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उपराष्ट्रपति की पनामा यात्रा पर सचिव (पूर्व) की मीडिया वार्ता की प्रतिलिपि

मई 11, 2018

वक्ता1: सभी को नमस्कार। माननीय उपराष्ट्रपति की पनामा यात्रा पर इस मीडिया वार्ता में आपका स्वागत है। आज पनामा के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनकी बैठकों का विवरण देने के लिए, हमारे साथ सचिव (पूर्व) श्रीमती प्रीति सरन और हमारे संयुक्त सचिव (एलएसी) श्री पार्थ सत्पथी मौजूद हैं।

मैं सचिव (पूर्व) से उद्घाटन टिप्पणी शुरू करने का अनुरोध करूंगा और उसके बाद हम प्रश्नोत्तर सत्र आरंभ करेंगे।

सचिव (पूर्व), श्रीमती प्रीति सरन: नमस्कार मित्रों। आप सभी पनामा नहर से आए हैं और मुझे यकीन है कि आप सभी उस इंजीनियरिंग तकनीक से बहुत प्रभावित हैं, जिसे आपने देखा है। इस प्रेस वार्ता में शामिल होने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, यह माननीय उपराष्ट्रपति की मध्य और दक्षिण अमेरिका के तीन देशों की यात्रा का दूसरा चरण है।

पनामा भारत के लिए एक महत्वपूर्ण देश है और तथ्य यह है कि यह उन देशों के समूह का हिस्सा है, जहाँ हमारे उपराष्ट्रपति अपनी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा पर जा रहे हैं, यह दर्शाता है कि भारत इस क्षेत्र और विशेष रूप से पनामा के साथ अपने संबंधों को कितना महत्व देता है।

पनामा, जैसा कि आप जानते हैं, बेहद रणनीतिक केंद्र में स्थित है, जो उत्तरी अमेरिका को दक्षिण अमेरिका से जोड़ता है। यह पनामा नहर के द्वारा अटलांटिक महासागर को प्रशांत महासागर से जोड़ता है। यह बैंकिंग और वित्तपोषण, लॉजिस्टिक और शिपिंग का एक प्रमुख केंद्र है। इस तरह यह आर्थिक और रणनीतिक रूप से भी एक बहुत ही महत्वपूर्ण देश है।

यह सदस्यता के मामले में कैरेबियन, मध्य, दक्षिण अमेरिकी क्षेत्र, सीआईसीए, सीईएलएसी, कैरिकॉम आदि के सदस्यों को जोड़ने का भी केंद्र है। इसलिए भारत के लिए भी यह महत्वपूर्ण है। हम निश्चित रूप से इस क्षेत्र के सभी देशों में मौजूद हैं, पर हमारे सबसे पुराने संबंध पनामा के साथ हैं।100 साल पहले, पनामा नहर और पनामा की रेलवे बनने के समय, भारतीय, कार्य बल के रूप में पनामा पहुँचे थे और पनामा में रेलवे के निर्माण के साथ-साथ पनामा नहर के निर्माण में हिस्सा लिया। तो हमारे रिश्ते 100 साल से अधिक पुराने हैं।

आज सुबह पनामा के माननीय राष्ट्रपति के साथ एक सामान्य बातचीत से आरंभ हुई, जिसके बाद प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता हुई और हमारे उप राष्ट्रपति और उनके प्रतिनिधिमंडल के सम्मान में एक भोज का आयोजन किया गया तथा उन्हें पनामा नहर की यात्रा पर ले जाया गया।

पनामा सरकार ने इस वार्ता को एक अभूतपूर्व संकेत से उन्नत किया, जिसका नेतृत्व खुद राष्ट्रपति ने किया था और उन्होंने सुबह 10:00 बजे की सामान्य बातचीत से दोपहर के 3.00 बजे तक का समय हमारे उपराष्ट्रपति के साथ बिताया। वास्तव में उन्होंने औपचारिकताओं की उपेक्षा करते हुए प्रवेश द्वार पर उनका स्वागत किया, जो निर्धारित नहीं था, उन्हें राष्ट्रपति के निजी क्षेत्रों सहित, राष्ट्रपति भवन के कुछ हिस्से दिखाने के लिए अपने साथ ले गए।

इसके बाद वे पनामा के उपराष्ट्रपति के साथ, जो विदेश मंत्री भी हैं, हमारे माननीय उपराष्ट्रपति और उनके प्रतिनिधिमंडल को पनामा नहर दिखाने ले गए। ये वास्तव में विशेष संकेत थे, अभूतपूर्व संकेत, जिनकी माननीय उपराष्ट्रपति ने सराहना की। उपराष्ट्रपति और उनके प्रतिनिधिमंडल का बहुत ही उत्साह से स्वागत किया गया और इन विशेष व्यवहारों ने नेतृत्व में हार्दिकता उत्पन्न की है।

