत्रीय एकीकरण संगठन सीआईसीए का सदस्य है। यह सीएलएसी का सदस्य भी है। हमने सीआईसीए और सीएलएसी में नियमित मंत्री स्तरीय बैठकें की हैं। माननीय उपराष्ट्रपति कल प्राचीन शहर एंटीगुआ - ग्वाटेमाला का दौरा करेंगे, जो एक बहुत ही लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। सड़क मार्ग से यहां से लगभग एक घंटे की दूरे पर एक पुराना स्पेनिश पर्यटक शहर है। एंटीगुआ ,ग्वाटेमाला अबीरा अमेरिकी समूह के एक प्रमुख शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा जिसमें 22 देश भागीदारी करेंगे, ये स्पेनिश और पुर्तगाली भाषी देश हैं। हम सदस्य या पर्यवेक्षक नहीं हैं लेकिन उन्होंने निश्चित रूप से उल्लेख किया कि यह एक और क्षेत्रीय समूह है, जिसके माध्यम से भारत और ग्वाटेमाला आगे सहयोग कर सकते हैं।

संयुक्त राष्ट्र में दोनों पक्षों द्वारा किए गए सहयोग की प्रशंसा की गई और उस संदर्भ में दोनों पक्षों के नेताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि आतंकवाद अपने सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में एक खतरा है और हमें आतंकवाद के संकट से निपटने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। ग्वाटेमाला और भारत के साथ अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को संयुक्त राष्ट्र में भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जो लोग आतंकवाद की सहायता करते हैं और उन्हें बढ़ावा देते हैं या आतंक को वित्तपोषण प्रदान करते हैं, उनसे बहुत कड़ाई से निपटा जाना चाहिए। इस पर ग्वाटेमाला पक्ष सहमत है और इसकी पुष्टि करता है।

हम निकट सहयोग कर रहे हैं, हमने सुरक्षा परिषद में वर्ष 2021-22 के लिए भारत और 2031-32 के लिए ग्वाटेमाला की गैर-स्थायी सदस्यता के लिए एक दूसरे को पारस्परिक समर्थन प्रदान किया है। चर्चाओं के दौरान हमने इस विशेष सदस्यता के लिए एक-दूसरे के पारस्परिक समर्थन की बात एक बार फिर दोहराई।

माननीय उपराष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र में हुए विभिन्न चुनावों के लिए ग्वाटेमाला से प्राप्त भारी समर्थन के लिए ग्वाटेमाला का धन्यवाद किया, ग्वाटेमाला ने बहुत मजबूत समर्थन प्रदान किया है।

उन्होंने यह भी दोहराया कि ग्वाटेमाला विस्तारित सुरक्षा परिषद में भारत की सदस्यता का भी समर्थक है। अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन, अंतरराष्ट्रीय संदर्भ में सहयोग का एक और तत्व था, ग्वाटेमाला के राष्ट्रपति ने इसकी प्रशंसा की और हमारे उपराष्ट्रपति ने ग्वाटेमाला को सौर गठबंधन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने गठबंधन में शामिल होने में रुचि दिखाई थी, ग्वाटेमाला में हमारा सहयोग विकास सहायता के हिस्से के रूप में सोलर मामास को अतीत में प्रदान किए गए प्रशिक्षण और अन्य सहायता के लिए हमें भी धन्यवाद दिया गया।

ग्वाटेमाला की ओर से, ग्वाटेमाला में बनने वाले नए हवाई अड्डों, विशेष रूप से उचित परियोजनाओं में सौर पैनलों की स्थापना के लिए अनुरोध भी किया गया था। माननीय उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे इस प्रस्ताव पर बहुत सकारात्मक रूप से विचार करेंगे। चर्चा के अंत में हमारी राजनयिक अकादमियों के बीच अधिक सहयोग पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। हमने अपने आईटीईसी कार्यक्रम के अंतर्गत ग्वाटेमाला में अंग्रेजी भाषा का प्रशिक्षण प्रदान करने का अपना आशय पत्र भी दिया। ग्वाटेमाला को सौर ऊर्जा और अन्य नए और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में मदद करने का अनुरोध एक नया घटक था।

