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पनामा की यात्रा के दौरान उपराष्ट्रपति द्वारा मीडिया के लिए टिप्पणी (9 मई, 2018)

मई 10, 2018

  • मैं मध्य अमेरिका के सबसे खूबसूरत देशों में से एक, पनामा आकर अत्यंत प्रसन्न हूँ, यह देश अटलांटिक और प्रशांत महासागरों को जोड़ता है। मेरे और मेरे प्रतिनिधिमंडल के स्वागत और उदार आतिथ्य के लिए मैं पनामा के राष्ट्रपति, महामहिम श्रीमान जुआन कार्लोस वेरेला रोड्रिग्स का आभार व्यक्त करता हूँ।
  • भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में यह मेरी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा है। लैटिन अमेरिका के तीन देशों की यह यात्रा भारत द्वारा इस क्षेत्र और विशेष रूप से पनामा के साथ अपने संबंधों को दिए जाने वाले महत्व को दर्शाती है।
  • राष्ट्रपति वेरेला के साथ मेरी बहुत उपयोगी और सार्थक चर्चा हुई, जिसमें द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मुद्दों सहित हमारे संबंधों के सभी पक्षों को शामिल किया गया। हमारी बातचीत में लोकतंत्र, बहुलवाद और समावेशी विकास के साझा मूल्यों पर प्रकाश डाला गया। यह एकजुटता, सहयोग और पारस्परिक सम्मान की भावना को भी प्रतिबिंबित करती है।
  • हमने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में इस संकट से लड़ने का संकल्प लिया और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद का मुकाबला करने में सहयोग को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।
  • मुझे खुशी है कि पनामा ने भारत को 'फाल्कन पॉलिसी' के अंतर्गत संबंधों को मजबूत करने वाले देशों में शामिल किया है। मुझे इस बात की भी खुशी है कि पनामा ने,पनामा जाने वाले भारतीयों के लिए वीज़ा सुविधा को व्यवस्थित करने का फैसला किया है। भारत पनामा सहित सभी लैटिन अमेरिकी देशों को पहले ही वीजा सुविधा प्रदान कर चुका है। हमने आज राजनयिक और आधिकारिक पासपोर्ट धारकों के लिए वीज़ा की छूट सहित छह समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।।
  • निश्चित रूप से लोगों के आपसी संपर्क, हमारे द्विपक्षीय व्यापार और पर्यटन बढ़ाने पर इसका सकारात्मक प्रभाव होगा। हमारी बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं के महत्व को देखते हुए, अधिक और बेहतर करने की बहुत संभावनाएं हैं।
  • मुझे यह घोषणा करने में अत्यंत हर्ष हो रहा है कि पनामा के आर्थिक विकास में सुनिश्चित योगदान करने की भारत प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते हुए, भारत ने पनामा में दो केंद्रों की स्थापना के लिए क्रमशः 100 लाख अमेरिकी डॉलर और 150 लाख अमेरिकी डॉलर की ऋण श्रृंखलाएं विस्तारित की हैं, इनमें से एक केंद्र जैव विविधता और औषध अनुसंधान के लिए और दूसरा नवाचार और प्रौद्योगिकी के लिए स्थापित किया जाएगा।
  • हमारे लोकतंत्रों के उच्च मूल्यों को ध्यान में रखते हुए, भारत को यह घोषणा करने में भी प्रसन्नता है कि भारत और पनामा के सांसद पूरे लैटिन अमेरिकी क्षेत्र में फैले संसदीय मैत्री समूह के अंतर्गत परस्पर बातचीत करेंगे।
  • तकनीकी सहयोग के हमारे प्रमुख कार्यक्रमों में, भारतीय तकनीकी आर्थिक सहयोग कार्यक्रम (आईटीईसी) के अंतर्गत विभिन्न विषयों में पहले से दिए जाने वाले प्रशिक्षणों के अलावा, पनामा वासियों को अंग्रेजी भाषा में प्रशिक्षण देने में भारत को खुशी होगी।
  • प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए, हम कर संबंधी सूचना, आर्थिक सहयोग, समुद्री सहयोग, वायु सेवा, पारंपरिक दवाओं, संस्कृति और अंतरिक्ष के क्षेत्रों में आदान-प्रदान सहयोग को मजबूत करने के लिए जारी चर्चाओं में तेजी लाने के लिए सहमत हुए हैं। कृषि अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत के कृषि मंत्रालय और पनामा के कृषि विकास मंत्रालय के बीच मौजूदा समझौता ज्ञापन को लागू करने की एक कार्य योजना पर भी हस्ताक्षर किए गए हैं।
  • मुझे खुशी है कि पनामा ने भारतीय अंतरिक्ष और अनुसंधान संगठन (इसरो) के भूगर्भीय संचार और मौसम संबंधी उपग्रहों के संचालन का समर्थन करने के लिए पनामा में एक टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और टेली कमांड (टीटीसी) भू-स्टेशन स्थापित करने के भारत के प्रस्ताव का स्वागत किया है, यह पनामा के विशेषज्ञों द्वारा कृषि, मौसम विज्ञान, आपदा प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन इत्यादि के क्षेत्र में अनुसंधान और विश्लेषण का मार्गदर्शन कर सकता है।
  • मैं अपने साथ इस देश की अच्छी यादें ले जा रहा हूँ और साथ ही अपने विचार-विमर्श के परिणामों को भी देख रहा हूँ। इसमें कोई संदेह नहीं है कि हमारे संबंध नई ऊंचाइयों और उच्च लक्ष्यों पर पहुँचेंगे।
  • मैं अपने और अपने प्रतिनिधिमंडल के उदार आतिथ्य के लिए एक बार फिर से पनामा गणराज्य के राष्ट्रपति और उनकी टीम का धन्यवाद करता हूँ।
सर्व जनाः सुखिनो भवंतु।
मुचास बेंडिसियोनस इ प्रास्पेरिडेड अल पाइस।


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