चर्चा की दूसरी अनूठी विशेषता यह थी कि पनामा के राष्ट्रपति के मंत्रीमंडल के सबसे वरिष्ठ सदस्य इस वार्ता में उपस्थित थे और उनके अलावा उपराष्ट्रपति और विदेश मंत्री, लोक सुरक्षा मंत्री, वाणिज्य मंत्री, नवाचार मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, पर्यावरण मंत्री आदि इस वार्ता में शामिल थे। उनकी उपस्थिति ही दर्शाती है कि किस तरह की चर्चा हुई।

चर्चाएं बेहद केंद्रित, बहुत गहन और बहुत सद्भावना और समानता के साथ हुईं। भारत और पनामा दो बहुवादी, विविधता युक्त लोकतंत्र हैं, हम पनामा वासियों की तरह शांतिवादी और शांतिप्रिय लोग हैं, दोनों पक्षों के विचार-विमर्श में नेताओं द्वारा इसका उल्लेख किया गया था।जहां तक चर्चाओं का संबंध है, पनामा की तरफ से पनामा के राष्ट्रपति ने बताया कि उन्होंने फाल्कन नीति के नाम से परिचित अपनी नई विदेश नीति में, भारत को एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में चिह्नित किया है, जिसके साथ वे व्यवसाय करना चाहते हैं।

उन्होंने उल्लेख किया कि परंपरागत रूप से हमारे कोरिया. यूरोप, अमेरिका के साथ बहुत मजबूत आर्थिक और व्यावसायिक संबंध हैं, लेकिन अब वे इसमें विविधता लाना चाहते हैं। फाल्कन नीति की घोषणा पनामा के राष्ट्रपति की दुबई यात्रा के दौरान की गई थी, जहां उन्होंने पहली बार दुबई के विकास में बीस लाख भारतीय प्रवासियों के योगदान को देखा था और इससे प्रभावित हुए थे। उन्होंने एक बार फिर से पनामा के आगे विकास और प्रगति में भारतीय पेशेवरों की भागीदारी आमंत्रित करने की अपनी इच्छा दोहराई।

इस दिशा में पनामा के राष्ट्रपति ने हमारे उपराष्ट्रपति को सूचित किया कि उन्होंने नए कानून बनाए हैं जो उनके कोलन मुक्त क्षेत्र में अधिक निवेश को प्रोत्साहित करेंगे और वे पनामा में अधिक भारतीय व्यापार और पर्यटन भागीदारी की अनुमति देने के लिए अपनी वीज़ा नीतियों को भी आसान बनाएंगे।

वे अत्यंत महत्वपूर्ण तत्व थे और वास्तव में उस संदर्भ में पनामा के राष्ट्रपति को पता था कि हमारे राजदूत पनामा में रहने और योगदान करने वाले मजबूत भारतीय प्रवासियों के लिए एक स्वागत समारोह आयोजित कर रहे है। उन्होंने कहा कि वे शांतिप्रिय और कानून का पालन करने वाले लोग हैं। ये कुछ नए तत्व हैं जिन्हें भारतीय उपस्थिति के संबंध में राष्ट्रपति द्वारा दोहराया गया था और भारतीय भागीदारी को आमंत्रित किया गया था।

आर्थिक पक्ष पर, पनामा के राष्ट्रपति ने कहा कि हम फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल क्षेत्र, वस्त्र, शीत भंडारण गोदामों सहित कृषि में आईटी और आईटीईएस में अधिक भारतीय निवेश आकर्षित करने में रुचि रखते हैं। उन्होंने कहा कि फार्मास्युटिकल्स एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें वे अपने कोलन मुक्त क्षेत्र में वास्तव में एक बार फिर से बड़ी भारतीय भागीदारी बनाने में रुचि रखते हैं। अन्य क्षेत्रों में जैव प्रौद्योगिकी, नवाचार अंतरिक्ष सहयोग आदि शामिल हैं।

अकादमिक और शिक्षा के क्षेत्र में अधिक सहयोग की संभावना पर भी चर्चा हुई। पनामा और भारत दोनों में युवा आबादी है, पनामा के राष्ट्रपति ने उल्लेख किया कि अगले वर्ष जनवरी में पनामा में विश्व युवा दिवस आयोजित होगा और वे भारत की इतनी बड़ी युवा आबादी का सहयोग और भारतीय युवाओं की अधिक भागीदारी चाहते हैं।