ये कुछ व्यापक पहलू हैं। विशेष रूप से संसद सदस्यों के साथ बैठक हुई, जिसमें संसद का पूरा कार्यकारी बोर्ड मौजूद था, उन्होंने भारत के मजबूत लोकतांत्रिक प्रणाली की बहुत प्रशंसा की और कहा कि हमें बहुत कुछ सीखना है जो हम सीख सकते हैं। एक संसदीय मैत्री समूह की स्थापना का प्रस्ताव किया गया था, माननीय उपराष्ट्रपति ने कहा कि निश्चित रूप से उस पर विचार करेंगे। हमारे बीच अधिक संसदीय आदान-प्रदान होने पर चर्चा की गई थी और इस संदर्भ में माननीय उपराष्ट्रपति ने ग्वाटेमाला के संसद सदस्यों को भारतीय संसदीय प्रणाली के बारे में एक बहुत ही विस्तृत जानकारी दी और बताया कि वे राज्यसभा के अध्यक्ष हैं और उपस्थित संसद सदस्यों द्वारा इसकी सराहना की गई।

हम एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करेंगे जो अगले एक घंटे में आपको उपलब्ध होगी, इसमें आपको अतिरिक्त बिंदु मिलेंगे जिनका उपयोग किया जा सकता है लेकिन मैं यहां समाप्त करूँगी और यदि आप कोई प्रश्न करना चाहें तो उसका उत्तर देने में मुझे प्रसन्नता होगी।

प्रश्न: क्या आप हमें वन्य जीवन संरक्षण समझौते के बारे में संक्षेप में बता सकती हैं?

सचिव (पूर्व), श्रीमती प्रीति सरनः एक समझौते पर विचार किया जा रहा है। जैसा कि आप जानते हैं भारत हमारे बाघों की आबादी के संरक्षण का एक बहुत अच्छा उदाहरण है। ग्वाटेमाला जैव-विविधता से समृद्ध देश है जिसमें बहुत सारे जंगली जीव हैं। उनके पास चीतों के संरक्षण का अनुभव है और ग्वाटेमाला पक्ष से भारतीय अनुभव से सीखने और इसे साझा करने का एक प्रस्ताव दिया गया है। हम इसे बहुत सकारात्मक रूप से देख रहे हैं और हम चर्चा करेंगे। मुझे लगता है कि अकादमिक आदान-प्रदान, तकनीक के आदान-प्रदान, एक दूसरे के पक्ष में विशेषज्ञता के अन्य पहचाने गए क्षेत्रों की तरह यह एक अच्छा मौका है, यह भविष्य में सहयोग का एक और महत्वपूर्ण क्षेत्र है।

प्रश्न: सौर ऊर्जा के संबंध में, क्या ग्वाटेमाला पक्ष से कोई प्रस्ताव प्राप्त हुआ और क्या उन्हें समर्थन प्रदान किया जाएगा, वह बुनियादी ढांचा समर्थन होगा या वित्तीय सहायता, भारत किस प्रकार का समर्थन दे रहा है?

सचिव (पूर्व), श्रीमती प्रीति सरनः हम इंतजार कर रहे हैं। यह प्रस्ताव विशेष रूप से ग्वाटेमाला के उपराष्ट्रपति द्वारा चर्चाओं में दिया गया था। माननीय उपराष्ट्रपति ने कहा था कि हम इस प्रस्ताव का स्वागत करते हैं और हम इसे बहुत सकारात्मक रूप से देखेंगे और जैसे ही हम प्रस्ताव प्राप्त करेंगे, इसे लागू करने के लिए ग्वाटेमाला पक्ष के साथ काम करने में हमें बहुत खुशी होगी।

प्रश्न: वार्ता में ऑटोमोबाइल क्षेत्र का उल्लेख था, आपने कहा कि दो पहिया और तीन पहिया वाहनों में बजाज अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। क्या बजाज के अलावा ग्वाटेमाला में कोई और बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी अच्छा प्रदर्शन कर रही है?

ग्वाटेमाला के राजदूत, श्री सजीव बाबू कुरुप: दो पहिया क्षेत्र में टीवीएस, रॉयल एनफील्ड और चार पहिया वाहनों के क्षेत्र में महिंद्रा पिकअप।

प्रश्न: अंग्रेजी भाषा, हमारा आईटीईसी कार्यक्रम पहले से ही चल रहा है, इसलिए, क्या यह समझौता एमईए विशिष्ट है या अंग्रेजी भाषा में लोगों के प्रशिक्षण के लिए है?