उन्होंने दोनों देशों के मजबूत लोकतंत्रों के बारे में माननीय उपराष्ट्रपति से भी विचार व्यक्त करने को कहा। हमारे माननीय उपराष्ट्रपति ने भारत की वर्तमान विकास दर के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने हाल के वर्षों में भारत सरकार द्वारा विशेष रूप से उदारीकरण अर्थव्यवस्थाओं के डिजिटलीकरण, वित्तीय समावेशन, स्मार्ट शहरों, स्वच्छ भारत पहलों और भारत में अन्य क्षेत्रों में किए गए सकारात्मक विकास का विवरण दिया।

द्विपक्षीय से परे सहयोग करने के लिए, दक्षिण-दक्षिण सहयोग और संयुक्त राष्ट्र में भारत द्वारा निभाई गई भूमिका की काफी सराहना की गई, जिसमें दोनों पक्षों ने आतंकवाद के संकट से निपटने के लिए मिलकर काम करने के महत्व को दोहराया।

पनामा ने भी खुफिया जानकारी के साझाकरण में अधिक सहयोग की इच्छा व्यक्त की और संकेत दिया कि हम मानव तस्करी के मुद्दों में अधिक सहयोग की दिशा में मिलकर काम कर सकते हैं और आपराधिक मामलों पर पारस्परिक कानूनी सहायता संधि में भी साथ काम कर सकते हैं। चर्चा के दौरान हमने सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर और चर्चा करने के लिए पनामा से एक टीम को आमंत्रित किया था।

चर्चा के अंत में आधिकारिक और राजनयिक पासपोर्ट के लिए वीज़ा छूट पर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। कृषि में सहयोग पर एक कार्य योजना पर भी हस्ताक्षर किए गए थे और पूरे लैटिन अमेरिकी क्षेत्र के लिए भारतीय पक्ष से संसदीय मित्रता समूह स्थापित करने के संबंध में एक समझौता हुआ, जिसमें निश्चित रूप से पनामा भी शामिल है।

माननीय उपराष्ट्रपति द्वारा भारत सरकार की तरफ से दो ऋण श्रृंखलाओं की घोषणा की गई। जिनमें से एक जैव-प्रौद्योगिकी में 100 लाख अमेरिकी डॉलर की और दूसरी नवाचार क्षेत्र में 150 लाख अमेरिकी डॉलर की ऋण श्रृंखला है।

हम पनामा सरकार से ठोस प्रस्तावों का इंतजार करेंगे, लेकिन उन्होंने इस विशेष प्रस्ताव के लिए गहरी प्रशंसा व्यक्त की। अंतरिक्ष एक अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्र है और मैंने पहले भी इसका उल्लेख किया है। कई अन्य क्षेत्रों में भी चर्चाएं चल रही हैं और योग के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के दौरान योग की प्राचीन कला के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और पनामा में भी लोकप्रिय होने और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन पर चर्चा हुई।

उपराष्ट्रपति ने इस साल की शुरुआत में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन पर पहले संस्थापक सम्मेलन का ब्यौरा दिया और पनामा को इसका हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया। हमने संयुक्त राष्ट्र में प्रदान किए गए समर्थन और हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के लिए भारत की उम्मीदवारी के पनामा द्वारा समर्थन के लिए एक-दूसरे का शुक्रिया अदा किया। हमने अपने संबंधित उम्मीदवारों की सुरक्षा परिषद में गैर-स्थायी सीटों के लिए पारस्परिक समर्थन के बारे में भी बात की। भारत के लिए यह 21-22 और पनामा के लिए 25-26 है।

मैं अपनी बात यहां समाप्त करूँगी और बाकी के जो विवरण हम अपनी वेबसाइट पर अपलोड करेंगे, उसके बारे में इस चर्चा के तुरंत बाद आपको कुछ जानकारी दूंगी, यह एक प्रेस बयान होगा जो वार्ता के तुरंत बाद माननीय उपराष्ट्रपति ने दिया था। और एक दूसरी प्रेस विज्ञप्ति भी है, आप इन दोनों को विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर देख सकते हैं, जिनमें वास्तविक चर्चाओं के बारे में अधिक जानकारी होगी।

चर्चाएं दो घंटे से अधिक समय तक चलीं, 10:00 से 12:00 तक, जो एक ध्यान देने योग्य बात है। पनामा के राष्ट्रपति ने लगभग पूरा दिन हमारे उपराष्ट्रपति के साथ बिताया, यह विशेष संकेत विशेष रूप से उल्लेखनीय था। धन्यवाद। मैं अब समाप्त करती हूँ और अब आप प्रश्न कर सकते हैं।

प्रश्न: पनामा के राष्ट्रपति के विशेष व्यवहार को आप किस तरह से देखतीं हैं, उन्होंने प्रोटोकॉल क्यों तोड़ा?

सचिव (पूर्व), श्रीमती प्रीति सरन: मुझे लगता है कि सबसे महत्वपूर्ण कारण भारत है। हम पनामा के साथ अपने संबंधों को महत्व देते हैं और इस विशेष व्यवहार से उन्होंने स्पष्ट रूप से दर्शाया है कि पनामा के राष्ट्रपति और पनामा सरकार अधिक सहयोग के लिए भारत तक पहुंचना चाहते हैं। इस तरह की उच्च स्तरीय यात्रा काफी लंबे अंतराल के बाद हो रही है और उत्साह के साथ इसका स्वागत किया गया।

यह भारत और पनामा के बीच के संबंधों और भारत के साथ द्विपक्षीय, राजनीतिक, रणनीतिक, आर्थिक रूप से जुड़ाव और पनामा में अधिक भारतीय निवेश और व्यापार के साथ जुड़ने की संभावना और इच्छा के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना था। तो वास्तव में यह भारत के साथ जुड़ने की इच्छा थी।

प्रश्न: दो समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए, एक कृषि पर है। तो क्या आप कृषि से संबंधित समझौता ज्ञापनों पर कुछ प्रकाश डाल सकते हैं?

सचिव (पूर्व), श्रीमती प्रीति सरन: यह एक कार्य योजना है, जो भारत के कृषि अनुसंधान विभाग और पनामा की समकक्ष एजेंसी के बीच अधिक सहयोग के बारे में है। पनामा कृषि और विशेष रूप से फलों आदि का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। हमारे देश में और साथ ही पनामा में बहुत सारे शोध होते रहते हैं, मुझे लगता है कि इस क्षेत्र में सहयोग हो सकता है।

दूसरा, जैसा कि मैंने उल्लेख किया है, शीत भंडारण में पनामा के पास पर्याप्त अनुभव है।

हमने हम एक दूसरे से सीखने, हम एक-दूसरे की सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के बारे में चर्चा की। आप पनामा सिटी में उपलब्ध अद्भुत बुनियादी ढांचा देख चुके होंगे। पनामा में बंदरगाह का मजबूत बुनियादी ढांचा है। यह वायु संपर्क का एक उत्कृष्ट केंद्र है। यह उत्तरी अमेरिका और दक्षिण अमेरिका के साथ यूरोप के कई शहरों से भी बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। यह एक प्रमुख नागरिक विमानन केंद्र है।

दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के निर्माण में भारत और भारतीय कंपनियों की बड़ी उपस्थिति है, चाहे वह तुर्की है, चाहे वह मलेशिया हो या कहीं और। इसलिए भारतीय इंजीनियरिंग कंपनियों के लिए संभावनाएं है, भारतीय बुनियादी ढांचा कंपनियां पनामा में बंदरगाह, हवाई अड्डे और अन्य बुनियादी ढांचों को विकसित करने में मदद करती हैं।

प्रश्न: पनामा वैश्विक आतंकवाद को रोकने में कैसे सहायता करेगा और क्या आप दोनों देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने के लिए कोई संधि करने रहे हैं?

सचिव (पूर्व), श्रीमती प्रीति सरन: आज इस पर चर्चा की गई है, हम अपने अधिकारियों से खुफिया जानकारी के साझाकरण पर अधिक चर्चा करेंगे, यह भी एक पहलू है।

जहां तक आतंकवाद का सवाल है, आप जानते हैं कि आतंकवाद कोई सीमा नहीं मानता। इसमें कोई संदेह नहीं कि भारत जिस तरह से आतंकवाद का शिकार है, उस तरह कोई अन्य देश नहीं है, लेकिन इसे स्वीकार किया गया है और पनामा तथा उसके नेतृत्व ने भी माना है कि हमें इस खतरे और संकट से निपटने और उसका उन्मूलन करने के लिए सामूहिक रूप से काम करने की जरूरत है, इसके खिलाफ एक अंतरराष्ट्रीय आवाज होनी चाहिए, जो आतंकवाद की सहायता करते हैं, जो आतंकवादियों को वित्त पोषित और प्रशिक्षित करते हैं, या अन्यथा उनका समर्थन करते हैं उनके विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र और अन्य मंचों पर एक सामूहिक आवाज होनी चाहिए। आतंकवादियों और उनके समर्थकों की निंदा की जानी चाहिए।

वक्ता 1: इसके साथ ही हम इस मीडिया वार्ता का समापन करते हैं। इसमें शामिल होने के लिए सभी को धन्यवाद।

(समापन)



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