सचिव (पूर्व), श्रीमती प्रीति सरनः राजनयिक अकादमी भारत के विदेशी सेवा संस्थान के साथ है, इसलिए यह ग्वाटेमाला के विदेश कार्यालय के राजनयिकों के प्रशिक्षण के लिए विशिष्ट होगी। लेकिन अतीत में पेश किए गए आईटीईसी कार्यक्रम के अलावा अंग्रेजी भाषा प्रशिक्षण, विशेष रूप से ग्वाटेमाला में अंग्रेजी भाषा शिक्षकों को प्रशिक्षण देने के लिए तैयार किया गया है जो सामान्य आईटीईसी कार्यक्रम की तुलना में एक बड़ी परियोजना होगी।

इस पर भी चर्चा हुई कि भारत में बंदरगाह और बुनियादी ढांचे के विकास की क्षमता है और माननीय उपराष्ट्रपति ने भी इस क्षेत्र में सहयोग की पेशकश की है।

प्रश्न: हालांकि भारतीय प्रवासी समुदाय बहुत छोटा है लेकिन क्या इन बैठकों या मुद्दों के दौरान भारतीय प्रवासियों के संबंध में किसी मुद्दे पर चर्चा की गई थी?

सचिव (पूर्व), श्रीमती प्रीति सरनः नहीं, कोई समस्या नहीं उठाई गई थी। आप सही हैं, यह एक छोटा प्रवासी समुदाय है लेकिन कोई समस्या नहीं उठाई गई थी। मुझे लगता है कि भारतीय प्रवासी अच्छी तरह से प्रतिष्ठित हैं। वे मेहनती हैं, जहां भी जाते हैं, वे स्थानीय अर्थव्यवस्था में बहुत सकारात्मक योगदान देते हैं। वे भारत के लिए एक बहुत मजबूत संपर्क हैं। वे जहां भी गए हैं, उन्होंने मेजबान देश और अपने देश के बीच के अंतर को भरने वाले सच्चे भारतीय राजदूतों का प्रतिनिधित्व किया है।

इसे ध्यान में रखते हुए माननीय उपराष्ट्रपति ने यह मुद्दा बना दिया है कि वे जिन तीन देशों का दौरा कर रहा है उनमें से प्रत्येक में वे भारतीय समुदाय के सदस्यों से बातचीत करेंगे और वास्तव में हमारे राजदूत आज शाम को सात बजे एक स्वागत समारोह आयोजित करेंगे। मैं हमारे राजदूत की ओर से आप सभी को उस स्वागत समारोह में उपस्थित होने के लिए आमंत्रित करती हूँ, भले ही यह एक छोटा सा समुदाय हो, माननीय उपराष्ट्रपति ने उनसे मिलने का निर्णय किया है और आप उस बातचीत को सुनेंगे जो उनसे की जाएगी।

माननीय उपराष्ट्रपति को पिछले चार वर्षों में उदारीकरण के बारे में भारत की विकास कहानी को ग्वाटेमाला के नेतृत्व के साथ साझा करने का अवसर मिला और जिसके परिणामस्वरूप लगातार वृद्धि हुई है। उन्होंने विश्व को एक परिवार मानने वाले भारत के "वसुधैव कुटुंबकम" के दर्शन के बारे में भी बात की और हम वैश्विक स्तर पर बाहरी दुनिया में अपने दोस्तों से इसी तरह का संपर्क चाहते हैं।

प्रश्न: आपने पर्यटन के बारे में भी बात की, जहां तक पर्यटन का संबंध है, भविष्य में किस तरह के कार्य किए जाएंगे, क्योंकि दोनों देशों के पास इतने सारे स्थान हैं। तो क्या इसके लिए आगे की कोई योजना है?

सचिव (पूर्व), श्रीमती प्रीति सरनः वैसे तथ्य यह है कि इस तरह की एक उच्च स्तरीय यात्रा खुद ही संबंधों को उन्नत करती है। माननीय उपराष्ट्रपति ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि हमें इन उच्चस्तरीय आदान-प्रदानों को जारी रखना चाहिए। उन्होंने हमारे नेतृत्व के ग्वाटेमाला आने का स्वागत किया, उन्होंने कहा कि हमारे बीच नियमित विदेश कार्यालय परामर्श होना चाहिए। विदेश कार्यालय परामर्श एक तंत्र है जो हमें मुद्दों, बाधाओं पर चर्चा करने, मुद्दों को सुलझाने में मदद करता है ताकि पर्यटन संबंधों सहित अधिक व्यावसायिक संबंध बनाए जा सकें। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सिनेमा को एक महत्वपूर्ण माध्यम माना गया और यह मुद्दा भी उठाया गया था। आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

वक्ता 1: इसके साथ ही वार्ता समाप्त होती है। आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

(समापन)



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